धारा 111 से 124 अध्याय 8 (कुछ मामलों में सहायता) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 8

कुछ मामलों में सहायता के लिए व्यतिकारी व्यवस्था तथा संपत्ति की कुर्की और समपहरण के लिए प्रक्रिया

111.परिभाषाएं

इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,

क. “ संविदाकारी राज्य" से भारत के बाहर कोई देश या स्थान अभिप्रेत है जिसके संबंध में केंद्रीय सरकार द्वारा संधि के माध्यम से या अन्यथा ऐसे देश की सरकार के साथ कोई व्यवस्था की गई है ;

ख. “पहचान करना” के अंतर्गत यह सबूत स्थापित करना है कि संपत्ति किसी अपराध के किए जाने से व्युत्पन्न हुई है या उसमें उपयोग की गई है ;

ग. “अपराध के आगम" से आपराधिक क्रियाकलापों के (जिनके अंतर्गत मुद्रा अंतरणों को अंतर्वलित करने वाले अपराध हैं) परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से व्युत्पन्न या अभिप्राप्त कोई संपत्ति या ऐसी किसी संपत्ति का मूल्य अभिप्रेत है

घ. “संपत्ति” से भौतिक या अभौतिक, जंगम या स्थावर, मूर्त या अमूर्त हर प्रकार की संपत्ति और आस्ति तथा ऐसी संपत्ति या आस्ति में हक या हित को साक्ष्यित करने वाला विलेख और लिखत अभिप्रेत है जो किसी अपराध के किए जाने से व्युत्पन्न होती है या उसमें उपयोग की जाती है और इसके अंतर्गत अपराध के आगम के माध्यम से अभिप्राप्त संपत्ति है ;

ङ. “पता लगाना” से किसी संपत्ति की प्रकृति, उसका स्रोत, व्ययन, संचलन, हक या स्वामित्व का अवधारण करना अभिप्रेत है ।

112. भारत के बाहर किसी देश या स्थान में अन्वेषण के लिए सक्षम प्राधिकारी को अनुरोधपत्र

1. यदि किसी अपराध के अन्वेषण के अनुक्रम में अन्वेषण अधिकारी या अन्वेषण अधिकारी की पंक्ति से वरिष्ठ कोई अधिकारी यह आवेदन करता है कि भारत के बाहर किसी देश या स्थान में साक्ष्य उपलभ्य हो सकता है तो कोई दांडिक न्यायालय अनुरोधपत्र भेजकर उस देश या स्थान के ऐसे न्यायालय या प्राधिकारी से, जो ऐसे अनुरोधपत्र पर कार्रवाई करने के लिए सक्षम है, यह अनुरोध कर सकेगा कि वह किसी ऐसे व्यक्ति की मौखिक परीक्षा करे, जिसके बारे में यह अनुमान है कि वह मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से अवगत है, और ऐसी परीक्षा के अनुक्रम में किए गए उसके कथन को अभिलिखित करे और ऐसे व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति से उस मामले से संबंधित ऐसे दस्तावेज या चीज को पेश करने की अपेक्षा करे जो उसके कब्जे में है और इस प्रकार लिए गए या संगृहीत सभी साक्ष्य या उसकी अधिप्रमाणित प्रतिलिपि या इस प्रकार संगृहीत चीज को ऐसा पत्र भेजने वाले न्यायालय को अग्रेषित करे ।

2. अनुरोधपत्र ऐसी रीति में पारेषित किया जाएगा जो केंद्रीय सरकार इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे |

3. उपधारा (1) के अधीन अभिलिखित प्रत्येक कथन या प्राप्त प्रत्येक दस्तावेज या चीज इस संहिता के अधीन अन्वेषण के दौरान संगृहीत साक्ष्य समझा जाएगा ।

113. भारत के बाहर के किसी देश या स्थान से भारत में अन्वेषण के लिए किसी न्यायालय या प्राधिकारी को अनुरोधपत्र

1. भारत के बाहर के किसी देश या स्थान के ऐसे न्यायालय या प्राधिकारी से, जो उस देश या स्थान में अन्वेषणाधीन किसी अपराध के संबंध में किसी व्यक्ति की परीक्षा करने के लिए या किसी दस्तावेज या चीज को पेश कराने के लिए उस देश या स्थान में ऐसा पत्र भेजने के लिए सक्षम है, अनुरोधपत्र की प्राप्ति पर, केंद्रीय सरकार यदि वह उचित समझे तो,

i. उसे मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या ऐसे महानगर मजिस्ट्रेट या न्यायिक मजिस्ट्रेट को, जिसे वह इस निमित्त नियुक्त करे, अग्रेषित कर सकेगी जो तब उस व्यक्ति को अपने समक्ष समन करेगा तथा उसके कथन को अभिलिखित करेगा या दस्तावेज या चीज को पेश करवाएगा; या

ii. उस पत्र को अन्वेषण के लिए किसी पुलिस अधिकारी को भेज सकेगा जो तब उसी रीति में अपराध का अन्वेषण करेगा, मानो वह अपराध भारत के भीतर किया गया हो ।

2. उपधारा (1) के अधीन लिए गए या संगृहीत सभी साक्ष्य, उसकी अधिप्रमाणित प्रतिलिपियां या इस प्रकार संगृहीत चीज, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी द्वारा उस न्यायालय या प्राधिकारी को, जिसने अनुरोधपत्र भेजा था, पारेषित करने के लिए केंद्रीय सरकार को ऐसी रीति में, जिसे केंद्रीय सरकार उचित समझे, अग्रेषित करेगा ।

114. व्यक्तियों का अंतरण सुनिश्चित करने में सहायता

1. जहां भारत का कोई न्यायालय, किसी आपराधिक मामले के संबंध में यह चाहता है कि हाजिर होने या किसी दस्तावेज या अन्य चीज को पेश करने के लिए, किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए किसी वारंट का, जो उस न्यायालय द्वारा जारी किया गया है, निष्पादन किसी संविदाकारी राज्य के किसी स्थान में किया जाए वहां वह ऐसे वारंट को दो प्रतियों में और ऐसे प्ररूप में ऐसे न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को ऐसे प्राधिकारी के माध्यम से भेजेगा, जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, और, यथास्थिति, वह न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट उसका निष्पादन कराएगा ।

2. यदि, किसी अपराध के किसी अन्वेषण या किसी जांच के दौरान अन्वेषण अधिकारी या अन्वेषण अधिकारी से पंक्ति में वरिष्ठ किसी अधिकारी द्वारा यह आवेदन किया जाता है कि किसी ऐसे व्यक्ति की, जो किसी संविदाकारी राज्य के किसी स्थान में है, ऐसे अन्वेषण या जांच के संबंध में हाजिरी अपेक्षित है और न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी हाजिरी अपेक्षित है तो वह उक्त व्यक्ति के विरुद्ध ऐसे समन या वारंट को तामील और निष्पादन कराने के लिए, दो प्रतियों में, ऐसे न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट को ऐसे प्ररूप में जारी करेगा, जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ।

3. जहां भारत के किसी न्यायालय को किसी आपराधिक मामले के संबंध में, किसी संविदाकारी राज्य के किसी न्यायालय, न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया कोई वारंट किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए प्राप्त होता है जिसमें ऐसे व्यक्ति से उस न्यायालय में या किसी अन्य अन्वेषण अभिकरण के समक्ष हाजिर होने या हाजिर होने और कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने की अपेक्षा की गई है वहां वह उसका निष्पादन इस प्रकार कराएगा मानो यह ऐसा वारंट हो जो उसे भारत के किसी अन्य न्यायालय से अपनी स्थानीय अधिकारिता के भीतर निष्पादन के लिए प्राप्त हुआ है ।

4. जहां उपधारा (3) के अनुसरण में किसी संविदाकारी राज्य को अंतरित कोई व्यक्ति भारत में बंदी है वहां भारत का न्यायालय या केंद्रीय सरकार ऐसी शर्तें अधिरोपित कर सकेगी जो वह न्यायालय या सरकार ठीक समझे ।

5. जहां उपधारा (1) या उपधारा (2) के अनुसरण में भारत को अंतरित कोई व्यक्ति किसी संविदाकारी राज्य में बंदी है वहां भारत का न्यायालय यह सुनिश्चित करेगा कि उन शर्तों का, जिनके अधीन बंदी भारत को अंतरित किया जाता है, अनुपालन किया जाए और ऐसे बंदी को ऐसी शर्तों के अधीन अभिरक्षा में रखा जाएगा, जो केंद्रीय सरकार लिखित रूप में निर्दिष्ट करे ।

115. संपत्ति की कुर्की या समपहरण के आदेशों के संबंध में सहायता ।

1. जहां भारत के किसी न्यायालय के पास यह विश्वास करने के युक्तियुक्त आधार हैं कि किसी व्यक्ति द्वारा अभिप्राप्त कोई संपत्ति ऐसे व्यक्ति को किसी अपराध के किए जाने से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से व्युत्पन्न या अभिप्राप्त हुई है वहां वह ऐसी संपत्ति की कुर्की या समपहरण का कोई आदेश दे सकेगा जो वह धारा 116 से धारा 122 (दोनों सहित ) के उपबंधों के अधीन ठीक समझे ।

2. जहां न्यायालय ने उपधारा (1) के अधीन किसी संपत्ति की कुर्की या समपहरण का कोई आदेश दिया है और ऐसी संपत्ति के किसी संविदाकारी राज्य में होने का संदेह है वहां न्यायालय, संविदाकारी राज्य के न्यायालय या प्राधिकारी को ऐसे आदेश के निष्पादन के लिए अनुरोधपत्र जारी कर सकेगा ।

3. जहां केंद्रीय सरकार को किसी संविदाकारी राज्य के किसी न्यायालय या किसी प्राधिकारी से अनुरोधपत्र प्राप्त होता है जिसमें किसी ऐसी संपत्ति की भारत में कुर्की या समपहरण करने का अनुरोध किया गया है जो किसी व्यक्ति द्वारा किसी ऐसे अपराध के किए जाने से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से व्युत्पन्न या अभिप्राप्त की गई है जो उस संविदाकारी राज्य में किया गया है वहां केंद्रीय सरकार, ऐसा अनुरोधपत्र ऐसे किसी न्यायालय को, जिसे वह ठीक समझे, यथास्थिति, धारा 116 से धारा 122 (दोनों सहित) के या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अनुसार निष्पादन के लिए अग्रेषित कर सकेगी ।

116. विधिविरुद्धता अर्जित संपत्ति की पहचान करना

1. न्यायालय, धारा 115 की उपधारा (1) के अधीन या उसकी उपधारा (3) के अधीन अनुरोधपत्र प्राप्त होने पर पुलिस उप निरीक्षक से अनिम्न पंक्ति के किसी पुलिस अधिकारी को ऐसी संपत्ति का पता लगाने और पहचान करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करने के लिए निदेश देगा ।

2. उपधारा (1) में निर्दिष्ट कार्रवाई के अंतर्गत, किसी व्यक्ति, स्थान, संपत्ति, आस्ति दस्तावेज, किसी बैंक या सार्वजनिक वित्तीय संस्था की लेखाबही या किसी अन्य सुसंगत विषय की बाबत जांच, अन्वेषण या सर्वेक्षण भी हो सकेगा।

3. उपधारा (2) में निर्दिष्ट कोई जांच, अन्वेषण या सर्वेक्षण, उक्त न्यायालय द्वारा इस निमित्त दिए गए निदेशों के अनुसार उपधारा (1) में उल्लिखित अधिकारी द्वारा किया जाएगा ।

117 सम्पत्ति का अभिग्रहण या कुर्की

1. जहां धारा 116 के अधीन जांच या अन्वेषण करने वाले किसी अधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि किसी संपत्ति के, जिसके संबंध में ऐसी जांच या अन्वेषण किया जा रहा है, छिपाए जाने, अंतरित किए जाने या उसके विषय में किसी रीति से व्यवहार किए जाने की संभावना है जिसका परिणाम ऐसी संपत्ति का व्ययन होगा वहां वह उक्त संपत्ति का अभिग्रहण करने का आदेश कर सकेगा और जहां ऐसी संपत्ति का अभिग्रहण करना साध्य नहीं है वहां वह कुर्की का आदेश यह निदेश देते हुए कर सकेगा कि ऐसी संपत्ति ऐसा आदेश करने वाले अधिकारी की पूर्व अनुज्ञा के बिना अंतरित नहीं की जाएगी या उसके विषय में अन्यथा व्यवहार नहीं किया जाएगा और ऐसे आदेश की एक प्रति की तामील संबंधित व्यक्ति पर की जाएगी ।

2. उपधारा (1) के अधीन किए गए किसी आदेश का तब तक कोई प्रभाव नहीं होगा, जब तक उक्त आदेश की, उसके किए जाने से तीस दिन की अवधि के भीतर उक्त" न्यायालय के आदेश द्वारा पुष्टि नहीं कर दी जाती है ।

118. इस अध्याय के अधीन अभिगृहीत या समपहृत संपत्ति का प्रबंध

1. न्यायालय उस क्षेत्र के, जहां संपत्ति स्थित है, जिला मजिस्ट्रेट को, या अन्य किसी अधिकारी को, जो जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नामनिर्देशित किया जाए, ऐसी संपत्ति के प्रशासक के कृत्यों का पालन करने के लिए नियुक्त कर सकेगा।

2. उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किया गया प्रशासक, उस संपत्ति को, जिसके संबंध में धारा 117 की उपधारा (1) के अधीन या धारा 120 के अधीन आदेश किया गया है, ऐसी रीति से और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो केंद्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाएं, प्राप्त करेगा और उसका प्रबंध करेगा ।

3. प्रशासक, केंद्रीय सरकार को समपहृत संपत्ति के व्ययन के लिए ऐसे उपाय भी करेगा, जो केंद्रीय सरकार निदिष्ट करे ।

119.संपत्ति के समपहरण की सूचना

1. यदि, धारा 116 के अधीन जांच, अन्वेषण या सर्वेक्षण के परिणामस्वरूप, न्यायालय के पास यह विश्वास करने का कारण है कि सभी या कोई संपत्ति, अपराध का आगम है तो वह ऐसे व्यक्ति पर ( जिसे इसमें इसके पश्चात् प्रभावित व्यक्ति कहा गया है) ऐसी सूचना की तामील कर सकेगा, जिसमें उससे यह अपेक्षा की गई हो कि वह उस सूचना में विनिर्दिष्ट तीस दिन की अवधि के भीतर उस आय, उपार्जन या आस्तियों के वे स्रोत, जिनसे या जिनके द्वारा उसने ऐसी संपत्ति अर्जित की है, वह साक्ष्य जिस पर वह निर्भर करता है तथा अन्य सुसंगत जानकारी और विशिष्टियां उपदर्शित करे और यह कारण बताए कि, यथास्थिति, ऐसी सभी या किसी संपत्ति को अपराध का आगम क्यों न घोषित किया जाए और उसे केंद्रीय सरकार को क्यों न समपहृत कर लिया जाए ।

2. जहां किसी व्यक्ति को उपधारा (1) के अधीन सूचना में यह विनिर्दिष्ट किया जाता है कि कोई संपत्ति ऐसे व्यक्ति की ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा धारित है वहां सूचना की एक प्रति की ऐसे अन्य व्यक्ति पर भी तामील की जाएगी ।

120.कतिपय मामलों मैं संपत्ति का समपहरण

1. न्यायालय, धारा 119 के अधीन जारी की गई कारण बताओ सूचना के स्पष्टीकरण पर यदि कोई हो, और उसके समक्ष उपलब्ध सामग्रियों पर विचार करने के पश्चात् तथा प्रभावित व्यक्ति को (और ऐसे मामले में जहां प्रभावित व्यक्ति सूचना में विनिर्दिष्ट कोई संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से धारित करता है वहां ऐसे अन्य व्यक्ति को भी) सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात्, आदेश द्वारा, अपना यह निष्कर्ष अभिलिखित करेगा कि प्रश्नगत सभी या कोई संपत्ति अपराध का आगम है या नहीं

परंतु यदि प्रभावित व्यक्ति (और मामले में जहां प्रभावित व्यक्ति सूचना में विनिर्दिष्ट कोई संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से धारित करता है वहां ऐसा अन्य व्यक्ति भी) न्यायालय के समक्ष हाजिर नहीं होता है या कारण बताओ सूचना में विनिर्दिष्ट तीस दिन की अवधि के भीतर उसके समक्ष अपना मामला अभ्यावेदित नहीं करता है तो न्यायालय, अपने समक्ष उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर इस उपधारा के अधीन एकपक्षीय निष्कर्ष अभिलिखित करने के लिए अग्रसर हो सकेगा ।

2. जहां न्यायालय का यह समाधान हो जाता है कि कारण बताओ सूचना में निर्दिष्ट संपत्ति में से कुछ अपराध का आगम है किंतु ऐसी संपत्ति की विनिर्दिष्ट रूप से पहचान करना संभव नहीं है वहां न्यायालय के लिए ऐसी संपत्ति को विनिर्दिष्ट करना जो उसके सर्वोत्तम निर्णय में अपराध का आगम है और तद्रुसार उपधारा (1) के अधीन निष्कर्ष अभिलिखित करना विधिपूर्ण होगा ।

3. जहां न्यायालय इस धारा के अधीन इस आशय का निष्कर्ष अभिलिखित करता है कि कोई संपत्ति अपराध का आगम है वहां ऐसी संपत्ति सभी विल्लंगमों से मुक्त होकर केंद्रीय सरकार को समपहृत हो जाएगी ।

4. जहां किसी कंपनी के कोई शेयर इस धारा के अधीन केंद्रीय सरकार को समपहृत हो जाते हैं वहां कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का  8) में या कंपनी के संगम - अनुच्छेद में अंतरिती रूप में किसी बात के होते हुए भी, कंपनी केंद्रीय सरकार को ऐसे शेयरों के तुरंत रजिस्टर करेगी ।

121. समपहरण के बदले जुर्माना

1. जहां न्यायालय यह घोषणा करता है कि कोई संपत्ति धारा 120 के अधीन केंद्रीय सरकार को समपहृत हो गई है और यह ऐसा मामला है जहां ऐसी संपत्ति के केवल कुछ भाग का स्रोत न्यायालय को समाधानप्रद रूप में साबित नहीं किया गया है वहां वह प्रभावित व्यक्ति को, समपहरण के बदले में ऐसे भाग के बाजार मूल्य के बराबर जुर्माने का संदाय करने का विकल्प देते हुए, आदेश देगा ।

2. उपधारा (1) के अधीन जुर्माना अधिरोपित करने का आदेश देने के पूर्व, प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा ।

3. जहां प्रभावित व्यक्ति, उपधारा (1) के अधीन देय जुर्माने का ऐसे समय के भीतर, जो उस निमित्त अनुज्ञात किया जाए, संदाय कर देता है वहां न्यायालय, आदेश द्वारा, धारा 120 के अधीन की गई समपहरण की घोषणा का प्रतिसंहरण कर सकेगा और तब ऐसी संपत्ति निर्मुक्त हो जाएगी ।

122.कुछ अंतरणों का अकृत और शून्य होना

जहां धारा 117 की उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश करने या धारा 119 के अधीन कोई सूचना जारी करने के पश्चात्, उक्त आदेश या सूचना में निर्दिष्ट कोई संपत्ति किसी भी रीति से अंतरित कर दी जाती है वहां इस अध्याय के अधीन कार्यवाहियों के प्रयोजनों के लिए, ऐसे अंतरणों पर ध्यान नहीं दिया जाएगा और यदि ऐसी संपत्ति बाद में धारा 120 के अधीन केंद्रीय सरकार को समपहृत हो जाती है तो ऐसी संपत्ति का अंतरण धारा 120 के अधीन केंद्रीय सरकार को समपहृत हो जाती है तो ऐसी संपत्ति का अंतरण अकृत और शून्य समझा जाएगा ।

123. अनुरोधपत्र की बाबत प्रक्रिया

इस अध्याय के अधीन केंद्रीय सरकार को किसी संविदाकारी राज्य से प्राप्त प्रत्येक अनुरोधपत्र, समन या वारंट और किसी संविदाकारी राज्य को पारेषित किया जाने वाला प्रत्येक अनुरोधपत्र, समन या वारंट केंद्रीय सरकार द्वारा, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति से जो केंद्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, यथास्थिति, संविदाकारी राज्य को पारेषित किया जाएगा या भारत के संबंधित न्यायालय को भेजा जाएगा ।

124. इस अध्याय का लागू होना

केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि ऐसे संविदाकारी राज्य के संबंध में, जिसके साथ व्यतिकारी व्यवस्था की गई है, इस अध्याय का लागू होना ऐसी शर्तों, अपवादों या अर्हताओं के अधीन होगा जो उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं।

 

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