धारा 5 से 8 अध्याय 2 (हिन्दू विवाह) हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 2

हिन्दू विवाह

5. हिन्दू विवाह के लिये शर्तें-

दो हिन्दुओं के बीच विवाह अनुष्ठापित किया जा सकेगा यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी हो जायं, अर्थात् :

(i) विवाह के समय दोनों पक्षकारों में से, न तो वर की कोई जीवित पत्नी हो और न वधू का कोई जीवित पति हो;

[(ii) विवाह के समय दोनों पक्षकारों में से कोई पक्षकार -

(क) चित्त - विकृति के परिणामस्वरूप विधिमान्य सम्मति देने में असमर्थ न हो;

(ख) विधिमान्य सम्मति देने में समर्थ होने पर भी इस प्रकार के या इस हद तक मानसिक विकार से पीड़ित न रहा हो कि वह विवाह और सन्तानोत्पत्ति के लिये अयोग्य हो; या

(ग) उसे उन्मत्तता 2 [xxx] का बारबार दौरा न पड़ता हो;

(iii) विवाह के समय वर ने 3[ इक्कीस वर्ष ] की आयु और वधू ने 3[ अठारह वर्ष ] की आयु पूरी कर ली हो;

(iv) जब तक कि दोनों पक्षकारों में से हर एक को शासित करने वाली रूढ़ि या प्रथा से उन दोनों के बीच विवाह अनुज्ञात न हो, वे प्रतिषिद्ध नातेदारी डिग्रियों के भीतर न हों;

(v) जब तक कि दोनों पक्षकारों में से हर एक को शासित करने वाली रूढ़ि या प्रथा से उन दोनों के बीच विवाह अनुज्ञात न हो, वे एक दूसरे के सपिण्ड न हों;

(vi) [× × × ]

8. हिन्दू विवाहों का रजिस्ट्रीकरण -

(1) राज्य सरकार हिन्दू विवाहों का साबित किया जाना सुकर करने के प्रयोजन से ऐसे नियम बना सकेगी जो यह उपबन्धित करे कि ऐसे किसी विवाह के पक्षकार अपने विवाह से सम्बद्ध विशिष्टियों की इस प्रयोजन के लिये रखे गये हिन्दू विवाह रजिस्टर में ऐसी रीति में और ऐसी शर्तों के अध्यधीन, जैसी कि विहित की जाएं, प्रविष्टि करा सकेंगे।

(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुये भी, यदि राज्य सरकार की यह राय हो कि ऐसा करना आवश्यक या समीचीन है तो वह यह उपबन्ध कर सकेगी कि उपधारा (1) में निर्दिष्ट विशिष्टियों का प्रविष्ट किया जाना उस राज्य में या उसके किसी भाग विशेष में, चाहे सभी दशाओं में, चाहे ऐसी दशाओं में, जो विनिर्दिष्ट की जाएं, वैवश्यक होगा और जहां कि कोई ऐसा निदेश निकाला गया हो, वहां इस निमित्त बनाये गये किसी नियम का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति जुर्माने से, जो कि पच्चीस रुपये तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा।-

(3) इस धारा के अधीन बनाये गये सभी नियम बनाये जाने के पश्चात् यथाशीघ्र राज्य विधान मण्डल के समक्ष रखे जायेंगे।

(4) हिन्दू विवाह रजिस्टर निरीक्षण के लिये सभी युक्तियुक्त समय पर खुला रहेगा और अपने में अन्तर्विष्ट कथनों के साक्ष्य के तौर पर ग्राह्य होगा तथा उसमें से प्रमाणित उद्धरण, आवेदन करने और रजिस्ट्रार को विहित फीस का संदाय करने पर, उसके द्वारा दिए जाएंगे।

(5.) इस धारा में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी ऐसी प्रविष्टि करने में हुआ लोप किसी हिन्दू विवाह की विधिमान्यता पर प्रभाव न डालेगा। -

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