Hindi Medium One Liner Notes · मुस्लिम कानून (Muslim Law) वन-लाइनर नोट्स
मुस्लिम कानून (Muslim Law) वन-लाइनर नोट्स
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मुस्लिम विधि (MUSLIM LAW) | |
| मुस्लिम स्त्री (विवाह विच्छेद पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 | |
| (1986 का अधिनियम संख्यांक 25) | |
| संक्षिप्त नाम और विस्तार किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 1 |
| मुस्लिम स्त्री (विवाह विच्छेद पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 का प्रमुख उद्देश्य क्या है? | तलाक के बाद मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा करना |
| इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम क्या है? | मुस्लिम स्त्री (विवाह विच्छेद पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 |
| इस अधिनियम का अधिनियम संख्यांक क्या है? | 1986 का अधिनियम संख्यांक 25 |
| अधिनियम का विस्तार (क्षेत्राधिकार) किसे लागू होता है? | केवल मुस्लिम महिलाओं को |
| यह अधिनियम किस वर्ष लागू हुआ? | 1986 |
| इस अधिनियम के अंतर्गत “मुअद्दत” अवधि का क्या महत्व है? | तलाक के बाद महिला को जीवन निर्वाह देने की अवधि |
| तलाक के बाद पत्नी को जीवन निर्वाह देने का दायित्व किस पर होता है? | पति पर |
| इस अधिनियम के तहत तलाक के बाद महिला को कितना समय दिया जाता है ‘इद्दत अवधि में? | 3 मास की अवधि (मुअद्दत) |
| अधिनियम के अनुसार तलाक के बाद महिला को जीवन निर्वाह किस प्रकार दिया जाता है? | नियमित मासिक भुगतान के रूप में |
| क्या यह अधिनियम मुस्लिम तलाक के तरीके को बदलता है? | नहीं, केवल तलाक के बाद महिला के अधिकारों को सुरक्षित करता है |
| अधिनियम के तहत तलाक देने वाले को महिला को किस अधिकार का भुगतान करना आवश्यक है? | जीवन निर्वाह |
| इस अधिनियम का पालन करने की जिम्मेदारी किसकी होती है? | मुस्लिम पुरुष की |
| इस अधिनियम का मुख्य प्रावधान किसे लाभ पहुंचाता है? | मुस्लिम महिलाओं |
| “विच्छिन्न विवाह स्त्री" किस धारा में परिभाषित है? | धारा 2(क) |
| “विच्छिन्न विवाह स्त्री” का अर्थ क्या है? | ऐसी मुस्लिम स्त्री अभिप्रेत है जिसका मुस्लिम विधि के अनुसार विवाह हुआ था और जिसका, मुस्लिम विधि के अनुसार, उसके पति द्वारा विवाह विच्छेद किया गया है, या जिसने अपने पति से विवाह विच्छेद प्राप्त कर लिया है |
| कौन सा मामला “विच्छिन्न विवाह स्त्री” की पहचान में मार्गदर्शन करता है? | मोहम्मद अहमद खान बनाम शाह बानो बेगम (1985) |
| क्या “विच्छिन्न विवाह स्त्री” केवल मुस्लिम महिलाओं तक सीमित है? | हाँ |
| सुप्रीम कोर्ट ने “विच्छिन्न विवाह स्त्री” की व्याख्या करते हुए किस मामले में स्पष्ट किया कि तलाक के बाद महिला को जीवन निर्वाह का अधिकार है? | दानियल लतीफी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2001) |
| “विच्छिन्न विवाह स्त्री” की स्थिति में पति की क्या जिम्मेदारी होती है? | इद्दत अवधि के दौरान महिला का भरण-पोषण करना |
| क्या “विच्छिन्न विवाह स्त्री” के अधिकार को केवल धार्मिक अदालतें मानती हैं? | नहीं, परिवार न्यायालय भी |
| “विच्छिन्न विवाह स्त्री” की परिभाषा के अनुसार तलाक किस प्रकार माना जाएगा? | तलाक, खुल्ला और फतवा द्वारा विच्छेदन |
| क्या “विच्छिन्न विवाह स्त्री” अधिनियम के तहत केवल तलाक प्राप्त महिलाएं हैं? | नहीं, इसमें तलाक के अलावा खुल्ला और फतवा से भी अलग हुई महिलाएं शामिल हैं |
| “विच्छिन्न विवाह स्त्री” को अधिनियम के तहत कौन सा अधिकार प्राप्त होता है? | तलाक के बाद जीवन निर्वाह पाने का अधिकार |
| “विच्छिन्न विवाह स्त्री” की अवधारणा के अंतर्गत कौन-सी अवधि महत्वपूर्ण मानी जाती है? | मुअद्दत अवधि |
| क्या “विच्छिन्न विवाह स्त्री” को पति से तलाक मिलने के बाद पति से किसी प्रकार की आर्थिक सहायता का अधिकार है? | हाँ, मुअद्दत अवधि तक जीवन निर्वाह के लिए |
| “विच्छिन्न विवाह स्त्री” की परिभाषा किस अधिनियम की धारा 2(क) में दी गई है? | मुस्लिम स्त्री (विवाह विच्छेद पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 |
| अधिनियम में “विच्छिन्न विवाह स्त्री” के लिए ‘इद्दत की अवधि किसने निर्धारित की है? | शरिया कानून |
| इस अधिनियम के तहत “विच्छिन्न विवाह स्त्री” का हक़ किसके पास जाता है? | पति के पास से जीवन निर्वाह |
| अधिनियम के अनुसार “विच्छिन्न विवाह स्त्री” को तलाक के बाद किस अवधि के लिए भरण-पोषण का हक़ है? | मुअद्दत अवधि तक |
| “इद्दत की अवधि”, किस धारा में परिभाषित है? | धारा 2(ख) |
| “इद्दत की अवधि” किस स्थिति में शुरू होती है? | तलाक के बाद या पति की मृत्यु के बाद दोनों स्थितियों में |
| “इद्दत की अवधि” का उद्देश्य क्या है? | गर्भधारण की संभावना का निर्धारण करना |
| अधिनियम के अनुसार यदि उसका मासिक धर्म होता है तो “इद्दत की अवधि” की न्यूनतम अवधि क्या है? | विवाह विच्छेद की तारीख के पश्चात् तीन मासिक धर्म |
| अधिनियम के अनुसार यदि उसका मासिक धर्म नहीं होता है तो “इद्दत की अवधि” की न्यूनतम अवधि क्या है? | विवाह विच्छेद के पश्चात् तीन चन्द्रमास |
| अधिनियम के अनुसार यदि वह अपने विवाह विच्छेद के समय गर्भवती है तो “इद्दत की अवधि” की न्यूनतम अवधि क्या है? | विवाह विच्छेद और उसकी संतान के जन्म या उसके गर्भ के समापन के बीच की अवधि, इनमें जो भी पूर्वतर हो |
| “इद्दत की अवधि” के दौरान महिला क्या नहीं कर सकती? | पुनः विवाह करना |
| किस सुप्रीम कोर्ट के केस में “इद्दत की अवधि” के दौरान महिला के जीवन निर्वाह का अधिकार माना गया? | दानियल लतीफी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया |
| “इद्दत की अवधि” किस कानून पर आधारित है? | मुस्लिम शरिया कानून |
| “इद्दत की अवधि” किसके अधिकारों की सुरक्षा करती है? | महिला के अधिकार |
| “इद्दत की अवधि” की अवहेलना करने पर क्या प्रभाव पड़ता है? | पुनः विवाह अवैध होगा |
| “इद्दत की अवधि” के संबंध में विवादों का निपटारा कौन करता है? | परिवार न्यायालय |
| “इद्दत की अवधि” में पति की मृत्यु के बाद विधवा महिला के लिए क्या व्यवस्था है? | विधवा महिला को भी इद्दत पूरी करनी होगी |
| “मजिस्ट्रेट”, किस धारा में परिभाषित है? | धारा 2(ग) |
| “मजिस्ट्रेट” का क्या अर्थ है मुस्लिम स्त्री (विवाह विच्छेद पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत? | प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट अभिप्रेत है जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के अधीन उस क्षेत्र में अधिकारिता का प्रयोग करता है, जहां विच्छिन्न विवाह स्त्री निवास करती है |
| धारा 2(ग) के अनुसार, मजिस्ट्रेट की नियुक्ति किस द्वारा की जाती है? | राज्य सरकार |
| मजिस्ट्रेट की भूमिका इस अधिनियम में क्या है? | विवादों का समाधान करना और अधिकारों की सुरक्षा करना |
| किस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मजिस्ट्रेट की भूमिका और अधिकार को स्पष्ट किया? | मोहम्मद अहमद खान बनाम शाह बानो बेगम |
| मजिस्ट्रेट को किस प्रकार के मामलों की सुनवाई का अधिकार है? | मुस्लिम स्त्रियों के विवाह विच्छेद से संबंधित मामले |
| क्या मजिस्ट्रेट इस अधिनियम के तहत कोई आदेश देने में सक्षम होता है? | हाँ, वह आदेश जारी कर सकता है |
| मजिस्ट्रेट की न्यायिक शक्तियों के अंतर्गत क्या आता है? | तलाक के बाद भरण-पोषण का निर्धारण |
| धारा 2(ग) के अंतर्गत मजिस्ट्रेट की शक्ति किस अधिनियम से प्रभावित हो सकती है? | भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता |
| मजिस्ट्रेट की भूमिका से संबंधित विवादों का समाधान किस न्यायालय में होता है? | उस क्षेत्र के प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के न्यायालय में |
| “विहित”, किस धारा में परिभाषित है? | धारा 2(घ) |
| विहित से क्या अभिप्रेत है? | इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है |
| मेहर या मुस्लिम स्त्री की अन्य संपत्ति का विवाह विच्छेद के समय उसको दिया जाना, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 3 |
| धारा 3 के अनुसार, विवाह विच्छेद पर मुस्लिम स्त्री को मेहर या उसकी अन्य संपत्ति का अधिकार किस समय दिया जाता है? | विवाह विच्छेद के समय |
| मुस्लिम स्त्री (विवाह विच्छेद पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के अनुसार मेहर की राशि किसे देनी होती है? | मुस्लिम स्त्री को |
| कौन-सा केस मुस्लिम स्त्री के मेहर के अधिकारों के लिए एक मील का पत्थर माना जाता है? | शेहला बीवी बनाम राज्य पंजाब (1996) |
| धारा 3 के अनुसार मेहर का भुगतान न होने पर महिला का कौन सा अधिकार सुरक्षित रहता है? | अदालत में दावा करने का अधिकार |
| धारा 3 के तहत यदि पति ने मेहर नहीं दी तो मुस्लिम स्त्री किसके पास आवेदन कर सकती है? | मजिस्ट्रेट को |
| धारा 3 के अनुसार, मेहर या अन्य संपत्ति का भुगतान किस प्रकार होना चाहिए? | नकद या संपत्ति के रूप में |
| धारा 3 के अंतर्गत “अन्य संपत्ति” का अर्थ क्या है? | मेहर के अतिरिक्त अन्य किसी भी प्रकार की संपत्ति |
| कौन सा केस कानून मेहर का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है? | शाह बेगम बनाम रफीक अहमद (1989) |
| विच्छिन्न विवाह स्त्री किस प्रकार के भरण पोषण की हकदार होगी? | युक्तियुक्त और ऋजु उपबन्ध और भरणपोषण जो उसके पूर्व पति द्वारा इद्दत की अवधि में उसके लिए किया जाना है और संदत्त किया जाना है |
| जहां विच्छिन्न विवाह स्त्री अपने विवाह विच्छेद के पूर्व या उसके पश्चात् उससे जन्मी संतान का स्वयं भरणपोषण करती है वहां किस प्रकार के भरण पोषण की हकदार होगी? | कोई युक्तियुक्त और ऋजु उपबन्ध और भरणपोषण जो ऐसी संतान के जन्म की सम्बन्धित तारीखों से दो वर्ष की अवधि के लिए उसके पूर्व पति द्वारा किया जाना है |
| विच्छिन्न विवाह स्त्री किस प्रकार के मेहर की हकदार होगी? | मुस्लिम विधि के अनुसार उसके विवाह के समय या उसके पश्चात् किसी समय उसको संदत्त किए जाने के लिए करार पाई गई मेहर या डावर की राशि के बराबर रकम |
| विच्छिन्न विवाह स्त्री किस प्रकार की सम्पत्ति की हकदार होगी? | उसके नातेदारों या मित्रों या पति द्वारा अथवा पति के किसी नातेदार या उसके मित्रों द्वारा विवाह के पूर्व या विवाह के समय अथवा उसके विवाह के पश्चात् दी गई सभी सम्पत्ति |
| यदि धारा 3 के अन्तर्गत की मेहर या अन्य समपत्ति का परिदान नहीं किया गया है वहां क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी? | यदि परिदान नहीं किया गया है वहां वह या उसके द्वारा सम्यक् रूप से प्राधिकृत कोई व्यक्ति उसकी ओर से यथास्थिति, ऐसे उपवन्ध और भरणपोषण, मेहर या डावर के संदाय अथवा सम्पत्ति के परिदान के आदेश के लिए किसी मजिस्ट्रेट को आवेदन कर सकेगा। |
| धारा 3 के तहत अगर मेहर या संपत्ति का भुगतान नहीं होता तो क्या कार्रवाई हो सकती है? | पति को जेल भेजा जा सकता है |
| धारा 3 के तहत मेहर की राशि किस सीमा तक हो सकती है? | कानून में कोई सीमा नहीं है |
| धारा 3 के तहत मेहर का भुगतान न करने पर किस अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है? | मुस्लिम स्त्री (विवाह विच्छेद पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 |
| धारा 3 के अंतर्गत “विवाह विच्छेद” में क्या शामिल नहीं है? | मृत्यु |
| धारा 3 के अनुसार मेहर या संपत्ति की राशि का निर्धारण किसके आधार पर किया जाता है? | अदालत के विवेकाधिकार के आधार पर |
| भरणपोषण के संदाय के लिए आदेश, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 4 |
| धारा 4 के अनुसार, विवाह विच्छेद के बाद भरणपोषण का आदेश कौन देता है? | मजिस्ट्रेट |
| धारा 4 के तहत भरणपोषण का आदेश देते समय किस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है? | पति की आय और स्त्री की आर्थिक जरूरतें |
| किस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया, मुस्लिम स्त्री को तलाक के बाद भरणपोषण का अधिकार है? | शेहला बीवी बनाम राज्य पंजाब (1996) |
| धारा 4 के तहत भरणपोषण के आदेश को कौन सा कारक बदल सकता है? | पति की आर्थिक स्थिति में बदलाव स्त्री का पुनर्विवाह |
| यदि पति भरणपोषण का भुगतान नहीं करता है तो धारा 4 के अनुसार क्या कार्रवाई हो सकती है? | जुर्माना और गिरफ्तारी |
| धारा 4 के अनुसार भरणपोषण के लिए आवेदन करने की अधिकतम समय सीमा क्या है? | कोई समय सीमा नहीं |
| धारा 4 में भरणपोषण का आदेश किस प्रकार का भुगतान हो सकता है? | नकद या संपत्ति के रूप में |
| धारा 4 के तहत भरणपोषण की राशि निर्धारित करते समय कौन-सी बात मुख्य नहीं मानी जाती? | पति के परिवार की संपत्ति |
| धारा 4 के अनुसार भरणपोषण का भुगतान कब तक अनिवार्य होता है? | पति की मृत्यु तक या स्त्री के पुनर्विवाह तक |
| 2023 के अधिनियम की धारा 144 से धारा 147 तक के उपबंधों द्वारा शासित होने का विकल्प, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 5 |
| धारा 5 मुस्लिम स्त्री को किस अधिनियम की धाराओं 144 से 147 के अंतर्गत भरणपोषण प्राप्त करने का विकल्प देती है? | भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 |
| धारा 5 के अंतर्गत विकल्प चुनने के लिए दोनों पक्षों को क्या करना अनिवार्य है? | आवेदन की पहली सुनवाई की तारीख को विच्छिन्न विवाह स्त्री और उसका पूर्व पति शपथपत्र या किसी अन्य लिखित घोषणा द्वारा ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, या तो संयुक्त रूप से या पृथक्तः, यह घोषित करते हैं |
| भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 144 के अनुसार, भरणपोषण का अधिकार किन व्यक्तियों को प्राप्त है? | विवाहित, तलाकशुदा महिलाएं, बच्चे और माता-पिता |
| किस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया, मुस्लिम महिला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 144 के अंतर्गत भरणपोषण की पात्र है? | शाह बानो बनाम मोहम्मद अहमद खान (1985) |
| धारा 5 का उद्देश्य क्या है? | मुस्लिम महिला को धर्मनिरपेक्ष कानून के अंतर्गत विकल्प प्रदान करना |
| क्या धारा 5 के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धाराओं को चुनना अनिवार्य है? | नहीं, यह एक वैकल्पिक व्यवस्था है |
| नियम बनाने की शक्ति, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 6 |
| मुस्लिम स्त्री (विवाह विच्छेद पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 6 किसे नियम बनाने की शक्ति प्रदान करती है? | केंद्र सरकार |
| संक्रमणकालीन उपबन्ध, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 7 |
| मुस्लिम स्वीय विधि (शरीयत) अधिनियम, 1937 | |
| (1937 का अधिनियम संख्यांक 26) | |
| संक्षिप्त नाम और विस्तार, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 1 |
| मुस्लिम स्वीय विधि का संक्षिप्त नाम क्या है? | मुस्लिम स्वीय विधि (शरीयत) अधिनियम, 1937 |
| इस अधिनियम का अधिनियम संख्यांक क्या है? | 1937 का अधिनियम संख्यांक 26 |
| मुस्लिम स्वीय विधि (शरीयत) अधिनियम, 1937 का विस्तार किस क्षेत्र में है? | पूरे भारत में |
| यह अधिनियम किस विषय से संबंधित है? | मुस्लिमों की संपत्ति, उत्तराधिकार, व अन्य पारिवारिक विषयों पर शरीयत का आवेदन |
| इस अधिनियम के तहत किन व्यक्तियों पर शरीयत लागू होती है? | मुस्लिमों पर, जो भारत में रहते हैं |
| इस अधिनियम के अंतर्गत किस प्रकार के मामलों में शरीयत लागू होती है? | उत्तराधिकार, वसीयत, विवाह, दान, इत्यादि |
| क्या मुस्लिम स्वीय विधि (शरीयत) अधिनियम, 1937 एक धर्मनिरपेक्ष अधिनियम है? | नहीं |
| किस केस में शरीयत का अदालत में प्रवर्तन बात पर विचार किया गया था? | मूनशी बुज़लूर रूहीम बनाम शम्सुन्निसा बेगम (1867) |
| क्या मुस्लिम स्वीय विधि अधिनियम, 1937 को संविधान की सूची में संशोधित किया जा सकता है? | हाँ, संसद द्वारा |
| क्या इस अधिनियम को राज्य सरकार अपने राज्य में लागू या संशोधित कर सकती है? | नहीं |
| शरीयत अधिनियम का प्रमुख उद्देश्य क्या था? | मुस्लिमों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार न्याय सुनिश्चित करना |
| इस अधिनियम का पारित होना किस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है? | मुस्लिम पर्सनल लॉ को स्पष्ट करना |
| कौन सा केस शरीयत के अनुसार उत्तराधिकार मुद्दे से संबंधित था? | मो. हनीफ बनाम रुकसाना (AIR 2010 MP 194) |
| शरीयत अधिनियम, 1937 किस प्रकार के विधानों पर लागू नहीं होता है? | गोद लेने और त्याग पत्र (जिन्हें बाद में 1943 अधिनियम द्वारा अलग से विनियमित किया गया) |
| मुसलमानों को स्वीय विधि का लागू होना, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 2 |
| मुस्लिम स्वीय विधि (शरीयत) अधिनियम, 1937 की धारा 2 का मुख्य उद्देश्य क्या है? | मुसलमानों पर शरीयत के अनुसार पारिवारिक और व्यक्तिगत कानून लागू करना |
| धारा 2 किन विषयों पर शरीयत का लागू होना सुनिश्चित करती है? | सम्पत्ति, विवाह, विवाह-विघटन, जिसमें तलाक, इला, जिहार लियान, खुला तथा मुबारात, भरणपापेण, मेहर, संरक्षकता, दान, न्यास तथा न्यास-संपत्ति |
| क्या मुस्लिम स्वीय विधि अधिनियम की धारा 2, वक्फ (जो पूर्त तथा पूर्त संस्थाओं तथा पूर्त तथा धार्मिक विन्यासों से भिन्न हों) पर लागू होती है? | हाँ |
| क्या मुस्लिम स्वीय विधि अधिनियम की धारा 2, (कृषि भूमि से संबद्ध प्रश्नों के सिवाय) सभी प्रश्नों में तत्प्रतिकूल किसी रूढ़ि या प्रथा के होते हुए भी ऐसे मामलों में जहां पक्षकार मुसलमान हैं, वहां विनिश्चय का नियम पर लागू होती है? | हाँ |
| क्या मुस्लिम स्वीय विधि अधिनियम की धारा 2, विरासत में मिली या संविदा या दान या स्वीय विधि के किसी अन्य उपबंध के अधीन प्राप्त हुई स्वीय संपत्ति आती है, पर लागू होती है? | हाँ |
| क्या मुस्लिम स्वीय विधि अधिनियम की धारा 2, सभी भारतीय मुसलमानों पर स्वतः लागू होती है? | हाँ |
| किस केस में अदालत ने उत्तराधिकार पर मुस्लिम स्वीय विधि की व्याख्या की? | मसूद आलम बनाम अनीस फातिमा (AIR 2001 All 446) |
| धारा 2 का उद्देश्य किन परंपराओं को हटाकर शरीयत को लागू करना था? | स्थानीय प्रथाओं और रिवाजों (Customs And Usages) |
| धारा 2 के अंतर्गत शरीयत किन कानूनी विषयों पर लागू नहीं होती? | गोद लेना और त्याग
|
| धारा 2 किस विधि को मुस्लिम मामलों में सर्वोच्च बनाती है? | शरीयत या इस्लामी व्यक्तिगत कानून |
| किस मामले में विवाह की वैधता पर शरीयत अधिनियम लागू हुआ? | पथाई बनाम मोइदीन (AIR 1968 Ker 72) |
| शरीयत अधिनियम की धारा 2 के तहत लागू विधि किस स्तर पर बाध्यकारी मानी जाती है? | दीवानी न्यायालय में लागू |
| धारा 2 किन अधिकारों को प्रभावित नहीं करती है? | संवैधानिक अधिकार |
| किस केस में धार्मिक स्वतंत्रता बात पर शरीयत अधिनियम की व्याख्या की गई? | गुलाम अब्बास बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (एआईआर 1981 एससी 2198) |
| धारा 2 का कौन-सा प्रभाव था? | न्यायालयों को बाध्य करना कि वे मुस्लिम निजी मामलों में शरीयत को प्राथमिकता दें |
| क्या शरीयत अधिनियम की धारा 2 में विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत शादी करने वाले मुस्लिमों पर शरीयत लागू होगी? | नहीं |
| शरीयत अधिनियम, 1937 की धारा 2 का मुख्य सामाजिक उद्देश्य क्या था? | मुस्लिमों को समान कानून व्यवस्था देना |
| घोषणा करने की शक्ति, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 3 |
| धारा 3 के अनुसार, कौन व्यक्ति शरीयत कानून को लागू करने की घोषणा कर सकता है? | कोई भी यदि वह मुसलमान है, और वह भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 (1872 का 9) की धारा 11 के अर्थ में संविदा करने के लिए सक्षम है, और वह [उस राज्यक्षेत्र] का निवासी है [जिस पर इस अधिनियम का विस्तार है |
| धारा 3 का मुख्य उद्देश्य क्या है? | व्यक्तिगत रूप से शरीयत को स्वीकारने की विधिक घोषणा की अनुमति देना |
| घोषणा किस प्रकार की विधिक प्रक्रिया के अंतर्गत की जाती है? | विहित प्ररूप में तथा विहित प्राधिकारी के समक्ष घोषणा फाइल करके |
| धारा 3 के अनुसार किस प्राधिकारी के समक्ष घोषणा की जाएगी? | जिसे राज्य सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त नियत करे |
| नियम बनाने की शक्ति, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 4 |
| मुस्लिम स्वीय विधि (शरीयत) अधिनियम, 1937 की धारा 4 किसे नियम बनाने की शक्ति प्रदान करती है? | राज्य सरकार |
| निरसन, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 6 |
| धारा 6 के तहत किस अधिनियम को विशेष रूप से निरस्त किया गया है? | मुसलमानों का उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 1929 |
| निरसन का अर्थ है: | किसी पुराने कानून को समाप्त करना |
| धारा 6 के अनुसार, किन कानूनों को निरस्त किया गया है? | जो शरीयत के विरुद्ध थे |
| किस केस में अदालत ने स्पष्ट किया कि, पुराने उत्तराधिकार कानूनों को निरस्त किया गया है? | अब्दुल हुसैन खान बनाम बीबी सोना डेरो (1941 सिंध 114) |
| धारा 6 के अनुसार निरस्त किया गया कानून मुस्लिमों पर कब तक लागू था? | अधिनियम, 1937 के लागू होने तक |
| निरसन से क्या प्रभाव पड़ता है? | पूर्ववर्ती कानून निष्प्रभावी हो जाते हैं |
| क्या धारा 6 मुस्लिमों के लिए किसी विशेष राज्य या क्षेत्र तक सीमित है? | नहीं, पूरे भारत में लागू होती है |
| किस केस में कोर्ट ने कहा, निरसन का उद्देश्य शरीयत की सर्वोच्चता है? | मोहम्मद ज़ैनुल आबेदीन बनाम सकीना बेगम (एआईआर 1950 हैदराबाद 120) |
| धारा 6 के अनुसार कोई पुराना कानून जो शरीयत के विपरीत है, वह अब: | निरस्त (Repealed) है |
| धारा 6 के तहत निरसन का प्रभाव किस पर लागू होता है? | सभी मुस्लिमों पर |
| धारा 6 के अंतर्गत निरस्त किए गए अधिनियम को क्या कहा जाता है? | निरस्त अधिनियम |
| क्या शरीयत अधिनियम की धारा 6 के तहत अन्य राज्यों के द्वारा बनाए गए मुस्लिम उत्तराधिकार के स्थानीय कानून भी प्रभावित होते हैं? | हाँ |
| किस केस में कोर्ट ने बात को रेखांकित किया, पुराने रिवाज अब लागू नहीं रहेंगे? | बाकर अली बनाम अंजुमन आरा (AIR 1956 सभी 225) |
| मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 | |
| (1939 का अधिनियम संख्यांक 8) | |
| संक्षिप्त नाम और विस्तार, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 1 |
| इस अधिनियम, का संक्षिप्त नाम क्या है? | मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 |
| इस अधिनियम का अधिनियम संख्यांक क्या है? | 1939 का अधिनियम संख्यांक 8 |
| इस अधिनियम का विस्तार कहाँ तक है? | संपूर्ण भारत |
| क्या यह अधिनियम केवल महिलाओं के लिए बनाया गया है? | हाँ, मुस्लिम महिलाओं के तलाक के अधिकार के लिए |
| किस केस में बात की पुष्टि हुई, मुस्लिम महिला भी न्यायालय के माध्यम से विवाह समाप्त कर सकती है? | खुर्शीद बीबी बनाम मो. अमीन (पीएलडी 1967 एससी 97) |
| इस अधिनियम का उद्देश्य क्या है? | मुस्लिम महिलाओं को विवाह से मुक्ति हेतु न्यायिक उपाय देना |
| किस केस में अदालत ने विवाह समाप्त करने का अधिकार धारा 2 के संदर्भ में मुस्लिम महिलाओं के अधिकार को मान्यता दी? | इतवारी बनाम असगरी (एआईआर 1960 सभी 684) |
| अधिनियम 1939 के अधीन कौन प्रमुख सुधार हुआ? | मुस्लिम महिला को तलाक की मांग करने का विधिक आधार |
| विवाह विघटन की डिक्री के लिए आधार, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 2 |
| धारा 2 के अंतर्गत मुस्लिम स्त्री को तलाक की डिक्री प्राप्त करने का अधिकार कब प्राप्त होता है यदि उसका पति लगातार गायब है? | 4 वर्ष |
| धारा 2 के अंतर्गत मुस्लिम स्त्री को तलाक की डिक्री प्राप्त करने का अधिकार कब प्राप्त होता है यदि पति उसके भरण-पोषण की व्यवस्था करने में उपेक्षा की है या उसमें असफल रहा है? | दो वर्ष तक |
| धारा 2 के अंतर्गत मुस्लिम स्त्री को तलाक की डिक्री प्राप्त करने का अधिकार कब प्राप्त होता है यदि पति को कारावास का दण्ड दिया गया है? | सात वर्ष या उससे अधिक की अवधि के लिए |
| धारा 2 के अंतर्गत मुस्लिम स्त्री को तलाक की डिक्री प्राप्त करने का अधिकार कब प्राप्त होता है यदि पति अपने वैवाहिक कर्तव्यों का पालन करने में समुचित कारण बिना असफल रहा है? | तीन वर्ष तक |
| धारा 2 के अनुसार, मुस्लिम महिला को विवाह-विघटन की डिक्री कब मिल सकती है यदि पति पागल है? | यदि वह 2 वर्ष या अधिक समय से पागल है |
| धारा 2 के अनुसार, मुस्लिम महिला को विवाह-विघटन की डिक्री कब मिल सकती है यदि पति उग्र रतिज रोग से पीड़ित है? | 2 वर्ष या अधिक समय से |
| पन्द्रह वर्ष की आयु प्राप्त होने से पहले ही उसके पिता या अन्य संरक्षक ने उसका विवाह किया था, धारा 2 के अनुसार, मुस्लिम महिला को विवाह-विघटन की डिक्री कब मिल सकती है? | यदि उसने अठारह वर्ष की आयु प्राप्त करने से पूर्व ही विवाह का निराकरण कर दिया है |
| एक बाल-विवाह में विवाहित मुस्लिम महिला बालिग होने के एक वर्ष के भीतर विवाह को अस्वीकार कब कर सकती है? | यदि विवाह पिता ने कराया हो शारीरिक संबंध न बना हो |
| धारा 2 के अनुसार, यदि पति पत्नी के साथ कठोरता, मानसिक या शारीरिक क्रूरता करता है, तो क्या यह तलाक का आधार है? | हाँ, यह वैधानिक आधार है |
| किस केस में यह सिद्ध हुआ कि मुस्लिम महिला को पति के व्यवहार के कारण न्यायालय से विवाह-विघटन की डिक्री मिल सकती है? | खुर्शीद बीबी बनाम मोहम्मद अमीन |
| क्या “पति द्वारा पत्नी को अनैतिक जीवन जीने के लिए विवश करना” तलाक का आधार है? | हाँ, यह धारा 2 का स्पष्ट आधार है |
| मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम की धारा 2 के अंतर्गत, न्यायालय किसके पक्ष में डिक्री जारी कर सकता है? | केवल पत्नी के |
| यदि पति धार्मिक संप्रदाय बदल लेता है (conversion), तो क्या यह तलाक का आधार है? | हाँ |
| धारा 2 में बताए गए कारणों में से कौन-सा विशुद्ध रूप से "शारीरिक अक्षमता" से संबंधित है? | नपुंसकता |
| धारा 2 में उल्लिखित "निर्वाह नहीं करना" का न्यूनतम समय क्या है जिसके बाद पत्नी तलाक माँग सकती है? | 2 वर्ष |
| पति के वारिसों पर सूचना की तामील किया जाना जब पति का ठौर-ठिकाना ज्ञात नहीं है, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 3 |
| मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम की धारा 3 का मुख्य उद्देश्य क्या है? | पति के ठिकाने के अभाव में उसके वारिसों को सूचना देना |
| जब पति का पता नहीं होता, तो अदालत किसे विवाह-विघटन की याचिका की सूचना देती है? | पति के ज्ञात कानूनी वारिसों को |
| क्या धारा 3 के तहत सूचना तामील किए बिना तलाक की डिक्री दी जा सकती है? | नहीं, जब तक वारिसों को सूचना न दी जाए |
| धारा 3 में सूचना की प्रक्रिया किस प्रकार की होती है? | न्यायालय द्वारा विधिक नोटिस |
| किस केस में न्यायालय ने धारा 3 के संबंध में कहा, कि पति के ठिकाने के अभाव में वारिसों को सूचना देना आवश्यक है? | अमीना बनाम हसन कोया (AIR 1985 Ker 48) |
| यदि वारिसों को उचित समय पर सूचना नहीं दी जाती, तो क्या हो सकता है? | डिक्री अमान्य घोषित की जा सकती है |
| धारा 3 में जिन "वारिसों" को सूचना दी जाती है, वे कौन होते हैं? | जो पति की संपत्ति में उत्तराधिकारी हों |
| क्या धारा 3 मुस्लिम महिला के वैधानिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु प्रक्रियात्मक न्याय का हिस्सा है? | हाँ, यह न्याय का महत्वपूर्ण हिस्सा है |
| धारा 3 किस प्रक्रिया का पूरक है? | धारा 2 में तलाक की डिक्री की प्रक्रिया |
| यदि पति के किसी भी वारिस का पता न हो, तो अदालत क्या कर सकती है? | लोक सूचना माध्यम जैसे अख़बार में नोटिस प्रकाशित कर सकती है |
| क्या ऐसे वारिसों को वाद में सुनवाई का अधिकार होगा? | हाँ |
| अन्य धर्म में संपरिवर्तन का प्रभाव, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 4 |
| धारा 4 के अनुसार, यदि मुस्लिम स्त्री इस्लाम छोड़कर किसी अन्य धर्म में चली जाती है, तो क्या विवाह स्वतः समाप्त हो जाता है? | नहीं, उसे न्यायालय में तलाक की याचिका देनी होगी |
| क्या धारा 4 के अनुसार धर्म परिवर्तन स्वतः तलाक का आधार है? | नहीं |
| धारा 4 किसकी रक्षा करता है? | मुस्लिम महिला के वैवाहिक अधिकार की |
| किस केस में निर्णय हुआ, धर्म परिवर्तन तलाक का स्वतः आधार नहीं है? | रोबासा खानम बनाम खोदादाद ईरानी (1946 बॉम) |
| यदि मुस्लिम स्त्री ईसाई धर्म अपना लेती है, तो वह विवाह समाप्त करने के लिए क्या कर सकती है? | न्यायालय में तलाक हेतु याचिका |
| धारा 4 किस धारा से संबंधित है? | धारा 2 (तलाक के आधार) की पूरक |
| धारा 4 के अनुसार धर्म परिवर्तन के बावजूद विवाह कब तक वैध बना रहता है? | जब तक महिला अदालत से तलाक की डिक्री न ले |
| कौन-सा सिद्धांत धारा 4 में परिलक्षित होता है? | न्यायिक तलाक |
| कौन-सा केस एक धर्म से दूसरे धर्म में जाकर दूसरा विवाह करना पर केंद्रित था जो धारा 4 से जुड़ा है? | सरला मुद्गल बनाम भारत संघ (1995) |
| क्या धारा 4 मुस्लिम पुरुष पर भी लागू होती है? | नहीं, यह केवल महिलाओं के लिए है |
| धारा 4 में “परिवर्तन” का तात्पर्य है— | किसी अन्य धर्म को विधिवत स्वीकार करना |
| मेहर विषयक अधिकारों पर प्रभाव न होना, किस धारा से सम्बंधित है? | धारा 5 |
| धारा 5 के अनुसार, मुस्लिम स्त्री के मेहर के अधिकार पर तलाक का क्या प्रभाव होता है? | कोई प्रभाव नहीं पड़ता |
| "मेहर" का तात्पर्य किससे है? | पति द्वारा पत्नी को दिया गया धार्मिक अनिवार्य उपहार |
| क्या तलाक प्राप्त करने के बाद भी पत्नी मेहर की बकाया राशि की मांग कर सकती है? | हाँ, धारा 5 के अंतर्गत |
| किस केस में सुप्रीम कोर्ट ने मेहर के संदर्भ में कहा कि, पत्नी तलाक के बाद भी मेहर की हकदार है? | शमीम आरा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2002) |
| मेहर किस कानून के अंतर्गत आता है? | पर्सनल लॉ (शरीयत) |
| क्या न्यायालय मेहर की वसूली के लिए आदेश दे सकता है यदि पत्नी को तलाक मिल चुका हो? | हाँ, क्योंकि मेहर कानूनी दायित्व है |
| धारा 5 मुस्लिम महिलाओं को किस प्रकार का संरक्षण देती है? | आर्थिक |
| मेहर की वसूली का अधिकार किस प्रकार के दायित्व के रूप में माना जाता है? | वैधानिक (Statutory) |
| किस केस में सिद्ध हुआ, तलाक के बावजूद पत्नी मेहर की हकदार रहती है? | नसरा बेगम बनाम रिज़वान अली (एआईआर 2006 सभी 194) |
मुस्लिम विधि स्रोत (Sources of Muslim Law) | |
| मुस्लिम विधि किस पर आधारित है? | अल कुरान पर |
| हिजरी सन् कब प्रारम्भ हुआ? | 622 ई० |
| मुस्लिम विधि के प्राचीन स्रोत क्या है? | कुरान सुन्नत इज्मा क़ियास |
| मुस्लिम विधि गौण स्त्रोत क्या है? | उर्फ (रिवाज्स) न्यायिक विनिश्चय विधायन |
| मुस्लिम विधि का प्राथमिक और सर्वोच्च स्रोत क्या है? | कुरआन |
| हदीस किसका संकलन है? | पैग़म्बर मुहम्मद साहब के जीवन के प्रसंग और वचन |
| हिजरी सन् प्रारम्भ हुआ- | पैगम्बर साहब को मक्का से मदीना चले जाने की तिथि से |
| जब कुरआन, हदीस और इजमा मौन होते हैं, तो कौन-सा स्त्रोत उपयोग में लाया जाता है? | क़ियास |
| इजमा का क्या अर्थ है? | उलेमाओं की सर्वसम्मति |
| इज्मा के आवश्यक तत्व क्या है? | आम सहमति विधिवेत्ता विधिवेत्ता मुस्लिम हो |
| किस केस में मुस्लिम विधि को तर्क आधारित और न्यायोचित प्रणाली के रूप में परिभाषित किया गया? | अब्दुर रहीम बनाम नारायण दास अरोड़ा (1914) |
| मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) अधिनियम, 1937 किस उद्देश्य से लागू किया गया था? | मुस्लिमों पर शरीयत कानून लागू करना |
| “इस्तीहसन”किस सिद्धांत का उदाहरण है? | न्याय की भावना से किया गया अपवाद |
| फ़िक़्ह का शाब्दिक अर्थ है— | धार्मिक ज्ञान और समझ |
| भारत में मुस्लिम विधि का क्षेत्र मुख्यतः किस प्रकार के मामलों में लागू होता है? | नागरिक और निजी |
| मुस्लिम विधि के दो प्रमुख संप्रदाय कौन-से हैं? | शिया और सुन्नी |
| सुन्नी मुसलमानों में सबसे बड़ा विधिक संप्रदाय कौन-सा है? | हनफ़ी |
| शिया विधि किस इमाम की शिक्षाओं पर आधारित है? | इमाम जाफर अल-सादिक |
| शिया शाखा के अनुसार मुस्लिम विधि के स्त्रोत हैं- | कुरान अहादिस इज्मा |
| शिया मुसलमान किस सिद्धांत को नहीं मानते? | क़ियास |
| क़ियास का अर्थ है— | तर्कसंगत व्युत्पत्ति (Analogical Deduction) |
| कौन-सा एक मूल स्त्रोत (Primary Source) नहीं है? | न्यायिक निर्णय |
| मुस्लिम विधि का माध्यमिक स्त्रोत (Secondary Source) कौन-सा है? | रीति-रिवाज (Custom) |
| शिया और सुन्नी संप्रदायों में कौन-सी बात मुख्य रूप से भिन्न है? | उत्तराधिकार और विवाह कानूनों की व्याख्या |
| भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ का अनुप्रयोग किन संप्रदायों में एक जैसा नहीं होता? | शिया और सुन्नी |
| इमामी संप्रदाय का प्रमुख स्त्रोत क्या है? | इमामों की राय |
| कौन सा केस स्थानीय रीति-रिवाज की विधिक मान्यता, स्त्रोत की वैधता से संबंधित था? | सैयद साबिर हुसैन बनाम फरजंद हसन (1938) |
| मुस्लिम विधि में " इस्तिहसन " का तात्पर्य है— | न्याय की भावना से किया गया अपवाद |
| मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) अधिनियम, 1937 का मुख्य उद्देश्य क्या था? | मुसलमानों पर शरीयत कानून लागू करना |
| कौन-सा स्रोत "प्रवृत्त विधि (Positive Law)" नहीं है? | इस्लामी दर्शन |
| मुस्लिम विधि में “इस्तिसलाह” का प्रयोग किस संदर्भ में होता है? | सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर निर्णय |
| मुस्लिम विधि के अनुसार विवाह (निकाह) को क्या माना गया है? | नागरिक अनुबंध (Civil Contract) |
| किस मामले में मुस्लिम विवाह को दृष्टिकोण से देखा गया, संविदात्मक अनुबंध? | अब्दुल कादिर बनाम सलीमा (1886) |
विवाह (Marriage) | |
| एक मुस्लिम एक साथ कितनी पत्नियां रख सकता है? | चार |
| मुस्लिम विधि से सम्बन्धित विधायन है- | मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1939 शरियत अधिनियम, 1937 मुस्लिम महिला तलाक पर संरक्षण अधिनियम, 1986 |
| अब्दुल कादिर बनाम सलीमा के वाद में कौन न्यायाधीश कहा था कि "मुस्लिम विवाह शुद्ध रूप से एक संविदा है न कि संस्कार"? | महमूद |
| किस वाद में यह कहा गया कि मुस्लिम विवाह सिविल संविदा और धार्मिक संस्कार दोनों हैं? | अनीस बेगम बनाम मुहम्मद इस्तफा |
| किन सम्बन्ध में मुस्लिम विवाह पूर्णतः निषिद्ध है? | धात्रेय सम्बन्ध में रक्त सम्बन्ध में निकटता में |
| मुस्लिम विधि में एक व्यक्ति विवाह करने के लिए कब सक्षम है? | जब वह यौवनागमन की अवस्था प्राप्त कर लिया हो मुस्लिम हो स्वस्थचित हो |
| धात्रेय सम्बन्ध में किया गया मुस्लिम विवाह होता है- | शून्य (वातिल) |
| मुस्लिम विधि में विवाह के लिए अवयस्क का संरक्षक किस वरीयता क्रम में होता है? | पिता, पितामह, भाई, माता, मामा या मातृकुल के अन्य सदस्य |
| मुस्लिम विवाह के लिए क्या आवश्यक तत्व नहीं है? | लिखित |
| मुस्लिम विधि के अधीन विवाह के लिये सापेक्षित निषिद्धता क्या है? | गैर-मुस्लिम से विवाह पाँचवा विवाह विधि विरुद्ध संयोजन |
| मुस्लिम विधि में वयस्कता का विकल्प का क्या तात्पर्य है? | मुस्लिम अवयाक लड़के या लड़की को अवयस्कता में हुये विवाह को, वयस्कता प्राप्त कर लेने पर अस्वीकृत या पुष्टि करने का अधिकार |
| पारिवारिक विधि को भारतीय संविधान की किस अनुसूची में रखा गया है? | समवर्ती सूची |
| जब एक मुस्लिम पुरुष मुस्लिम महिला अपना विवाह विशेष विवाह अधिनियम के अन्तर्गत करता है, तो क्या उन पर मुस्लिम वैयक्तिक विधि लागू होती है? | नहीं |
| मुस्लिम विधि में विवाह माना जाता है- | एक संविदा |
| सुन्नी विधि के अनुसार विवाह के समय कितने साक्षी होना आवश्यक है? | स्वस्थवित्त एवं वयस्क दो मुस्लिम पुरुष या एक पुरुष और दो स्त्रियां |
| शिया विधि के अनुसार विवाह के समय कितने साक्षियों की उपस्थिति आवश्यक है? | कोई साक्षी नहीं |
| मुस्लिम विधि में यौवनागमन का क्या तात्पर्य है? | सन्तानोत्पत्ति की क्षमता |
| मुस्लिम विधि में विवाह करने की असमर्थता क्या है? | पूर्ण असमर्थता, सापेक्ष असमर्थता, निदेशात्मक असमर्थता, एवं निषेधात्मक असमर्थता |
| किसी मुस्लिम स्त्री द्वारा पति की मृत्यु या तलाक पर एक निश्चित समय तक विवाह न करने की अवधि को कहा जाता है? | इदत |
| विवाह-विच्छेद की अवस्था में इद्दत अवधि होती है- | तीन मासिक धर्म और यदि मासिक नहीं आता है, तो तीन चन्द्रमास |
| मुस्लिम विधि में पति के मृत्यु पर विधवा को इद्दत अवधि व्यतीत करनी होगी? | चार महीने दस दिन |
| इद्दत काल में किया गया विवाह किस विधि में शून्य माना जाता है? | शिया विधि में |
| मुस्लिम विधि में निषेधात्मक असमर्थता के अन्तर्गत आता है- | विवाहित व्यक्ति से विवाह गैर मुस्लिम से विवाह |
| निषेधात्मक असमर्थता के अन्तर्गत आता है- | गर्भवती स्त्री से विवाह, तलाक का निषेध, तीर्थयात्रा में विवाह एवं समानता के नियम के विरुद्ध विवाह |
| मुस्लिम विधि में विवाह के प्रकार हैं- | शून्य विवाह अनियमित या फासिद विवाह मान्य या सहीह विवाह |
| धात्रेय सम्बन्ध एवं रक्त सम्बन्ध में किया गया विवाह होता है- | शून्य |
| मुस्लिम विधि के अन्तर्गत जिस विवाह में अवधि और मेहर दोनों निश्चित कर दिया गया हो, उसे क्या कहा जाता है? | मुता विवाह |
| निकाह-ए-मुत’आ किस मुस्लिम संप्रदाय में मान्य है? | शिया |
| मुस्लिम विवाह में 'वली' की भूमिका कब अनिवार्य होती है? | जब महिला नाबालिग हो |
| मेहर से सम्बंधित केस कौन सा है? | अनीस बेगम बनाम मोहम्मद इस्ताफा वली खान (1933) |
| मुस्लिम विवाह में ‘इजाब और कबूल’ का क्या अर्थ है? | विवाह प्रस्ताव और स्वीकृति |
| शुद्ध (सहीह) विवाह से कौन-से अधिकार उत्पन्न होते हैं? | संपत्ति और विरासत के अधिकार |
मेहर (Mehar) | |
| मुस्लिम विधि में ‘मेहर’ का क्या अर्थ है? | पत्नी को विवाह के समय दिया गया वित्तीय अधिकार |
| मेहर की मांग करने का अधिकार किसके पास होता है? | पत्नी |
| मेहर के कितने प्रकार होते हैं? | 2 प्रकार के निश्चित मेहर (मेहर-ई-मुसम्मा) उचित मेहर (मेहर-इ-मिस्ल) |
| मेहर एक ऐसी धनराशि या सम्पत्ति है जिसको विवाह को प्रतिकर के रूप में प्राप्त करने के लिये पत्नी हकदार है" यह कथन किसका है? | मुल्ला |
| मेहर की परिभाषा न्यायमूर्ति महमूद ने किस वाद में दिया? | अब्दुल कादिर बनाम सलीमा |
| मेहर का क्या उद्देश्य है? | पत्नी के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में पति पर एक दायित्व अधिरोपित करना, पति द्वारा तलाक के अधिकार पर अवरोध रखना |
| क्या अगले वर्ष की फसल मेहर का विषय है? | नहीं |
| मेहर ए मुअज्जल – तात्कालिक मेहर, और मेहर ए मुवज्जल – स्थगित मेहर क्या है? | निश्चित मेहर के प्रकार हैं
|
| यदि विवाह संविदा में मेहर की राशि नियत हो, तो उसे क्या कहा जाता है? | निश्चित मेहर |
| निश्चित मेहर (मेहर-इ-मुसम्मा) को कितने भागों में बांटा गया है? | 2 भागों में- मुअज्जल मेहर मुवज्जल मेहर |
| जो मेहर विवाह के बाद तुरन्त देय होता है, उसे क्या कहा जाता है? | मुअज्जल |
| जो मेहर पति की मृत्यु या विवाह विच्छेद द्वारा विवाह समाप्त हो जाने पर या किसी करार के अधीन किसी घटना के घटित होने पर देय होता है, उसे कहा जाता है? | मुवज्जल मेहर |
| यदि विवाह संविदा में मेहर की राशि निर्धारित नहीं है, तो पत्नी पाने की हकदार होगी- | उचित या रिवाजी मेहर |
| न्यायालय उचित (रिवाजी) मेहर निर्धारित करते समय ध्यान देगा- | पत्नी की उम्र, सौन्दर्य, समृद्धि, समझदारी एवं सदाचार, पत्नी के पिता की खानदान को सामाजिक स्थिति, पत्नी के पितृपक्ष के स्त्रियों को दिया गया मेहर |
| उचित मेहर निर्धारित करते समय न्यायालय ध्यान नहीं देगा- | पति के खानदान की स्थिति |
| मेहर का भुगतान न करने पर पत्नी का अधिकार है- | पति के साथ संभोग करने से इन्कार ऋण के रूप में मेहर का दावा मृतक पति को सम्पत्ति पर कब्जा |
| यदि विवाह-विच्छेद पति द्वारा धर्म त्याग के कारण हुआ है, तो क्या पत्नी मेहर की हकदार होगी? | हाँ |
| यदि विवाह-विच्छेद पत्नी द्वारा धर्म त्यागने के कारण हुआ है, तो क्या वह मेहर की हकदार होगी? | केवल आस्थगित मेहर पाने की हकदार होगी |
| यदि विवाह में मेहर का उल्लेख न किया जाए तो क्या विवाह अमान्य (बातिल) हो जाएगा? | नहीं |
| किस केस में अदालत ने मेहर को कानूनी देनदारी माना? | अब्दुल कादिर बनाम सलीमा (1886) |
| ‘मुअज्जल मेहर’ का क्या अर्थ है? | विवाह के तुरंत बाद देय मेहर |
| मुवज्जल मेहर (Deferred Dower) कब देय होता है? | मृत्यु या तलाक के समय |
| यदि पति मेहर नहीं देता है, तो पत्नी को क्या अधिकार प्राप्त होता है? | यौन संबंध से इनकार करने का |
| कौन सा केस मेहर की कानूनी बाध्यता विषय से संबंधित था? | नसरा बेगम बनाम रिज़वान अली (2003) |
| क्या मेहर की राशि निर्धारित करने का कोई निश्चित पैमाना है? | हाँ, पति की वित्तीय स्थिति के अनुसार उचित मेहर |
| मेहर की माफी (Remission of Mahr) की अनुमति कब होती है? | विवाह के बाद, पत्नी की इच्छा से |
| यदि मेहर का भुगतान नहीं हुआ हो और पति की मृत्यु हो जाए, तो पत्नी— | सम्पत्ति से मेहर की राशि वसूल सकती है |
| किस केस में मुख्य निष्कर्ष था कि, मेहर न्यायिक रूप से प्रवर्तनीय है? | हमीरा बीबी बनाम जुबैदा बीबी (1916) |
| क्या पत्नी विवाह के बाद भी मेहर को क्षमा कर सकती है? | हाँ, स्वतंत्र रूप से |
| अगर विवाह से पहले ही तलाक हो जाए और सहवास नहीं हुआ हो, तो मेहर की स्थिति क्या होगी? | आधा मेहर देय |
विवाह-विच्छेद (तलाक) (Divorce) | |
| मुस्लिम वैयक्तिक विधि तलाक का अधिकार किसको देती है? | पति को |
| मुस्लिम विधि में "तलाक" का क्या अर्थ है? | पति द्वारा विवाह का विधिक विघटन |
| पति द्वारा विवाह विघटन किया जा सकता है- | तलाक द्वारा इला द्वारा जिहार द्वारा |
| तालाक के कितने प्रकार हैं? | तलाक-उल-बिद्दत तलाक-उल- सुन्नत |
| तीन तलाक" किसे कहा जाता है? | तलाक-उल-बिद्दत |
| तलाक-उल-बिद्दत का क्या अर्थ है? | जिसमें पति अपनी पत्नी को एक ही बार में तीन बार तलाक बोलकर या लिखकर, या किसी भी माध्यम से, जैसे कि फोन, मैसेज, या पत्र द्वारा, तलाक दे देता है |
| तलाक-उल- सुन्नत का क्या अर्थ है? | जिसे तलाक-ए-सुन्नत भी कहा जाता है, मुस्लिम कानून के तहत तलाक का एक रूप है जो पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं और प्रथाओं पर आधारित है। |
| एक बार में तीन बार “तलाक” कहकर दिया गया तलाक क्या कहलाता है? | तलाक-ए-बिदअत |
| तलाक-उल- सुन्नत के कितने प्रकार हैं? | तलाक-ए-अहसन तलाक-ए-हसन |
| "तलाक-ए-अहसन" में कितने ‘तलाक’ कथन की आवश्यकता होती है? | एक बार |
| तलाक-ए-हसन में तीन बार तलाक कहा जाता है— | तीन अलग-अलग तुहर में |
| किस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक तलाक को अवैध बताया? | शमीम आरा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2002) |
इला द्वारा तलाक का क्या अर्थ है?
| पति एक निर्दिष्ट अवधि (कम से कम चार महीने) के लिए अपनी पत्नी के साथ यौन संबंधों से दूर रहने की शपथ लेता है । यदि वह अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर लेता है तो विवाह विच्छेद हो जाता है। |
| इला द्वारा तलाक यदि वह अपनी प्रतिज्ञा तोड़ देता है, तो क्या तलाक माना जायेगा? | नहीं, विवाह जारी रहता है |
| तलाक-ए-अहसान का आवश्यक तत्व क्या है? | पति द्वारा एक ही वाक्य में तलाक का उच्चारण करना स्त्री का तुन्ह में होना आवश्यक है इद्दत की अवधि में संयोग में विरत रहना आवश्यक |
| तलाक-ए-हसन के लिए क्या आवश्यक नहीं है? | पति द्वारा एक ही वाक्य में तीन बार उच्चारण |
| तलाक-उल-अहसान द्वारा तलाक कब प्रभावी हो जाता है? | इद्दत अवधि समाप्त हो जाने पर |
| तलाक-ए-हसन द्वारा तलाक कब प्रभावी हो जाता है? | उच्चारण करते ही |
| तलाक-उल-बिद्दत है- | पूर्व एवं अप्रतिसंहरणीय तलाक |
| जिहार तलाक, का क्या अर्थ है? | जिहार तलाक, तलाक के एक ऐसे रूप को संदर्भित करता है, जिसमें पति अपनी पत्नी को ऐसी महिला के समान घोषित करता है, जिससे उसका विवाह स्थायी रूप से वर्जित है, जैसे उसकी मां या बहन |
| क्या जिहार तलाक की घोषणा, विवाह को स्वतः समाप्त करती है? | नहीं , परन्तु यौन संबंधों पर तब तक प्रतिबंध लगाती है जब तक पति अपने कृत्य के लिए कफ्फारा नामक विशिष्ट प्रायश्चित क्रिया के माध्यम से प्रायश्चित नहीं कर लेता |
| लियान का क्या अर्थ है? | लियान इस्लामी कानून में तलाक का एक रूप है, जिसमें पति अपनी पत्नी पर व्यभिचार का झूठा आरोप लगाता है |
| लियान द्वारा तलाक़ का क्या अर्थ है? | लियान इस्लामी कानून में तलाक का एक रूप है, जिसमें पति अपनी पत्नी पर व्यभिचार का झूठा आरोप लगाता है, यदि पति आरोप साबित नहीं कर पाता है तो पत्नी कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से तलाक लेने की हकदार है |
| किस विधि के अन्तर्गत एक मुस्लिम महिला का तलाक लेने का अधिकार दिया गया है? | मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939 के अन्तर्गत |
| मुस्लिम महिला का तलाक लेने का अधिकार के कितने प्रकार हैं? | खुला द्वारा मुबारत द्वारा |
| मुस्लिम विधि के अन्तर्गत क्या पारस्परिक सहमति से तलाक दिया जा सकता है? | हां |
खुला द्वारा तलाक़ का क्या अर्थ है?
| खुला एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा मुस्लिम महिला, अपने पति से अलग होने के लिए, विवाह-विच्छेद की पहल कर सकती है |
| मुबारत द्वारा तलाक़ का क्या अर्थ है? | मुबारत तलाक, जिसे आपसी सहमति से तलाक भी कहा जाता है, मुस्लिम कानून के तहत एक प्रकार का तलाक है जिसमें पति और पत्नी दोनों अपनी शादी को खत्म करने के लिए स्वेच्छा से सहमत होते हैं |
| शिया विधि में तलाक हो सकता है- | केवल मौखिक और दो साक्षियों की उपस्थिति में |
| शिया विधि में लिखित तलाक हो सकता है- | जब पति गूँगा हो |
| शिया विधि में यदि पति बोलने में समर्थ होते हुये तलाक की लिखित घोषणा करता है, तो ऐसा तलाक- | शून्य होगा |
| जब पति, पली से कहा है कि "मैं खुदा की कसम खाकर कहता हूँ कि मैं तुम्हारे पास नहीं जाऊँगा" तो इसे कहा जाता है- | इला |
| जब एक प्रयस्क एवं स्वस्थचित्त मुस्लिम अपनी पत्नी की तुलना अपनी माँ या निषिद्ध आसक्ति में आने वाली किसी स्वी से करे, तब इसे कहा जाता है- | जिहार |
| जब तलाक पूर्ण हो जाता है, तब उसका परिणाम होता हैं- | दम्पत्ति दूसरा विवाह करने के लिए स्वतन्त्र हो जाते हैं मेहर तुरन्त देय हो जाता है संभोग न करने के लिए स्वतन्त्र हो जाते हैं |
| 'खुला' द्वारा तलाक के आवश्यक तत्व नहीं है- | एक ही उच्चारण में तीन बार तलाक कहना आवश्यक है |
| जब कोई पति अपनी पत्नी पर झूठा व्यभिचार का आरोप लगाता है, तो पत्नी को क्या अधिकार होगा ? | तलाक कराने का |
| मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1939 के अन्तर्गत पत्नी को विवाह-विच्छेद कराने के कुल कितने आधार दिये गये हैं? | नौ |
| तिहरा तलाक के अन्तगर्त क्या किया जाना आवश्यक है? | एक ही समय तलाक शब्द का तीन बार उच्चारण |
| तिहरा तलाक से सम्बन्धित वाद है— | साराबाई बनाम शविया बाई राशिद अहमद बनाम अनीशा खातून आएशा बीबी बनाम कादिर इब्राहीम |
| विवाह-विच्छेद से सम्बन्धित महत्वपूर्ण वाद है- | दिलशादा मासूद बनाम गुलाम मुस्तफा राशिद अहमद बनाम अनीसा खातून आएशा बीबी बनाम कादिर इब्राहीम |
| एक मुस्लिम महिला पति द्वारा द्विविवाह करने के कारण क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दाखिल की। पति ने बचाव में तर्क दिया कि वह बहुविवाह करने का विधि के अनुसार हकदार है और क्रूरता का आधार नहीं लिया जा सकता। क्या पति का विवाह क्रूरता माना जायेगा? | हाँ |
| किस मामले में उच्चतम न्यायालय ने तलाक-ए-बिद्दत तीहरे तलाक को निरस्त (अपास्त) कर दिया है? | शायरा बानो बनामभारत संघ (2017) |
| "खुला" क्या है? | आपसी सहमति से विवाह-विच्छेद |
| “इला” किस प्रकार का तलाक है? | जब पति यौन संबंध से इंकार करता है |
| “लिआन” किस आधार पर तलाक का प्रकार है? | जब पति झूठे व्यभिचार का आरोप लगाता है |
| क्या मुस्लिम महिला भी तलाक की मांग कर सकती है? | हाँ, खुला या फैसले के माध्यम से |
| तलाक-ए-अहसन में ‘इद्दत’ की अवधि कितनी होती है? | 3 तुहर |
| मुस्लिम विधि में तलाक को किस प्रकार देखा जाता है? | वैकल्पिक लेकिन अप्रिय |
| किस केस का संबंध तलाक-ए-बिदअत की मान्यता से है? | रशीद अहमद बनाम अनीसा खातून (1932) |
इद्दत (Iddat) | |
| मुस्लिम विधि में 'इद्दत' का क्या अर्थ है? | तलाक या मृत्यु के बाद प्रतीक्षा अवधि |
| तलाकशुदा महिला के लिए 'इद्दत' की अवधि क्या है? | यदि उसका मासिक धर्म होता है, तो विवाह विच्छेद की तारीख के पश्चात् तीन मासिक धर्म, यदि उसका मासिक धर्म नहीं होता है तो उसके विवाह विच्छेद के पश्चात् तीन चन्द्रमास |
| यदि महिला गर्भवती हो, तो इद्दत की अवधि कितनी होती है? | विवाह विच्छेद और उसकी संतान के जन्म या उसके गर्भ के समापन के बीच की अवधि, इनमें जो भी पूर्वतर हो |
| पति की मृत्यु पर इद्दत की अवधि क्या होती है? | 4 महीने 10 दिन |
| किस केस में इद्दत अवधि तक पति को पत्नी का भरण-पोषण करना अनिवार्य है, बात स्पष्ट की गई? | डेनियल लतीफी बनाम भारत संघ (2001) |
| क्या इद्दत की अवधि के दौरान महिला विवाह कर सकती है? | नहीं, यह निषिद्ध है |
| इद्दत की अवधारणा का मुख्य उद्देश्य क्या है? | गर्भ की पुष्टि व समाजिक मर्यादा |
| इद्दत की अवधि में महिला को कहाँ रहना चाहिए? | पति के घर (यदि तलाक हुआ हो और सुरक्षा बनी हो) |
| क्या विधवा महिला की इद्दत और तलाकशुदा महिला की इद्दत एक जैसी होती है? | नहीं |
| इद्दत की अवधि के दौरान पति की मृत्यु हो जाती है, तो क्या नई इद्दत शुरू होती है? | हाँ, 4 महीने 10 दिन की |
| यदि कोई महिला इद्दत की अवधि के दौरान विवाह कर ले, तो वह विवाह— | बातिल (अवैध) |
| क्या इद्दत केवल महिलाओं पर लागू होती है? | हाँ |
| क्या इद्दत के दौरान महिला को संपत्ति अधिकार प्राप्त होते हैं? | हाँ, पति की मृत्यु पर उत्तराधिकार का अधिकार होता है |
भरण-पोषण ('नफ़क़ा') (Maintenance) | |
| मुस्लिम विधि के अनुसार, पत्नी के भरण-पोषण का दायित्व किस पर है? | पति पर |
| मुसलमान समुदाय के लोगों पर भरण-पोषण की कौन सी विधि लागू होती है? | वैयक्तिक विधि एवं धारा 144 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता |
| भरण-पोषण के अन्तर्गत क्या आता है? | भोजन वस्त्र एवं निवास |
| मुस्लिम पुरुष किस किस के भरण-पोषण का जिम्मेदार है? | अपने वंशज, अपने पूर्वज, अपने खानदानियों एवं पत्नी का |
| उच्चतम न्यायालय ने किस मामले में कहा कि एक तलाकशुदा पत्नी अपने बच्चों के लिये भरण-पोषण अपने पति से प्राप्त कर सकती है? | नूर सब्बा खातून बनाम मो० कासिम |
| मुस्लिम विधि में भरण-पोषण से सम्बन्धित महत्वपूर्ण वाद कौन कौन से है? | जोहरा खातून बनाम मो० इब्राहीम मोहम्मद अहमद खान बनाम शाहबानों बेगम ए० ए० अब्दुल्ला बनाम सैयद भाई |
| उच्चतम न्यायालय ने किस वाद में कहा है कि धारा 144 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का प्रावधान वैयक्तिक विधि पर प्रभावी होगा? | मोहम्मद अहमद खान बनाम शाहबानो बेगम |
| उच्चतम न्यायालय द्वारा शाहबानों के मामले में दिये गये निर्णय परिणामस्वरूप संसद ने कौन सा अधिनियम बनाया? | मुस्लिम स्त्री (विवाह विच्छेद पर अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 1986 |
| किस वाद में उच्चतम न्यायालय मुस्लिम महिला अधिनियम, 1986 की वैधता/संवैधानिकता को चुनौती दी गयी थी? | डेनियल लतीफी बनाम भारत सरकार |
| किस वाद में उच्चतम न्यायालय ने मुस्लिम महिला अधिनियम, 1986 की वैधता की पुष्टि की? | डेनियल लतीफी बनाम भारत सरकार |
| उच्चतम न्यायालय ने किस वाद में निर्णय दिया कि तलाकशुदा महिला इदत की अवधि के बाद सीधे वक्फ बोर्ड के विरुद्ध भरण-पोषण देने के लिए दावा पेश करे तथा उसी प्रक्रिया में यह सिद्ध करे कि उसके बच्चे, माता-पिता तथा सम्बन्धी भरण-पोषण देने में असमर्थ हैं- | सेक्रेटरी तमिलनाडू वक्फ बोर्ड बनाम सैयद फातिका ना चो |
| 'नफ़क़ा' का क्या अर्थ है? | पति द्वारा पत्नी को दिया गया भरण-पोषण |
| किस वाद में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय लिया था, पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार है, भले ही वह मुस्लिम हो? | 'शाह बानो केस' |
| मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम, 1986 के अनुसार, तलाक के बाद पत्नी को भरण-पोषण कब तक मिलेगा? | तीन महीने की 'इद्दत' अवधि तक |
| किस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी और बच्चों दोनों को भरण-पोषण का अधिकार दिया था? | 'नूर सबा खातून बनाम मोहम्मद क़ासिम' |
| 'नफ़क़ा' के अंतर्गत कौन-कौन सी चीजें शामिल हैं? | भोजन वस्त्र आवास |
| 'नफ़क़ा' का निर्धारण किस आधार पर किया जाता है? | पति की आय और सामर्थ्य |
| तलाकशुदा मुस्लिम महिला को भरण-पोषण का अधिकार किस स्थिति में समाप्त होता है? | पुनर्विवाह करने पर पति की मृत्यु होने पर पत्नी की मृत्यु होने पर |
| 'नफ़क़ा' के लिए पति की जिम्मेदारी कब तक जारी रहती है? | विवाह के दौरान तलाक के बाद 'इद्दत' अवधि तक पत्नी की मृत्यु तक |
औरसता (पितृत्व की अभिस्वीकृति) Paternity (Acknowledgement of Paternity) | |
| मुस्लिम विधि में औरसता (Paternity) किस सिद्धांत पर आधारित होती है? | पति-पत्नी का वैध निकाह |
| किस मामले में न्यायालय ने कहा कि विवाह के 180 दिन बाद और तलाक के 2 साल के भीतर जन्मी संतान को वैध माना जाएगा? | हबीबुर रहमान बनाम अल्ताफ बीबी |
| कौन-सी अवधि मुस्लिम विधि में बच्चे की वैधता के लिए आवश्यक मानी गई है यदि तलाक हो चुका हो? | 2 साल |
| किस सिद्धांत के तहत यह माना जाता है कि विवाह के दौरान उत्पन्न बच्चा पति का है जब तक कि इसका खंडन न किया जाए? | वैधता की धारणा |
| मुस्लिम विधि में नाजायज संतान को किस सीमा तक संपत्ति में अधिकार है? | माँ की संपत्ति में हिस्सा |
| किस केस में कोर्ट ने कहा कि पिता की ओर से औरसता का इनकार केवल अत्यंत ठोस साक्ष्य के साथ ही संभव है? | मो. अल्लाहदाद खान बनाम मोहम्मद. इस्माइल |
| मुस्लिम कानून में “इकरार-बिल-वलदियत” का क्या प्रभाव होता है? | संतान को वैध ठहराता है |
| मुस्लिम विधि के अनुसार, बच्चा अगर "इद्दत" अवधि में जन्म लेता है, तो वह किसकी संतान माना जाता है? | पिछले पति की |
| ‘स्वीकृति द्वारा वैधता’ सिद्धांत का प्रयोग कब किया जाता है? | जब विवाह का प्रमाण न हो |
| सुन्नी विधि में अवैध सन्तान का पितृत्व एवं मातृत्व किसमे होता है? | केवल मातृत्व होता है |
| धर्मजत्व पर मुख्य वाद कौन-सा है? | हबीबुर्रहमान चौधरी चनाम अल्ताफ अली चौधरी |
| विवाह-विच्छेद के बाद उत्पन्न बच्चा धर्मज होगा यदि वह- | शिया विधि के अनुसार 10 चन्द्रमास के अन्दर जन्मा हो, हनफी विधि में दो वर्षों के भीतर जन्मा हो, शफी तथा मलकी विधि चार चन्द्रवर्षों के भीतर जन्मा हो |
| भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अन्तर्गत विवाह-विच्छेद के कितने दिनों के भीतर जन्म सन्तान धर्मज होता है- | 280 दिन |
| यदि मुस्लिम विधि में किसी बच्चे का पितृत्व माता और पिता के पारस्परिक संभोग से साबित न होता हो तो उसका पितृत्व स्थापित होगा- | अभिस्वीकृति से |
| अभिस्वीकृति की आवश्यक शर्त है- | अभिरवीकृति उसी पुत्र का होगा के धर्मज हो स्वीकृतिकर्ता पुत्र की उम्र से साढ़े बारह वर्ष बड़ा हो अभिस्वीकृति को सन्तान वयस्क होने पर इसका अनुसमर्थन करें |
जबर एवं हिजानत (Jabar) & (Hizanat) | |
| मुस्लिम विधि में 'हिज़ानत' (Hizanat) का क्या अर्थ होता है? | बच्चे की संरक्षकता (Custody) |
| मुस्लिम विधि में वयस्कता की क्या उम्र है? | 15 वर्ष |
| मुस्लिम विधि में किसी अवयस्क का संरक्षक हो सकते हैं- | अवयस्क के शरीर का अवयस्क के विवाह का अवयस्क के सम्पत्ति का |
| विवाह की संरक्षकता एवं शरीर की संरक्षकता को क्रमशः कहा जाता है- | जबर एवं हिजानत |
| किसी अवयस्क का विवाह संरक्षक कौन कौन व्यक्ति हो सकते हैं? | पिता, पितामह, भाई, माता, निषिद्ध आसक्तियों के मातृपक्ष के सम्बन्धी, न्यायालय |
| मुस्लिम विधि में यदि निकटस्थ संरक्षक रहते हुये दूरस्थ संरक्षक द्वारा किसी अवयस्क का विवाह किया जाता है, तो ऐसा विवाह कैसा माना जाएगा? | शून्य |
| यदि किसी अवयस्क का न्यायालय द्वारा संरक्षक नियुक्त किया गया है, तो उसकी अवयस्कता की उम्र कितनी होगी? | 21 वर्ष |
| विवाह संरक्षकता से सम्बन्धित प्रमुख वाद कौन कौन से है? | अयूब हसन बनाम अख्तरी, गुलाम मोहम्मद बनाम मसम्मात, वजीरन शाम सिंह बनाम शांता बाई |
| माँ के न रहने पर सात वर्ष से कम आयु के बालक और यौवनावस्था को न प्राप्त हुई लड़की की अभिरक्षा का अधिकारी कौन होता है? | क्रमशः – माँ की माँ, पिता की माँ, सगी बहन, सहोदर बहिन, सगोत्री बहन |
| शरीर की संरक्षकता सम्बन्धी वाद कौन कौन से है? | इमाम वादी बनाम मुतसद्दी श्रीमती एनुन्निसा बनाम मुख्तार अहमद अब्दुल सत्तार बनाम शाहीना |
| मुस्लिम विधि में छोटे बच्चों की हिज़ानत का प्राथमिक अधिकार किसे होता है? | माता |
| मुस्लिम विधि के अनुसार पुत्र की हिज़ानत की आयु सीमा क्या है? | 7 वर्ष |
| मुस्लिम विधि के अनुसार पुत्री की हिज़ानत की सीमा कब तक मानी जाती है? | जब तक वह विवाह योग्य न हो जाए |
| किस केस में यह निर्णय दिया गया कि बच्चे का हित सर्वोपरि है, चाहे शरीयत कुछ भी कहे? | मिस्टर बख्तावर बनाम अयूब |
| पिता को कब हिज़ानत से वंचित किया जा सकता है? | जब वह बच्चे के हित के प्रतिकूल हो |
| किस केस का मुख्य सिद्धांत था कि, हिज़ानत केवल पिता का अधिकार है? | इमामबांडी बनाम मुत्सद्दी |
| क्या हिज़ानत देने में बच्चे की इच्छा का कोई महत्व होता है? | हाँ, यदि बच्चा समझदार है |
| कौन-सा कारक हिज़ानत तय करने में सबसे महत्वपूर्ण होता है? | बच्चे का सर्वोत्तम हित (Welfare of Child) |
| माता को हिज़ानत का अधिकार किस स्थिति में नहीं मिलेगा? | यदि वह दूसरा विवाह कर ले |
| विवाह और तलाक का “तैयबजी कानून” के अनुसार संरक्षकता किस प्रकार की होती है? | वैधानिक (Legal) और प्राकृतिक (Natural) |
| कौन-सा व्यक्ति वैधानिक संरक्षक (Legal Guardian) नहीं हो सकता? | माँ |
| किस केस में कहा गया कि न्यायालय बच्चे की संरक्षकता तय करते समय केवल मुस्लिम पर्सनल लॉ तक सीमित नहीं है? | मिस्टर बख्तावर बनाम अयूब |
हिबा (Gift) | |
| मुस्लिम विधि में किस प्रकार हिबा किया जा सकता है? | जीवित दशा में हिवा वसीयत द्वारा हिबा |
| किस बाद में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हिबा एक जीवित व्यक्ति द्वारा दूसरे जीवित व्यक्ति को बिना प्रतिफल के किया गया सम्पत्ति का अन्तरण है? | वी० पी० यथेसाउम्मा बनाम नारात्राध कुम्हामा |
| हिबा के लिये मुस्लिम विधि में वयस्कता की आयु क्या है? | 18 वर्ष |
| किस बाद में पर्दानशीन स्त्री द्वारा दान के सम्बन्ध में उल्लेख किया गया है? | मु० हुसैना बीबी बनाम जोहरा बाई मरियम बाई बनाम मरियम वाई |
| मुस्लिम विधि में दाता को कैसा होना चाहिए? | वयस्क स्वस्थचित सम्पत्ति पर स्वामित्व एवं स्वतन्त्र इच्छा |
| मुस्लिम विधि में हिवा की विषय हो सकती है- | धन, ऋण के भुगतान का अधिकार, बंधक मोचन का अधिकार आजीवन हित, लगान वसूलने का अधिकार मेहर एवं सरकारी प्रतिभूतियाँ |
| आजीवन हित के दान से सम्बन्धित बाद कौन कौन से है? | अमजद अली खाँ बनाम अशरफ खां नवाजिश अली खाँ बनाम अली रजा खां नजीरुहीन बनाम खेरात अली |
| किसी सम्पत्ति के अविभाजित भाग का दान क्या कहा जाता है? | मुशा का दान |
| हिबा प्रतिसंहरणीय कब हो जाता है? | दाता की मृत्यु पर जब दान सदृश हो जहाँ दानग्रहीता की मृत्यु हो जाय |
| हिबा के प्रकार हैं- | हिवा-बिल-एवज हिबा-बिल-शर्तुल-एवज |
| मुस्लिम विधि के दान की आवश्यक शर्त क्या है? | दाता द्वारा घोषणा दानग्रहोता द्वारा उसकी स्वीकृति कब्जे का परिदान |
| धार्मिक उद्देश्य से किये गये हिबा को क्या कहा जाता है? | सदका |
| हिबा-बल-एवज का क्या अर्थ है? | प्रतिकर के बदले में दान |
| हिबा-बिल-शर्तुल एवज का क्या अर्थ है? | सशर्त दान |
| मुस्लिम विधि में 'हिबा' का अर्थ क्या होता है? | स्वेच्छा से संपत्ति का तत्काल दान |
| 'हिबा' (दान) के लिए कौन-से तीन तत्व आवश्यक होते हैं? | घोषणा, स्वीकृति, कब्जा |
| किस केस में यह सिद्ध किया गया कि 'हिबा' मौखिक रूप से भी वैध हो सकती है? | मूनशी बुज़ुल-उल-रहीम बनाम लुटिफ़-उन-निसा |
| मुस्लिम विधि में क्या 'हिबा' बिना दस्तावेज़ के मान्य हो सकता है? | हाँ, यदि तीन तत्व पूरे हों |
| कौन-सी संपत्ति का 'हिबा' नहीं किया जा सकता? | वक्फ की संपत्ति |
| क्या अजन्मे बच्चे को 'हिबा' किया जा सकता है? | नहीं |
| हिबा की वापसी (Revocation of Gift) कब तक संभव है? | जब तक दानकर्ता ने अधिकार छोड़ा न हो |
| ‘डोनेशियो मोर्टिस कॉसा का क्या अर्थ है? | मृत्यु की आशंका में किया गया हिबा |
| किस केस में यह तय किया गया कि कब्जे के बिना हिबा अधूरा है? | मुसम्मत बीबी बनाम अहमद हुसैन |
| क्या कोई व्यक्ति अपने पूरे संपत्ति का हिबा किसी एक वारिस को कर सकता है? | हाँ, यह उसकी इच्छा है |
| हिबा-बिल-इवज़ (Hiba-bil-Iwaz) क्या है? | प्रतिफल के साथ किया गया हिबा |
| किस केस में हिबा-बिल-इवज़ को बिक्री जैसा माना गया था? | मोहम्मद अब्दुल गनी बनाम फखर जहां बेगम |
| हिबा में “डिलीवरी ऑफ पजेशन” का क्या महत्व है? | बिना उसके हिबा पूर्ण नहीं होता |
| मुस्लिम विधि में क्या दान केवल मुस्लिम को ही किया जा सकता है? | नहीं |
| क्या एक नाबालिग व्यक्ति वैध रूप से हिबा कर सकता है? | हाँ, गार्जियन के माध्यम से |
वसीयत (Will) | |
| जब सम्पत्ति इस शर्त के साथ अंतरण किया जाता है कि ऐसा अंतरण अंतरणकर्त्ता की मृत्यु के बाद होगा, तो इसे कहा जाता है? | वसीयत |
| मुस्लिम विधि में वसीयत करने वाले व्यक्ति को क्या होना चाहिए? | वयस्क स्वस्थचित मुस्लिम |
| वसीयत कर्ता के लिये क्या होना आवश्यक है? | सम्पत्ति धारण करने के लिए सक्षम व्यक्ति |
| एक मुसलमान अपनी सम्पत्ति के कितने भाग का वसीयत कर सकता है? | 1/3 भाग का |
| क्या एक मुस्लिम व्यक्ति गैर मुस्लिम व्यक्ति को वसीयत कर सकता है? | हाँ |
| क्या एक सुन्नी मुसलमान उत्तराधिकारी के पक्ष में वसीयत कर सकता है? | हाँ, यदि अन्य उत्तराधिकारी सहमति दे दे |
| जहाँ वसीयतकता के कोई उत्तराधिकारी न हो वहाँ क्या वसीयती दान परिसम्पत्ति के एक तिहाई से अधिक सम्पत्ति का हो सकता है? | हाँ
|
| यदि एक तिहाई से अधिक सम्पत्ति का वसीयती दान किया गया है और सम्पत्ति के उत्तराधिकारी सहमति दे दे तो क्या वसीयती दान मान्य हो जाता है? | हाँ
|
| क्या एक तिहाई से अधिक सम्पत्ति का वसीयती दान की सहमति सुन्नी द्वारा वसीकर्ता के मृत्यु के बाद और शिया द्वारा वसीयतों के मृत्यु से पूर्व या पश्चात् दिया जा सकता है? | हाँ
|
| क्या सुन्नी विधि में उत्तराधिकारी के पक्ष में वसीयत की जा सकती है? | नहीं |
| शिया विधि में कितनी सम्पत्ति की वसीयत उत्तराधिकारी के पक्ष में की जा सकती है? | एक-तिहाई |
| सुन्नी मुसलमान द्वारा सम्पत्ति का वसीयती दान तभी मान्य होगा जब उत्तराधिकारी सहमति दे देते हैं जबकि शिया मुसलमान द्वारा एक तिहाई से अधिक सम्पत्ति की वसीयत करने पर अन्य उत्तराधिकारियों की सहमति मिलने पर ही मान्य होगा, यह कथन सत्य है? | हाँ |
| मुस्लिम विधि में ‘वसीयत’ (Wasiat) का क्या अर्थ होता है? | मृत्यु के बाद संपत्ति का प्रावधान |
| मुस्लिम विधि में अधिकतम कितने हिस्से की वसीयत की जा सकती है बिना उत्तराधिकारियों की सहमति के? | 1/3 |
| यदि कोई मुस्लिम 1/3 से अधिक संपत्ति की वसीयत करता है, तो उसे मान्य बनाने के लिए किसकी सहमति आवश्यक होती है? | उत्तराधिकारियों की |
| कौन-सी संपत्ति मुस्लिम वसीयत के अंतर्गत नहीं आ सकती? | वक्फ की संपत्ति |
| किस केस में यह निर्णय दिया गया कि वसीयत मौखिक या लिखित दोनों रूपों में वैध हो सकती है? | मोहम्मद इस्माइल बनाम मोहम्मद इदरीस |
| क्या एक गैर-मुस्लिम को मुस्लिम की वसीयत से संपत्ति मिल सकती है? | हाँ |
| किस प्रकार की वसीयत को "सशर्त इच्छा" कहा जाता है? | जो किसी शर्त पर आधारित हो |
| किस केस में कोर्ट ने कहा कि 1/3 से अधिक वसीयत बिना वारिस की सहमति के अवैध है? | बिस्मिल्लाह बनाम जान मोहम्मद |
| वसीयत को कब निष्प्रभावी किया जा सकता है? | जब वसीयतकर्ता वसीयत को रद्द कर दे |
| क्या वसीयत किसी नाबालिग के पक्ष में की जा सकती है? | हाँ |
वक्फ (Waqf) | |
| 'वक्फ' (Waqf) का शाब्दिक अर्थ क्या है? | स्थायी रूप से धर्मार्थ उद्देश्य हेतु संपत्ति का समर्पण |
| वक्फ की अवधारणा किस धर्मग्रंथ पर आधारित है? | कुरान |
| मुस्लिम विधि के अनुसार वक्फ किसके लिए किया जाता है? | अल्लाह के नाम पर |
| वक्फ की स्थापना के लिए कौन-सा आवश्यक तत्व है? | स्थायी उद्देश्य |
| कौन-सा केस वक्फ की परिभाषा से संबंधित एक प्रमुख निर्णय है? | एम काज़िम बनाम ए असगर अली |
| वक्फ का आवश्यक तत्व क्या है? | सम्पत्ति का स्थायी समर्पण समर्पण स्वस्थचित एवं वयस्क व्यक्ति द्वारा किया गया हो इसका उद्देश्य धार्मिक, खैराती एवं पवित्र हो |
| वक्फ का मान्य उद्देश्य नहीं है- | गिरिजाघरों का निर्माण |
| यथासम्भव सामीप्य (doctrine of Sypres) का सिद्धान्त मुस्लिम विधि के अन्तर्गत किससे सम्बन्धित है? | वक्फ से |
| वक्फ का क्या प्रकार है? | लोक वक्फ वक्फ अलल-औलाद (प्राइवेट वक्फ) |
| वक्फ के प्रबन्धक को क्या कहा जाता है? | मुतवल्ली |
| क्या गैर मुस्लिम व्यक्ति मुतवल्ली हो सकता है? | हाँ |
| वक्फ का प्रबंधक कौन होता है? | मुतवल्ली |
| मुतवल्ली के पास संपत्ति के संबंध में कौन-से अधिकार होते हैं? | केवल देखरेख का अधिकार |
| किस प्रकार का वक्फ केवल परोपकारी उद्देश्यों के लिए होता है? | वक्फ-आम |
| वक्फ-अलाल औलाद का अर्थ क्या है? | परिवार और धर्मार्थ दोनों उद्देश्यों के लिए |
| वक्फ अधिनियम, 1995 के अनुसार वक्फ संपत्ति की देखरेख के लिए कौन-सी संस्था उत्तरदायी है? | राज्य वक्फ बोर्ड |
| मुतवल्ली को संपत्ति बेचने का अधिकार कब होता है? | कोर्ट की अनुमति से |
| वक्फ को कौन-सा भारतीय कानून नियंत्रित करता है? | वक्फ अधिनियम, 1995 |
| कौन-सा केस वक्फ और मुतवल्ली के कर्तव्यों को स्पष्ट करता है? | फातिमा बीबी बनाम एडवोकेट जनरल |
| वक्फ अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण कब आवश्यक होता है? | सभी वक्फ संपत्तियों के लिए |
मर्ज-उल-मौत (Marz-ul-Maut) | |
| "मर्ज-उल-मौत" की सही परिभाषा क्या है? | मृत्यु की निकटता में किया गया संव्यवहार |
| मर्ज-उल-मौत में किया गया हिबा किस स्थिति में अमान्य माना जाएगा? | यदि यह कुल संपत्ति का 1/3 से अधिक हो और वारिस सहमत न हों |
| किस केस में मर्ज-उल-मौत हिबा को वसीयत के समान माना गया था? | अब्दुल गनी बनाम फखर जहां बेगम |
| मर्ज-उल-मौत के अंतर्गत संपत्ति का विक्रय कब शंका के घेरे में आता है? | जब विक्रय का मूल्य नाममात्र हो |
| मर्ज-उल-मौत में किया गया संव्यवहार किस प्रकार के अधिकारों को प्रभावित नहीं कर सकता? | वारिसों के उत्तराधिकार को |
| मर्ज-उल-मौत में किया गया हिबा कब पूरी तरह वैध माना जाता है? | यदि वक़्त रहते डिलीवरी ऑफ पॉज़ेशन हुआ हो |
| मर्ज-उल-मौत के दौरान वारिस को छोड़कर अन्य को किया गया हिबा क्या कहलाता है? | संदिग्ध हिबा |
| क्या मर्ज-उल-मौत की अवधारणा शिया और सुन्नी दोनों कानून में समान रूप से लागू होती है? | हाँ, दोनों में |
| मर्ज-उल-मौत में संपत्ति की देनदारी किसके पास रहती है यदि हिबा अवैध घोषित हो? | मूल वारिसों के पास |
पूर्व-क्रयाधिकार (हक़-ए-शुफ़ा) (Pre-emption) | |
| हक़-ए-शुफ़ा का सामान्य अर्थ क्या है? | पूर्व अधिकार, अर्थात् पड़ोसी का संपत्ति खरीदने का पूर्व अधिकार |
| मुस्लिम विधि में हक़ शुफा किस पर लागू होता है? | अचल संपत्ति पर, विशेषकर जो साझा दीवार या रास्ते के लिए हो |
| हक़-ए-शुफ़ा का प्रयोग किस स्थिति में किया जाता है? | जब कोई पक्ष संपत्ति बेचता है और दूसरा पक्ष उसे खरीदने का पूर्व अधिकार मांगता है |
| हक़-ए-शुफ़ा के अंतर्गत अधिकार कब प्रभावी होते हैं? | जब संपत्ति का वास्तविक विक्रय होता है |
| हक़ शुफा की अवधि क्या होती है, जब तक वह इस्तेमाल न किया जाए? | अनिश्चितकालीन |
| किस केस में हक़-ए-शुफा के उपयोग की विस्तृत व्याख्या की गई है? | मूनशी बुज़ुल-उल-रहीम बनाम लुटिफ़-उन-निसा |
| हक़-ए-शुफा के तहत अधिकार को ठुकराने के लिए विक्रेता को क्या करना आवश्यक है? | संपत्ति बेचने की सूचना पूर्व हक़दार को देना |
| हक़-ए-शुफा किस प्रकार की संपत्ति पर लागू नहीं होता? | चल संपत्ति |
| हक़-ए-शुफा के अधिकार का प्रयोग न करने पर वह क्या कहलाता है? | परित्याग (Abandonment) |
| मुस्लिम विधि के अनुसार, हक़-ए-शुफा का अधिकार किसे प्राप्त होता है? | कोई भी व्यक्ति जो भूमि का पड़ोसी हो और लाभार्थी हो |
| हक़-ए-शुफा के अंतर्गत विक्रेता को किसकी सहमति लेनी होती है? | हक़दार की |
| मुस्लिम कानून में हक़-ए-शुफा का क्या महत्व है? | पड़ोसी के हितों की रक्षा करता है |
| हक़-ए-शुफा का प्रयोग करने के लिए सबसे पहली जरूरत क्या होती है? | संपत्ति के विक्रय की सूचना मिलना |
| क्या हक़-ए-शुफा का अधिकार वारिसों के अलावा किसी और को दिया जा सकता है? | हाँ, मालिक द्वारा अनुबंधित व्यक्ति को |
| हक़-ए-शुफा का उल्लंघन करने पर सबसे पहला उपाय क्या हो सकता है? | दीवानी मुकदमा |
| अग्रक्रयाधिकार से सम्बन्धित महत्वपूर्ण वाद कौन कौन से है? | दिगम्बर सिंह बनाम अहमद सईद खाँ गोविन्द दयाल बनाम इनायत उल्लाह विशेन सिंह बनाम खजान सिंह |
| अग्रक्रयाधिकार का उद्भव कब होता है? | सम्पत्ति के विक्रय की स्थिति में विक्रय पूर्ण होने को स्थिति में |
| हकशुफा के अधिकार की माँग नहीं कब किया जा सकता है? | दान, सदका में वक्फ उत्तराधिकार में वसीयती दान व सशर्त विक्रय में |
| हकशुफा के अधिकार की माँग कौन कर सकता है? | पड़ोसी सह-अंशधारी सुखाधिकार का दावा करने वाला व्यक्ति |
| शुफा का अधिकार कब समाप्त हो जाता है? | क्रेता के पक्ष में अधिकार त्यागने से विक्रय में मौन सम्पत्ति द्वारा शर्तों का पालन न करने पर |
उत्तराधिकार (Succession) | |
| मुस्लिम विधि में उत्तराधिकार का प्राथमिक स्रोत कौन सा है? | कुरआन और हदीस |
| मुस्लिम उत्तराधिकार में ‘अस्ल’ का क्या अर्थ है? | वारिस का मूल व्यक्ति जिससे विरासत निकलती है |
| किस केस में मुस्लिम उत्तराधिकार के हकदारों की पहचान पर न्यायालय ने निर्णय दिया? | मूनशी बुज़ुल-उल-रहीम बनाम लुटिफ़-उन-निसा |
| मुस्लिम उत्तराधिकार में ‘सहब’ का क्या अर्थ होता है? | वह व्यक्ति जो विरासत का हिस्सा प्राप्त करता है |
| उत्तराधिकार में ‘निसाब’ शब्द का क्या मतलब है? | वह माप जिसके बाद वारिस को हक़ मिलता है |
| मुस्लिम विधि के अनुसार पति की मृत्यु के बाद पत्नी को कितनी हिस्सेदारी मिलती है, यदि पति के बच्चे हों? | 1/6 |
| मुस्लिम उत्तराधिकार में वसीयत कितने प्रतिशत तक की जा सकती है? | 1/3 |
| किस केस का मुख्य विषय उत्तराधिकार में वंशानुगत अधिकार था? | मूनशी बुज़ुल-उल-रहीम बनाम लुटिफ़-उन-निसा’ |
| किस स्थिति में एक मुस्लिम वारिस को उत्तराधिकार से वंचित किया जा सकता है? | यदि वह मृतक की हत्या करे |
| उत्तराधिकार में ‘असबा’ कौन होते हैं? | नजदीकी रिश्तेदार जो वारिस होते हैं |
| मुस्लिम उत्तराधिकार में यदि मृतक के कोई वंशज न हों, तो संपत्ति किसे जाती है? | मृतक के नजदीकी रिश्तेदारों को |
| मुस्लिम विधि के अनुसार ‘असूला’ की अवधारणा का क्या महत्व है? | यह उत्तराधिकार का सिद्धांत है जिसमें अवलंबी का हिस्सा निर्धारित होता है |
| मुस्लिम विधि में उत्तराधिकार का निर्णय कौन देता है? | शरिया अदालत |
| मुस्लिम विधि में उत्तराधिकार कब खुलता है? | किसी व्यक्ति की मृत्यु पर |
| मुस्लिम विधि में उत्तराधिकार का सिद्धान्त नहीं है- | प्रतिनिधित्व का नियम |
| मुस्लिम विधि में उत्तराधिकार की निर्योग्यता क्या क्या है? | मानव हत्या, अधर्मजत्व दासता, धर्म-विभेद उत्तराधिकार में विबन्ध |
| यदि कोई मुसलमान अपना विवाह, विशेष विवाह अधिनियम, 195 के अन्तर्गत किया है, तो उनकी सम्पत्ति पर उत्तराधिकार का नियम किस अधिनियम द्वारा लागू होगा? | भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 |
| शिया विधि के अधीन उत्तराधिकारियों के वर्ग को विभाजित किया गया है- | रक्त सम्बन्धी उत्तराधिकारी विशेषकरण द्वारा उत्तराधिकारी |
| रक्त सम्बन्धी उत्तराधिकारी के अन्तर्गत कौन कौन आते हैं? | माता-पिता बच्चे पितामही मातामही |
| यदि कोई मुसलमान अपना उत्तराधिकारी छोड़े बिना मर जाय, तो उसकी सम्पत्ति किसको जायेगी? | सरकार को |
पिछले वर्षों की परीक्षा पर आधारित प्रश्न (Questions based on previous year exams) | |
| एक मुस्लिम स्त्री पति से तलाक किस अधिनियम के अन्तर्गत ले सकती है? | मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम |
| मुस्लिम स्त्री पति से तलाक ले सकती है जब- | पति 4 वर्ष से लापता हो |
| पत्नी के लिए विवाह विच्छेद की डिकी प्राप्त करने के आधार मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 के किस धारा में दिया गया है? | धारा 2 |
| एक मुस्लिम स्वी द्वारा धर्म परिवर्तन करने से विवाह हो जाता है- | स्वयं विघटित नहीं |
| कौन मुस्लिम विधि का स्त्रोत है? | कुरान कयास इज्मा |
| क्या शरियत मुस्लिम विधि का प्राथमिक स्त्रोत है? | नहीं |
| धात्रेयपालन (फॉस्टरेज) के आधार पर मुस्लिम विवाह - | शून्य (बातिल) है |
मुस्लिम विधि में मेहर-
| पति द्वारा पत्नी के प्रति आदर का कर्तव्य है ,और पत्नी का एक विधिक अधिकार है |
| तलाक उल-विहुत- | पूर्ण और अप्रतिसंग्रहणीय तलाक है |
| भारत में पारिवारिक सम्बन्धों में लागू होने वाला कानून है- | पक्षकारों की वैयक्तिक विधि |
| भारत के संविधान के अन्तर्गत पारिवारिक विधि के सभी पहलू आते हैं- | समवर्ती सूची में |
| एक मुसलमान दुनिया के किसी भी देश में- | सम्बन्धित देश के कानूनों के अनुपालन के उद्देश्य से जाता है जिसमें वैयक्तिक कानून शामिल है |
| जब एक मुस्लिम पुरुष और एक मुस्लिम महिला विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के अन्तर्गत अपने विवाह की संविदा करते हैं तो मुस्लिम वैयक्तिक विधि - | लागू नहीं होती है |
| शिया विधि के अन्तर्गत यदि पति बोलने की क्षमता रखता है और तलाक की लिखित घोषणा करता है तो ऐसा तलाक- | शून्य होता है |
| मुस्लिम विधि के अन्तर्गत दान की आवश्यक शर्त है | दानकर्ता द्वारा दान की घोषणा दानग्रहीता द्वारा दान की स्वीकृति दान की गई सम्पत्ति के कब्ज़ा का परिदान |
| वक्फ किया जा सकता है- | हिन्दू और मुसलमान दोनों के द्वारा |
| मुस्लिम विधि में विवाह को माना जाता है, एक- | संविदा |
| शिया मुसलमानों में विवाह के समय कितने गवाह होना आवश्यक है? | कोई गवाह नहीं |
| सुन्नी मुसलमानों के मध्य मूता विवाह के सम्बन्ध में क्या मान्यता है? | शून्य |
| सुन्नी विधि में अगर पति दवाव, नशे में एवं मजाक में तलाक देता है, तो यह तलाक- | शून्य है |
| सुन्नी मुसलमानों में कितना न्यूनतम मेहर निर्धारित किया गया है? | दस दिरहम |
| एक सुन्नी मुस्लिम एक कित्ताविया लड़कों से विवाह करता है। ऐसा विवाह है- | वैध |
| मुस्लिम विधि में वसीयत की जा सकती है- | केवल एक तिहाई सम्पत्ति की |
| मुस्लिम विवाह विखण्डन अधिनियम, 1939 न्यायिक तलाक का अधिकार प्रदान करता है- | केवल पत्नी को |
| यदि एक शिया पुरुष एक सुन्नी महिला से विवाह करता है, तो विवाह होगा- | सहीह |
| शरीयत अधिनियम, 1937 की धारा 2 के अन्तर्गत कौन-सा मामला वैयक्तिक नहीं है? | पूर्व क्रयाधिकार (सूफा) |
| मेहर के अदा न होने की स्थिति में विधवा की सम्पत्ति पर काबिज रहने का अधिकार उसका- | व्यक्तिगत अधिकार है |
| 'तलाक-उल बिद्दत को मान्यता प्राप्त नहीं है- | शियाओं द्वारा |
| मुस्लिम विधि के अन्तर्गत दान के सन्दर्भ में कौन-सा वचन सत्य है? | मौखिक तथा लिखित दोनों प्रकार से किया जा सकता है |
| मुस्लिम विधि में एक पूर्वक्रय (शूफा) का अधिकार नहीं रखता है- | शफी-ए-मेहरबान |
| मुस्लिम विधि में 'अ' 25 वर्ष के लिए 40,000 रुपयों का वक्फ करता है। यह वक्फ- | अमान्य है |
| 'अ' एक मुस्लिम व्यक्ति मृत्यु शय्या पर अपने लड़के को अपनी सम्पत्ति का आधा भाग दान में देता है। इस दान का क्या प्रभाव होगा? | शून्य है |
| मुस्लिम विधि में एक पुत्र का अधिकार क्या है? | अवशिष्ट उत्तराधिकारी है |
| यह कधन किसका है कि "तलाक धर्म से सही नहीं है परन्तु विधि में सही है"? | न्यायमूर्ति अमीर अली |
| "कुरान में तलाक का सबसे अच्छा तरीका बताया गया है।" यह कथन किसका है? | न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह |
| मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1939 के प्रावधान किस मुस्लिम स्कूल पर निर्धारित है? | मलिकी स्कूल |
| मुस्लिम विधि में बिना गवाह (साक्ष्य) के होने पर विवाह - | अनियमित है |
| सुन्नी मुसलमान 'मुता विवाह' को क्या मानते हैं? | अवैध |
| कौन-सा स्थान आम पूजा का स्थान नहीं है? | इमामबाड़ा |
| मुस्लिम विधि में जब पति एवं पत्नी दोनों ही विवाह-विच्छेद चाहते हों, तो इस संव्यवहार को क्या कहते हैं? | मुबारत |
| मुस्लिम विधि के अन्तर्गत, कोई मुसलमान अपनी सम्पत्ति की वसीयत किस सीमा तक कर सकता है? | 1/3 सम्पत्ति की |
| मुस्लिम तलाक के प्रभाव हैं- तलाक शुदा पत्नी अपने पूर्व पति से भरण-पोषण की हकदार नहीं रह जाती- | गलत |
| मुस्लिम विधिशास्त्र को जाना जाता है- | फिक्ह से |
| मेहर के अदा न होने पर मुस्लिम विधि में विधवा का सम्पत्ति पर काबिज रहने का अधिकार उसका - | व्यक्तिगत अधिकार है |
| दान के सम्बन्ध में मुस्लिम विधि में कौन-से कथन सत्य हैं? | दान मौखिक तथा लिखित दोनों प्रकार से किया जा सकता है |
| सर्वोत्तम तलाक है- | अहसान तलाक |
| जब मुस्लिम विवाह में 'मेहर' अनिश्चित है, पत्नी हकदार होती है- | मेहर-ए-मिस्ल प्राप्त करने की |
| अवैध सम्बन्ध रखने वाली मुस्लिम महिला दण्डनीय - | जिना के लिए |
यदि मुस्लिम पति अपनी पत्नी पर जारकर्म का झूठा दोषारोपण करता है, उस आरोप के खण्डन की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
| जिहार लियान ईला |
| मुस्लिम विधि के अन्तर्गत 'खुला' द्वारा तलाक किसकी सहमति एवं पहल पर विवाह-विच्छेद है? | पत्नी को |
| यदि कोई सुन्नी मुसलमान किसी किताविया लड़की से विवाह करता है, तो वह विवाह- | वैध है |
| पैगम्बर मोहम्मद साहब की मृत्योपरान्त किसको खलीफा नियुक्त किया गया? | अबू बकर |
| मुस्लिम विधि के अन्तर्गत कौन-सा दान शून्य नहीं है? | परदानशीन महिला द्वारा दिया गया दान |
| मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1939 मुस्लिम विधि के किस विचारधारा पर आधारित? | मलिको विचारधारा |
| मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1939 के प्रावधान किसको तलाक का अधिकार प्रदान करता है? | केवल पत्नी को |
| मेहर-इ-मिस्ल किस आधार पर निश्चित होता है? | पत्नी की निजी विशेषताएँ जैसे कि उसकी आयु, असाधारण सुन्दरता उसके पिता के परिवार की सामाजिक प्रास्थिति मेहर जो कि उसके पति के परिवार में स्त्रियों को दी गयी हो |
| पत्नी का क्या अधिकार है जब पति मेहर न दे? | पति के साथ सम्भोग करने से इन्कार करना मेहर की वसूली के लिए वाद दायर करना मृतक पति की सम्पत्ति पर कब्जा रखना |
| माँ की अनुपस्थिति में किस महिला को मुस्लिक बच्चे की अभिरक्षा के लिए प्राथमिकता है? | माता की माँ |
| एक मुस्लिम चार से अधिक विवाह नहीं कर सकता, परन्तु यदि वह पाँचवीं पत्नी से विवाह करता है, तो वह विवाह होगा- | अनियमित |
| सुन्नी विधि के अन्तर्गत अवयस्क की सम्पत्ति का संरक्षक होता है- | पिता |
| तलाक के पश्चात् एक मुस्लिम महिला- | इदत की अवधि गुजारने के पश्चात् विवाह कर सकती है |
| शिया मुस्लिम विवाह में कितने साक्षियों को आवश्यकता है? | दो पुरुष एक पुरुष एवं दो महिलाएं |
| 'मुशा' शब्द का मुस्लिम विधि के अन्तर्गत अर्थ है- | अविभाजित सम्पत्ति में हिस्सा |
| एक सुन्नी मुस्लिम 'इद्दत' की अवधि में विवाह करता है, तो वह विवाह है- | अनियमित |
| एक मुस्लिम माता अपनी बच्ची की अभिरक्षा की हकदार है, जब तक लड़की- | सात वर्ष की न हो जाए |
| सहमति से मुस्लिम विवाह का विघटन क्या कहलाता है- | खुला |
| मुस्लिम विधि के अन्तर्गत कौन 'वसीयत' अवैध है- | वसीयतकर्ता के हत्यारे के पक्ष में गई वसीयत |
| कौन सा 'मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939' के अन्तर्गत विवाह विच्छेद का आधार नहीं है- | पति की दो वर्ष की कारावास की सजा होना |
| 'शुफा' का अधिकार क्या है- | किसी सम्पत्ति को क्रय करने के लिये वरीयता का अधिकार |
| मुस्लिम विधि का शिया विचारधारा के अन्तर्गत मेहर की रकम- | 10 दिरहम है |
| 'यथासामीप्य' का सिद्धान्त सम्बन्धित है- | वक्फ से |
| कौन-सा मुस्लिम विधि का गौण स्त्रोत है? | रिवाज (रूढ़ि) |
| किसने मुस्लिम विधि के अनुप्रयोग को संशोधित किया है? | शरियत अधिनियम, 1937 मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939 मुस्लिम महिला (विवाह विच्छेद अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 |
| कौन-सी मुस्लिम विधि भारत में लागू होती है? | मुस्लिम महिला (विवाह-विच्छेद अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 |
| कियास को मुस्लिम विधि के स्त्रोत के रूप में पहली बार किसने लागू किया ? | इमाम अबु हनिफा |
| मुस्लिम विधि के अन्तर्गत विवाह- | एक संस्था है जो कि स्त्री और पुरुष के दाम्पत्य सम्बन्धों को वैध बनाता है एक सिविल संविदा है एक सुन्नत है |
| सुन्नी विवाह में अवयस्क का अभिभावक कौन हो सकता है? | पिता |
| किसमें विवाह के लिए पूर्ण असमर्थता है? | समरक्तता विवाह-सम्बन्ध धात्रेय-सम्बन्ध |
| विवाह में सापेक्ष असमर्थता क्या है? | पत्नी की बहन से विवाह जबकि पत्नी जीवित है पाँचवों महिला से विवाह चार पत्नियों को उपस्थिति में विवाह के समय अपेक्षित साक्षियों की अनुपस्थिति है |
| कौन सा एक मेहर का भुगतान न होने पर पत्नी को अधिकार नहीं है? | मेहर में वृद्धि या कमी का अधिकार |
| आनुपातिक हास का नियम लागू होता है- | वसीयत में |
| मुस्लिम विधि में पारस्परिक सम्मति से किया गया विवाह विच्छेद कहा जाता है- | मुबारत |
| मुस्लिम विधि में आजीवन हित की वसीयत होती है- | मान्य है |
| मुस्लिम विधि में मानी सम्पत्ति का हिबा - | अवैध है |
| शरियत अधिनियम, 1937 किस तारीख से लागू है? | 7 अक्टूबर, 1937 |
| मुस्लिम विधि के अन्तर्गत 'उर्फ' शब्दावली का अर्थ है- | मुस्लिम विधि का प्राथमिक स्रोत जो उसे अनुपूर्ण करता है |
| मुस्लिम विधि के अन्तर्गत तलाक-उल-बिद्दत है एक- | पूर्ण एवम् अप्रतिसंहरणीय विवाह-विच्छेद |
| 'अ' एक मुस्लिम एक गैर-मुस्लिम के पक्ष में दान करता है। मुस्लिम विधि के अन्तर्गत यह दान होगा - | विधिमान्य, क्योंकि दान के लिए धर्म अप्रासंगिक है |
| सुन्नी विधि के अन्तर्गत इदत की अवधि में किया गया विवाह है- | अनियमित |
| सुन्नी विधि के अन्तर्गत, वसीयतकर्ता की इरादतन मृत्यु कारित करने वाले व्यक्ति के लिए की गई वसीयत होगी- | वैध शून्य मृतक के 1/3 अंश तक वैध |
| कौन 'मेहर' की विषयवस्तु नहीं होगी? | अगले वर्ष की फसल का उत्पादन |
| मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 के अन्तर्गत एक मुस्लिम पत्नी विवाह-विच्छेद की डिक्री प्राप्त कर सकती है यदि उसका पति विकृतचित्त रहा है- | दो वर्षों की अवधि तक |
| मुस्लिम विधि के अन्तर्गत गर्भस्थ शिशु के लिए की गयी वसीयत वैध है, यदि वह जीवित पैदा हो जाता है- | वसीयत की तिथि से 6 मास के अन्तर्गत यदि वह सुन्नी है और 10 मास के अन्तर्गत यदि वह शिया है |
| किसी मुस्लिम द्वारा बच्चे की धर्मजता की अभिस्वीकृति होती है- | अप्रतिसंहरणीय (अखण्डनीय) |
| पति द्वारा मुस्लिम धर्म से संपरिवर्तन के कारण विवाह का विच्छेद प्रभावी होता है- | तत्काल |
| एक मुस्लिम द्वारा किया गया दान रद्द किया जा सकता है- | कब्जा अन्तरण के पूर्व |
| भारत में पूर्व क्रयाधिकार (हकशुफा) का उद्गम स्त्रोत कहा जा सकता है- | मुस्लिम विधि को |
| साक्षियों के अभाव में एक सुन्नी विवाह होता है- | अनियमित |
| यदि विवाह से पूर्व कोई महिला अपने मेहर सम्बन्धी सभी अधिकारों को छोड़ने के सम्बन्ध में कोई अनुबंध या करार करती है या बिना मेहर के भी विवाह के लिए करार करती है, तो ऐसा अनुबंध या करार होगा- | अविधिमान्य |
| "हिबा एक अविलम्ब बिना शर्त, समग्र सम्पत्ति का अन्तरण है जिसके बदले में कोई वापसी नहीं होती है।" यह परिभाषित किया था- | तैयबजी ने |
| कौन पूर्वक्रयाधिकार (हकशुफा) के अधिकार हेतु माँग या दावा नहीं कर सकता है? | पूर्वक्रयाधिकार का दावा करने वाले के रिश्तेदार |
| मुस्लिम विधि के अन्तर्गत पौवनावस्था की उपधारणा की जाती है- | 15 वर्ष की आयु में |
| कौन मुस्लिम विधि का प्रमुख स्रोत नहीं है? | न्याय, साम्य एवं विवेक |
| जिहार मुस्लिम विधि में तलाक का एक ऐसा तरीका है जिसमें पति अपनी पवी की तुलना करता है- | अपनी माँ से |
| मुस्लिम विधि में 'वक्फ' नहीं किया जा सकता है- | एक मूर्ति के पक्ष में |
| दान से सम्बन्धित कौन सा मुख्य मामला है? | मैना बीबी बनाम चौधरी वकील अहमद 1925, PC |
| मुस्लिम विधि में दान में, पक्षकार होता है- | दाता व अदाता |
| 'मुस्लिम विधि में विवाह एक धार्मिक संस्कार भी है। "यह प्रतिपादित किया गया था- | अनीस बेगम बनाम मुस्तफा (1933) ILR SS आंत 733 में |
| पति की मृत्यु पर एक मुस्लिम पत्नी अपने पति की सम्पत्ति तब तक आधिपत्य में रख सकती है जब तक कि मेहर का भुगतान न कर दिया जाय। उसका बाह अधिकार है। | धारणाधिकार का |
| सुन्नी विधि के अनुसार मुस्लिम विधि के मुख्य स्त्रोत | कुरान, अहदिस, इज्मा, कवास |
| मुस्लिम महिला (विवाह-विच्छेद पर अधिकार का संरक्षण) अधिनियम पारित हुआ था- | 1986 में |
| यदि एक मुस्लिम अवयस्क का विवाह उसके संरक्षक द्वारा उसके अवयस्कता काल में कर दिया जाता है तो ऐसे व्यक्ति को अधिकार है कि वह वयस्कता प्राप्त कर लेने पर अपने विवाह कोसमाप्त कर दे। मुस्लिम विधि में इसको कहते हैं- | ख्याल-उल-बुलुग |
| A एवं B के बीच बिना विशिष्ट आशय के मजाक में विवाह होता है। ऐसा विवाह वैध है। | हनफी विधि के अन्तर्गत |
| यदि A अपनी कुछ सम्पत्ति का हिबा B को कर देता है इस शर्त के साथ कि B सम्पत्ति को हस्तान्तरित नहीं करेगा, तो'- | शर्त शून्य है तथा हिबा वैध है |
| मुस्लिम विधि के एक स्वोत 'इज्मा' का अर्थ है- | मुस्लिम विधिवेत्ताओं की सर्वसम्मत राप |
| किसके द्वारा पहली बार क्यास (Qiyas) को मुस्लिम विधि के स्वोत के रूप में लागू किया गया ? | इमाम अबू हनीफा |
| शरीयत अधिनियम, 1937 लागू हुआ- | 7 अक्टूबर, 1937 को |
| इस्लाम में एक व्यक्ति जो सम्पत्ति का स्वामी है- | उसके पास वसीयत निष्पादित करने को असीमित क्षमता है |
| जब कोई हिबा उसके उपयोग एवं व्यधन के बारे में शताँ या निर्बन्धनों के साथ किया जा सकता है, तो- | शर्तें एवं निर्बन्धन शून्य हैं और हिया मान्य हैं |
| भारतीय साक्ष्य अधिनियम की में एक बच्चे के पितृत्व के सम्बन्ध में विधिक उपधारणा - | मुस्लिमों को भी लागू होती है, मुस्लिम विधि के नियमों को पीछे छोड़कर |
| वक्फ अधिनियम, 1995 की कौन-सी धारा दौवानी न्यायालय के क्षेत्राधिकार को रोकती है- | धारा 85 |
| कौन सा मुस्लिम विधि के लागू होने को संशोधित करता है? | मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम, 1939 मुस्लिम स्त्री (विवाह विच्छेद पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1956 शरीयत अधिनियम, 1937 |
| आनन्द के लिए जो निकाह अस्थाई किया जाता है वह कौन-सा निकाह कहलाता है? | मुता |
| किसके द्वारा सर्वप्रथम कियास को मुस्लिम विधि के स्त्रोत के रूप में लागू किया गया- | इमाम अब्बू हनीफा |
| कौन-सी विवाह के लिए पूर्ण अक्षमता (Incapacity) है- | रक्त सम्बन्ध वैवाहिक सम्बन्ध धात्रेय सम्वन्ध |
| एक मुसलमान चार से ज्यादा शादियाँ नहीं कर सकता। यदि एक मुसलमान पाँचवीं शादी करेगा, तो ऐसी शादी होगी- | अनियमित |
| शिया मुस्लिम निकाह में कितने गवाह का होना आवश्यक है? | कोई गवाह जरूरी नहीं |
| एक पत्नी का कौन-सा अधिकार है, जब उसका पति मेहर देने से मना करता है- | शादी की पूर्णावस्था (Consummation) से मना करना मेहर वसूली के लिये दावा करना मृतक पति की सम्पत्ति पर कब्जा बनाये रखना |
| हकशुका का अधिकार कौन-सा - | दूसरे व्यक्ति की अपेक्षा वरीयता (Preference) से सम्मति क्रय करने का अधिकार |
| अवैध सन्तान की अभिरक्षा (Custody) होती है- | माता की |
| मुस्लिम विधि के मुख्य स्त्रोत कौन-से है? | कुरान सुत्रत और अहादिस इज्मा और कियास |
| एक मुस्लिम स्त्री किस पुरूष से वैध विवाह कर सकती है? | मुस्लिम (मुसलमान) |
| किसी स्त्री के साथ एक 'शिया' मुस्लिम पुरूष अस्थायी विवाह अर्थात् वैध 'मुता' की संविदा का हकदार है? | मुस्लिम स्त्री के साथ ईसाई स्त्री के साथ यहूदी या अग्रिपूजक स्त्री के साथ |
| क्या एक मुस्लिम पुरूष नशे या दबाव की हालत में 'तलाक' दे सकता है? | हाँ 'सुत्री' मुस्लिम विधि में मान्य |
| 'तलाक' की तीसरी घोषणा (उच्चारण) से कौन-सी किस्म का 'तलाक' प्रभावी हो जाता है? | तलाक-ए-हसन |
| जनकता से सम्बन्धित एक बार की गयी अभिस्वीकृति को मुस्लिम विधि के तहत | प्रतिसंहरित (revoked) नहीं किया जा सकता है |
| मुस्लिम नाजायज बच्चों को किसकी अभिरक्षा में रखा जायेगा? | माता |
| वैध मुस्लिम विवाह के लिए- | प्रस्ताव एवं स्वीकृति उसी समय एवं स्थान पर होनी चाहिए |
| एक मुस्लिम अपनी पत्नी को तलाक दे सकता है- | बिना कोई कारण बताये, जब कभी वह ऐसा चाहता है |
| इद्दत अवधि के पालन का उददेश्य है- | स्त्री गर्भवती है या नहीं इसे सुनिश्चित करना |
| मुत्ता विवाह की न्यूनतम अवधि है- | कोई न्यूनतम सीमा नहीं |
| दत्तक ग्रहण लागू नहीं होता- | मुस्लिम विधि में |
| सुन्नी विधि में अवयस्क का संरक्षक कौन हो सकता है? | पिता |
| कौन मुस्लिम विधि भारत में लागू होता है? | मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 |
