धारा 513 से 519 अध्याय 38 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 38

कुछ अपराधों का संज्ञान करने के लिए परिसीमा

513.परिभाषा

इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए, जब तक संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो, " परिसीमा - काल" से किसी अपराध का संज्ञान करने के लिए धारा 514 में विनिर्दिष्ट अवधि अभिप्रेत है ।

514. परिसीमा काल की समाप्ति के पश्चात् संज्ञान का वर्जन

1. इस संहिता में अन्यत्र जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, कोई न्यायालय उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट प्रवर्ग के किसी अपराध का संज्ञान परिसीमा- काल की समाप्ति के पश्चात् नहीं करेगा ।

2. परिसीमा-काल, -

क. छह मास होगा, यदि अपराध केवल जुर्माने से दंडनीय है ;

ख. एक वर्ष होगा, यदि अपराध एक वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय है ;

ग. तीन वर्ष होगा, यदि अपराध एक वर्ष से अधिक किन्तु तीन वर्ष से अनधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय है ।

3. इस धारा के प्रयोजनों के लिए उन अपराधों के संबंध में, जिनका एक साथ विचारण किया जा सकता है, परिसीमा- काल उस अपराध के प्रतिनिर्देश से अवधारित किया जाएगा जो यथास्थिति, कठोरतर या कठोरतम दंड से दंडनीय है ।

स्पष्टीकरण

परिसीमा की अवधि संगणित करने के प्रयोजन के लिए, सुसंगत तारीख धारा 223 के अधीन शिकायत प्रस्तुत करने की तारीख या धारा 173 के सूचना अभिलिखित करने की तारीख होगी ।

515 परिसीमा काल का प्रारंभ

1. किसी अपराधी के संबंध में परिसीमा- काल,

क. अपराध की तारीख को प्रारंभ होगा ; या

ख. जहां अपराध के किए जाने की जानकारी अपराध द्वारा व्यथित व्यक्ति को या किसी पुलिस अधिकारी को नहीं है वहां उस दिन प्रारंभ होगा जिस दिन प्रथम बार ऐसे अपराध की जानकारी ऐसे व्यक्ति या ऐसे पुलिस अधिकारी को होती है, इनमें से जो भी पहले हो या;

ग. जहां यह ज्ञात नहीं है कि अपराध किसने किया है, वहां उस दिन प्रारंभ होगा जिस दिन प्रथम बार अपराधी का पता अपराध द्वारा व्यथित व्यक्ति को या अपराध का अन्वेषण करने वाले पुलिस अधिकारी को चलता  है, इनमें से जो भी पहले हो ।

2. उक्त अवधि की संगणना करने में, उस दिन को छोड़ दिया जाएगा जिस दिन ऐसी अवधि की संगणना की जानी है ।

516 कतिपय मामलों में समय का अपवर्जन

1. परिसीमा काल की संगणना करने में, उस समय का अपवर्जन किया जाएगा, जिसके दौरान कोई व्यक्ति चाहे प्रथम बार के न्यायालय में या अपील या पुनरीक्षण न्यायालय में अपराधी के विरुद्ध अन्य अभियोजन सम्यक् तत्परता से चला रहा है :

परन्तु ऐसा अपवर्जन तब तक नहीं किया जाएगा जब तक अभियोजन उन्हीं तथ्यों से संबंधित न हो और ऐसे न्यायालय में सद्भावपूर्वक न किया गया हो जो अधिकारिता में दोष या इसी प्रकार के अन्य कारण से उसे ग्रहण करने में असमर्थ हो ।

2. जहां किसी अपराध की बाबत अभियोजन का संस्थित किया जाना किसी व्यादेश या आदेश द्वारा रोक दिया गया है वहां परिसीमा काल की संगणना करने में व्यादेश या आदेश के बने रहने की अवधि को, उस दिन को, जिसको वह जारी किया गया था या दिया गया था और उस दिन को, जिस दिन उसे वापस लिया गया था, अपवर्जित किया जाएगा ।

3. जहां किसी अपराध के अभियोजन के लिए सूचना दी गई है, या जहां तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी की पूर्व अनुमति या मंजूरी किसी अपराध की बाबत अभियोजन संस्थित करने के लिए अपेक्षित है वहां परिसीमा- काल की संगणना करने में, ऐसी सूचना की अवधि, या, यथास्थिति ऐसी अनुमति या मंजूरी प्राप्त करने के लिए आवश्यक समय अपवर्जित किया जाएगा ।

स्पष्टीकरण

सरकार या किसी अन्य प्राधिकारी की अनुमति या मंजूरी प्राप्त करने के लिए आवश्यक समय की संगणना करने में उस तारीख का जिसको अनुमति या मंजूरी प्राप्त करने के लिए आवेदन दिया गया था और उस तारीख का जिसको सरकार या अन्य प्राधिकारी का आदेश प्राप्त हुआ, दोनों का अपवर्जन किया जाएगा ।

4. परिसीमा- काल की संगणना करने में, वह समय अपवर्जित किया जाएगा जिसके दौरान अपराधी-

क. भारत से या भारत से बाहर किसी राज्यक्षेत्र से जो केन्द्रीय सरकार के प्रशासन के अधीन है, अनुपस्थित रहा है; या

ख. फरार होकर या अपने को छिपाकर गिरफ्तारी से बचता है |

517. जिस तारीख को न्यायालय बंद हो उस तारीख का अपवर्जन

यदि परिसीमा - काल उस दिन समाप्त होता है जब न्यायालय बंद है तो न्यायालय उस दिन संज्ञान कर सकता है जिस दिन न्यायालय पुनः खुलता है ।

स्पष्टीकरण

न्यायालय उस दिन इस धारा के अर्थान्तर्गत बंद समझा जाएगा जिस दिन अपने सामान्य काम के घंटों में वह बंद रहता है ।

518. चालू रहने वाला अपराध

किसी चालू रहने वाले अपराध की दशा में नया परिसीमा- काल उस समय के प्रत्येक क्षण से प्रारंभ होगा जिसके दौरान अपराध चालू रहता है।

519. कतिपय मामलों में परिसीमा-काल का विस्तारण

इस अध्याय के पूर्ववर्ती उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई भी न्यायालय किसी अपराध का संज्ञान परिसीमा- काल के अवसान के पश्चात् कर सकता है यदि मामले के तथ्यों या परिस्थितियों से उसका समाधान हो जाता है कि विलंब का उचित रूप से स्पष्टीकरण कर दिया गया है या न्याय के हित में ऐसा करना आवश्यक है ।

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