
कतिपय गर्भो के रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायियों द्वारा समापन का और उससे सम्बद्ध या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने के लिए अधिनियम।
भारत गणराज्य के बाइसवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ -
(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम 1971 है।
(2) इसका विस्तार [1***] सम्पूर्ण भारत पर है।
[1. जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 (2019 का 34) की पाचवीं अनुसूची, सारणी 1, क्र.सं. 60 द्वारा "जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" शब्दों का (31-10-2019 से) लोप किया गया।
राष्ट्रपति, संविधान के अनुच्छेद 371च के खंड (ढ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम, 1971 (1971 का 34) का, जिसे इसमें इसके पश्चात् उक्त अधिनियम कहा गया है, निम्नलिखित उपांतरणों के अधीन रहते हुए, सिक्किम राज्य पर विस्तार करते हैं. अर्थात्ः-
(i) उक्त अधिनियम में, सिक्किम राज्य में प्रवृत्त न हुई किसी विधि या अविद्यमान किसी कृत्पकारी के किसी प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह राज्य में प्रवृत्त तत्समान विधि या विद्यमान तत्समान कृत्यकारी के प्रति निर्देश है: परन्तु यदि कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न होता है कि कौन ऐसा तत्समान कृत्यकारी है या यदि कोई ऐसा तत्समान कृत्यकारी नहीं है तो केन्द्रीय सरकार यह विनिश्चय करेगी कि ऐसी कृत्यकारी कौन होगा और इस बाबत केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा;
(ii) सिक्किम राज्य में उक्त अधिनियम के उपबंध ऐसी तारीख को, जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करें, प्रवृत्त होते हैं:
परन्त उक्त अधिनियम के भिन्न-भिन्न उपबंधों के लिए और सिक्किम राज्य में भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के लिए भिन्न-भिन्न तारीखें नियत की जा सकेंगी और अधिनियम के प्रारंभ के किसी ऐसे उपबंध के किसी प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह उस क्षेत्र में, जहां उसे प्रवर्तन में लाया गया है. उस उपबंध के प्रवर्तन में आने के प्रति निर्देश हैं। [अधिसूचना संख्या का.आ. 463 (अ) दिनांक 29 मार्च, 2007 (29-6-2007 से प्रवृत्त)])
(3) यह उस तारीख2 को प्रवृत्त होगा जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे।
(2. 32. यह दिनांक 1-4-1972 से प्रवृत्त।)
2. परिभाषाएं-
इस अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो.-
(क) “संरक्षक" से अवयस्क या 3[मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति] के शरीर की देख-रेख का प्रभारी व्यक्ति अभिप्रेत है;
4[(कक) "चिकित्सा बोर्ड" से अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (2ग) के अधीन गठित चिकित्सा बोर्ड अभिप्रेत है;
5[(ख) "मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जिसे मानसिक मंदता से भिन्न किसी मानसिक विकार के कारण उपचार की आवश्यकता है;]
(ग) "अवयस्क" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके बारे में भारतीय वयस्कता अधिनियम, 1875 (1875 का 9) के उपबंधों के अधीन यह समझा जाता है कि उसने वयस्कता प्राप्त नहीं की है;
[3. 2002 के अधिनियम सं. 64 की धारा 2 द्वारा (18-6-2003 से) प्रतिस्थापित।) (4. 2021 के अधिनियम सं. ४ की धारा 2(i) द्वारा (24-9-2021 से) अंतःस्थापित।) (5. 2002 के अधिनियम सं. 64 की धारा 2 द्वारा खण्ड (ख) के स्थान पर (18-6-2003 से) प्रतिस्थापित। ]
(घ) "रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी" से ऐसा चिकित्सा व्यवसायी अभिप्रेत है, जो भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 (1956 का 102) की धारा 2 के खण्ड (ज) में यथापरिभाषित मान्यताप्राप्त चिकित्सीय अर्हता रखता है तथा जिसका नाम राज्य चिकित्सक रजिस्टर में दर्ज कर लिया गया है; और जिसने स्त्रीरोग विज्ञान और प्रसूति विज्ञान में ऐसा अनुभव या प्रशिक्षण प्राप्त किया है जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए।
1[(ङ) "गर्भ का समापन" से चिकित्सीय या शल्य चिकित्सीय पद्धतियों का उपयोग करते हुए किसी गर्भावस्था को समाप्त करने की प्रक्रिया अभिप्रेत है।]
[1. 2021 के अधिनियम सं. 8 की धारा 2(ii) द्वारा (24-9-2021 से) अंतःस्थापित।]
(1) भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) में किसी बात के होते हुए भी, यदि कोई गर्भ किसी रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी द्वारा इस अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार समाप्त किया जाए तो वह चिकित्सा-व्यवसायी उस संहिता के अधीन या किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि के अधीन किसी अपराध का दोषी नहीं होगा।
[(2) उपधारा (4) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, गर्भावस्था का समापन किसी रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी द्वारा वहां किया जा सकेगा.-
(क) जहां गर्भावस्था की समयावधि बीस सप्ताह से अधिक नहीं है, यदि ऐसे चिकित्सा व्यवसायी की; या
(ख) ऐसी स्त्री की कोटि की दशा में, जो इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा विहित की जाएं, जहां गर्भावस्था की समयावधि बीस सप्ताह से अधिक है किंतु चौबीस सप्ताह से अधिक नहीं है, यदि दो से अन्यून रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायियों की, सद्भावपूर्वक यह राय है कि-
(i) गर्भावस्था के जारी रहने से गर्भवती स्त्री के जीवन को जोखिम या उसके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर क्षति अंतर्वलित होगी; या
(ii) इस बात का सारवान अभिप्रेत है कि यदि बालक जन्म लेता तो वह किसी गंभीर शारीरिक या मानसिक अप्रसामान्यतया से ग्रसित होगा।
[2. 2021 के अधिनियम सं. 8 की धारा 3 द्वारा उपधारा (2) के स्थान पर (24-9-2021 से) प्रतिस्थापित। उपधारा (2) प्रतिस्थापन से पूर्व निम्न थी-
(2) उपधारा (4) के उपबंधों के अधीन रहते हुए यह है कि-
(क) जहां गर्भ 12 सप्ताह से अधिक का न हो, वहां यदि ऐसे चिकित्सा व्यवसायी ने. अथवा
(ख) जहां गर्भ बारह सप्ताह से अधिक का हो किंतु बीस सप्ताह से अधिक का न हो, वहां यदि दो से अन्यून रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायियों ने सद्भावपूर्वक यह राय कायम की हो कि-
(i) गर्भ के बने रहने से गर्भवती स्त्री का जीवन जोखिम में पड़ेगा अथवा उसके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को गम्भीर क्षति की जोखिम होगी; अथवा
(ii) इस बात की पर्याप्त जोखिम है कि यदि बच्चा पैदा हुआ तो वह ऐसी शारीरिक या मानसिक अप्रसामान्यताओं से पीड़ित होगा कि वह गम्भीर रूप से विकलांग हो, तो वह गर्भ रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी द्वारा समाप्त किया जा सकेगा।
स्पष्टीकरण 1 - जहां किसी गर्भ के बारे में गर्भवती स्त्री द्वारा यह अभिकथन किया जाए कि यह बलात्संग द्वारा हुआ तो ऐसे गर्भ के कारण होने वाले मनस्ताप के बारे में यह उपधारण की जाएगी कि वह गर्भवती स्त्री के मानसिक स्वास्थ्य को गम्भीर क्षति है।
स्पष्टीकरण 2- जहां किसी विवाहिता स्त्री या उसके पति द्वारा भच्चों की संख्या सीमित रखने के प्रयोजन से उपयोग में लाई गई किसी प्रयुक्ति या व्यवस्था की असफलता के फलस्वरूप कोई गर्भ हो जाए, वहां ऐसे अवांछित गर्भ के कारण होने वाले मनस्ताप के बारे में यह उपधारणा की जा सकेगी कि यह गर्भवती स्त्री के मानसिक स्वास्थ्य को गम्भीर क्षति है। ]
स्पष्टीकरण 1-खंड (क) के प्रयोजनों के लिए, जहां कोई गर्भावस्था किसी स्त्री या उसके भागीदार द्वारा बालकों की संख्या को सीमित करने या गर्भावस्था को रोकने के प्रयोजन के लिए उपयोग की गई किसी युक्ति या पद्धति को असफलता का परिणाम है, तो ऐसी गर्भावस्था द्वारा कारित मनस्ताप, गर्भवती स्त्री के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर क्षति कारित करने की उपधारणा करेगा।
स्पष्टीकरण 2-खंड (क) और खंड (ख) के प्रयोजनों के लिए, जहां किसी गर्भावस्था का किसी गर्भवती स्त्री द्वारा बलात्संग द्वारा कारित किए जाने का अभिकथन किया जाता है, तो गर्भावस्था द्वारा कारित मनस्ताप गर्भवती स्त्री के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर क्षति कारित करने की उपधारणा करेगा।
(2क) रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी, जिनकी विभिन्न गर्भावधियों के गर्भ के समापन के लिए राय की अपेक्षा है. के मानक वे होंगे, जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित किए जाएं।
(2ख) गर्भावस्था की समयावधि से संबंधित उपधारा (2) के उपबंध किसी चिकित्सा व्यवसायी द्वारा गर्भावस्था के समापन को वहां लागू नहीं होंगे, जहां किसी चिकित्सा बोर्ड द्वारा गर्भावस्था के ऐसे समापन को किसी सारवान् भ्रूण-अप्रसामान्यता के निदान द्वारा आवश्यक बना दिया गया है।
(2ग) यथास्थिति, प्रत्येक राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसी शक्ति और कृत्यों का निर्वहन करने के लिए, जो इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा विहित किए जाएं, चिकित्सा बोर्ड नामक एक बोर्ड का गठन करेगा।
(2 घ) चिकित्सा बोर्ड निम्नलिखित से मिलकर बनेगा, अर्थात् ः-
(क) स्त्री रोग विज्ञानी;
(ख) बाल रोग विज्ञानी;
(ग) विकिरण विज्ञानी या पराश्रव्य विज्ञानी; और
(घ) ऐसी संख्या में अन्य सदस्य, जो यथास्थिति, राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किए जाएं।]
(3) इस बात का अवधारण करने में कि गर्भ के बने रहने से उपधारा (2) में यथावर्णित स्वास्थ्य की क्षति की जोखिम होगी या नहीं, गर्भवती स्त्री को वास्तविक या उचित रूप से पूर्वानुमेय परिस्थितियों का विचार किया जा सकेगा।
(4) (क) किसी ऐसी स्त्री का गर्भ, जिसने अठारह वर्ष की आयु प्राप्त न की हो, अथवा जिसने अठारह वर्ष की आयु प्राप्त कर ली हो किन्तु जो 1[मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति] हो, उसके संरक्षक की लिखित सम्मति से ही समाप्त किया जाएगा, अन्यथा नहीं।
(ख) खण्ड (क) में अन्यथा उपवन्धित के सिवाय कोई गर्भ गर्भवती स्त्री की सम्मति से ही समाप्त किया जाएगा, अन्यथा नहीं।
( 1. 2002 के अधिनियम सं. 64 को धारा 3 द्वारा (18-6-2003 से) प्रतिस्थापित।)
1[4. वह स्थान जहां गर्भ समापन किया जा सकेगा - इस अधिनियम के अनुसार किसी गर्भका समापन निम्नलिखित से भिन्न किसी स्थान पर नहीं किया जाएगा-
(क) सरकार द्वारा स्थापित या पारेषित अस्पताल, अधवा
(ख) कोई स्थान, जो तत्समय इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए सरकार या उस सरकार द्वारा गठित किसी ऐसी जिला स्तर समिति द्वारा अनुमोदित हो जहां उक्त समिति के अध्यक्ष के रूप में मुख्य चिकित्सा अधिकारी या जिला स्वास्थ्य अधिकारी हो।
परन्तु जिला स्तर समिति में कम से कम तीन और अधिक से अधिक अध्यक्ष सहित पांच सदस्य जैसा सरकार समय-समय पर विनिर्दिष्ट करे, होंगे।]
(1. 2002 के अधिनियम सं. 64 की धारा 4 द्वारा धारा 4 के स्थान पर (18-6-2003 से) प्रतिस्थापित।)
5. धारा 3 और 4 कब लागू न होंगी -
(1) धारा 4 के उपबंध और धारा 3 की उपधारा (2) के उपबन्धों का उतना भाग जितना गर्भ की अवधि और दो से अन्यून रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायियों की राय के बारे में है, रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी द्वारा गर्भ की उस दशा में समापन को लागू नहीं होगा जब उसने सद्भावपूर्वक यह राय कायम की हो कि उस गर्भ का समापन गर्भवती स्त्री के जीवन को बचाने के लिए तुरन्त आवश्यक है।
2[(2) भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45) में किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा गर्भ का समापन, जो रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी नहीं है, उस संहिता के अधीन ऐसा अपराध होगा, जो कठोर कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष से कम नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय अपराध होगा और वह संहिता इस सीमा तक उपांतरित हो जाएगी।
(3) जो कोई, धारा 4 में उल्लिखित से भिन्न स्थान में किसी गर्भ का समापन करेगा वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष से कम नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा।
(4) कोई व्यक्ति, जो किसी ऐसे स्थान का स्वामी है, जो धारा 4 के खण्ड (ख) के अधीन अनुमोदित नहीं है, कठोर कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष से कम नहीं होगी, किन्तु जो सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा।
(2. 2002 के अधिनियम सं. 64 की धारा 5 द्वारा उपधारा (2) के स्थान पर (18-6-2003 से) प्रतिस्थापित।)
स्पष्टीकरण 1 - इस धारा के प्रयोजनों के लिए , किसी स्थान के सम्बन्ध में "स्वामी" पद से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है, जो किसी ऐसे अस्पताल या स्थान का, चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, जहां इस धारा के अधीन गर्भ का समापन किया जा सकेगा, प्रशासनिक प्रधान है या अन्यथा उसके कार्यकरण या अनुरक्षण के लिए जिम्मेदार है।
स्पष्टीकरण 2-इस धारा के प्रयोजनों के लिए धारा 2 के खण्ड (घ) के उपबन्धों का उतना भाग जितना रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी के स्त्रीरोग-विज्ञान और प्रसूति-विज्ञान का अनुभव या प्रशिक्षण रखने के संबंध में है, लागू नहीं होगा।]
3[5क. स्त्री की निजता का संरक्षण -
(1) कोई रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी किसी स्त्री, जिसकी गर्भावस्था का इस अधिनियम के अधीन समापन किया गया है, के नाम और अन्य विशिष्टियों का सिवाय तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को, प्रकटन नहीं करेगा।
(2) जो कोई उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करेगा, कारावास से, जो एक वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से या दोनों से दंडनीय होगा।]
(3. 2021 के अधिनियम सं. 8 की धारा 4 द्वारा (24-9-2021 से) अंतःस्थापित।)
6. नियम बनाने की शक्ति -
(1) केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए नियम राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, बना सकेगी।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सब विषयों के लिए या उनमें से किसी के लिए उपबन्ध कर सकेंगे, अर्थात् :-
(क) वह अनुभव या प्रशिक्षण या दोनों जो रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यसायी को उस दशा में प्राप्त करना होगा जब उसका आशय कोई गर्भ इस अधिनियम के अधीन समाप्त करने का हो; तथा
1(कक) धारा 3 की उपधारा (2) के खंड (ख) के अधीन स्त्री की कोटि;
(कख) रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी, जिनकी धारा 3 की उपधारा (2क) के अधीन विभिन्न गर्भावधियों के गर्भ के समापन के लिए राय की अपेक्षा है, के मानक;
(कग) धारा 3 को उपधारा (2ग) के अधीन चिकित्सा बोर्ड की शाक्तियां और कृत्य।]
(ख) ऐसे अन्य विषय जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा उपबन्धित किए जाने के लिए अपेक्षित हों या किए जा सकते हों।
(3) इस अधिनियम के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशक्यशीघ्र, संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, उस समय जब वह सत्र में हो, कुल मिलाकर तीस दिन कालावधि के लिए, जो एक सत्र में या दो क्रमवर्ती सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी, रखा जाएगा और यदि उस सत्र के, जिसमें वह ऐसे रखा गया हो, या ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम में कोई उपान्तर करने के लिए सहमत हो जाएं या दोनों सदन सहमत हो जाए कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात्, यथास्थिति, वह नियम ऐसे उपान्तरित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई भी प्रभाव न होगा, किन्तु इस प्रकार कि ऐसा कोई उपान्तर या बातिलकरण उस नियम के अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा।
(1. 2021 के अधिनियम सं. 8 की धारा 5 द्वारा (24-9-2021 से) अंतःस्थापित।)
7. विनियम बनाने की शक्ति -
(1) राज्य सरकार, विनियमों द्वारा,
(क) धारा 3 की उपधारा (2) में यथानिर्दिष्ट में से सम्बद्ध रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी या चिकित्सा-व्यवसायियों द्वारा ऐसे प्ररूप में और ऐसे समय पर, जो उन विनियमों में विनिर्दिष्ट हो, प्रमाणित किए जाने की तथा ऐसे प्रमाणपत्रों के परिरक्षण या व्ययन की अपेक्षा कर सकेगी;
(ख) किसी रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी से, जो गर्भ समाप्त करे, अपेक्षा कर सकेगी कि वह ऐसे समापन की प्रज्ञापना तथा उस समापन से सम्बन्धित अन्य ऐसी जानकारी, जैसी विनियमों में विनिर्दिष्ट की जाए, दे;
(ग) ऐसे विनियमों के अनुसरण में दी गई प्रज्ञापनाएं या जानकारी के, उन व्यक्तियों को तथा उन प्रयोजनों के लिए, जो ऐसे विनियमों में विनिर्दिष्ट किए जाएं, प्रकट किए जाने के सिवाय प्रकटीकरण का प्रतिषेध कर सकेगी।
(2) उपधारा (1) के खण्ड (ख) के आधार पर बनाए गए विनियमों के अनुसरण में दी गई प्रज्ञापना तथा जानकारी राज्य के मुख्य चिकित्सक अधिकारी को दी जाएगी।
2[(2क) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक विनियम बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, राज्य विधान-मंडल के समक्ष रखा जाएगा।]
(2. 2005 के अधिनियम सं. 4 की धारा 2 और अनुसूची द्वारा (11-1-2005 से) अंतःस्थापित।)
(3) कोई व्यक्ति, जो उपधारा (1) के अधीन बनाए गए किसी विनियम का जानबूझकर उल्लंघन करेगा या उसकी अपेक्षाओं का अनुपालन करने में जानबूझकर असफल रहेगा, जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक को हो सकेगा, दण्डनीय होगा।
8. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण-
कोई भी वाद या अन्य विधिक कार्यवाही इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या की जाने के लिए आशयित किसी बात से हुए या होने संभाव्य किसी नुकसान के लिए किसी रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी के विरुद्ध नहीं होगी।