धारा 1 से 2 अध्याय 1 प्रारम्भिक

धारा 1 से 2 अध्याय 1 प्रारम्भिक

किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण)

अधिनियम, 2015

क्रमांक 2 सन् 2016*

विधि के उल्लंघन के लिए अधिकथित और उल्लंघन करते पाए जाने वाले बालकों और देखरेख तथा संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों से संबंधित विधि का समेकन और संशोधन करने के लिए, बालकों के सर्वोत्तम हित में मामलों के न्यायनिर्णयन और निपटारे में बालकों के प्रति मित्रवत् दृष्टिकोण अपनाते हुए समुचित देखरेख, संरक्षा, विकास, उपचार, समाज में पुनः मिलाने के माध्यम से उनकी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करते हुए और उपबंधित प्रक्रियाओं तथा इसमें इसके अधीन स्थापित संस्थाओं और निकायों के माध्यम से उनके पुनर्वासन के लिए, तथा उससे संबंधित और उसके आनुषंगिक विषयों के लिए अधिनियम

संविधान के अनुच्छेद 15 के खंड (3), अनुच्छेद 39 खंड () और खंड (), अनुच्छेद 45 और अनुच्छेद 47 के उपबंधों के अधीन यह सुनिश्चित करने के लिए कि बालकों की सभी आवश्यकताओं को पूरा किया जाए और उनके मूलभूत मानव अधिकारों की पूर्णतया संरक्षा की जाए, शक्तियां प्रदान की गई हैं और कर्तव्य अधिरोपित किए गए हैं;

और, भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की साधारण सभा द्वारा अंगीकृत, बालकों के अधिकारों से संबंधित अभिसमय को, जिसमें ऐसे मानक विहित किए गए हैं जिनका बालक के सर्वोत्तम हित को सुनिश्चित करने में सभी राज्य पक्षकारों द्वारा पालन किया जाना है, 11 दिसम्बर, 1992 को अंगीकार किया था:

और, विधि का उल्लंघन करने के अभिकथित और उल्लंघन करते पाए जाने वाले बालकों तथा देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों के लिए बालक के अधिकारों से संबंधित अभिसमय, किशोर न्याय के प्रशासन के लिए संयुक्त राष्ट्र मानक न्यूनतम नियम, 1985 (बीजिंग) नियम), अपनी स्वतंत्रता से वंचित संयुक्त राष्ट्र किशोर संरक्षम नियम, (1990), बालक संरक्षण और अंतरदेशीय दत्तकग्रहण की बाबत सहयोग संबंधी हेग कन्वेंशन (1993) तथा अन्य संबंधित अंतरराष्ट्रीय लिखतों में विहित मानकों को ध्यान में रखते हुए व्यापक उपबंध करने के लिए किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 (2000 का 56) को पुनः अधिनियमित करना समीचीन है।

भारत गणराज्य के छियासठवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय 1

प्रारंभिक

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार प्रारंभ और लागू होना.-

(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 है।

(2) इसका विस्तार 1[* *] संपूर्ण भारत पर है। (1. अधिनियम क्रमांक 34 सन् 2019, अनुसूची 5, द्वारा दिनांक 31-10-2019 से "जम्मू-कश्मीर राज्य के सिवाय" शब्दों का लोप किया गया।)

(3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, नियत करे।

(4) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इस अधिनियम के उपबंध देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों तथा विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों से संबंधित सभी मामलों में लागू होंगे, जिनके अंतर्गत, -

(i) विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों की गिरफ्तारी, निरोध, अभियोजन, शास्ति या कारावास, पुनर्वास और समाज में पुनः मिलाना;

(ii) देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों के पुनर्वासन, दत्तकग्रहण, समाज में पुनः मिलाने और वापसी की प्रकियाएं और विनिश्चय अथवा आदेश, भी हैं।

2. परिभाषाएं.-

इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, -

(1) "परित्यक्त बालक" से अपने जैविक या दत्तक माता-पिता या संरक्षक द्वारा अभिव्यक्त ऐसा बालक अभिप्रेत है जिसे समिति द्वारा सम्यक् जांच के पश्चात् परित्यक्त घोषित किया गया है;

(2) "दत्तकग्रहण" से ऐसी प्रक्रिया अभिप्रेत है जिसके माध्यम से दत्तक बालक को उसके जैविक माता-पिता से स्थायी रूप से अलग कर दिया जता है और वह अपने दत्तक माता-पिता का ऐसे सभी अधिकारों, विशेषाधिकारों और उत्तरदायित्वों सहित, जो किसी जैविक बालक से जुड़े हों, विधिपूर्ण बालक बन जाता है;

(3) "दत्तकग्रहण विनियम* से प्राधिकरण द्वारा विरचित और केन्द्रीय सरकार द्वारा, दत्तकग्रहण के संबंध में अधिसूचित विनियम अभिप्रेत है;( *15 जनवरी, 2016 से प्रवृत्त, देखिए अधिसूचना क्र० का.. 110 () दिनांक 12 जनवरी, 2016. अधिसूचना भारत का राजपत्र (असाधारण) भाग 2 खण्ड (ii) दिनांक 13-1-2016 पृष्ठ 1 पर प्रकाशित।)

(4) 1[* *] *(1. अधिनियम क्रमांक 23 सन् 2021, धारा 2(i), द्वारा दिनांक 1-9-2022 से विलुप्त। पूर्व में खंड (4) निम्नवत था :-

'(4) "प्रशासक" से राज्य के उपसचिव से अनिम्न पंक्ति का ऐसा कोई जिला पदाधिकारी अभिप्रेत है जिसे मजिस्ट्रेट की शक्तियां प्रदान की गई हैं:')

(5) "पश्चात्वर्ती देखरेख" से उन व्यक्तियों की, जिन्होंने अठारह वर्ष की आयु पूरी कर ली है, किन्तु इक्कीस वर्ष की आयु पूरी नहीं की है और जिन्होंने समाज की मुख्य धारा से जुड़ने के लिए किसी संस्थागत देखरेख का त्याग कर दिया है, वित्तीय और अन्यथा सहायता का उपबंध किया जाना अभिप्रेत है;

(6) "प्राधिकृत विदेशी दत्तकग्रहण अभिकरण" से ऐसा कोई विदेशी, सामाजिक या बाल कल्याण अभिकरण अभिप्रेत है जो अनिवासी भारतीय के या विदेशी भारतीय नागरिक या भारतीय मूल के व्यक्तियों या विदेशी भावी दत्तक माता-पिता के भारत से किसी बालक के दत्तकग्रहण संबंधी आवेदन का समर्थन करने की उस देश के उनके केन्द्रीय प्राधिकरण या सरकारी विभाग की सिफारिश पर केन्द्रीय दत्तकग्रहण स्रोत प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत है;

(7) "प्राधिकरण" से धारा 68 के अधीन गठित केन्द्रीय दत्तकग्रहण स्रोत प्राधिकरण अभिप्रेत है;

(8) "भीख मांगना से, -

(i) किसी लोक स्थान पर भिक्षा की याचना करना या उसे प्राप्त करना अथवा किसी प्राइवेट परिसर में भिक्षा की याचना करने या उसे प्राप्त करने के प्रयोजन के लिए प्रवेश करना, चाहे वह किसी भी बहाने से हो;

(ii) भिक्षा अभिप्राप्त करने या उद्दापित करने के उद्देश्य से अपना या किसी अन्य व्यक्ति या किसी जीवजंतु का कोई व्रण, घाव, अंग विकार या रोग अभिदर्शित या प्रदर्शित करना,

अभिप्रेत है;

(9) "बालक का सर्वोत्तम हित" से बालक के बारे में, उसके मूलभूत अधिकारों और आवश्यकताओं, पहचान, सामाजिक कल्याण और भौतिक, भावनात्मक और बौद्धिक विकास के पूरा किए जाने को सुनिश्चित करने के लिए किए गए किसी विनिश्चय का आधार अभिप्रेत है;

(10) "बोर्ड" से धारा 4 के अधीन गठित किशोर न्याय बोर्ड अभिप्रेत है;

(11) "केन्द्रीय प्राधिकरण" से बाल संरक्षण और अंतरदेशीय दत्तकग्रहण की बाबत सहयोग संबंधी हेग कन्वेंशन (1993) के अधीन उस रूप में मान्यताप्राप्त सरकारी विभाग अभिप्रेत है;

(12) "बालक" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने अठारह वर्ष की आयु पूरी नहीं की है;

(13) "विधि का उल्लंघन करने वाला बालक" से ऐसा बालक अभिप्रेत है, जिसके बारे में यह अभिकथन है या पाया गया है कि उसने कोई अपराध किया है और जिसने उस अपराध के किए जाने की तारीख को अठारह वर्ष की आयु पूरी नहीं की है;

(14) "देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाला बालक" से ऐसा बालक अभिप्रेत है-

(i) जिसके बारे में यह पाया जाता है कि उसका कोई घर या निश्चित निवास स्थान नहीं है और जिसके पास जीवन निर्वाह के कोई दृश्यमान साधन नहीं हैं; या

(ii) जिसके बारे में यह पाया जाता है कि उसने 1[ इस अधिनियम के उपबंधों का या] तत्समय प्रवृत्त श्रम विधियों का उल्लंघन किया है या पथ पर भीख मांगते या वहां रहते पाया जाता है; या (1. अधिनियम क्रमांक 23 सन् 2021, धारा 2(ii) (), द्वारा दिनांक 1-9-2022 से अंतःस्थापित।)

(iii) जो किसी व्यक्ति के साथ रहता है (चाहे वह बालक का संरक्षक हो या नहीं) और ऐसे व्यक्ति ने, -

() बालक को क्षति पहुँचाई है, उसका शोषण किया है, उसके साथ दुर्व्यवहार किया है या उसकी उपेक्षा की है अथवा बालक के संरक्षण के लिए अभिप्रेत तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि का अतिक्रमण किया है; या

() बालक को मारने, उसे क्षति पहुँचाने, उसका शोषण करने या उसके साथ दुर्व्यवहार करने की धमकी दी है और उस धमकी को कार्यान्वित किए जाने की युक्तियुक्त संभावना है; या

() किसी अन्य बालक या बालकों का वध कर दिया है, उसके या उनके साथ दुर्व्यहार किया है, उसकी या उनकी उपेक्षा या उसका या उनका शोषण किया है और प्रश्नगत बालक का उस व्यक्ति द्वारा वध किए जाने, उसके साथ दुर्व्यवहार, उसका शोषण या उसकी उपेक्षा किए जाने की युक्तियुक्त संभावना है; या

(iv) जो मानसिक रूप से बीमार या मानसिक या शारीरिक रूप से असुविधाग्रस्त है या घातक अथवा असाध्य रोग से पीड़ित है, जिसकी सहायता या देखभाल करने वाला कोई नहीं है या जिसके माता-पिता या संरक्षक हैं, किन्तु वे उसकी देखरेख करने में, यदि बोर्ड या समिति द्वारा ऐसा पाया जाए, असमर्थ हैं; या

(v) जिसके माता-पिता अथवा कोई संरक्षक है और ऐसी माता या ऐसे पिता अथवा संरक्षक को बालक की देखरेख करने और उसकी सुरक्षा तथा कल्याण की संरक्षा करने के लिए, समिति या बोर्ड द्वारा अयोग्य या असमर्थ पाया जाता है; या

1[(vi) जिसके माता-पिता नहीं है और कोई भी उसकी देखरेख और संरक्षण करने का इच्छुक नहीं है या जिसका परित्याग या अभ्यर्पण कर दिया गया है;]( 1. अधिनियम क्रमांक 23 सन् 2021, धारा 2(ii) (), द्वारा दिनांक 1-9-2022 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपखंड (vi) निम्नवत था :-

(vii) जो गुमशुदा या भागा हुआ बालक है या जिसके माता-पिता, ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, युक्तियुक्त जांच के पश्चात् भी नहीं मिल सके हैं; या

(viii) जिसका लैंगिक दुर्व्यवहार या अवैध कार्यों के प्रयोजन के लिए दुर्व्यवहार, प्रपीड़न या शोषण किया गया है या किया जा रहा है या किए जाने की संभावना है; या

(ix) जो असुरक्षित पाया गया है और उसे मादक द्रव्य दुरुपयोग या अवैध व्यापार में 2[ सम्मिलित किया गया है या सम्मिलित किया जा रहा है या सम्मिलित किए जाने की संभावना है]; या (2. अधिनियम क्रमांक 23 सन् 2021, धारा 2(ii) (), द्वारा दिनांक 1-9-2022 से "सम्मिलित किए जाने की संभावना है" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।)

(x) जिसका लोकात्मा विरुद्ध अभिलाभों के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है या किए जाने की संभावना है; या

(xi) जो किसी सशस्त्र संघर्ष, सिविल उपद्रव या प्राकृतिक आपदा से पीड़ित है या प्रभावित है; या

(xii) जिसको विवाह की आयु प्राप्त करने के पूर्व विवाह का आसन्न जोखिम है और जिसके माता-पिता और कुटुंब के सदस्यों, संरक्षक और अन्य व्यक्तियों के ऐसे विवाह के अनुष्ठापन के लिए उत्तरदायी होने की संभावना है;

(15) "बालक हितैषी" से ऐसा कोई व्यवहार, आचरण, पद्धति, प्रक्रिया रुख, वातावरण या बर्ताव अभिप्रेत है, जो मानवीय, विचारशील और बालक के सर्वोत्तम हित में हो;

(16) "बालक का दत्तकग्रहण के लिए विधिक रूप से स्वतंत्र होना" से धारा 38 के अधीन सम्यक् जांच के पश्चात् समिति द्वारा उस रूप में घोषित किया गया बालक अभिप्रेत है;

(17) "बालक कल्याण अधिकारी" से, यथास्थिति, समिति या बोर्ड द्वारा दिए गए निदेशों का ऐसे उत्तरदायित्व से, जो विहित किया जाए, पालन करने के लिए 1[बालक देखरेख संस्था] से जुड़ा कोई अधिकारी अभिप्रेत है;( 1. अधिनियम क्रमांक 23 सन् 2021, धारा 2 (iii), द्वारा दिनांक 1-9-2022 से "बाल गृह" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।)

(18) "बालक कल्याण पुलिस अधिकारी" से धारा 107 की उपधारा (1) के अधीन उस रूप में पदाभिहित कोई अधिकारी अभिप्रेत है;

(19) "बाल गृह" से राज्य सरकार द्वारा, स्वयं द्वारा या किसी स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठन के माध्यम से प्रत्येक जिले या जिलों के समूह में स्थापित या अनुरक्षित और धारा 50 में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए उस रूप में रजिस्ट्रीकृत बाल गृह अभिप्रेत है;

(20) "बालक न्यायालय" से बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 (2006 का 4) के अधीन स्थापित कोई न्यायालय या लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (2012 का 32) के अधीन कोई विशेष न्यायालय, जहां कहीं विद्यमान हो, और जहां ऐसे न्यायालयों को अभिहित नहीं किया गया है, वहां इस अधिनियम के अधीन अपराधों का विचारण करने की अधिकारिता रखने वाला सेशन न्यायालय अभिप्रेत है;

(21) "बालक देखरेख संस्था" से बालगृह, खुला आश्रय, संप्रेक्षण गृह, विशेष गृह, सुरक्षित स्थान, विशिष्ट दत्तकग्रहण अभिकरण और उन बालकों की देखरेख और संरक्षा, जिन्हें ऐसी सेवाओं की आवश्यकता है, करने के लिए इस अधिनियम के अधीन मान्यताप्राप्त कोई उचित सुविधा तंत्र अभिप्रेत है;

(22) "समिति" से धारा 27 के अधीन गठित कोई बाल कल्याण समिति अभिप्रेत है;

(23) "न्यायालय" से ऐसा कोई सिविल न्यायालय अभिप्रेत है जिसे दत्तकग्रहण और संरक्षकता के मामलों में अधिकारिता प्राप्त है और इसके अंतर्गत जिला न्यायालय, कुटुंब न्यायालय और नगर सिविल न्यायालय भी सम्मिलित हैं;

(24) "शारीरिक दंड" से किसी व्यक्ति द्वारा किसी बालक को ऐसा शारीरिक दंड देना अभिप्रेत है जिसमें किसी अपराध के लिए प्रतिशोध के रूप में या बालक को अनुशासित करने या सुधारने के प्रयोजन के लिए जानबूझकर पीड़ा पहुँचाना अंतर्वलित है;

(25) "बालबद्ध सेवाओं" से संकटावस्था में बालकों के लिए चौबीस घंटे ऐसी आपातकालीन पहुंच सेवा अभिप्रेत है, जो उन्हें आपातकालीन या दीर्घकालीन देखरेख और पुनर्वास सेवा से जोड़ती हैं;

(26) "जिला बालक संरक्षण एकक" से किसी जिले के लिए धारा 106 के अधीन राज्य सरकार द्वारा स्थापित एक बालक संरक्षण एकक अभिप्रेत है जो इस अधिनियम के क्रियान्वयन को और जिले में अन्य बालक संरक्षण उपायों को सुनिश्चित ² [ करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के पर्यवेक्षण के अधीन कार्य करेगा]; (2. अधिनियम क्रमांक 23 सन् 2021, धारा 2(iv), द्वारा दिनांक 1-9-2022 से "करने का केन्द्र बिंदु हो" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।)

1[(26) "जिला मजिस्ट्रेट" के अन्तर्गत जिले का अपर जिला मजिस्ट्रेट भी है;]( 1. अधिनियम क्रमांक 23 सन् 2021, धारा 2(v), द्वारा दिनांक 1-9-2022 से अंतःस्थापित।)

(27) "उचित सुविधा तंत्र" से किसी सरकारी संगठन या रजिस्ट्रीकृत स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठन द्वारा चलाया जा रहा ऐसा सुविधा तंत्र उक्त प्रयोजन के लिए उचित होने के रूप में धारा 51 की उपधारा (1) के अधीन, यथास्थिति, समिति या बोर्ड द्वारा मान्यताप्राप्त है;

(28) "योग्य व्यक्ति" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो बालक की किसी विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है और ऐसे व्यक्ति की इस निमित्त जांच के पश्चात् पहचान कर ली गई है और उसे उक्त प्रयोजन के लिए, यथास्थिति, समिति या बोर्ड द्वारा बालक को लेने और उसकी देखरेख करने के लिए योग्य के रूप में, मान्यता प्रदान की गई;

(29) "पोषण देखरेख" से किसी बालक का समिति द्वारा बालक के जैविक कुटुंब से भिन्न ऐसे किसी कुटुंब के, जिसका ऐसी देखरेख करने के लिए चयन किया गया है जिसे अर्हित घोषित किया गया है, जिसका अनुमोदन और पर्यवेक्षण किया गया है, घरेलू वातावरण में आनुकल्पिक देखरेख के प्रयोजन के लिए रखा जाना अभिप्रेत है;

(30) "पालक कुटुंब" से ऐसा कुटुंब अभिप्रेत है जिसे जिला बालक संरक्षण एकक द्वारा धारा 44 के अधीन पोषण देखरेख के लिए बालकों को रखने हेतु उपयुक्त पाया गया है;

(31) "संरक्षक" से, किसी बालक के संबंध में, उसका नैसर्गिक संरक्षक या ऐसा कोई अन्य व्यक्ति अभिप्रेत है जिसकी वास्तविक देखरेख में, यथास्थिति, समिति या बोर्ड की राय में, वह बालक है और जिसे, यथास्थिति, समिति या बोर्ड द्वारा कार्यवाहियों के दौरान संरक्षक के रूप में मान्यता प्रदान की गई है;

(32) "सामूहिक पोषण देखरेख" से देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले ऐसे बालकों के लिए, जिनकी पैतृक देखरेख नहीं होती है, कुटुंब जैसी ऐसी देखरेख सुविधा अभिप्रेत है, जिसका उद्देश्य कुटुंब जैसे और समुदाय आधारित समाधानों के माध्यम से व्यक्तिपरक देखरेख करने का संबंध और पहचान के बोध को अनुकूल बनाने का है;

(33) "जघन्य अपराध" के अन्तर्गत ऐसे अपराध आते हैं, जिनके लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन न्यूनतम दंड सात वर्ष या उससे अधिक के कारावास का है;

(34) "अंतर-देशीय दत्तकग्रहण" से भारत से अनिवासी भारतीय द्वारा भारतीय मूल के किसी व्यक्ति द्वारा या किसी विदेशी द्वारा बालक का दत्तकग्रहण अभिप्रेत है;

(35) "किशोर" से अठारह वर्ष से कम आयु का बालक अभिप्रेत है;

(36) "स्वापक औषधि" और "मनःप्रभावी पदार्थ" के क्रमशः वही अर्थ हैं, जो स्वापक ओषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का 61) में हैं;

(37) "निराक्षेप प्रमाणपत्र" से, अंतर-देशीय दत्तकग्रहण के संबंध में, उक्त प्रयोजन के लिए केन्द्रीय दत्तकग्रहण स्रोत प्राधिकरण द्वारा जारी किया गया कोई प्रमाणपत्र अभिप्रेत है;

(38) "अनिवासी भारतीय" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके पास भरतीय पासपोर्ट है और वर्तमान में एक से अधिक वर्ष से विदेश में रह रहा है;

(39) "अधिसूचना" से, यथास्थिति, भारत के राजपत्र में किसी राज्य के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना अभिप्रेत है और "अधिसूचित" पद का तद्नुसार अर्थ लगाया जाएगा;

(40) "संप्रेक्षण गृह" से किसी राज्य सरकार द्वारा स्वयं या किसी स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठन के माध्यम से प्रत्येक जिले या जिलों के समूह में स्थापित और अनुरक्षित तथा धारा 47 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए उस रूप में रजिस्ट्रीकृत संप्रेक्षण गृह अभिप्रेत है;

(41) "खुला आश्रय" से बालकों के लिए राज्य सरकार द्वारा धारा 43 की उपधारा (1) के अधीन स्वयं द्वारा या किसी स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठन के माध्यम से स्थापित और अनुरक्षित तथा उस धारा में विनिर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए उस रूप में रजिस्ट्रीकृत सुविधा तंत्र अभिप्रेत है;

(42) "अनाथ" से ऐसा बालक अभिप्रेत है, -

(i) जिसके जैविक या दत्तक माता-पिता या विधिक संरक्षक नहीं हैं; या

(ii) जिसका विधिक संरक्षक बालक की देखरेख करने का इच्छुक नहीं है या देखरेख करने में समर्थ नहीं है;

(43) "विदेशी भारतीय नागरिक" से नागरिकता अधिनियम, 1955 (1955 का 57) के अधीन उस रूप में रजिस्ट्रीकृत कोई व्यक्ति अभिप्रेत है;

(44) "भारतीय मूल के व्यक्ति" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसके पारम्परिक पूर्वपुरुषों में से कोई भारतीय राष्ट्रिक है या था और जो वर्तमान में केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किया गया भारतीय मूल के व्यक्ति होने संबंधी कार्ड (पर्सन आफ इंडियन आरिजन कार्ड) धारण किए हुए है;

(45) "छोटे अपराधों" के अंतर्गत ऐसे अपराध आते हैं, जिनके लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45)या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन अधिकतम दंड तीन साल तक के कारावास का है;

(46) "सुरक्षित स्थान" से ऐसा कोई स्थान या ऐसी संस्था, जो पुलिस हवालात या जेल नहीं है, अभिप्रेत है, जिसकी स्थापना पृथक् रूप से की गई है या जो, यथास्थिति, किसी संप्रेक्षण गृह या किसी विशेष गृह से जुड़ी हुई है,  1[जो विधि का उल्लंघन करने वाले अभिकथित बालक या उल्लंघन करते पाए गए ऐसे बालकों को, बोर्ड या बालक न्यायालय, दोनों, के आदेश से जांच के दौरान या आदेश में यथाविनिर्दिष्ट अवधि और प्रयोजन के लिए दोषी पाए जाने के पश्चात् सतत् पुनर्वास के दौरान अपनाती है और उनकी देखरेख करती है];( 1. अधिनियम क्रमांक 23 सन् 2021, धारा 2(vi), द्वारा दिनांक 1-9-2022 से "जिसका भारसाधक व्यक्ति विधि का उल्लंघन करने वाले अभिकधित बालक या उल्लंघन करते पाए गए ऐसे बालकों को, बोर्ड या बालक न्यायालय, दोनों, के आदेश से जांच के दौरान या आदेश में यथाविनिर्दिष्ट अवधि और प्रयोजनों के लिए दोषी पाए जाने के पश्चात् सतत् पुनर्वास के दौरान अपनाने और उनकी देखरेख करने का इच्छुक है" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।)

(47) "विहित" से इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है;

(48) "परिवीक्षा अधिकारी" से राज्य सरकार द्वारा अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 (1958 का 20) के अधीन परिवीक्षा अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया अधिकारी या राज्य सरकार द्वारा जिला बालक संरक्षक एकक के अधीन नियुक्त किया गया विधि-सह-परिवीक्षा अधिकारी अभिप्रेत है;

(49) "भावी दत्तक माता-पिता" से धारा 57 के उपबंधों के अनुसार बालक के दत्तक के लिए पात्र व्यक्ति अभिप्रेत है या हैं;

(50) "लोक स्थान" का वही अर्थ होगा, जो अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 (1956 का 104) में है;

(51) "रजिस्ट्रीकृत" से राज्य सरकार के प्रबंधनाधीन बालक देखरेख संस्थाओं या अभिकरणों या सुविधा तंत्रों या किसी स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठन के संदर्भमें बालकों को अल्पकालिक या दीर्घकालिक आधार पर आवासीय देखरेख उपलब्ध कराने के लिए संप्रेक्षण गृह, विशेष गृह, सुरक्षित स्थान, बाल गृह, खुला आश्रय या विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण या कोई ऐसी अन्य संस्था, जो किसी विशिष्ट आवश्यकता की अनुक्रिया में सामने आए, या धारा 41 के अधीन प्राधिकृत और रजिस्ट्रीकृत अभिकरण या सुविधा तंत्र अभिप्रेत है;

(52) "नातेदार" से, इस अधिनियम के अधीन दत्तक के प्रयोजन के लिए किसी बालक के संबंध में, चाचा या चाची अथवा मामा या मामी अथवा पितामह-पितामही या मातामह-मातामही अभिप्रेत है;

(53) "राज्य अभिकरण" से राज्य सरकार द्वारा धारा 67 के अधीन दत्तकग्रहण और संबंधित मामलों के संबंध में कार्यवाही करने के लिए स्थापित राज्य दत्तकग्रहण स्रोत अभिकरण अभिप्रेत है;

1[(54) "घोर अपराध" के अंतर्गत ऐसे अपराध आते हैं जिनके लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45)या तत्समय प्रवृत्त अन्य विधि के अधीन, -

() तीन वर्ष से अधिक और सात वर्ष से अनधिक की अवधि के न्यूनतम कारावास के दंड का उपबंध है; या

() सात वर्ष से अधिक के अधिकतम कारावास का उपबंध है किंतु कोई न्यूनतम कारावास या सात वर्ष से कम के न्यूनतम कारावास का उपबंध नहीं है;](1.अधिनियम क्रमांक 23 सन् 2021, धारा 2(vii), द्वारा दिनांक 1-9-2022 से प्रतिस्थापित।

(55) "विशेष किशोर पुलिस एकक" से, यथास्थिति, किसी जिले या नगर के पुलिस बल का एकक, बालकों से संबंधित और धारा 107 के अधीन बालकों को संभालने के लिए उस रूप में अभिहित कोई अन्य पुलिस एकक, जैसे रेल पुलिस अभिप्रेत है;

(56) "विशेष गृह" से किसी राज्य सरकार द्वारा या किसी स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठन द्वारा विधि का उल्लंघन करने वाले ऐसे बालकों को, जिनके बारे में जांच के माध्यम से यह पाया जाता है कि उन्होंने अपराध कारित किया है और जिन्हें बोर्ड के आदेश से ऐसी संस्था में भेजा जाता है, आवासन और पुनर्वासन संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्थापित और धारा 48 के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोई संस्था अभिप्रेत है;

(57) "विशिष्ट दत्तकग्रहण अभिकरण" से ऐसे अनाथ, परित्यक्त और अभ्यर्पित बालकों के, जिन्हें दत्तकग्रहण के प्रयोजन के लिए समिति के आदेश द्वारा वहां रखा गया है, आवासन के लिए राज्य सरकार द्वारा या किसी स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठन द्वारा स्थापित और धारा 65 के अधीन मान्यताप्राप्त कोई संस्था अभिप्रेत है;

(58) "प्रवर्तकता" से कुटुंबों के लिए, बालक की चिकित्सीय, शैक्षणिक और विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वित्तीय या अन्यथा अनुपूरक सहायता का उपबंध अभिप्रेत है;

(59) "राज्य सरकार" से, किसी संघ राज्यक्षेत्र के संबंध में, संविधान के अनुच्छेद 239 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त उस संघ राज्यक्षेत्र का प्रशासक अभिप्रेत है;

(60) "अभ्यर्पित बालक" से ऐसा बालक अभिप्रेत है, जिसका माता-पिता अथवा संरक्षक द्वारा, ऐसे शारीरिक, भावनात्मक और सामाजिक कारकों के कारण, जो उनके नियंत्रण से परे हैं, समिति को त्यजन कर दिया गया है और समिति द्वारा उस रूप में उसे ऐसा घोषित किया गया है,

(61) उन सभी शब्दों और पदों के, जो इस अधिनियम में प्रयुक्त हैं, किंतु परिभाषित नहीं हैं और अन्य अधिनियमों में परिभाषित हैं, वही अर्थ होंगे, जो उन अधिनियमों में क्रमशः उनके हैं।

 

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