सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) MCQs (हिंदी माध्यम)

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सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908

CODE OF CIVIL PROCEDURE 1908

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1.  सिविल प्रक्रिया संहिता किस तिथि से प्रभावी हुई थी?

a.  31 जनवरी, 1908

b.  1 जनवरी, 1909

c.   1 अप्रैल, 1908

d.  31 दिसम्बर, 1908

 

2.  सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 संपूर्ण भारत में लागू होता है सिवाय-

a.  नागालैंड राज्य एवं जनजातीय क्षेत्रों को छोड़कर

b.  जम्मू एवं कश्मीर राज्य को छोड़कर

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

3.  सिविल प्रक्रिया संहिता में निहित हैं-

a.  50 आदेश

b.  52 आदेश

c.   53 आदेश

d.  51 आदेश

 

4.  सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत 'डिक्री' को परिभाषित किया गया है-

a.  धारा 2(1) में

b.  धारा 2() में

c.   धारा 2() में

d.  धारा 2(2) में

 

5.  किसी न्यायनिर्णयन की प्रारूपिक अभिव्यक्ति, जो पक्षकारों के अधिकारों का निश्चयात्मक रूप से अवधारण करती है, जिसे इसे अभिव्यक्त करने वाले न्यायालय द्वारा दर्ज किया जाता है, होती है-

a.  आदेश

b.  निर्णय

c.   डिक्री

d.  अपीली आदेश

 

6.  डिक्री का अर्थ है-

a.  दावों का न्यायनिर्णयन करने वाला एक आदेश

b.  किसी न्यायनिर्णयन की प्ररूपिक अभिव्यक्ति किन्तु इसमें ऐसा कोई न्यायनिर्णयन शामिल नहीं होगा जिससे किसी आदेश से अपील के रूप में एक अपील निहित हो

c.   किसी न्यायनिर्णयन की अनौपचारिक अभिव्यक्ति

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

7.  डिक्री तब प्रारंभिक होती है जब-

a.  वाद के पूर्णरूपेण से निपटा दिया जा सकने के पहले आगे और कार्यवाहियां की जानी हो

b.  इसे वाद की प्रारंभिक अवस्थाओं में जारी किया गया हो

c.   जब इसका सम्बन्ध किन्हीं प्रारंभिक मुद्दों से हो

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

8.  किसी डिक्री के अनिवार्य तत्व होते हैं-

a.  इन्हें एक न्यायनिर्णयन अवश्य होना चाहिए

b.  न्यायनिर्णयन किसी वाद में किया गया होना आवश्यक है।

c.   अवधारण निश्चयात्मक प्रकृति का अवश्य होना चाहिए

d.  उपरोक्त सभी

 

9.  सिविल प्रक्रिया संहिता किसे मान्यता देती हैं-

a.  अंतिम डिक्री

b.  प्रारंभिक डिक्री

c.   भागतः प्रारंभिक तथा भागतः अंतिम डिक्री

d.  उपरोक्त सभी

 

10. एक डिक्री हो सकती है-

a.  अंतिम

b.  पहले प्रारंभिक फिर अंतिम

c.   प्रारंभिक अथवा अंतिम में से एक

d.  प्रारंभिक

 

11. एक डिक्री तब अंतिम बन जाती है जब-

a.  पक्षकारों के अधिकारों की निश्चयात्मक अवधारणा की जा चुकी हो

b.  डिक्री के विरूद्ध कोई अपील की गई हो

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्तं में कोई नहीं

 

12. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत डिक्री के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

a.  यह वाद में सभी या किन्हीं विवादग्रस्त विषयों के सम्बन्ध में पक्षकारों के अधिकारों का निश्चायक रूप से अवधारण करता है।

b.  डिक्री भागतः प्रारंभिक तथा भागतः अंतिम हो सकती है।

c.   इसमें ऐसा कोई न्यायनिर्णयन नहीं आयेगा जिसकी अपील, आदेश की अपील की भांति होती है।

d.  उपरोक्त सभी

 

13. किसी वाद में प्रारंभिक डिक्री किस हेतु पारित की जा सकती है

a.  कब्जे तथा अंतःकालीन लाभ हेतु

b.  बँटवारे हेतु

c.   साझेदारी हेतु

d.  उपरोक्त सभी

 

14. निम्नलिखित में से कौन सा निर्णय एक डिक्री नहीं है?

a.  वाद की समाप्ति का आदेश

b.  बिक्री को अपास्त करने से इंकार करने सम्बन्धी आदेश

c.   समय बाधित रूप में किसी अपील को खारिज किया जाना

d.  न्यायालय शुल्क के भुगतान करने के कारण वादपत्र का खारिज किया जाना

 

15. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निम्नलिखित में से क्या एक डिक्री नहीं है?

a.  वादपत्र को नामंजूर किया जाना

b.  व्यतिक्रम हेतु वाद को खारिज किया जाना

c.   व्यतिक्रम हेतु वाद का खारिज किया जाना तथा अर्जी को खारिज किया जाना

d.  उपरोक्त में से कोई नहीं

 

16. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निम्नलिखित में से क्या एक डिक्री नहीं है?

a.  व्यतिक्रम हेतु खारिज किए जाने सम्बन्धी कोई आदेश

b.  न्यायालय शुल्क के भुगतान करने के कारण वाद पत्र का खारिज किया जाना

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

17. निम्नलिखित में से कौन सी अवधारणा "डिक्री" की परिभाषा में नहीं आती?

a.  एक न्यायनिर्णयन जो न्यायालय के समक्ष विवाद्यकं मामलों में से कुछ के सम्बन्ध में पक्षकारों के अधिकारों की निश्चयात्मक अवधारणा देता हो

b.  किसी वाद पत्र को खारिज किया जाना,

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अंतर्गत किसी प्रश्न का अवधारण

d.  व्यतिक्रम के लिए किसी वाद को खारिज किया जाना

 

18. न्यायालय शुल्क का भुगतान किए जाने पर किसी वादपत्र को खारिज करने सम्बन्धी न्यायालय के आदेश की प्रकृति क्या होगी?

a.  डिक्री

b.  प्रारंभिक डिक्री

c.   मध्यवर्ती आदेश

d.  अंतिम आदेश

 

19. डिंक्री में किसी वादपत्र को खारिज किया जाना तथा सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अंतर्गत किसी प्रश्न को अवधारित किया गया माना जाएगा-

a.  गलत

b.  सही

c. इसमें धारा 144 के अंतर्गत किसी प्रश्न को अवधारित किया जाना शामिल होता है किन्तु किसी वाद पत्र को नामंजूर किया जाना शामिल नहीं होगा

d.  इसमें वादपत्र को नामंजूर किया जाना शामिल होता है किन्तु सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अंतर्गत किसी प्रश्न को अवधारित किया जाना शामिल नहीं होता

 

20. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत "डिक्री" में शामिल नहीं है-

a.  वाद पत्र का नामंजूर किया जाना

b.  किसी वाद पत्र को वापस किया जाना

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अंतर्गत आदेश का प्रतिस्थापन

d.  दाम्पत्य अधिकारों का प्रतिस्थापन

 

21. "पंचाट एवं डिक्री" शब्दों का उपयोग क्या इंगित करने हेतु किया जाता है-

a.  आयकर आयुक्त का आदेश

b.  जिलाधीश द्वारा राजस्व की वसूली के दौरान पारित आदेश

c.   सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम आदेश

d.  सिविल न्यायालय, माध्यस्थ, औद्योगिक न्यायालय के आदेश

 

22. निम्नलिखित में से क्या डिक्री/डिक्रियाँ है/हैं?

a.  कालबाधित के रूप में खारिज की गई अपील

b.  साक्ष्य के आभाव वश खारिज वाद

c.   किसी बाद के समापन का आदेश

d.  उपरोक्त सभी

 

23. 'डिक्रीदार' का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जिसके पक्ष में एक डिक्री पारित की गई हो अथवा निष्पादन हेतु सक्षम कोई आदेश पारित किया गया हो। 'डिक्रीदार' की यह परिभाषा दी गई है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता धारा 2() में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता धारा 2(2) में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता धारा 2(3)

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता धारा 2(4) में

 

24. एक डिक्रीदार का-

a.  यह शब्द वादी तक सीमित नहीं हैं।

b.  वाद का पक्षकार होना आवश्यक नहीं है।

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  (a) ही (b)

 

25. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत "विदेशी न्यायालय" का अर्थ है-

a.  भारत के बाहर स्थित कोई न्यायालय तथा जो भारत सरकार के प्राधिकार के अंतर्गत स्थापित किया गया हो

b.  भारत के बाहर स्थित कोई न्यायालय

c.   भारत स्थित कोई न्यायालय, जो विदेशी विधि लागू कर रहा हो

d.  उपरोक्त सभी

 

26. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(5) के अंतर्गत किसी न्यायालय को विदेशी न्यायालय की परिभाषा के अंतर्गत लाने हेतु दो शर्तों को अवश्य पूरा होना चाहिए-

a.  न्यायालय अवश्य ही केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित नहीं किया गया होना चाहिए

b.  न्यायालय को अवश्य ही केन्द्र सरकार द्वारा जारी रखा गया नहीं होना चाहिए

c.   न्यायालय अवश्य ही भारत के बाहर स्थित होना चाहिए

d.  उपरोक्त सभी

 

27. विदेशी निर्णय, जैसा कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(6) में परिभाषित किया गया है, का अर्थ होता है-

a.  विदेशियों के सम्बन्ध में किसी भारतीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय

b.  किसी भारतीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय

c.   किसी विदेशी न्यायालय द्वारा पारित निर्णय

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

28. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की किस धारा के अंतर्गत सिविल न्यायालय में किसी 'न्यायाधीश' को एक पीठासीन अधिकारी के रूप में परिभाषित किया गया है-

a.  धारा 2(4)

b.  धारा 2(5)

c.   धारा 2(8)

d.  धारा 2(2)

 

29. निर्णीत ऋणी से अभिप्रेत है?

a.  किसी बैंक का ऋणी

b.  व्यक्ति, जिसके विरूद्ध डिक्री पारित की गई हो

c.   प्रतिवादी

d.  उपरोक्त में कोई नहीं,

 

30. निर्णय का अर्थ है-

a.  न्यायाधीशों द्वारा आज्ञप्ति या आदेश के आधारों पर किए गए कथन

b.  आज्ञाप्ति का भाग

c.   अधिकारों का विनिश्चय

d.  उपरोक्त में से कोई नहीं

 

31. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 2(9) के अंतर्गत निर्णय से अभिप्रेत है-

a.  एक डिक्री

b.  किसी आदेश अथवा डिक्री के आधारों का कथन

c.   अपील को सरसरी तौर पर खारिज किया जाना

d.  उपरोक्त सभी

 

32. एक निर्णय में निहित होता है-

a. अवधारणा के बिन्दु

b. वाद का संक्षिप्त विवरण

c. अवधारणा के बिन्दु पर निर्णय तथा उसके कारण

d. उपरोक्त सभी

 

33. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की किस धारा के अंतर्गत "विधिक प्रतिनिधि" को स्पष्ट किया गया है?

a.  धारा 2(13)

b.  धारा 2

c.   धारा 2(11)

d.  धारा 2(12)

 

34. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(11) के अंतर्गत विधिक प्रतिनिधि अभिप्रेत है-

a.  किसी वाद के पक्षकारों के नातेदार

b.  वह व्यक्ति जो मृत व्यक्ति की सम्पदा का विधि की दृष्टि से प्रतिनिधित्व करता है।

c.   वाद के पक्षकारों को उत्पन्न होने वाले लाभों के सह- हिस्सेदार

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

35. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(11) के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन एक विधिक प्रतिनिधि नहीं है?

a.  निष्पादक एवं प्रशासक

b.  हिन्दू सहदायिक

c.   अधिकृत समनुदेशिती अथवा रिसीवर

d.  अवशिष्ट वसीयतदार

 

36. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत एक विधिक प्रतिनिधि का अर्थ होता है-

a.  किसी वाद के पक्षकारों के नातेदार

b.  किसी वाद के पक्षकारों को प्राप्त होने वाले लाभों का सह- हिस्सेदार

c.   वह व्यक्ति जो मृत व्यक्ति की सम्पदा का विधि की दृष्टि से प्रतिनिधित्व करता है।

d.  उपरोक्त सभी

 

37. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(11) के अंतर्गत परिभाषित 'विधिक प्रतिनिधि' में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं होता-

a.  स्वाभाविक वारिस

b.  ऐसा व्यक्ति, जो तो विधिक वारिस हो ही मृतक की संपदा का एक हस्तक्षेपक

c.   वसीयतदार जो मृतक की संपदा के मात्र एक भाग को हासिल करता है।

d.  वादग्रस्त संपदा का दानगृहीता

 

38. सिविल प्रक्रिया संहिता की निम्न में से कौन सी धारा 'अंतःकालीन लाभ' को परिभाषित करती है?

a.  धारा 2(12)

b.  धारा 2(5)

c.   धारा 2(14)

d.  धारा 2(16)

 

39. अंतःकालीन लाभ का अर्थ है-

a.  लक्ष्य द्वारा अर्जित लाभ

b.  व्यक्ति द्वारा किसी संपत्ति के सदोष कब्जे में प्राप्त अथवा प्राप्त किया जा सकने वाला लाभ

c.   अत्यधिक न्यूनतम लाभ

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

40. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(12) के अनुसार संपत्ति से प्राप्त किए गए 'अंतःकालीन लाभ' किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त किए जाते हैं-

a.  संपत्ति के अवैध कब्जे में

b.  संपत्ति के विधिक कब्जे में

c.   संपत्ति के प्रभावी कब्जे में

d.  संपत्ति के सदोष कब्जे में

 

41. जैसा सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(12) के अंतर्गत परिभाषित किया गया है, अंतःकालीन लाभों का अर्थ है ऐसे लाभ जो किसी व्यक्ति द्वारा-

a.  वास्तव में प्राप्त संपत्ति जिसमें वे लाभ भी शामिल हैं जो ऐसे व्यक्ति द्वारा सुधार के कारण प्राप्त हुए हों

b.  ऐसी संपत्ति के सदोष कब्जे में प्राप्त किया गया हो जो वास्तव में प्राप्त हुई हो अथवा जिसे वह ब्याज समेत प्राप्त कर चुका हो

c.   वास्तव में प्राप्त संपत्ति अथवा प्राप्त की जा चुकी संपत्ति किन्तु ऐसे लाभ पर बिना किसी ब्याज के

d.  वास्तव में प्राप्त ऐसी संपत्ति

 

42. निम्नलिखित में से कौन सी जोड़ी सिविल प्रक्रिया संहिता के अनुसार सुमेलित नहीं है?

a.  धारा 2(5) - विदेशी न्यायालय

b.  धारा 2(10) - अंतःकालीन लाभ

c.   धारा 2(6) - विदेशी निर्णय

d.  धारा 2(11) - विधिक प्रतिनिधि

 

43. किसी संपत्ति पर सदोष कब्जे के दौरान प्राप्त लाभ-

a.  आकस्मिक लाभ होता है

b.  अंतःकालीन लाभ होता है

c.   वास्तविक लाभ होता है

d.  सशर्त लाभ होता है

 

44. सिविल प्रक्रिया संहिता की निम्नलिखित में से कौन सी धारा एक आदेश को परिभाषित करती है?

a.  धारा 2(14)

b.  धारा 2(2)

c.   धारा 2(9)

d.  धारा 2(15)

 

45. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत एक न्यायालय का न्यायनिर्णयन जो एक डिक्री नहीं होता-

a.  एक निर्णय होता है

b.  एक आदेश होता है

c.   एक समन होता है।

d.  एक नियम होता है

 

46. सिविल प्रक्रिया संहिता,1908 की धारा 2(16) के अंतर्गत शब्द "विहित" से अभिप्रेत है-

a.  न्यायालय द्वारा विहित

b.  नियमों द्वारा विहित

c.   समाज द्वारा विहित

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

47. निम्नलिखित में से कौन सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(17) के अर्थों के अंतर्गत "एक लोक अधिकारी" नहीं है?

a.  ग्राम पंचायत का सरपंच

b.  एक न्यायाधीश

c.   सरकार से वेतनभोगी सेवारत् व्यक्ति

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

48. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 3 के अंतर्गत लघुवाद न्यायालय निम्न में से किसका अधीनस्थ होता है?

a.  केवल उच्च न्यायाल

b.  केवल जिला न्यायालय

c.  (a) तथा (b) दोनों

d.  (a) ही (b)

 

49. सिविल प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2002 कब से प्रभावी हुआ था-

a.  04.01.2002

b.  01.04.2002

c.   01.06.2002

d.  01.07.2002

 

50. लघुवाद न्यायालयों द्वारा जारी डिक्रियाँ अथवा आदेश किसके द्वारा उलटने योग्य होते हैं-

a.  उच्च न्यायालय

b.  जिला न्यायालय

c.   उपरोक्त दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

51. जैसा प्रांतीय लघुवाद न्यायालय अधिनियम द्वारा प्रावधान है उसके सिवाए कथित अधिनियम के प्रावधानों के अधीन जारी एक डिक्री अथवा आदेश होगा -

a.  पुर्नविचार योग्य

b.  अंतिम

c.   अपील योग्य

d.  कोई डिक्री अथवा आदेश नहीं होगा

 

52. सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा के अंतर्गत न्यायालय की "धन सम्बन्धी अधिकारिता" का प्रावधान किया गया है?

a.  धारा 6

b.  धारा 5

c.   धारा 8

d.  धारा 7

 

53. सिविल प्रक्रिया संहिता की प्रथम अनुसूची में आदेश एवं नियम क्या हैं-

a.  किसी धारा के प्रावधान को अधिभावी नहीं कर सकता

b.  केवल दिशा निर्देश

c.   किसी धारा के प्रावधान पर अधिभावी होंगे

d.  न्यायालय उनके अनुपालन हेतु बाध्य नहीं हैं।

 

54. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 एक-

a.  एक प्रक्रियात्मक विधि है

b.  मौलिक विधि है।

c.   मौलिक तथा प्रतिक्रियात्मक का संयोजित विधि है

d.  निर्देशक विधि है

 

55. सिविल प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 1999 एवं 2002 किसकी सिफारिश पर अधिनियमित किए गए थे-

a.  मलिमथ समिति

b.  संथानम समिति

c.   ठक्कर समिति

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

56. सिविल प्रक्रिया संहिता की धाराओं को-

a.  उच्च न्यायालय अथवा राज्य विधानमंडल द्वारा संशोधित किया जा सकता है।

b.  वाद की सुनवाई कर रहे न्यायालय द्वारा संशोधित किया जा सकता है

c.   वाद के पक्षकारों द्वारा संशोधित किया जा सकता है

d.  संसद द्वारा संशोधित किया जा सकता है

 

57. सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा के अंतर्गत "सिविल प्रकृति का वाद" से सम्बन्धित प्रावधान किए गए हैं?

a.  धारा 12

b.  धारा 11

c.   धारा 10

d.  धारा 9

 

58. सभी सिविल न्यायालयों की विचारण करने की अधिकारिता होती हैं-

a. सिविल प्रकृति के सभी वादों की

b. सिविल प्रकृति के सभी वादों की, केवल उन वादों को छोड़कर जिसमें उनके संज्ञान को अभिव्यक्त अथवा विवक्षित तौर पर प्रतिबंधित किया गया है।

c. सिविल प्रकृति के सभी वादों की, केवल उन वादों को छोड़कर जिसमें उनके संज्ञान को अभिव्यक्त तौर पर प्रतिबंधित नहीं किया गया है

d. सिविल प्रकृति के सभी वादों की, केवल उन वादों को छोड़कर जिसमें उनके संज्ञान को विवक्षित तौर पर प्रतिबंधित नहीं किया गया है

 

59. व्यवहार प्रक्रिया संहिता में से कौन सा कथन सत्य है-

a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 9 के अनुसार न्यायालयों को उन वादों के सिवाय, जिनका उनके द्वारा संज्ञान मात्र अभिव्यक्त रूप से वर्णित है, सिविल प्रकृति के सभी वादों के विचारण की अधिकारिता होगी।

b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 9 के अनुसार, न्यायालयों को उन वादों के सिवाय, जिनका उनके द्वारा संज्ञांन अभिव्यक्त रूप से या विवक्षित रूप से वर्जित है, सिविल प्रकृति के सभी वादों के विचारण की अधिकारिता होगी।

c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 9 के अनुसार न्यायालयों को उन वादों के सिवाय जिनका उने द्वारा संज्ञान मात्र विवक्षित रूप से वर्जित है, सिविल प्रकृति के सभी वादों के विचारण की अधिकारिता होगी।

d. इनमें से कोई नहीं

 

60. क्या न्यायालय बिना किसी अपवाद के सिविल प्रकृति के सभी वादों पर विचारण कर सकता है?

a.  हाँ

b.  शायद

c.   नहीं

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

61. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 9 के अंतर्गत न्यायालय के रूप में किसी आपत्ति के अवधारण में न्यायालय को प्राथमिक तौर पर कहाँ उल्लिखित प्रकथन देखने होते हैं-

a.  वादपत्र लिखित कथन तथा जवाब में

b.  केवल अर्जी में

c.   केवल अर्जी तथा लिखित कथन में

d.  वादपत्र की वापसी हेतु आवेदन में किए गए प्राकथन

 

62. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत सिविल प्रकृति की शिकायत रखने वाले एक वादी को एक सिविल वाद लाने का अधिकार है, यदि इसका संज्ञान-

a.  विवक्षित तौर पर वर्जित हो

b.  अभिव्यक्त तौर पर वर्जित हो

c.   स्पष्ट एवं विवक्षित तौर पर वर्जित हो

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

63. निम्नलिखित में से कौन सा अधिकार सिविल प्रकृति का है-

a.  जुलूस निकालने का अधिकार

b.  किसी मंदिर में पूजा का अधिकार

c.   किसी मंदिर के चढ़ावे में हिस्से का अधिकार

d.  उपरोक्त सभी

 

64. निम्नलिखित वादों में से कौन सिविल प्रकृति का वाद है?

a.  पूजा के अधिकार सम्बन्धी वाद

b.  सिविल दोष के लिए क्षतिपूर्ति सम्बन्धी वाद

c.   संपत्ति के अधिकार सम्बन्धी वाद

d.  उपरोक्त सभी

 

65. निम्नलिखित में से कौन सा बाद सिविल प्रकृति का नहीं है?

a.  जाति निष्कासन के विरूद्ध वाद

b.  पूजा के अधिकार सम्बन्धी बाद

c.   धार्मिक जुलूस निकालने सम्बन्धी बाद

d.  आनुवांशिक पद के अधिकारों हेतु बाद

 

66. निम्नलिखित में से कौन सा वाद सिविल प्रकृति का नहीं है?

a.  पूजा के अधिकार सम्बन्धी वाद

b.  भागीदारी सम्बन्धी वाद

c.   कामन लॉ के अधिकारों सम्बन्धी वाद

d.  राजनीतिक प्रश्नों सम्बन्धी वाद

 

67. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निम्नलिखित में से गलत युग्म को खोजें-

a.  राजस्व न्यायालय - धारा 5

b.  प्रांतीय लघुवाद न्यायालय - धारा 7

c.   न्यायालयों की धन सम्बन्धी अधिकारिता - धारा 9

d.  प्रेसीडेन्सी लघुवाद न्यायालय - धारा 8

 

68. निम्नलिखित में से कौन सा वाद सिविल प्रकृति का नहीं है?

a.  पूजा के अधिकार सम्बन्धी वाद

b.  किराए. हेतु वाद

c.   आनुवांशिक पद के अधिकारों हेतु वाद

d.  विशुद्ध धार्मिक अधिकारों की संलिप्तता सम्बन्धी वादं

 

69. कौन सी कार्यवाहियों में सिविल न्यायालय कीअधिकारिता वर्जित है-

a.  आयकर अधिनियम के अंतर्गत आयकर वसूली

b.  प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम

c.   औद्योगिक विवाद अधिनियम

d.  उपरोक्त सभी

 

70. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 10 लागू नहीं होती जब पिछला वाद लंबित हो-

a.  किसी विदेशी न्यायालय में

b.  केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित अथवा संचालित भारत के बाहर किसी न्यायालय में,

c.   उसी न्यायालय में

d.  भारत के किसी अन्य न्यायालय में

 

71. निम्नलिखित में से कौन सा वाद सिविल प्रकृति का नहीं है?

a.  चढ़ावे के स्वैच्छिक भुगतान की वसूली हेतु वाद

b.  पूजा के अधिकार सम्बन्धी वाद

c.   आनुवांशिक पदों के अधिकारों हेतु वाद

d.  फ्रेंचाइजी अधिकारों हेतु बाद

 

72. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सा वाद सिविल प्रकृति का नहीं है-

a.  पूजा के अधिकार की घोषणा हेतु वाद

b.  किसी पद से जुड़ी गरिमा मात्र के प्रमाणन हेतु वाद

c.   सेवा अभिलेख में जन्मतिथि सही करने हेतु वाद

d.  किसी धार्मिक पद हेतु वाद

 

73. निम्नलिखित में से कौन सा वाद सिविल प्रकृति का नहीं है-

a.  किसी जाति के सदस्य द्वारा उसे जाति से बहिष्कृत करने सम्बन्धी वाद

b.  ऐसा वाद जिसमें संपत्ति के अधिकार का विरोध किया गया हो

c.   ऐसा वाद जिसमें किसी पद के अधिकार का विरोध किया गया हो

d.  किसी जाति के सदस्य द्वारा जातीय भोज के आमंत्रण से उसके बहिष्करण हेतु वाद

 

74. सिविल प्रक्रिया संहिता की कौन सी धारा रेस सब ज्यूडिस का नियम निर्धारित करती है?

a.  धारा 14

b.  धारा 10

c.   धारा 15

d.  धारा 13

 

75. जैसा कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 10 में प्रावधान है, "रेस सब ज्यूडिस" का नियम-

a.  पूर्ववर्ती वाद के विचारण को रोक देता है।

b.  पश्चातवर्ती वाद के विचारण को रोक देता है

c.   प्रत्येक परिस्थिति में पूर्ववर्ती तथा पञ्चचातवर्ती वादों की एकसाथ सुनवाई को रोक देता है।

d.  पश्चातवर्ती वाद की संस्थन को रोक देता है

 

76. निम्नलिखित में से किस शब्द का आशय "किसी न्यायालय के विचाराधीन होता है "?

a.  सब ज्यूडिस

b.  साइन क्वो नॉन

c.   रेस ज्यूडिकाटा

d.  डबल जियोपर्डी

 

77. किसी विदेशी न्यायालय में किसी वाद का लंबित रहना भारत में न्यायालयों को कार्यवाही के उसी मामले पर आधारित किसी वाद पर विचारण से रोक देगा-

a.  नहीं

b.  हाँ

c.   यह बाद की प्रकृति पर निर्भर करेगा

d.  निष्कर्ष बाद के मूल्यांकन पर घोषित किया जाएगा

 

78. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 10 कब लागू हो सकती है-

a.  पश्चातवर्ती बाद में मुद्दों के समाधान के पूर्व

b.  पश्चातवर्ती बाद में मुद्दों के समाधान के बाद

c.   पश्चातवर्ती बाद में लिखित कथन प्रस्तुत करने के पूर्व

d.  उपरोक्त सभी

 

79. धूलाभाई बनाम मध्य प्रदेश राज्य का वाद सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निम्नलिखित में से किससे 2 संबंधित है-

a.  अभिवचन से

b.  अन्तरिम आदेश से

c.   प्रथम अपील से

d.  सिविल न्यायालय के क्षेत्राधिकार से

 

80. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 10 के प्रावधान हैं-

a.  आज्ञापक

b.  विवेकाधीन

c.   निर्देशात्मक

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

81. सिविल प्रक्रिया की धारा 10 के अंतर्गत विहित निर्बंधनों के अनुसार निम्नलिखित में से क्या बाधित है-

a.  वाद का विचारण

b.  किसी वाद को संस्थित करना

c.   विवाधकों की विरचना

d.  किसी व्यादेश का दिया जाना

 

82. निम्नलिखित में से क्या रेस सब जूडिस नियम की प्रयोज्यता के लिए एक आवश्यक शर्त नहीं है?

a.  पश्चातवर्ती बाद में विवाद्यक विषय को पूर्ववर्ती वाद में अवश्य ही प्रत्यक्षतः और सारतः विवाद्य होना चाहिए

b.  दोनों वादो को एक ही पक्षकारों अथवा उनके प्रतिनिधियों के बीच होना आवश्यक है।

c.   ऐसे पक्षकारों को दोनों वादों में समान हक के अंतर्गत मुकद्मा लड़ रहे होना चाहिए

d.  दोनों ही वादों में विषय वस्तु और कार्यवाही का कारण समान होना चाहिये

 

83. '', जो एक किराएदार है, ने भवनस्वामी '' के विरूद्ध एक स्थाई व्यादेश हेतु एक बाद प्रस्तुत किया कि उसे समुचित विधिक प्रक्रिया के अलावा और किसी तरीके से निकाला किया जाए। उसने दलील दी कि '' बलपूर्वक उसे निकालने की योजना बना रहा है। उपरोक्त बाद के लंबित रहने के दौरान '' ने '' को बलपूर्वक निकालने का प्रयास किया। '' व्यादेश के लिए एक अन्य वाद प्रस्तुत करता है।

a.  विचाराधीन विषय का नियम लागू होगा

b.  दूसरा वाद पूर्व न्याय के कारण वर्जित है

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

84. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 10 के अंतर्गत 'विचाराधीन नियम' (रेस सब जूडिस) के मामले में

a.  व्यादेश जारी कर सकता है.

b.  एक रिसीवर नियुक्त कर सकता है

c.   अंतरिम आदेश पारित कर सकता है।

d.  उपरोक्त सभी

 

85. विचाराधीन के नियम की प्रयोज्यता हेतु सही अनिवार्य शर्त क्या है?

a.  दोनों वादों में पक्षकारों को एक ही हक के अंदर मुकदमा अवश्य कर रहे होना चाहिए

b.  पश्चातवर्ती वाद में विवाद्यक तथ्य का पिछले वाद में प्रत्यक्ष एवं मुख्य विषय अवश्य होना चाहिए

c.   उपरोक्त (a) तथा (b)

d.  (a) ही (b)

 

86. "विचाराधीन विषय (रेस सब जूडिस) शब्द का अर्थ है-

a.  निष्पादन का रोका जाना

b.  वाद का रोका जाना

c.   अपील का रोका जाना

d.  आवेदन का रोका जाना

 

87. पूर्व न्याय सम्बन्धी प्रावधान सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की किस धारा में किए गए हैं-

a.  धारा 11

b.  धारा 9

c.   धारा 12

d.  धारा 100

 

88. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 के प्रावधान किससे सम्बन्धित हैं?

a.  विदेशी निर्णय

b.  पूर्व न्याय

c.   विचाराधीन विषय

d.  गारनेशी आर्डर

 

89. पूर्व न्याय का नियम इस सिद्धांत पर आधारित है कि-

a.  एक ही कार्यवाही हेतु किसी को दो बार कष्ट नहीं होना चाहिए

b.  मुकदमे को समाप्त हो जाना चाहिए

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  (a) ही (b)

 

90. प्राङन्याय' का सिद्धान्त निम्न में से किस सूत्र पर आधारित है?

a.  क्यू फेसिट पर एलियम फेसिट पर सौ

b.  एक्स टर्पी क्रौजा नॉन-ओरिटर एक्सिओ

c.   इन्टरेस्ट रिपब्लिका अट सिट फिनिश लिटियम

d.  रिस्पान्डेंट सुपीरियर

 

91. पूर्व न्याय का सिद्धांत लागू होता है-

a.  केवल माध्यस्थ कार्यवाही पर

b.  वादों तथा निष्पादन कार्यवाहियों दोनों पर

c.   केवल बाद पर

d.  केवल निष्पादन कार्यवाही पर

 

92. पूर्व न्याय का सिद्धांत किन सिद्धांतों पर आधारित है

a.  यह राज्य के हित में है कि वाद समाप्त हो जाए

b.  एक न्यायिक निर्णय को अवश्य ही सही माना जाना चाहिए

c.   किसी व्यक्ति को एक ही कारण के लिए दोबारा तंग

नहीं किया जाना चाहिए

d.  उपरोक्त सभी

 

93. पूर्व न्याय का अर्थ है-

a.  यदि एक ही पक्षकारों के मध्य समान विवाधक वाले वाद का निर्णय हो चुका हो तो वाद पर विचारण करना

b.  एक ही पक्षकारों के मध्य समान विवाधक वाले पूर्ववर्ती वाद के लंबित रहने के दौरान वाद को रोका जाना

c.   आगे के वाद पर प्रतिबंध

d.  वाद के विचारण को व्यय किया जाना

 

94. पूर्व न्याय का सिद्धांत-

a.  निर्देशात्मक है.

b.  विवेकाधीन है

c.   आज्ञापक है

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

95. पूर्व न्याय लागू नहीं होता-

a.  किसी औपचारिक प्रतिवादी के विरूद्ध

b.  सह-प्रतिवादियों के बीच

c.   सह वादियों के बीच

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

96. पूर्व न्याय लागू नहीं होता-

a.  बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका में

b.  सह-वादियों के बीच

c.   सह-प्रतिवादियों के बीच

d.  जनहित याचिका में

 

97. संहिता का कौन सा प्रावधान 'आन्वयिक पूर्व न्याय' की अवधारणा से सम्बन्धित है?

a.  धारा 12

b.  धारा 13

c.   धारा 10

d.  धारा 11

 

98. किसी सीमित अधिकारिता युक्त सक्षम न्यायालय द्वारा सुना एवं अंतिम निर्णय दिया गया मुद्दा किसी ऐसे पश्चातवर्ती वाद, जिसपर उपरोक्त न्यायालय विचारण में सक्षम हो, में पूर्व न्याय का कार्य करेगा अथवा नहीं-

a.  हाँ

b.  नहीं

c.   उत्तर विवाधक की प्रकृति पर निर्भर करेगा

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

99. आन्वयिक पूर्व न्याय का नियम है-

a.  विशेष तौर पर सिविल प्रक्रिया संहिता में निहित

b.  सर्वोच्च न्यायालय के नियमों का एक भाग

c.   न्यायिक निर्वचन का एक उत्पाद

d.  समानता का नियम

 

100. निम्नलिखित में से क्या पूर्व एक आवश्यक शर्त नहीं है?

a.  पूर्ववर्ती तथा पश्चातवर्ती वादों में पक्षकार एक ही होने चाहिए

b.  पूर्ववर्ती तथा पश्चातवर्ती वादों की विषयवस्तु एक ही होनी चाहिए

c.   पूर्ववर्ती वाद की अंतिम सुनवाई एवं निर्णय सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा किया गया था

d.  पूर्ववर्ती वाद किसी न्यायालय के समक्ष अवश्य लंबित होना चाहिए

 

101. '' महंत के उत्तराधिकारी के रूप में मठ की संपत्ति के कब्जे हेतु वाद लाता है। उसके द्वारा उत्तराधिकार प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए जाने के कर दिया जाता है। '' मठ के कारण बाद खारिज प्रबंधक के रूप में पश्चातवर्ती वाद प्रस्तुत करता है। क्या ऐसा वाद प्रतिबंधित है?

a.  दूसरा वाद पूर्व न्याय के कारण वर्जित नहीं होगा

b.  प्रबंधक के रूप में

c.   दूसरा वाद विचाराधीन विषय के कारण वर्जित है

d.  दूसरा वाद पूर्व न्याय के कारण वर्जित होगा.

e.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

102. पूर्व न्याय का सिद्धांत

a.  निदेशात्मक है।

b.  विवेकाधीन है।

c.   आज्ञापक है।

d.  उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

103. अधिकारिताविहीन न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय अथवा निष्कर्ष -

a.  सभी परिस्थितियों के अंतर्गत पूर्व न्याय का कार्य कर सकता है

b.  पूर्व न्याय का कार्य नहीं कर सकता है।

c.   केवल कुछ परिस्थितियों में ही पूर्व न्याय का कार्य कर सकता है

d.  पूर्व न्याय की तरह कार्य कर अथवा नहीं भी कर सकता है

 

104. सह-प्रतिवादियों के बीच पूर्व न्याय के नियम को लागू किए जाने हेतु निम्नलिखित में से किस शर्त को पूरा किया जाना आवश्यक होता है?

a.  प्रतिवादियों के बीच हितों का कोई टकराव नहीं होना चाहिए

b.  एक से अधिक वाद में सह-प्रतिवादियों का होना आवश्यक है

c.   प्रतिवादियों के बीच के प्रश्न पर अंतिम निर्णय अवश्य हो चुका होना चाहिए

d.  प्रतिवादियों के बीच के प्रश्न पर अंतिम निर्णय हुआ होना आवश्यक है

 

105. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 में निहित हैं-

a.  आठ स्पष्टीकरण

b.  पाँच स्पष्टीकरण

c.   छह स्पष्टीकरण

d.  सात स्पष्टीकरण

 

106. एक निर्णय ऐसे व्यक्तियों जिन्हें स्पष्टतः पक्षकार के रूप में उल्लिखित किया गया हो, के विरूद्ध पूर्व न्याय के रूप में किस व्याख्या के आधार पर संचालित हो सकता है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 का स्पष्टीकरण 3

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 का स्पष्टीकरण 5

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 का स्पष्टीकरण 6

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 का स्पष्टीकरण 4

 

107. पूर्व न्याय के सिद्धांत की प्रयोज्यता हेतु निम्नलिखित में से कौन सा तथ्य अनिवार्य नहीं है-

a.  पूर्ववर्ती वाद किसी सक्षम न्यायालय द्वारा अवश्य सुना तथा निर्णीत किया गया होना चाहिए

b.  पूर्ववर्ती तथा पश्चातवर्ती वादों में पक्षकार एक ही होने चाहिए

c.   पूर्ववर्ती तथा पश्चातवर्ती वादों में विषयवस्तु एक ही होनी चाहिए

d.  पूर्ववर्ती वाद किसी सक्षम न्यायालय के समक्ष अवश्य लंबित होना चाहिए

 

108. पूर्व न्याय का सिद्धांत लागू किया जा सकता है-

a.  केवल पृथक कार्यवाही में

b.  एक ही कार्यवाही की पश्चातवर्ती अवस्था में

c.   कुछ बातों पर निर्भर करता है

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

109. पूर्व न्याय किसके बीच लागू हो सकता है-

a.  एक वादी तथा प्रतिवादी के बीच

b.  सह वादियों के बीच

c.   सह-प्रतिवादियों के बीच

d.  उपरोक्त सभी

 

110. 'आन्वयिक पूर्व न्याय' का सिद्धांत सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 के किस स्पष्टीकरण में निहित है-

a.  स्पष्टीकरण 5

b.  स्पष्टीकरण 4

c.   स्पष्टीकरण 2

d.  स्पष्टीकरण 3

 

111. पूर्व न्याय का सिद्धांत सह प्रतिवादियों के बीच भी प्रयोज्य होता है। निम्नलिखित में से कौन सी शर्त सह-प्रतिवादियों को बाध्य करने हेतु अनिवार्य शर्त नहीं है?

a.  सह- प्रतिवादियों द्वारा संयुक्त लिखित कथन अवश्य प्रस्तुत किया जाना चाहिए

b.  सम्बन्धित प्रतिवादियों के बीच हितों का टकराव अवश्य मौजूद होना चाहिए

c.   वादी के द्वारा दावा किए गए अनुतोष को प्रदान करने हेतु इस टकराव का निर्णय करना आवश्यक होना चाहिए

d.  प्रतिवादियों के बीच के प्रश्न पर अंतिम निर्णय अवश्य दिया गया होना चाहिए

 

112. पूर्व न्याय का सिद्धांत निम्न में से किस याचिका में लागू नहीं होता-

a.  बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका

b.  अधिकार पृच्छा

c.   प्रतिषेध याचिका

d.  परमादेश याचिका

 

113. पूर्व न्याय के नियम के संदर्भ में 'पश्चातवर्ती बाद' शब्द का अर्थ है एक ऐसा वाद जो-

a.  प्रश्नगत वाद के पूर्व निर्णीत हो चुका हो

b.  प्रश्नगत वाद के पूर्व संस्थापित हो चुका

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  (a) ही (b)

 

114. यह घोषणा हेतु एक वाद प्रस्तुत करता है कि वह के वारिस के रूप में किसी भूमि का उत्तराधिकारी है। वाद खारिज हो जाता है। विपरीत कब्जे के आधार पर पश्चातवर्ती वाद का दावा किया जाता है। पश्चातवर्ती वाद किस आधार पर वर्जित है-

a.  आन्यविक पूर्व न्याय

b.  वास्तविक पूर्व न्याय

c.   उपरोक्त में (a) अथवा (b)

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

115. वाद के विचारण के बाद न्यायालय ने पाया कि वाद पूर्व न्याय के सिद्धांत द्वारा बाधित था तथा उसने अन्य मुद्दों पर तो चर्चा की और ही उत्तर दिए। ऐसा करना क्या है-

a.  वैध

b.  न्यायोचित

c.   अवैध

d.  उचित

 

116. पूर्व न्याय के प्रावधान डिक्री के निष्पादन के मामले में भी लागू किए जाते हैं-

a.  प्रावधान निर्णीत ऋणी द्वारा स्पष्ट किए जाने पर लागू नहीं किए जाते

b.  यह कथन गलत है अथवा सही नहीं है

c.   यह कथन सही है।

d.  पूर्व न्याय के सिद्धांत केवल बाद में लागू किए जाते हैं

 

117. किसी संविदा के विनिर्दिष्ट पालन सम्बन्धी बाद को खारिज कर दिया गया है। क्या संविदा भंग किए जाने पर क्षतिपूर्ति हेतु लाया गया पश्चातवर्ती वाद पोषणीय है?

a.  नहीं

b.  हाँ, यदि वरिष्ठ / उपरी न्यायालय निर्देश दे

c.   उपरोक्त में कोई नहीं

d.  हाँ, न्यायालय की अनुमति से अगले वाद में

 

118. निम्नलिखित में से किस मामले में पूर्व न्याय प्रयोज्य नहीं होता-

a.  सहमति / समझौता डिक्री

b.  चूक में खारिज

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

119. वैयक्तिक अंतर्राष्ट्रीय विधि का सिद्धांत निहित है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 15 एवं 16

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 13 एवं 14

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 17 एवं 18

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 19 एवं 20

 

120. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 13 के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सा निर्णय निश्चयात्मक नहीं होगा -

a.  भारतीय विधि को भंग करने पर आधारित निर्णय

b.  अंतर्राष्ट्रीय विधि के विरूद्ध निर्णय

c.   गुणदोष पर आधारित निर्णय

d.  उपरोक्त सभी

 

121. किसी विदेशी निर्णय की वैधता को सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 13 के अंतर्गत किस न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है-

a.  केवल एक आपराधिक न्यायालय में

b.  केवल एक सिविल न्यायालय में

c.   सिविल तथा आपराधिक दोनों ही न्यायालयों में

d.  सिविल तथा आपराधिक दोनों ही न्यायालयों में नहीं दी जा सकती

 

122. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 13 के अंतर्गत किसी विदेशी निर्णय को किस आधार पर चुनौती दी जा सकती है-

a.  निर्णय घोषित करने वाले न्यायालय की सक्षमता के आधार पर

b.  कपट द्वारा हासिल किए गए होने के आधार पर

c.   भारत में लागू किसी विधि के भंग होने पर आधारित होने पर

d.  उपरोक्त सभी

 

123. एक विदेशी निर्णय-

a.  कभी अंतिम नहीं हो सकता

b.  अंतिम हो सकता है अगर पक्षकार एक हों, उस विषय पर उनमें सीधे तौर पर निर्णय हो चुका हो और जिस पर सक्षम न्यायालय ने निर्णय दिया हो

c.   अंतिम हो सकता है अगर पक्षकार एक हों और उस विषय पर उनमें परोक्ष रूप से निर्णय हो चुका हो

d.  अंतिम हो सकता है अगर पक्षकार एक हों और उस विषय पर उनमें सीधे तौर पर निर्णय हो चुका हो और जिसे सक्षम न्यायालय ने निर्णय नहीं दिया हो

 

124. सिविल प्रक्रिया संहिता की कौन सी धारा घोषित करती है कि किसी विदेशी निर्णय की एक सत्यापित प्रतिलिपि बताए गए दस्तावेज के प्रस्तुत किए जाने पर न्यायालय, जब तक अभिलेख पर इसके विपरीत साक्ष्य प्रतीत हो अथवा साबित किया जा चुका हो, यह अवधारित करेगा कि ऐसा निर्णय किसी सक्षम अधिकारिता युक्त न्यायालय द्वारा घोषित किया गया था?

a.  धारा 19

b.  धारा 14

c.   धारा 13

d.  धारा 20

 

125. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 14 अधिनियमित करती है कि, किसी विदेशी निर्णय की एक प्रमाणित प्रतिलिपि प्रस्तुत किए जाने पर न्यायालय यह अवधारित करेगा कि ऐसा निर्णय सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा पारित किया गया था। यह अवधारणा-

a.  तथ्यों की अखंडनीय अवधारणा है।

b.  विधि की अखंडनीय अवधारणा है।

c.   विधि की खंडनीय अवधारणा है।

d.  तथ्यों की खंडनीय अवधारणा है।

 

126. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 15 के अंतर्गत प्रत्येक 4- बाद संस्थित किया जाएगा-

a.  उच्चतर श्रेणी के न्यायालय में

b.  निम्नतर श्रेणी के न्यायालय में

c.   जिला न्यायालय में

d.  उपरोक्त सभी

 

127. किसी व्यक्ति अथवा संपत्ति के साथ किए गए अपकार्य की क्षतिपूर्ति सम्बन्धी एक बाद, जिसमें अपकार्य किसी एक न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता में किया गया हो तथा प्रतिवादी किसी अन्य न्यायालय की अधिकारिता में निवास करता हो-

a.  उस न्यायालय में संस्थित किया जा सकता है जिसकी स्थानीय अधिकारिता में अपकार्य किया गया हो

b.  उस न्यायालय में संस्थित किया जा सकता है जिसकी स्थानीय अधिकारिता में प्रतिवादी निवास करता हो

c.   वादी की राय पर उपरोक्त (a) अथवा (b) में एक में

d.  भारत में कही संस्थित किया जा सकता है।

 

128. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

a.  स्थावर संपत्ति की वसूली हेतु बाद उस न्यायालय में संस्थित किया जाएगा जिसकी अधिकारिता में संपत्ति स्थित हो

b.  किसी स्थावर संपत्ति के बंटवारे का बाद उस न्यायालय में संस्थित किया जाएगा जिसकी अधिकारिता में प्रतिवादी रहता हो अथवा लाभार्थ कार्य करता हो

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त दोनों नहीं

 

129. स्थावर संपत्ति के विभाजन हेतु वाद उस न्यायालय में संस्थित किया जाएगा जहाँ-

a.  जिला न्यायाधीश की अनुमति से किसी भी न्यायालय में

b.  वादी रहता हो

c.   वादी अपना पेशा संचालित करता हो

d.  विषयवस्तु स्थित हो

 

130. अलग-अलग न्यायालयों की अधिकारिता में स्थित स्थावर संपत्ति के सम्बन्ध में वाद की संस्थिति के स्थान का प्रावधान किया गया है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 20 में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 17 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 18 में

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 19 में

 

131. अलग-अलग शहरों में स्थित संपत्तियों के विभाजन का एक वाद कहाँ संस्थित हो सकता है-

a.  ऐसे शहर में संस्थित हो सकता है जहाँ अधिकांश संपत्तियाँ / अधिकतम मूल्य की संपत्तियाँ स्थित हों

b.  ऐसे शहर में संस्थित हो सकता है जहाँ प्रतिवादीगण अथवा उनमें से कोई एक निवास करता हो

c.   प्रत्येक संपत्ति के लिए पृथक बाद उस शहर में संस्थित होगा जहाँ संपत्ति स्थित हो

d.  ऐसे एक शहर में संस्थित हो सकता है जहाँ कोई भी संपत्ति स्थित हो

 

132. जहाँ न्यायालयों की अधिकारिता की स्थानीय सीमाएं अनिश्चित हों, वाद संस्थिति का स्थान सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा के अनुसार निर्धारित किया जाएगा

a.  धारा 17

b.  धारा 19

c.   धारा 18

d.  धारा 16

 

133. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 18 किस स्थान हेतु प्रावधान करती है-

a.  किसी स्थावर संपत्ति के सम्बन्ध में वाद की संस्थन का स्थान जहाँ न्यायालयों की अधिकारिता की स्थानीय सीमायें अस्पष्ट हों स्थावर

b.  किसी स्थावर संपत्ति के सम्बन्ध में वाद की संस्थन का स्थान जहाँ संपत्ति किसी एक न्यायालय की अधिकारिता में स्थित हो

c.   किसी स्थावर संपत्ति के सम्बन्ध में वाद की संस्थन का स्थान जहाँ संपत्ति अलग-अलग न्यायालयों की अधिकारिता में स्थित हो

d.  उपरोक्त सभी

 

134. मुम्बई निवासी मोहन दिल्ली में सोहन की पिटाई करता है। सोहन मोहन पर बाद ला सकता है-

a.  मुम्बई अथवा दिल्ली में से एक जगह

b.  केवल मुम्बई में

c.   केवल दिल्ली में

d.  इनमें से कोई नहीं

 

135. के कब्जे वाली एक स्थावर संपत्ति भोपाल में स्थित है और दोषकर्ता लाभ के लिए निजी तौर पर इंदौर में कार्य करता है। संपत्ति के प्रति दोष के लिए क्षतिपूर्ति प्राप्त करने सम्बन्धी बाद कहाँ संस्थित किया जाएगा-

a.  भोपाल अथवा इंदौर में एक जगह

b.  भोपाल में

c.   इंदौर में

d.  इनमें से कहीं नहीं

 

136. मुम्बई निवासी '' दिल्ली में '' के लिए अपमानजनक कथन प्रकाशित करता है। '' क्षतिपूर्ति के लिए '' के विरूद्ध वाद कहाँ संस्थित कर सकता है?

a.  दिल्ली अथवा मुम्बई किसी एक स्थान पर

b.  केवल दिल्ली में'

c.   केवल मुम्बई में

d.  जहाँ '' स्वयं निवास करता हो

 

137. वाद एक ऐसे न्यायालय में संस्थित किया जाएगा जिसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमा के अंदर-

a.  वादी रहता हो

b.  संविदा करने हेतु स्टैम्प पत्र खरीदे गए हों

c.   जहाँ बाद कारण आंशिक अथवा पूर्णरूपेण उत्पन्न

हुआ हो

d.  जहाँ वाद कारण पूर्णतः अथवा आंशिक तौर पर उत्पन्न हुआ हो

 

138. संविदा भंग की क्षतिपूर्ति हेतु एक बाद किस स्थान पर संस्थित किया जा सकता है-

a.  जहाँ संविदा संपन्न की जानी रही हो

b.  जहाँ वादी निवास करता हो

c.   जहाँ संविदा निष्पादित की गई हो

d.  उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

 

139. वाद संस्थिति के स्थान के प्रति आक्षेप को प्रथम न्यायालय में किसके मर्म के अंतर्गत स्वीकार किया जाएगा-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 20

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 22

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 21

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 21

 

140. निम्नलिखित में से क्या न्यायालय की अधिकारिता का आधार होता है?

a.  विषयवस्तु

b.  मौद्रिक मूल्य

c.   स्थानीय सीमाएं

d.  उपरोक्त सभी

 

141. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अंतर्गत क्षेत्रीय अधिकारिता के अभाव के आधार पर एक बाद में किसी डिक्री को अपास्त करने का अधिकार वर्जित है?

a.  धारा 21

b.  धारा 22

c.   धारा 21

d.  धारा 37

 

142. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 21 सम्बन्धित है-

a.  निजी एवं नवाधिकरण अधिकारिता से

b.  प्रोबेट एवं संक्षिप्त अधिकारिता से

c.   आर्थिक तथा क्षेत्रीय अधिकारिता से

d.  विषयवस्तु एवं निजी अधिकारिता से

 

143. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 21 के अनुसार वाद के स्थान के प्रति आक्षेप को ग्रहण किया जा सकता है?

a.  प्रथम न्यायालय के समक्ष यथासंभव शीघ्र अवसर पर

b.  किसी भी समय

c.   पहली बार अपील अथवा पुनर्विचार की अवस्था में ग्रहण किया जा सकता है

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

144. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत वाद स्थान सम्बन्धी अधिकारिता के प्रति आक्षेप को किसी अपीली अथवा पुनरीक्षण न्यायालय द्वारा तब तक स्वीकार नहीं किया जाएगा जब तक ऐसी आपत्ति को-

a.  यथासंभव शीघ्र अवसर पर किया गया हो

b.  और परिणामस्वरूप न्याय विफल होता रहा हो

c.   प्रथम न्यायालय में ग्रहण किया गया हो

d.  जब (a), (b) तथा (c) की शर्तें पूरी की गई हो

 

145. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अंतर्गत एक उच्च न्यायालय किसी वाद का अन्तरण कर सकता है?

a.  धारा 24

b.  धारा 15

c.   धारा 20

d.  धारा 12

 

146. धारा 24 के अंतर्गत वादों के अन्तरण का सामान्य अधिकार किसे दिया गया है-

a.  जिला न्यायालय

b.  उच्च न्यायालय

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  सर्वोच्च न्यायालय

 

147. सिविल प्रक्रिया संहिता के किंस प्रावधान के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय किसी वाद का अन्तरण कर सकता है?

a.  धारा 12

b.  धारा 15

c.   धारा 25

d.  धारा 20

 

148. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 25 निम्नलिखित में से किसके लिए प्रावधान करती है?

a.  जिला न्यायालय के वाद अन्तरण करने की शक्ति

b.  आयुक्त के वाद अन्तरण करने की शक्ति

c.   सर्वोच्च न्यायालय के वाद अन्तरण करने की शक्ति

d.  उच्च न्यायालय के वाद अन्तरण करने की शक्ति

 

149. वाद अथवा कार्यवाही को एक से दूसरे राज्य में अन्तरित करने का आदेश किसके द्वारा दिया जा सकता है?

a.  उच्च न्यायाल

b.  संसद

c.   केन्द्र सरकार

d.  सर्वोच्च न्यायालय

 

150. वाद की संस्थिति हेतु प्रावधान सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा में दिया गया है?

a.  धारा 28

b.  धारा 25

c.   धारा 26

d.  धारा 30

 

151. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 26 के अंतर्गत प्रत्येक वादपत्र में तथ्यों को किसके द्वारा साबित किया गया होना चाहिए-

a.  दस्तावेज

b.  मौखिक साक्ष्य

c.   शपथपत्र

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

152. न्यायालय किसी भी ऐसे व्यक्ति को हाजिर होने हेतु विवश कर सकता है जिसे सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 32 के अंतर्गत समन जारी हुए हों और इस प्रयोजन से जुर्माना लगा सकता है जिसकी अधिकतम राशि होगी-

a.  तीन हजार रुपए

b.  पाँच हजार रुपए

c.   पाँच सौ रुपए

d.  एक हजार रुपए

 

153. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 32 के अंतर्गत ऐसे व्यक्ति, जिसे सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 30 के अंतर्गत समन जारी किए जा चुके हों, को हाजिर होने हेतु विवश करने के लिए न्यायालय को अधिकार है-

a.  उसकी संपत्ति की कुर्की एवं बिक्री करने का

b.  अधिकतम 5,000 रुपयों का जुर्माना लगाने का

c.   उसकी गिरफ्तारी का वारंट जारी करने का

d.  उपरोक्त में कोई एक

 

154. सिविल प्रक्रिया संहिता में ब्याज का प्रावधान किस धारा में किया गया है-

a.  धारा 35

b.  धारा 35

c.   धारा 32

d.  धारा 34

 

155. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 34 के अंतर्गत न्यायालय डिक्री की तिथि से भुगतान की तिथि अथवा उससे पहले की किसी ऐसी तिथि तक के ब्याज का आदेश दे सकता है जो उसे उचित लगे। ऐसे ब्याज की प्रतिवर्ष अधिकतम दर क्या होगी-

a.  6 प्रतिशत

b.  12 प्रतिशत

c.   9 प्रतिशत

d.  10 प्रतिशत

 

156. "प्रत्येक पक्ष अपने खर्चे वहन करेगा" इस वाक्य का अर्थ यह है कि-

a.  दोनों पक्षों को खर्चों से वंचित किया जाना है।

b.  दोनों पक्ष एक दूसरे से खर्च प्राप्त करने के अधिकारी नहीं है

c.   दोनों पक्ष एक दूसरे से खर्च प्राप्त करने के अधिकारी हैं।

d.  दोनों पक्षों को खर्चों से वंचित नहीं किया जाना है

 

157. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत मिथ्या अथवा तंग करने वाले दावों अथवा प्रतिरक्षा के सम्बन्ध में प्रतिकरात्मक खर्चों का प्रावधान पहली बार संहिता की किस धारा के अंतर्गत किया गया है-

a.  धारा 35()

b.  धारा 34

c.   धारा 35

d.  धारा 35()

 

158. मिथ्या या तंग करने वाले दावे या प्रतिरक्षाओं के लिए प्रतिकरात्मक खर्चे के रूप में कोई भी न्यायालय जिस रकम के संदाय का आदेश करेगा, वह रकम

a.  चार हजार रुपये अथवा उसकी धन संबंधी अधिकारिता की परिसीमा तक की रकम में से, जो भी कम हो

b.  पांच हजार रुपये अथवा उसकी धन संबंधी अधिकारिता की परिसीमा तक की रकम में से, जो भी कम हो से अधिक रकम नहीं होगी

c.   दो हजार रुपये अथवा उसकी धन संबंधी अधिकारिता की परिसीमा तक की रकम में से, जो भी कम हो

d.  तीन हजार रुपये अथवा उसकी धन संबंधी अधिकारिता की परिसीमा तक की रकम में से जो भी कम हो

 

159. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 35 के अंतर्गत प्रतिकरात्मक खर्चों की अधिकतम सीमा क्या है-

a.  10,000 रुपए

b.  कोई सीमा नहीं

c.   3,000 रुपए

d.  6,000 रुपए

 

160. निम्नलिखित में से कौन सा आदेश अपील योग्य होता है?

a.  धारा 35 के अंतर्गत आदेश

b.  धारा 90 के अंतर्गत आदेश

c.   धारा 35 के अंतर्गत आदेश

d.  धारा 35 के अंतर्गत आदेश

 

161. सिविल प्रक्रिया संहिता में धारा 35 को 1976 के संशोधन अधिनियम द्वारा क्या प्रावधान करने हेतु जोड़ा गया है-

a.  सामान्य खर्चे

b.  प्रकीर्ण खर्चे

c.   क्षतिपूरक खर्चे

d.  बिलंब करने हेतु खर्चे

 

162. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 35 के अंतर्गत लागू किए गए खर्चे-

a.  वाद में पारित डिक्री में स्वीकार किए गए खर्चों में नहीं जोड़े जाएगें

b.  यदि भुगतान किया गया हो तो उसे व्यक्ति के विरूद्ध निष्पादनीय होंगे जिसपर खर्चे आरोपित किए गए हों

c.   वाद में पारित डिक्री में स्वीकार किए गए खर्चे में जोड़ दिए जाएगें

d.  केवल (b) एवं (c)

 

163. सिविल प्रक्रिया संहिता में डिक्री तथा आदेशों के निष्पादन को शासित करने वाले सिद्धांतों पर चर्चा कहाँ की गई है-

a.  धारा 148

b.  धारा 148 से 1538

c.   धारा 36 से 74 (मौलिक विधि) तथा आदेश 21 (प्रक्रिया सम्बन्धी प्रावधान)

d.  धारा 36 से 74 (प्रक्रिया सम्बन्धी प्रावधानं) तथा आदेश 21 (मुख्य)

 

164. डिक्री पारित करने वाले न्यायालय' को सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा में परिभाषित किया गया है-

a.  धारा 2(2)

b.  धारा 2(3)

c.   धारा 37

d.  धारा 38

 

165. किसी डिक्री का निष्पादन कर सकता है-

a.  जिला न्यायाधीश

b.  डिक्री पारित करने वाला न्यायालय अथवा वह न्यायालय जिसे निष्पादन हेतु डिक्री प्रेषित की गई हो

c.   आयुक्त

d.  डिक्री पारित करने वाला न्यायालय

 

166. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत किसी डिक्री का निष्पादन किसके द्वारा किया जा सकता है-

a.  जिलाधीश

b.  उप-जिलाधीश

c.   तहसीलदार

d.  डिक्री पारित करने वाला न्यायालय

 

167. निष्पादन हेतु किसी डिक्री को नहीं भेजा जा सकता

a.  भारत के बाहर केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित अधिकृत न्यायालय को

b.  किसी विदेशी न्यायालय को

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  (a) ही (b)

 

168. निम्नलिखित न्यायालय के समक्ष डिक्री के निष्पादन हेतु आवेदन प्रस्तुत की गई है-

a.  जिला न्यायालय

b.  प्रतिवादी के अस्थाई निवास वाले स्थानीय अधिकारिता के न्यायालय

c.   डिक्री पारित करने वाले न्यायालय

d.  वह न्यायालय जहाँ निष्पादन संपत्ति स्थानीय अधिकारिता के अंतर्गत उपलब्ध हो

 

169. डिक्री के निष्पादन हेतु आवेदन को एक से दूसरे न्यायालय में स्थानान्तरित किया जा सकता है यदि--

a.  किसी पक्ष को लगता हो कि न्यायालय की ओर से न्याय देने में विलंब किए जाने की संभावना है।

b.  यदि वादी उस न्यायालय की अधिकारिता से बाहर जा चुका हो जिसने डिक्री पारित की थी

c.   यहाँ शामिल नहीं है

d.  प्रतिवादी उस न्यायालय की अधिकारिता में निवास अथवा व्यापार करता हो जहाँ डिक्री को निष्पादन के लिए स्थानान्तरित किया जाना है

 

170. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 39 के प्रावधान-

a.  आज्ञापक हैं कि अनुज्ञेय

b.  आज्ञापक तथा विवेकाधीन हैं

c.   अनुज्ञात्मक हैं कि आज्ञापक

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

171. डिक्री का निष्पादन करने में अक्षम न्यायालय होता है-

a.  जिलाधीश का न्यायालय

b.  डिक्री पारित करने वाला न्यायालय

c.   न्यायालय जिसके पास इसे निष्पादन हेतु भेजा गया हो

d.  उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

 

172. जहाँ निष्पादन के लिए एक डिक्री को किसी अन्य राज्य के न्यायालय को प्रेषित किया जाना हो वहाँ इसे किसके द्वारा प्रेषित किया जाता है-

a.  डिक्री पारित करने वाला न्यायालय

b.  उच्च न्यायालय

c.   जिला न्यायालय

d.  उच्च न्यायालय की सहमति से डिक्री पारित करने वा न्यायालय

 

173. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है-न्यायालय, जिसने डिक्री पारित की है, इसे किसी अन्य सक्षम न्यायालय को स्थानान्तरित कर सकता है यदि -

a.  निर्णीत ऋणी पश्चातवर्ती न्यायालय की अधिकारिता में व्यापार संचालित करता हो

b.  निर्णीत ऋणी के पास पूर्ववर्ती न्यायालय की अधिकारिता में डिक्री की पूर्ति करने हेतु पर्याप्त कोई संपत्ति मौजूद हो किन्तु ऐसी संपत्ति पश्चातवर्ती न्यायालय की अधिकारिता में मौजूद हो

c.   डिक्री द्वारा पूर्ववर्ती न्यायालय की अधिकारिता के बाहर स्थित स्थावर संपत्ति की बिक्री का निर्देश दिया गया

d.  उपरोक्त सभी

 

174. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 39 के अंतर्गत 'सक्षम अधिकारिता' शब्द संदर्भित करता है-

a.  अन्तरिती न्यायालय की धन सम्बन्धी तथा क्षेत्रीय अधिकारिता को

b.  अन्तरिती न्यायालय की धन सम्बन्धी अधिकारिता को

c.   अन्तरिती न्यायालय की क्षेत्रीय अधिकारिता को

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

175. एक न्यायालय, जिसे निष्पादन हेतु डिक्री अन्तरित की गई हो, निष्पादन के समय?

a.  कुर्की का आदेश नहीं दे सकता

b.  डिक्री के अन्तरिती के कहने पर निष्पादन का आदेश नहीं दे सकता

c.   डिक्रीधारी निर्णीत ऋणी के विधिक प्रतिनिधि के विरूद्ध डिक्री का निष्पादन नहीं कर सकता

d.  निष्पादन हेतु डिक्री को किसी अन्य न्यायालय नहीं भेज सकता

 

176. सिविल प्रक्रिया संहिता में 'आज्ञापत्र' सम्बन्धी प्रावधान किस धारा में किए गए हैं-

a.  धारा 46

b.  धारा 40

c.   धारा 44

d.  धारा 45

 

177. डिक्री पारित करने वाले किसी न्यायालय द्वारा डिक्री के निष्पादन में सक्षम किसी न्यायालय को दिया गया आदेश अथवा निर्देश, ताकि वह निर्णीत ऋणी से सम्बन्धित किसी संपत्ति की कुर्की कर सके, को कहा जाता है-

a.  अनुऋणी आदेश

b.  मध्यवर्ती आदेश

c.   एकसाथ निष्पादन

d.  आज्ञापत्र

          

178. आज्ञापत्र का अर्थ है

a.  आदेश

b.  समादेश

c.   न्याय प्रार्थना / आदेश

d.  उपरोक्त सभी

 

179. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 46 के अंतर्गत आज्ञापत्र को जारी किया जा सकता है-

a.  निर्णीत ऋणी की संपत्ति की कुर्की करने हेतु

b.  स्थानीयअधिकारिता के बाहर निवास कर रहे व्यक्तियों समन की तामील करने हेतु,

c.   निर्णीत ऋणी पर एक वारंट की तामील करने हेतु

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

180. निम्नलिखित में से कौन सा प्रावधान डिक्री के उन्मोचन, तुष्टि इत्यादि से सम्बन्धित है?

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 47

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 46

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 48

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 49

 

181. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 47 के अंतर्गत निम्न में से कौन सा प्रश्न डिक्री के निष्पादन, उन्मोचन अथवा तुष्टि से सम्बन्धित नहीं है?

a.  क्या डिक्री कपटपूर्ण अथवा दुस्संधिपूर्ण है।

b.  क्या डिक्री निष्पादन योग्य है

c.   क्या डिक्री के निष्पादन में संपत्ति बिक्री योग्य है

d.  क्या डिक्री की पूर्ण तुष्टि हो चुकी है

 

182. डिक्री निष्पादन करने वाले न्यायालय के द्वारा निम्न में से किस प्रश्न की अवधारणा की जा सकती है-

a.  निष्पादन, उन्मोचन अथवा तुष्टि सम्बन्धी

b.  केवल निष्पादन सम्बन्धी

c.   केवल उन्मोचन सम्बन्धी

d.  केवल आंशिक भुगतान सम्बन्धी

 

183. डिक्री के निष्पादन की कार्यवाही के दौरान यदि प्रश्न यह उठता है कि क्या एक व्यक्ति किसी पक्षकार का प्रतिनिधि है अथवा नहीं तो ऐसे प्रश्न की अवधारणा किसके द्वारा की जाएगी-

a.  डिक्री का निष्पादन करने वाले न्यायालय द्वारा

b.  डिक्री पारित करने वाले न्यायालय द्वारा

c.   अपीली न्यायालय द्वारा

d.  एक पृथक वाद द्वारा

 

184. एक निष्पादक न्यायालय निम्नलिखित में से किन प्रश्नों के सम्बन्ध में अवधारणा नहीं कर सकता?

a.  डिक्री के संशोधन

b.  डिक्री के निष्पा

c.   डिक्री के उन्मोचन

d.  डिक्री की तुष्टि

 

185. जब एक निर्णीत ऋणी डिक्री की पूर्ण तुष्टि के पूर्व मर जाता है तब-

a.  डिक्री का निष्पादन सभी विधिक प्रतिनिधियों के विरूद्ध किया जा सकता है

b.  डिक्री का निष्पादन विधिक प्रतिनिधियों के विरूद्ध नहीं  किया जा सकता

c.   डिक्री का निष्पादन निर्णीत ऋणी के विधिक प्रतिनिधियों में से किसी भी एक के विरूद्ध पूरी तरह से किया जा सकता है

d.  डिक्री का निष्पादन डिक्री धारक की इच्छानुसार विधिक प्रतिनिधियों की किसी भी संख्या के विरूद्ध किया जा सकता है

 

186. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निम्नलिखित में से विधिक प्रतिनिधि का सही अर्थ क्या है?

a.  कोई व्यक्ति जो मृतक की संपदा में दखल रखता हो तथा जहाँ एक पक्षकार उस व्यक्ति पर प्रतिनिधिक हैसियत में वाद प्रस्तुत करता है जिसमें इस प्रकार वादप्रस्तुत किए जाने वाले पक्ष की मृत्य पर संपदा न्यागत होती हो

b.  एक व्यक्ति जो विधि के अंतर्गत मृतक की संपदा का प्रतिनिधित्व करता हो.

c.   कोई व्यक्ति जो मृतक की संपदा में दखल रखता हो तथा जहाँ किसी पक्षकार पर प्रतिनिधिक हैसियत में वादप्रस्तुत किए गया हो, तो वह व्यक्ति जिसपर इस प्रकार वाद प्रस्तुत किए गए पक्षकार की मृत्यु होने पर संपदा न्यागत होती हो

d.  उपरोक्त सभी

 

187. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 51 के अंतर्गत निम्न में से कौन डिक्री के निष्पादन को लागू करने की विधि नहीं है?

a.  एक आयोग नियुक्त करने के द्वारा

b.  एक रिसीवर नियुक्त करने के द्वारा

c.   बिना कुर्की के बिक्री द्वारा

d.  गिरफ्तारी तथा निरुद्धि द्वारा

 

188. संहिता की धारा 51 के अनुसार निम्नलिखित में से न्यायालय किसके द्वारा एक डिक्री का निष्पादन आदेश जारी नहीं कर सकता?

a.  विशिष्ट तौर पर डिक्री की गई किसी संपत्ति की परिदान द्वारा

b.  संपत्ति की कुर्की तथा बिक्री द्वारा

c.   रिसीवर नियुक्त करने के द्वारा

d.  पक्षकार पर समन तामील द्वारा

 

189. जहां जयपत्र किसी ऐसी अविभक्त संपदा के विभाजन के लिए है, जो शासन को राजस्व के भुगतान हेतु निर्धार्य है, वहां संपदा का विभाजन संबंधित तत्समय प्रवृत्त विधि के अनुसार किसके द्वारा किया जायेगा?

a.  कलेक्टर द्वारा

b.  नायब तहसीलदार द्वारा

c.   नाजिर द्वारा

d.  न्यायालय द्वारा नियुक्त कमिश्नर द्वारा

 

190. सिविल प्रक्रिया संहिता में डिक्री के निष्पादन हेतु किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का प्रावधान है-

a.  धारा 55 के अंतर्गत

b.  धारा 53 के अंतर्गत

c.   धारा 54 के अंतर्गत

d.  धारा 56 के अंतर्गत

 

191. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 51 के अनुसार न्यायालय निम्नलिखित में से किन तरीकों से डिक्री के निष्पादन का आदेश नहीं दे सकता?

a.  दांपत्य अधिकारों की पुर्नस्थापना हेतु डिक्री, पति/पत्नी में से किसी को सिविल कारावास में भेजने द्वारा

b.  संपत्ति की कुर्की एवं बिक्री द्वारा

c.   एक रिसीवर नियुक्त करने के द्वारा

d.  विशिष्ट रूप से डिक्री की गई संपत्ति की परिदान द्वारा

 

192. सिविल प्रक्रिया संहिता की कौन सी धारा धन सम्बन्धी किसी डिक्री के निष्पादन में महिलाओं की गिरफ्तारी अथवा निरोध का निषेध करती है?

a.  धारा 56

b.  धारा 55

c.   धारा 59

d.  धारा 60

 

193. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत किस विवाद से सम्बन्धित किसी डिक्री के सम्बन्ध में किसी महिला को गिरफ्तार तथा सिविल कारावास में निरूद्ध नहीं किया जाएगा-

a.  धन-भुगतान सम्बन्धी विवाद

b.  पारिवारिक विवाद

c.   वैवाहिक विवाद

d.  संतानों की वैधता सम्बन्धी विवाद

 

194. महिला के विरुद्ध पारित धन के संदाय की डिक्री निष्पादित नहीं की जा सकती है-

a.  यदि महिला की मृत्यु हो जाती है तो उसके विधिक प्रतिनिधियों के विरुद्ध कार्यवाही द्वारा

b.  उसकी गिरफ्तारी और कारागार से निरोध द्वारा।

c.   उसकी सम्पत्ति की कुर्की तथा विक्रय द्वारा

d.  एक प्रापक की नियुक्ति द्वारा |

 

195. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 56 किसी डिक्री के निष्पादन में किसकी गिरफ्तारी अथवा सिविल कारावास में निरोध को स्पष्टतौर पर प्रतिबंधित करती है-

a.  किसी रोगी व्यक्ति की

b.  एक महिला की

c.   एक अवयस्क की

d.  उपरोक्त सभी

 

196. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निम्नलिखित में से किस आधार पर न्यायालय द्वारा किसीनिर्णीत ऋणी" के विरूद्ध गिरफ्तारी के वारंट को रद्द किया जा सकता है?

a.  अपने पुत्र के विवाह में शामिल होने

b.  गंभीर बीमारी

c.   लोकसभा चुनावों में मतदान

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

197. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 58 के अंतर्गत किसी व्यक्ति, जो निरूद्ध हो, को उसके वारंट में उल्लिखित धनराशि का भुगतान करने पर रिहा कर दिया जाएगा। यह भुगतान किसे किया जाएगा-

a.  सिविल कारागार के भारसाधक अधिकारी को

b.  न्यायालय द्वारा नियुक्त अधिकारी को

c.   न्यायालय को

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

198. जहाँ डिक्री 5000 रुपए से अधिक के भुगतान से सम्बन्धित हो सिविल कारावास की अवधि होगी?

a.  एक वर्ष से अनधिक

b.  तीन महीने से अनधिक

c.   छह महीने से अनधिक

d.  नौ महीने से अनधिक

 

199. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 58 के अनुसार किस धनराशि के भुगतान के लिए जारी डिक्री के मामले में सिविल कारावास का आदेश नहीं दिया जा सकता-

a.  अधिकतम 2,000 रुपए

b.  अधिकतम 500 रुपए

c.   अधिकतम 1,000 रुपए

d.  अधिकतम 1,500 रुपए

 

200. जहाँ किसी निर्णीत ऋणी को सिविल कारावास में भेज दिया गया हो तो उसे वहाँ से रिहा किया जा सकता है-

a.  राज्य सरकार द्वारा किसी छूत का रोग होने पर

b.  राज्य सरकार द्वारा किसी गंभीर संक्रामक रोग होने पर

c.   सुपुर्द करने वाले न्यायालय अथवा उसके किसी वरिष्ठ न्यायालय द्वारा गंभीर रोग के आधार पर

d.  उपरोक्त सभी

 

201. धन के भुगतान सम्बन्धी एक डिक्री के निष्पादन में एक निर्णीत ऋणी को गिरफ्तार किया जाता है और निर्णीत ऋणी डिक्री की राशि तथा खर्चों का भुगतान गिरफ्तार करने वाले अधिकारी को कर देता है। ऐसा अधिकारी-

a.  तुरंत उसे रिहा कर देगा

b.  निर्णीत ऋणी को सिविल कारावास भेज देगा

c.   निर्णीत ऋणी को न्यायालय ले जाएगा

d.  उससे प्रतिभूति लेकर उसे रिहा कर देगा

 

202. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 60 के अधीन किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति की कुर्की तथा बिक्री नहीं की जा सकती?

a.  निजी सेवाओं को कोई अधिकार

b.  पारक्रम्य विलेख

c.   आवास अथवा अन्य इमारतें

d.  सरकारी प्रतिभूतियाँ

 

203. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति की कुर्की नहीं की जा सकती?

a.  भूमि

b.  बहीखाते

c.   बैंक नोट

d.  चेक

 

204. किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति कुर्की एवं विक्रय हेतु दायी होती है?

a.  भावी भरण-पोषण का अधिकार

b.  बहीखाते

c.   एक वचनपत्र

d.  निजी सेवा के अधिकार

 

205. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति कुर्की एवं विक्रय हेतु दायी होती है?

a.  वचनपत्र

b.  आवश्यक पहनने के वस्त्र

c.   शिल्पकारों के औजार

d.  बहीखाते

 

206. किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से किस संपत्ति की कुर्की नहीं की जा सकती-

a.  पेंशन

b.  वचनपत्र

c.   आवास अथवा अन्य भवन

d.  हुण्डी

 

207. बहीखाते-

a.  किसी डिक्री के निष्पादन में कुर्की एवं विक्रय हेतु दायी होते हैं

b.  विधि की दृष्टि में कोई साक्ष्य नहीं होते

c.   किसी डिक्री के निष्पादन में कुर्की एवं बिक्री हेतु दायी नहीं होते हैं

d.  किसी वाद के निपटारे में इकलौते साक्ष्य हो सकते हैं।

 

208. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 60 के अंतर्गत किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति कुर्की एवं विक्रय हेतु दायी होती है?

a.  बही खाते

b.  छात्रवृत्ति एवं पेंशन

c.   बैंक नोट, चेक, विनिमय पत्र

d.  खाना पकाने के बर्तन, बिस्तर एवं पहनने के वस्त्र

 

209. क्या पहनने के आवश्यक वस्त्र किसी डिक्री के निष्पादन हेतु कुर्की करने के दायी होते हैं?

a.  न्यायालय के विवेक पर है

b.  उपरोक्त में कोई नहीं

c.   हाँ

d.  नहीं

 

210. भरण पोषण की किसी डिक्री के निष्पादन में किसी व्यक्ति के वेतन को किस सीमा तक कुर्क किया जा सकता है-

a.  दो-तिहाई

b.  आधा

c.   एक-चौथाई-

d.  एक-तिहाई

 

211. किसी निर्णीत ऋणी की निम्नलिखित में कौन सी संपत्ति कुर्की के लिए दायी होती है-

a.  बहीखाते

b.  निगमों में शेयर एवं सरकारी प्रतिभूतियाँ

c.   किसी महिला के धार्मिक उपयोग सम्बन्धी निजी आभूषण

d.  कलाकारों के औजार तथा पशु एवं बीज का अनाज

 

212. किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति कुर्की एवं विक्रय हेतु दायी नहीं होती-

a.  हुंडियाँ

b.  विद्युत

c.   धन

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

213. कुर्क की जा सकने वाली संपत्तियाँ हैं-

a.  छात्रवृत्ति एवं सरकार द्वारा पेंशनभोगी को दी गई ग्रेच्यूटी () बहीखाते

b.  बहीखाते

c.   धन, बैंक नोट, चेक, विनिमय पत्र, हुंडियाँ, वचनपत्र

d.  उपरोक्त सभी

 

214. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से कौन सी संपत्ति कुर्की अथवा विक्रय हेतु दायी होती है?

a.  वचनपत्र

b.  बहीखाते

c.   क्षतिपूर्तियों के लिए वाद लाने का अधिकार

d.  व्यक्तिगत सेवा का अधिकार

 

215. भरण-पोषण की किसी डिक्री के निष्पादन में किसी व्यक्ति के वेतन को किस सीमा तक कुर्क किया जा सकता है?

a.  वेतन का 2/3

b.  वेतन का 1/3

c.   पहला एक हजार रुपया तथा शेष का 1/3

d.  पहला एक हजार रुपया तथा शेष का 2/3

 

216. जहां डिक्री 5,000 (पांच हजार) रुपये से अधिक धन के संदाय के लिए है, वहां सिविल कारागार में निरोध की अवधि-

a.  तीन मास

b.  छः सप्ताह

c.   एक मास

d.  छः सप्ताह

 

217. किसी डिक्री के निष्पादन में निम्नलिखित में से किस प्रकार की संपत्ति कुर्की एवं विक्रय हेतु दायी नहीं होती है?

a.  भूमि

b.  निजी आभूषण, जिन्हें किसी महिला से अलग नहीं किया जा सकता

c.   धन

d.  शेयर

 

218. किसी संपत्ति की कुर्की के वादनिजी अलगाव-

a.  डिक्रीधारक की इच्छा पर शून्यकरणीय होता है।

b.  निर्णीत ऋणी की इच्छा पर शून्यकरणीय होता है

c.   आरम्भतः शून्य होता है

d.  कुर्की के अंतर्गत प्रयोज्य सभी दावों के विरूद्ध शून्य होता है

 

219. जहाँ किसी डिक्री के निष्पादन में एक स्थावर संपत्ति को बेचा गया हो तथा ऐसी बिक्री पूरी हो चुकी हो, तब संपत्ति को क्रेता में कब से निहित माना जाएगा-

a.  जब बिक्री पूरी हो गई हो

b.  जब संपत्ति बेची गई हो

c.   जम क्रेता कब्जा प्राप्त कर ले

d.  न्यायालय पर निर्भर करता है

 

220. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निष्पादन के लिए निम्नलिखित में से कौन आवेदन प्रस्तुत नहीं कर सकता-

a.  एक डिक्री धारक

b.  विधिक प्रतिनिधि यदि डिक्री धारक की मृत्यु हो चुकी हो

c.   डिक्रीधारक के अधीन होने का दावा करने वाला व्यक्ति 969

d.  निर्णीत ऋणी

 

221. धन सम्बन्धी डिक्री का निष्पादन किस प्रकार किया जा सकता है-

a.  निर्णीत ऋणी की किसी संपत्ति की कुर्की तथा बिक्री द्वारा

b.  निर्णीत ऋणी की गिरफ्तारी एवं कारावास में अनिश्चित अवधि की निरुद्धि द्वारा

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  (a) ही (b)

 

222. जहाँ सरकार के राजस्व के भुगतान हेतु आकलन की गई किसी अविभाजित संपदा के बँटवारे की डिक्री हो वहाँ संपदा का बँटवारा तत्कालीन प्रवर्तित विधि के अधीन किसके द्वारा किया जाएगा

a.  नायब तहसीलदार

b.  नाजिर

c.   जिलाधीश

d.  न्यायालय द्वारा नियुक्त आयुक्त

 

223. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 75 सम्बन्धित है

a.  अपील के अधिकार से

b.  पूर्व न्याय से

c.   समन जारी करने की शक्ति

d.  कमीशन निकालने की न्यायालय की शक्ति से

 

224. एक सिविल न्यायालय निम्नलिखित में से किस मामले में कमीशन नहीं निकाल सकता-

a.  बँटवारे के निष्पादन हेतु

b.  किसी डिक्री के निष्पादन हेतु

c.   किसी व्यक्ति के परीक्षण हेतु

d.  बहीखातों के परीक्षण हेतु

 

225. न्यायालय किस हेतु कमीशन नहीं निकाल सकता

a.  किसी लिपिक वर्गीय कार्यवाही संपन्न करने हेतु

b.  किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी हेतु

c.   किसी व्यक्ति के परीक्षण हेतु

d.  बहीखातों के परीक्षण हेतु

 

226. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत एक न्यायालय कमीशन नहीं निकाल सकता-

a.  किसी अंतःकालीन लाभ अथवा क्षति की राशि तय करने हेतु

b.  मुद्दों के निर्धारण हेतु

c.   किसी विवादग्रस्त मामले को स्पष्ट करने हेतु

d.  किसी संपत्ति के बाजार मूल्य को तय करने हेतु

 

227. निम्न में से किस प्रयोजन हेतु कमीशन नहीं निकाला जाता?

a.  किसी पक्ष को न्यायालय में हाजिर होने तथा दावे का जवाब देने का आदेश देने हेतु

b.  बँटवारा करने हेतु

c.   स्थानीय अन्वेषण करने हेतु

d.  किसी व्यक्ति के परीक्षण हेतु

 

228. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 75 के अंतर्गत, न्यायालय एक कमीशन नहीं निकाल सकता-

a.  संपत्ति की बिक्री करने हेतु जो न्यायालय की अभिरक्षा में नहीं है

b.  किसी वैज्ञानिक, तकनीकी अथवा विशेषज्ञता युक्त अन्वेषण संपन्न करने हेतु

c.   किसी व्यक्ति के परीक्षण हेतु

d.  बंटवारे हेतु

 

229. कथन को पूर्ण करें - एक न्यायालय कमीशन जारी नहीं कर सकता है-

a.  साक्ष्य एकत्रित करने के लिए।

b.  लेखाओं की परीक्षा या समायोजन के लिए।

c.   किसी व्यक्ति की परीक्षा के लिए।

d.  बंटवारे के लिए।

 

230. यह व्यवस्था कि केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तुत एक वादमें वादी के रूप में नामित किया जाने वाला प्राधिकरण "भारत संघ" होगा, का प्रावधान किस धारा में किया गया है-

a.  77

b.  79

c.   78

d.  79

 

231. जैसा कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 79 में प्रावधान है, केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तुत वादकिस नाम से संस्थित किए जाने चाहिए-

a.  भारत के प्रधानमंत्री

b.  भारत संघ

c.   भारत के राष्ट्रपति

d.  भारत के महान्यायवादी

 

232. सरकार अथवा सरकारी पदासीन किसी लोकसेवक के विरूद्ध वादसंस्थित करने हेतु सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के अंतर्गत नोटिस की अवधि क्या होती है-

a.  1 माह

b.  15 दिन

c.   3 माह

d.  2 माह

 

233. सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा के अंतर्गत केन्द्र अथवा राज्य सरकार के विरूद्ध वादसंस्थित करने हेतु कम से कम दो महीने पूर्व नोटिस दिए जाने की आवश्यता सम्बन्धी प्रावधान किया गया है?

a.  धारा 80

b.  धारा 81

c.   धारा 50

d.  धारा 51

 

234. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

a.  तात्कालिक अथवा त्वरित अनुतोष की असंलिप्तता वाला कोई भी वाद मात्र दो महीने की नोटिस दिए बिना केन्द्र सरकार के विरूद्ध संस्थित नहीं किया जा सकता

b.  भारत संघ के विरूद्ध एक डिक्री को तबतक निष्पादित नहीं किया जा सकता जब तक यह तीन माह की अवधि पूरी नहीं हो जाती है।

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों सही हैं

d.  उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों गलत हैं।

 

235. रेलवे से सम्बन्धित एक वाद में वादी अथवा प्रतिवादी के रूप में नामित किया जाने वाला प्राधिकारी कौन होगा-

a.  जिले का जिलाधीश

b.  भारत संघ

c.   रेलवे का महाप्रबंधक

d.  केन्द्र सरकार का कोई सचिव

 

236. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के प्रावधान--

a.  विवेकाधीन हैं

b.  उपरोक्त में कोई नहीं

c.   आज्ञापक हैं

d.  निर्देशात्मक हैं

 

237. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन सा एक कथन सही है?

a.  न्यायालय की अनुमति से नोटिस तामील किए बिना एक वादसंस्थित किया जा सकता है।

b.  अत्यावश्यक अथवा तुरन्त अनुतोष के मामले में जहाँ वाद को बिना नोटिस तामील किए संस्थित करने की अनुमति दी जा चुकी हो, अंतरिम अथवा अन्यथा एकतरफा अनुतोष प्रदान किया जा सकता है

c.   धारा 80 के अंतर्गत नोटिस सम्बन्धी आवश्यकता के अनुपालन के बिना कोई वादसंस्थित नहीं किया जा सकता

d.  किसी अत्यावश्यक अथवा तुरन्त अनुतोष के मामले में न्यायालय की अनुमति से नोटिस तामील किए बिना एक वाद संस्थित किया जा सकता है।

 

238. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के अंतर्गत नोटिस आज्ञापक होती है जब-

a.  वाद किसी सहकारी समिति के विरूद्ध हो

b.  वाद सरकार के विरूद्ध हो

c.   वाद ग्राम पंचायत के विरूद्ध हो

d.  वाद नगर निगम के विरूद्ध हो

 

239. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के प्रावधान किस पर बाध्यकारी हैं-

a.  जिला जज के न्यायालय पर

b.  उच्च न्यायालय पर

c.   सिविल न्यायाधीश के न्यायालय पर

d.  उपरोक्त सभी पर

 

240. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 किससे सम्बन्धित है?

a.  सरकार के विरूद्ध वाद संस्थन के लिए नोटिस कीआवश्यकता से

b.  खर्चे सम्बन्धी आदेश से

c.   विदेशी निर्णय से,

d.  व्यादेश से

 

241. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के अंतर्गत लिखित नोटिस दी जानी चाहिये-

a.  केन्द्र सरकार के विरूद्ध मामले में भारत के राष्ट्रपति को

b.  रेलवे की संलिप्तता वाले मामले में केन्द्र सरकार के विरूद्ध वाद में रेल सचिव को

c.   सरकार के विरूद्ध मामले में केन्द्र सरकार के सचिव को

d.  (a) तथा (c) दोनों

 

242. जहां भारत संघ अथवा किसी राज्य के विरुद्ध संबंधित अधिकारी की अधिकारिक हैसियत के अंतर्गत किसी कार्य हेतु धारा 82, दीवानी प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत कोई आज्ञप्ति पारित की जाती है, तो ऐसी किसी आज्ञप्ति पर निष्पादन तब तक जारी नहीं किया जायेग जब तक आज्ञप्ति निम्न में से वर्णित अवधि के लिए अतुष्ट हो-

a.  आज्ञप्ति की तारीख से एक वर्ष

b.  आज्ञप्ति की तारीख से दो वर्ष

c.   आज्ञप्ति की तारीख से तीन महीना

d.  आज्ञप्ति की तारीख से छः महीना

 

243. जहाँ भारत संघ अथवा किसी राज्य के विरूद्ध सम्बद्ध अधिकारी की आधिकारिक क्षमता में किए गए कार्य के विरूद्ध एक डिक्री पारित की गई हो, सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के अंतर्गत, ऐसी किसी भी डिक्री के निष्पादन आदेश तबतक जारी नहीं किए जाएगें जबतक ऐसी डिक्री न्यूनतम निर्धारित अवधि पूरी नहीं हो जाती है। यह अवधि क्या है?

a.  डिक्री की तिथि से 1 वर्ष

b.  डिक्री की तिथि से 2 वर्ष

c.   डिक्री की तिथि से 3 माह

d.  डिक्री की तिथि से 6 माह

 

244. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अधीन एक राजदूत पर वादसंस्थित किया जा सकता है?

a.  धारा 88

b.  उस पर वादनहीं लाया जा सकता

c.   धारा 86

d.  धारा 88

 

245. एक व्यक्ति किसी विदेशी देश के विरूद्ध वाद ला सकता है-

a.  केंन्द्र अथवा राज्य सरकार की सहमति से

b.  भारत के राष्ट्रपति की सहमति से

c.   राज्य सरकार की सहमति से

d.  केवल केन्द्र सरकार की सहमति से

 

246. एक विदेशी सरकार पर-

a.  इस प्रतिबन्ध के साथ मुकदमा दायर हो सकता है कि केन्द्र सरकार ने मौखिक सहमति न्यायालय को प्रदान किया हो

b.  इस प्रतिबन्ध के साथ मुकदमा दायर हो सकता है अगर केन्द्र सरकार के सचिव ने लिखित सहमति का सर्टिफिकेट जारी किया हो।

c.   मुकदमा नहीं चलाया जा सकता

d.  दीवानी न्यायालयों की शक्तियों पर बिना किसी बन्धन के मुकदमा चलाया जा सकता है।

 

247. निम्नलिखित में से क्या सही है-

a.  भारत में रह रहे अन्यदेशीय शत्रु कभी वाद प्रस्तुत नहीं कर सकते

b.  भारत में रह रहे अन्यदेशीय शत्रु उस राज्य सरकार की अनुमति से वाद प्रस्तुत कर सकते हैं जिसकी अधिकारिता में वे निवास कर रहे हों

c.   अन्यदेशीय शत्रु किसी भी न्यायालय में वाद प्रस्तुत कर सकते हैं

d.  भारत में रह रहे अन्यदेशीय शत्रु केन्द्र सरकार की अनुमति से वाद प्रस्तुत कर सकते हैं।

 

248. अन्तराभिवाची वाद सम्बन्धी प्रावधान किस धारा में शामिल किया गया है?

a.  87

b.  89

c.   90

d.  88

 

249. अन्तराभिवाची वाद सम्बन्धी प्रावधान निहित हैं-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश XXXIV में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 88 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश XXXV में

d.  उपरोक्त (b) तथा (c) दोनों में

 

250. अन्तराभिवाची वादसंस्थित किया जा सकता है जब-

a.  किसी प्लीडर (अधिवक्ता) के विरूद्ध कोई दावा हो

b.  दावा संपत्ति में दो अथवा अधिक अनाधिकार प्रवेशकर्ताओं के विरूद्ध स्थापित किया गया हो

c.   वाद दो अथवा अधिक निर्धन व्यक्तियों के विरूद्ध हो

d.  ऐसा दावा दो अथवा अधिक प्रतिवादियों के विरूद्ध प्रस्तुत किया गया हो जिन्होंने किराएदार के द्वारा वास्तविक भवनस्वामी को खोजने के लिए संपत्ति की परस्पर विरोधी स्वामित्वों को स्थापित किया हो

 

251. किसी 'अन्तराभिवाची वाद' के लिए निम्न में से कौन सी शर्त आवश्यक नहीं है?

a.  एक वाद अवश्य लंबित होना चाहिए जिसमें ऋण अथवा विवादित संपत्ति के लिए परस्पर विरोधी दावेदारों के अधिकारों का समुचित अधिनिर्णयन किया जा सके

b.  कोई ऋण अथवा विवादित संपत्ति अवश्य मौजूद होना चाहिए

c.   ऋण अथवा विवादित संपत्ति को एक-दूसरे के विरूद्ध दावा करने वाले दो अथवा अधिक व्यक्ति अवश्य मौजूद होने चाहिए

d.  उपरोक्त सभी

 

 

252. अन्तराभिवाची वादएक वाद होता है-

a.  दो अधिवक्ताओं के बीच

b.  ऐसे व्यक्ति द्वारा संस्थापित वाद जिसका विषयवस्तु में कोई हित हो

c.   ऐसे व्यक्ति द्वारा संस्थापित वादजिसका विषयवस्तु में कोई हित हो

d.  केन्द्र सरकार के प्लीडर तथा राज्य सरकार के प्लीडर के बीच

 

253. 'A' आभूषणों का एक बक्सा 'B' जो उसके क्षेत्र का एक प्रतिष्ठित व्यक्ति है के पास रखता है। 'C' का अभिवचन है कि आभूषण 'B' ने उससे सदोष अभिप्राप्त किए थे और वह उन्हें 'B' से लेने का दावा करता है। विधिक तौर पर निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प 'B' का होगा।

a.  'A' को आभूषण लौटा दे

b.  आभूषण को पुलिस के पास दे दे

c.   A' और 'C' के विरुद्ध अंतराभिवाची वाद लाए

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

254. '' अपने आभूषणों के डिब्बे को '' के पास अपने अभिकर्ता के रूप में जमा करता है। '' का आरोप है कि '' द्वारा उससे गलत तरीके से आभूषण हासिल किए गए थे और '' से उसका दावा करता है। वहाँ ''-

a.  ' तथा '' दोनों के विरूद्ध अन्तराभिवाची वाद प्रस्तुत कर सकता है

b.  '' तथा '' दोनों के विरूद्ध अन्तराभिवाची वाद प्रस्तुत नहीं कर सकता

c.   '' के विरूद्ध अन्तराभिवाची वाद प्रस्तुत कर सकता है

d.  '' के विरूद्ध अन्तराभिवाची वाद प्रस्तुत कर सकता है।

 

255. सिविलं प्रक्रिया संहिता की धारा.......में न्यायालय से बाहर विवाद का निपटारा से संबंधित प्रावधान निहित है-

a.  51

b.  151

c.   91

d.  89

 

256. सिविल प्रक्रिया संहिता में धारा 89 को अन्तःस्थापित किया गया-

a.  1999

b.  2009

c.   1993

d.  1998

 

257. सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा के अधीन न्यायालय किसी विवाद के पक्षकारों को मध्यस्थता के लिए निर्दिष्ट कर सकता है?

a.  धारा 87

b.  धारा 86A

c.   धारा 88

d.  धारा 89

 

258. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 89(1) के अधीन न्यायालय किसी विवाद को निर्दिष्ट कर सकता है-

a.  मध्यस्थता अथवा लोक अदालत को

b.  पंचाट अथवा समझौता (सुलह)

c.   समझौता अथवा मध्यस्थता

d.  उपरोक्त सभी

 

259. जहां न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि, मामले में समझौते का तत्व विद्यमान है, वहां न्यायालय-

a.  मामले में स्वयं निर्णय करेगा,

b.  मामले को पंचाट, सुलह अथवा मध्यस्थता के लिये सौंप देगा

c.   मामले को अनिर्णित छोड़ देगा

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

260. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 89 में " अदालत के बाहर विवादों के निपटारे " से संबंधित प्रावधानों में, निम्नलिखित में से कौन सा एक प्रावधान नहीं है?

a.  मध्यस्थता

b.  परक्राम्य

c.   पंचाट

d.  सुलह

 

261. "विशेष मामलों के बाद" से संबंधित प्रावधान निहित है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 34 में,

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 33 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 90 आदेश 36 में

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 88 आदेश 35 में

 

262. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के अधीन लोक- न्यूसेन्स के संदर्भ में घोषणा और व्यादेश हेतु वादसंस्थित किया जा सकता है-

a.  बिना न्यायालय की अनुमति के किसी व्यक्ति द्वारा

b.  दो अथवा अधिक व्यक्तियों द्वारा बिना कोर्ट की अनुमति के

c.   दो अथवा अधिक व्यक्तियों द्वारा कोर्ट की अनुमति से

d.  न्यायालय की अनुमति से, किसी व्यक्ति द्वारा

 

263. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के अधीन लोक न्यूसेन्स हेतु कौन वादसंस्थित कर सकता है

a.  महाधिवक्ता

b.  महाधिवक्ता () कोई भी नागरिक

c.   जिला अधिकारी

d.  कोई भी 10 अथवा अधिक नागरिक

 

264. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के अधीन लोक- न्यूसेन्स के संदर्भ में घोषणा और व्यादेश हेतु वाद संस्थित किया जा सकता है-

a.  पीड़ित व्यक्ति द्वारा

b.  ऐसे व्यक्ति द्वारा जिसे ऐसे लोक-न्यूसेन्स के कारण विशेष क्षति हुई हो

c.   न्यायालय की अनुमति से दो अथवा उससे अधिक व्यक्तियों द्वारा, यद्यपि उन्हें कोई विशेष क्षति हुई हो

d.  दो अथवा उससे अधिक व्यक्तियों द्वारा जिन्हें ऐसे लोक- न्यूसेन्स के चलते विशेष क्षति हुई हो

 

265. लोकपूर्त कार्य से संबंधित वाद का प्रावधान है

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 100 में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 105 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 92 में

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 41 में

 

266. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 92 के अंतर्गत संस्थित वाद में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है-

a.  महाधिवक्ता द्वारा वाद को संस्थित किया जा सकता है

b.  वादलोक पूर्त कार्य से संबंधित हो

c.   दो या अधिक व्यक्तियों द्वारा वाद को संस्थित किया जा सकता है।

d.  उपरोक्त सभी

 

267. निम्नलिखित में से क्या सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 94 में अनुपूरक कार्यवाहियों से सम्बन्धित प्रावधानों में शामिल नहीं है?

a.  अस्थाई व्यादेश

b.  निष्पादकों की नियुक्ति

c.   निर्णय के पूर्व गिरफ्तारी

d.  निर्णय के पूर्व कुर्की

 

268. अनुपूरक तथा आनुषंगिक कार्यवाहियों का उल्लेख कहाँ किया गया है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता में

b.  दंड प्रक्रिया संहिता में

c.   विधि विरुद्ध गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम में

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

269. निम्नलिखित में से क्या एक अनुपूरक कार्यवाही नहीं है?

a.  प्रतिभूति जमा करने हेतु प्रतिवादी को निर्देश

b.  कमीशन जारी किया जाना

c.   अस्थाई व्यादेश की मंजूरी

d.  किसी रिसीवर की नियुक्ति

 

270. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 का कौन सा प्रावधान"पक्षकारों की सहमति के आधार पर न्यायालय द्वारा मूल डिक्री से अपील के साथ सम्बन्धित है?

a.  धारा 82

b.  धारा 98

c.   धारा 90

d.  धारा 96

 

271. "पक्षकारों की सहमति के आधार पर न्यायालय द्वारा मूल डिक्री से अपील के साथ सम्बन्धित है?पारित डिक्री पर कोई अपील नहीं की जा सकेगी। यह प्रावधान किस धारा में किया गया है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96(1)

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96(3)

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96(4)

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96(2)

 

272. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96(4) जिसे सिविल प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा अंतर्विष्ट किया गया है, प्रतिबंधित करती है-

a.  अंतिम डिक्री के विरूद्ध अपील को

b.  निष्कर्षो के विरूद्ध अपील को

c.   सहमति आधारित डिक्री के विरूद्ध अपील को

d.  लघु मामलों में अपील को

 

273. एक अपील होगी-

a.  जिला न्यायालयों द्वारा पारित किसी भी आदेश में नहीं

b.  जिला न्यायालयों द्वारा पारित किसी भी डिक्री में नहीं

c.   न्यायालय द्वारा पारित सभी आदेशों में

d.  केवल ऐसे आदेशों में जिनका प्रावधान सिविल प्रक्रिया संहिता में किया गया है

 

274. गलत कथन को चिन्हित कीजिए

a.  वाद के सुनवाई के समय जहाँ प्रतिवादी उपस्थित हो तथा वादी उपस्थित हो वहाँ न्यायालय वाद को खारिज कर देगा तथा वादी उसी कारण के लिए एक ताजा वाद नहीं ला सकेगा

b.  कोई भी न्यायालय एकपक्षीय तौर पर पारित किसी डिक्री को केवल इस आधार पर खारिज नहीं करेगा कि प्रतिवादी पर समन तामील करने में कोई अनियमितिता बरती गई है।

c.   एकपक्षीय तौर पर पारित किसी मूल डिक्री से कोई अपील नहीं होगी

d.  वादी उस न्यायालय में किसी डिक्री को खारिज करने 12 का आदेश देने की अर्जी दे सकता है जिसने उसके विरूद्ध एकपक्षीय डिक्री जारी की है।

 

275. सिविल प्रक्रिया संहिता की द्वितीय अपील प्रस्तुत की जा सकती हैं?

a.  धारा 99

b.  धारा 100

c.   धारा 99

d.  धारा 100

 

276. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत पारित प्रारंभिक आज्ञप्ति को-

a.  बिना अंतिम आज्ञप्ति हेतु प्रतीक्षा किये अपील में चुनौती दी जा सकती है।

b.  केवल तभी चुनौती दी जा सकती है जबकि अपील में अंतिम आशिप्ति को चुनौती दी जा रही है।

c.   अपील में चुनौती नहीं दी जा सकती

d.  धारा 115 सीपीसी के अंतर्गत एक परिहार में चुनौती दी जा सकती है।

 

277. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 100(1) के अंतर्गत द्वितीय अपील हेतु प्रावधान की गई अनिवार्य शर्त है-

a.  तथ्य सम्बन्धी सारवान प्रश्न

b.  विधि सम्बन्धी सारवान प्रश्न

c.   अधिकारिता सम्बन्धी त्रुटि

d.  सार्वजनिक महत्व की विषयवस्तु

 

278. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 100 के अंतर्गत द्वितीय अपील किसके समक्ष की जा सकती है-

a.  जिला न्यायालय

b.  उच्च न्यायालय

c.   सर्वोच्च न्यायालय

d.  विशेष न्यायालय

 

279. व्यवहार प्रक्रिया संहिता की धारा 102 के अंतर्गत किसी डिक्री के विरुद्ध द्वितीय अपील नहीं की जा सकेगी, जब धन की वसूली के लिए मूल वाद की विषय-वस्तु-

a.  बीस हजार रुपये से अधिक नहीं है।

b.  पच्चीस हजार रुपये से अधिक नहीं है।

c.   तीन हजार रुपये से अधिक नहीं है

d.  पांच हजार रुपये से अधिक नहीं है।

 

280. सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत अधिकतम कितनी धनराशि की वसूली के वादमें कोई द्वितीय अपील नहीं की जा सकती-

a.  1,00,000 रुपए

b.  25,000 रुपए

c.   50,000 रुपए

d.  2,00,000 रुपए

 

281. यदि अपील की सुनवाई उच्च न्यायालय के किसी एक न्यायाधीश द्वारा की गई हो तो आगे की अपील कहाँ की जा सकेगी-

a.  उच्च न्यायालय की खंडपीठ

b.  इनमें से कोई नहीं

c.   केवल सर्वोच्च न्यायालय में

d.  आगे कोई अपील नहीं

 

282. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 100 के अंतर्गत, जहाँ किसी मूल अथवा अपीली डिक्री अथवा आदेश. से उत्पन्न किसी अपील पर उच्च न्यायालय के किसी अकेले न्यायाधीश द्वारा सुनवाई एवं निर्णय किया जाता है-

a.  सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति से आगे अपील होगी

b.  उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष आगे अपील होगी

c.   वहाँ ऐसे एकल न्यायाधीश के निर्णय एवं डिक्री पर आगे कोई अपील नहीं होगी

d.  उच्च न्यायालय के लिए अधिकारपत्र के अधीन आगे अपील होगी

 

283. द्वितीय अपील में साक्ष्य की पुनर्प्रशंसा-

a.  अनुज्ञेय है

b.  अनुज्ञेय नहीं है

c.   इनमें से कोई नहीं

d.  पुनर्विचार का विषय है

 

284. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 104 के अंतर्गत किस आदेश के विरूद्ध अपील की जा सकती है-

a.  क्षतिपूर्ति हेतु धारा 95 के अंतर्गत दिए गए आदेश के विरूद्ध

b.  धारा 92 के अंतर्गत आदेश के विरूद्ध

c.   वादसंस्थित करने की अनुमति से इंकार करने वाले आदेश के विरूद्ध धारा 91 के अंतर्गत

d.  उपरोक्त सभी

 

285. अपीली न्यायालय के शक्तियों के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से क्या सही नहीं है?

a.  अपीली न्यायालय को अतिरिक्त साक्ष्य ग्रहण करने का कोई शक्ति नहीं होती

b.  अपीली न्यायालय को विवाद्य निर्धारित करने तथा उन्हें विचारण हेतु संदर्भित करने का शक्ति होती है।

c.   अपीली न्यायालय को किसी वाद में अंतिम अवधारणा का शक्ति होती है

d.  अपीली न्यायालय को वाद को प्रतिप्रेषित करने का शक्ति होती है।

 

286. निम्न में से क्या सही है?

a.  अपीली न्यायालय को विवाद निर्धारित करने तथा उन्हें विचारण हेतु संदर्भित करने का शक्ति नहीं होगी

b.  अपीली न्यायालय को अतिरिक्त साक्ष्य ग्रहण करने का कोई शक्ति नहीं होगी

c.   अपीली न्यायालय को किसी वाद में अंतिम अवधारणा का शक्ति होती है

d.  अपीली न्यायालय वादको प्रतिप्रेषित नहीं करेगा

 

287. अपीली न्यायालय की शक्तियों के सम्बन्ध में निम्न में क्या सही नहीं है?

a.  वाद के प्रतिप्रेषण का शक्ति होती है।

b.  अतिरिक्त साक्ष्य ग्रहण करने का शक्ति नहीं होती है

c.   विवाद्यकों को तय करने और विचारण हेतु संदर्भित करने का शक्ति होती है।

d.  अतिरिक्त साक्ष्य ग्रहण करने का शक्ति होती है।

 

288. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सा संयोजन सुमेलित नहीं है?

a.  किसी अकिंचन द्वारा वाद - आदेश 33

b.  अपीली न्यायालय के शक्ति - धारा 102

c.   अस्थायी व्यादेश - आदेश 39

d.  एक केवियट दाखिल करने का अधिकार - धारा 148

 

289. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत 'निर्देश' किसे किया

a.  सर्वोच्च न्यायालय

b.  जिला न्यायालय

c.   उपरोक्त में कोई नहीं

d.  उच्च न्यायालय

 

290.सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 113 के अंतर्गत निर्देश के लिए कौन आवेदन दे सकता है-

a.  न्यायालय

b.  वाद का कोई पक्षकार

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

291. यदि न्यायालय संतुष्ट हो कि इसके समक्ष लंबित वाद में किसी विधि की वैधता सम्बन्धी प्रश्न निहित है तो न्यायालय को क्या करना चाहिए-

a.  विधि की वैधता का निर्णय

b.  उच्च न्यायालय को पुनर्विलोकन के शक्ति का उपयोग करना चाहिए

c.   परामर्श हेतु सर्वोच्च न्यायालय को निर्देशित करना चाहिए

d.  मामले को उच्च न्यायालय को निर्देशित

 

292. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 114 के अंतर्गत स्वयं को किसी डिक्री अथवा आदेश से व्यथित अनुभव करने वाला कोई भी व्यक्ति आवेदन दे सकता है-

a.  पुनर्विचार हेतु

b.  निर्देश हेतु

c.   पुनर्विलोकन हेतु

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

293. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 114 को किसके साथ पढ़ा जाना चाहिए-

a.  आदेश 47, नियम 3

b.  आदेश 41

c.   आदेश 46 नियम 1

d.  आदेश 47 नियम 1

 

294. किसी आदेश अथवा डिक्री के पुनर्विलोकन हेतु आवेदन प्रस्तुत की जा सकती है-

a.  आदेश अथवा डिक्री पारित करने वाले न्यायालय के समक्ष

b.  अपीली न्यायालय के समक्ष

c.   किसी पक्षकार के अधिवक्ता द्वारा

d.  किसी सत्र न्यायाधीश द्वारा

 

295. किसी निर्णय के पुनर्विलोकन हेत एक आवेदन प्रस्तुत की जा सकती है यदि-

a.  यदि मामला महत्वपूर्ण हो और पुनः सुनवाई की माँग करता हो

b.  निर्णय त्रुटिपूर्ण हो

c.   यदि अभिलेख पर स्पष्ट त्रुटि मौजूद हो

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

296. किसी निर्णय के पुनर्विलोकन के लिए एक याचिका तभी स्वीकार्य होगी जब व्यक्ति-ने

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता द्वारा अपील की अनुमति हो किन्तु कोई अपील की गई हो

b.  पुनर्विलोकन के लिए न्यायालय की अनुमति प्राप्त की जा चुकी हो

c.   निर्णय का आंशिक पालन किया हो

d.  संपूर्ण डिक्री राशि को जमा कर देता हो।

 

297. व्यथित व्यक्ति निम्नलिखित में से किसी एक आधार पर किसी सिविल न्यायालय के आदेश अथवा निर्णय के पुनर्विलोकन हेतु आवेदन नहीं दे सकता-

a.  एक डिक्री अथवा आदेश जिससे एक अपील की अनुमति हो किन्तु कोई अपील की गई हो.

b.  व्यथित व्यक्ति की अनुपस्थिति में कोई डिक्री अथवा आदेश पारित कर दिया गया हो

c.   ऐसा आदेश अथवा डिक्री जिससे किसी अपील की अनुमति हो

d.  किसी निर्देश पर लघुवाद न्यायालय के निर्देश पर कोई निर्णय

 

298. किसी निर्णय का पुनर्विलोकन किस आधार पर किया जा सकता है-

a.  तथ्य अथवा विधि की त्रुटि जो अभिलेख पर स्पष्ट हो

b.  नए एवं महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रकट होने पर, जो सम्बन्धित पक्ष की जानकारी में रहे हों

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

299. निम्नलिखित में से किस परिस्थिति के अंतर्गत निर्णय का पुनर्विलोकन नहीं होगा?

a.  किसी लघुवाद न्यायालय से किसी निर्देश पर एक निर्णय द्वारा

b.  अपील खारिज

c.  ऐसी डिक्री अथवा आदेश से जिससे इस संहिता द्वारा अपील की अनुमति दी गई हो, किन्तु कोई अपील की गई हो

d.  ऐसी डिक्री अथवा आदेश से जिससे इस संहिता द्वारा अपील की अनुमति दी गई हो

 

300. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 115 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को अधिकार है-

a.  किसी भी आदेश से पृथक मत रखने अथवा उसे उलट देने का

b.  पुनरीक्षण का

c.   पुनर्विलोकन का

d.  निर्देश का

 

301. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की कौन सी धारा स्पष्ट तौर पर उत्प्रेषण रिट जारी करने के शक्ति की प्रकृति रखती है?

a.  धारा 115

b.  धारा 122

c.   धारा 11

d.  धारा 105

 

302. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 115 के अंतर्गत-

a.  अधिकारिता का अनियमित उपयोग करना जो न्यायालय में निहित होता है।

b.  अधिकारिता का उपयोग जो न्यायालय में निहित नहींहोता है

c.   अधिकारिता का उपयोग करना जो न्यायालय में निहित होता है

d.  उपरोक्त सभी

 

303. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत पुनर्विचार की प्रकृति यह होती है कि-

a.  यह किसी वाद अथवा कार्यवाही को रोकने का कार्य नहीं करेगी, केवल उन मामलों को छोड़कर जिनमें ऐसे वाद अथवा कार्यवाहियों पर उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगा दी गई हो

b.  यह कार्यवाही को रोकने का कार्य करती है

c.   यह कार्यवाही तथा वाद दोनों को ही रोकने का कार्य करती है

d.  यह वाद को रोकने का कार्य करती है।

 

304. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत किसी न्यायालय के समक्ष एकबार पुनर्विचार प्रस्तुत कर दिए जाने के वादयह-

a.  कार्यवाही पर रोक के रूप में कार्य करता है.

b.  यह न्यायालय के समक्ष किसी वाद अथवा कार्यवाही पर रोक के रूप में कार्य नहीं करेगा, केवल उन मामलों को छोड़कर जिनमें ऐसे वाद अथवा कार्यवाहियों पर न्यायालय द्वारा रोक लगाई जा चुकी हो

c.   यह विवाद्यकों पर पूर्व न्याय के रूप में कार्य करता है

d.  यह तात्कालिक अनुतोष के लिए व्यादेश के रूप में कार्य करता है

 

305. निम्नलिखित में से क्या सही है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 113 निर्देश, धारा 114 पुनर्विलोकन, धारा 115 पुनरीक्षण

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 113 निर्देश, धारा 114 पुनरीक्षण, धारा 115 पुनर्विलोकन

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 113 पुनर्विलोकन, धारा 114 पुनरीक्षण, धारा 115 निर्देश

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

306. सिविल प्रक्रिया संहिता की निम्नलिखित में से कौन सी धारा न्यायालय में महिलाओं को स्वीय उपसंजाति से छूट प्रदान करती है?

a.  धारा 133

b.  धारा 135

c.   धारा 135

d.  धारा 132

 

307. निम्नलिखित में से किसे न्यायालय में स्वीय उपसंजाति छूट प्राप्त नहीं है?

a.  राज्यों के मंत्रीग

b.  जिलाधीश

c.   भूतपूर्व भारतीय शासक

d.  राज्य विधानपरिषद् के चेयरमैन

 

308. सिविल प्रक्रिया संहिता-

a.  अधिवक्ताओं को न्यायालय में स्वीय उपसंजाति से छूट प्रदान करती है

b.  नगर आयुक्तों को न्यायालय में स्वीय उपसंजाति से छूट प्रदान करती है

c.   राज्य के मंत्री को न्यायालय में स्वीय उपसंजाति से छूट प्रदान करती है।

d.  किसी भी व्यक्ति को न्यायालय में स्वीय उपसंजाति से छूट नहीं प्रदान करती

 

309. न्यायालय में स्वीय उपसंजाति से छूट का प्रावधान किया गया है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 133 में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 132 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 143 में

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 142 में

 

310. निम्नलिखित में से किसे न्यायालय में स्वीय उपसंजाति से छूट प्राप्त है?

a.  केन्द्रीय मंत्रियों को

b.  राज्य के मंत्रियों को

c.   उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को

d.  उपरोक्त सभी को

 

311. सिविल प्रक्रिया संहिता की कौन सी धारा विधानमंडल सदस्यों को गिरफ्तारी तथा सिविल प्रक्रिया के अंतर्गत निरुद्धी से छूट प्रदान करती है?

a.  धारा 135

b.  धारा 132

c.   धारा 80

d.  धारा 134

 

312. न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले शपथपत्र-

a.  किसी न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट अथवा नोटरी द्वारा अधिकृत हो सकते हैं

b.  किसी अधिवक्ता द्वारा अधिकृत हो सकते हैं

c.   राज्य के मंत्रियों द्वारा अधिकृत हो सकते हैं

d.  केवल पीठासीन न्यायाधीश के अलावा अधिकृत नहीं किए जा सकते

 

313. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अन्तर्गत निम्नलिखित में से किसे न्यायालय में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट पाने का हक नहीं है?

a.  संघ के मन्त्रियों को

b.  राज्य के मन्त्रियों को

c.   भारत के उपराष्ट्रपति को

d.  लोक सेवा आयोग के

 

314. सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति पर तामील किए गए अथवा दिए गए सभी आदेश लिखित में होंगे। यह प्रावधान किस धारा में किया गया है-

a.  धारा 143

b.  धारा 144

c.   धारा 141

d.  धारा 142

 

315. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की निम्नलिखित में किस धारा में प्रत्यास्थापन के सिद्धांत समाहित हैं?

a.  धारा 134

b.  धारा 148

c.   धारा 151

d.  धारा 144

 

316. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अंतर्गत प्रत्यास्थापन का क्या अर्थ है?

a.  वाद संपत्ति के कब्जाधारी किसी व्यक्ति को बेकब्जा करना

b.  डिक्री के संशोधन, परिवर्तन अथवा उल्टे जाने पर किसी पक्षकार को पुनर्बहाली

c.   दावे का पुनः न्यायनिर्णयन

d.  वाद का प्रत्यास्थापन

 

317. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 148 के अंतर्गत न्यायालय समय सीमा को अधिकतम कितना बढ़ा सकता है-

a.  60 दिन

b.  90 दिन

c.   40 दिन

d.  30 दिन

 

318. एक वाद की संस्थिति हेतु समय को निम्नलिखित में से किस प्रावधान को लागू करते हुए बढ़ाया जा सकता है?

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151

b.  परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 148

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

319. जहाँ सिविल प्रक्रिया संहिता द्वारा निर्दिष्ट किसी कार्य को करने हेतु न्यायालय द्वारा कोई अवधि तय अथवा मंजूर की गई हो तो न्यायालय ऐसी अवधि को अधिकतम कितना बढ़ा सकता है-

a.  कुल 60 दिन से अनधिक

b.  कुल 90 दिन से अनधिक

c.   कुल 30 दिन से अनधिक

d.  कुल 120 दिन से अनधिक

 

320. एक "केवियेट' प्रस्तुत करने के अधिकार का प्रावधान किया गया है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 148 में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 148 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 147 में

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 148 में

 

321. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत प्रस्तुत एक केवियेट के अस्तित्व में रहने की अवधि होती है

a.  प्रस्तुत किए जाने की तिथि से 60 दिनों तक

b.  दायर किए जाने की तिथि से 120 दिनों तक

c.   दायर किए जाने की तिथि से 90 दिनों तक

d.  दायर किए जाने की तिथि से 30 दिनों तक

 

322. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत एक केवियेट दायर किया जा सकता है जब कोई-

a.  वाद संस्थापित हो

b.  कार्यवाही प्रारंभ अथवा संस्थित हो चुकी हो

c.   वादसंस्थित होने वाला हो

d.  वाद अथवा कार्यवाही संस्थित हो चुकी हो अथवा होने वाली हो

 

323. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 148 के अंतर्गत दायर एक केवियेट-

a.  केविवेट अथवा किसी पक्ष को वाद कां पक्षकार बनाता है

b.  केवियेट प्रस्तुतकर्ता को आवेदन की नोटिस प्राप्त करने का अधिकारी बनाता है

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

324. सिविल प्रक्रिया संहिता की किसी धारा के अंतर्गत "न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों का प्रावधान किया गया है?

a.  धारा 151

b.  धारा 141

c.   धारा 153

d.  धारा 152

 

325. न्यायालय द्वारा अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग किया जा सकता है-

a.  न्यायालीय प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने हेतु

b.  न्याय प्रदान करने हेतु

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

326. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के अंतर्गत अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग किसके द्वारा किया जा  सकता है-

a.  जिला न्यायालय

b.  किसी भी न्यायालय

c.   सर्वोच्च न्यायालय

d.  उच्च न्यायालय

 

327. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 151 के अंतर्गत प्रदत्त अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग किसके द्वारा किया जा सकता है-

a.  केवल जिला न्यायालय

b.  सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय के साथ-साथ किसी भी सिविल न्यायालय द्वारा

c.   केवल सर्वोच्च न्यायालय

d.  केवल उच्च न्यायालय

 

328. अंतर्निहित शक्तियों के अंतर्गत सिविल न्यायालय आदेश पारित कर सकता है-

a.  पक्षकारों को अपने वाद का समाधान करने हेतु बाध्य करने हेतु

b.  वादी को वाद वापस लेने हेतु बाध्य करने हेतु

c.   मामले को माध्यस्थ को निर्देशित करने हेतु

d.  न्याय के उद्देश्यों के लिए आवश्यक अथवा न्यायालय की प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने हेतु

 

329. इंटरवीनर्स वो होते हैं जो-

a.  न्यायालय के कीमती समय को जाया करे

b.  बादी पर एक भार हो

c.   इम्प्लीड होने के हकदार हों

d.  इम्प्लीड होने के हकदार हों

 

330. निर्णयों में की गई लिपिकीय अथवा अंकगणितीय त्रुटियों को किस धारा के अंतर्गत सही किया जा सकता है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 154

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 152

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 155

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 153

 

331. निर्णयों, डिक्रियों अथवा आदेशों में हुई लिपिकीय अथवा अंकगणतीय त्रुटियों को सही करने का न्यायालय का अधिकार-

a.  किसी भी समय पर पक्षकारों द्वारा दिए गए आवेदन पर प्रयुक्त किया जा सकता है।

b.  किसी भी समय पर न्यायालय द्वारा स्वप्रेरणा से किया जा सकता है

c.   उपरोक्त में (a) अथवा (b)

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

332. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 152 के अंतर्गत निर्णयों तथा आदेशों में संशोधन का आवेदन करने का अधिकार किसका होता है-

a.  किसी भी पक्षकार का

b.  सरकारी प्लीडर का

c.   व्यथित व्यक्ति का

d.  व्यथित व्यक्ति का, न्यायालय की अनुमति से

 

333. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 152 न्यायालय को किस सम्बन्ध में निर्णय, डिक्रियों, अथवा आदेशों को संशोधित करने का केवल लिपिकीय अथवा अंकगणतीय त्रुटियों के सम्बन्ध में

a.  केवल आकस्मिक चूक अथवा भूल के सम्बन्ध में

b.  अधिकार प्रदान करती है

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

334. किसी वाद में किसी कार्यवाही में की गई किसी त्रुटि अथवा दोष को संशोधित करने का सामान्य अधिकार न्यायालय में किस धारा प्रभाव से निहित होता है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 153

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 153

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 152

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 153

 

335. सिविल प्रक्रिया संहिता की निम्नलिखित में से कौन सी धारा ऐसे खुले न्यायालय में विचारण का प्रावधान करती है जहाँ जनता को पहुँच प्राप्त हो?

a.  धारा 153

b.  धारा 153

c.   धारा 153

d.  धारा 153

 

336. सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत न्यायालय के पास किस हेतु अंतर्निहित अधिकारिता उपलब्ध नहीं होती-

a.  चूक के लिए खारिज की गई चुनाव याचिका को बहाल करने की

b.  अलग-अलग दावों पर आधारित वादों को एकजुट करने की

c.   न्यायालय शुल्क जमा करने के कारण खारिज वाद को पुनःस्थापित करने की

d.  उपरोक्त सभी

 

337. जब वादी के द्वारा समुचित न्यायालय शुल्क अदा किया गया हो तो न्यायालय-

a.  सरकार को एक रिपोर्ट भेजेगा

b.  वादपत्र खारिज कर देगा

c.   वादी को कम भुगतान किए गए न्यायालय शुल्क को जमा करने हेतु समय देगा

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

338. सिविल प्रक्रिया संहिता का कौन सा प्रावधान यह व्यवस्था करता है कि एक ही हित में एक ही व्यक्ति सभी वादियों की ओर से वाद ला सकेगा अथवा बचाव कर सकेगा?

a.  आदेश 1 नियम 8

b.  आदेश 1, नियम 9

c.   आदेश 1, नियम 1

d.  आदेश 1, नियम 2

 

339. दीवानी प्रक्रिया संहिता के अधीन प्रतिनिधिक क्षमता में वाद दायर किया जा सकता है-

a.  आदेश 1 नियम 9 के अधीन

b.  आदेश 1 नियम 10 के अधीन

c.   आदेश 1, नियम 8 के अधीन

d.  आदेश 1, नियम 8A के अधीन

 

340. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 1 नियम 8 के अंतर्गत प्रतिनिधि वादकी न्यायालय द्वारा अनुमति दी जा सकती है जब-

a.  ऐसे बहुत से व्यक्ति एक ही परिवार से सम्बन्धित हों

b.  ऐसे बहुत से व्यक्तियों के एक ही वाद में समान हित सम्बद्ध हों

c.   किसी अन्य वाद में बहुत से व्यक्ति पक्षकार हों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

341. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 1 नियम 8 के अंतर्गत एक प्रतिनिधि वाद प्रस्तुत करने हेतु निम्नलिखित में से किसकी न्यायालय की अनुमति की

a.  प्रतिनिधित्व किए जा रहे लोगों की लिखित अनुमति की

b.  आवश्यकता नहीं होती?

c.   अनेक पक्षकारों की

d.  समान हित की

 

342. ऐसा कौन सा वाद होता है जिसकी नोटिस किसी प्रतिनिधि वादमें हितधारक सभी व्यक्तियों को दिए जाने की आवश्यकता नहीं होती?

a.  वाद को वापस लिया जाना

b.  वाद में समझौता दर्ज किया जाना

c.   वाद का अपसर्जन

d.  वाद में किसी नए प्रतिवादी को जोड़ा जाना

 

343. प्रतिनिधि क्षमता में प्रस्तुत किसी वाद को वादी द्वारा वापस लिया जा सकता है, समझौता तथा परित्याग किया जा सकता है-.

a.  सभी हितधारकों को नोटिस देने के बाद

b.  सभी हितधारकों को नोटिस दिए बिना

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों में एक

 

344. पक्षकारों के कुसंयोजन अथवा असंयोजन के कारण सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 1, नियम 9 के अंतर्गत वाद-

a.  खारिज करना अथवा करना न्यायालय के विवेकाधीन होता है

b.  उपरोक्त में कोई नहीं

c.   खारिज किए जाने योग्य होगा

d.  खारिज नहीं किया जा सकता

 

345. एक वादकिस कारणवश विफल हो सकता है-

a.  आवश्यक पक्ष के असंयोज

b.  समुचित पक्ष के कुसंयोजन

c.   समुचित पक्ष के असंयोजन

d.  आवश्यक पक्ष के कुसंयोजन

 

346. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत जहाँ कोई व्यक्ति किसी वाद का आवश्यक पक्षकार हो तथा जिसने एक पक्षकार के रूप में कुसंयोजन का होता है

a.  असंयोजन का होता है

b.  प्रवेश लिया हो, वहाँ ऐसा मामला-

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

347. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अंतर्गत पक्षकारों को हटाया, जोड़ा अथवा प्रतिस्थापित किया जा सकता है?

a.  आदेश 1, नियम 3

b.  आदेश 1 नियम 9

c.   आदेश 1, नियम 1

d.  आदेश 1, नियम 10

 

348. एक आवश्यक पक्षकार वह होता है जिसकी?

a.  अनुपस्थिति में आदेश पारित किया जा सकता है किन्तु वाद के संपूर्ण निर्णयन हेतु उसकी हाजिरी आवश्यक होती है

b.  अनुपस्थिति में प्रभावी रूप से कोई भी आदेश पारित नहीं किया जा सकता

c.   केवल (b) सही है

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

349. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 2 नियम 1 के अनुसार प्रत्येक वाद की विरचना यथासंभव व्यवहारिक रूप में इस प्रकार की जाएगी कि-

a.  आगे की मुकद्मेबाजी रोकी जा सके

b.  अंतिम निर्णय हेतु आधार प्राप्त हो जाए

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

350. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 2 नियम 2 कहाँ लागू नहीं होता-

a.  रिट याचिकाओं पर

b.  निष्पादन हेतु अर्जी पर

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

351. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 2 नियम 3 के अनुसार एक वादी एक ही वाद में एक ही प्रतिवादी के विरूद्ध निम्न में से किसे शामिल कर सकता है-

a.  वाद हेतुकों को

b.  ऋणों को

c.   कई विवाद्यकों को

d.  कई दावों को

 

352. '' पाँच हजार रुपए प्रतिवर्ष के किराए पर '' को एक घर किराए पर देता है। 1905, 1906 तथा 1907 तीनों वर्षों का किराया बकाया है एवं भुगतान नहीं किया गया है। '' '' पर 1908 में मात्र 1906 के किराए के लिए वाद लाता है-

a.  '' वादमें '' के विरूद्ध 1905 अथवा 1907 के किराए के लिए वाद नहीं ला सकता

b.  ' वादमें '' के विरूद्ध 1905 के किराए के लिए वाद ला सकता है

c.   '' वादमें '' के विरूद्ध 1907 के किराए के लिए वाद ला सकता है।

d.  '' वादमें '' के विरूद्ध 1905 तथा 1907 दोनों के किराए के लिए वादला सकता है।

 

353. "जहाँ वादी अपने दावे के किसी भाग के बारे में वाद लाने का लोप करता है या उसे साशय त्याग देता है, वहाँ उसके पश्चात् वह इस प्रकार लोप किये गये या त्यक्त भाग के बारे में वाद नहीं लायेगा " इस सिद्धान्त की उत्पत्ति निहित है-

a.  व्यवहार प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश II नियम 2 में

b.  व्यवहार प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश I नियम 2 में।

c.   भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 115 में

d.  व्यवहार प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 11 में।

 

354. ' 10,000 रुपए प्रतिवर्ष के किराए पर '' को एक घर किराए पर देता है। 1906 से 1908 तक का किराया बकाया है एवं भुगतान नहीं किया गया है। '' '' पर 2009 में केवल 2007 के किराए के लिए वादलाता है-

a.  '' वाद में '' के विरूद्ध 2006 तथा 2008 दोनों के किराए के लिए वाद ला सकता है।

b.  '' वाद में '' के विरूद्ध 2006 अथवा 2008 के किराए के लिए वाद नहीं ला सकता

c.   '' वाद में '' के विरूद्ध केवल 2006 के किराए के लिए वाद ला सकता है

d.  '' वाद में '' के विरूद्ध केवल 2008 के किराए के लिए वाद ला सकता है

 

355. संहिता का कौन सा प्रावधान वाद हेतुको के संयोजन से सम्बन्धित है-

a.  आदेश 1, नियम 2

b.  आदेश 2, नियम 3

c.   आदेश 2, नियम 2

d.  आदेश 2, नियम 1

 

356. एक वादी-

a.  किसी वादमें केवल विधि के प्रश्नों को संयोजित कर सकता है

b.  एक ही वाद में कई वाद हेतुको को संयोजित नहीं कर सकता

c.   एक ही वाद में एक ही प्रतिवादी के विरूद्ध कई वाद हेतुको को संयोजित कर सकता है।

d.  एक वाद में केवल कुछ वाद हेतुको को संयोजित कर सकता है

 

357. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 2 नियम 6 के अंतर्गत निम्नलिखित में से क्या न्यायालय के लिए पृथक विचारण का आदेश देने का आधार नहीं है-

a.  विचारण में उलझन

b.  असुविधा

c.   विचारण में बिलंब

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

358. अनेकता का अर्थ है-

a.  वाद कारण का कुसंयोजन

b.  वाद हेतुको के साथ-साथ पक्षकारों का कुसंयोजन

c.   पक्षकारों का कुसंयोजन

d.  पक्षकारों का असंयोन

 

359. वादी किसी पश्चातवर्ती वाद में कुछ अनुतोष का दावा करना चाहता है। सिविल प्रक्रिया संहिता के निम्नलिखित में से किस प्रावधान के अंतर्गत उसे अनुमति की आवश्यकता होगी?

a.  आदेश 2, नियम 2

b.  आदेश 1, नियम 8

c.   धारा 82(2)

d.  धारा 20

 

360. किन मामलों में अनेक व्यक्ति वादी के रूप में प्रवेश ले सकते हैं-

a.  जहाँ विधि का साझा प्रश्न संलिप्त हो

b.  जहाँ एक ही कार्यवाही से ऐसे व्यक्तियों के हक में अधिकार उत्पन्न होता हो

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

361. निम्नलिखित में से सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा अधिवक्ता पर प्रक्रिया की तामील से संबंधित है-

a.  आदेश 7 नियम 3

b.  आदेश 4 नियम -8

c.   आदेश 3 नियम 5

d.  आदेश 2 नियम 2

 

362. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत " हर वादन्यायालय को या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी अधिकारी को दो प्रतियों में वादपत्र प्रस्तुत करके संस्थित किया जायेगा।" यह प्रावधान किस धारा के अंतर्गत किया गया है-

a.  आदेश 3 नियम 1

b.  आदेश 4 नियम 1

c.   धारा 26

d.  धारा 20

 

363. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 4 नियम 1 के उप नियम (1) के अंतर्गत एक वादसंस्थित किया जा सकता है जब-

a.  न्यायालय के समक्ष वादपत्र की एक प्रति प्रस्तुत की गई हो

b.  न्यायालय के समक्ष वादपत्र तीन प्रतियों में प्रस्तुत की गई हो

c.   न्यायालय ने वादपत्र को विचारण में ग्रहण कर लिया हो

d.  न्यायालय के समक्ष वादपत्र प्रतियों में प्रस्तुत की गई हो

 

364. समनों के जारी एवं तामील किए जाने सम्बन्धी नियमों का प्रावधान सिविल प्रक्रिया संहिता में कहाँ किया

a.  आदेश 8

b.  आदेश 11

c.   आदेश 5

d.  आदेश 7

 

365. सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 5 किससे सम्बन्धित प्रावधान करता है-

a.  समनों का निकाला जाना और उनकी तामील से

b.  सामान्य अभिवचनों से

c.   स्वीकृतियों से

d.  वादों की संस्थापना से

 

366. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत वादपत्र की प्रति-

a.  न्यायालय की अनुमति से समन के साथ संलग्न की जा सकती है

b.  वादी की प्रार्थना पर समनों के साथ संलग्न की जाती है।

c.   प्रत्येक समन के साथ संलग्न की जाएगी

d.  समन के साथ संलग्न किया जाना आवश्यक नहीं है

 

367. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 नियम 1(1) के अंतर्गत एक प्रतिवादी को कितने दिनों के अंदर उपस्थित होने पर दावे का उत्तर देने तथा लिखित कथन प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है-

a.  समन तामील होने के 30 दिनों के अंदर

b.  समन तामील होने के 15 दिनों के अंदर

c.   समन तामील होने के 90 दिनों के अंदर

d.  समन तामील होने के 60 दिनों के अंदर

 

368. सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के आदेश 5 में उपबंधित 11 है-

a.  स्वीकारोक्ति

b.  सम्मनों का निकाला जाना और उनकी तामील

c.   अभिवचन

d.  साक्षियों को बुलाया जाना और उनकी उपस्थिति

 

369. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 के अंतर्गत न्यायालय द्वारा समन की तामील के साथ-साथ न्यायालय किस अन्य आदेश के अंतर्गत वादी द्वारा समन तामील किए जाने की अनुमति प्रदान कर सकता है-

a.  नियम 10

b.  नियम 11

c.   नियम 9

d.  नियम 9

 

370. प्रतिवादी पर तामील के लिए दस्ती समन वादी को किस नियम के अंतर्गत दिए जा सकते हैं-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 नियम 7

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 नियम 6

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5नियम 9

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5नियम 9

 

371. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 5 नियम 9(3) के अंतर्गत प्रतिवादी द्वारा समन तामील के लिए किए गए व्यय को वहन किया जाना होता है-

a.  न्यायालय द्वारा

b.  वादी तथा प्रतिवादी द्वारा आंशिक तौर पर

c.   वादी द्वारा

d.  प्रतिवादी द्वारा

 

372. निम्न कथनों में से कौन सा कथन गलत है?

a.  जहाँ एक से अधिक प्रतिवादी हों, समनों की तामील प्रत्येक प्रतिवादी पर की जाएगी

b.  प्रतिवादी के लिए समन उसके सेवक पर तामील नहीं किए जा सकते

c.   प्रतिवादी अपने अभिकर्ता को समन लेने हेतु अधिकृत कर सकता है

d.  समन की तामील अधिवक्ता द्वारा समन की हस्ताक्षरित प्रति प्रस्तुत करने द्वारा की जाएगी

 

373. जहाँ कोई प्रतिवादी जानबूझकर तामील से बच रहा हो, न्यायालय समाचारपत्र में विज्ञापन द्वारा तामील का आदेश देता है किन्तु यह न्यायालय भवन अथवा प्रतिवादी के घर पर भी समन चस्पा करने का आदेश नहीं देता। न्यायालय द्वारा की गई कार्यवाही-

a.  अनुचित होगी

b.  अन्यायपूर्ण होगी

c.   नियमिततापूर्ण होगी

d.  अनियमितापूर्ण होगी

 

374. समन सुपुर्द किए जाने के समय यदि प्रतिवादी अपने घर पर अनुपस्थित रहा हो और एक समुचित समय के अंदर उसकी वहाँ उपलब्धता की संभावना हो तथा उसका अधिकृत अभिकर्ता भी अनुपस्थित हो तो तामील की जा सकती है-

a.  परिवार की किसी वयस्क महिला सदस्य पर

b.  प्रतिवादी के घर पर नियुक्त किसी सेवक पर

c.   परिवार के किसी वयस्क पुरुष सदस्य पर

d.  उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

 

375. जहाँ समन किया गया व्यक्ति समुचित प्रयास के वादभी नहीं प्राप्त हो पाता वहाँ समन तामील किया जा सकता है-

a.  समन को ग्राम पंचायत की नगर परिषद्, जैसा भी हो, के नोटिस बोर्ड पर चस्पा किए जाने के द्वारा

b.  समन की प्रतिलिपियों में से एक को उसके साथ निवास करने वाले परिवार के किसी वयस्क सदस्य के पास छोड़कर, तथा जिस व्यक्ति के पास समन इस प्रकार छोड़ा गया हो, यदि ऐसा आवश्यक हो, समन की दूसरी प्रति के पृष्ठ भाग पर उसके हस्ताक्षर प्राप्त करने के द्वारा

c.   उसके घर के सेहजदृश्य स्थान पर चस्पा किये जाने के द्वारा

d.  समन किए गए व्यक्ति के सेवक पर तामील करने तथा दूसरी प्रति के पृष्ठ भाग पर उससे प्राप्ति के हस्ताक्षर करवाने के द्वारा

 

376. जहाँ प्रतिवादी कारावास में बंद हो, वहाँ समन तामील किया जाएगा-

a.  प्रतिवादी पर तामील के लिए कारागार के भारसाधक अधिकारी को सुपुर्द करके

b.  न्यायालय के माध्यम से प्रस्तुतीकरण वारंट द्वारा

c.   कारावास के बाहर चस्पा करके

d.  कारावास में आदेश की तामील करवाने वाले को भेजकर

 

377. जहाँ तामील अधिकारी समन को प्रतिवादी अथवा उसके अभिकर्ता को व्यक्तिगत रूप से सुपुर्द करता है वहाँ उसे समन की मूल प्रति पर ऐसे व्यक्ति से अभिस्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक होता है। इसके वादही-

a.  प्रतिवादी के हस्ताक्षर वाली मूल प्रति न्यायालय को लौटा दी जाएगी

b.  समन की प्रति प्रतिवादी को दी जाएगी

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  प्रतिवादी के हस्ताक्षर वाली मूल प्रति वादी को लौटा दी

 

378. समन तामीली के दौरान प्रतिवादी को अपने निवास से अनुपस्थित पाया गया और एक समुचित समय के अंदर उसके निवास पर वापस आने की कोई संभावना नहीं थी। समन की तामील की जा सकती है-

a.  अवयस्क पुत्री को

b.  वयस्क पुत्र को

c.   सेवक को

d.  मुनीम को

 

379. प्रतिवादियों को वैकल्पिक सम्मन भेजने के बारे में प्रावधान निम्नलिखित में से किसके अधीन किया गया है?

a.  आदेश V, सी. पी. सी. का नियम 19

b.  आदेश V, सी. पी. सी. का नियम 20

c.   आदेश V, सी. पी. सी. का नियम 21

d.  आदेश V, सी. पी. सी. का नियम 19A

 

380. सिविल प्रक्रिया संहिता में अभिवचन को परिभाषित किया गया है-

a.  आदेश 8 नियम 1 में

b.  आदेश 8 नियम 2 में

c.   आदेश 6 नियम 1 में

d.  आदेश 6 नियम 2 में

 

381. अभिवचन से अभिप्रेत है-

a.  वादपत्र अथवा उत्तर

b.  वादपत्र अथवा लिखित कथन अथवा उत्तर

c.   वादपत्र मात्र

d.  वादपत्र या लिखित कथन

 

382. अभिवचन में उल्लेख होना चाहिए-

a.  साक्ष्य का

b.  किन्हीं तथ्यों

c.   महत्वपूर्ण तथ्यों का

d.  विधि का

 

383. अभिवचन का सार क्या होता है?

a.  अभिवचन किए गए तथ्य कि विधि

b.  अभिवचन किए गए तथ्य एवं विधि

c.   उपरोक्त सभी

d.  तथ्यों के अभिवचन किए गए विधि

 

384. सिविल प्रक्रिया संहिता अभिवचन में क्या शामिल नहीं होता-

a.  वादपत्र

b.  साक्ष्य

c.   महत्त्वपूर्ण तथ्य

d.  लिखित कथन

 

385. निम्नलिखित में से किसमे किसी साक्ष्य के अभिवचन की आवश्यकता नहीं होती-

a.  लिखित कथन

b.  प्रति शपथपत्र

c.   उपरोक्त सभी

d.  रिट याचिका

 

386. निम्नलिखित में से क्या अभिवचन का एक नियम नहीं है?

a.  तथ्यों का अभिवचन करें कि विधि का

b.  केवल महत्त्वपूर्ण तथ्यों का अभिवचन करें

c.   तथ्यों का अभिवचन करें कि साक्ष्य का

d.  विधि का उल्लेख करें तथा तथ्यों का अभिवचन करें

 

387. अभिवचन हस्ताक्षरित होने चाहिए-

a.  पक्षकार के द्वारा

b.  अधिवक्ता तथा पक्षकार दोनों के द्वारा

c.   अधिवक्ता तथा अधिवक्ता के उत्तरवर्ती के द्वारा

d.  केवल अधिवक्ता के द्वारा

 

388. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 6 नियम 16 के अंतर्गत अभिवचन को इस आधार पर काटा जा सकता है-

a.  अनावश्यक

b.  तंग करने वाला

c.   कलंकात्मक'

d.  उपरोक्त सभी

 

389. न्यायालय किसी भी अभिवचन में किसी भी मामले को काट सकता है-

a.  जो प्रतिकूल प्रभाव डालने, परेशान करने अथवा वाद के निष्पक्ष विचारण में बिलंब करने हेतु प्रवृत्त हो

b.  जो न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग हो

c.   जो अनावश्यक, कलंकात्मक, व्यर्थ अथवा तंग करने वाला प्रतीत हो

d.  उपरोक्त सभी

 

390. 'अभिवचन' को परिवर्तित अथवा संशोधित किया

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 6 नियम 9 के अंतर्गत

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 6 नियम 16 के अंतर्गत

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 6, नियम 17 के अंतर्गत

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 6 नियम 10 के अंतर्गत

 

391. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अंतर्गत किसी पक्षकार के लिए यह साबित करना आवश्यक है कि समस्त आवश्यक प्रयासों के वादभी विषय विचारण के प्रारंभ होने के पूर्व नहीं उठाया जा सका-

a.  आदेश 6, नियम 16

b.  आदेश 6, नियम 16

c.   आदेश 11, नियम 12

d.  आदेश 6 नियम 17

 

392. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 6 नियम 17 के अंतर्गत न्यायालय कार्यवाहियों को परिवर्तित या संशोधित करने की अनुमति दे सकता है अथवा कार्यवाही संशोधित कर सकता है-

a.  केवल प्रतिवादी को

b.  केवल एक प्रतिवादी को, यदि प्रतिवादी एक से अधिक हों

c.   किसी भी पक्षकार को

d.  केवल वादी को

 

393. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अन्तर्गत अभिवचन को संशोधित किया जा सकता है-

a.  विचारण न्यायालय के समक्ष

b.  द्वितीय अपीलीय न्यायालय के समक्ष

c.   प्रथम अपीलीय न्यायालय के समक्ष

d.  केवल (a) तथा (c) के समक्ष

 

394. न्यायालय-

a.  कार्यवाही की किसी भी अवस्था पर अभिवचन के संशोधन की अनुमति दे सकता है।

b.  एक पक्षकार अपने अभिवचन में किसी भी अवस्था पर संशोधन कर सकता है

c.   अभिवचनों में संशोधन की अनुमति नहीं दे सकता

d.  केवल लिखित कथन में संशोधन की अनुमति दे सकता है

 

395. स्वैच्छिक संशोधन का प्रावधान किया गया है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता, आदेश 6 नियम 7

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता, आदेश 6 नियम 19

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता, आदेश 6 नियम 15

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता, आदेश 6 नियम 17

 

396. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 6, नियम 17 के अंतर्गत अभिवचनों में संशोधन की आवेदन को अनुमति दी जा सकती है-

a.  विचारण प्रारंभ होने के पूर्व

b.  विचारण प्रारंभ होने के पूर्व अथवा वादमें से किसी एक

c.   विचारण प्रारंभ होने के बाद

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

397. यदि एक पक्षकार, जिसने सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत अभिवचनों के संशोधन का आदेश हासिल कर लिया है, यदि संशोधन नहीं करता, तब कितने दिनों की अवधि के वादउसे उसमें न्यायालय की अनुमति के बिना संशोधन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी?

a.  14 दिन

b.  30 दिन

c.   15 दिन

d.  90 दिन

 

398. सिविल प्रकिया संहिता, 1908 के आदेश 7,1 का सम्बन्ध है-

a.  वादपत्र में अन्तर्विष्ट की जाने वाली विशिष्टियाँ

b.  अभिवचन के अर्थ से

c.   लिखित कथन से

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

399. "यह दावे का एक कथन होता है, एक दस्तावेज जिसकी प्रस्तुति द्वारा वादसंस्थित किया जाता है" इसे क्या कहा जाता है-

a.  प्रतिदावा

b.  वादपत्र

c.   शपथपत्र

d.  लिखित कथन

 

400. सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 7, नियम 10 किस हेतु प्रावधान करता है-

a.  वादपत्र खारिज करने हेतु

b.  वादपत्र स्वीकृत करने हेतु

c.   वादपत्र लौटाने हेतु

d.  उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

 

401. एक वादपत्र वापस किए जाने योग्य होता है, जब-

a.  वादपत्र में अनुतोष का कम मूल्यांकन किया गया हो

b.  वादपत्र अधिकारिता विहीन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया हो

c.   वादपत्र अपर्याप्त राशि के स्टैम्पपत्र पर हो

d.  वादपत्र दो प्रतियों में प्रस्तुत किया गया हो

 

402. एक न्यायालय वादपत्र को ऐसे न्यायालय में प्रस्तुति हेतु वापस कर सकता है जिसमें वादसंस्थित कियाजाना चाहिए था?

a.  वाद की संस्थापना के समय

b.  विचारण प्रारंभ होने के पूर्व

c.   वाद की किसी भी अवस्था में

d.  विवाद्यकों के तय होने के पूर्व

 

403. एक न्यायालय वादपत्र वापस कर सकता है जब न्यायालय को-

a.  आर्थिक अधिकारिता प्राप्त हो

b.  विषयवस्तु की अधिकारिता प्राप्त हो

c.   क्षेत्रीय अधिकारिता प्राप्त हो

d.  उपरोक्त में कोई भी

 

404. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत यदि न्यायालय किसी भी अवस्था में यह पाता है कि वाद की विषयवस्तु के मामले में उसे आर्थिक अधिकारिता प्राप्त नहीं है तो वह-

a.  वाद में संशोधन करेगा

b.  वाद को वापस कर देगा

c.   वाद खारिज कर देगा

d.  वाद को आगे बढ़ाएगा

 

405. यदि किसी क्षेत्रीय अथवा आर्थिक अधिकारिताविहीन न्यायालय में कोई वादसंस्थित हो चुका हो तो बादपत्र किस योग्य होगा-

a.  वापसी

b.  अस्वीकृति

c.   उपरोक्त में (a) अथवा (b)

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

406. आदेश 7 नियम 10 से 10 किस सम्बन्ध में प्रावधान करते हैं-

a.  वादपत्र को खारिज किया जाना

b.  वादपत्र में विश्वास किए गए दस्तावेज

c.   वादपत्र की वापसी

d.  वादपत्र की स्वीकृति

 

407. सी.पी.सी. के तहत वादपत्र के किसी प्रक्रम में न्यायालय यह पाता है कि उसे संबंधित मामले के संबंध में आर्थिक क्षेत्राधिकार नहीं है-

a.  वाद में आगे की कार्यवाही करेगा।

b.  वाद में संशोधन करेगा।

c.   वाद वापिस करेगा।

d.  वाद को निरस्त करेगा।

 

408. क्या किसी डिक्री को रद्द करने के वादकोई अपीली अथवा पुनरीक्षण न्यायालय सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 10 के अंतर्गत वादपत्र को वापस कर सकता है-

a.  पक्षकारों की सहमति से

b.  हाँ

c.   नहीं

d.  तकनीकी आधार पर

 

409. किसी वादपत्र को खारिज किया जा सकता है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7, नियम 10 के अंतर्गत

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 10 के अंतर्गत

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के अंतर्गत

d.  उपरोक्त सभी

 

410. न्यायालय सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7, नियम 11() के अंतर्गत वादपत्र अस्वीकृत कर सकता है यदि फाइल किया गया हो-

a.  तीन प्रतियों में

b.  दो प्रतियों में

c.   चार प्रतियों में

d.  केवल (c) कि (a) अथवा (b)

 

411. "वादपत्र " को दो प्रतियों में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इस नियम को अंतर्विष्ट किया गया था-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 1976

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2002

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2000

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

412. एक वाद 20.11.2012 को प्रस्तुत किया गया था और यह दलील दी गई थी कि वादकारण 06.10.2012 को उत्पन्न हुआ था। प्रतिवादी प्रस्तुत हुआ और बिना लिखित कथन दाखिल किए उसने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के अंतर्गत इस आधार पर एक आवेदन प्रस्तुत किया कि वाद परिसीमा द्वारा बाधित है। सही विधिक स्थिति का उल्लेख कीजिए-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के अंतर्गत आवेदन पोषणीय नहीं होती क्योंकि लिखित कथन पहले प्रस्तुत किया जाना चाहिए

b.  वादपत्र को खारिज कर दिया जाएगा क्योंकि वादपरिसीमा विधि से बाधित है

c.   आवेदन को खारिज किया जाना उचित होगा। पक्षकारों के साक्ष्य दर्ज किए बिना आपत्ति पर निर्णय नहीं किया जा सकता

d.  आवेदन स्वीकार की जानी चाहिए क्योंकि वादपत्र में सही वाद हेतुक का उल्लेख नहीं है

 

413. गलत कथन को चिन्हित कीजिए-

a.  वाद की प्रस्तुति के समय न्यायालय को वाद पर विचारण में अवश्य सक्षम होना चाहिए। वादमें मूल्य में होने वाला परिवर्तन अधिकारिता को प्रभावित नहीं करता

b.  वादपत्र में यह वादी का मूल्यांकन होता है जो न्यायालय की अधिकारिता का निर्धारण करता है कि वह राशि जिसके लिए न्यायालय द्वारा अंततः डिक्री पारित की जा सकती है

c.   यदि न्यायालय की आर्थिक अधिकारिता 10,000 रुपए है तथा बादी इस राशि हेतु एक वाद प्रस्तुत करता है और अंततः न्यायालय पाता है कि 15,000 रुपए बकाया हैं तो उस राशि के लिए डिक्री पारित करने हेतु न्यायालय अपनी अधिकारिता से वंचित नहीं किया जाएगा

d.  यदि वादी न्यायालय के चयन के प्रयोजन से दावे का अधिक मूल्यांकन अथवा कम मूल्यांकन करता है तो यह न्यायालय का कर्तव्य नहीं है कि वह इसे समुचित न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने हेतु वापस करे

 

414. जहाँ वादपत्र दो प्रतियों में प्रस्तुत किया गया हो, वहाँ वादपत्र-

a.  न्यायालय द्वारा खारिज किया जा सकता है

b.  न्यायालय द्वारा स्वीकृत किया जा सकता है

c.   न्यायालय द्वारा वापस किया जा सकता है

d.  न्यायालय द्वारा अस्वीकृत किया जा सकता है

 

415. एक वादपत्र को खारिज कर दिया जाएगा यदि-

a.  यह गलत न्यायालय में प्रस्तुत किया गया हो

b.  समुचित पक्षकारों को शामिल किया गया हो

c.   यह वाद हेतुको का उल्लेख नहीं करता

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

416. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अंतर्गत वादहेतुक के अभाव में न्यायालय द्वारा एक वादपत्र को खारिज किया जाता है-

a.  आदेश 7, नियम 11()

b.  आदेश 7, नियम 11()

c.   आदेश 7 नियम 11()

d.  आदेश 7, नियम 11()

 

417. एक न्यायालय किसी वादपत्र को कब अस्वीकृत कर सकता है-

a.  जहाँ वाद विधि द्वारा बाधित हो

b.  जहाँ वादपत्र दो प्रतियों में रहा हो

c.   जब वादी नियम 9 का पालन करने में विफल रहा हो

d.  उपरोक्त सभी

 

418. वादपत्र के अस्वीकृत हो जाने के वादक्या वादी उसी वादकारण पर एक नवीन वाद संस्थित कर सकता है-

a.  उच्च न्यायालय की अनुमति से एक अन्य वाद संस्थित कर सकता है.

b.  एक अन्य वाद संस्थापित कर सकता है

c.   एक अन्य वाद संस्थित नहीं कर सकता

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

419. एक ही वादकारण के आधार पर एक नवीन वाद27 बाधित नहीं होता जब-

a.  इसे सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9, नियम 2 के अंतर्गत खारिज किया गया हो

b.  इसे सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9, अंतर्गत खारिज किया गया हो

c.   इसे सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के अंतर्गत नामंजूर किया गया हो

d.  उपरोक्त तीनों में कोई एक

 

420. निम्नलिखित में से किस आधार पर एक वादपत्र को नामंजूर नहीं किया जाएगा-

a.  जहाँ इसमें वादहेतुक का उल्लेख किया गया हो

b.  जहाँ वाद वादपत्र में उल्लिखित किसी कथन से किसी विधि द्वारा बाधित होने वाला प्रतीत होता हो

c.   जहाँ दावा किए गए अनुतोष का कम मूल्यांकन किया गया हो, तथा न्यायालय द्वारा वादी से एक निश्चित समय में इसे सही करने की माँग किए जाने पर वादी ऐसा करने में विफल रहा हो

d.  जहाँ इसे किसी अधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया हो

 

421. निम्नलिखित में से किसे वादपत्र की नामंजूरी के नए आधार के रूप में सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7, नियम 11 में जोड़ा गया है?

a.  वादहेतुक घोषित किया जाना

b.  वादपत्र दो प्रतियों में प्रस्तुत किया जाना

c.   दावा किए गए अनुतोष का कम मूल्यांकन

d.  किसी विधि द्वारा बाधित

 

422. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7, नियम 11 के अंतर्गत वादपत्र को नामंजूर करने का आदेश-

a.  एक डीम्ड डिक्री होता है

b.  एक अंतरिम आदेश होता है।

c.   एक डिक्री होता है

d.  एक अंतरिम आदेश होता है।

 

423. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 7 नियम 11 के अंतर्गत वादपत्र नामंजूर नहीं किया जाएगा-

a.  जहाँ वादी नियम 9 का पालन करने में विफल रहा हो

b.  जहाँ इसे दो प्रतियों में प्रस्तुत किया गया हो

c.   जहाँ यह वादहेतुक को घोषित करता हो

d.  जहाँ वादपत्र में कथनं से वाद किसी विधि द्वारा बाधित हो सकने वाला प्रतीत होता हो

 

424. अपने दावे के समर्थन में वादी जिस दस्तावेज पर विश्वास करता है उसे उसके द्वारा न्यायालय में किसके साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए-

a.  न्यायालय द्वारा निर्धारित विवाद्यकों को तय करने की तिथि पर

b.  वाद की सुनवाई के पूर्व अथवा उसके दौरान

c.   वादपत्र के साथ

d.  समन जारी करने के न्यायालय के आदेश की तिथि से 7 दिनों के अंदर

 

425. जहाँ वादी अपने अधिकार अथवा कब्जे के किसी दस्तावेज के आधार पर वादप्रस्तुत करता है वहाँ उसे इसे अथवा इसकी एक प्रतिलिपि को प्रस्तुत करना चाहिए

a.  विवाद्यकों के निर्धारण के समय

b.  न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशानुसार समय

c.   वादपत्र के साथ

d.  साक्ष्य देते समय

 

426. आदेश VII नियम 11 व्यवहार प्रक्रिया संहिता, 1908 के प्रावधानों के अन्तर्गत वादपत्र के नामंजूर किए जाने पर उसी वाद हेतुक के बारे में नया वादपत्र प्रस्तुत करना-

a.  प्राङ्न्याय के सिद्धान्तों द्वारा वर्जित है।

b.  केवल नामंजूरी के कारण ही, वादी नया वादपत्र प्रस्तुत करने से प्रवारित नहीं हो जाएगा।

c.   आदेश XXIII के अन्तर्गत वर्जित

d.  उपरोक्त में से कोई नहीं।

 

427. लिखित कथन तथा प्रतिदावे से सम्बन्धित प्रावधान किए गए हैं-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 10 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 11 में

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9 में

 

428. लिखित कथन का अर्थ है-

a.  वादी का वाद

b.  प्रतिवादी का वाद

c.   वादी के वाद के प्रति प्रतिवादी का उत्तर

d.  वादी द्वारा प्रतिवादी के वाद का उत्तर

 

429. परिसीमा की अवधि, जिसके अंदर प्रतिवादी अपना लिखित कथन प्रस्तुत करेगा, सामान्यतः होती है-

a.  समन तामील होने के 60 दिनों के अंदर

b.  समन तामील होने के 30 दिनों के अंदर अथवा यदि न्यायालय द्वारा अनुमति दी गई हो तो 90 दिनों के अंदर

c.   समन तामील होने के 15 दिनों के अंदर

d.  सदैव समन तामील होने के 90 दिनों के अंदर

 

430. एक प्रतिवादी को अपने बचाव में लिखित कथन स्वयं को समन तामील किए जाने की तिथि से तीस दिनों के अंदर प्रस्तुत कर देना चाहिए। इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है-

a.  90 दिनों तक

b.  100 दिनों तक

c.   30 दिनों तक

d.  60 दिनों तक

 

431. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत समन तामील होने की तिथि के वादलिखित कथन प्रस्तुत करने हेतु औपचारिकतौर पर किस अवधि का प्रावधान किया गया है?

a.  45 दिन

b.  60 दिन

c.   30 दिन

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

432. वादपत्र में तथ्यों का प्रत्येक आरोप, यदि किसी असमर्थ व्यक्ति के विरूद्ध छोड़कर, से यदि विशिष्टतौर पर इंकार किया गया हो तो उसे समझा जाएगा-

a.  स्वीकृत

b.  प्रमाणित

c.   खंडन किया गया

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

433. विनिर्दिष्टतः प्रत्याख्यान का प्रावधान किया गया है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 के नियम 3 तथा 5 में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 के नियम 7 तथा 8 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 के नियम 2 तथा 9 में

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 के नियम 1 तथा 12 6 में

 

434. मुजरा तथा प्रतिदावों सम्बन्धी प्रावधान सिविल प्रक्रिया संहिता में कहाँ निहित हैं-

a.  आदेश 8

b.  आदेश 9

c.   आदेश 6

d.  आदेश 7

 

435. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सा प्रावधान मुजरा से सम्बन्धित है?

a.  आदेश 8 नियम 5

b.  आदेश 7 नियम 5

c.   आदेश 7 नियम 6

d.  आदेश 8 नियम 6

 

436. ने 500 रुपए के एक विनिमयपत्र पर पर वाद प्रस्तुत कर दिया। के पास के विरूद्ध 1,000 रुपए का एक निर्णय मौजूद है। दोनों दावे, जो निश्चित धन- सम्बन्धी माँगें हैं, का मुजरा किया जा सकता है। यह उदाहरण कहाँ दिया गया है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 के नियम 5 में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 के नियम 7 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 के नियम 6 में  

d.  इनमें से कोई

 

437. मुजरा हो सकता है-

a.  साम्यिक मुजरा

b.  विधिक मुजरा

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

438. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 के नियम 6 में मुजरा की अनुमति दी जा सकती है यदि-

a.  वाद संपत्ति की वसूली का हो

b.  वसूल की जाने वाली संपत्ति का मूल्य दो लाख रुपयों से कम हो

c.   प्रतिवादी वाद का एक लिखित कथन प्रस्तुत करता हो

d.  प्रतिवादी द्वारा दावा किया गया मुजरा किसी निश्चित धनराशि का हो

 

439. निम्नलिखित में से किस मामले में दावे का मुजरा कर सकता है?

a.  एक विनिमयपत्र पर पर वाद लाता है। का आरोप है कि ने के माल का बीमा कराने की सदोष लापरवाही की है और वह क्षतिपूर्ति देने का उत्तरदायी है।

b.  500 रुपए के विनिमयपत्र के लिए पर वादलाता है के पास से 1,000 रुपए ऋण वसूली का एक निर्णय उपलब्ध है

c.   1,000 रुपए के लिए तथा पर वादलाता है, जबकि ऋण अकेले द्वारा के प्रति देय है।

d.  1,000 रुपए के लिए तथा पर वाद लाता है, जबकि ऋण अकेले द्वारा के प्रति देय है।

 

440. 1,000 रुपए के विनिमयपत्र के लिए पर वाद लाता है। के पास से 2,000 रुपए ऋण वसूली का एक निर्णय उपलब्ध है-

a.  दावे का मुजरा नहीं किया जा सकता क्योंकि विवाद्यक अलग-अलग हैं

b.  आर्थिक माँग का मुजरा किया जा सकता है क्योंकि दोनों दावे निश्चित है।

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों सही हैं:

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

441. तथा 1,000 रुपए की वसूली के लिए पर वादलाते हैं। पर मात्र का ऋण बकाया है। यहाँ क्या कर सकता है-

a.  के विरुद्ध ऋण मुजरा कर सकता है

b.  अकेले से बकाया ऋण का मुजरा नहीं कर सकता

c.   के विरूद्ध ऋण मुजरा कर सकता है

d.  तथा दोनों के विरूद्ध ऋण मुजरा कर सकता है

442. यदि किसी ऐसे मामले, जिसमें प्रतिवादी ने प्रतिदावा स्थापित किया हो तो वादी का वाद रोक दिया जाता है, बंद अथवा खारिज कर दिया जाता है, तब प्रतिदावा-

a.  उच्च न्यायालय की अनुमति से जारी रखा जा सकता है

b.  कोई सुस्पष्ट प्रावधान नहीं है

c.   रोक दिया जाएगा

d.  इसके बावजूद आगे बढ़ाया जाएगा

 

443. ऐसा कौन सा प्रावधान है जो जब प्रतिवादी के लिखित कथन अथवा अनुक्रमिक अभिवचन प्रस्तुत करने में विफल रहने पर न्यायालय को निर्णय घोषित करने के योग्य बना देता है?

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 10 नियम 8

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश18 नियम 8

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 18 नियम 10

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 8 नियम 10

 

444. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 नियम 10 के अंतर्गत लिखित कथन प्रस्तुत करने में विफल रहने पर न्यायालय-

a.  आगे कोई अन्य आदेश जारी कर सकता है

b.  तुरंत निर्णय घोषित कर सकता है

c.   बचाव पक्ष को हटाए जाने का आदेश दे सकता है

d.  (a), (b) अथवा (c) में से कोई एक

 

445. यदि प्रतिवादी लिखित कथन प्रस्तुत करने में विफल रहता है तो-

a.  न्यायालय नोटिस जारी करेगा

b.  न्यायालय वाद की एकपक्षीय सुनवाई करेगा

c.   न्यायालय उसके विरूद्ध निर्णय पारित कर सकता है।

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

446. आदेश 8 के अंतर्गत लिखित कथन प्रस्तुत करने में हुई चूक पर निर्णय की घोषणा-

a.  आज्ञापक है।

b.  विवेकाधीन है।

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के नियम 10 के अनुसार निर्देशात्मक है।

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

447. वाद की सुनवाई हेतु बुलाने पर दोनों पक्षकारों के उपसंजात होने पर न्यायालय क्या कर सकता है?

a.  सुलह हेतु निर्देशित कर सकता है।

b.  वाद खारिज कर सकता है।

c.   एकपक्षीय आदेश पारित कर सकता है।

d.  माध्यस्थता हेतु निर्देशित कर सकता है

 

448. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9 के नियम 3 के अंतर्गत वाद को खारिज किया जाना

a.  उसी वादकारण के सम्बन्ध में एक नवीन वाद को वर्जित करता है।

b.  उच्च न्यायालय की अनुमति से एक नवीन वाद प्रस्तुत किया जा सकता है।

c.   जिला न्यायालय की अनुमति से एक नवीन वाद प्रस्तुत किया जा सकता है।

d.  उसी वादकारण के सम्बन्ध में एक नवीन वाद को वर्जित नहीं करता

 

449. जहाँ किसी वाद को सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9, नियम 3 अथवा नियम 2 के अंतर्गत खारिज किया गया हो-

a.  वादी (परिसीमा विधि अंधीन) एक नवीन वाद ला सकता है अथवा खारिज किए जाने को निरस्त किए जाने का आदेश दिए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत कर सकता है

b.  वादी का नवीन वाद लाना वर्जित हो जाता है

c.   वादी के पास उपलब्ध एकमात्र उपाय है ऐसे आदेश को निरस्त किए जाने की मांग करना

d.  एकमात्र उपलब्ध उपाय है नवीन वाद लाना

 

450. किसी वाद को चूक में खारिज किया जा सकता है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 9, नियम 3

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 9, नियम 8

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 9, नियम 2

d.  उपरोक्त (b) तथा (c) दोनों

 

451. समान वादहेतुक के सम्बन्ध में एक नवीन वाद अनुज्ञेय है-

a.  जहाँ किसी वाद को आदेश 22 नियम 3 (2) के अंतर्गत खारिज किया गया हो

b.  जहाँ वादी आदेश 23, नियम 1 (1) के अंतर्गत वाद को त्याग देता है।

c.   जहाँ किसी वाद को आदेश 9 नियम 8 के अंतर्गत खारिज किया गया हो

d.  जहाँ किसी वाद को आदेश 9 नियम 3 के अंतर्गत खारिज किया गया हो

 

452. एक ऐसे वाद, जिसमें तो वादी ही प्रतिवादी नियत दिवस पर सुनवाई के लिए उपस्थित होते हैं, एक न्यायालय सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9 नियम 3 के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सा आदेश पारित कर सकता है?

a.  खर्चे आरोपित किया जाना

b.  अनिश्चितकालीन स्थगन

c.   सामान्य स्थगन

d.  वाद को खारिज किया जाना

 

453. एक वाद खारिज किया जा सकता है जहाँ प्रतिवादी को समन जारी किए गए हों और वे तामील के बिना वापस गए हों, तथा वादी एक निश्चित अवधि में नवीन / नया वाद लाने में विफल रहा हो। यह अवधि क्या है

a.  सात दिन

b.  ऐसी वापसी से दो महीने

c.   तीस दिन

d.  साठ दिन

 

454. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9 नियम 7 के अंतर्गत आवेदन कितने दिनों के अंदर संस्थित किया जा सकता है-

a.  आदेश से 60 दिनों के अंदर

b.  वादलंबित रहने के दौरान किसी भी समय

c.   आदेश से 30 दिनों के अंदर

d.  किसी भी समय अथवा सुनवाई की अगली तिथि के पूर्व

 

455. वाद में सुनवाई के दिन पर जहाँ प्रतिवादी उपस्थित और वादी अनुपस्थित तथा जहाँ दावे के किसी भाग को स्वीकार किया जा चुका हो न्यायालय-

a.  सम्पूर्ण वाद को खारिज कर देगा

b.  सम्पूर्ण दावे के लिए डिक्री पारित कर देगा

c.   शेष से सम्बन्धित वाद को खारिज कर देगा

d.  प्रतिवादी के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही करेगा

 

456. वादी के उपस्थित होने के कारण सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9, नियम 8 के अंतर्गत खारिज किए गए वाद को किस प्रावधान के अंतर्गत पुनर्बहाल किया जा सकता है-

a.  आदेश 9, नियम 11

b.  आदेश 9, नियम 9

c.   आदेश 9, नियम 10

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

457. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9, नियम 8 के अंतर्गत किसी वादके खारिज हो जाने पर उसी वादहेतुक के लिए एक नया वादसिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9 नियम 9 के अंतर्गत लाया जाना-

a.  परिसीमा के कानून के अधीन वर्जित नहीं है.

b.  वर्जित है

c.   किसी भी परिस्थिति में वर्जित नहीं

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

458. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत किसी एकपक्षीय डिक्री को रद्द किया जा सकता है-

a.  आदेश 9, नियम 13 के अंतर्गत किया

b.  आदेश 9, नियम 11 के अंतर्गत

c.   आदेश 9, नियम 5 के अंतर्गत

d.  आदेश 9, नियम 10 के अंतर्गत

 

459. किसी एकपक्षीय डिक्री किस आधार पर अपास्त की जा सकती है-

a.  समुचित रूप से समन तामील किए जाने पर

b.  किसी पर्याप्त कारणवश उपस्थित होने पर

c.   मात्र (a) सही है

d.  (a) तथा (b) दोनों

 

460. बँटवारे के एक वादमें तीन प्रतिवादियों को एकपक्षीय निर्धारित किया गया। प्रारंभिक डिक्री पारित कर दी गई। तीनों प्रतिवादियों में से एक द्वारा प्रस्तुत आवेदन पर न्यायालय ने सभी प्रतिवादियों के विरूद्ध डिक्री को अपास्त कर दिया। न्यायालय का आदेश- क्रिया

a.  वैध है

b.  अवैध है

c.   अनियमित है

d.  अन्यायपूर्ण है

 

461. जहाँ किसी एकपक्षीय डिक्री के विरूद्ध किसी अपील को अपीलकर्ता द्वारा वापस ले लिया गया हो, वहाँ सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9, नियम 13 के अंतर्गत आवेदन-

a.  पोषणीय होगा

b.  अस्वीकार कर दिया जाएगा

c.   वापस कर दिया जाएगा

d.  अपीली न्यायालय को राय हेतु निर्देशित किया जाएगा

 

462. किसी एकपक्षीय डिक्री के विरूद्ध उपलब्ध उपचारों में शामिल हैं-

a.  डिक्री को अपास्त करने हेतु अर्जी

b.  अपील

c.   पुनर्विचार

d.  उपरोक्त सभी

 

463. एक सिविल वाद को प्रतिवादी के साक्षी के परीक्षण हेतु विचारण न्यायालय द्वारा बार-बार निर्धारित किया गया था किन्तु प्रतिवादी द्वारा इस अवसर का उपयोग नहीं किया गया। अतः 18.11.2016 को जब तो प्रतिवादी और ही उसके अधिवक्ता प्रस्तुत हुए तो विचारण न्यायालय ने एकपक्षीय कार्यवाही की और अंतिम तर्कों को सुना तथा वाद को निर्णय हेतु 21 सुरक्षित कर लिया। 28.11.2016 को प्रतिवादी ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9, नियम 7 सहपठित धारा 151 के अंतर्गत एक आवेदन प्रस्तुत कर दी जो-

a.  पोषणीय है

b.  अपोषणीय है

c.   स्वीकार करना अथवा करना न्यायालय का विवेकाधीन मामला है

d.  स्वीकार करना अथवा करना न्यायालय के अंतर्निहित शक्तियों का मामला है

 

464. जब कोई एकपक्षीय डिक्री पारित की गई हो तो प्रतिवादी-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9 नियम 13 के अंतर्गत एक आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96 के अंतर्गत एक अपील प्रस्तुत कर सकता है।

c.   उपरोक्त (a) अथवा (b) में से एक अपना सकता है।

d.  यदि उपरोक्त (b) में आवेदन खारिज हो जाती है तो वह पारित आदेश की शुद्धता को विवादित करने हेतु अपील कर सकता है

 

465. एक एकपक्षीय डिक्री इस आधार अपास्त की जा सकती है कि-

a.  एकपक्षीय डिक्री किसी भी परिस्थिति में अपास्त नहीं 'की जा सकती

b.  समन समुचित तौर पर तामील नहीं हुए थे

c.   प्रतिवादी अनुपस्थिति था, क्योंकि प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की प्रतियाँ प्रतिवादी द्वारा वादपत्र के साथ प्रस्तुत नहीं 23 की गई थीं

d.  प्रतिवादी ने समन लेने से इंकार किया हो तथा उसके वादउसे कोई नया समन जारी किए गए हों

 

466. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के निम्नलिखित प्रावधानों में से किसके अंतर्गत एकपक्षीय आदेश तथा एकपक्षीय डिक्री को अपास्त किया जा सकता है-

a.  आदेश 9, नियम 11 तथा आदेश 9 नियम 12

b.  आदेश 9 नियम 7 तथा आदेश 9 नियम 10

c.   आदेश 9, नियम 4 तथा आदेश 9 नियम 5

d.  आदेश 9, नियम 7 तथा आदेश 9, नियम 13

 

467. साक्ष्य की अवस्था में वादी के अधिवक्ता ने स्थगन हेतु आवेदन प्रस्तुत किया जिसे खारिज कर दिया गया और वाद को साक्ष्य के अभाव में खारिज कर दिया गया। वादी के पास उपलब्ध उपचार है-

a.  पुनर्विचार

b.  नवीन वाद

c.   प्रथम अपील

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9 के नियम 9 के अंतर्गत आवेदन

 

468. एकपक्षीय के विरूद्ध कार्यवाही करने के वादप्रतिवादी को-

a.  वाद में किसी कार्यवाही में भाग लेने से पूर्णतः रोक

b.  यदि उसके विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की जा चुकी हो तो एकपक्षीय आदेश को अपास्त करवाए बिना ही कार्यवाही में प्रवेश करने तथा जो कुछ भी वह कर सका होता उसे करने की स्वतंत्रता होती है

c.   कार्यवाही लंबित रहने की अवस्था में कार्यवाही में प्रवेश करने की स्वतंत्रता होती है।

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

469. किसी वाद को खारिज किया जा सकता है जहाँ-

a.  वादी द्वारा समुचित कदम, जैसे न्यायालय शुल्क, डाक खर्च अथवा वाद की प्रतियों की आवश्यक संख्या जमा करने के परिणामस्वरूप प्रतिवादी पर समन तामील किए जा सके हों

b.  कोई भी पक्ष वाद की सुनवाई के समय उपस्थित हुआ

c.   वादी, प्रतिवादी पर समन की तामील हुए बिना वापस हो जाने पर, 7 दिनों में नवीन समन के लिए आवेदन देने में विफल रहा हो

d.  उपरोक्त सभी

 

470. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के किस प्रावधान के 4 अंतर्गत न्यायालय पक्षकारों को किसी वैकल्पिक विवाद समाधान की विधि का निर्देश दे सकता है-

a.  आदेश 10 नियम 1-

b.  आदेश 10, नियम 1-

c.   आदेश 10 नियम 1-

d.  आदेश 11 नियम 1

 

471. सिविल प्रक्रिया संहिता के अनुसार वाद की प्रथम सुनवाई के समय न्यायालय को-

a.  निश्चित करना चाहिए कि आवेदन में आरोपों को स्वीकार अथवा अस्वीकार किया गया है

b.  विवाद्यकों को अवश्य तय एवं दर्ज करना चाहिए

c.   वादी के साक्ष्य को दर्ज करना चाहिए

d.  उपरोक्त सभी

 

472. आदेश X नियम 2 सिविल प्रक्रिया संहिता के अधीन मौखिक परीक्षा का उद्देश्य है-

a.  साक्ष्य अभिलिखित करना

b.  स्वीकृति सुनिश्चित करना

c.   दोनों (a) और (b)

d.  वाद में विवादित विषय का विशदीकरण करना

 

473. सिविल प्रकिया संहिता के आदेश 10 नियम 2 के अंतर्गत न्यायालय द्वारा किसी पक्षकार के मौखिक परीक्षा के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है-

a.  न्यायालय किसी दस्तावेज के संदर्भ में किसी भी पक्षकार का प्रति परीक्षण कर सकता है

b.  दूसरे पक्षकारों के अभिवचनों में परीक्षा का आरोपों तक सीमित होना आवश्यक नहीं है किन्तु यह वाद में विवादास्पद किसी भी विषय को स्पष्ट करने से सम्बन्धित हो सकता है।

c.   न्यायालय केवल पक्षकारों बल्कि वाद के किसी भी पक्ष का साथ रहने वाले व्यक्ति का भी परीक्षण कर सकता है

d.  परीक्षण के दौरान दिया गया कथन शपथ पर नहीं होता

 

474. सिविल प्रकिया संहिता के आदेश 10 नियम 2 के अंतर्गत मौखिक परीक्षा का अर्थ है-

a.  स्वीकृति हासिल करना

b.  वाद में विवादास्पद विषयों को स्पष्ट करना

c.   साक्ष्य दर्ज करना

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

475. किसी भी परिप्रश्न के प्रति इस आधार पर आपत्ति की जा सकती है कि यह-

a.  अप्रासंगिक है

b.  कलंकात्मक है

c.   सद्भावपूर्ण प्रतीत नहीं होती

d.  उपरोक्त सभी अथवा उनमें से कोई एक

 

476. परिप्रश्न का उत्तर सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 11, नियम 8 के अंतर्गत किस प्रकार दिया जाएगा-

a.  एक सामान्य अर्जी पर

b.  दस्तावेज प्रस्तुत करने पर

c.   एक शपथपत्र पर

d.  उपरोक्त सभी

 

477. परिप्रश्नों के उत्तर देने अथवा प्रकटीकरण हेतु अथवा दस्तावेजों के निरीक्षण हेतु दिए गए आदेश के अनुपालन किए जाने के परिणामों का उल्लेख किया गया है

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 11, अंतर्गत नियम 21 के

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 12 नियम 2 के अंतर्गत

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 11, नियम 12 अंतर्गत

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 12, नियम 12 अंतर्गत

 

478. सिविल न्यायालय द्वारा परिप्रश्न सुपुर्द किए जाने हेतु अनुमति प्रदान की जा सकती है-

a.  विरोधी पक्ष द्वारा उठाई गई आपत्ति के बावजूद

b.  यदि न्यायालय वाद के निष्पक्ष निपटारे हेतु ऐसा आवश्यक समझता हो

c.   केवल प्रतिवादी को क्योंकि वादी वाद का स्वामी होता है

d.  भले ही वे वाद प्रश्नगत मामलों से सम्बन्धित हों

 

479. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत परिप्रश्नों का उत्तर एक शपथपत्र द्वारा दिया जाएगा जिसे... दिनों अथवा ऐसे समय के अंदर प्रस्तुत करना होगा जैसा न्यायालय अनुमति दे

a.  10

b.  45

c.   30

d.  20

 

480. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 12 नियम 2 के अंतर्गत नोटिस द्वारा आह्वान करने हेतु दिया जाने वाला समय होता है-

a.  नोटिस तामील होने की तिथि से 7 दिन

b.  नोटिस तामील होने की तिथि से 21 दिन

c.   नोटिस तामील होने की तिथि से 15 दिन

d.  नोटिस तामील होने की तिथि से 10 दिन

 

481. जब सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 12, नियम 4 के अधीन किसी पक्षकार को दूसरे पक्षकार द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को स्वीकार करने हेतु नोटिस द्वारा आह्वान किया गया हो तो नोटिस तामील किए गए पक्षकार को कितने दिनों के अंदर तथ्यों को स्वीकार करना होता है-

a.  नोटिस तामील होने की तिथि से 9 दिन

b.  नोटिस तामील होने की तिथि से 7 दिन

c.   नोटिस तामील होने की तिथि से 6 दिन

d.  नोटिस तामील होने की तिथि से 21 दिन

 

482. स्वीकृतियों के आधार पर निर्णय दिया जा सकता है

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 12 नियम 6 के अंतर्गत

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 12 नियम 8 के अंतर्गत

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 12 नियम 2 के अंतर्गत

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 12 नियम 4 के अंतर्गत

 

483. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 12 नियम 8 सम्बन्धित है-

a.  दस्तावेजों को पेश करने हेतु सूचना से

b.  तथ्यों को स्वीकार करने हेतु सूचना से

c.   दस्तावेजों को स्वीकार करने हेतु सूचना से

d.  उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

 

484. जहाँ एक वादी अपने अधिकार अथवा कब्जे के किसी दस्तावेज के आधार पर वादप्रस्तुत करता है वहाँ उसे उसकी एक प्रतिलिपि अवश्य प्रस्तुत करनी चाहिए-

a.  विवाद्यकों की विरचना के समय

b.  न्यायालय के आदेश पर

c.   वादपत्र के साथ

d.  साक्ष्य प्रस्तुत करते समय

 

485. सिविल प्रक्रिया संहिता का कौन सा प्रावधान दस्तावेजों की प्रस्तुति, परिबद्धता एवं वापसी से सम्बन्धित है?

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता आदेश 17

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता आदेश 24

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता आदेश 13

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता आदेश 5

 

486. "विवाद्यकों की विरचना" का प्रावधान सिविल प्रक्रिया संहिता के किस नियम के अंतर्गत किया गया है?

a.  आदेश 16, नियम 1

b.  आदेश 13, नियम 1

c.   आदेश 15 नियम 1

d.  आदेश 14, नियम 1

 

487. न्यायालय पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत आरोपों / विषयवस्तुओं के आधार पर विवाद्यकों की विरचना नहीं कर सकता है-

a.  आवेदन में

b.  दस्तावेजों में

c.   अभिवचनों में

d.  शपथपत्र में

 

488. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत किसी वाद में किस सम्बन्ध में विवाद्यकों की विरचना की जाती है-

a.  तथ्यों के प्रश्न पर

b.  तथ्यों एवं विधि के मिलेजुले प्रश्नों पर

c.   विधि के प्रश्न पर

d.  उपरोक्त सभी

 

489. व्यवहार प्रक्रिया संहिता, 1908 के किस प्रावधान के आधार पर डिक्री पारित करने से पूर्व विवाद्यक को संशोधित करने अथवा अतिरिक्त विवाद्यकों को विरचित करने की शक्ति न्यायालय में निहित है?

a.  आदेश XIV नियम 6

b.  धारा 151

c.   आदेश XIV नियम 1

d.  आदेश XIV नियम 5

 

490. निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?

a.  जहाँ किसी वाद को प्रारंभिक विवाद्यक पर निपटाया जा सकता है वहाँ न्यायालय को वाद में स्थिरीकृत अन्य विवाद्यकों पर निर्णय घोषित करने की आवश्यकता नहीं रहती।

b.  जहाँ विधि एवं तथ्य दोनों के विवाद्यक उत्पन्न हों और यदि न्यायालय का मत हो कि वाद को अधिकारिता से सम्बन्धित किसी विवाद्यक के आधार पर निपटाया जा सकता है, वहाँ यह अन्य विवाद्यकों के स्थिरीकरण को अधिकारिता के विवाद्यक की अवधारणा किए जाने तक स्थगित कर सकता है।

c.   प्रारंभिक विवाद्यक किसी उत्पन्न वाद तथा तत्समय प्रवर्तित विधि से बाधित होने से सम्बन्धित हो सकते हैं।

d.  इनमें से कोई नहीं

 

491. सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 15 चर्चा करता है-

a.  साक्षी की हाजिरी पर

b.  नोटिसों पर

c.   प्रथम सुनवाई में वाद के निपटारे पर

d.  विवाद्यकों के स्थिरीकरण पर

 

492. सिविल प्रक्रिया संहिता का कौन सा प्रावधान समन तथा साक्षियों की हाजिरी से सम्बन्धित है?

a.  आदेश 5

b.  आदेश 16

c.   आदेश 21

d.  आदेश 10

 

493. न्यायालय को ऐसे व्यक्ति को समन करने का अधिकार है जिसे किसी पक्षकार के द्वारा साक्षी के तौर पर बुलाया गया हो-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 16, नियम 12 के अंतर्गत

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 16 नियम 10 के अंतर्गत

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 16, नियम 18 अंतर्गत

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 16 नियम 14 के अंतर्गत

 

494. विवाद्यकों के स्थिरीकरण के वादकितने दिनों के अंदर साक्षियों की सूची प्रस्तुत कर दी जानी चाहिए-

a.  45 दिन

b.  60 दिन

c.   15 दिन

d.  30 दिन

 

495. किसी भी वादमें पक्षकारों के द्वारा साक्षियों की सूची प्रस्तुत की जानी होती है-

a.  विवाद्यकों के स्थिरीकरण के पश्चात्

b.  किसी भी समय

c.   विवाद्यकों के स्थिरीकरण के पूर्व

d.  उपरोक्त सभी

 

496. कारागार, जैसा कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 16 में परिभाषित है, में शामिल हैं-

a.  कोई सुधारालय, बोर्स्टल संस्था या इसी प्रकार की कोई और संस्था

b.  कोई भी स्थान जिसे सरकार द्वारा, साधारण अथवा विशेष आदेश द्वारा एक अतिरिक्त जेल होना घोषित किया गया हो

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  केवल (a) सही है।

 

497. किस स्थिति में कारागार का प्रभारी अधिकारी न्यायालय के आदेश के बावजूद साक्ष्य के लिए बंदी को प्रस्तुत करने से इंकार कर सकता है-

a.  जहाँ कैदी सत्ताधारी दल से सम्बद्ध हो

b.  जहाँ कैदी भूतपूर्व मंत्री हो

c.   जहाँ कैदी एक सरकारी नौकर हो

d.  जहाँ चिकित्सा अधिकारी ने प्रमाणित किया हो कि कैदी कारावास से हटाए जाने योग्य नहीं है।

 

498. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 17 के उप-नियम (1) के परंतुक के अंतर्गत अधिकतम कितने स्थगन दिए जा सकते हैं-

a.  तीन

b.  दो

c.   पाँच

d.  चार

 

499. निम्नलिखित में से क्या स्थगन मंजूर करने का पर्याप्त कारण नहीं है?

a.  समन तामील होना

b.  वाद की तैयारी हेतु समुचित समय

c.   किसी पक्षकार, उसके साक्षी अथवा अधिवक्ता की बीमारी

d.  न्यायालय में हाजिर साक्षी का परीक्षण किया जाना

 

500. निम्न में से किस आधार पर स्थगन नहीं प्रदान किया जाएगा-

a.  जहाँ परिस्थितियाँ पक्षकार के नियंत्रण से परे रही हों

b.  दोनों जहाँ परिस्थितियाँ पक्षकार के नियंत्रण से परे हों तथा वकील बीमार हो और पक्षकार समय रहते किसी अन्य वकील को नियुक्त कर सका हो

c.   जहाँ वकील बीमार हो तथा पक्षकार समय रहते किसी अन्य वकील को नियुक्त कर सका हो

d.  जहाँ पक्षकार का वकील किसी अन्य न्यायालय में व्यस्त हो

 

501. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 17 नियम 3 के अंतर्गत न्यायालय द्वारा वाद खारिज किए जाने पर बादी के पास उपलब्ध एकमात्र उपचार है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के अंतर्गत आवेदन देना

b.  एक अपील प्रस्तुत करना

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9 नियम 9 के अंतर्गत आवेदन देना

d.  उपरोक्त सभी

 

502. वाद की सुनवाई तथा साक्षियों की परीक्षा सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के किस आदेश के अंतर्गत निहित है-

a.  आदेश 20

b.  आदेश 16

c.   आदेश 18

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

503. प्रत्येक मामले में मुख्य परीक्षा किया जाएगा-

a.  मौखिक

b.  इस न्यायालय में टाइप करके

c.   शपथपत्र पर

d.  जैसा न्यायालय उचित समझे

 

504. सिविल प्रक्रिया संहिता के निम्नलिखित आदेशों में से कौन सा आदेश यह प्रावधान करता है कि प्रत्येक मामले में किसी साक्षी की मुख्य परीक्षा शपथपत्र पर किया जाएगा?

a.  आदेश 18 नियम 2

b.  आदेश 18, नियम 1

c.   आदेश 18 नियम 4(1)

d.  आदेश 18 नियम 3

 

505. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 18 नियम 4(1) के अंतर्गत किसी गवाह का मुख्य परीक्षण किसके द्वारा दर्ज किया जाएगा-

a.  न्यायालय द्वारा नियुक्त आयुक्त

b.  शपथपत्र

c.   न्यायाधीश द्वारा

d.  उपरोक्त सभी

 

506. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 18 नियम 4 के अंतर्गत साक्ष्य दर्ज करने के सम्बन्ध में निम्न में से क्या सही नहीं है?

a.  साक्षी की मुख्य परीक्षा शपथपत्र पर होगा

b.  शपथपत्र के साथ प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की ग्राह्यता का अवधारण आयुक्त द्वारा किया जाएगा

c.   प्रति परीक्षा के लिए आयुक्त नियुक्त किया जाएगा

d.  जिला न्यायाधीश साक्ष्य दर्ज करने के लिए आयुक्तों का एक दल तैयार करेगा

 

507. एक साक्षी, जिसकी परीक्षा पहले ही किया जा चुका हो, को सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 18 नियम 17 के अंतर्गत पुनः बुलाया जा सकता है-

a.  विरोधी पक्ष द्वारा

b.  न्यायालय द्वारा

c.   साक्षी को बुलाने वाले पक्षकार द्वारा

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

508. जहाँ अंग्रेजी न्यायालय की भाषा हो, साक्ष्य अंग्रेजी में ग्रहण किए जा सकते हैं यदि-

a.  सभी पक्षों को कोई आपत्ति हो

b.  न्यायालय इसे आवश्यक समझे

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

509. साक्ष्य दर्ज करने के प्रयोजन से सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 18 के प्रावधानों के अंतर्गत नियुक्त आयुक्त-

a.  साक्ष्य दर्ज करने के दौरान उठाई गई आपत्तियों पर निर्णय नहीं ले सकता

b.  उपरोक्त में कोई नहीं

c.   साक्षी का पुनर्परीक्षा नहीं कर सकता

d.  उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

 

510. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के निम्नलिखित में से किस प्रावधान का सम्बन्ध शपथपत्र से है-

a.  आदेश 39

b.  आदेश 17

c.   आदेश 19

d.  आदेश 26

 

511. निम्नलिखित में से क्या सही है-

a.  शपथपत्र केवल विश्वासों के कथन तक सीमित हो सकते हैं।

b.  शपथपत्र केवल वादकालीन अनुप्रयोगों पर विश्वास के कथन तक सीमित नहीं हो सकते

c.   शपथपत्र केवल जानकारी के कथन तक सीमित हो सकते हैं।

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

512. निर्णय एवं डिक्री के प्रावधान सिविल प्रक्रिया संहिता के किस आदेश के अंतर्गत किए गए हैं?

a.  आदेश 20 के अंतर्गत

b.  आदेश 21 के अंतर्गत

c.   आदेश 20 के अंतर्गत

d.  आदेश 19 के अंतर्गत

 

513. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 20, नियम 1(2) के अधीन पक्षकारों को निर्णय की प्रति कब उपलब्ध कराई जाएगी-

a.  निर्णय सुनाये जाने के 14 दिन के बाद

b.  निर्णय सुनाये जाने के 21 दिन के बाद

c.   निर्णय सुनाये जाने के तुरंत बाद

d.  निर्णय सुनाये जाने के 7 दिन के बाद

 

514. किसी प्रकरण की सुनवाई पूर्ण कर लेने पर कितने समय में न्यायालय को निर्णय सुना देना चाहिए?

a.  दस दिन से पच्चीस दिन के बीच

b.  पन्द्रह दिन

c.   तुरंत

d.  इनमें से कोई नहीं

 

515. विचारण पूर्ण होने के वादन्यायाधीश ने निर्णय सुना दिया किन्तु डिक्री पर हस्ताक्षर नहीं किए और उसका स्थानान्तरण हो गया। तब?

a.  डिक्री को हस्ताक्षर के लिए उस न्यायालय को भेजा जाता है जिसका विचारण न्यायालय अधीनस्थ हो

b.  नए न्यायाधीश को वादमें बहस की पुनः सुनवाई करनी होती है

c.   तैयार डिक्री पर नए न्यायाधीश द्वारा हस्ताक्षर किए जा सकते हैं

d.  तैयार डिक्री को स्वीकृति के लिए उच्च न्यायालय भेजा जाता है।

 

516. निर्णय सुनाये जाने के वादडिक्री तैयार किए जाने हेतु सिविल प्रक्रिया संहिता द्वारा अधिकतम कितना समय मंजूर किया गया है?

a.  45 दिन

b.  60 दिन

c.   15 दिन

d.  30 दिन

 

517. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 20 नियम 7 के अनुसार डिक्री पर किस तिथि का उल्लेख किया जाएगा?

a.  वाद प्रस्तुत करने की तिथि

b.  अंतिम बहस की सुनवाई की तिथि

c.   निर्णय सुनाये जाने की तिथि

d.  डिक्री तैयार करने की तिथि

 

518. एक अंतिम एक पक्षीय निर्णय किस पर बाध्यकारी नहीं है-

a.  तृतीय पक्षो पर

b.  किसी पक्ष के विधिक प्रतिनिधियों

c.   सभी सद्भावी समनुदेशिती'

d.  उपरोक्त सभी

 

519. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अंतर्गत डिक्री पारित करने के पश्चात् डिक्री की राशि के भुगतान को किश्तों में करने का निर्देश दिया जा सकता है?

a.  आदेश 20, नियम 12

b.  आदेश 21, नियम 10

c.   आदेश 20 नियम 10

d.  आदेश 20 नियम 11

 

520. आदेश 20 नियम 12 के अंतर्गत सिविल प्रक्रिया संहिता किस वादमें प्रारंभिक डिक्री पारित किए जाने का प्रावधान करती है-

a.  कब्जा तथा अंतःकालीन लाभ

b.  स्वामी एवं अभिकर्ता के बीच खाते

c.   साझेदारी के विघटन में

d.  अग्रक्रय

 

521. धन के भुगतान हेतु डिक्री पारित किए जाने के वादनिर्णीत ऋणी के आवेदन पर न्यायालय यह आदेश नहीं पारित करेगा कि डिक्री की राशि का भुगतान किश्तों में किया जाएगा-

a.  निर्णीत ऋणी की वित्तीय स्थिति के सम्बन्ध में दस्तावेज प्राप्त किए बिना

b.  डिक्री धारक की सहमति के बिना

c.   दोनों पक्षकारों के साक्ष्य दर्ज किए बिना

d.  दोनों पक्षकारों से शपथपत्र प्राप्त किए बिना

 

522. किसी वाद में एक प्रारंभिक डिक्री पारित की जा सकती है-

a.  साझेदारी हेतु

b.  कब्जे एवं अंतःकालीन लाभ हेतु

c.   बँटवारे हेतु

d.  उपरोक्त सभी

 

523. निम्नलिखित में से किस वाद में सिविल प्रकिया संहिता प्रारंभिक डिक्री पारित किए जाने का प्रावधान करती है?

a.  कब्जे एवं अंतःकालीन लाभ सम्बन्धी वाद

b.  प्रशासनिक वाद

c.   अग्रक्रय सम्बन्धी वाद

d.  उपरोक्त सभी

 

524. डिक्रियों एवं आदेशों के निष्पादन से सम्बन्धित सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 21 कुल कितने नियमों में निहित है-

a.  100 नियम

b.  103 नियम

c.   106 नियम

d.  102 नियम

 

525. सिविल प्रक्रिया संहिता का सबसे विस्तृत आदेश है-

a.  आदेश 41

b.  आदेश 45

c.   आदेश 19

d.  आदेश 21

 

526. जब किसी न्यायालय की इच्छा हो कि इसकी डिक्री को किसी अन्य न्यायालय द्वारा निष्पादित किया जाए तो वह दूसरे न्यायालय को प्रेषित करेगा-

a.  निर्णय एवं निष्पादन याचिका

b.  निष्पादन याचिका तथा अतुष्टि प्रमाणपत्र

c.   एक डिक्री तथा अतुष्टि प्रमाणपत्र

d.  निर्णय एवं डिक्री

 

527. जहाँ डिक्री से वर्षों के अंदर निष्पादन का आवेदन किया गया हो वहाँ डिक्री के निष्पादन के लिए निर्णीत ऋणी को आवेदन की नोटिस जारी किया जाना आवश्यक नहीं होता-

a.  डिक्री के तीन वर्षों

b.  डिक्री के पाँच वर्षों

c.   डिक्री के दो वर्षों

d.  डिक्री के चार वर्षों

 

528. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अंतर्गत विनिर्दिष्ट पालन अथवा दांपत्य अधिकारों के पुनःस्थापन अथवा एक व्यादेश के लिए डिक्री के निष्पादन का प्रावधान किया गया है-

a.  आदेश 21 नियम 32

b.  आदेश 21 नियम 34

c.   आदेश 21 नियम 30

d.  आदेश 21 नियम 31

 

529. दांपत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन सम्बन्धी डिक्री का निष्पादन सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 के अंतर्गत किस प्रकार किया जा सकता है-

a.  सिविल कारावास में निरूद्ध करके तथा संपत्ति को कुर्क करके

b.  संपत्ति को कुर्क करके

c.   सिविल कारावास में निरूद्ध करके

d.  सिविल कारावास में निरूद्ध करके अथवा संपत्ति को कुर्क करके किसी एक तरीके से

 

530. सिविल प्रक्रिया संहिता के निम्नलिखित में से कौन सा प्रावधान संपत्ति की कुर्की से सम्बन्धित दावों एवं आपत्तियों के न्यायनिर्णयन का प्रावधान करता है?

a.  आदेश 21 नियम 57

b.  आदेश 21 नियम 59

c.   आदेश 21 नियम 58

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

531. नीलामी का खरीददार खरीद की कुल राशि का भुगतान कब करेगा.

a.  21 दिन के अंदर

b.  30 दिन के अंदर

c.   7 दिन के अंदर

d.  15 दिन के अंदर

 

532. निम्न में किसकी प्रस्तुति के लिए निर्धारित समयसीमा को परिसीमा अधिनियम की धारा 5 के प्रावधान का उपयोग करते हुए बढ़ाया अथवा माफ नहीं किया जा सकता?

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 115 के अंतर्गत पुनर्विचार

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता आदेश 21 के अंतर्गत निष्पादन हेतु अर्जी

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96, 100 एवं 104 के अंतर्गत अपील

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 के अंतर्गत प्रतिस्थापना हेतु अर्जी

 

533. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन निष्पादन हेतु आवेदन नहीं प्रस्तुत कर सकता-

a.  डिक्री धारक

b.  निर्णीत ऋणी

c.   विधिक प्रतिनिधि, यदि डिक्री धारक मर चुका हो

d.  डिक्री धारक के अधीन होने का दावा करने वाला कोई व्यक्ति

 

534. जहाँ कोई अचल संपत्ति एक संपदा हो तथा दो अथवा अधिक न्यायालयों की स्थानीय सीमाओं में स्थित हों-

a.  न्यायालय केवल अपनी अधिकारिता के अंतर्गत आने वाली संपत्ति बेच सकता है

b.  कोई एक न्यायालय संपूर्ण संपदा को बेच सकता है

c.   कोई भी न्यायालय संपदा के किसी भी भाग को नहीं बेच सकता

d.  वह न्यायालय संपूर्ण संपदा को बेच सकता है जिसकी अधिकारिता के अंतर्गत संपदा का अधिक बड़ा भाग स्थित हो।

 

535. 'गारनेशी' ऐसा व्यक्ति होता है जो-

a.  निर्णीत ऋणी का ऋणी हो

b.  विदेशी हो

c.   चूककर्ता हो

d.  डिक्रीधारक हो

 

536. एक गारनेशी आदेश ऐसा आदेश होता है जो-

a.  डिक्रीधारक को निर्णीत ऋणी के ऋणी से भुगतान प्राप्त करने का निर्देश देता है

b.  निर्णीत ऋणी के ऋणी द्वारा निर्णीत ऋणी को कोई भी भुगतान किया जाना प्रतिबंधित करता है।

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

537. व्यवहार प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 नियम 90 के संबंध में क्या सही नहीं है?

a.  विक्रय के प्रकाशन या संचालन में सारवान अनियमितता या कपट का होना।

b.  ऐसी क्षति, अनियमितता या कपट द्वारा कारित होनी चाहिए।

c.   यह मात्र विक्रय के संचालन से संबंधित होना चाहिए।

d.  आवेदक को सारवान क्षति होनी चाहिए।

 

538. ' '' के विरूद्ध एक धन सम्बन्धी डिक्री हासिल करता है। धन डिक्री के निष्पादन में '' '' के '' के पास पड़े धन को कुर्क कर लेता है। तब '' को क्या कहा जाएगा-

a.  गारनेशी

b.  डिक्री धारक

c.   निर्णीत ऋणी

d.  बैंकर

 

539. निम्न में से कौन सुमेलित नहीं है?

a.  कमीशन जारी होना - आदेश 21

b.  वाद की संस्थापना - आदेश 4

c.   निर्णय एवं डिक्री - आदेश 20

d.  समन जारी होना- आदेश 5

 

540. किसी विचारण न्यायालय के समक्ष निष्पादन कार्यवाही व्यक्ति सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 एक नियम 97 के अंतर्गत इस आधार पर आवेदन प्रस्तुत करता है कि वह वाद अधीन संपत्ति का वास्तविक क्रेता है। उसकी आपत्ति-

a.  पोषणीय नहीं है क्योंकि उसका विचाराधीन वाद किसी पक्षकार को ऐसी संपत्ति का सौदा करने से वर्जित करता है जो किसी वाद की विषयवस्तु हो

b.  पोषणीय है क्योंकि वह वास्तविक क्रेता है।

c.   पोषणीय है क्योंकि उसने एक पृथक वाद प्रस्तुत नहीं किया है

d.  पक्षकारों की अनुमति मात्र से ही सुना जा सकता है

 

541. किसी मृतक वादी के विधिक प्रतिनिधि की प्रतिस्थापना हेतु आवेदन किसके द्वारा दी जा सकती है?

a.  प्रतिवादी द्वारा

b.  वादी के विधिक प्रतिनिधियों द्वारा

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों में से एक

 

542. किसी वादी अथवा प्रतिवादी की मृत्यु वाद को समाप्त करने का कारण नहीं होगी, यदि-

a.  वाद करने का अधिकार कायम हो

b.  वादहेतुक कायम हो

c.   अनुतोष कायम हो

d.  उपरोक्त सभी

 

543. उपशमन का अर्थ होता है-

a.  किसी मृतक पक्षकार के विधिक प्रतिनिधियों को अभिलेख पर लाने की प्रक्रिया

b.  समुचित पक्षकारों की आवश्यकतावश किसी कार्य में कार्यवाहियों का निलंबन अथवा समाप्ति

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

544. '' अपने पीछे अपने पुत्र '' तथा विवाहित पुत्री '' को छोड़कर मर जाता है। '' के द्वारा प्रस्तुत किया गया एक बाद, उसकी मृत्यु के बाद, जारी रखा जा सकता है-

a.  ' तथा '' एवं '' के पति द्वारा विधिक प्रतिनिधियों के रूप में

b.  '' तथा '' दोनों द्वारा विधिक प्रतिनिधि के रूप में

c.   अकेले '' के द्वारा विधिक प्रतिनिधि के रूप में

d.  अकेले '' के द्वारा विधिक प्रतिनिधि के रूप में

 

545. यदि वाद प्रस्तुत करने का अधिकार बचा रहता है तो क्या किसी पक्षकार की मृत्यवश वाद समाप्त हो जाएगा?

a.  यदि विरोधी पक्ष सहमत हो

b.  हाँ

c.   नहीं

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

546. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 पक्षकार की मृत्यु पर एक वाद की स्थिति क्या होगी-

a.  यदि वादलाने का अधिकार बचा रहता है तो वादी या प्रतिवादी की मृत्यु से वाद का उपशमन नहीं होगा

b.  वादी की मृत्यु से वाद का उपशमन हो जाएगा

c.   प्रतिवादी की मृत्यु से वाद का उपशमन हो जाएगा

d.  उपरोक्त (a) और (b)

 

547. जहां आदेश 22, सिविल प्रक्रिया संहिता के अधीन वाद का उपशमन हो जाता है या खारिज किया जाता है, वहां उसी वादहेतुक पर-

a.  नया वाद नहीं लाया जायेगा

b.  पर्याप्त कारण दर्शाने पर दायर हो सकेगा

c.   नया वाद पक्षकारों की रजामंदी से दायर हो जायेगा

d.  न्यायालय की पूर्वानुमति से नया वाद दायर हो सकेगा

 

548. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 43 के अंतर्गत एक अपील निम्नलिखित में से किस आदेश से बनेगी

a.  आदेश 7 नियम 11 वादको अपास्त करना

b.  आदेश 8 नियम 1 प्रतिवादी को लिखित कथन प्रस्तुत करने की अनुमति देना

c.   आदेश 14 नियम 5 किसी भी पक्षकार के कहने पर किसी वादहेतुक को हटाने से इंकार करना

d.  आदेश 22 नियम 9 वाद की समाप्ति को अपास्त करने अथवा खारिज करने से इंकार करना

 

549. जहाँ वादी वादकी सुनवाई के वादतथा निर्णय सुनाये जाने के पूर्व मर जाता है वहाँ-

a.  समाप्त हो जाएगा यदि वाद प्रस्तुत करने का अधिकार सुरक्षित रहा हो

b.  वाद समाप्त नहीं होगा

c.   समाप्त हो जाएगा

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

550. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 22 नियम 9 के अंतर्गत वाद के समाप्त हो जाने पर-

a.  उसी वादहेतुक के आधार पर एक नया वाद वर्जित है।

b.  उसी वादहेतुक के आधार पर अधिकार के तौर पर एक नया वाद लाया जा सकता है

c.   उसी वादहेतुक के आधार पर एक नया वादमात्र न्यायालय की अनुमति से ही लाया जा सकता है

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

551. एक अधिवक्ता का कर्तव्य होता है कि वह पक्षकारों की मृत्यु के सम्बन्ध में न्यायालय को सूचित करे-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 22 नियम 10- के अंतर्गत

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 22 नियम 1 के अंतर्गत

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 22 नियम 4 के अंतर्गत

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 22 नियम 8 के अंतर्गत

 

552. निम्न में से किस मामले पर सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 22 के नियम 3 तथा 4 लागू नहीं होते?

a.  प्रथम अपील

b.  द्वितीय अपील

c.   वाद

d.  निष्पादन सम्बन्धी कार्यवाहियों

 

553. सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 23 निम्नलिखित में से किसपर लागू होता है-

a.  अपीलों पर

b.  निष्पादन कार्यवाहियों पर

c.   वादों के प्रत्याहरणं पर

d.  उपरोक्त सभी पर

 

554. "विधि किसी व्यक्ति को ऐसा अधिकार अथवा लाभ नहीं देता जिसकी उसे इच्छा हो" का यह सिद्धांत सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के किस प्रावधान से सम्बन्धित है?

a.  धारा 148

b.  आदेश 23 नियम 1

c.   धारा 26

d.  आदेश 6 नियम 1

 

555. वाद प्रत्याहरण का अधिकार होता है-

a.  वादी का एक सीमित अधिकार

b.  कतिपय शर्तों के अधीन

c.   पूर्णतः वादी का अधिकार

d.  उपरोक्त (b) तथा (c) दोनों

 

556. जहाँ न्यायालय द्वारा प्रदान की गई अनुमति के आधार पर आदेश 23, नियम (1) के अंतर्गत एक नया वाद संस्थापित किया गया हो-

a.  वादी परिसीमा के विधि से उसी प्रकार बाध्य होगा जैसे कि पहला वादसंस्थापित ही किया गया हो

b.  ऐसा वाद अवश्य विफल हो जाएगा यदि एक वर्ष के अंदर संस्थापित किया गया हो

c.   वादी परिसीमा विधि से बाध्य नहीं होता

d.  ऐसी अनुमति प्राप्त होने के आदेश की तिथि से परिसीमा की एक नयी अवधि प्रारंभ हो जाती है।

 

557. निम्नलिखित में से कौन सा तथ्य सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 23 के नियम 1(3) के अंतर्गत वाद के प्रत्याहरण हेतु "प्रारुपिक त्रुटि" की परिधि में आता है?

a.  वाद संपत्ति की पहचान सम्बन्धी भ्रम

b.  वाद का अनुचित मूल्यांकन

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के अंतर्गत नोटिस की आवश्यकता

d.  उपरोक्त सभी

 

558. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 23 के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से गलत कथन को चिन्हित करें-

a.  वादसंस्थित किए जाने के वादकिसी भी समय वादी अपने वाद का प्रत्याहरण कर सकता है अथवा अपने दावे के किसी भाग त्याग सकता है।

b.  जब वादियों की संख्या अधिक हो तो न्यायालय उनमें से किसी एक को अलग होने की अनुमति दे सकता है, भले ही अन्य सहवादी ऐसे अलगाव से सहमत हों

c.   यदि एक वादी न्यायालय की अनुमति के बिना वाद से अलग होता है तो वह उसी विषयवस्तु के सम्बन्ध में उसी प्रतिवादी के विरूद्ध एक नया वादसंस्थित करने से वर्जित हो जाता है।

d.  यदि न्यायालय संतुष्ट हो कि वादकिसी प्रारूपिक त्रुटि के कारण वाद अवश्य विफल होना चाहिए अथवा कोई अन्य समुचित आधार उपलब्ध हो तो यह वाद के प्रत्याहरण की अनुमति दे सकता है

 

559. वाद के प्रत्याहरण के वाद वादी-

a.  उसी विषयवस्तु के सम्बन्ध में एक नया वादतब तक संस्थित नहीं कर सकता जब तक वाद के प्रत्याहरण के समय ऐसी स्वतंत्रता प्रदान की गई हो।

b.  उसी विषयवस्तु के सम्बन्ध में एक नया वादसंस्थित कर सकता है।

c.   केवल न्यायालय की अनुमति से ही उसी विषयवस्तु के सम्बन्ध में एक नया वादसंस्थित कर सकता है

d.  केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से ही उसी विषयवस्तु के सम्बन्ध में एक नया वादसंस्थित कर सकता है

 

560. क्या कोई वादप्रत्याहरण के वादरखा जा सकता है?

a.  हाँ, यदि वाद प्रत्याहरण के समय एक नया वाद प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता के साथ न्यायालय से अनुमति हासिल की गई हो

b.  हाँ, इस शर्त के साथ कि दोनों ही मामलों में वादहेतुक एक समान हो

c.   नहीं

d.  हाँ

 

561. किसी वाद के पक्षकार वादमें समझौता कर सकते हैं-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 23 नियम 1 के अंतर्गत

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 23, नियम 4 के अंतर्गत

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 23, नियम 3 के अंतर्गत

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 23, नियम 3 के अंतर्गत

 

562. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 23, नियम 3 के अंतर्गत किया गया समझौता-

a.  अवश्य ही लिखित में होना चाहिए किन्तु इसका पक्षकारों द्वारा हस्ताक्षरित होना आवश्यक नहीं है।

b.  अवश्य ही लिखित में होना चाहिए किन्तु इसका वैध 'होना आवश्यक नहीं है।

c.   अवश्य ही लिखित में होना चाहिए तथा पक्षकारों द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिए

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

563. जब समझौते की एक डिक्री, जो अवैध रही हो, तब-

a.  उच्च न्यायालय के समक्ष शिकायत की जानी होती है।

b.  ऐसी डिक्री को अपास्त करने का कोई वाद नहीं बनेगा

c.   ऐसी डिक्री को अपास्त करने का वाद बनेगा

d.  जिला न्यायाधीश की अनुमति से ऐसी डिक्री को अपास्त करने का वाद बन सकता है

 

564. प्रतिनिधिक क्षमता में प्रस्तुत एक वाद वादी द्वारा वापस लिया जा सकता है, समझौता किया जा सकता है, त्यागा जा सकता है-

a.  सभी हितधारक व्यक्तियों को सूचना के बिना

b.  सभी हितधारक व्यक्तियों को सूचना के साथ

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों में से कोई एक

 

565. किसी 'प्रतिनिधि वाद' में न्यायालय की अनुमति के बिना किया गया कोई अनुबंध अथवा समझौता-

a.  वैध होता है।

b.  वैध अथवा शून्य होने योग्य में से कोई एक होता है

c.   शून्य होता है।

d.  शून्य होने के योग्य होता है।

 

566. निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?

a.  वाद संस्थित करने वाला / वाले व्यक्ति अथवा जो पक्षकार के रूप में शामिल हुए हों, को प्रतिवादी के साथ समझौता करने का अधिकार होता है

b.  न्यायालय की अनुमति से एक प्रतिनिधि वादकिसी एक अथवा अधिक व्यक्तियों द्वारा सभी हितधारक व्यक्तियों के लाभ के लिए संस्थित किया जा सकता है।

c.   प्रतिनिधि वाद की संस्थापना की नोटिस वादी के खर्चे 'पर समस्त हितधारकों को सार्वजनिक विज्ञापन के माध्यम से अवश्य दी जानी चाहिए जो उनकी संख्या, व्यक्तिगत तामील आदि कारणवश व्यवहारिक हो

d.  कोई भी व्यक्ति, जिसके लाभ के लिए एक प्रतिनिधि वाद संस्थापित किया गया हो, उसके एक पक्ष के रूप में शामिल होने हेतु आवेदन दे सकता है।

 

567. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 23 नियम 3 के अंतर्गत समझौते के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?

a.  यह आवश्यक होता है कि समझौते की विषयवस्तु वही हो जो वादकी विषयवस्तु हो

b.  एक समझौता, जो भारतीय संविदा अधिनियम के अंतर्गत शून्यकरणीय हो, इस नियम के अर्थों में भी शून्यकरणीय होगा

c.   इसका लिखित में होना तथा पक्षकारों द्वारा

हस्ताक्षरित होना आवश्यक होता है

d.  वैध अनुबंध होने के लिए इसे आवश्यकतौर पर लिखित में होना तथा पक्षकारों द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिए

 

568. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के निम्नलिखित आदेशों में से कौन सा आदेश कमीशन निकाले जाने से सम्बन्धित है?

a.  आदेश 25

b.  आदेश 27

c.   आदेश 24

d.  आदेश 26

 

569. निम्नलिखित में से किस मामले में सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 26 के अंतर्गत कमीशन नहीं निकाला जा सकता?

a.  साक्षी के परीक्षण हेतु

b.  रिसीवर की नियुक्ति हेतु

c.   स्थानीय अन्वेषण हेतु

d.  वैज्ञानिक अन्वेषण हेतु

 

570. एक न्यायालय कमीशन निकाल सकता है-

a.  बँटवारा करने हेतु

b.  खाते समायोजित करने हेतु

c.   स्थानीय अन्वेषण करने हेतु

d.  उपरोक्त सभी

 

571. सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 26 नियम 4 न्यायालय को किसी वाद में किसी ऐसे व्यक्ति के परीक्षण के लिए कमीशन निकालने का अधिकार प्रदान करता है जो-

a.  उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमा के बाहर का निवासी हो

b.  उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमा को छोड़ने वाला हो

c.   उसकी अधिकारिता की स्थानीय सीमा के अंतर्गत निवासी हो

d.  उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

 

572. न्यायालय सिविल प्रक्रिया संहिता के किस आदेश के अंतर्गत वैज्ञानिक अन्वेषण हेतु कमीशन निकाल सकता है-

a.  आदेश 26 नियम 10

b.  आदेश 26, नियम 10

c.   आदेश 26, नियम 10

d.  आदेश 26, नियम 11

 

573. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत न्यायालय कमीशन नहीं निकाल सकता-

a.  किसी अंतःकालीन लाभ अथवा क्षति की राशि के निर्धारण हेतु

b.  विवाद्यकों की विरचना हेतु

c.   किसी विवादग्रस्त मामले को स्पष्ट करने हेतु

d.  किसी संपत्ति के बाजार मूल्य के आकलन हेतु

 

574. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 32 नियम 1 के अंतर्गत एक अव्यस्क का अर्थ होता है ऐसा व्यक्ति जो निम्नलिखित में से हुआ हो-

a.  भारतीय वयस्कता अधिनियम

b.  हिन्दू वयस्कता एवं अभिभावकता

c.   किशोर न्याय अधिनियम

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता

 

575. क्या वयस्क होने के वादएक अवयस्क, यदि वह इकलौता वादी हो, यह आवेदन कर सकता है कि वादमित्र द्वारा उसके नाम से संस्थित कोई वादइस आधार पर खारिज कर दिया जाए कि यह अनुचित 4. अथवा अनुपयुक्त था-

a.  नहीं

b.  हाँ

c.   वादमित्र की सहमति से

d.  वादमित्र के साथ संयुक्त आवेदन से

 

576. राज्य सरकार के विरूद्ध किसी वाद में सरकार की ओर से वादपत्र पर कौन हस्ताक्षर कर सकता है?

a.  राज्य का राज्यपाल

b.  राज्य का मुख्यमंत्री

c.   राज्य का मुख्यसचिव

d.  ऐसा व्यक्ति जिसे सामान्य अथवा विशिष्ट आदेश द्वारा इस मामले के लिए सरकार द्वारा नियुक्त किया गया हो

 

577. किसी अवयस्क से सम्बन्धित किसी वाद में कार्यवाही को रोका नहीं जाएगा-

a.  अवयस्क के वादमित्र की सेवानिवृत्ति पर

b.  अवयस्क के वयस्क होने पर

c.   अवयस्क के वादमित्र को हटाए जाने पर

d.  अवयस्क के वादमित्र की मृत्यु होने पर

 

578. 'वादमित्र' के माध्यम से एक वादकिसके द्वारा संस्थित किया जा सकता है-

a.  विक्षिप्त

b.  अवयस्क

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

579. एक अवयस्क द्वारा एक वाद. संस्थित किया जासकता है?

a.  अपने नाम से

b.  अवयस्क के अभिभावक द्वारा अपने नाम से

c.   अवयस्क के नातेदार द्वारा अपने नाम से

d.  वादमित्र द्वारा उसके नाम से

 

580. एक व्यक्ति 'वादमित्र' के रूप में कार्य कर सकता है यदि वह-

a.  स्वस्थ चित्त हो

b.  वयस्क हो

c.   भारत में रहने वाले किसी अवयस्क अथवा विक्षिप्त के विरूद्ध हितधारी हो

d.  उपरोक्त तीनों आवश्यकताओं की पूर्ति करता हो

 

581. न्यायालय की अनुमति के बिना अवयस्क की ओर से एक अनुबंध अथवा समझौता कर लिया गया है। सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 32 नियम 7 के अंतर्गत ऐसा अनुबंध अथवा समझौता होगा-

a.  अव्यस्क को छोड़कर अन्य समस्त पक्षकारों के विरूद्ध शून्यकरणीय

b.  वैध

c.   शून्य

d.  अवयस्क सहित अन्य समस्त पक्षकारों के विरूद्ध शून्यकरणीय

 

582. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 32 नियम 9 के अंतर्गत किसी अवयस्क के वादमित्र को हटाया जा सकता है-

a.  जहाँ उसका हित अवयस्क के विपरीत हो रहा हो

b.  जहाँ वह अपने कर्तव्य का पालन कर रहा हो

c.   यदि वह वाद के लंबित रहने के दौरान भारत में निवास करना छोड़ दे

d.  उपरोक्त में से किसी भी कारणवश

 

583. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 32, नियम 10 अंतर्गत 'वादमित्र' की मृत्यु होने पर वाद -

a.  खारिज हो जाएगा

b.  अस्वीकृत कर दिया जाएगा

c.   रोक दिया जाएगा

d.  खारिज अथवा अस्वीकृत कर दिया जाएगा

 

584. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 32, नियम 4 के अंतर्गत किसी व्यक्ति को संरक्षक के तौर पर नियुक्त किया जा सकता है-

a.  उसकी लिखित सहमति पर

b.  उसकी मौखिक सहमति पर

c.   तो (a) ही (b)

d.  (a) अथवा (b) दोनों नहीं

 

585. वादार्थ संरक्षक कौन होता है?

a.  बच्चे का संरक्षक

b.  बच्चे का सौतेला पिता

c.   अवयस्क की ओर से कानूनी कार्यवाही करने हेतु न्यायालय द्वारा नियुक्त व्यक्ति

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

586. न्यायालय को वादार्थ संरक्षक नियुक्त करने की आवश्यकता होती है-

a.  केवल अवयस्क वादी हेतु

b.  वादी तथा प्रतिवादी दोनों हेतु

c.   केवल अवयस्क प्रतिवादी हेतु

d.  इनमें से कोई नहीं

 

587. सिविल प्रक्रिया संहिता में निर्धन व्यक्तियों के मामलों से सम्बन्धित प्रावधान कहाँ किए गए हैं?

a.  आदेश 55 में

b.  आदेश 89 में

c.   आदेश 33 में

d.  आदेश 32 में

 

588. एक व्यक्ति सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 33, नियम के अर्थों के अनुसार एक निर्धन व्यक्ति होता है यदि-

a.  वाद पर देय शुल्क का भुगतान करने का कोई साधन हो

b.  उसकी आजीविका के लिए पर्याप्त साधन हों

c.   उसके पास वाद पर देय शुल्क के भुगतान हेतु पर्याप्त साधन उपलब्ध हों

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

589. किसी निर्धन व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत वादके सम्बन्ध में वाद को किस तिथि पर संस्थापित समझा जाता है-

a.  जब ऐसी आवेदन स्वीकार कर ली गई हो

b.  जब ऐसी आवेदन अस्वीकार कर दी गई हो

c.   जब एक अकिंचन के रूप में वाद करने की अनुमति माँगने की आवेदन प्रस्तुत की गई हो

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

590. जहाँ कोई निर्धन व्यक्ति सफल हो जाता है तो न्यायालय

a.  प्रतिवादी से

b.  वादी से

c.   राज्य सरकार से

d.  वसूली योग्य नहीं होता

 

591. जब अकिंचन के रूप में वाद की अनुमति की आवेदन अस्वीकृत कर दी गई हो तो सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 33, नियम 15 के अंतर्गत वाद को संस्थापित समझा जाता है-

a.  उस तिथि पर जिसपर अकिंचन के रूप में वाद प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी गई थी

b.  उस तिथि पर जब न्यायालय शुल्क भुगतान किया गया हो

c.   उस तिथि पर जिसपर अकिंचन के रूप में वाद प्रस्तुत करने की आवेदन प्रस्तुत की गई थी

d.  उपरोक्त में से कोई एक जैसा न्यायालय निर्देश दे

 

592. सिविलं प्रक्रिया संहिता की किस धारा / आदेश के अंतर्गत "निर्धन व्यक्तियों को निःशुल्क कानूनी सेवाएं" प्रदान करने का प्रावधान किया गया है?

a.  आदेश 33, नियम 18

b.  आदेश 39, नियम 2

c.   धारा 151

d.  धारा 115

 

593. अकिंचन वाद' का क्या अर्थ होता है?

a.  निर्धन व्यक्ति द्वारा बाद

b.  विधिक प्रतिनिधि द्वारा बाद

c.   तीसरे पक्ष द्वारा वाद

d.  लोकसेवक द्वारा वाद

 

594. अंतराभिवाची वाद से सम्बन्धित प्रावधान कहाँ निहित हैं-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 34 में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 35 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 36 में

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 22 में

 

595. एक 'अंतराभिवाची वाद' के लिए निम्नलिखित में से कौन सी शर्त आवश्यक नहीं होती?

a.  ऐसा वाद अवश्य मौजूद होना चाहिए जिसमें ऋण अथवा संपत्ति के परस्पर विरोधी दावेदारों के अधिकारों का समुचित न्यायनिर्णयन किया जा सके

b.  कोई ऋण अथवा संपत्ति विवादग्रस्त अवश्य होनी चाहिए

c.   ॠण अथवा संपत्ति पर दावा करने वाले दो अथवा अधिक व्यक्तियों को एक दूसरे के विरूद्ध होना चाहिए

d.  उपरोक्त सभी

 

596. एक अंतराभिवाची वादमें वादी दावा करता है-

a.  वाद में तो विषयवस्तु में हित का ही प्रभारों एवं खर्चे का

b.  वाद की विषयवस्तु में हित का

c.   केवल प्रभारों अथवा खर्चों को छोड़कर वाद की विषयवस्तु में किसी भी हित का नहीं

d.  उपरोक्त सभी

 

597. एक अंतराभिवाची वाद में वादी दावा कर सकता है-

a.  खर्चों अथवा प्रभारों का

b.  स्वामित्व का

c.   संपत्ति में हिस्से का

d.  अग्रक्रय के अधिकार का

 

598. अंतराभिवाची वाद एक वादहोता है-

a.  ऐसे व्यक्ति द्वारा संस्थित जिसका विषयवस्तु में कोई हित हो

b.  ऐसे व्यक्ति द्वारा संस्थित जिसका विषयवस्तु में कोई हित हो

c.   दो अधिवक्ताओं के बीच

d.  केंन्द्र सरकार के प्लीडर तथा राज्य सरकार के प्लीडर के बीच

 

599. अंतराभिवाची वादसंस्थित नहीं किया जा सकता-

a.  किसी ऐसी संपत्ति, जो उसके द्वारा धारित नहीं है, को रखने के उत्तरदायित्व से स्वयं को निर्मुक्त करने के लिए

b.  जहाँ वाद लंबित हो जिसमें सभी पक्षकारों के अधिकारों का समुचित निर्णय किया जा सके

c.   ऐसी किसी भी संपत्ति के लिए जो दो व्यक्तियों से सम्बन्धित हो किन्तु तत्समय किसी तीसरे व्यक्ति के पास हो

d.  किसी संपत्ति तथा उसका दावा करने वाले व्यक्ति के बीच के सम्बन्ध के अवधारण हेतु

 

600. भावी ब्याज प्रदान किया जाना-

a.  विवेकाधीन होता है

b.  उपरोक्त में कोई नहीं

c.   आज्ञापक होता है

d.  निर्देशात्मक होता है

 

601. 'मित्रतापूर्ण वाद' का प्रावधान निहित है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता आदेश 34 में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता आदेश 33 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 90, आदेश 36 में

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 88 आदेश 35 में

 

602. संक्षिप्त वाद' सम्बन्धी प्रावधान निहित हैं-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 28 में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 30 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 32 में

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 37 में

 

603. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 37 के अधीन प्रस्तुत एक संक्षिप्त वादमें प्रतिवादी के लिए यह आवश्यक है कि वह हाजिरी के समन की तामील होने के वादनियत अवधि में न्यायालय के समक्ष उपस्थित हो। यह अवधि क्या है-

a.  दो महीने उत्तर

b.  10 दिन

c.   15 दिन

d.  30 दिन

 

604. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 37 के अधीन एक वाद को किस आधार पर संस्थित किया जा सकता है-

a.  केवल हुंडी के आधार पर

b.  केवल वचनपत्र के आधार पर

c.   केवल विनिमय पत्र के आधार पर

d.  उपरोक्त सभी

 

605. सिविल वादके लिए संक्षिप्त प्रक्रिया के संदर्भ में निम्न में से कौन सा कथन सही है?

a.  किसी लिखित अनुबंध से उत्पन्न प्रतिवादी द्वारा देय धन में परिनिर्धारित माँग की वसूली के लिए लागू किया जा सकता है

b.  किसी भी सिविल न्यायालय द्वारा शीघ्र न्यायनिर्णयन के हित में स्वप्रेरणा से अपने विवेकानुसार लागू किया जा सकता है

c.   प्रतिवादी को प्रतिवाद की अनुमति लेने की आवश्यकता होती है, जो यदि प्राप्त हो जाए, तो शर्तहीन अवश्य होनी चाहिए

d.  उपरोक्त सभी कथन सही नहीं हैं

 

606. वचन-पत्र में धन की वसूली का सूट फाइल किया जा सकता है-

a.  सामान्य प्रक्रिया के तहत

b.  उच्च न्यायालय में

c.   रिट याचिका के तौर पर

d.  सारांश प्रक्रिया के तहत जैसा कि Order, 37, CPC में निर्धारित है।

 

607. सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 38 सम्बन्धित है-

a.  निर्णय पूर्व गिरफ्तारी एवं कुर्की से

b.  अस्थाई व्यादेश से

c.   अंतराभिवाची से

d.  संक्षिप्त प्रक्रिया से

 

608. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अंतर्गत निर्णय के पूर्व कुर्की का प्रावधान किया गया है-

a.  धारा 96

b.  आदेश 38 नियम 5-13

c.   आदेश 29 नियम 1

d.  आदेश 40 नियम 3

 

609. सिविल प्रक्रिया संहिता में एक सिविल न्यायालय अपने समक्ष लंबित प्रक्रिया में किसी संपत्ति के सम्बन्ध में निर्णय के पूर्व कुर्की का निर्देश दे सकता है। ऐसे प्रावधान कहाँ निहित हैं-

a.  आदेश 39

b.  आदेश 40

c.   आदेश 37

d.  आदेश 38

 

610. चूकवश खारिज किसी वादमें निर्णय के पूर्व कुर्की?

a.  वाद की पुनर्बहाली पर स्वयं ही पुनर्जीवित नही होती

b.  पुनर्जीवित होना या होना वाद के तथ्यों तथा परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

c.   वाद की पुनर्वहाली पर स्वयं ही पुनर्जीवित हो जाती है।

d.  उपरोक्त (a) तथा (b) में कोई नहीं

 

611. व्यादेश सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के किस 5 सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत प्रतिवादी वादी के प्रावधान के अंतर्गत मंजूर किया जाता है-

a.  धारा 115

b.  धारा 96

c.   उपरोक्त में कोई नहीं

d.  आदेश 39 नियम 1

 

612. सिविल न्यायालय द्वारा अंतवर्ती आदेश पारित किया जाता है-

a.  डिक्री के निष्पादन हेतु

b.  संपत्ति की कुर्की हेतु

c.   सिविल प्रक्रिया के लंबित रहने के दौरान

d.  किसी व्यक्ति को समन करने हेतु

 

613. अस्थायी व्यादेश दिया जा सकता है-

a.  किसी चुनाव को रोकने हेतु

b.  लोकसेवक के विरूद्ध की जाने वाली अनुशासनात्मक कार्यवाही को रोकने हेतु

c.   लोकसेवक के विरूद्ध किसी विपरीत प्रविष्टि के परिणाम को रोकने हेतु

d.  संपत्ति से निष्कासन को रोकने हेतु

 

614. निम्नलिखित में से कौन सा आधार अस्थाई व्यादेश हेतु एक उचित आधार सिविल प्रक्रिया संहिता के अधीन नहीं है?

a.  यह कि प्रतिवादी अपनी सम्पत्ति को व्ययनित करने की धमकी देता है।

b.  यह कि विवाद ग्रस्त सम्पत्ति की सरकार द्वारा अधिग्रहण की संभावना है।

c.   यह कि विवादग्रस्त किसी सम्पत्ति के बारे में खतरा है उसका दुर्व्ययन हो सकता है।

d.  उपरोक्त में से कोई नहीं

 

615. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत प्रतिवादी वादी के प्रावधान के विरूद्ध अस्थायी व्यादेश माँग सकता है यदि-

a.  वादी अपने लेनदारों को धोखा देने के विचार से संपत्ति को बेचने की धमकी दे रहा हो

b.  वाद प्रतिवादी को वाद संपत्ति से निकाल देने की धमकी, दे रहा है

c.   यह खतरा प्रतीत हो रहा हो कि वादी वाद संपति का अपव्यय अथवा अंतरण कर देगा

d.  उपरोक्त सभी

 

616. सिविल प्रक्रिया संहिता किस व्यादेश हेतु प्रावधान करती है-

a.  आज्ञापक व्यादेश

b.  अस्थायी व्यादेश

c.   स्थायी व्यादेश

d.  इनमें से कोई नहीं

 

617. एक अस्थायी व्यादेश के सम्बन्ध में क्या गलत है-

a.  वाद के निस्तारण तक विवाद अधीन संपत्ति को यथावत् संरक्षित रखता है.

b.  यदि कोई विशिष्ट समय दिया गया हो तो सदैव जारी रहता है

c.   यह पक्षकारों के साझा अधिकारों को अंतिमतौर पर स्थापित कर देता है तथा पक्षकारों को हमेशा के लिए कुछ कार्य करने अथवा करने का निर्देश देता है

d.  एकपक्षीय तौर पर मंजूर किया जा सकता है

 

618. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के निम्नलिखित प्रावधानों में से किस प्रावधान के अंतर्गत व्यादेश की अवज्ञा अथवा व्यादेश को भंग करने के परिणामों का वर्णन किया गया है?

a.  आदेश 32

b.  आदेश 39 नियम 2

c.   आदेश 33

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

619. सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 39 नियम 2 सम्बन्धित है-

a.  अस्थायी व्यादेश से

b.  निर्णय पूर्व कुर्की से

c.   डिक्री के निष्पादन से

d.  रिसीवर की नियुक्ति से

 

620. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत प्रदान किए गए व्यादेश की शर्तों के उल्लंघन के मामले में न्यायालय कैसा आदेश पारित कर सकता है-

a.  संपत्ति की कुर्की एवं बिक्री का

b.  गिरफ्तारी एवं सिविल कारावास में 3 महीने की निरुद्धि का

c.   संपत्ति की कुर्की एवं सिविल कारावास में निरुद्धि का

d.  उपरोक्त () तथा () दोनों

 

621. अस्थायी व्यादेश की शर्तों के उल्लंघन के मामले में न्यायालय क्या आदेश पारित कर सकता है-

a.  उल्लंघनकर्ता को उल्लंघन की समाप्ति तक अनिश्चितकाल के लिए सिविल कारावास में निरूद्ध कर दिया जाए

b.  यदि उल्लंघन 1 वर्ष से अधिक जारी रहे तो उल्लंघनकर्ता की संपत्ति की कुर्की, बिक्री तथा संपूर्ण बिक्री राशि को 1 क्षतिपूर्ति के तौर पर आहत पक्षकार को दिया जाना

c.   उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों गलत हैं

d.  उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों सही हैं

 

622. कुर्क की गई संपत्ति की कुर्की के आदेश 39 नियम 2 के अंतर्गत कब तक प्रभावी रहेगी-

a.  तीन माह

b.  एक वर्ष

c.   छह माह

d.  सात वर्ष

 

623. व्यादेश की अवज्ञा अथवा भंग के परिणामस्वरूप सिविल कारावास में निरोध की अवधि किससे अधिक नहीं होगी-

a.  छह माह

b.  एक वर्ष

c.   एक माह

d.  तीन माह

 

624. जहाँ विरोधी पक्ष को कोई नोटिस दिए बिना एक व्यादेश पारित किया गया हो वहाँ न्यायालय आवेदन पर कितने दिन के अंदर निर्णय पारित करने का प्रयास करेगा-

a.  21 दिन

b.  30 दिन

c.   7 दिन

d.  15 दिन

 

625. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 39 के नियम 6 से 10 किससे सम्बन्धित हैं-

a.  वादपत्र

b.  अंतवर्ती आदेश

c.   संपत्ति की कुर्की

d.  व्यक्तियों की गिरफ्तारी

 

626. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अंतर्गत अस्थाई व्यादेश का कोई रद्द किया जा सकता है?

a.  आदेश 39 नियम 9

b.  आदेश 39 नियम 4

c.   आदेश 39 नियम 7

d.  आदेश 39 नियम 2

 

627. संहिता के आदेश 39 का कौन सा नियम प्रावधान करता है कि किसी निगम को निर्देशित एक व्यादेश केवल निगम पर बाध्यकारी होता है बल्कि इसके सभी ऐसे सदस्यों और अधिकारियों पर भी बाध्यकारी होता है जिनके व्यक्तिगत कार्यों पर रोक लगाने की मांग इसके द्वारा की गई हो-

a.  नियम 3

b.  नियम 5

c.   नियम 3

d.  नियम 4

 

628. यदि एक पक्षकार अस्थायी व्यादेश को भंग करता है। तो-

a.  उसे न्यायालय की अवमानना हेतु दंडित किया जाएगा

b.  उसपर अर्थदंड लगाया जाएगा

c.   उसकी संपत्ति कुर्क की जा सकती है।

d.  उपरोक्त में कोई नहीं

 

629. निम्न में से क्या स्थापित करने वाले पक्षकार के पक्ष में एक अस्थायी व्यादेश मंजूर किया जा सकता है-

a.  उसके पक्ष में एक प्रथमदृष्टया मामला

b.  व्यादेश मंजूर किए जाने की स्थिति में उसे होने वाली अपूर्णीय क्षति

c.   उसके पक्ष में सुविधा का संतुलन

d.  उपरोक्त सभी

 

630. व्यादेश की डिक्री का आज्ञानुवर्तन नहीं किया गया है तब-

a.  निष्पादनीय नहीं है

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 39 नियम 2() के तहत याचिका प्रस्तुत कर निष्पादनीय है

c.   नया वाद प्रस्तुत कर निष्पादनीय हैं।

d.  निर्णीतऋऋणी के सिविल कारावास एवं उसकी संपत्ति की कुर्की द्वारा निष्पादनीय है

 

631. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अंतर्गत " रिसीवरों की नियुक्ति" का प्रावधान किया गया है?

a.  आदेश 11, नियम 1

b.  आदेश 20 नियम 1

c.   आदेश 40 नियम 1

d.  आदेश 41, नियम 1

 

632. न्यायालय आदेश द्वारा डिक्री के पूर्व किसी भी संपत्ति का रिसीवर नियुक्त कर सकता है-

a.  जहाँ प्रतिवादी अपनी संपूर्ण संपत्ति अथवा उसके किसी भाग को बेचने वाला हो

b.  जहाँ प्रतिवादी न्यायालय की अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं से बाहर जा चुका हो

c.   जहाँ न्यायालय को ऐसा करना न्यायोचित एवं सुविधाजनक प्रतीत हो

d.  जहाँ वाद संपत्ति के डिक्री के निष्पादन में गलत तरीके से बेचे जाने का खतरा हो

 

633. किसी विवादित संपत्ति के संरक्षण हेतु नियुक्त व्यक्ति को किस नाम से जाना जाता है-

a.  निर्णीत देनदार

b.  रिसीवर

c.   अकिंचन

d.  आयुक्त

 

634. एक रिसीवर क्या होता है-

a.  वादी का अभिकर्ता

b.  प्रतिवादी का अभिकर्ता

c.   न्यायालय का अधिकारी

d.  वादी तथा प्रतिवादी में से किसी एक का अभिकर्ता, यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

 

635. किसी संपत्ति के रिसीवर की नियुक्ति कब की जा सकती है-

a.  डिक्री के पूर्व

b.  जब न्यायालय को ऐसा न्यायोचित एवं सुविधाजनक प्रतीत हो; चाहे डिक्री के पूर्व अथवा पश्चात्

c.   डिक्री के बाद

d.  केवल अपीली न्यायालय आदेश दे सकता है

 

636. सिविल प्रक्रिया संहिता,1908 के किसी प्रावधान के अंतर्गत कलेक्टर को रिसीवर नियुक्त किया जा सकता है?

a.  आदेश 40 नियम 2

b.  आदेश 41 नियम 5

c.   आदेश 40 नियम 5

d.  आदेश 41, नियम 1

 

637. प्रतिवादी अपील की सुनवाई की नोटिस तामील होने की तिथि से कितने समय के अंदर प्रति आपत्तियाँ प्रस्तुत कर सकता है?

a.  45 दिनों में

b.  21 दिनों में

c.   45 दिनों में

d.  एक माह में

 

638. सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 42 सम्बन्धित है-

a.  सर्वोच्च न्यायालय में अपील से

b.  अपीली डिक्री से उत्पन्न अपील से

c.   निर्धन व्यक्ति द्वारा अपील से

d.  आदेशों के विरूद्ध अपील से

 

639. निर्धन व्यक्तियों द्वारा अपीलों का प्रावधान किया गया है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता आदेश 44 के अंतर्गत

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता आदेश 42 के अंतर्गत

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता आदेश 43 के अंतर्गत

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता आदेश 45 के अंतर्गत

 

640. यदि एक न्यायालय संतुष्ट हो कि इसके समक्ष लंबित किसी वादमें किसी अधिनियम की वैधता का प्रश्न संलिप्त है तो उसे-

a.  मामले को उच्च न्यायालय को निर्देशित करना चाहिए

b.  अधिनियम की वैधता पर निर्णय देना चाहिए

c.   उच्च न्यायालय को पुनर्विचार के अधिकार का उपयोग करना चाहिए

d.  परामर्श हेतु सर्वोच्च न्यायालय को निर्देशित करना चाहिए

 

641. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत जब पुनर्विलोकन का एक आवेदन खारिज हो गया हो-

a.  कोई अपील नहीं बनती

b.  आदेश के विरूद्ध अपील की जा सकती है

c.   न्यायालय की अनुमति से आदेश के विरुद्ध अपील प्रस्तुत की जा सकती है।

d.  इनमें से कोई नहीं

 

642. व्यवहार प्रक्रिया संहिता, 1908 में कौन सा प्रावधान पुनर्विलोकन के आवेदन पर किये गये आदेश के या पुनर्विलोकन में पारित डिक्री या किये गये आदेश के पुनर्विलोकन के लिये आवेदन ग्रहण करने को वर्जित करता है-

a.  धारा 11

b.  धारा 10

c.   आदेश XLVII नियम 9

d.  आदेश IX नियम 9

 

643. न्यायालय की अधिकारिता का निर्णय किया जाता है-

a.  वाद के आर्थिक मूल्य द्वारा

b.  विवाद उत्पत्ति के स्थान द्वारा

c.   विवाद की विषयवस्तु द्वारा

d.  उपरोक्त सभी

 

644. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की निम्नलिखित में से कौन सी धारा अधिकारिता' को परिभाषित करती है?

a.  धारा 9

b.  धारा 15

c.   धारा 2(9)

d.  परिभाषित नहीं है

 

645. निम्नलिखित में से कौन सुमेलित नहीं है?

a.  मैत्रीपूर्ण वादधारा 90 आदेश 35

b.  साम्यिक मुजराआदेश 20

c.   वादपत्र की संस्थान - धारा 26 आदेश 4

d.  अंतराभिवाची वाद - धारा 88 आदेश 35

 

646. वैधानिक प्रलेखों की संवैधानिक वैधता से सम्बन्धित वाद का प्रावधान कहाँ किया गया है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 32, नियम 3 में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 37, नियम 2 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 27 नियम 1- में

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 34 नियम 1 में

 

647. परिवारिक मामलों से सम्बन्धित वादके लिए प्रक्रिया दी गई है-

a.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 27 में

b.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 30 में

c.   सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 32 में

d.  सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 29 में

 

648. 1. महिलाएं, जिन्हें देश की परंपराओं तथा तौर- तरीकों के कारण सार्वजनिक तौर पर उपस्थित होने हेतु बाध्य नहीं किया जाता, को न्यायालय में निजी उपस्थिति से छूट प्राप्त है।

2. हालांकि, किसी ऐसे वाद, जिसमें किसी महिला की गिरफ्तारी को सिविल प्रक्रिया संहिता द्वारा निषिद्ध किया गया हो, किसी सिविल प्रक्रिया में ऐसी महिलाओ को गिरफ्तारी से छूट प्राप्त होना नहीं समझा जाएगा।

a.  उपरोक्त (1) तथा (2) दोनों कथन सही हैं

b.  केवल कथन (1) सही है

c.   केवल कथन (2) सही है

d.  कथन (1) तथा (2) दोनों सही नहीं हैं

 

649. न्यायालय, जिसके पास अंतर्निहित अधिकारिता का अभाव हो, के द्वारा पारित निर्णय एवं डिक्री-

a.  कभी भी पूर्व न्याय के रूप में लागू नहीं होगी

b.  उत्तरवर्ती वाद में चुनौती दी जा सकती है

c.   अवमान्यता होती है

d.  उपरोक्त सभी सही है

 

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