धारा 1 से 18 विस्फोटक अधिनियम, 1884

धारा 1 से 18 विस्फोटक अधिनियम, 1884

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विस्फोटक अधिनियम, 1884

(1884 का अधिनियम संख्यांक 4)1

[26 फरवरी, 1884]

विस्फोटकों के विनिर्माण, कब्जे, प्रयोग, विक्रय,

2[परिवहन, आयात और निर्यात को

विनियमित करने के लिए

अधिनियम

यतः विस्फोटकों के विनिर्माण, कब्जे, प्रयोग, विक्रय, 2[परिवहन, आयात और निर्यात] को विनियमित करना समीचीन है; अतः एतद्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित किया जाता है:-

1.संक्षिप्त नाम -

(1) यह अधिनियम, 3*** विस्फोटक अधिनियम, 1884 कहा जा सकेगा।

स्थानीय विस्तार -

(2) इसका विस्तार 4**** सम्पूर्ण भारत पर है।

2. प्रारंभ  -

(1) यह अधिनियम उस तारीख5 को प्रवृत होगा जिसे केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे।

6*****

3. [1875 के अधिनियम सं० 12 के प्रभाग का निरसन -

भारतीय पत्तन अधिनियम, 1889 (1889 का 10) की धारा 2 तथा अनुसूची 2 द्वारा निरसित ।

7[4. परिभाषाएं -

इस अधिनियम में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-

(क) "वायुयान" से कोई ऐसी मशीन अभिप्रेत है जो वातावरण से पृथ्वी की सतह पर वायु की प्रक्रिया से भिन्न वायु की प्रतिक्रिया द्वारा अवलम्ब प्राप्त कर सकती है, और इसके अन्तर्गत बेलून, चाहे स्थिर हों या अस्थिर, वायु पोत, पतंग, ग्लाइडर और उड्डयन मशीनें हैं;

(ख) "गाड़ी" के अन्तर्गत कोई गाड़ी, वैगन, छकड़ा, ट्रक, यान या भूमि पर माल या यात्रियों को ले जाने का कोई अन्य साधन है चाहे वह किसी प्रकार से चलाया जाए;

(ग) किसी ऐसे क्षेत्र के संबंध में, जिसके लिए पुलिस आयुक्त नियुक्त कर दिया गया है, "जिला मजिस्ट्रेट" से उस क्षेत्र का पुलिस आयुक्त अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत निम्नलिखित भी हैं:-

(क) ऐसे सम्पूर्ण क्षेत्र या उसके किसी भाग पर अधिकारिता का प्रयोग करने वाला ऐसा कोई पुलिस उपायुक्त जो ऐसे क्षेत्र या उसके किसी भाग के संबंध में इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, और

(ख) कोई अपर जिला मजिस्ट्रेटः

(घ) "विस्फोटक" से अभिप्रेत है बारूद, नाइट्रोग्लिसरीन, नाइट्रोग्लिकोल, गनकाटन, डाइनाट्रो-टोल्यून, ट्राई-नाइट्रो-टोल्यून, पिकरिक एसिड, डाई-नाइट्रो-फिनॉल, ट्राई-नाइट्रो रिसार्सिनाल (स्टाइफिनिक एसिड), साइकलो ट्राइमेथिलीन ट्राइ-नाइट्रामाइन, पेन्टा एरिनिटॉल-ट्रेटानाइट्रैट, टेट्रिल, नाइट्रोलग्खानिडीन, लेड एजाइड, लेड स्टाइफारेइनेट, पारे या अन्य धातुः

या फल्मिनेट, डाइएजो-डाइनाइट्रो-फिनाल, रंगी आतिश या अन्य पदार्थ चाहे वह एक रसायन सम्मिश्रण या पदाथों का मिश्रण हो, चाहे वह ठोस या तरल या गैसीय हो, जिसका प्रयोग या विनिर्माण विस्फोट द्वारा व्यावहारिक प्रभाव उत्पन्न करना या आतिशबाजी करना हो; और कुहरा-संकेत, आतिशबाजी, पतीले, राकेट, आघात टोपियां, विस्फोटक प्रेरक, कारतूस, सभी प्रकार के गोलाबारूद और इस खण्ड में यथा परिभाषित विस्फोटक का प्रत्येक अनुकूलन या निर्मित इसके अन्तर्गत है:

(ङ) "निर्यात" से भूमि, समुद्र या वायु मार्ग के बाहर किसी स्थान पर भारत से ले जाना अभिप्रेत है;

(च) "आयात" से भूमि, समुद्र या वायु मार्ग से भारत के बाहर किसी स्थान से भारत में लाना अभिप्रेत है;

(छ) "मास्टर" से.-

(क) किसी जलयान या वायुयान के संबंध में पाइलट, बन्दरगाह मास्टर, सहायक बंदरगाह मास्टर या अर्थिग मास्टर से भिन्न ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है जो तत्समय, यथास्थिति, ऐसे जलयान या वायुयान का भारसाधक या उसका नियंत्रक है; और

(ख) किसी पोत की किसी नौका के संबंध में उस पोत का मास्टर अभिप्रेत है ;

(ज) "विनिर्माण" के अन्तर्गत किसी विस्फोटक के संबंध में निम्नलिखित की प्रक्रिया भी है:-

(1) विस्फोटक को उसके संघटक भागों में विभाजित करने या अन्यथा रूप से तोड़ने या विघटित करने अथवा किसी खराब विस्फोटक को प्रयोग के योग्य बनाना; और

(2) विस्फोटक को फिर से बनाना, उसमें परिवर्तन करना या उसकी मरम्मत करना;

(झ) "विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है।

(ञ) "जलयान" के अन्तर्गत कोई पोत, नौका, पाल-जलयान या किसी अन्य प्रकार का जलयान जो नौपरिवहन के लिए प्रयुक्त किया जाता है चाहे वह पतवारों से या अन्यथा चालित हो और मनुष्यों को या माल को मुख्यतः जल मार्ग द्वारा लाने या ले जाने के लिए बनाई गई कोई अन्य चीज और कसेन भी है।।

[1इसे, संथाल परगना विधि विनियम, 1886 (1886 का 3) और 1899 के विनियम में० 3 की धारा 3 द्वारा यथासंशोधित संथाल परगना व्यवस्थापन विनियम (1872 का 3) की धारा 1 के अधीन , संथाल परगना पर और 1946 के बिहार विनियम में० 2 द्वारा पोरहाट एस्टेट पर लागू किया गया।

विस्फोटक पदार्थों में संबंधित विधि के लिए विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 (1908 का 6) भी देखिए ।

इस अधिनियम का 1962 के चिनियम सं० 12 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा गोवा, दमण और दीव पर उपान्तरों सहित विस्तार किया गया और 1965 के विनियम सं० 6 की धारा 2 और अनुसूची द्वारा (1-7-1965 में) दादरा और नागर हवेली पर और 1965 के विनियम सं० 8 की धारा 3 और अनुसूची । द्वारा (1-10-1967 से) संपूर्ण लक्षद्वीप संघ राज्यक्षेत्र पर विस्तार किया गया और उसे प्रवृत्त किया गया।

यह अधिनियम पांडिचेरी में तारीख 1-10-1963 से प्रवृत्तः देखिए 1963 के विनियम सं० 7 की धारा 3 और अनुसूची । यह अधिनियम, अनुसूचित जिला अधिनियम, 1874 (1874 का 14) की धारा 3(क) के अधीन हजारीबाग, लोहारडागा (जो अब रांची जिला है देखिए कलकत्ता राजपत्र, 1899, भाग 1, पृ० 44), पानामाऊ और मानभूम के जिलों में और छोटा नागपुर प्रभाग के सिंहभूम जिले में परगना डालभूम और कोलहन में प्रवृत्त किया गया देखिए भारत का राजपत्र, 1896, भाग 1, पृष्ठ 972 ।

 2. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 2 द्वारा (2-3-1983 मे) "परिवहन और आयात" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

3. 1978 के अधिनियम में० 32 की धारा 3 द्वारा (2-3-1983 से) "भारतीय" शब्द का लोप किया गया।

4. 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 तथा अनुसूची द्वारा (1-4-1951 में) "भाग या राज्यों को छोड़कर" शब्दों का नोप किया गया।

5. 1 जुलाई, 1887 देखिए भारत का राजपत्र (अंग्रेजी) 1887, भाग 1, पृष्ठ 307।

6.  1891 के अधिनियम में० 12 की धारा 2 और अनुसूची। द्वारा उपधारा (2) निरमित ।

7. 1978 के अधिनियम सं० 32 की धारा 4 द्वारा (2-3-1983 से) प्रतिस्थापित। ] 

5. विस्फोटकों के विनिर्माण, कब्जे, प्रयोग, विक्रय, परिवहन, और आयात का अनुज्ञापन करने के बारे में नियम बनाने की शक्ति -

(1) केन्द्रीय सरकार 1[भारत] 2*** के किसी भाग के लिए इस अधिनियम से संगत नियम, विस्फोटकों या विस्फोटकों के किसी विनिर्दिष्ट वर्ग का विनिर्माण, कब्जा, प्रयोग, विक्रय, 3[परिवहन, आयात और निर्यात ] इन नियमों द्वारा उपबंधित रूप से अनुदत्त अनुज्ञप्ति की शर्तों के अधीन और अनुसार करने से अन्यथा करने को विनियमित या प्रतिषिद्ध करने के लिए नियम बना सकेगी।

(2) इस धारा के अधीन नियम अन्य विषयों के अलावा निम्नलिखित सब था उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे,

अर्थात्;-

(क) वह अधिकारी जिसके द्वारा अनुज्ञप्ति अनुदत्त की जा सकेगी ;

(ख) अनुज्ञप्तियों के लिए प्रभारित की जाने वाली फीसें और अनुज्ञप्तियों के लिए आवेदकों द्वारा व्ययों लेखे संदत्त की जाने वाली (यदि कोई हो) अन्य राशियां ;

(ग) वह रीति जिसमें अनुज्ञप्तियों के लिए आवेदन किए जाने चाहिएं, और ऐसे आवेदनों में विनिर्दिष्ट किए जाने बाले विषयः

(घ) वह रीति जिसमें तथा वे शर्तें जिन पर और जिनके अध्यधीन अनुज्ञप्तियां अनुदत्त की जानी चाहिए;

(ङ) वह कालावधि जिसके लिए अनुज्ञप्तियां प्रवृत रहनी हैं; 4****

5[(इङ) वह प्राधिकारी जिसको धारा 6च के अधीन अपीलें की जा सकेंगी, ऐसे प्राधिकारी द्वारा अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया और वह अवधि जिसके भीतर अपीलें की जाएंगी, ऐसी अपीलों के संबंध में दी जाने वाली फीसें और वे परिस्थितियां जिनके अधीन ऐसी फीसें लौटाई जा सकेंगी ;

(ङङक) विस्फोटकों की कुल मात्रा जिसे अनुज्ञप्तिधारी एक नियत अवधि में क्रय कर सकता है;

(ङङख) विस्फोटकों के विनिर्माण, परिवहन, आयात या निर्यात के संबंध में की गई सेवाओं के लिए विस्फोटक मुख्य नियंत्रक या उसके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा प्रभारित की जाने वाली फीसें ; ] 

1.  1951 के अधिनियम में 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा "भाग क राज्यों और" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

2. भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा "और सपरिषद् गवर्नर जनरल के पूर्व अनुमोदन से प्रत्येक स्थानीय सरकार अपने प्रशासन के अधीन राज्यक्षेत्रों" शब्द निरमित।

3. 1978 के अधिनियम सं० 32 की धारा 5 द्वारा (2-3-1983 से) "परिवहन और आघात के स्थान पर प्रतिस्थापित।

4. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 5 द्वारा (2-3-1983 में) और" शब्द निरसित।

5. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 5 द्वारा (2-3-1983 में) अंतःस्थापित । 

(च) वह छूट, जो पूर्णतः या शर्तों के अध्यधीन किन्हीं विस्फोटकों को 1[या किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को। इन नियमों के प्रवर्तन से, दी जानी है।

2*****

3[5क. उन व्यक्यिों द्वारा जो कुछ विस्फोटकों का पहले से ही कारबार कर रहे हैं, अनुज्ञप्ति के बिना कुछ अवधि के लिए ऐसा कारबार करते रहना-

धारा 5 में या इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों में किसी बात के होते हुए भी ऐसा कोई व्यक्ति, जो भारतीय विस्फोटक (संशोधन) अधिनियम, 1978 (1978 का 32) के प्रारंभ के ठीक पूर्व किसी विस्फोटक के विनिर्माण, विक्रय, परिवहन, आयात या निर्यात का कारबार कर रहा था, जिसके लिए भारतीय विस्फोटक (संशोधन) अधिनियम, 1978 द्वारा मूल अधिनियम के संशोधन के पूर्व उसके अधीन कोई अनुज्ञप्ति अपेक्षित नहीं थी,

(क) ऐसे प्रारम्भ की तारीख से तीन मास की अवधि के लिए; या

(ख) यदि तीन मास की उक्त अवधि की समाप्ति के पूर्व ऐसे व्यक्ति ने ऐसे विस्फोटक का ऐसा कारबार करने के लिए इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति अनुदत्त की जाने के लिए आवेदन किया है तो उसके आवेदन के अंतिम रूप से निपटाए जाने तक,

इन दोनों में से जो भी बाद में हो, ऐसे विस्फोटक के संबंध में अनुज्ञप्ति के बिना ऐसा कारबार करते रहने का हकदार होगा ।।

6. विशेषतः खतरनाक विस्फोटकों के विनिर्माण, कब्जे या आयात को प्रतिषिद्ध करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति -

(1) अन्तिम पूर्वगामी धारा के अधीन नियमों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा-

(क) किसी ऐसे विस्फोटक के विनिर्माण, कब्जे या आयात को या तो पूर्णतः या शर्तों के अधीन प्रतिषिद्ध कर सकेगी जो इतने खतरनाक प्रकार का है कि केन्द्रीय सरकार की राय में लोक सुरक्षा के लिए समीचीन है कि अधिसूचना जारी की जाए 4***

4*****

5[(2) सीमाशुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) का किसी ऐसे विस्फोटक के संबंध में जिसके आयात की बाबत इस धारा के अधीन अधिसूचना जारी की गई है और उस विस्फोटक को अन्तर्विष्ट करने वाले जलयान, गाड़ी या वायुयान के संबंध में वहीं प्रभाव होगा जैसा किसी ऐसी चीज के संबंध में, जिसका आयात उसके अधीन प्रतिषिद्ध या विनियमित है और ऐसी चीज को अन्तर्विष्ट करने वाले जलयान, गाड़ी या वायुयान के संबंध में उस अधिनियम का है।।

6*****

7[6क. युवा व्यक्तियों और कुछ अन्य व्यक्तियों द्वारा विस्फोटकों के विनिर्माण, कब्जे, विक्रय या परिवहन पर प्रतिषेध -

इस अधिनियम के पूर्वगामी उपबन्धों में किसी बाते के होते हुए भी,-

(क) कोई व्यक्ति, -

(i) जिसने अठारह वर्ष की आयु पूरी नहीं की है, या

(ii) जो किसी अपराध के लिए, जिसमें हिंसा या नैतिक अधमता अन्तर्ग्रस्त हो, दोषसिद्धि पर कम से कम छह मास की अवधि के लिए दण्डादिष्ट किया गया है, दण्डादेश की समाप्ति के पश्चात् पांच वर्ष की अवधि के दौरान किसी भी समय, या

(iii) जिसे परिशान्ति कायम रखने और सदाचार के लिए दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के अध्याय 8 (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 अध्याय 9) के अधीन बंधपत्र निष्पादित करने के लिए आदेश दिया गया है, बंधपत्र की अवधि के दौरान किसी भी समय, या

(iv) जिसकी अनुज्ञप्ति इस अधिनियम या इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के उल्लंघन के लिए, भारतीय विस्फोटक (संशोधन) अधिनियम, 1978 (1978 का 32) के प्रारम्भ के पूर्व या पश्चात् इस अधिनियम के अधीन रद्द कर दी गई है, ऐसी अनुज्ञप्ति के रद्द किए जाने की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के दौरान किसी भी समय,-  

 

(1) किसी भी विस्फोटक का विनिर्माण, विक्रय, परिवहन, आयात या निर्यात नहीं करेगा, या

(2) किसी ऐसे विस्फोटक को कब्जे में नहीं रखेगा जिसे केन्द्रीय सरकार उसकी प्रकृति को ध्यान में रखते हुए शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे;

(ख) कोई व्यक्ति ऐसे किसी व्यक्ति को जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह ऐसे विक्रय, परिदान या प्रेषण के समय-

(i) खण्ड (क) के अधीन ऐसे विस्फोटक का विनिर्माण, विक्रय, परिवहन, आयात, निर्यात करने या उसे कब्जे में रखने से प्रतिषिद्ध है, या

(ii) वह विकृतचित्त है,

किसी विस्फोटक का विक्रय, परिदान या प्रेषण नहीं करेगा।

1.  1978 के अधिनियम से० 32 की धारा 5 द्वारा (2-3-1983 मे) अंतःस्थापित ।

2. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 5 द्वारा (2-3-1983 में) उपधारा (3) का नोप किया गया।

3. 1978 के अधिनियम सं० 32 की धारा 6 द्वारा (2-3-1983 में) अन्तःस्थापित ।

4. 1914 के अधिनियम में 10 की धारा 3 और अनुसूची 2 द्वारा शब्द "और" और खंत्र (ख) निरमित।

5. 1978 के अधिनियम सं० 32 की धारा 7 द्वारा (2-3-1983 मे) उपधारा (2) के स्थान पर प्रतिस्थापित।

6.  1978 के अधिनियम में 32 की धारा 7 द्वारा (2-3-1983 में) उपधारा (3) का नॉप किया गया।

7. 1978 के अधिनियम सं० 32 की धारा 8 द्वारा (2-3-1983 में) अंतःस्थापित । ] 

6ख. अनुज्ञप्तियों का अनुदत्त किया जाना -

(1) जहां कोई व्यक्ति धारा 5 के अधीन अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन करता है वहां अनुज्ञप्तियों के अनुदत्त किए जाने के लिए उस धारा के अधीन बनाए गए नियमों में विहित प्राधिकारी (जिसे इस अधिनियम में इसके पश्चात् अनुज्ञापन प्राधिकारी कहा गया है। ऐसी जांच, यदि कोई हो, जो वह आवश्यक समझे, करने के पश्चात् इस अधिनियम के अन्य उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, लिखित आदेश द्वारा या तो अनुज्ञप्ति अनुदत्त कर सकेगा या अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने से इंकार कर सकेगा।

(2) अनुज्ञापन प्राधिकारी निम्नलिखित दशाओं में अनुज्ञप्ति अनुदत्त करेगा:

(क) जहां विस्फोटकों के विनिर्माण के प्रयोजन के लिए अनुज्ञप्ति अपेक्षित हो वहां यदि अनुज्ञापन प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि वह व्यक्ति, जिसके द्वारा अनुज्ञप्ति की अपेक्षा की गई है,

(i) विस्फोटकों के विनिर्माण का तकनीकी व्यवहार-ज्ञान और अनुभव रखता है; या

(ii) उसके नियोजन में ऐसे तकनीकी व्यवहार-ज्ञान रखने या अनुभव प्राप्त व्यक्ति हैं या वह ऐसे व्यक्तियों को नियोजित करने के लिए वचनबद्ध है; या

(ख) जहां किसी अन्य प्रयोजन के लिए अनुज्ञप्ति अपेक्षित है वहां यदि अनुज्ञापन प्राधिकारी का समाधान हो जाता है कि उस व्यक्ति के पास, जिसके द्वारा अनुज्ञप्ति की अपेक्षा की गई है, उसे प्राप्त करने के लिए अच्छा कारण है।

6ग. अनुज्ञप्तियों के लिए इंकार करना -

(1) धारा 6ख में किसी बात के होते हुए भी, अनुज्ञापन प्राधिकारी निम्नलिखित दशाओं में अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने से इंकार कर सकेगा :-

(क) जहां ऐसी अनुज्ञप्ति किसी प्रतिषिद्ध विस्फोटक के संबंध में अपेक्षित है, या

(ख) जहां ऐसी अनुज्ञप्ति के लिए किसी ऐसे व्यक्ति ने अपेक्षा की है जिसके बारे में अनुज्ञापन प्राधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह-

(i) किसी ऐसे विस्फोटक का विनिर्माण करने, उसे कब्जे में रखने, उसका विक्रय, परिवहन, आयात या निर्यात करने से इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा प्रतिषिद्ध है: या

(ii) विकृतचित्त है; या

(iii) इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति के लिए किसी अन्य कारणवश अनुपयुक्त है: या

(ग) जहां अनुज्ञापन प्राधिकारी लोक-शांति की सुरक्षा या लोक सुरक्षा के लिए ऐसी अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने से इंकार करना आवश्यक समझे।

(2) जहां अनुज्ञापन प्राधिकारी किसी ऐसे व्यक्ति को कोई अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने से इंकार कर देता है वहां वह ऐसे इंकार करने के कारण लेखबद्ध करेगा और उस व्यक्ति द्वारा मांग की जाने पर उसका एक संक्षिप्त कथन उसको देगा जब तक कि किसी मामले में अनुज्ञापन प्राधिकारी की यह राय न हो कि ऐसे कथन का दिया जाना लोक हित में नहीं होगा।

6घ. विहित शर्तों के अतिरिक्त अन्य शर्तें अधिरोपित करने के लिए अनुज्ञापन प्राधिकारी सक्षम है-  

धारा 6ख के अधीन अनुदत्त की गई अनुज्ञप्ति में विहित शर्तों के अतिरिक्त ऐसी अन्य शर्ते अन्तर्विष्ट हो सकेंगी जो अनुज्ञापन प्राधिकारी द्वारा किसी विशेष मामले में आवश्यक समझी जाएं।

6ङ. अनुप्तियों में परिवर्तन, उनका निलम्बन और प्रतिसंहरण -

(1) अनुज्ञापन प्राधिकारी विहित शर्तों के सिवाय उन शर्तों में परिवर्तन कर सकेगा जिनके अध्यधीन रहते हुए अनुज्ञप्ति अनुदत्त की गई है और उस प्रयोजन के लिए लिखित सूचना द्वारा अनुज्ञप्ति के धारक से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह सूचना में विनिर्दिष्ट समय के भीतर, उसे अनुज्ञप्ति समर्पित कर दे।

(2) अनुज्ञापन प्राधिकारी विहित शर्तों के सिवाय अनुज्ञप्ति की शर्तों में भी अनुज्ञप्ति के धारक के आवेदन पर परिवर्तन कर सकेगा।

(3) अनुज्ञापन प्राधिकारी लिखित आदेश द्वारा अनुज्ञप्ति ऐसी अवधि के लिए निलम्बित कर सकेगा जो वह ठीक समझे या अनुज्ञप्ति को प्रतिसंहृत कर सकेगा.-

(क) यदि अनुज्ञापन प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि अनुज्ञप्ति का धारक ऐसे विस्फोटक का विनिर्माण, कब्जा, विक्रय, परिवहन, आयात या निर्यात करने के लिए इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा प्रतिषिद्ध है या वह विकृतचित्त है या किसी अन्य कारणवश इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति के लिए अनुपयुक्त है; या

(ख) यदि अनुज्ञापन प्राधिकारी लोक-शान्ति की सुरक्षा के लिए या लोक सुरक्षा के लिए अनुज्ञप्ति निलम्बित या प्रतिसंहृत करना आवश्यक समझता है; या

(ग) यदि अनुज्ञप्ति किसी तात्त्विक सूचना को छिपाकर या अनुज्ञप्ति के लिए आवेदन करते समय अनुज्ञप्ति के धारक द्वारा या उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दी गई गलत सूचना के आधार पर प्राप्त की गई है, या

(घ) यदि अनुज्ञप्ति की शर्तों में से किसी का उल्लंघन किया है; या

(ङ) यदि अनुज्ञप्ति का धारक उपधारा (1) के अधीन उस सूचना का अनुपालन करने में असफल रहा है जिसके द्वारा उससे अनुज्ञप्ति समर्पित करने की अपेक्षा की गई है।

(4) अनुज्ञापन प्राधिकारी अनुज्ञप्ति के धारक के आवेदन पर भी अनुज्ञप्ति को प्रतिसंहृत कर सकेगा।

(5) जहां अनुज्ञापन प्राधिकारी उपधारा (1) के अधीन अनुज्ञप्ति की शर्तों में परिवर्तन करने का कोई आदेश या उपधारा (3) के अधीन किसी अनुज्ञप्ति की निलम्बित या प्रतिसंहृत करने का कोई आदेश करता है तो वह उसके कारण लेखबद्ध करेगा और अनुज्ञप्ति के धारक द्वारा मांग की जाने पर उसका एक संक्षिप्त कथन उसको देगा जब तक कि किसी मामले में अनुज्ञापन प्राधिकारी की यह राय न हो कि ऐसे कथन का दिया जाना लोक हित में नहीं होगा।

(6) इस अधिनियम में या इसके अधीन बनाए गए नियमों के अधीन किसी अपराध के लिए अनुज्ञप्ति के धारक को दोषसिद्ध करने वाला न्यायालय अनुज्ञप्ति को निलम्बित या प्रतिसंहृत भी कर सकेगा:

परन्तु यदि दोषसिद्धि अपील में या अन्यथा अपास्त कर दी जाती है तो निलम्बन या प्रतिसंहरण शून्य हो जाएगा।

(7) उपधारा (6) के अधीन निलम्बन या प्रतिसंहरण का आदेश अपील न्यायालय वा पुनरीक्षण की अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए उच्च न्यायालय द्वारा भी किया जा सकेगा।

(8) केन्द्रीय सरकार समस्त भारत या उसके किसी भाग में इस अधिनियम के अधीन अनुदत्त सभी या किन्हीं अनुज्ञप्तियों को शासकीय राजपत्र में आदेश द्वारा निलम्बित या प्रतिसंहृत कर सकेगी या निलम्बित या प्रतिसंहृत करने के लिए किसी अनुज्ञापन प्राधिकारी को निदेश दे सकेगी।

(9) इस धारा के अधीन अनुज्ञप्ति के निलम्बन या प्रतिसंहरण पर उसका धारक उस प्राधिकारी को, जिसके द्वारा वह निलम्बित या प्रतिसंहृत की गई है या ऐसे अन्य प्राधिकारी को, जो निलम्बन या प्रतिसंहरण के आदेश में इस निमित्त विनिर्दिष्ट किया जाए, अनुज्ञप्ति अविलम्व अभ्यर्पित करेगा।

6च. अपीलें -

(1) अनुज्ञापन प्राधिकारी के ऐसे आदेश से, जिसके द्वारा अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने से इंकार किया गया हो या अनुज्ञप्ति की शर्तों में परिवर्तन किया गया हो या अनुज्ञापन प्राधिकारी के ऐसे आदेश से, जिसके द्वारा अनुज्ञप्ति निलम्बित या प्रतिसंहृत की गई हो, व्यथित कोई व्यक्ति ऐसे प्राधिकारी को (जिसे इसमें इसके पश्चात् अपील प्राधिकारी कहा गया है) और ऐसी अवधि के भीतर, जो विहित की जाए, उस आदेश के विरुद्ध अपील कर सकेगा :

परन्तु केन्द्रीय सरकार द्वारा या उसके निदेशाधीन किए गए किसी आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं होगी।

(2) यदि कोई अपील उसके लिए विहित अवधि की समाप्ति के पश्चात् की जाती है तो उसे ग्रहण नहीं किया जाएगा:

परन्तु अपील उसके लिए विहित अवधि की समाप्ति के पश्चात् तभी ग्रहण की जा सकेगी जब अपीलार्थी अपील प्राधिकारी का समाधान कर देता है कि उस अवधि के अन्दर अपील न करने के लिए उसके पास पर्याप्त कारण था।

(3) अपील के लिए विहित अवधि की संगणना परिसीमा अधिनियम, 1963 (1963 का 36) के उन उपबंधों के अनुसार की जाएगी जो उसके अधीन परिसीमाकाल की संगणना के लिए हैं।

(4) इस धारा के अधीन प्रत्येक अपील लिखित अर्जी द्वारा की जाएगी और जहां उस आदेश के, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, कारणों का संक्षिप्त कथन अपीलार्थी को दिया गया है, वहां ऐसा संक्षिप्त कथन, और ऐसी फीस, जो विहित की जाए, उसके साथ होगी।

(5) अपील का निपटारा करने में अपील प्राधिकारी ऐसी प्रक्रिया का अनुसरण करेगा, जो विहित की जाए :

परन्तु किसी अपील का निपटारा तब तक नहीं किया जाएगा जब तक अपीलार्थी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर न दे दिया गया हो।

(6) वह आदेश, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, जब तक कि अपील प्राधिकारी सशर्त या बिना शर्त अन्यथा निदेश न दे, ऐसे आदेश के विरुद्ध की गई अपील का निपटारा होने तक, प्रवृत्त रहेगा।

(7) ऐसे आदेश की, जिसके विरुद्ध अपील की गई है, पुष्टि करने वाला, उसे उपान्तरित करने या उलटने वाला अपील प्राधिकारी का प्रत्येक आदेश अन्तिम होगा।]

7. निरीक्षण, तलाशी, अभिग्रहण, निरोध और हटाने की शक्तियां प्रदत्त करने के लिए नियम बनाने की शक्ति -

(1) - केन्द्रीय सरकार 1*** इस अधिनियम से संगत नियम किसी अधिकारी को या तो नाम से उसके पद के आधार से यह प्राधिकृत करने के लिए बना सकेगी कि वह-

(क) 2[किसी ऐसे स्थान, वायुयान, गाड़ी या जलयान] में जिसमें इस अधिनियम के अधीन अनुदत्त अनुज्ञप्ति के अधीन किसी विस्फोटक का विनिर्माण, उस पर कब्जा, उसका प्रयोग, विक्रय, 3[परिवहन, आयात या निर्यात किया जा रहा है या जिसमें उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि इस अधिनियम या इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के उल्लंघन में किसी विस्फोटक का विनिर्माण, उस पर कब्जा, उसका प्रयोग, विक्रय परिवहन, आयात या निर्यात] किया गया है या किया जा रहा है, प्रवेश करे, निरीक्षण करे और परीक्षा करे;

(ख) वहां विस्फोटकों के लिए तलाशी ले;

(ग) वहां पाए गए किसी विस्फोटक के, उसका मूल्य संदाय करके, नमूने ले; और

4((घ) उसमें से किसी विस्फोटक या उसके संघटक को अभिगृहीत करे, निरुद्ध करे और हटाए और यदि आवश्यक हो तो ऐसे विस्फोटक या उसके संघटक को नष्ट भी करे।।

(2) 5(दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023) के वे उपबंध जो उस संहिता के अधीन तलाशियों से संबद्ध हैं, इस धारा के अधीन नियमों द्वारा प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा तलाशियों को लागू होंगे जहां तक वे लागू हो सकते हैं।

8. दुर्घटनाओं की सूचना-

6[(1)] जिस किसी स्थान में किसी विस्फोटक का विनिर्माण, उस पर कब्जा या उसका प्रयोग किया जाता है या 7[जो कोई वायुयान, गाड़ी या जलयान) या तो किसी विस्फोटक को ले जा रहा है या जिस पर या जिससे कोई विस्फोटक लादा या उतारा जा रहा है जब कभी वहां पर या उसके पास या उसके संबंध में विस्फोटक द्वारा या अग्नि द्वारा ऐसी दुर्घटना होती है जिसमें मानव जीवन की हानि या व्यक्ति या सम्पत्ति को गम्भीर क्षति होती है या जो इस प्रकार की है जिससे ऐसी हानि या क्षति प्रायः होती है तब, यथास्थिति, उस स्थान का अधिभोगी या उस 8[वायुयान या जलयान का मास्टर] या उस गाड़ी का भारसाधक व्यक्ति 9[इतने समय के अन्दर और ऐसी रीति में जो नियम द्वारा विहित हो उसकी और उससे हुई मानव जीवन की हानि या वैयक्तिक क्षति की, यदि कोई हो, सूचना 10[मुख्य विस्फोटक नियंत्रक को और] निकटतम पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को देगा।

11 *****

12[9. दुर्घटनाओं की जांच-  

(1) जहां कोई ऐसी दुर्घटना जैसी धारा 8 में निर्दिष्ट है 13[किसी ऐसे स्थान, वायुयान, गाड़ी या जलयान पर या उसके पास या उसके संबंध में होती है जो 14[संघ के किसी सशस्त्र बल] के नियंत्रणाधीन है वहां उस दुर्घटना के कारणों की जांच संबंधित नौसैनिक, सैनिक या वायु सैनिक अधिकारी द्वारा की जाएगी और जहां कोई ऐसी दुर्घटना किन्हीं अन्य परिस्थितियों में होती है वहां ऐसी जांच मानव जीवन की हानि वाले मामलों में मजिस्ट्रेट 15*** करेगा अथवा अन्य मामलों में कर सकेगा या अपने अधीनस्थ मजिस्ट्रेट को करने के लिए निर्दिष्ट कर सकेगा। 

 

(2) इस धारा के अधीन जांच करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को वे सब शक्तियां होंगी जो 1[दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2)] के अधीन किसी अपराध की जांच करने में किसी मजिस्ट्रेट को होती है और धारा 7 के अधीन नियमों द्वारा किसी अधिकारी को प्रदत्त शक्तियों में से वह ऐसी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जिन्हें प्रयोग करना वह जांच के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन समझे ।

(3) इस धारा के अधीन जांच करने वाला व्यक्ति दुर्घटना के कारणों और उसकी परिस्थितियों का कथन करते हुए केन्द्रीय सरकार को एक रिपोर्ट देगा।

(4) केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित के लिए नियम बना सकेगी-

(क) इस धारा के अधीन जांचों की प्रक्रिया का विनियमनः

(ख) 2[मुख्य विस्फोटक नियंत्रक को इस बात के लिए समर्थ करना कि ऐसी जांच में वह उपस्थित हो या अपना प्रतिनिधित्व कराए;

(ग) (मुख्य विस्फोटक नियंत्रक) को इस बात की अनुज्ञा देना कि जांच में वह या उसका प्रतिनिधि किसी साक्षी की परीक्षा करे:

(घ) यह उपबंधित करना कि जहां ऐसी किसी जांच में मुख्य विस्फोटक नियंत्रक उपस्थित नहीं है या उसका प्रतिनिधित्व नहीं कराया गया है उसकी कार्यवाहियों की एक रिपोर्ट उसे भेजी जाएगी;

(ङ) वह रीति जिसमें और वह समय जिसके अन्दर धारा 8 में निर्दिष्ट सूचनाएं दी जाएंगी विहित करना। 

1. भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा या सपरिषद् गवर्नर जनरल के पूर्व अनुमोदन से स्थानीय सरकार शब्द निरसित ।

2. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 9 द्वारा (2-3-1983 से) किमी ऐमे स्थान, गाड़ी या जलयान" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

3. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 9 द्वारा (2-3-1983 में) परिवहन या आयात" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

4. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 9 द्वारा (2-3-1983 में) खंड (घ) के स्थान पर प्रतिस्थापित।

5.  के अधिनियम में 32 की धारा 9 द्वारा (2-3-1983 में) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1882 (1882 का 10)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

6. 1945 के आर्डिनेंस से०० 18 की धारा 2 द्वारा धारा 8 को उम धारा की उपधारा (1) के रूप में पुनः संख्यांत्रित किया गया।

7. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 10 द्वारा (2-3-1983 से) कोई गाड़ी या जवयान" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

8. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 10 द्वारा (2-3-1983 से) "जलवान का मास्टर के स्थान पर प्रतिस्थापित।

9. 1945 के आर्डिनेंस सं० 18 की धारा 2 द्वारा "उसकी तत्काल सूचना के स्थान पर प्रतिस्थापित।

10. 1978 के अधिनिमय में 32 की धारा 10 द्वारा (2-3-1983 से) "भारत के मुख्य विस्फोटक निरीक्षक के स्थान पर प्रतिस्थापित।

11. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 10 द्वारा (2-3-1983 में) उपधारा (2) का लोप किया गया।

12. 1945 के आर्डिनेंस में 18 की धारा 3 द्वारा पूर्ववर्ती धारा के स्थान पर प्रतिस्थापित।

13. 1978 के अधिनियम सं० 32 की धारा 11 द्वारा (2-3-1983 में) ऐमे म्यान, गाड़ी या जलवान के स्थान पर प्रतिस्थापित।

14. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 11 द्वारा (2-3-1983 में) “किसी भारतीय सेना” के स्थान पर प्रतिस्थापित।

15. 1978 के अधिनियम मं० 32 की धारा 11 द्वारा (2-3-1983 में) "(या प्रेसिडेमी नगर में पुलिस आयुक्त) कोष्ठकों और शब्दों का लोप किया गया। 

9क. अधिक गम्भीर दुर्घटनाओं की जांच -

(1) जहां केन्द्रीय सरकार की, चाहे उसे धारा 9 के अधीन जांच की रिपोर्ट मिली हो या न मिली हो, यह राय है कि किसी ऐसी दुर्घटना के, जैसी धारा 8 में निर्दिष्ट है, कारणों की जांच के लिए अधिक औपचारिक प्रकार की जांच की जानी चाहिए थी वह मुख्य विस्फोटक नियंत्रक) या किसी अन्य सक्षम व्यक्ति ऐसी जांच करने के लिए नियुक्त कर सकेगी और विधिक या विशेष जानकारी रखने वाले एक या अधिक व्यक्तियों को भी ऐसी जांच में असेसरों के रूप में कार्य करने के लिए नियुक्त कर सकेगी।

(2) जहां केन्द्रीय सरकार इस धारा के अधीन जांच आदिष्ट करती है वहां वह यह भी निर्दिष्ट कर सकेगी कि धारा 9 के अधीन उस समय लम्बित कोई जांच बन्द कर दी जाए।

(3) इस धारा के अधीन जांच करने के लिए नियुक्त व्यक्ति को साक्षियों को हाजिर कराने और दस्तावेजों तथा भौतिक पदार्थों की पेशी विवश करने के प्रयोजनों के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन सिविल न्यायालय की सब शक्तियां प्राप्त होंगी और कोई जानकारी देने के लिए यथापूर्वोक्त व्यक्ति द्वारा अपेक्षित प्रत्येक व्यक्ति भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 176 (भारतीय न्याय संहिता 2023 धारा 211) के अर्थ में वैसा करने के लिए विधिपूर्णतया आबद्ध समझा जाएगा।

(4) इस धारा के अधीन जांच करने वाला कोई व्यक्ति धारा 7 के अधीन नियमों द्वारा किसी अधिकारी को प्रदत्त शक्तियों में से ऐसे शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जिनका प्रयोग करना वह जांच के प्रयोजनों के लिए आवश्यक या समीचीन समझे ।

(5) इस धारा के अधीन जांच करने वाला व्यक्ति दुर्घटना के कारणों और उसकी परिस्थितियों का कथन करते हुए एक रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार को देगा और उसके साथ कोई ऐसे सम्प्रेक्षण होंगे जो वह या असेसरों में से कोई करना ठीक समझे और केन्द्रीय सरकार इस प्रकार की गई प्रत्येक रिपोर्ट को ऐसे समय पर और ऐसी रीति में प्रकाशित कराएगी जैसी वह ठीक समझे ।

(6) केन्द्रीय सरकार इस धारा के अधीन जांचों में प्रक्रिया को विनियमित करने के लिए नियम बना सकेगी ।]

4[9ख. कतिपय अपराधों के लिए दण्ड -

(1) जो कोई धारा 5 के अधीन बनाए गए नियमों का या उक्त नियमों के अधीन अनुदत्त की गई अनुज्ञप्ति की शर्तों के उल्लंघन में, -

(क) किसी विस्फोटक का विनिर्माण, आयात या निर्यात करेगा वह कारावास से जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा;

(ख) किसी विस्फोटक को कब्जे में रखेगा, उसका प्रयोग करेगा, विक्रय करेगा या परिवहन करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो तीन हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा; और

(ग) किसी अन्य मामले में ऐसे जुमनि से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा। 

 

(2) जो कोई धारा 6 के अधीन जारी की गई अधिसूचना के उल्लंघन में किसी विस्फोटक का विनिर्माण करेगा, उसका कब्जा रखेगा या उसका आयात करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुमनि से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डनीय होगा; और जलमार्ग द्वारा आयात किए जाने की दशा में जलयान के स्वामी और मास्टर में से प्रत्येक या वायुमार्ग द्वारा आयात किए जाने की दशा में उस वायुयान के जिसमें विस्फोटक आयात किया जाता है, स्वामी और मास्टर में से प्रत्येक युक्तियुक्त प्रतिहेतु के अभाव में, ऐसे जुमनि से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा।

(3) जो कोई, -

(क) धारा 6क के खण्ड (क) के उपबन्धों के उल्लंघन में किसी विस्फोटक का विनिर्माण, विक्रय, परिवहन, आयात, निर्यात करेगा या उसका कब्जा रखेगा; या

(ख) उस धारा के खण्ड (ख) के उपबन्धों के उल्लंघन में किसी विस्फोटक का विक्रय, परिदान या प्रेषण करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा; या

(ग) धारा 8 के उपबन्धों के उल्लंघन में किसी दुर्घटना की सूचना देने में असफल रहेगा वह-

(i) जुमनि से, जो पांच सौ रुपए तक का हो सकेगा, या

(ii) यदि दुर्घटना में मानव जीवन की हानि हुई है तो कारावास से, जिसकी अवधि तीन मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा।

1. 1978 के अधिनियम नं० 32 की धारा 11 द्वारा (2-3-1983 में) "दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1898 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

2. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 11 द्वारा (2-3-1983 में) "भारत के मुख्य विस्फोटक निरीक्षक के स्थान पर प्रतिस्थापित।

3. 1978 के अधिनियम में० 32 की धारा 12 द्वारा (2-3-1983 में) "भारत के मुख्य विस्फोटक निरीक्षक के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

4. 1978 के अधिनियम सं० 32 की धारा 13 द्वारा (2-3-1983 से) अंतःस्थापित ।

9ग. कम्पनियों द्वारा अपराध -

(1) जब कभी इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है, तो प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उस कम्पनी के कारवार के संचालन के लिए उस कम्पनी का भारसाधक और उसके प्रति उत्तरदायी था और साथ ही वह कम्पनी भी ऐसे अपराध के दोषी समझे जाएंगे और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने के भागी होंगे :

परन्तु इस उपधारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को किसी दण्ड का भागी नहीं बनाएगी यदि वह यह साबित कर देता है कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उसने ऐसे अपराध के निवारण के लिए सब सम्यक् तत्परता बरती थी।

(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कम्पनी द्वारा किया गया है और यह साबित होता है कि वह अपराध कम्पनी के किसी निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से किया गया है या उस अपराध का किया जाना उसकी किसी उपेक्षा के कारण माना जा सकता है. वहां ऐसा निदेशक, प्रबन्धक, सचिव या अन्य अधिकारी भी उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार अपने विरुद्ध कार्यवाही किए जाने और दण्डित किए जाने का भागी होगा।

स्पष्टीकरण -

इस धारा के प्रयोजनों के लिए

(क) "कम्पनी" से कोई निगमित निकाय अभिप्रेत है और इसके अन्तर्गत फर्म या व्यष्टियों का अन्य संगम भी है:

तथा

(ख) फर्म के सम्बन्ध में, "निदेशक" से उस फर्म का भागीदार अभिप्रेत है।

10. विस्फोटकों का समपहरण -

जब कोई व्यक्ति इस अधिनियम या इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन दंडनीय किसी अपराध से दोषसिद्ध किया जाता है तब वह न्यायालय जिसके समक्ष वह दोषसिद्ध होता है निदेश दे सकेगा कि वह विस्फोटक या विस्फोटक के संघटक या वह पदार्थ (यदि कोई हो) जिसके संबंध में अपराध किया गया है, या उस विस्फोटक, संघटक या पदार्थ का कोई भाग, उन्हें अन्तर्विष्ट करने वाले पतों के सहित समपहृत हो जाएगा।

1[11. वायुयान या जलयान का करस्थम् -

जहां किसी वायुयान या जलयान के स्वामी या मास्टर को उस वायुयान या जलयान से या के संबंध में किए गए किसी अपराध के लिए जुर्माना संदत्त करने के लिए इस अधिनियम के अधीन न्यायनिर्णीत किया जाता है वहां न्यायालय, जुर्माने का संदाय करने को विवश करने के प्रयोजन के लिए अपनी किसी अन्य शक्ति के अतिरिक्त यह निदेश दे सकेगा कि,

(क) उस वायुयान और उसके फर्नीचर या फर्नीचर के उतने भाग को, या

(ख) जलयान और उसके टैकल, पोत सज्जा और फर्नीचर या उसके टैकल, पोत सज्जा और फर्नीचर के उतने भाग

को,

जितना जुमनि के संदाय के लिए आवश्यक हो, करस्थम् और विक्रय द्वारा उद्गृहीत किया जाए ।।

[1. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 14 द्वारा (2-3-1983 में) धारा 11 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

12. दुष्प्रेरण और प्रयत्न -

जो कोई इस अधिनियम या इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन दंडनीय किसी अपराध के किए जाने का भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) (भारतीय न्याय संहिता 2023) के अर्थ में दुष्प्रेरण करेगा या कोई ऐसा अपराध करने का प्रयत्न करेगा और ऐसे प्रयत्न में उसे करने की दिशा में कोई कार्य करेगा वह ऐसे दंडित किया जाएगा माना उसने वह अपराध किया हो।

13. खतरनाक अपराध करने वाले व्यक्तियों को वारंट के बिना गिरफ्तार करने की शक्ति-  

जो कोई ऐसा कोई कार्य करता हुआ पाया जाए‌गा जिसके लिए वह इस अधिनियम या इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के अधीन दंडनीय है और जिसकी प्रवृत्ति किसी ऐसे स्थान में या उसके पास जहां कोई विस्फोटक विनिर्मित किया जाता है या स्टोर किया जाता है अथवा किसी रेल या पत्तन या किसी गाड़ी, (वायुयान या जलयान] में या उसके पास विस्फोट या अग्नि कारित करने की है। वह किसी पुलिस अधिकारी द्वारा, या उस स्थान के अधिभोगी अथवा अधिभोगी के अभिकर्ता या सेवक या अधिभोगी द्वारा प्राधिकृत अन्य व्यक्ति या उस रेल प्रशासन या पित्तन के कंजर्वेटर या विमान पत्तन के भारसाधक अधिकारी] के किसी अभिकर्ता या सेवक या प्राधिकृत अन्य व्यक्ति द्वारा वारंट के बिना पकड़ा जा सकेगा और उस स्थान से जहां वह गिरफ्तार किया जाता है हटाया जा सकेगा और सुविधानुसार यथाशीघ्र किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाया जा सकेगा।

3[14. व्यावृत्ति और छूट देने की शक्ति -  

(1) धारा 8, 9 और 9क के सिवाय इस अधिनियम की कोई बात-

(क) 4**** केन्द्रीय सरकार द्वारा बनाए गए नियमों या विनियमों के अनुसार 5['संघ के किसी सशस्त्र बल और आर्डिनेंस फैक्टरियों या ऐसे बल के अन्य स्थापनों) द्वारा;

(ख) 6(केन्द्रीय सरकार के अधीन 6[या राज्य सरकार के अधीन नियोजित किसी व्यक्ति द्वारा इस अधिनियम के निष्पादन में,

किसी विस्फोटक के विनिर्माण, कब्जे, प्रयोग, परिवहन या आयात को लागू नहीं होगी।

(2) केन्द्रीय सरकार 7[किसी विस्फोटक और किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों के सब उपबन्धों या उनमें से किसी से पूर्णतः या किन्हीं ऐसी शर्तों के अध्यधीन, जिन्हें अधिरोपित करना वह ठीक समझे, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा छूट दे सकेगी ।।

15. आयुध अधिनियम, 1959 की व्यावृत्ति -  

इस अधिनियम की कोई बात 8[आयुध अधिनियम, 1959 (1959 का 54)] के उपबंधों को प्रभावित नहीं करेगी:

परन्तु किसी विस्फोटक के विनिर्माण, कब्जे, विक्रय, परिवहन या आयात के लिए इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति अनुदत्त करने वाला प्राधिकारी, यदि उन नियमों द्वारा जिनके अधीन अनुज्ञप्ति अनुदत्त की गई है इस निमित्त सशक्त हो तो, अनुज्ञप्ति में लिखित आदेश द्वारा निदेश दे सकेगा कि उसका प्रभाव उक्त 9**** आयुध अधिनियम के अधीन अनुदत्त अनुज्ञप्ति के समान होगा।

16. अन्य विधि के अधीन दायित्व के बारे में व्यावृत्ति -

इस अधिनियम या इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों की कोई बात किसी व्यक्ति को, किसी ऐसे कार्य या लोप के लिए जो इस अधिनियम या उन नियमों के विरुद्ध अपराध होता है अभियोजित किए जाने या इस अधिनियम अथवा उन नियमों द्वारा उपबंधित रीति से अन्य या उच्चतर दंड या शास्ति के, जिसके दायित्वाधीन वे उस अन्य विधि के अधीन हों, दायित्वाधीन होने से नहीं रोकेगी :

परन्तु कोई व्यक्ति उसी अपराध के लिए दुबारा दंडित नहीं किया जाएगा।

17. "विस्फोटक" की परिभाषा का अन्य विस्फोटक पदार्थों को विस्तार -  

केन्द्रीय सरकार समय-समय पर शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा घोषित कर सकेगी कि कोई पदार्थ, जो या तो उसके विस्फोटक तत्त्वों से या उसके विनिर्माण की किसी प्रक्रिया से विस्फोटनीय होने के कारण केन्द्रीय सरकार को जीवन या सम्पत्ति के लिए विशेषतया खतरनाक प्रतीत होता है, इस अधिनियम के अर्थ में विस्फोटक समझा जाएगा, और इन अधिनियमों के उपबंध (ऐसे अपवादों, परिसीमाओं और निर्बंधनों  के अध्यधीन रहते हुए जैसे अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं) तद्‌नुकूल उस पदार्थ पर इस प्रकार विस्तारित होंगे मानो वह इस अधिनियम में "विस्फोटक" पद की परिभाषा के अन्तर्गत था।

10[17क. प्रत्यायोजित करने की शक्ति  -

केन्द्रीय सरकार, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, निदेश दे सकेगी कि धारा 5. धारा 6, धारा 6क, धारा 14 और धारा 17 के अधीन शक्ति से भिन्न किसी ऐसी शक्ति का प्रयोग या कृत्य का निर्वहन जिसका प्रयोग या निर्वहन उसके द्वारा इस अधिनियम के अधीन किया जा सकता है ऐसे विषयों के संबंध में और ऐसी शर्तों के, यदि कोई हों, अध्यधीन रहते हुए जो वह अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे निम्नलिखित द्वारा भी किया जा सकेगा-

(क) ऐसा अधिकारी या प्राधिकारी जो केन्द्रीय सरकार के अधीनस्थ हो, या

(ख) ऐसी राज्य सरकार या ऐसा अधिकारी या प्राधिकारी जो राज्य सरकार के अधीनस्थ हो ।। 

1. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 15 द्वारा (2-3-1983 से) “पोत या नौका”के स्थान पर प्रतिस्थापित।

2. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 15 द्वारा (2-3-1983 से) पत्तन के कंजर्वेटर के स्थान पर प्रतिस्थापित।

3. 1945 के आर्डिनेंस से 18 की धारा 4 द्वारा पूर्ववर्ती धारा के स्थान पर प्रतिस्थापित।

4. विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “यूनाइटेड किंगड़म  में हिज़ मैजेस्टी सरकार पा" शब्द निरमित।

5. 1978 के अधिनिमय में 32 की धारा 16 द्वारा (2-3-1983 से) किसी भारतीय सेना के स्थान पर प्रतिस्थापित।

6. "भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948 द्वारा "ब्रिटिश भारत की कोई सरकार के स्थान पर प्रतिस्थापित।

7. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 16 द्वारा (2-3-1983 से) कतिपय शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

8. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 17 द्वारा (2-3-1983 में) भारतीय आयुध अधिनियम, 1878 के स्थान पर प्रतिस्थापित।।

9. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 17 द्वारा (2-3-1983 से) "भारतीय शव्द का लोप किया गया।

10. 1978 के अधिनियम में 32 की द्वारा 18 द्वारा (2-3-1983 में) अंतःस्थापित । 

18. नियमों को बनाने, प्रकाशित करने और पुष्ट करने के लिए प्रक्रिया -  

(1) इस अधिनियम के अधीन नियम बनाने वाला प्राधिकारी, नियम बनाने से पूर्व, उन व्यक्तियों की जानकारी के लिए जिनके कि उनसे प्रभावित होने की सम्भाव्यता हो, प्रस्थापित नियमों का एक प्रारूप प्रकाशित करेगा।

(2) प्रकाशन ऐसी रीति में किया जाएगा जैसी केन्द्रीय सरकार समय-समय पर शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विहित करे।

(3) प्रारूप के साथ एक सूचना प्रकाशित की जाएगी जिसमें कोई ऐसी तारीख विनिर्दिष्ट होगी जिसको या जिसके पश्चात् प्रारूप पर विचार किया जाएगा।

(4) नियम बनाने वाला प्राधिकारी उस किसी आपत्ति या सुझाव को प्राप्त करेगा और उस पर विचार करेगा जो ऐसी विनिर्दिष्ट तारीख से पूर्व उस प्रारूप के बारे में किसी व्यक्ति द्वारा की जाए या दिया जाए।

(5) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया नियम 1*** तब तक प्रभावशील नहीं होगा जब तक वह शासकीय राजपत्र में 2*** प्रकाशित न हो जाए।

(6) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए ता तात्पर्पित होने वाले किसी नियम का शासकीय राजपत्र में प्रकाशन इस बात का निश्चायक साध्य होगा कि वह सम्यक्तः बनाया गया है और यदि वह मंजूरी अपेक्षित करता है तो वह सम्यक्तः मंजूर किया गया है।

(7) इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त नियम बनाने की सभी शक्तियां समय-समय पर अवसरापेक्षानुसार प्रयुक्त की जा सकेंगी।

3[(8) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखा जाएगा। यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी। यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवमान के पूर्व, दोनों सदन उस नियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा। यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा। किन्तु नियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।। 

1. भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा "यदि यह सपरिषद् गवर्नर जनरल द्वारा बनाया गया है" शब्दों का लोप किया गया।

2. भारत शामन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा "और यदि वह स्थानीय सरकार द्वारा बताया गया है तो जब तक कि वह शासकीय राजपत्र में प्रकाशित न कर दिया गया हो शब्द निरसित ।

3. 1978 के अधिनियम में 32 की धारा 19 द्वारा (2-3-1983 में) अंतःस्थापित ।

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