धारा 1 से  15 उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021

धारा 1 से 15 उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021

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उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021

[ उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 3, 2021 ]

उ० प्र० अधिनियम संख्या 7, 2024

द्वारा संशोधित

[जैसा उत्तर प्रदेश विधान मण्डल द्वारा पारित हुआ, भारत के संविधान के अनुच्छेद 200 के अधीन राज्यपाल महोदय ने दिनांक 4 मार्च, 2021 को अनुमति प्रदान की तथा उ०प्र० गजट असाधारण में दिनांक 5 मार्च, 2021 को प्रकाशित हुआ।]

दुर्व्यपदेशन, बल, असम्यक असर, प्रपीड़न, प्रलोभन द्वारा या किसी कपटपूर्ण साधन द्वारा या विवाह द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन का प्रतिषेध करने और उससे सम्बंधित या आनुषंगिक विषयों का उपबन्ध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के बहत्तरवें वर्ष में निम्नलिखित अधिनियम बनाया जाता हैः-

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ -

(1) यह अधिनियम उत्तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 कहा जायेगा।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में होगा।

(3) यह दिनांक 27 नवम्बर, 2020 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा।

2. परिभाषायें  -

जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, इस अधिनियम में,-

(क) 'प्रलोभन" का तात्पर्य-

(एक) नकद या वस्तु के रूप में किसी उपहार, परितोषण, सुलभधन या भौतिक लाभ;

(दो) रोजगार, किसी धार्मिक निकाय द्वारा संचालित प्रतिष्ठित विद्यालय में निःशुल्क शिक्षा; या

(तीन) बेहतर जीवन शैली, दैवी अप्रसाद या अन्यथा के रूप में प्रलोभित करने के प्रस्ताव से है और उसमें वे सम्मिलित हैं,

(ख) 'प्रपीड़न" का तात्पर्य मनोवैज्ञानिक दबाव या भौतिक बल प्रयोग द्वारा किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरूद्ध कार्य करने के लिए बाध्य करने से है. जिसमें शारीरिक क्षति या धमकी सम्मिलित है:

(ग) '’धर्म संपरिवर्तन’’ का तात्पर्य किसी व्यक्ति द्वारा स्वधर्म का त्याग करने और अन्य धर्म को ग्रहण करने से है,

(घ) "बल" में धर्म संपरिवर्तित या धर्म संपरिवर्तित होने हेतु इप्सित व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति या सम्पत्ति के लिये बल प्रदर्शित करना या किसी प्रकार की क्षति की धमकी देना सम्मिलित है;

(ङ) 'कपटपूर्ण साधन" में किसी प्रकार का प्रतिरूपण, मिथ्या नाम, उपनाम, धार्मिक प्रतीक या अन्यथा द्वारा प्रतिरूपण किया जाना सम्मिलित है;

(च) "सामूहिक धर्म संपरिवर्तन ‘’का तात्पर्य जहाँ दो या दो से अधिक व्यक्ति धर्म संपरिवर्तित किये जायं, से है,

(छ) "अवयस्क" का तात्पर्य अ‌ट्ठारह वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति से है;

(ज) "धर्म" का तात्पर्य भारत में या उसके किसी भाग में प्रचलित और तत्समय प्रवृत्त किसी विधि या परम्परा के अधीन यथा परिभाषित पूजा पद्धति, आस्था, विश्वास, पूजा या जीवन शैली की किसी संगठित प्रणाली से है;

(झ) "धर्म परिवर्तक" का तात्पर्य किसी ऐसे धार्मिक व्यक्ति से है. जो एक धर्म से दूसरे धर्म में संपरिवर्तन का कोई कार्य सम्पादित करता है और जिसे किसी भी नाम से पुकारा जाय, यथा पादरी, कर्मकाण्डी, मौलवी या मुल्ला इत्यादि ;

(ञ) "असम्यक असर’’ का तात्पर्य ऐसे असर का प्रयोग करने वाले व्यक्ति की इच्छा के अनुसार कार्य करने हेतु अन्य व्यक्ति को प्रेरित करने के उद्देश्य से किसी व्यक्ति द्वारा अपनी शक्ति का अंतःकरण के विरूद्ध प्रयोग करने या अन्य व्यक्ति पर असर डालने से है.

(ट) "विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन" का तात्पर्य ऐसे किसी धर्म संपरिवर्तन से है, जो देश की विधि के अनुसार न हो।

3. दुर्व्यपदेशन, बल, कपट, असम्यक् असर, प्रपीड़न, प्रलोभन द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में संपरिवर्तन का प्रतिषेध  

(1) कोई व्यक्ति दुर्व्यपदेशन, बल, असम्यक असर, प्रपीड़न, प्रलोभन के प्रयोग या पद्धति द्वारा या किसी कपटपूर्ण साधन द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अन्यथा रूप में एक धर्म से दूसरे धर्म में संपरिवर्तित नहीं करेगा/करेगी या संपरिवर्तित करने का प्रयास नहीं करेगा/करेगी। कोई व्यक्ति ऐसे धर्म संपरिवर्तन के लिए उत्प्रेरित नहीं करेगा/करेगी, विश्वास नहीं दिलायेगा / दिलायेगी या षड्यन्त्र नहीं करेगा / करेगी।

स्पष्टीकरणः

इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए इस उपधारा में संख्यांकित कारकों के आधार पर विवाह या विवाह की प्रकृति के सम्बन्ध का अनुष्ठानीकरण करके किया गया धर्म संपरिवर्तन सम्मिलित किया गया समझा जाएगा।

(2) यदि कोई व्यक्ति अपने ठीक पूर्व धर्म में संपरिवर्तन करता है तो उसे इस अधिनियम के अधीन धर्म संपरिवर्तन नहीं समझा जाएगा ।

स्पष्टीकरणः-

इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए ठीक पूर्व धर्म का तात्पर्य ऐसे धर्म से है जिसमें उस व्यक्ति की आस्था, विश्वास था अथवा जिसके लिए उक्त व्यक्ति स्वेच्छा से और स्वतंत्र रूप से अभ्यस्थ था।

1[4. प्रथम सूचना रिपोर्ट दाखिल करने के लिए सक्षम व्यक्ति --

अधिनियम के उपबन्धों के उल्लंघन से सम्बन्धित कोई सूचना किसी भी व्यक्ति द्वारा दी जा सकती है और ऐसी सूचना देने के रीति यही होगी जैसी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (अधिनियम संख्या 46 सन् 2023) के अध्याय 13 में दी गयी है। (1. उ० प्र० अधिनियन संख्या 7, 2024 की धारा 2 द्वारा प्रतिस्थापित।)

2[5. धारा 3 के उपबंधों का उल्लंघन करने पर दण्ड- -

(1) जो कोई धारा 3 के उपबंधों का उल्लंघन करेगा, वह किसी सिविल दायित्व पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसी अवधि के कारावास से दंडित किया जायेगा, जो तीन वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु जो दस वर्ष तक हो सकेगी और वह ऐसी जुर्माने के लिए भी दायी होगा जो पचास हजार रुपये से कम नहीं होगा: (2.  उ० प्र० अधिनियम संख्या 7, 2024 की धारा 3 द्वारा प्रतिस्थापित।)

परन्तु यह कि जो कोई किसी अवयस्क दिव्यांग अथवा मानसिक रूप से दुर्बल व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जन जाति के व्यक्ति के सम्बन्ध में धारा 3 के उपबंधों का उल्लंघन करेगा, यह ऐसी अवधि के कठोर कारावास से दंडित किया जायेगा, जो पांच वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु जो चौदह वर्ष तक हो सकेगी और वह ऐसे जुर्माने का भी दायी होगा, जो एक लाख रुपये से कम नहीं होगा :

परन्तु यह और कि जो कोई सामूहिक धर्म संपरिवर्तन के सम्बन्ध में धारा 3 के उपबंधों का उल्लंघन करेगा, वह ऐसी अवधि के कठोर कारावास से दंडित किया जायेगा जो सात वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु जो चौदह वर्ष तक हो सकेगी और वह ऐसे जुर्माने का भी दायी होगा, जो एक लाख रुपये से कम नहीं होगा;

(2) जो कोई विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन के सम्बन्ध में किन्हीं विदेशी अथवा अवधिक संस्थाओं से धन प्राप्त करेगा वह ऐसी अवधि से कठोर कारावास से दंडित किया जायेगा, जो सात वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु जो चौदह वर्ष तक हो सकेगी और वह ऐसे जुर्माने का भी दायी होगी, जो दस लाख रुपये से कम नहीं होगा।

(3) जो कोई धर्म संपरिवर्तन करने के आशय से किसी व्यक्ति को उसके जीवन या संपत्ति के लिए भय में डालता है, हमला करता है या बल का प्रयोग करता है या विवाह या विवाह करने का वचन देता है या उसके लिए उत्प्रेरित करता है या षडयंत्र करता है या उन्हें प्रलोभन दकर किसी नाबालिक महिला या व्यक्ति की तस्करी करता है या अन्यथा उन्हें विक्रीत करता है या इस निमित्त दुष्प्रेरण, प्रयास अथवा षडयंत्र करता है वह ऐसी अवधि के कठोर कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, जिसका तात्पर्य उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास से होगा, दंडित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी दायी होगा:

परन्तु ऐसा जुर्माना पीड़ित के चिकित्सीय खर्चों को पूरा करने और पुनर्वास के लिए न्यायोचित और युक्तियुक्त होगा:

परन्तु यह और कि इस धारा के अधीन अधिरोपित कोई जुर्माना पीडित को संदत्त किया जाएगा।

(4) न्यायालय उक्त धर्म संपरिवर्तन के पीडित की अभियुक्त द्वारा संदेय समुचित प्रतिकर भी स्वीकृत करेगा, जो अधिकतम पांच लाख रुपये तक हो सकता है जो जुर्माने के अतिरिक्त होगा।

(5) जो कोई इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का पूर्व में सिद्धदोष ठहराये जाने का इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय किसी अपराध का पुनः सिद्धदोष ठहराया जायेगा वह ऐसे प्रत्येक पश्चातवर्ती अपराध के लिए दण्ड का दायी होगा जो इस अधिनियम के अधीन त‌द्भिमित्त प्रदान किये गये दण्ड के दो गुना से अधिक नहीं होगा।

6. विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन के एकमात्र प्रयोजन से किया गया विवाह या विपर्ययेन शून्य घोषित होगा -

विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन के एकमात्र प्रयोजन से या विपर्ययेन एक धर्म के पुरूष द्वारा अन्य धर्म की महिला के साथ विवाह के पूर्व या पश्चात् या तो स्वयं का धर्म संपरिवर्तन करके या विवाह के पूर्व या पश्चात् महिला का धर्म संपरिवर्तन करके किया गया कोई विवाह, विवाह के किसी पक्षकार द्वारा दूसरे पक्षकार के विरूद्ध प्रस्तुत की गयी याचिका पर कुटुम्ब न्यायालय द्वारा या जहाँ कुटुम्ब न्यायालय स्थापित न हो, वहां ऐसे मामले का विचारण करने की अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा शून्य घोषित कर दिया जायेगा :

परन्तु यह कि धारा 8 एवं 9 के समस्त उपबन्ध ऐसे किये जाने वाले विवाहों पर लागू होंगे।

1[7. (1) अपराध गैर जमानतीय और संज्ञेय होंगे -

(1) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (अधिनियम संख्या 46 सन् 2023) से अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम के अधीन समस्त अपराध, संज्ञेय और गैर जमानतीय होंगे तथा सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय होंगे। (1. उ० प्र० अधिनियम संख्या 7. 2024 की धारा 4 द्वारा प्रतिस्थापित।)

(2) इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध के अभियुक्त व्यक्ति, यदि अभिरक्षा में हो, को जमानत पर तब तक नहीं छोड़ा जायेगा, जब तक कि-

(क) इस अधिनियम को, ऐसे छोडे जाने के लिए जमानत के आवेदन का विरोध करने हेतु अवसर न प्रदान कर दिया जाय, और

(ख) जहाँ लोक अभियोजक जमानत के आवेदन का विरोध करता है वहीं सत्र न्यायालय का यह समाधान हो जाने पर कि यह विश्वास करने के युक्तियुक्त आधार है कि वह ऐसे अपराध का दोषी नहीं है और यह कि जमानत पर रहने के दौरान उसके द्वारा कोई अपराध किया जाना संभाव्य नहीं है।

8. (1) धर्म संपरिवर्तन के पूर्व घोषणा और धर्म संपरिवर्तन के सम्बंध में पूर्व रिपोर्ट -

(1) अपना धर्म संपरिवर्तन करना चाहने वाले / वाली व्यक्ति को कम से कम साठ दिवस पूर्व जिला मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा विशेष रूप से प्राधिकृत अपर जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष अनुसूची-एक में विहित प्रपत्र में यह घोषणा करनी होगी कि वह स्व-आधार पर और अपनी स्वतंत्र सहमति से तथा बिना किसी बल, प्रपीड़न, असम्यक असर या प्रलोभन के अपना धर्म संपरिवर्तन करना चाहता है/ चाहती है।

(2) धर्म परिवर्तक, जो किसी व्यक्ति का एक धर्म से अन्य धर्म में संपरिवर्तित करने के लिए अनुष्ठान सम्पादित करेगा, ऐसे संपरिवर्तन के सम्बंध में अनुसूची-दो में विहित प्रपत्र में नोटिस, जिला मजिस्ट्रेट या उस जिला. जहाँ ऐसा अनुष्ठान सम्पादित किया जाना प्रस्तावित हो, के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा उक्त प्रयोजनार्थ नियुक्त अपर जिला मजिस्ट्रेट की श्रेणी से अनिम्न किसी अन्य अधिकारी को एक माह पूर्व देगा।

(3) जिला मजिस्ट्रेट उपधारा (1) और (2) के अधीन सूचना प्राप्त करने के पश्चात् प्रस्तावित धर्म संपरिवर्तन के वास्तविक आशय, प्रयोजन और कारण के सम्बंध में पुलिस के माध्यम से जांच सम्पादित करायेगा।

(4) उपधारा (1) और/या उपधारा (2) का उल्लंघन किये जाने पर प्रस्तावित धर्म संपरिवर्तन किये जाने का प्रभाव अवैध तथा शून्य हो जायेगा।

(5) जो कोई उपधारा (1) के उपबंधों का उल्लंघन करेगा / करेगी वह ऐसी अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जायेगा/की जायेगी जो छः माह से कम नहीं होगी किन्तु जो तीन वर्ष तक हो सकेगी और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा / होगी जो दस हजार रूपये से कम नहीं होगा;

(6) जो कोई उपधारा (2) के उपबंधों का उल्लंघन करेगा / करेगी वह ऐसी अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जायेगा/की जायेगी जो एक वर्ष से कम नहीं होगी किन्तु जो पांच वर्ष तक हो सकेगी और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा / होगी जो पच्चीस हजार रूपये से कम नहीं होगा।

9. पश्च धर्म संपरिवर्तन की घोषणा -

(1) धर्म संपरिवर्तित व्यक्ति को अनुसूची-तीन में विहित प्रपत्र में धर्म संपरिवर्तन के दिनांक से साठ दिवस के भीतर उस जिला, जिसमें धर्म संपरिवर्तित व्यक्ति सामान्यतः निवास करता/करती हो, के जिला मजिस्ट्रेट को एक घोषणा प्रेषित करनी होगी।

(2) जिला मजिस्ट्रेट को घोषणा की एक प्रति, पुष्टि किये जाने के दिनांक तक कार्यालय के सूचना पट्ट पर प्रदर्शित करनी होगी।

(3) उक्त घोषणा में अपेक्षित विवरण अर्थात् धर्म संपरिवर्तन की विशिष्टियां अन्तर्विष्ट होंगी यथा धर्म संपरिवर्तित व्यक्ति की जन्मतिथि, स्थायी पता और वर्तमान निवास स्थान, पिता/पति का नाम, धर्म, जिससे धर्म संपरिवर्तित व्यक्ति मूलतः सम्बन्धित है और धर्म, जिसमें उसने धर्म संपरिवर्तन किया हो/की हो, धर्म संपरिवर्तन का दिनांक तथा स्थान और धर्म संपरिवर्तन हेतु अपनायी गयी प्रकिया की प्रकृति।

(4) धर्म संपरिवर्तित व्यक्ति को घोषणा प्रेषित करने / दाखिल करने के दिनांक से 21 दिन के भीतर जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत होकर अपनी पहचान स्थापित करनी होगी और घोषणा की विषयवस्तु की पुष्टि करनी होगी।

(5) जिला मजिस्ट्रेट को घोषणा के तथ्य को, इस प्रयोजनार्थ अनुरक्षित रजिस्टर में अभिलिखित करके पुष्टि करनी होगी। यदि कोई आपत्तियां संज्ञान में लायी जाती हैं तो वह उन्हें सामान्यतः अभिलिखित कर सकता है यथा नाम, आपत्तियों की विशिष्टियां और आपत्ति की प्रकृति।

(6) घोषणा की सत्यापित प्रति, पुष्टिकरण और रजिस्टर के उद्धरण ऐसे पक्षकार जिसने घोषणा दी हो. को या उसके अनुरोध पर उसके प्राधिकृत विधिक प्रतिनिधि को उपलब्ध कराये जायेंगे।

(7) उपधारा (1) से (4) का उल्लघंन किये जाने पर उक्त धर्म संपरिवर्तन का प्रभाव अवैध और शून्य हो जायेगा।

10. किसी संस्था या संगठन द्वारा अधिनियम के उपबन्धों का अतिक्रमण किये जाने पर दण्ड -

(1) यदि कोई संस्था या संगठन इस अधिनियम के उपबंधों का अतिक्रमण करता है तो यथास्थिति, उस संस्था या संगठन के मामलों का प्रभारी व्यक्ति या व्यक्तिगण धारा 5 के अधीन यथा उपबंधित दण्ड के अध्यधीन होगा / होंगे और तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन संगठन या संस्था का रजिस्ट्रीकरण, इस सम्बंध में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा कृत निर्देश के आधार पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा रद्द किया जा सकता है।

(2) राज्य सरकार इस अधिनियम के उपबन्धों का अतिक्रमण करने वाली संस्था या संगठन को कोई वित्तीय सहायता या अनुदान उपबंधित नहीं करेगी।

11. अपराध के पक्षकार-

जब अधिनियम के अधीन कोई अपराध कारित किया जाय, तब अपराध के कारित करने में निम्नलिखित प्रत्येक व्यक्ति सहभागी हुआ समझा जायेगा / सहभागी हुई समझी जायेगी और वह अपराध का दोषी होगा / होगी और उसे इस प्रकार आरोपित किया जायेगा, मानों वह वास्तव में उक्त अपराध कारित किया हो/की हो. अर्थात्ः-

(एक) प्रत्येक व्यक्ति, जो वास्तव में ऐसा कृत्य करता/करती है. जिससे अपराध संरचित होता है.

(दो) प्रत्येक व्यक्ति, जो अन्य व्यक्ति को अपराध कारित करने में सक्षम बनाने या सहायता करने के प्रयोजन से कोई कृत्य करता/करती है या करने का लोप करता/करती है;

[उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021]

(तीन) प्रत्येक व्यक्ति, जो अपराध कारित करने में अन्य व्यक्ति की सहायता करता/करती है या उसे दुष्प्रेरित करता/करती है;

(चार) कोई व्यक्ति, जो अपराध कारित करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति को परामर्श देता / देती है, विश्वास दिलाता / दिलाती है या उपाप्त करता/करती है।

12. सबूत का भार -

इस तथ्य के सबूत का भार कि कोई धर्म संपरिवर्तन, दुर्व्यपदेशन, बल, असम्यक् असर, प्रपीड़न, प्रलोभन के माध्यम से या किसी कपटपूर्ण साधन द्वारा या विवाह द्वारा प्रभावित नही है, उस व्यक्ति पर, जिसने धर्म संपरिवर्तन कराया है और जहाँ ऐसा धर्म संपरिवर्तन किसी व्यक्ति द्वारा सुकर बनाया गया हो वहाँ ऐसे अन्य व्यक्ति पर होगा।

13. कठिनाईयों को दूर करने की शक्ति -

(1) यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राज्य सरकार, सरकारी गजट में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे उपबंध जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो कर सकती है, जैसा कि उसे कठिनाई को दूर करने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो :

परन्तु यह कि इस अधिनियम के प्रारम्भ होने के दिनांक से दो वर्ष के पश्चात ऐसा कोई आदेश नहीं किया जायेगा।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, यथाशक्य शीघ्र, इसे किये जाने के पश्चात् राज्य विधान मण्डल के दोनों सदनों के समक्ष रखा जायेगा।

14. नियम बनाने की शक्ति  -

राज्य सरकार सरकारी गजट में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों को क्रियान्वित करने के लिए नियम बना सकती है।

15. निरसन और व्यावृत्ति -(1)-  

उत्तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 एतद्वारा निरसित किया जाता है।

(2). उत्तर प्रदेश अध्यादेश संख्या 21 सन् 2020 -

ऐसे निरसन के होते हुए भी उत्तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 के अधीन कृत कोई कार्य या की गयी कोई कार्यवाही, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन कृत या की गयी गई समझी जायेगी।

अनुसूची-एक

घोषणा-पत्र [धारा 8 की उपधारा (1) देखें)

एक धर्म से दूसरे धर्म में आशयित संपरिवर्तन के सम्बन्ध में सूचना

सेवा में,

जिला मजिस्ट्रेट,

जिला

उत्तर प्रदेश।

महोदय,

मैं…………………..पुत्र/पुत्री……………………….. निवासी…………………………….. धर्म……………………………… से धर्म..………………………………………..में संपरिवर्तन हेतु आवश्यक अनुष्ठान निष्पादित करने का की इच्छुक हूँ, एतद्वारा, धारा 8 की उपधारा (1) द्वारा यथाअपेक्षित आशयित धर्म संपरिवर्तन की सूचना देत्ता/देती हूँ :-

1. व्यक्ति का नाम जिसका धर्म संपरिवर्तन होना है……………………………………………………………………………….

2. नामः

(क) जिस व्यक्ति का धर्म संपरिवर्तन होना है उसके पिता ……………………………………………………………………..

(ख) जिस व्यक्ति का धर्म संपरिवर्तन होना है उसकी माता …………………………………………………………………….

3. धर्म संपरिवर्तित किए जाने वाले व्यक्ति का पता ……………………………………………………………………………….

भवन संख्या……………………………….............वार्ड संख्या ……………………………………मोहल्ला………………….. गांव…………………………..तहसील……………………………………जिला………………………………

4. आयु ………………………………………………………………………………………………. (जन्मतिथि)

5. लिंग. ……………………………………………………………………………………………….

6. व्यवसाय और मासिक आय ………………………………………………………………….

7. विवाहित या अविवाहित ………………………………………………………………………..

8. धर्म संपरिवर्तित किये जाने वाले व्यक्ति पर आश्रित व्यक्तियों, यदि कोई हो, के नाम.............................................

9. यदि कोई अवयस्क हो, तो संरक्षक, यदि कोई हो, का नाम व पूरा पता……………………………………………………..

10. क्या वह अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का/की है, और यदि ऐसा है तो ऐसी जाति के विवरण ……………………………………………………………………………

11. सम्पूर्ण विवरण के साथ उस स्थान का नाम जहां धर्मान्तरण अनुष्ठान किया जाना आशयित है भवन संख्या ………………………………………वार्ड संख्या……………………………………. ...जिला............................................ मोहल्ला............................................ ग्राम ……………………………………………………….

12.धर्म संपरिवर्तन का दिनांक ……………………………………………………………………………………

13. धार्मिक पुजारीः ………………………………………………………………………………………………

(एक) नाम, अर्हता और अनुभव……………………………………………………………………………………

(दो) पता …………………………………………………………………………………………………………

सत्यापन

मैं , ……………………………………………………………………………………एतद्वारा घोषणा करता/करती हूँ कि ऊपर उल्लिखित सूचना मेरे सर्वोत्तम ज्ञान और विश्वास के अनुसार सही है और कुछ भी छिपाया नहीं गया है।

हस्ताक्षर …………………………………………………………………

दिनांक ……………………………………………………………………

स्थान ……………………………………………………………………….

 

अनुसूची-दो

नोटिस पत्र [धारा 8 की उपधारा (2) देखें]

एक धर्म से दूसरे धर्म में आशयित संपरिवर्तन के संबंध में धार्मिक पुजारी द्वारा नोटिस

सेवा में,

जिला मजिस्ट्रेट,

जिला..

उत्तर प्रदेश।

महोदय,

मैं……………………………………………………………….पुत्र/पुत्री……………………………………………………. निवासी …………………………………… एतद्वारा धारा 8 की उपधारा (2) द्वारा यथा अपेक्षित धर्म ……………से धर्म ………………………………………………………. में आशयित संपरिवर्तन के लिए नोटिस प्रस्तुत करता/ करती हूँ, जो निम्नवत् हैं:-

1. व्यक्ति का नाम जिसका धर्म संपरिवर्तन होना है........................................................................................................

2. नामः

(क) धर्म संपरिवर्तित किये जाने वाले/वाली व्यक्ति का पिता ……………………………………………………………………

(ख) धर्म संपरिवर्तित किये जाने वाले / वाली व्यक्ति की माता ………………………………………………………………….

3. धर्म संपरिवर्तित किए जाने वाले / वाली व्यक्ति का पता....................................................................................... भवन संख्या……………………………………………..वार्डसंख्या…………………………………………………………………..

मोहल्ला…………………………………………………………….गांव……………………………………………………तहसील………………………………………………………………जिला ………………………................................

4. आयु ………………………………………………………………………………………………… (जन्मतिथि)

5. लिंग. …………………………………………………………………………………………………

6. व्यवसाय और मासिक आय …………………………………………………………………..

7. विवाहित या अविवाहित ………………………………………………………………………..

8. धर्म संपरिवर्तित किये जाने वाले/वाली व्यक्ति पर आश्रित व्यक्तियों, यदि कोई हो, के नाम ………………………………………………………………………………………………………

9. यदि अवयस्क हो, तो संरक्षक, यदि कोई हों, का नाम व पूरा पता ………………………………………………………….

10. क्या वह अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का/की है, और ऐसा है, तो ऐसी जाति का विवरण ………………………………………………………………………………………………..

11. सम्पूर्ण विवरण के साथ उस स्थान का नाम, जहाँ धर्म संपरिवर्तन अनुष्ठान किया जाना आशयित हो भवन संख्या …………………………………………………………..वार्डसंख्या........................................................................... मोहल्ला............................................................................... ग्राम……………………………………………………

जिला……………………………………………………………

12.धर्म संपरिवर्तन की तिथि ……………………………………………………………………………………………

13. धार्मिक पुजारीः …………………………………………………………………………………………………....

(एक) नाम, अर्हता और अनुभव……………………………………………………………………………………………

(दो) पता …………………………………………………………………………………………………………………

सत्यापन

मैं, ……………………………………………………………………………………………………. एतद्वारा घोषणा करता/करती हूँ कि ऊपर  उल्लिखित सूचना मेरे सर्वोत्तम ज्ञान और विश्वास के अनुसार सही है और कुछ भी छिपाया नहीं गया है।

हस्ताक्षर …………………………………………………………………………..

दिनांक …………………………………………………………………………….

स्थान ……………………………………………………………………………….

 

अनुसूची-तीन

घोषणा पत्र (धारा 9 देखें)

एक धर्म से दूसरे धर्म में संपरिवर्तन के संबंध में सूचना

सेवा में.

जिला मजिस्ट्रेट,

जिला........

उत्तर प्रदेश।

महोदय,

मैं,………………………………………………………………………..पुत्रपुत्री……………………………………………

एतद्वारा धारा 9 द्वारा धर्म……………………………………………………. निवासी से धर्म.. ..... ……………………………में संपरिवर्तन हेतु आवश्यक अनुष्ठान सम्पादित कर लिए जाने सम्बन्धी सूचना प्रस्तुत करता/करती हूँ, जो निम्नवत् हैं:-

1. धर्म संपरिवर्तित व्यक्ति का पूरा नामः

(1) धर्म संपरिवर्तन के पूर्व…………………………………………………………………………………………………….

(2) धर्म संपरिवर्तन के पश्चात् (यदि नाम परिवर्तित किया गया हो)……………………………………………………………….

2. नामः

(क) धर्म संपरिवर्तित व्यक्ति का पिता …………………………………………………………………………………………

(ख) धर्म संपरिवर्तित व्यक्ति की माता ………………………………………………………………………………………….

3. धर्म संपरिवर्तित व्यक्ति का पता ………………………………………………………………………………………………

भवन संख्या ………………………………………………. तहसील…………………………………………………..वार्ड संख्या……………………………………………………….मोहल्ला…………………………………………… जिला……………………………………………………………… गांव …………………………

4. आयु ……………………………………………………………………………………………………… (जन्मतिथि)

5. लिंग………………………………………………………………………………………………………

6. व्यवसाय और मासिक आय ………………………………………………………………………….

7. विवाहित या अविवाहित ………………………………………………………………………………..

8. धर्म संपरिवर्तित व्यक्ति पर आश्रित व्यक्तियों, यदि कोई हो, के नाम ………………………………………………………..

9. यदि अवयस्क हो, संरक्षक, यदि कोई हो, का नाम व पूरा पता ………………………………………………………………

10. क्या वह अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का है. यदि ऐसा है, तो जाति का विवरण …………………………………………………………………………………………………..

11. सम्पूर्ण विवरण के साथ उस स्थान का नाम, जहाँ धर्म संपरिवर्तन अनुष्ठान सम्पन्न हुआ हो  भवन संख्या …………………………………………………………. वार्ड संख्या ………………………………………………………… जिला……………………………………………….. मोहल्ला ………………………………….ग्राम...................................

12. धर्म संपरिवर्तन का दिनांक ………………………………………………………………………………

13. धार्मिक पुजारी.. ………………………………………………………………………………………

(एक) नाम, अर्हता और अनुभव.........................................................................................................

(दो) पता …………………………………………………………………………………………………

14. धार्मिक पुजारी से भिन्न कम से कम दो ऐसे व्यक्तियों के नाम, पते एवं अन्य विवरण (धर्म संपरिवर्तित व्यक्ति से सम्बन्ध, यदि कोई हो), जिनके द्वारा धर्म संपरिवर्तन अनुष्ठान में भाग लिया गया होः

(1)………………………………………………………………………………………………………………………….

(2)…………………………………………………………………………………………………………………………

सत्यापन

मैं,…………………………………………………………………………………………………एतद्वारा घोषणा करता/करती हूँ कि ऊपर उल्लिखित सूचना मेरे सर्वोत्तम ज्ञान और विश्वास के अनुसार सही है और कुछ भी छिपाया नहीं गया है।

हस्ताक्षर

साक्षी: (1)……………………………………………………………………………………………

साक्षीः (2)......................................................................................................................

दिनांक ……………………………………………………………………

स्थान ……………………………………………………………………….

उद्देश्य और कारण

भारत का संविधान समस्त व्यक्तियों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी प्रदान करता है, जिसमें भारत की सामाजिक समरसता और उसकी भावना प्रतिबिंबित होती है। इस अधिकार का उद्देश्य, भारत में धर्मनिरपेक्षता की भावना को प्रतिधारित किये रखना है। संविधान के अनुसार, राज्य का कोई धर्म नहीं होता है और समस्त धर्म राज्य के समक्ष समान होते हैं, और किसी धर्म का दूसरे धर्म पर अधिमान प्रदान नहीं किया जायेगा। समस्त व्यक्ति अपने पसंद के किसी धर्म का उपदेश देने, उसका संव्यवहार करने तथा प्रचार-प्रसार करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म की प्रव्यंजना करने, उसका संव्यवहार करने तथा प्रचार-प्रसार करने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। तथापि अंतःकरण और धार्मिक स्वतंत्रता के वैयक्तिक अधिकार को धर्म परिवर्तन करने के सामूहिक अधिकार के रूप में नहीं माना जा सकता है, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार समान रूप से धर्म संपरिवर्तन करने वाले व्यक्ति और धर्म संपरिवर्तित होना चाहने वाले व्यक्ति से संबंधित होता है।

तथापि विगत दिनों में ऐसे अनेक उदाहरण दृष्टिगोचर हुए है जहाँ सीधे-सादे व्यक्तियों को दुर्व्यपदेशन, बल. असम्यक प्रभाव, प्रपीड़न, प्रलोभन द्वारा अथवा कपटपूर्ण माध्यमों से एक धर्म से अन्य धर्म में संपरिवर्तन किया गया। देश के विभिन्न राज्यों में पहले से ही धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित विधि विद्यमान है किन्तु उत्तर प्रदेश में उक्त विषय में कोई परिनियम नहीं था।

उपरोक्त को दृष्टिगत रखते हुए दुर्व्यपदेशन, बल, असम्यक असर, प्रपीड़न, प्रलोभन द्वारा या कपटपूर्ण माध्यमों से एक धर्म से अन्य धर्म में विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन का प्रतिषेध करने और उससे संबंधित या आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने हेतु एक विधि अधिनियमित किये जाने का विनिश्चय किया गया था।

चूँकि राज्य विधानमण्डल सत्र में नहीं था और पूर्वोक्त विनिश्चय को क्रियान्वित करने के लिए तुरंत विधायी कार्यवाही की जानी आवश्यक थी, अतः राज्यपाल द्वारा दिनांक, 27 नवंबर, 2020 को उत्तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 (उत्तर प्रदेश अध्यादेश संख्या 21 सन् 2020) प्रख्यापित किया गया।

यह विधेयक पूर्वोक्त अध्यादेश को प्रतिस्थापित करने के लिये पुरःस्थापित किया जाता है।

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