धारा 30 से 34 अध्याय 4 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 4

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की शक्तियां और मजिस्ट्रेट तथा पुलिस को सहायता

30. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की शक्तियां ।

पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी से पंक्ति में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सर्वत्र स्थानीय क्षेत्र में, जिसमें वे नियुक्त हैं, उन शक्तियों का प्रयोग कर सकेंगे जिनका प्रयोग अपने थाने की सीमाओं के भीतर ऐसे अधिकारी द्वारा किया जा सकेगा ।

31.जनता कब मजिस्ट्रेट और पुलिस की सहायता करेगी।

प्रत्येक व्यक्ति, ऐसे मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी की सहायता करने के लिए आबद्ध है, जो निम्नलिखित कार्यों में उचित रूप से उसकी सहायता मांगता है,-

क. किसी अन्य ऐसे व्यक्ति को, जिसे ऐसा मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी गिरफ्तार करने के लिए प्राधिकृत है, पकड़ना या उसका निकल भागने से रोकना ; या

ख. शान्ति भंग का निवारण या दमन; या

ग. किसी लोक संपत्ति को क्षति पहुंचाने के प्रयत्न का निवारण ।

32. पुलिस अधिकारी से  भिन्न ऐसे व्यक्ति को सहायता जो वारंट का निष्पादन कर  रहा है ।

जब कोई वारंट, पुलिस अधिकारी से भिन्न किसी व्यक्ति को निदिष्ट है तब कोई भी अन्य व्यक्ति उस वारंट के निष्पादन में सहायता कर सकेगा यदि वह व्यक्ति, जिसे वारंट निदिष्ट है, पास में है और वारंट के निष्पादन में कार्य कर रहा है ।

33. कुछ अपराधों की सूचना जनता द्वारा दिया जाना ।

1. प्रत्येक व्यक्ति, जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की निम्नलिखित धाराओं में से किसी के अधीन दंडनीय किसी अपराध के किए जाने से या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा करने के आशय से अवगत है, अर्थात्:-

I. धारा 103 से धारा 105 (दोनों सहित ) ;

II. धारा 111 से धारा 113 ( दोनों सहित ) ;

III. धारा 140 से धारा 144 ( दोनों सहित ) ;

IV. धारा 147 से धारा 154 ( दोनों सहित ) और धारा 158 ;

V. धारा 178 से धारा 182 (दोनों सहित ) ;

VI. धारा 189 और धारा 191 ;

VII. धारा 274 से धारा 280 (दोनों सहित ) ;

VIII. धारा 307

IX. धारा 309 से धारा 312 (दोनों सहित )

X. धारा 316 की उपधारा (5) ;

XI. धारा 326 से धारा 328 (दोनों सहित ) ; और

XII. धारा 331 और धारा 332,

उचित प्रतिहेतु के अभाव में, जिसे साबित करने का भार इस प्रकार अवगत व्यक्ति पर होगा, ऐसे किए जाने या आशय की सूचना तुरंत निकटतम मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी को देगा ।

2. इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "अपराध” पद के अंतर्गत भारत के बाहर किसी स्थान में किया गया कोई ऐसा कार्य भी है जो यदि भारत में किया जाता तो अपराध होता ।

34. ग्राम के मामलों के संबंध में नियोजित अधिकारियों का कतिपय रिपोर्ट करने का कर्तव्य

1. किसी ग्राम के मामलों के संबंध में नियोजित प्रत्येक अधिकारी और ग्राम में निवास करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, निकटतम मजिस्ट्रेट को या निकटतम पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को, जो भी निकटतर हो, कोई भी जानकारी जो उसके पास निम्नलिखित के बारे में हो, तत्काल संसूचित करेगा, -

क. ऐसे ग्राम में या ऐसे ग्राम के पास किसी ऐसे व्यक्ति का, जो चुराई हुई संपत्ति का कुख्यात प्रापक या विक्रेता है, स्थायी या अस्थायी निवास ;

ख. किसी व्यक्ति का, जिसका वह लुटेरा, निकल भागा सिद्धदोष या उद्घोषित अपराधी होना जानता है या जिसके ऐसा होने का उचित रूप से संदेह करता है, ऐसे ग्राम के किसी भी स्थान में आना-जाना या उसमें से हो कर जाना;

ग. ऐसे ग्राम में या उसके निकट कोई अजमानतीय अपराध या भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 189 और धारा 191 के अधीन दंडनीय कोई अपराध किया जाना या करने का आशय ;

घ. ऐसे ग्राम में या उसके निकट कोई आकस्मिक या अप्राकृतिक मृत्यु होना, या सन्देहजनक परिस्थितियों में कोई मृत्यु होना, या ऐसे ग्राम में या उसके निकट किसी शव का, या शव के अंग का ऐसी परिस्थितियों में, जिनसे उचित रूप से संदेह पैदा होता है कि ऐसी मृत्यु हुई, पाया जाना, या ऐसे ग्राम से किसी व्यक्ति का, ऐसी परिस्थितियों में जिनसे उचित रूप से संदेह पैदा होता है कि ऐसे व्यक्ति के संबंध में अजमानतीय अपराध किया गया है, गायब हो जाना ;

ङ. ऐसे ग्राम के निकट, भारत के बाहर किसी स्थान में ऐसा कोई कार्य किया जाना या करने का आशय जो यदि भारत में किया जाता तो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की निम्नलिखित धाराओं, अर्थात्- धारा 103 धारा 105, धारा 111, धारा 112, धारा 113, धारा 178 से धारा 181 (दोनों सहित), धारा 305, धारा 307, धारा 309 से धारा 312 (दोनों सहित), धारा 326 के खंड (च) और खंड (छ), धारा 331 या धारा 332 में से किसी के अधीन दंडनीय अपराध होता ;

च. व्यवस्था बनाए रखने या अपराध के निवारण या व्यक्ति या संपत्ति की सुरक्षा पर संभाव्यता प्रभाव डालने वाला कोई विषय जिसके संबंध में जिला मजिस्ट्रेट ने राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से किए गए साधारण या विशेष आदेश धारा 309 से धारा 312 (दोनों सहित), धारा 326 के खंड (च) और खंड (छ), धारा 331 या धारा 332 में से किसी के अधीन दंडनीय अपराध होता ;

छ. व्यवस्था बनाए रखने या अपराध के निवारण या व्यक्ति या संपत्ति की सुरक्षा पर संभाव्यता प्रभाव डालने वाला कोई विषय जिसके संबंध में जिला मजिस्ट्रेट ने राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से किए गए साधारण या विशेष आदेश द्वारा उसे निदेश दिया है कि वह उस विषय पर जानकारी संसूचित करे ।

2. इस धारा में,-

I. “ग्राम" के अंतर्गत ग्राम - भूमियां भी हैं ;

II. “उद्घोषित अपराधी" पद के अंतर्गत ऐसा व्यक्ति भी है, जिसे भारत के किसी ऐसे राज्यक्षेत्र में, जिस पर इस संहिता का विस्तार नहीं है, किसी न्यायालय या प्राधिकारी ने किसी ऐसे कार्य के बारे में, अपराधी उद्घोषित किया है, जो यदि उन राज्यक्षेत्रों में, जिन पर इस संहिता का विस्तार है, किया जाता तो भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अधीन दस वर्ष या उससे अधिक के कारावास या आजीवन कारावास या मृत्यु से दंडनीय होगा ;

III. “ग्राम के मामलों के संबंध में नियोजित अधिकारी" शब्दों से ग्राम पंचायत का कोई सदस्य अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत मुखिया और प्रत्येक ऐसा अधिकारी या अन्य व्यक्ति भी है, जो ग्राम के प्रशासन के संबंध में किसी कृत्य का पालन करने के लिए नियुक्त किया गया है । 

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