धारा 1 से 4 (प्रारम्भिक) विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम,1963

Download Android App    Download iOS App
Note: 1. Use ORG Code: XLVPGR For IOS and Web APP. 2. To Download the PDF it is necessary to download the App. 3. You can Use Only Sigle Device to access the Courses on App

Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम,1963

(1963 का अधिनियम संख्यांक 47)

कतिपय प्रकारों के विनिर्दिष्ट अनुतोष से संबंधित विधि को परिभाषित और संशोधित करने के लिए अधिनियम

भारत गणराज्य के चौदहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

भाग- 1

प्रारम्भिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ -

(1) यह अधिनियम विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 कहा जा सकेगा।

(2) इसका विस्तार संपूर्ण भारत पर है।

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे।

2. परिभाषाएं -

इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो—

(क) "बाध्यता" के अंतर्गत विधि द्वारा प्रवर्तनीय हर एक कर्तव्य आता है;

(ख) "व्यवस्थापन" से भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 (1925 का 39) द्वारा यथापरिभाषित बिल अथवा क्रोडपत्र से भिन्न ऐसी लिखत अभिप्रेत है जिसके द्वारा जंगम या स्थावर सम्पत्ति में के क्रमवर्ती हितों के गन्तव्य अथवा न्यागमन को व्ययनित किया जाता है या उसका व्ययनित किया जाना कारित होता है;

(ग) "न्यास" का वही अर्थ है जो भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) की धारा 3 में है और उस अधिनियम के अध्याय 9 के अर्थ के भीतर आने वाली न्यास प्रकृति की बाध्यता इसके अन्तर्गत आती है;

(घ) "न्यासी” के अन्तर्गत हर ऐसा व्यक्ति आता है जो सम्पत्ति को न्यासतः धारण किए हुए हैं;

(ङ) ऐसे अन्य सब शब्दों और पदों के, जो एतस्मिन् प्रयुक्त हैं किन्तु परिभाषित नहीं हैं, और भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 (1872 का 9) में परिभाषित हैं, वे ही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम में उन्हें क्रमशः समनुदिष्ट हैं।

3. व्यावृतियां –

एतस्मिन् अन्यथा उपबन्धित के सिवाय इस अधिनियम की किसी भी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह

(क) किसी व्यक्ति को विनिर्दिष्ट पालन से भिन्न अनुतोष के किसी ऐसे अधिकार से, जो वह किसी संविदा के अधीन रखता हो, वंचित करती है अथवा

(ख) दस्तावेजों पर भारतीय रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16 ) के प्रवर्तन पर प्रभाव डालती है।

4. विनिर्दिष्ट अनुतोष का व्यक्तिगत सिविल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही अनुदत्त किया जाना, दण्ड विधियों के प्रवर्तन के लिए नहीं -

विनिर्दिष्ट अनुतोष, व्यक्तिगत सिविल अधिकारों के प्रवर्तन के प्रयोजन के लिए ही अनुदत्त किया जा सकता है, न कि किसी दण्ड विधि के प्रवर्तन के प्रयोजन मात्र के लिए।

My Legal Consultants
Free Judiciary Coaching
Free Judiciary Notes
Free Judiciary Mock Tests
Bare Acts