धारा 7 से 16 अध्याय 3 अपराध और शास्तियां

Download Android App    Download iOS App
Note: 1. Use ORG Code: XLVPGR For IOS and Web APP. 2. To Download the PDF it is necessary to download the App. 3. You can Use Only Sigle Device to access the Courses on App

Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 3

अपराध और शास्तियां

1[7. लोक सेवक को रिश्वत दिए जाने से संबंधित अपराध. -

ऐसा कोई लोक सेवक जो,

(क) किसी व्यक्ति से, इस आशय से कोई असम्यकू लाभ अभिप्राप्त करता है या प्रतिगृहीत करता है या अभिप्राप्त करने का प्रयास करता है कि चाहे वह स्वयं या किसी अन्य लोक सेवक द्वारा किसी लोक कर्तव्य का कार्यपालन अनुचित रूप से या बेइमानी से किया जाए या करवाया जाए या ऐसे कर्तव्य के कार्यपालन को पूरा न किया जाए या न करवाया जाए: या

(ख) किसी लोक कर्तव्य का कार्यपालन अनुचित रूप से या बेईमानी से, चाहे स्वयं के द्वारा या किसी अन्य लोक सेवक द्वारा करने या करवाने या ऐसे कर्तव्य के कार्यपालन को पूरा न करने या न करवाने के लिए किसी व्यक्ति से किसी इनाम के रूप में कोई असम्यक् लाभअभिप्राप्त करता है या प्रतिगृहीत करता है या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करता है; या

(ग) किसी लोक कर्तव्य का अनुचित रूप से या बेईमानी से कार्यपालन करता है या किसी अन्य लोक सेवक को किसी लोक कर्तव्य का अनुचित रूप से या बेईमानी से कार्यपालन करने हेतु प्रेरित करता है या किसी व्यक्ति से कोई असम्यक् लाभ स्वीकार करने के परिणामस्वरूप या उसकी प्रत्याशा में ऐसे कर्तव्य का कार्यपालन करने से प्रविरत रहता है; या

वह कारावास से, जिसको अवधि तीन वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुमति से भी दंडनीय होगा।

स्पष्टीकरण 1.-

इस धारा के प्रयोजन के लिए, किसी असम्यक् लाभ को अभिप्रात करने, प्राप्त करने के लिए सहमत होने, प्रतिगृहीत करने या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करने से ही लोक सेवक द्वारा लोक कर्तव्य का पालन स्वयं अपराध का गठन करेगा, चाहे लोक सेवक द्वारा उसका कार्यपालन अनुचित रहा हो या न रहा हो।

दृष्टान्त. -

एक लोक सेवक 'एस' एक व्यक्ति, 'पी' से उसके नेमी राशन कार्ड आवेदन को समय से प्रक्रिया में लाने के लिए पांच हजार रुपए की रकम उसे देने को कहता है। 'एस' इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है।

स्पष्टीकरण 2.-

इस धारा के प्रयोजन के लिए -

(1) "अभिप्राप्त करता है" या "प्रतिगृहीत करता है" या "अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करता है" पदों में ऐसे मामले सम्मिलित होंगे, जहां ऐसा कोई व्यक्ति जो लोक सेवक होते हुए, स्वयं के लिए या किसी व्यक्ति के लिए लोक सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करके या किन्हीं अन्य भष्ट या अवैध साधनों के द्वारा कोई असम्यक् लाभ अभिप्राप्त करता है या "प्रतिगृहीत करता है" या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करता है।

(ii) इस बात का कोई महत्व नहीं होगा कि ऐसा व्यक्ति लोक सेवक होते हुए वह असम्यक् लाभ सीधे या पर पक्षकार के माध्यम से अभिप्राप्त करता है या प्रतिगृहीत करता है या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करता है। 

 

                                                                                                                                   11. अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से धारा 7, धारा 8, धारा 9 तथा धारा 10 के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 7, धारा 8. धारा १ तथा धारा 10 निम्नवत थी:-

"7. लोक सेवक द्वारा पदीय कार्य के लिए वैध पारिश्रमिक से भिन्त्र पारितोषण लिया जाना. -

जो कोई लोक सेवक होते हुए या होने को प्रत्याशा रखते हुए वैध पारिश्रमिक से भित्र किसी प्रकार का भी कोई पारितोषण इस बात के करने के लिए हेतु या इनाम के रूप में किसी व्यक्ति से अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्रतिगृहीत या अभिप्राप्त करेगा या प्रतिगृहीत करने को सहमत होगा या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करेगा कि वह लोक सेवक अपना कोई पदीय कार्य करे या करने से प्रविरत रहे अथवा किसी व्यक्ति को अपने पदीय कृत्यों के प्रयोग में कोई अनुग्रह या अननुग्रह दिखाये या दिखाने से प्रविरत रहे अथवा केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या संसद् पा किसी विधान-मण्डल में या धारा 2 के खंड (ग) में निर्दिष्ट किसी स्थानीय प्राधिकारी, निगम या सरकारी कम्पनी में या किसी लोक सेवक के यहां, चाहे वह नामित हो या नहीं, किसी व्यक्ति का कोई उपकार या अपकार करे या करने का प्रयत्न करे, यह कारावास से जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दण्डित किया जाएगा।

स्पष्टीकरण. -

(क) "लोक सेवक होने को प्रत्याशा रखते हुए" - यदि कोई व्यक्ति जो किसी पद पर होने की प्रत्याशा न रखते हुए, दूसरों की प्रवंचना से यह विश्वास करा कर कि वह किसी पद पर होने वाला है और यह कि तब वह उनका उपकार करेगा, उससे परितोषण अभिप्राप्त करेगा, तो वह छल करने का दोषी हो सकेगा किन्तु वह इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी नहीं है।

(ख) "परितोषण"- "परितोषण" शब्द धन संबंधी परितोषण तक, या उन परितोषणों तक ही, जो धन में आंके जाने योग्य हैं, निर्बन्धित नहीं है।

(ग) "वैध पारिश्रमिक"-"वैध पारिश्रमिक" शब्द तस पारिश्रमिक तक ही निर्बन्धित नहीं है जिसकी मांग कोई लोक सेवक विधिपूर्ण रूप से कर सकता है, किन्तु इसके अन्तर्गत यह समस्त पारिश्रमिक आता है जिसको प्रतिगृहीत करने के लिये उस सरकार या संगठन द्वारा, जिसकी सेवा में यह है, उसे अनुज्ञा दी गई है।

(घ) "करने के लिए हेतुक या इनाम" वह व्यक्ति जो वह कार्य करने के लिए हेतुक या इनाम के रूप में, जिसके करने का उसका आशय नहीं है या जिसे करने की स्थिति में वह नहीं है या जो उसने नहीं किया है, परितोषण प्राप्त करता है, इस पद के अन्तर्गत आता है।

(ङ) जहां कोई लोक सेवक किसी व्यक्ति को यह गलत विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करता है कि सरकार में उसके असर से उस व्यक्ति को कोई हक अभिप्राप्त हुआ है, और इस प्रकार उस व्यक्ति को इस सेवा के लिए पुरस्कार के रूप में लोक सेवक को धन या कोई अन्य परितोषण देने के लिए उत्प्रेरित करता है, तो यह इस धारा के अधीन लोक सेवक द्वारा किया गया अपराध होगा।

8. लोक सेवक पर भ्रष्ट या अवैध साधनों द्वारा असर डालने के लिए परितोषण का लेना. -

जो कोई अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए किसी प्रकार का भी कोई परितोषण किसी लोक सेवक को, चाहे वह नामित हो या नहीं, भ्रष्ट या अवैध साधनों द्वारा इस बात के लिये उत्प्रेरित करने के लिए हेतु या इनाम के रूप से किसी व्यक्ति से प्रतिगृहीत या अभिप्राप्त करेगा या प्रतिगृहीत करने को सहमत होगा या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करेगा कि वह लोक सेवक कोई पदीय कार्य करे या करने से प्रचिरत रहे अथवा किसी व्यक्ति को अपने पदीय कृत्यों के प्रयोग में कोई अनुग्रह या अननुग्रह दिखाये अथवा या केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या संसद् या किसी राज्य के विधान-मण्डल में या धारा 2 के खण्ड (ग) में निर्दिष्ट किसी स्थानीय प्राधिकरण, निगम या सरकारी कम्पनी में या किसी लोक सेवक के यहां चाहे वह नामित हो या नहीं किसी व्यक्ति का कोई उपकार या अपकार करे या करने का प्रयास करे, वह कारावास से, जिसको अवधि तीन वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु सात वर्ष तक की हो सकेगी, और जुमनि से भी, दण्डित किया जाएगा।

9. लोक सेवक पर वैयक्तिक असर डालने के लिए परितोषण का लेना. -

जो कोई अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए किसी प्रकार का भी कोई परितोषण किसी लोक सेवक को, चाहे वह नामित हो या नहीं, अपने वैयक्तिक असर के प्रयोग द्वारा इस बात के लिए उत्प्रेरित करने के लिए हेतु या इनाम के रूप में किसी व्यक्ति से प्रतिगृहीत या अभिप्राप्त करेगा या प्रतिगृहीत करने को सहमत होगा या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करेगा कि वह लोक सेवक कोई पदीय कार्य करे मा करने से प्रचिरत रहे अथवा किसी व्यक्ति को ऐसे लोक सेवक के पदीय कृत्यों के प्रयोग में कोई अनुग्रह या अननुग्रह दिखाये अथवा केन्द्रीय सरकार या किमी राज्य की सरकार या संसद् या किसी राज्य के विधान-मण्डल में या धारा 2 के खण्ड (ग) में निर्दिष्ट किसी स्थानीय प्राधिकारी, निगम या सरकारी कम्पनी में या किसी लोक सेवक के यहां, चाहे वह नामित हो या नहीं, किसी व्यक्ति का कोई उपकार या अपकार करे या करने का प्रयत्न करें, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु सात वर्ष तक की हो संकेगी, और जुर्मान से भी, दण्डित किया जाएगा।

10. लोक सेवक द्वारा धारा 8 या धारा 9 में परिभाषित अपराधों के दुष्प्रेरण के लिये दण्ड.-

जो कोई ऐसा लोक सेवक होते हुए, जिसके बारे में उन अपराधों में से कोई अपराध किया जाए, जो धारा 8 या धारा 9 में परिभाषित है, उस अपराध का दुष्प्रेरण करेगा, चाहे वह अपराध ऐसे दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया गया हो या नहीं, यह कारावास से, जिसको अवधि छह मास से कम नहीं होगी किन्तु पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुमनि से भी, दण्डित किया जाएगा।"। 

7. भ्रष्ट या अविधिपूर्ण साधनों द्वारा या निजी प्रभाव का प्रयोग करके किसी लोक सेवक को प्रभावित करके असम्यक् लाभ लेना-

 जो कोई, भ्रष्ट या अविधिपूर्ण साधनों द्वारा या निजी प्रभाव का प्रयोग करके किसी लोक सेवक को, स्वयं ऐसे लोक सेवक या किसी अन्य लोक कर्तव्य का कार्यपालन अनुचित रूप से या बेइमानी से करने या करवाने या ऐसे कर्तव्य के कार्यपालन को पूरा न करने या न करवाने के लिए उत्प्रेरित करने के लिए हेतु या इनाम के रूप में किसी अन्य व्यक्ति से स्वयं के लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई असम्यक् लाभ प्रतिगृहीत करता है या अभिप्राप्त करता है या अभिप्राप्त करने का प्रयास करता है, तो वह ऐसी अवधि के कारावास से जो तीन वर्ष के कम नहीं होगा किन्तु जो सात वर्ष का हो सकेगा, दंडनीय होगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा।

8. किसी लोक सेवक को रिश्वत देने से संबंधित अपराध. -

(1) ऐसे कोई व्यक्ति जो, निम्नलिखित आशय से किसी अन्य व्यक्ति या अन्य व्यक्तियों को कोई असम्यक् लाभ देता है या देने का वचन करता है-

(i) किसी लोक सेवक को कोई लोक कर्तव्य अनुचित रूप से करने हेतु प्ररित करने के लिए; या

(ii) किसी लोक सेवक को इस प्रकार किसी लोक कर्तव्य को अनुचित रूप से किए जाने के लिए इनाम देने हेतु,

तो वह कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से या दोनों से दंडनीय होगा :

परंतु इस धारा के उपबंध वहां लागू नहीं होंगे जहां कोई व्यक्ति ऐसा असम्यक् लाभ देने के लिए विवश है:

परंतु यह और कि इस प्रकार विवश व्यक्ति ऐसा अस्यमक् लाभ देने की तारीख से सात दिन की अवधि के भीतर इस मामले की रिपोर्ट विधि प्रवर्तन प्राधिकारी या अन्वेषण अभिकरण को देगा:

परंतु यह भी कि जहां इस धारा के अधीन अपराध किसी वाणिज्यिक संगठन द्वारा किया गया है वहां ऐसा वाणिज्यिक संगठन जुर्माने से दंडनीय होगा।

दृष्टांत. -

कोई व्यक्ति 'पी', लोक सेवक 'एस' को, यह सुनिश्चित करने के लिए दस हजार की रकम देता है कि सभी बोली लगाने वालों में से उसे अनुज्ञप्ति प्रदान की जाए। 'पी' इस उपधारा के अधीन अपराध का दोषी है।

स्पष्टीकरण.

इस बात का कोई महत्व नहीं होगा कि वह व्यक्ति, जिसे असम्यक् लाभ दिया गया है या देने का वचन दिया गया है वही व्यक्ति है जिस व्यक्ति ने संबंधित लोक कर्तव्य करना है या किया है और इस बात का भी कोई महत्व नहीं होगा कि ऐसा असम्यक् लाभ उस व्यक्ति को सीधे या किसी अन्य पक्षकार के माध्यम से पहुंचाया जाता है या पहुंचाने का वचन दिया जाता है।

(2) उपधारा (1) की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को लागू नहीं होगी, यदि इस व्यक्ति ने किसी विधि का प्रवर्तन करने वाले प्राधिकारी या अन्वेषण अभिकरण को सूचना देने के पश्चात् विधि का प्रवर्तन करने वाले ऐसे प्राधिकारी या अन्वेषण अभिकरण को पश्चात्वर्ती के विरुद्ध अभिकथित अपराध से उसके अन्वेषण में सहायता करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को कोई असम्यक् लाभ देता है या देने का वचन देता है।

9. किसी वाणिज्यिक संगठन द्वारा किसी लोक सेवक को रिश्वत देने से संबंधित अपराध. -

(1) जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी वाणिज्यिक संगठन द्वारा किया गया है, वहां ऐसा संगठन जुर्माने से दंडनीय होगा, यदि ऐसे वाणिज्यिक संगठन से सहबद्ध कोई व्यक्ति किसी लोक सेवक को असम्यक् लाभ देता है या देने का वचन देता है,

(क) ऐसे वाणिज्यिक संगठन के लिए कारबार अभिप्राप्त करने या प्रतिधारित करने के आशय से; या

(ख) ऐसे वाणिज्यिक संगठन के लिए कारबार के संचालन में कोई लाभ अभिप्राप्त करने या प्रतिधारित करने के आशय से :

परंतु वाणिज्यिक संगठन के लिए यह साबित करने का एक बचाव होगा कि उससे सहयोजित व्यक्तियों को ऐसा आचरण करने से निवारित करने के लिए उसने ऐसे मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसरण में, जो विहित किए जाएं पर्याप्त प्रक्रियाएं अपना रखी थीं।

(2) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी व्यक्ति के बारे में यह तब कहा जाएगा कि उसने किसी लोक सेवक को असम्यक् लाभ दिया है या देने का वचन दिया है, यदि उसने अभिकथित रूप से धारा 8 के अधीन अपराध किया है, चाहे ऐसे व्यक्ति को ऐसे किसी अपराध के लिए अभियोजित किया गया हो अथवा नहीं।

(3) धारा 8 और इस धारा के प्रयोजनों के लिए-

(क) "वाणिज्यिक संगठन" से निम्नलिखित अभिप्रेत है-

(1) ऐसा कोई निकाय, जो भारत में निगमित किया जाता है और भारत में या भारत के बाहर कोई कारबार करता है;

(ii) ऐसा कोई अन्य निकाय, जो भारत के बाहर निगमित किया जाता है और जो भारत के किसी भी भाग में कोई कारबार या कारबार का कोई भाग करता है;

(iii) ऐसी भागीदारी फर्म या कोई व्यक्ति संगम जो भारत में बनाया गया है और जो भारत में या भारत के बाहर कोई कारबार करता है; या

(iv) ऐसी कोई अन्य भागीदारी फर्म या व्यक्ति-संगम, जो भारत के बाहर बनाया जाता है और जो भारत के किसी भाग में कोई कारबार या कारबार का कोई भाग करता है;

(ख) "कारबार" के अंतर्गत कोई व्यापार या वृति या सेवा, उपलब्ध कराना है;

(ग) किसी व्यक्ति को वाणिज्यिक संगठन से उस दशा में सहयोजित कहा जाएगा, यदि ऐसा व्यक्ति, उसके द्वारा ऐसा कोई असम्यक् लाभ, जो उपधारा (1) के अधीन किसी अपराध का गठन करता है, देने का वचन दिए जाने या ऐसा कोई लाभ दिये जाने पर ध्यान न देते हुए वाणिज्यिक संगठन के लिए या उसकी ओर से कोई सेवाएं प्रदान करता है।

स्पष्टीकरण 1.-

वह हैसियत जिसमें व्यक्ति वाणिज्यिक संगठन के लिए या उसकी ओर से सेवाएं करता है, इस बात के होते हुए भी कि ऐसा व्यक्ति ऐसे संगठन का कर्मचारी या अभिकर्ता या समनुषंगी है, विचार का विषय नहीं होगी।

स्पष्टीकरण 2.-

इस बात का अवधारण कि वह व्यक्ति ऐसा व्यक्ति है या नहीं जो वाणिज्यिक संगठन के लिए या उसकी ओर से सेवाएं करता है, सभी सुसंगत परिस्थितियों के प्रति निर्देश करके किया जाएगा न कि केवल उस व्यक्ति और वाणिज्यिक संगठन के बीच के संबंध की प्रकृति के प्रति निर्देश करके।

स्पष्टीकरण 3.-

यदि वह व्यक्ति वाणिज्यिक संगठन का कोई कर्मचारी है तो जब तक प्रतिकूल साबित न किया जाए यह उपधारणा की जाएगी कि वह व्यक्ति ऐसा व्यक्ति है जिसने वाणिज्यिक संगठन के लिए या उसकी ओर से सेवाएं प्रदान की हैं।

(4) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, धारा 7क, धारा 8 या इस धारा के अधीन का अपराध संज्ञेय होगा।

(5) केन्द्रीय सरकार, संबद्ध पणधारियों जिसके अंतर्गत विभाग भी हैं, के परामर्श से और वाणिज्यिक संगठनों से सहयोजित व्यक्तियों द्वारा किसी व्यक्ति को, जो लोक सेवक है, रिश्वत देने से निवारित करने के विचार से ऐसे मार्गदर्शक सिद्धान्त को विहित करेगी, जो आवश्यक समझी जाएं और जो ऐसे संगठनों द्वारा अनुपालन हेतु स्थापित किए जा सकते हैं।

10. वाणिज्यिक संगठन के भारसाधक व्यक्ति का अपराध का दोषी होना. -

जहां धारा 9 के अधीन कोई अपराध किसी वाणिज्यिक संगठन द्वारा किया जाता है, और न्यायालय में ऐसे अपराध का वाणिज्यिक संगठन के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया जाना साबित हो जाता है, वहां ऐसा निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी ऐसे अपराध का दोषी होगा अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने का दायी होगा तथा कारावास से दंडनीय होगा, जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने का भी दायी होगा।

स्पष्टीकरण. - 

इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी फर्म के संबंध में "निदेशक" से फर्म का कोई भागीदार अभिप्रेत है।]

11. लोक सेवक, जो ऐसे लोक सेवक द्वारा की गई कार्यवाही या कारबार से संबद्ध व्यक्ति से, प्रतिफल के बिना, 1[ असम्यक् लाभ] अभिप्राप्त करता है. -

जो कोई लोक सेवक होते हुये, अपने लिये या किसी अन्य व्यक्ति के लिए, किसी व्यक्ति से यह जानते हुए कि ऐसे लोक सेवक द्वारा की गई या की जाने वाली किसी कार्यवाही या कारबार से वह व्यक्ति संपृक्त रह चुका है, या है या उसका संपृक्त होना संभाव्य है, या स्वयं उसके या किसी ऐसे लोक सेवक के, जिसका वह अधीनस्थ है, । 2[ पदीय कृत्यों या लोक कर्तव्यों] से वह व्यक्ति संपृक्त है, अथवा किसी व्यक्ति से यह जानते हुए कि वह इस प्रकार संपृक्त व्यक्ति से हितबद्ध है नातेदारी रखता है, किसी 3[असम्यक् लाभ] को किसी प्रतिफल के बिना, या ऐसे प्रतिफल के लिए, जिसे वह जानता है, कि अपर्याप्त है, प्रतिगृहीत करेगा या अभिप्राप्त करेगा, 4[***] या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम नहीं होगी किन्तु पांच वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी, दण्डित किया जाएगा।

(1.अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से "मूल्यवान चीज" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।)

(2. अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से "पदीय कृत्यों" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

3. अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से "मूल्यवान चीज" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

1[ 12. अपराधों के दुष्प्रेरण के लिए दंड.  -

जो कोई, इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का दुष्प्रेरण करेगा, चाहे वह अपराध उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया गया हो अथवा नहीं, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।]

(1. अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 12 निम्नवत थी :- 12. धारा 7 या धारा 11 में परिभाषित अपराधों के दुष्प्रेरण के लिए दण्ड - जो कोई धारा 7 या धारा 11 के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का दुष्प्रेरण करेगा, चाहे वह अपराध उस दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप किया गया हो या नहीं, यह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्मनि से भी, दण्डित किया जाएगा।")

13. लोक सेवक द्वारा आपराधिक अवचार.

1[ (1) कोई लोक सेवक आपराधिक अवचार का अपराध करने वाला कहा जाएगा, -

(क) यदि वह लोक सेवक के रूप में अपने को सौंपी गई किसी सम्पत्ति या अपने नियंत्रणाधीन किसी सम्पत्ति का अपने उपयोग के लिए बेईमानी से या कपटपूर्ण दुर्विनियोग करता है या उसे अन्यथा संपरिवर्तित कर लेता है या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा करने देता है; या

(ख) यदि वह अपनी पदावधि के दौरान अवैध रूप से अपने को साशय समृद्ध करता है।

स्पष्टीकरण 1.-

किसी व्यक्ति के बारे में यह उपधारणा की जाएगी कि उसने अवैध रूप से अपने को साशय समृद्ध बनाया है, यदि वह या उसकी ओर से कोई अन्य व्यक्ति अपनी पदावधि के दौरान किसी समय अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अनानुपातिक धनीय संसाधन या सम्पत्ति उसके कब्जे में है या रही है, जिसके लिए लोक सेवक समाधानप्रद रूप से हिसाब नहीं दे सकता है।

स्पष्टीकरण 2.-

पद "आय के ज्ञात स्रोत" से किसी विधिपूर्ण स्रोत से प्राप्त आय अभिप्रेत है।]

(2) कोई लोक सेवक जो आपराधिक अवचार करेगा इतनी अवधि के लिए, जो । 2[चार वर्ष] से कम की न होगी किन्तु जो 3[ दस वर्ष तक की हो सकेगी, कारावास से दण्डनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा। 

(1. अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (1) निम्नवत थी:-

"(1) कोई लोक सेवक आपराधिक अवचार का अपराध करने वाला कहा जाता है-

(क) यदि वह अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए वैध पारिश्रमिक से भिन्न कोई परितोषण ऐसे हेतु या इनाम के रूप में, जैसा धारा 7 में वर्णित है किसी व्यक्ति से अभ्यासतः प्रतिगृहीत या अभिप्राप्त करता है या प्रतिगृहीत करने के लिए सहमत होता है या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करता है; या

(ख) यदि वह अपने लिए किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई मूल्यवान चीज प्रतिफल के बिना या ऐसे प्रतिफल के लिए जिसका अपर्याप्त होना वह जानता है किसी ऐसे व्यक्ति से जिसका कि अपने द्वारा या किसी ऐसे लोक सेवक द्वारा, जिसके वह अधीनस्थ है, की गई या की जा सकने वाली किसी कार्रवाई या कारबार से संबद्ध रहा होना, होना या हो सकना वह जानता है अथवा किसी ऐसे व्यक्ति से जिसका ऐसे संबद्ध व्यक्ति में हितबद्ध या उससे संबंधित होना वह जानता है, अभ्यासतः प्रतिगृहीत या अभिप्राप्त करता है या प्रतिगृहीत करने के लिए सहमत होता है या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करता है; या

(ग) यदि वह लोक सेवक के रूप में अपने को सौंपी गई या अपने नियंत्रणाधीन किसी सम्पत्ति का अपने उपयोग के लिए बेइमानी से या कपटपूर्वक दुर्विनियोग करता है या उसे अन्यथा सम्परिवर्तित कर लेता है या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा करने देता है; या

(घ) यदि वह-

(i) भ्रष्ट या अवैध साधनों से अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई मूल्यवान चीज या धन संबंधी फायदा अभिप्राप्त करता है; या

(ii) लोक सेवक के रूप में अपनी स्थिति का अन्यथा दुरुपयोग करके अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई मूल्यवान चोज या धन संबंधी फायदा अभिप्राप्त करता है, या

(iii) लोक सेवक के रूप में पद धारण करके किसी व्यक्ति के लिए कोई मूल्यवान चीज या धन संबंधी फायदा बिना किसी लोक हित के अभिप्राप्त करता है; या

(ङ) यदि उसके या उसकी ओर से किसी व्यक्ति के कब्जे में ऐसे धन संबंधी साधन तथा ऐसी सम्पत्ति है जो उसकी आय के ज्ञात श्रोतों की अननुपातिक है अथवा उसके पद की कालावधि के दौरान किसी समय कब्जे में रही है जिसका कि वह लोक सेवक, समाधानप्रद लेखा-जोखा नहीं दे सकता।

स्पष्टीकरण. -

इस धारा के प्रयोजनों के लिए "आय के ज्ञात स्रोत" से अभिप्रेत है किसी विधिपूर्ण स्रोत से प्राप्त आय, जिसकी प्राप्ति को संसूचना, लोक सेवक को तत्समय लागू किसी विधि, नियमों या आदेशों के उपबन्धों के अनुसार दे दी गई है।"।

(2. अधिनियम क्रमांक 1 सन् 2014 द्वारा दिनांक 16-1-2014 से "एक वर्ष" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।)

(3. अधिनियम क्रमांक 1 सन् 2014 द्वारा दिनांक 16-1-2014 से "सात वर्ष" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित्त ।) 

3[ 14. आभ्यासिक अपराधी के लिए दंड. -

जो कोई जिसे इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है, उसके पश्चात् भी इस अधिनियम के अधीन दंडनीय कोई अपराध करता है, वह कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से दंडनीय होगा।]

(3. अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 14 निम्नवत थी :-"14. धारा 8, धारा 9 और धारा 12 के अधीन अभ्यासतः अपराध करना. जो कोई-

(क) धारा 8 या धारा 9 के अधीन दण्डनीय कोई अपराध अभ्यासतः करेगा; या

(ख) धारा 12 के अधीन दण्डनीय कोई अपराध अभ्यासतः करेगा।

वह इतनी अवधि के लिए जो पांच वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, कारावास से, और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा।" )

15. प्रयत्न के लिये दंड. -

जो कोई धारा 13 की उपधारा (1) के 4[खंड (क)] में निर्दिष्ट कोई अपराध करने का प्रयत्न करेगा वह कारावास से, 5[जिसकी अवधि दो वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु पांच वर्ष तक की हो सकेगी], और जुर्माने से भी, दण्डनीय होगा।

(4. अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से "खंड (ग) या खंड (घ)" शब्दों, कोष्ठकों और अक्षरों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

5. अधिनियम क्रमांक 1 सन् 2014 द्वारा दिनांक 16-1-2014 से "जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित। )

16. जुर्माना नियत करने के लिए ध्यान में रखी जाने वाली बातें. -

जुर्माने की रकम नियत करने में न्यायालय, वहां जहां जुर्माने का दंड 6[ धारा 7, या धारा 8 या धारा 9 या धारा 10 या धारा 11 या धारा 13 की उपधारा (2) या धारा 14 या धारा 15] के अधीन अधिरोपित किया गया है उस रकम या सम्पत्ति के मूल्य का, यदि कोई हो, जिसे अभियुक्त व्यक्ति ने अपराध करके अभिप्राप्त किया हो अथवा वहां जहां दोषसिद्धि धारा 13 की उपधारा (1) के 7[खंड (ख)] में निर्दिष्ट किसी अपराध के लिए है, उस खण्ड में निर्दिष्ट धन संबंधी साधन या सम्पत्ति का जिसका कि अभियुक्त व्यक्ति समाधानप्रद लेखा-जोखा देने में असमर्थ है, ध्यान रखेगा।

(6. अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से "धारा 13 की उपधारा (2) या धारा 14" शब्दों, अंकों और कोष्ठक के स्थान पर प्रतिस्थापित।

7. अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से "खंड ()" शब्द, कोष्ठक और अक्षर के स्थान पर प्रतिस्थापित।) | 

 

My Legal Consultants
Free Judiciary Coaching
Free Judiciary Notes
Free Judiciary Mock Tests
Bare Acts