धारा 39 से  46 अध्याय 9 प्रकीर्ण

धारा 39 से 46 अध्याय 9 प्रकीर्ण

अध्याय 9

प्रकीर्ण

39 विशेषज्ञ आदि की सहायता लेने के लिए बालक के लिए मार्गनिर्देश -

राज्य सरकार, ऐसे नियमों के अधीन रहते हुए जो इस निमित्त बनाए जाएं, गैर-सरकारी संगठनों, वृत्तिकों और विशेषज्ञों या ऐसे व्यक्तियों जिनके पास मनोविज्ञान, सामाजिक कार्य, चिकित्सीय स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और बाल विकास में ज्ञान है, बालक की सहायता करने के लिए पूर्व विचारण और विचारण प्रक्रम पर सहयोजित करने के लिए मार्गनिर्देश तैयार करेगी ।

40. विधिक काउन्सेल की सहायता लेने का बालक का अधिकार-

दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (1974 का 2) की धारा 301 के परंतुक के अधीन रहते हुए बालक का कुटुंब या संरक्षक इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए अपनी पंसद के विधिक काउंसेल की सहायता लेने के लिए हकदार होंगें :

परंतु यदि बालक का कुटुंब या संरक्षक विधिक का काउंसेल का व्यय वहन करने में असमर्थ है तो विधिक सेवा प्राधिकरण उसको वकील उपलब्ध कराएगा।

41. कतिपय मामलों में धारा 3 से धारा 13 तक के उपबंधों का लागू होना-  

धारा 3 से धारा 13 (जिसमें दोनों सम्मिलित हैं) तक के उपबंध बालक की चिकित्सीय परीक्षा या चिकित्सीय उपचार की दशा में तब लागू नहीं होंगे जब ऐसी चिकित्सीय परीक्षा या चिकित्सीय उपचार उसके माता-पिता या संरक्षक की सहमति से किए जा रहे हों।

1[42. आनुकल्पिक दंड –

जहां किसी कार्य या लोप से इस अधिनियम के अधीन और भारतीय दंड संहिता (1860 का 45 ) की धारा 166क, धारा 354क, धारा 354ख, धारा 354ग, धारा 354ष, धारा 370, धारा 370क, धारा 375, धारा 376 2[ धारा 376क धारा 376कख, धारा 376ख धारा 376ग, धारा 376, 376षक, ] 376पख 3[376ङ, धारा 509 के अधीन या सूचना प्रोद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21 ) की धारा 67ख के अधीन ] भी दंडनीय कोई अपराध गठित होता है वहां, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, ऐसे अपराध का दोषी पाया गया अपराधी उस दंड का भागी होगा, जो इस अधिनियम के अधीन या भारतीय दंड संहिता के अधीन मात्रा में गुरुतर है।

(1. 2013 के अधिनियम सं० 13 की धारा 29 द्वारा प्रतिस्थापित।)

(2. 2018 के अधिनियम सं० 22 की धारा 25 द्वारा (21.4.2018 से) 'धारा 376, 376ग, 376ष शब्दों, अंडों और अधरों के स्थान पर प्रतिस्थापित।)

(3. 2019 के अधिनियम सं० 25 की धारा धारा 376, 376ग 3760 शब्दों, अंडों और अक्षरों के स्थान पर धारा 10 द्वारा 16.08.2019 से धारा 3765 या धारा 509 के अधीन शब्दों, अंकों और अक्षरों के स्थान पर प्रतिस्थापित।)

42 क. अधिनियम का किसी अन्य विधि के अल्पीकरण में होना-

इस अधिनियम के उपबंध तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अतिरिक्त होंगे न कि उनके अल्पीकरण में और किसी असंगति की दशा में इस अधिनियम के उपबंधों का उस असंगति की सीमा तक ऐसी किसी विधि के उपबंधों पर अध्यारोही प्रभाव होगा ।]

43. अधिनियम के बारे में लोक जागरुकता –

केन्द्रीय सरकार और प्रत्येक राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सभी उपाय करेंगी कि

(क) साधारण जनता, बालकों के साथ ही उनके माता-पिता और संरक्षकों को इस अधिनियम के उपबंधों के प्रति जागरुक बनाने के लिए इस अधिनियम के उपबंधों का मीडिया, जिसके अंतर्गत टेलीविजन, रेडियो और प्रिंट मीडिया भी सम्मिलित है, के माध्यम से नियमित अंतरालों पर व्यापक प्रचार किया जाता है;

(ख) केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों के अधिकारियों और अन्य संबद्ध व्यक्तियों (जिसके अन्तर्गत पुलिस अधिकारी भी हैं) को अधिनियम के उपबंधों के कार्यान्वयन से संबंधित विषयों पर आवधिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

44. अधिनियम के क्रियान्वयन की मानीटरी -

(1) यथास्थिति बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 (2006 का 4) की धारा 3 के अधीन गठित बालक अधिकार संरक्षण के लिए राष्ट्रीय आयोग या धारा 17 के अधीन गठित बालक अधिकार संरक्षण के लिए राज्य आयोग, उस अधिनियम के अधीन उनको समनुदेशित कृत्यों के अतिरिक्त इस अधिनियम के उपबंधों के क्रियान्वयन की मानीटरी ऐसी रीति से, जो विहित की जाए, करेंगे 1

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट, यथास्थिति, राष्ट्रीय आयोग या राज्य आयोग को इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध से संबंधित किसी मामले की जांच करते समय वही शक्तियां होंगी जो उनको बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 (2006 का 4) के अधीन निहित की गई हैं।

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट, यथास्थिति, राष्ट्रीय आयोग या राज्य आयोग इस धारा के अधीन उनके कार्यकलापों को, बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 (2006 का 4) की धारा 16 में निर्दिष्ट रिपोर्ट में भी सम्मिलित करेंगे ।

45. नियम बनाने की शक्ति -

(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी।

(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः–

1[ (क) धारा 15 की उपधारा (1) के अधीन किसी बालक को संलिप्त करने वाली किसी भी रूप में की अश्लील सामग्री को मिटाने या नष्ट करने या अभिहित प्राधिकारी को रिपोर्ट करने की रीति

(कक) धारा 15 की उपधारा (2) के अधीन किसी बालक को संलिप्त करने वाली किसी भी रूप में की अश्लील सामग्री के बारे में रिपोर्ट करने की रीति ।

2[(कख)] धारा 19 की उपधारा (4), धारा 26 की उपधारा (2) और उपधारा (3) तथा धारा 38 के अधीन किसी अनुवादक या दुभाषिए, किसी विशेष शिक्षक या बालक से संपर्क करने की रीति से सुपरिचित किसी व्यक्ति या उस क्षेत्र के किसी विशेषज्ञ की अर्हताएं और अनुभव तथा संदेय फीस

(ख) धारा 19 की उपधारा (5) के अधीन बालक की देखभाल और संरक्षण तथा आपात चिकित्सीय उपचार,

(ग) धारा 33 की उपधारा (8) के अधीन प्रतिकर का संदाय

(घ) धारा 44 की उपधारा (1) के अधीन अधिनियम के उपबंधों की आवधिक मानीटरी की रीति ।

(1. 2019 के अधिनियम सं० 25 की धारा 11 द्वारा (16.08.2019 से) अंतःस्थापित ।)

(2. 2019 के अधिनियम सं० 25 की धारा 11 द्वारा (16.08.2019 से ) खंड (क) को खंड के रूप में पुनः अक्षरांकित किया गया।)

(3) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा। यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी। यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा। यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

46. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति -

( 1 ) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे उपबंध कर सकेगी, जो उसे कठिनाइयां दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों और जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों :

परंतु कोई आदेश इस धारा के अधीन इस अधिनियम के प्रारंभ से दो वर्ष की अवधि की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश किए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा।

अनुसूची

[धारा 2 (ग) देखिए]

निम्नलिखित के अधीन गठित सशस्त्र बल और सुरक्षा बल

(क) वायु सेना अधिनियम, 1950 ( 1950 का 45);

(ख) सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 46);

(ग) असम राइफल्स अधिनियम, 2006 (2006 का 47);

(घ) बंबई होमगार्ड अधिनियम, 1947 (1947 का 3);

(ङ) सीमा सुरक्षा बल अधिनियम, 1968 (1968 का 47);

(च) केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अधिनियम, 1968 (1968 का 50);

(छ) केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल अधिनियम, 1949 (1949 का 66);

(ज) तटरक्षक अधिनियम, 1978 (1978 का 30);

(झ) दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन अधिनियम, 1946 (1946 का 25);

(ञ) भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल अधिनियम, 1992 (1992 का 35);

(ट) नौसेना अधिनियम, 1957 ( 1957 का 62);

(ठ) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अधिनियम, 2008 (2008 का 34);

(ड) राष्ट्रीय सुरक्षक अधिनियम, 1986 ( 1986 का 47 ) ;

(ढ) रेल संरक्षण बल अधिनियम, 1957 1957 का 23);

(ण) सशस्त्र सीमा बल अधिनियम, 2007 (2007 का 53); (त) विशेष संरक्षा ग्रुप अधिनियम, 1988 (1988 का 34); (थ) प्रादेशिक सेना अधिनियम, 1948 (1948 का 56);

(द) राज्य के सिविल बलों की सहायता करने के लिए और आंतरिक अशांति के दौरान दलों को नियोजित करने के लिए या अन्यथा जिनके अंतर्गत सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, 1958 ( 1958 का 28 ) की धारा 2 के खंड (क) में यथा परिभाषित सशस्त्र बल भी हैं, राज्य विधियों के अधीन गठित राज्य पुलिस बल (जिनके अंतर्गत सशस्त्र कांस्टेबुलरी भी हैं) ।

 

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