
स्थावर सम्पत्ति का पट्टा ऐसी सम्पत्ति का उपभोग करने के अधिकार का ऐसा अन्तरण है, जो एक अभिव्यक्त या विवक्षित समय के लिए या शाश्वत काल के लिए, किसी कीमत के, जो दी गई हो या जिसे देने का वचन दिया गया हो, अथवा धन या फसलों के अंश या सेवा या किसी अन्य मूल्यवान वस्तु के जो कालावधीय रूप से या विनिर्दिष्ट अवसरों पर अन्तरिती द्वारा, जो उस अन्तरण को ऐसे निबन्धनों पर प्रतिगृहीत करता है, अन्तरण को की या दी जानी है, प्रतिफल के रूप में किया गया हो।
वह अन्तरक पट्टाकर्त्ता कहलाता है, वह अन्तरिती पट्टेदार कहलाता है, वह कीमत प्रीमियम कहलाती है और इस प्रकार देय या करणीय धन, अंश सेवा या अन्य वस्तु भाटक कहलाती है।
(1) तत्प्रतिकूल संविदा या स्थानीय विधि या प्रथा न हो तो कृषि या विनिर्माण के प्रयोजनों के लिए स्थावर सम्पत्ति का पट्टा ऐसा वर्षानुवर्षी पट्टा समझा जाएगा जो या तो पट्टाकर्त्ता या पट्टेदार द्वारा छ: मास की सूचना द्वारा पर्यवसेय है, और किसी अन्य प्रयोजन के लिए स्थावर सम्पत्ति का पट्टा मासानुमासी पट्टा समझा जाएगा, जो या तो पट्टाकर्त्ता या पट्टेदार द्वारा पन्द्रह दिन की सूचना द्वारा पर्यवसेय है।
(2) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) में वर्णित कालावधि सूचना की प्राप्ति की तारीख से प्रारम्भ होगी।
(3) जहाँ कोई वाद या कार्यवाही उपधारा (1) में वर्णित कालावधि के अवसान के पश्चात् फाइल की गई है, वहां उस उपधारा के अधीन कोई सूचना केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं समझी जाएगी कि उसमें वर्णित कालावधि उक्त उपधारा में विनिर्दिष्ट कालावधि से कम है।
(4) उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक सूचना लेखबद्ध और उसे देने वाले व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से हस्ताक्षरित होगी और उस पक्षकार को जिसे उसके द्वारा आबद्ध करना आशयित है या तो डाक द्वारा भेजी जाएगी या स्वयं उस पक्षकार को या
उसके कुटुम्बियों या नौकरों में से किसी एक को, उसके निवास पर निविदत्त या परिदत्त की जाएगी, या (यदि ऐसी निविदा या परिदान साध्य नहीं है तो) सम्पत्ति के किसी सहजदृश्य भाग पर लगा दी जाएगी।
स्थावर सम्पत्ति का वर्षानुवर्षी या एक वर्ष से अधिक किसी अवधि का या वार्षिक भाटक आरक्षित करने वाला पट्टा केवल रजिस्ट्रीकृत लिखत द्वारा किया जा सकेगा।
स्थावर सम्पत्ति के अन्य सब पट्टे या तो रजिस्ट्रीकृत लिखत द्वारा या कब्जे के परिदान सहित मौखिक करार द्वारा किए जा सकेंगे।
जहाँ कि स्थावर सम्पत्ति का पट्टा रजिस्ट्रीक्त लिखत द्वारा किया गया है, वहाँ ऐसी लिखत या जहाँ कि एक लिखत से अधिक लिखत हैं, वहाँ हर एक ऐसी लिखत पट्टाकर्ता और पट्टेदार दोनों को निष्पादित की जाएगी:
परन्तु राज्य सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट कर सकेगी कि वर्षानुवर्षी या एक वर्ष से अधिक अवधि के या वार्षिक भाटक आरक्षित करने वाले पट्टों को छोड़कर स्थावर सम्पत्ति के पट्टे या ऐसे पट्टों का कोई वर्ग अरजिस्ट्रीकृत लिखत द्वारा या कब्जे 10 के परिदान बिना मौखिक करार द्वारा किया जा सकेगा।
तत्प्रतिकूल संविदा या स्थानीय प्रथा न हो तो स्थावर सम्पत्ति का पट्टाकर्त्ता और पट्टेदार एक-दूसरे के विरुद्ध क्रमशः वे अधिकार रखते हैं और उन दायित्वों के अध्यधीन होते हैं जो निम्नलिखित नियमों में या उनमें से ऐसों में जो उस पट्टाकृत सम्पत्ति को लागू हों, वर्णित हैं-
(क) सम्पत्ति के आशयित उपयोग के बारे की सम्पत्ति में की किसी तात्विक त्रुटि को जिसे पट्टाकर्ता जानता है और पट्टेदार नहीं जानता और मामूली सावधानी बरत कर भी मालूम नहीं कर सकता, पट्टेदार को प्रकट करने के लिए पट्टाकर्ता आबद्ध है;
(ख) पट्टाकर्ता पट्टेदार की प्रार्थना पर उसे सम्पत्ति पर कब्जा देने के लिए आबद्ध है,
(ग) यह समझा जाएगा कि पट्टेदार से पट्टाकर्त्ता यह संविदा करता है कि यदि पट्टादार पट्टे में आरक्षित भाटक देता रहे और पट्टेदार पर आबद्धकर संविदाओं का पालन करता रहे, तो उस पट्टे द्वारा परिसीमित समय के दौरान वह सम्पत्ति को निर्विघ्न धारण कर सकेगा। ऐसी संविदा का फायदा पट्टेदार के उस हित से उपाबद्ध होगा और उसी के साथ जाएगा, जो उसका पट्टेदार के नाते हो और ऐसे हर व्यक्ति द्वारा प्रवर्तित कराया जा सकेगा जिसमें वह पूर्ण हित या उसका कोई भाग समय-समय पर निहित हो।
(घ) यदि पट्टे के चालू रहने के दौरान सम्पत्ति में कोई अनुवृद्धि होती है तो ऐसी अनुवृद्धि (जलोढ़ सम्बन्धी तत्समय प्रवृत्त विधि के अध्यधीन) पट्टे में समाविष्ट समझी जाएगी;
(ङ) यदि अग्नि, तूफान या बाढ़ से अथवा किसी सेना या भीड़ द्वारा की गयी हिंसा से अथवा अन्य अप्रतिरोध्य बल से सम्पत्ति का कोई तात्विक भाग पूर्णतः नष्ट हो जाए या उन प्रयोजनों के लिए, जिसके लिए वह पट्टे पर दी गयी थी, सारवान् रूप में और स्थायी तौर पर अयोग्य हो जाए तो पट्टा, पट्टेदार के विकल्प पर शून्य होगा:
परन्तु यदि क्षति पट्टेदार के सदोष कार्य या व्यतिक्रम के कारण हो तो वह इस उपबन्ध का फायदा उठाने का हकदार नहीं होगा;
(च) यदि पट्टाकर्ता सूचना के पश्चात् युक्तियुक्त समय के अन्दर सम्पत्ति की ऐसी मरम्मत करना अपेक्षित करे, जिसे करने के लिए वह आबद्ध है, तो पट्टेदार स्वयं उसे करा सकेगा और ऐसी मरम्मत का व्यय भाटक में से व्याज सहित काट सकेगा या पट्टाकर्त्ता से अन्यथा वसूल कर सकेगा;
(छ) यदि पट्टाकर्ता ऐसा संदाय करने में उपेक्षा करे, जिसे करने के लिए वह आबद्ध है, और जो यदि उस द्वारा न किया जाए तो पट्टेदार से या उस सम्पत्ति से वसूलीय है, तो पट्टेदार ऐसा संदाय स्वयं कर सकेगा और उसे उस भाटक में से ब्याज सहित काट सकेगा या पट्टाकर्त्ता से अन्यथा वसूल कर सकेगा;
(ज) पट्टेदार पट्टे का पर्यवसान किए जाने के पश्चात् भी किसी भी समय, जब तक पट्टे की सम्पत्ति पर उसका कब्जा है किन्तु तत्पश्चात् नहीं, उन सब वस्तुओं को जो उसमें भूबद्ध की है, हटा सकेगा, परन्तु यह तब जब कि वह सम्पत्ति को उसी अवस्था में छोड़ देता है जिसने उसमें उसे प्राप्त किया था;
(झ) जब कि अनिश्चित कालावधि का पट्टा पट्टेदार के व्यतिक्रम के सिवाय किसी अन्य कारण द्वारा पर्यवसित कर दिया जाता है तब वह या उसका विधिक प्रतिनिधि पट्टेदार द्वारा रोपित या बोई गयी और उस सम्पत्ति पर उस समय जब पट्टे का पर्यवसान किया जाता है, उगी हुई कुछ फसलों का और उन्हें एकत्रित करने और ले जाने के लिए अवाध रूप से आने-जाने का हकदार होगा;
(ञ) पट्टेदार सम्पत्ति में के अपने पूर्ण हित को या उसके भाग को आत्यन्तिक रूप से अथवा बन्धक या उप-पट्टे द्वारा अन्तरित कर सकेगा, और ऐसे हित या भाग का अन्तरिती उसे पुनः अन्तरित कर सकेगा। पट्टेदार का पट्टे से संलग्न दायित्वों से किसी के अध्यधीन रहना केवल ऐसे अन्तरण के कारण परिविरत न हो जाएगा, इस खण्ड की कोई भी बात अधिभोग का अनन्तरणीय अधिकार रखने वाले किसी अभिधारी को उस सम्पदा के फार्मर को जिस सम्पदा के लिए राजस्व देने में व्यतिक्रम हुआ है, या किसी प्रतिपाल्य अधिकरण के प्रवन्ध के अधीन सम्पदा के पट्टेदार को ऐसे अभिधारी, फार्मर या पट्टेदार के नाते अपने हित का समनुदेशन करने के लिए प्राधिकृत करने वाली नहीं समझी जाएगी;
(ट) पट्टेदार उस हित की जिसे पट्टेदार लेने वाला है, प्रकृति या विस्तार के बारे में ऐसा तथ्य, जिसे पट्टेदार जानता है और पट्टाकर्ता नहीं जानता और जिससे ऐसे हित के मूल्य में तात्विक वृद्धि होती है, पट्टाकर्त्ता को प्रकट करने के लिए आबद्ध है;
(ठ) पट्टेदार उचित समय और स्थान पर पट्टाकर्ता या उसके तन्निमित्त अभिकर्ता को प्रीमियम या भाटक देने या निविदत्त करने के लिए आबद्ध है;
(ड) पट्टेदार सम्पत्ति में युक्तियुक्त घिसाई या अप्रतिरोध्य बल द्वारा हुए परिवर्तनों के सिवाय सम्पत्ति को वैसी ही अच्छी हालत में, जैसी में वह उस समय थी जब उस पर उसका कब्जा कराया गया था, रखने के लिए और पट्टे के पर्यवसान पर प्रत्यावर्तन करने के लिए और पट्टाकर्ता और उसके अभिकर्ताओं को पट्टे की अवधि के दौरान सब युक्तियुक्त समयों पर सम्पत्ति में प्रवेश करने और उसकी हालत का निरीक्षण करने देने और उसकी हालत में किसी खराबी की सूचना देने या सूचना वहाँ छोड़ने की अनुज्ञा देने के लिए आबद्ध है, तथा जबकि ऐसी खराबी पट्टेदार या उसके सेवकों या अभिकर्ताओं के किसी कार्य या व्यतिक्रम द्वारा हुई हो, तब वह ऐसी सूचना के दिए जाने या छोड़े जाने से तीन मास के अन्दर उसे ठीक करने के लिए आबद्ध है;
(ढ) यदि सम्पत्ति या उसके किसी भाग के प्रत्युद्धरण के लिए कोई कार्यवाही की या ऐसी सम्पत्ति से सयुक्त पट्टाकर्त्ता के अधिकारों पर किसी अधिक्रमण की या उनमें किसी हस्तक्षेप की जानकारी पट्टेदार को हो जाए, तो वह पट्टाकर्ता को उसकी सूचना युक्तियुक्त तत्परता से देने के लिए आबद्ध है,
(ण) पट्टेदार सम्पत्ति का और उसकी पैदा वार का (यदि कोई हो) ऐसे उपयोग कर सकेगा जैसे मामूली प्रज्ञावाला व्यक्ति करता, यदि वह उसकी अपनी होती किन्तु सम्पत्ति का उस प्रयोजन से भिन्न, जिसके लिए वह पट्टे पर दी गयी थी, उपयोग न तो स्वयं करेगा, न किसी अन्य को करने देगा, न काष्ठ काटेगा, न बेचेगा, न पट्टाकर्ता निर्माणों को गिराएगा, न नुकसान पहुंचाएगा, न ऐसी खानों या खदानों को खुदवाएगा जो पट्टा देने के समय खुली नहीं थीं, न कोई ऐसा अन्य कार्य करेगा जो उस सम्पत्ति के लिए नाशक हो या स्थायी रूप से क्षतिकर हो;
(त) वह पट्टाकर्ता की सम्मति के बिना उस सम्पत्ति पर कोई स्थायी संरचना कृषि प्रयोजनों से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए खड़ी न करेगा,
(थ) पट्टे के पर्यवसान पर पट्टेदार पट्टाकर्ता को सम्पत्ति पर कब्जा देने के लिए आबद्ध है।
यदि पट्टाकर्त्ता पट्टे पर दी हुई सम्पत्ति को या उसके किसी भाग को या उसमें के अपने हित के किसी भाग को अन्तरित कर देता है तो अन्तरिती तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में उस अन्तरित सम्पत्ति या भाग के बारे में पट्टाकर्ता के वे सब अधिकार तब तक रखेगा और यदि पट्टेदार ऐसा निर्वाचन करे तो पट्टाकर्ता के सब दायित्वों के अध्यधीन तब तक रहेगा, जब तक वह उसका स्वामी रहता है, किन्तु पट्टाकर्ता का पट्टे द्वारा अपने पर अधिरोपित दायित्वों में से किसी के अध्यधीन रहना केवल ऐसे अन्तरण के कारण ही परिविरत न हो जाएगा जब तक कि पट्टेदार अन्तरिती को अपने प्रति दायी व्यक्ति मानने का निर्वाचन न कर ले:
परन्तु अन्तरिती अन्तरण से पहले के भाटक के शोध्य बकायों का हकदार नहीं है, और यदि पट्टेदार यह विश्वास करने का कारण न रखते हुए कि ऐसा अन्तरण किया गया है, पट्टाकर्ता को भाटक दे देता है, तो पट्टेदार अन्तरिती को ऐसा भाटक पुनः देने का दायी न होगा।
पट्टाकर्ता अन्तरिती और पट्टेदार यह अवधारित कर सकेंगे कि पट्टे द्वारा आरक्षित प्रीमियम या भाटक का कौन-सा अनुपात इस प्रकार अन्तरित भाटक के लिए देय है और उनमें असहमति होने की दशा में ऐसा अवधारण ऐसे किसी भी न्यायालय द्वारा किया जा सकेगा जो पट्टे पर दी गई सम्पत्ति के कब्जे के लिए वाद को ग्रहण करने की अधिकारिता रखता हो।
जहाँ कि किसी स्थावर सम्पत्ति के पट्टे द्वारा परिसीमित समय का किसी विशिष्ट दिन से प्रारम्भ होना अभिव्यक्त है, वहाँ उस समय की संगणना करने में वह दिन अपवर्जित कर दिया जाएगा जहाँ कि प्रारम्भ होने के लिए कोई दिन नामित न हो, वहाँ इस प्रकार परिसीमित समय पट्टा करने के दिन से प्रारम्भ होता है।
वर्ष के पट्टे की कालावधि- जहाँ कि इस प्रकार परिसीमित समय एक वर्ष या कई वर्षों का है, वहाँ तत्प्रतिकूल अभिव्यक्त करार न हो तो पट्टा उस दिन की आब्दिकी के पूरे दिन चालू रहेगा जिस दिन से ऐसा समय प्रारम्भ होता है।
पट्टे का पर्यवसान करने के लिए विकल्प - जहाँ कि यह अभिव्यक्त है कि इस प्रकार परिसीमित समय अपने अवसान से पूर्व पर्यवसेय है और पट्टे में इसका वर्णन नहीं है कि किसके विकल्प पर वह इस प्रकार पर्यवसेय है, वहाँ ऐसा विकल्प पट्टेदार को प्राप्त होगा, पट्टाकर्ता को नहीं।
स्थावर सम्पत्ति के पट्टे का पर्यवसान हो जाता है-
(क) तद्द्वारा परिसीमित समय के बीत जाने से;
(ख) जहाँ कि ऐसा समय किसी घटना के घटित होने की शर्त पर परिसीमित है, वहाँ ऐसी घटना के घटित होने से;
(ग) जहाँ कि उस सम्पत्ति में पट्टाकर्ता के हित का पर्यवसान किसी घटना के घटित होने पर होता है या उसका व्ययन करने की उसकी शक्ति का विस्तार किसी घटना के घटित होने तक ही है वहाँ ऐसी घटना के घटित होने से;
(घ) उस दशा में, जब कि उस सम्पूर्ण सम्पत्ति में पट्टेदार और पट्टाकर्ता के हित एक ही व्यक्ति में, एक ही समय एक ही अधिकार के नाते निहित हो जाते हैं;
(ङ) अभिव्यक्त अभ्यर्पण द्वारा अर्थात् उस दशा में जब कि पट्टेदार पट्टे के अधीन अपना हित पारस्परिक करार द्वारा पट्टाकर्ता के प्रति छोड़ देता है;
(च) विवक्षित अभ्यर्पण द्वारा;
(छ) समपहरण द्वारा; अर्थात् (1) उस दशा में जब कि पट्टेदार किसी ऐसी अभिव्यक्त शर्त को भंग करता है, जिससे यह उपबन्धित है कि उसका भंग होने पर पट्यकर्ता पुनः प्रवेश कर सकेगा; या (2) उस दशा में, जब कि पट्टेदार किसी अन्य व्यक्ति का हक खड़ा करके या यह दावा करके कि वह स्वयं हकदार है अपनी पट्टेदारी हैसियत का त्याग करता है, या (3) जब कि पट्टेदार दिवालिया न्यायनिर्णीत हो जाता है और पट्टा यह उपबन्ध करता है कि पट्टाकर्ता ऐसी घटना के घटित होने पर पुनः प्रवेश कर सकेगा, और जबकि उन दशाओं में से किसी में पट्टाकर्ता या उसका अन्तरिती पट्टेदार को पट्टे का पर्यवसान करने के अपने आशय की लिखत सूचना देता है;
(ज) पट्टे का पर्यवसान करने या पट्टे पर दी गयी सम्पत्ति को छोड़ देने या छोड़ देने के आशय की एक पक्षकार द्वारा दूसरे पक्षकार को सम्यक् रूप से दी गयी सूचना के अवसान पर।
पट्टाकृत सम्पत्ति का नया पट्टा एक पट्टेदार अपने पट्टाकर्ता से वर्तमान पट्टे के चालू रहने के दौरान प्रभावी होने के लिए प्रतिगृहीत करता है। यह पूर्वोक्त पट्टे का विवक्षित अभ्यर्पण है और उस पट्टे का तदुपरि पर्यवसान हो जाता है।
धारा 111 के खण्ड (छ) के अधीन हुआ समपहरण उस भाटक के प्रतिग्रहण द्वारा, जो समपहरण की तिथि से शोध्य हो गया है, या ऐसे भाटक के लिए करस्थम् द्वारा या पट्टाकर्ता की तरफ से किसी ऐसे अन्य कार्य द्वारा, जिससे पट्टे को चालू मानने का उसका आशय दर्शित होता हो, अधित्यक्त हो जाता है:
परन्तु यह तब जब कि पट्टाकर्ता को यह जानकारी हो कि समपहरण उपगत हो गया है:
परन्तु यह और भी कि जहाँ कि पट्टेदार को समपहरण के आधार पर बेदखल करने के लिए वाद संस्थित किए जाने के पश्चात् भाटक प्रतिगृहीत कर लिया जाता है, वहाँ ऐसा प्रतिग्रहण अधित्यजन नहीं है।
धारा 111 के खण्ड (ज) के अधीन दी गयी सूचना जिस व्यक्ति को दी गई है, उस व्यक्ति की अभिव्यक्त या विवक्षित सम्मति से वह उसे देने वाले व्यक्ति के किसी ऐसे कार्य द्वारा, जिससे पट्टे को चालू मानने का उसका आशय दर्शित होता है, अधित्यक्त हो जाती है।
(क) पट्टाकर्ता क पट्टेदार ख को पट्टे पर दी गई सम्पत्ति को छोड़ देने के लिए सूचना देता है। सूचना का अवसान हो जाता है। उस भाटक की निविदा, जो सूचना के अवसान से सम्पत्ति गद्धे शोध्य हुआ हो, ख करता है और क उसे प्रतिगृहीत कर लेता है। सूचना अधित्यक्त हो जाती है।
(ख) पट्टाकर्ता क पट्टेदार ख को पट्टे पर दी गयी सम्पत्ति को छोड़ देने के लिए सूचना देता है। सूचना का अवसान हो जाता है और ख अपना कब्जा कायम रखता है। क छोड़ देने की दूसरी सूचना ख को अपने पट्टेदार के नाते देता है। पहली सूचना अधित्यक्त हो जाती है।
जहाँ कि स्थावर सम्पत्ति के पट्टे का पर्यवसान भाटक न देने से समपहरण द्वारा हो गया है और पट्टाकर्ता पट्टेदार को बेदखल करने के लिए वाद लाता है वहाँ यदि वाद को सुनवाई में पट्टेदार पट्टाकर्त्ता को बकाया भाटक उस पर ब्याज सहित और वाद के उसके पूरे खर्च दे देता है या निविदत्त करता है या ऐसी प्रतिभूति दे देता है जिससे न्यायालय ऐसा संदाय पन्द्रह दिन में किए जाने के लिए पर्याप्त समझता है, तो न्यायालय बेदखली के लिए डिक्री देने के बदले पट्टेदार को समपहरण से मुक्ति देने का आदेश दे सकेगा और तदुपरि पट्टेदार पट्टाकृत सम्पत्ति को ऐसे धारित करेगा मानो समपहरण हुआ ही नहीं था।
जहाँ कि स्थावर सम्पत्ति के किसी पट्टे का पर्यवसान किसी ऐसी अभिव्यक्त शर्त के भंग के कारण समपहरण द्वारा हो गया है जो यह उपबन्धित करती है कि उसके भंग पर पट्टाकर्त्ता पुनः प्रवेश कर सकेगा, वहाँ बेदखली के लिए कोई वाद तब तक न होगा जब तक कि और यदि पट्टाकर्ता ने पट्टेदार पर-
(क) परिवादित विशिष्ट भंग का विनिर्देश करने वाली; तथा
(ख) यदि भंग उपचार योग्य है तो उस भंग का उपचार करने की पट्टेदार से अपेक्षा करने वाली, लिखित सूचना की तामील न कर दी हो और यदि वह भंग उपचार योग्य है तो पट्टेदार उसका उपचार सूचना की तामील की तारीख से युक्तियुक्त समय के भीतर करने में असफल न रहा हो,
इस धारा की कोई भी बात ऐसी किसी अभिव्यक्त शर्त को, जो पट्टे पर दी गयी सम्पत्ति के समनुदेशन, उपपट्टाकरण, कब्जा-विलगन या व्ययन के विरुद्ध है, अथवा भाटक के असंदाय की दशा में समपहरण से संबंधित किसी अभिव्यक्त शर्त को लागू नहीं होगी।
स्थावर सम्पत्ति के पट्टे के अभिव्यक्त या विवक्षित अभ्यर्पण का प्रतिकूल प्रभाव सम्पत्ति के या उसके किसी भाग के ऐसे उपपट्टे पर नहीं पड़ता, जो पट्टेदार द्वारा उन निबन्धनों और शर्तों पर पहले ही अनुदत्त कर दिया गया है जो (भाटक की रकम के बारे में के सिवाय) सारतः वे ही हैं. जो मूल पट्टे की हैं, किन्तु जब तक कि यह अभ्यर्पण नया पट्टा अभिप्राप्त करने के प्रयोजन से न किया गया हो उपपट्टेदार द्वारा देय भाटक और उसे आबद्ध करने वाली संविदाएं क्रमशः पट्टाकर्ता को देय और उसके द्वारा प्रवर्तनीय रहेंगी।
ऐसे पट्टे का समपहरण ऐसे सब उपपट्टे को वहाँ के सिवाय बातिल कर देता है जहाँ कि ऐसा समपहरण पट्टाकर्त्ता द्वारा उपपट्टेदारों को कपट वचित करने के लिए उपाप्त किया गया है या जहाँ कि समपहरण से मुक्ति धारा 114 के अधीन अनुदत्त की गई है।
यदि सम्पत्ति का पट्टेदार या उपपट्टेदार पट्टेदार को अनुदत्त पट्ट के पर्यवसान के पश्चात् उस पर अपना कब्जा बनाए रखता है और पट्टाकर्त्ता या उसका विधिक प्रतिनिधि पट्टेदार या उपपट्टेदार से भाटक प्रतिगृहीत करता है या कब्जा बनाए रखने के लिए अन्यथा उसको अनुमति देता है तो तत्प्रतिकूल करार के अभाव में पट्टा धारा 106 में यथा विनिर्दिष्ट उस प्रयोजन के अनुसार, जिसके लिए सम्पत्ति पट्टे पर दी गयी थी वर्षानुवर्ष या मासानुमास के लिए नवीकृत हो जाता है।
(क) क एक गृह ख को पाँच वर्ष के लिए पट्टे पर देता है। ख वह गृह ग को 100 रुपए मासिक भाटक पर उपपट्टे पर देता है। पाँच वर्ष का अवसान हो जाता है किन्तु ग गृह पर कब्जा बनाए रखता है और क को भाटक देता है। ग का पट्टा मासानुमास नवीकृत होता रहता है।
(ख) ख को क एक फार्म ग के जीवन पर्यन्त के लिए पट्टे पर देता है। ग की मृत्यु हो जाती है, किन्तु क को अनुमति से ख कब्जा बनाए रखता है। ख का पट्टा वर्षानुवर्ष नवीकृत होता रहता है।
इस अध्याय के उपबंधों में से कोई भी उपबन्ध कृषि-प्रयोजनों वाले पट्टों को वहाँ तक के सिवाय लागू नहीं होता जहाँ तक कि राज्य सरकार शासकीय राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा घोषित कर दे कि ऐसे सब उपबन्ध या उनमें से कोई उपबन्ध ऐसे सब पट्टों या उनमें से किसी के विषय में तत्समय प्रवृत्त स्थानीय विधि के, यदि कोई हो, उपबन्धों के सहित या अध्यधीन लागू होंगे।
ऐसी अधिसूचना तब तक प्रभाव में न आएगी जब तक उसके प्रकाशन की तारीख से छः मास का अवसान न हो जाए।