धारा 17 से 18- क अध्याय 4 इस अधिनियम के अधीन मामलों का अन्वेषण

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 4

इस अधिनियम के अधीन मामलों का अन्वेषण

17. अन्वेषण करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति.-

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) में (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) किसी बात के होते हुये भी, निम्नलिखित की पंक्ति से नीचे का कोई पुलिस अधिकारी, -

(क) दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन की दशा में, पुलिस निरीक्षक;

(ख) मुंबई कलकत्ता, मद्रास और अहमदाबाद के महानगरीय क्षेत्रों में, और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2 की धारा 8 की उपधारा (1) के अधीन) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के द्वारा निरसित) इस रूप में अधिसूचित किसी अन्य क्षेत्र में, सहायक पुलिस आयुक्त;

(ग) अन्यत्र, उप-पुलिस अधीक्षक, या समतुल्य रैंक का पुलिस अधिकारी, इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का अन्वेषण, यथास्थितिः महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना, अथवा उसके लिये कोई गिरफ्तारी, वारण्ट के बिना नहीं करेगा;

परन्तु यदि कोई पुलिस अधिकारी जो पुलिस निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत है तो वह भी ऐसे किसी अपराध का अन्वेषण, यथास्थिति, महानगर मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग के मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना, अथवा उसके लिए गिरफ्तारी वारंट के बिना, कर सकेगा :

परन्तु यह और कि धारा 13 की 1[उपधारा (1) के खंड (ख)] में निर्दिष्ट किसी अपराध का अन्वेषण ऐसे पुलिस अधिकारी के आदेश के बिना नहीं किया जाएगा जो पुलिस अधीक्षक की पंक्ति से नीचे कान हो। (1. अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से "उपधारा (1) के खंड (ङ)" शब्दों, कोष्ठकों, अंक और अक्षर के स्थान पर प्रतिस्थापित।)

[17. लोक सेवक द्वारा उसके शासकीय कृत्यों या कर्तव्यों के निर्वहन में की गई सिफारिशों या लिए गए विनिश्चय के संबंध में अपराधों की जांच या पूछताछ या अन्वेषण. -

 (1) कोई पुलिस अधिकारी निम्नलिखित के पूर्वानुमोदन के बिना किसी ऐसे अपराध में कोई जांच या पूछताछ या अन्वेषण नहीं करेगा, जिसे इस अधिनियम के अधीन लोक सेवक द्वारा अभिकथित रूप से कारित किया गया है, जहां ऐसा अभिकथित अपराध लोक सेवक द्वारा उसके शासकीय कृत्यों या कर्तव्यों के निर्वहन में की गई सिफारिशों या लिए गए विनिश्चय से संबंधित है, -

(क) ऐसे व्यक्ति की दशा में, जो उस समय जब वह अपराध अभिकथित रूप से किया गया हो, संघ के कार्यों के संबंध में नियोजित है या था, उस सरकार के;

(ख) ऐसे व्यक्ति की दशा में जो उस समय जब वह अपराध अभिकथित रूप से किया गया हो, किसी राज्य के कार्यों के संबंध में नियोजित है या था, उस सरकार के;

(ग) किसी अन्य व्यक्ति की दशा में, उस समय जब वह अपराध अभिकथित रूप से किया गया हो, उसे उसके पद से हटाने के लिए सक्षम प्राधिकारी के:

परन्तु ऐसा कोई अनुमोदन किसी व्यक्ति को अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए असम्यक् लाभप्रतिग्रहीत करने या प्रतिग्रहीत करने का प्रयत्न करने के आरोप पर घटनास्थल पर ही गिरफ्तार करने संबंधी मामले में आवश्यक नहीं होगा:

परन्तु यह और कि संबद्ध प्राधिकारी इस धारा के अधीन अपने विनिश्चय की सूचना तीन मास की अवधि के भीतर देगा, जिसे लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से उस प्राधिकारी द्वारा एक मास की और अवधि के लिए बढ़ाया जा सकेगा।] (1.अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से अंत: स्थापितः)

18. बैंककारी बहियों के निरीक्षण की शक्ति. -

यदि प्राप्त जानकारी से या अन्यथा पुलिस अधिकारी के पास किसी ऐसे अपराध के किये जाने का संदेह करने का कारण है जिसका अन्वेषण करने के लिए वह धारा 17 के अधीन सशक्त है और और वह समझता है कि ऐसे अपराध का अन्वेषण या जांच करने के प्रयोजन के लिए किन्हीं बैंककार बहियों का निरीक्षण करना आवश्यक है तो तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में किसी बात के होते हुये भी वह किन्हीं बैंककार बहियों का वहां तक निरीक्षण कर सकेगा जहां तक वे उस व्यक्ति के, जिसके द्वारा ऐसे अपराध किये जाने का सन्देह है या किसी अन्य व्यक्ति के, जिसके द्वारा ऐसे व्यक्ति के निमित्त धन धारण किये जाने का संदेह है, लेखाओं से संबंधित हैं, और उसमें से सुसंगत प्रविष्टियों की प्रमाणित प्रतियां ले सकेगा या लिवा सकेगा तथा संबंधित बैंक उस पुलिस अधिकारी को, इस धारा के अधीन उसकी शक्तियों के प्रयोग में, सहायता करने के लिए आबद्ध होगा:

परन्तु किसी व्यक्ति के लेखाओं के संबंध में इस उपधारा के अधीन किसी शक्ति का प्रयोग पुलिस अधीक्षक को पंक्ति से नीचे के किसी पुलिस अधिकारी द्वारा नहीं किया जाएगा जब तक कि वह पुलिस अधीक्षक की पंक्ति के या उससे ऊपर के किसी पुलिस अधिकारी द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत न कर दिया गया हो।

स्पष्टीकरण.-

इस धारा में "बैंक" और "बैंककार बही" पर्दों के वे ही अर्थ होंगे जो बैंककार बही साक्ष्य अधिनियम, 1891 (1891 का 18) में है।

1[अध्याय 4

सम्पत्ति की कुर्की और समपहरण

18. दांडिक विधि संशोधन अध्यादेश, 1944 के उपबंधों का इस अधिनियम के अधीन कुर्की को लागू होना.-

(1) धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (2003 का 15) में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, दांडिक विधि संशोधन अध्यादेश, 1944 (1944 का अध्यादेश सं० 38) के उपबंध, जहां तक हो सके, इस अधिनियम के अधीन कुर्की, कुर्क की गई सम्पत्ति के प्रशासन और कुर्की के आदेश के निष्पादन या धन के अधिहरण या आपराधिक उपायों द्वारा उपाप्त की गई सम्पत्ति को लागू होंगे।

(2) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, दांडिक विधि संशोधन अध्यादेश, 1944 (1944 का अध्यादेश सं० 38) के उपबंध इस उपांतरण के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे "जिला न्यायाधीश" के प्रति निर्देश का "विशेष न्यायाधीश" के प्रति निर्देश के रूप में अर्थान्वयन किया जाएगा।] ( 1. अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से अंतः स्थापित ।)

 

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