धारा 168 से 172 अध्याय 12 (पुलिस का निवारक कार्य) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 12

पुलिस का निवारक कार्य

168.पुलिस का संज्ञेय अपराधों का निवारण करना

प्रत्येक पुलिस अधिकारी किसी संज्ञेय अपराध के किए जाने का निवारण करने के प्रयोजन से अन्तःक्षेप कर सकेगा और अपनी पूरी सामर्थ्य से उसे निवारित करेगा ।

169. संज्ञेय अपराधों के किए जाने की परिकल्पना की इत्तिला

प्रत्येक पुलिस अधिकारी, जिसे किसी संज्ञेय अपराध को करने की परिकल्पना की इत्तिला प्राप्त होती है, ऐसी इत्तिला की संसूचना उस पुलिस अधिकारी को, जिसके वह अधीनस्थ है, और किसी ऐसे अन्य अधिकारी को देगा जिसका कर्तव्य किसी ऐसे अपराध के किए जाने का निवारण या संज्ञान करना है ।

170. संज्ञेय अपराधों का किया जाना रोकने के लिए गिरफ्तारी

1. कोई पुलिस अधिकारी जिसे कोई संज्ञेय अपराध करने की परिकल्पना का पता है, ऐसी परिकल्पना करने वाले व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के आदेशों के बिना और वारंट के बिना उस दशा में गिरफ्तार कर सकता है जिसमें ऐसे अधिकारी को प्रतीत होता है कि उस अपराध का किया जाना अन्यथा नहीं रोका जा सकता ।

2. उपधारा (1) के अधीन गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के समय से चौबीस घंटे की अवधि से अधिक के लिए अभिरक्षा में उस दशा के सिवाय निरुद्ध नहीं रखा , जाएगा जिसमें उसका और आगे निरुद्ध रखा जाना इस संहिता के या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के किन्हीं अन्य उपबंधों के अधीन अपेक्षित या प्राधिकृत है ।

171.लोक संपत्ति की हानि का निवारण

किसी पुलिस अधिकारी की दृष्टिगोचरता में किसी भी जंगम या स्थावर लोक संपत्ति को हानि पहुंचाने का प्रयत्न किए जाने पर वह उसका, या किसी लोक भूमि-चिह्न या बोया या नौपरिवहन के लिए प्रयुक्त अन्य चिह्न के हटाए जाने या उसे हानि पहुंचाए जाने का, निवारण करने के लिए अपने ही प्राधिकार से अंतःक्षेप कर सकता है । का, निवारण करने के लिए अपने ही प्राधिकार से अंतःक्षेप कर सकता है ।

 172.व्यक्तियों का पुलिस के युक्तियुक्त निदेशों के अनुरूप बाध्य होना 

1. सभी व्यक्ति इस अध्याय के अधीन उनके किसी कर्तव्यों को पूरा करने में दिए गए पुलिस अधिकारी के युक्तियुक्त निदेशों के अनुरूप बाध्य होंगे ।

2. कोई पुलिस अधिकारी उपधारा (1) के अधीन उसके द्वारा दिए गए निदेशों के अनुरूप किसी व्यक्ति को प्रतिरोध करने, इन्कार करने, अवज्ञा करने या अवहेलना करने के लिए निरुद्ध कर सकेगा या हटा सकेगा और या तो ऐसे व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाएगा या छोटे मामलों में उसे यथासंभव शीघ्रता से चौबीस घंटे की अवधि के भीतर मुक्त कर सकेगा ।

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