
निवारक अनुतोष न्यायालय के विवेकानुसार अस्थायी या शाश्वत व्यादेश द्वारा अनुदत्त किया जाता है।
(1) अस्थायी व्यादेश ऐसे होते हैं जिन्हें विनिर्दिष्ट समय तक या न्यायालय के अतिरिक्त आदेश तक बने रहना है तथा वे बाद के किसी भी प्रक्रम में अनुदत्त किए जा सकेंगे और सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) द्वारा विनियमित होते हैं।
(2) शाश्वत व्यादेश वाद की सुनवाई पर और उसके गुणागुण के आधार पर की गई डिक्री द्वारा ही अनुदत्त किया जा सकता है; तद्द्द्वारा प्रतिवादी किसी अधिकार का ऐसा प्रात्याख्यान या कोई ऐसा कार्य जो बादी के अधिकारों के प्रतिकूल हो, न करने के लिए शाश्वत काल के लिए व्यादिष्ट कर दिया जाता है।