धारा 1 से 2 अध्याय 1 प्रारम्भिक

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988

1988 का अधिनियम संख्यांक 49 1

(1. राष्ट्रपति की स्वीकृति दिनांक 9 सितम्बर, 1988 को प्राप्त हुई। अधिनियम का अंग्रेजी पाठ भारत का राजपत्र (असाधारण) भाग 2 खण्ड 1 में दिनांक 12-9-1988 को प्रकाशित।

[9 सितम्बर, 1988]

 

भ्रष्टाचार निवारण से संबंधित विधि का समेकन और संशोधन करने तथा उससे संबंधित विषयों के लिए अधिनियम।

भारत गणराज्य के उनतालीसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप से यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम और विस्तार. -

(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 है।

(2) इसका विस्तार 1[ *] सम्पूर्ण भारत पर है और यह भारत के बाहर भारत के समस्त नागरिकों को भी लागू है।

(1. अधिनियम क्रमांक 34 सन् 2019, अनुसूची 5, द्वारा दिनांक 31-10-2019 से " जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" शब्दों का लोप किया गया।)

2. परिभाषाएं.-  

इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(क) "निर्वाचन" से संसद् या किसी विधान मण्डल, स्थानीय प्राधिकरण या अन्य लोक प्राधिकरण के सदस्यों के चयन के प्रयोजन के लिए किसी विधि के अधीन, किसी भी माध्यम से, कराया गया निर्वाचन अभिप्रेत है:

2[(कक) "विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है और तद्नुसार "विहित" पद का अर्थ लगाया जाएगा:] (अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से अंतःस्थापित।)

(ख) "लोक कर्तव्य" से अभिप्रेत है वह कर्तव्य, जिसके निर्वहन में राज्य, जनता या समस्त समुदाय का हित है।

स्पष्टीकरण. -

इस खण्ड में, "राज्य के अन्तर्गत किसी केन्द्रीय, प्रान्तीय या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित निगम या सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन या सरकार से सहायता प्राप्त कोई प्राधिकरण या निकाय या कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1)* की धारा 617 में यथापरिभाषित सरकारी कंपनी भी है; (*अब कम्पनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18))

(ग) "लोक सेवक" से अभिप्रेत है, -

(i) कोई व्यक्ति जो सरकार की सेवा या उसके वेतन पर है या किसी लोक कर्तव्य के पालन के लिए सरकार से फीस या कमीशन रूप में पारिश्रमिक पाता है ;

(ii) कोई व्यक्ति जो किसी लोक प्राधिकरण की सेवा या उसके वेतन पर है;

(iii) कोई व्यक्ति जो किसी केन्द्रीय, प्रांतीय या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित निगम या सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन या सरकार से सहायता प्राप्त किसी प्राधिकरण या निकाय या कम्पनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1)* की धारा 617 में यथापरिभाषित किसी सरकारी कंपनी की सेवा या उसके वेतन पर है; (*अब कम्पनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18)

(iv) कोई न्यायाधीश, जिसके अन्तर्गत ऐसा कोई व्यक्ति है जो किन्हीं न्यायनिर्णयन कृत्यों का, चाहे स्वयं या किसी व्यक्ति या निकाय के सदस्य के रूप में, निर्वहन करने के लिए विधि द्वारा सशक्त किया गया है;

(v) कोई व्यक्ति जो न्याय प्रशासन के संबंध में किसी कर्तव्य का पालन करने के लिये न्यायालय द्वारा प्राधिकृत किया गया है जिसके अन्तर्गत किसी ऐसे न्यायालय द्वारा नियुक्त किया गया परिसमापक, रिसीवर या आयुक्त भी है;

(vi) कोई मध्यस्थ या अन्य व्यक्ति जिसको किसी न्यायालय द्वारा या किसी सक्षम लोक प्राधिकरण द्वारा या कोई मामला या विषय, विनिश्चय या रिपोर्ट के लिए निर्देशित किया गया है;

(vii) कोई व्यक्ति जो किसी ऐसे पद को धारण करता है जिसके आधार पर वह निर्वाचक सूची तैयार करने, प्रकाशित करने, बनाये रखने या पुनरीक्षित करने अथवा निर्वाचन या निर्वाचन के भाग का संचालन करने के लिये सशक्त है;

(viii) कोई व्यक्ति जब किसी ऐसे पद को धारण करता है जिसके आधार पर वह किसी लोक कर्तव्य का पालन करने के लिये प्राधिकृत या अपेक्षित है;

(ix) कोई व्यक्ति जो कृषि, उद्योग, व्यापार या बैंककारी में लगी हुई किसी ऐसी रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी का अध्यक्ष, सचिव या अन्य पदधारी है जो केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी प्रान्तीय या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम से या सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण के अधीन या सरकार से सहायता प्राप्त किसी प्राधिकरण या निकाय से या कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में यथापरिभाषित किसी सरकारी कंपनी से कोई वित्तीय सहायता प्राप्त कर रही है या कर चुकी है:

(x) कोई व्यक्ति जो किसी सेवा आयोग या बोर्ड का, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, अध्यक्ष, सदस्य या कर्मचारी या ऐसे आयोग या बोर्ड की ओर से किसी परीक्षा का संचालन करने के लिए या उसके द्वारा चयन करने के लिये नियुक्त की गई किसी चयन समिति का सदस्य है;

(xi) कोई व्यक्ति जो किसी विश्वविद्यालय का कुलपति, उसके किसी शासी निकाय का सदस्य, आचार्य, उपाचार्य, प्राध्यापक या कोई अन्य शिक्षक या कर्मचारी है, चाहे वह किसी भी पदाभिधान से ज्ञात हो, और कोई व्यक्ति जिसकी सेवाओं का लाभ विश्वविद्यालय द्वारा या किसी अन्य लोक निकाय द्वारा परीक्षाओं के, आयोजन या संचालन के संबंध में किया गया है;

(xii) कोई व्यक्ति जो किसी भी रीति में स्थापित किसी शैक्षणिक, वैज्ञानिक सामाजिक या अन्य संस्था का, जो केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण से वित्तीय सहायता प्राप्त कर रही है या कर चुकी है, पदधारी या कर्मचारी है।

स्पष्टीकरण 1.-

उपर्युक्त उपखण्डों में से किसी के अन्तर्गत आने वाले व्यक्ति लोक सेवक हैं चाहे वे सरकार द्वारा नियुक्त किये गये हों या नहीं।

स्पष्टीकरण 2.-

"लोक सेवक" शब्द जहां भी आए हैं, वे उस हर व्यक्ति के संबंध में समझे जाएंगे जो लोक सेवक के ओहदे को वास्तव में धारण किये हों, चाहे उस ओहदे को धारण करने के उसके अधिकार में कैसी ही विधिक त्रुटि हो।

1[(घ) "असम्यक् लाभ" से ऐसा कोई पारितोषण अभिप्रेत है, चाहे जैसा भी हो, विधिक पारिश्रमिक से भिन्न हो।

(1.अधिनियम क्रमांक 16 सन् 2018 द्वारा दिनांक 26-7-2018 से अंतःस्थापित ।)

स्पष्टीकरण. -

इस खंड के प्रयोजनों के लिए-

(क) "पारितोषण" शब्द धनीय पारितोषणों या धन के रूप में प्राक्कलनीय पारितोषणों तक सीमित नहीं है:

(ख) "विधिक पारिश्रमिक" पद किसी लोक सेवक को संदत्त पारिश्रमिक तक निर्बन्धित नहीं है, किन्तु इसके अंतर्गत ऐसे सभी पारिश्रमिक भी हैं, जिसका सरकार या संगठन द्वारा, जिसकी वह सेवा करता है, प्राप्त करने के लिए अनुज्ञात है।]

 

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