धारा 34 से 35 अध्याय 6 विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 6

घोषणात्मक डिक्रियां

34. प्रास्थिति की या अधिकार की घोषणा के बारे में न्यायालय का विवेकाधिकार -

कोई व्यक्ति, जो किसी विधिक हैसियत का या किसी सम्पत्ति के बारे में किसी अधिकार का हकदार हो, ऐसे किसी व्यक्ति के विरुद्ध, जो ऐसी हैसियत का या ऐसे अधिकार के हक का प्रत्याख्यान करता हो या प्रत्याख्यान करने में हितबद्ध हो, वाद संस्थित कर सकेगा और न्यायालय स्वविवेक में उस बाद में यह घोषणा कर सकेगा कि वह ऐसा हकदार है और वादी के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह उस वाद में किसी अतिरिक्त अनुतोष की मांग करे:

परन्तु कोई भी न्यायालय वहां ऐसी घोषणा नहीं करेगा जहां कि वादी हक की घोषणा मात्र के अतिरिक्त कोई अनुतोष मांगने के योग्य होते हुए भी वैसा करने में लोप करे।

स्पष्टीकरण– सम्पत्ति का न्यासी ऐसे हक का प्रत्याख्यान करने में “हितबद्ध व्यक्ति" है जो ऐसे व्यक्ति के हक के प्रतिकूल हो जो अस्तित्व में नहीं है, और जिसके लिए वह न्यासी होता यदि वह व्यक्ति अस्तित्व में आता।

35. घोषणा का प्रभाव –

इस अध्याय के अधीन की गई घोषणा केवल वाद के पक्षकार और उनसे व्युत्पन्न अधिकार के द्वारा दावा करने वाले व्यक्तियों को ही आवद्ध करती है और जहां कि पक्षकारों में से कोई पक्षकार न्यासी हो वहां उन व्यक्तियों को ही आवद्ध करती है जिनके लिए ऐसे पक्षकार न्यासी होते यदि घोषणा की तारीख को उनका अस्तित्व होता।

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