The Code Of Civil Procedure, 1908 MCQs Set-3

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

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1. जहां न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि, मामले में समझौते का तत्व विद्यमान है, वहां न्यायालय- 

a. मामले में स्वयं निर्णय करेगा,

b. मामले को पंचाट, सुलह अथवा मध्यस्थता के लिये सौंप देगा 

c. मामले को अनिर्णित छोड़ देगा

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

2. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 89 में " अदालत के बाहर विवादों के निपटारे " से संबंधित प्रावधानों में, निम्नलिखित में से कौन सा एक प्रावधान नहीं है?

a. मध्यस्थता

b. परक्राम्य

c. पंचाट 

d. सुलह

 

3. "विशेष मामलों के बाद" से संबंधित प्रावधान निहित है-

a. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 34 में,

b. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 33 में

c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 90 आदेश 36 में

d. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 88 आदेश 35 में

 

4. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के अधीन लोक- न्यूसेन्स के संदर्भ में घोषणा और व्यादेश हेतु वादसंस्थित किया जा सकता है-

a. बिना न्यायालय की अनुमति के किसी व्यक्ति द्वारा

b. दो अथवा अधिक व्यक्तियों द्वारा बिना कोर्ट की अनुमति के 

c. दो अथवा अधिक व्यक्तियों द्वारा कोर्ट की अनुमति से

d. न्यायालय की अनुमति से, किसी व्यक्ति द्वारा

 

5. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के अधीन लोक न्यूसेन्स हेतु कौन वादसंस्थित कर सकता है

a. महाधिवक्ता 

b. महाधिवक्ता (ख) कोई भी नागरिक

c. जिला अधिकारी

d. कोई भी 10 अथवा अधिक नागरिक

 

6. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 91 के अधीन लोक- न्यूसेन्स के संदर्भ में घोषणा और व्यादेश हेतु वाद संस्थित किया जा सकता है-

a. पीड़ित व्यक्ति द्वारा

b. ऐसे व्यक्ति द्वारा जिसे ऐसे लोक-न्यूसेन्स के कारण विशेष क्षति हुई हो

c. न्यायालय की अनुमति से दो अथवा उससे अधिक व्यक्तियों द्वारा, यद्यपि उन्हें कोई विशेष क्षति न हुई हो

d. दो अथवा उससे अधिक व्यक्तियों द्वारा जिन्हें ऐसे लोक- न्यूसेन्स के चलते विशेष क्षति हुई हो

 

7. लोकपूर्त कार्य से संबंधित वाद का प्रावधान है

a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 100 में 

b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 105 में 

c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 92 में

d. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 41 में 

 

8. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 92 के अंतर्गत संस्थित वाद में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है-

a. महाधिवक्ता द्वारा वाद को संस्थित किया जा सकता है

b. वादलोक पूर्त कार्य से संबंधित हो

c. दो या अधिक व्यक्तियों द्वारा वाद को संस्थित किया जा सकता है।

d. उपरोक्त सभी

 

9. निम्नलिखित में से क्या सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 94 में अनुपूरक कार्यवाहियों से सम्बन्धित प्रावधानों में शामिल नहीं है?

a. अस्थाई व्यादेश 

b. निष्पादकों की नियुक्ति

c. निर्णय के पूर्व गिरफ्तारी 

d. निर्णय के पूर्व कुर्की

 

10. अनुपूरक तथा आनुषंगिक कार्यवाहियों का उल्लेख कहाँ किया गया है-

a. सिविल प्रक्रिया संहिता में

b. दंड प्रक्रिया संहिता में

c. विधि विरुद्ध गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम में

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

11. निम्नलिखित में से क्या एक अनुपूरक कार्यवाही नहीं है?

a. प्रतिभूति जमा करने हेतु प्रतिवादी को निर्देश

b. कमीशन जारी किया जाना

c. अस्थाई व्यादेश की मंजूरी

d. किसी रिसीवर की नियुक्ति

 

12. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 का कौन सा प्रावधान"पक्षकारों की सहमति के आधार पर न्यायालय द्वारा मूल डिक्री से अपील के साथ सम्बन्धित है?

a. धारा 82

b. धारा 98

c. धारा 90

d. धारा 96

 

13. "पक्षकारों की सहमति के आधार पर न्यायालय द्वारा मूल डिक्री से अपील के साथ सम्बन्धित है?पारित डिक्री पर कोई अपील नहीं की जा सकेगी। यह प्रावधान किस धारा में किया गया है-

a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96(1)

b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96(3)

c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96(4)

d. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96(2)

 

14. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 96(4) जिसे सिविल प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा अंतर्विष्ट किया गया है, प्रतिबंधित करती है-

a. अंतिम डिक्री के विरूद्ध अपील को

b. निष्कर्षो के विरूद्ध अपील को

c. सहमति आधारित डिक्री के विरूद्ध अपील को 

d. लघु मामलों में अपील को

 

15. एक अपील होगी-

a. जिला न्यायालयों द्वारा पारित किसी भी आदेश में नहीं

b. जिला न्यायालयों द्वारा पारित किसी भी डिक्री में नहीं 

c. न्यायालय द्वारा पारित सभी आदेशों में

d. केवल ऐसे आदेशों में जिनका प्रावधान सिविल प्रक्रिया संहिता में किया गया है

 

16. गलत कथन को चिन्हित कीजिए

a. वाद के सुनवाई के समय जहाँ प्रतिवादी उपस्थित हो तथा वादी उपस्थित न हो वहाँ न्यायालय वाद को खारिज कर देगा तथा वादी उसी कारण के लिए एक ताजा वाद नहीं ला सकेगा

b. कोई भी न्यायालय एकपक्षीय तौर पर पारित किसी डिक्री को केवल इस आधार पर खारिज नहीं करेगा कि प्रतिवादी पर समन तामील करने में कोई अनियमितिता बरती गई है।

c. एकपक्षीय तौर पर पारित किसी मूल डिक्री से कोई अपील नहीं होगी

d. वादी उस न्यायालय में किसी डिक्री को खारिज करने 12 का आदेश देने की अर्जी दे सकता है जिसने उसके विरूद्ध एकपक्षीय डिक्री जारी की है।

 

17. सिविल प्रक्रिया संहिता की द्वितीय अपील प्रस्तुत की जा सकती हैं?

a. धारा 99क

b. धारा 100 

c. धारा 99

d. धारा 100क

 

18. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत पारित प्रारंभिक आज्ञप्ति को-

a. बिना अंतिम आज्ञप्ति हेतु प्रतीक्षा किये अपील में चुनौती दी जा सकती है।

b. केवल तभी चुनौती दी जा सकती है जबकि अपील में अंतिम आशिप्ति को चुनौती दी जा रही है।

c. अपील में चुनौती नहीं दी जा सकती

d. धारा 115 सीपीसी के अंतर्गत एक परिहार में चुनौती दी जा सकती है।

 

19. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 100(1) के अंतर्गत द्वितीय अपील हेतु प्रावधान की गई अनिवार्य शर्त है-

a. तथ्य सम्बन्धी सारवान प्रश्न

b. विधि सम्बन्धी सारवान प्रश्न

c. अधिकारिता सम्बन्धी त्रुटि

d. सार्वजनिक महत्व की विषयवस्तु

 

20. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 100 के अंतर्गत द्वितीय अपील किसके समक्ष की जा सकती है-

a. जिला न्यायालय

b. उच्च न्यायालय

c. सर्वोच्च न्यायालय

d. विशेष न्यायालय

 

21. व्यवहार प्रक्रिया संहिता की धारा 102 के अंतर्गत किसी डिक्री के विरुद्ध द्वितीय अपील नहीं की जा सकेगी, जब धन की वसूली के लिए मूल वाद की विषय-वस्तु-

a. बीस हजार रुपये से अधिक नहीं है।

b. पच्चीस हजार रुपये से अधिक नहीं है।

c. तीन हजार रुपये से अधिक नहीं है

d. पांच हजार रुपये से अधिक नहीं है। 

 

22. सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत अधिकतम कितनी धनराशि की वसूली के वादमें कोई द्वितीय अपील नहीं की जा सकती-

a. 1,00,000 रुपए 

b. 25,000 रुपए 

c. 50,000 रुपए

d. 2,00,000 रुपए

 

23. यदि अपील की सुनवाई उच्च न्यायालय के किसी एक न्यायाधीश द्वारा की गई हो तो आगे की अपील कहाँ की जा सकेगी-

a. उच्च न्यायालय की खंडपीठ 

b. इनमें से कोई नहीं

c. केवल सर्वोच्च न्यायालय में

d. आगे कोई अपील नहीं

 

24. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 100क के अंतर्गत, जहाँ किसी मूल अथवा अपीली डिक्री अथवा आदेश. से उत्पन्न किसी अपील पर उच्च न्यायालय के किसी अकेले न्यायाधीश द्वारा सुनवाई एवं निर्णय किया जाता है-

a. सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति से आगे अपील होगी 

b. उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष आगे अपील होगी

c. वहाँ ऐसे एकल न्यायाधीश के निर्णय एवं डिक्री पर आगे कोई अपील नहीं होगी

d. उच्च न्यायालय के लिए अधिकारपत्र के अधीन आगे अपील होगी

 

25. द्वितीय अपील में साक्ष्य की पुनर्प्रशंसा-

a. अनुज्ञेय है

b. अनुज्ञेय नहीं है

c. इनमें से कोई नहीं

d. पुनर्विचार का विषय है

 

26. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 104 के अंतर्गत किस आदेश के विरूद्ध अपील की जा सकती है- 

a. क्षतिपूर्ति हेतु धारा 95 के अंतर्गत दिए गए आदेश के विरूद्ध

b. धारा 92 के अंतर्गत आदेश के विरूद्ध 

c. वादसंस्थित करने की अनुमति से इंकार करने वाले आदेश के विरूद्ध धारा 91 के अंतर्गत

d. उपरोक्त सभी

 

27. अपीली न्यायालय के शक्तियों के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से क्या सही नहीं है?

a. अपीली न्यायालय को अतिरिक्त साक्ष्य ग्रहण करने का कोई शक्ति नहीं होती

b. अपीली न्यायालय को विवाद्य निर्धारित करने तथा उन्हें विचारण हेतु संदर्भित करने का शक्ति होती है।

c. अपीली न्यायालय को किसी वाद में अंतिम अवधारणा का शक्ति होती है

d. अपीली न्यायालय को वाद को प्रतिप्रेषित करने का शक्ति होती है।

 

28. निम्न में से क्या सही है?

a. अपीली न्यायालय को विवाद निर्धारित करने तथा उन्हें विचारण हेतु संदर्भित करने का शक्ति नहीं होगी

b. अपीली न्यायालय को अतिरिक्त साक्ष्य ग्रहण करने का कोई शक्ति नहीं होगी

c. अपीली न्यायालय को किसी वाद में अंतिम अवधारणा

का शक्ति होती है

d. अपीली न्यायालय वादको प्रतिप्रेषित नहीं करेगा 

 

29. अपीली न्यायालय की शक्तियों के सम्बन्ध में निम्न में क्या सही नहीं है?

a. वाद के प्रतिप्रेषण का शक्ति होती है।

b. अतिरिक्त साक्ष्य ग्रहण करने का शक्ति नहीं होती है 

c. विवाद्यकों को तय करने और विचारण हेतु संदर्भित करने का शक्ति होती है।

d. अतिरिक्त साक्ष्य ग्रहण करने का शक्ति होती है।

 

30. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सा संयोजन सुमेलित नहीं है?

a. किसी अकिंचन द्वारा वाद - आदेश 33 

b. अपीली न्यायालय के शक्ति - धारा 102

c. अस्थायी व्यादेश - आदेश 39

d. एक केवियट दाखिल करने का अधिकार - धारा 148क

 

31. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत 'निर्देश' किसे किया

a. सर्वोच्च न्यायालय

b. जिला न्यायालय

c. उपरोक्त में कोई नहीं

d. उच्च न्यायालय

 

32. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 113 के अंतर्गत निर्देश के लिए कौन आवेदन दे सकता है-

a. न्यायालय

b. वाद का कोई पक्षकार

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों 

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

33. यदि न्यायालय संतुष्ट हो कि इसके समक्ष लंबित वाद में किसी विधि की वैधता सम्बन्धी प्रश्न निहित है तो न्यायालय को क्या करना चाहिए-

a. विधि की वैधता का निर्णय

b. उच्च न्यायालय को पुनर्विलोकन के शक्ति का उपयोग करना चाहिए

c. परामर्श हेतु सर्वोच्च न्यायालय को निर्देशित करना चाहिए

d. मामले को उच्च न्यायालय को निर्देशित

 

34. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 114 के अंतर्गत स्वयं को किसी डिक्री अथवा आदेश से व्यथित अनुभव करने वाला कोई भी व्यक्ति आवेदन दे सकता है-

a. पुनर्विचार हेतु

b. निर्देश हेतु

c. पुनर्विलोकन हेतु

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

35. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 114 को किसके साथ पढ़ा जाना चाहिए-

a. आदेश 47, नियम 3

b. आदेश 41

c. आदेश 46 नियम 1

d. आदेश 47 नियम 1

 

36. किसी आदेश अथवा डिक्री के पुनर्विलोकन हेतु आवेदन प्रस्तुत की जा सकती है-

a. आदेश अथवा डिक्री पारित करने वाले न्यायालय के समक्ष

b. अपीली न्यायालय के समक्ष

c. किसी पक्षकार के अधिवक्ता द्वारा

d. किसी सत्र न्यायाधीश द्वारा

 

37. किसी निर्णय के पुनर्विलोकन हेत एक आवेदन प्रस्तुत की जा सकती है यदि-

a. यदि मामला महत्वपूर्ण हो और पुनः सुनवाई की माँग करता हो

b. निर्णय त्रुटिपूर्ण हो

c. यदि अभिलेख पर स्पष्ट त्रुटि मौजूद हो

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

38. किसी निर्णय के पुनर्विलोकन के लिए एक याचिका तभी स्वीकार्य होगी जब व्यक्ति-ने 

a. सिविल प्रक्रिया संहिता द्वारा अपील की अनुमति हो किन्तु कोई अपील न की गई हो

b. पुनर्विलोकन के लिए न्यायालय की अनुमति प्राप्त की जा चुकी हो

c. निर्णय का आंशिक पालन किया हो

d. संपूर्ण डिक्री राशि को जमा कर देता हो।

 

39. व्यथित व्यक्ति निम्नलिखित में से किसी एक आधार पर किसी सिविल न्यायालय के आदेश अथवा निर्णय के पुनर्विलोकन हेतु आवेदन नहीं दे सकता-

a. एक डिक्री अथवा आदेश जिससे एक अपील की अनुमति हो किन्तु कोई अपील न की गई हो.

b. व्यथित व्यक्ति की अनुपस्थिति में कोई डिक्री अथवा आदेश पारित कर दिया गया हो

c. ऐसा आदेश अथवा डिक्री जिससे किसी अपील की

अनुमति न हो

d. किसी निर्देश पर लघुवाद न्यायालय के निर्देश पर कोई निर्णय

 

40. किसी निर्णय का पुनर्विलोकन किस आधार पर किया जा सकता है-

a. तथ्य अथवा विधि की त्रुटि जो अभिलेख पर स्पष्ट हो 

b. नए एवं महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रकट होने पर, जो सम्बन्धित पक्ष की जानकारी में न रहे हों

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों 

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

41. निम्नलिखित में से किस परिस्थिति के अंतर्गत निर्णय का पुनर्विलोकन नहीं होगा?

a. किसी लघुवाद न्यायालय से किसी निर्देश पर एक निर्णय द्वारा

b. अपील खारिज

c. ऐसी डिक्री अथवा आदेश से जिससे इस संहिता द्वारा अपील की अनुमति दी गई हो, किन्तु कोई अपील न की गई हो

d. ऐसी डिक्री अथवा आदेश से जिससे इस संहिता द्वारा अपील की अनुमति न दी गई हो

 

42. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 115 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को अधिकार है-

a. किसी भी आदेश से पृथक मत रखने अथवा उसे उलट देने का

b. पुनरीक्षण का

c. पुनर्विलोकन का

d. निर्देश का

 

43. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की कौन सी धारा स्पष्ट तौर पर उत्प्रेषण रिट जारी करने के शक्ति की प्रकृति रखती है?

a. धारा 115

b. धारा 122

c. धारा 11

d. धारा 105

 

44. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 115 के अंतर्गत- 

a. अधिकारिता का अनियमित उपयोग करना जो न्यायालय में निहित होता है।

b. अधिकारिता का उपयोग जो न्यायालय में निहित नहींहोता है

c. अधिकारिता का उपयोग न करना जो न्यायालय में निहित होता है

d. उपरोक्त सभी

 

45. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत पुनर्विचार की प्रकृति यह होती है कि-

a. यह किसी वाद अथवा कार्यवाही को रोकने का कार्य नहीं करेगी, केवल उन मामलों को छोड़कर जिनमें ऐसे वाद अथवा कार्यवाहियों पर उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगा दी गई हो

b. यह कार्यवाही को रोकने का कार्य करती है

c. यह कार्यवाही तथा वाद दोनों को ही रोकने का कार्य करती है

d. यह वाद को रोकने का कार्य करती है।

 

46. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत किसी न्यायालय

के समक्ष एकबार पुनर्विचार प्रस्तुत कर दिए जाने के वादयह-

a. कार्यवाही पर रोक के रूप में कार्य करता है.

b. यह न्यायालय के समक्ष किसी वाद अथवा कार्यवाही पर रोक के रूप में कार्य नहीं करेगा, केवल उन मामलों को छोड़कर जिनमें ऐसे वाद अथवा कार्यवाहियों पर न्यायालय द्वारा रोक लगाई जा चुकी हो

c. यह विवाद्यकों पर पूर्व न्याय के रूप में कार्य करता है

d. यह तात्कालिक अनुतोष के लिए व्यादेश के रूप में कार्य करता है

 

47. निम्नलिखित में से क्या सही है-

a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 113 निर्देश, धारा 114 पुनर्विलोकन, धारा 115 पुनरीक्षण

b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 113 निर्देश, धारा 114 पुनरीक्षण, धारा 115 पुनर्विलोकन

c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 113 पुनर्विलोकन, धारा 114 पुनरीक्षण, धारा 115 निर्देश

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

48. सिविल प्रक्रिया संहिता की निम्नलिखित में से कौन सी धारा न्यायालय में महिलाओं को स्वीय उपसंजाति से छूट प्रदान करती है?

a. धारा 133

b. धारा 135

c. धारा 135क

d. धारा 132

 

49. निम्नलिखित में से किसे न्यायालय में स्वीय उपसंजाति

छूट प्राप्त नहीं है?

a. राज्यों के मंत्रीग

b. जिलाधीश

c. भूतपूर्व भारतीय शासक

d. राज्य विधानपरिषद् के चेयरमैन

 

50. सिविल प्रक्रिया संहिता-

a. अधिवक्ताओं को न्यायालय में स्वीय उपसंजाति से छूट प्रदान करती है

b. नगर आयुक्तों को न्यायालय में स्वीय उपसंजाति से छूट प्रदान करती है

c. राज्य के मंत्री को न्यायालय में स्वीय उपसंजाति से छूट प्रदान करती है।

d. किसी भी व्यक्ति को न्यायालय में स्वीय उपसंजाति से छूट नहीं प्रदान करती

 

51. न्यायालय में स्वीय उपसंजाति से छूट का प्रावधान किया गया है-

a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 133 में

b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 132 में

c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 143 में

d. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 142 में

 

52. निम्नलिखित में से किसे न्यायालय में स्वीय उपसंजाति से छूट प्राप्त है?

a. केन्द्रीय मंत्रियों को

b. राज्य के मंत्रियों को

c. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को

d. उपरोक्त सभी को

 

53. सिविल प्रक्रिया संहिता की कौन सी धारा विधानमंडल सदस्यों को गिरफ्तारी तथा सिविल प्रक्रिया के अंतर्गत निरुद्धी से छूट प्रदान करती है?

a. धारा 135क

b. धारा 132

c. धारा 80

d. धारा 134

 

54. न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले शपथपत्र-

a. किसी न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट अथवा नोटरी द्वारा अधिकृत हो सकते हैं

b. किसी अधिवक्ता द्वारा अधिकृत हो सकते हैं

c. राज्य के मंत्रियों द्वारा अधिकृत हो सकते हैं

d. केवल पीठासीन न्यायाधीश के अलावा अधिकृत नहीं किए जा सकते

 

55. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अन्तर्गत निम्नलिखित में से किसे न्यायालय में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट पाने का हक नहीं है?

a. संघ के मन्त्रियों को

b. राज्य के मन्त्रियों को

c. भारत के उपराष्ट्रपति को

d. लोक सेवा आयोग के

 

56. सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत किसी भी व्यक्ति पर तामील किए गए अथवा दिए गए सभी आदेश लिखित में होंगे। यह प्रावधान किस धारा में किया गया है-

a. धारा 143

b. धारा 144

c. धारा 141

d. धारा 142

 

57. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की निम्नलिखित में किस धारा में प्रत्यास्थापन के सिद्धांत समाहित हैं?

a. धारा 134

b. धारा 148क

c. धारा 151

d. धारा 144

 

58. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अंतर्गत प्रत्यास्थापन का क्या अर्थ है?

a. वाद संपत्ति के कब्जाधारी किसी व्यक्ति को बेकब्जा करना 

b. डिक्री के संशोधन, परिवर्तन अथवा उल्टे जाने पर किसी पक्षकार को पुनर्बहाली

c. दावे का पुनः न्यायनिर्णयन

d. वाद का प्रत्यास्थापन

 

59. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 148 के अंतर्गत न्यायालय समय सीमा को अधिकतम कितना बढ़ा सकता है-

a. 60 दिन

b. 90 दिन

c. 40 दिन

d. 30 दिन

 

60. एक वाद की संस्थिति हेतु समय को निम्नलिखित में से किस प्रावधान को लागू करते हुए बढ़ाया जा सकता है?

a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151

b. परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5

c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 148

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

61. जहाँ सिविल प्रक्रिया संहिता द्वारा निर्दिष्ट किसी कार्य को करने हेतु न्यायालय द्वारा कोई अवधि तय अथवा मंजूर की गई हो तो न्यायालय ऐसी अवधि को अधिकतम कितना बढ़ा सकता है-

a. कुल 60 दिन से अनधिक

b. कुल 90 दिन से अनधिक

c. कुल 30 दिन से अनधिक

d. कुल 120 दिन से अनधिक

 

62. एक "केवियेट' प्रस्तुत करने के अधिकार का प्रावधान किया गया है-

a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 148 में 

b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 148ख में 

c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 147 में 

d. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 148क में 

 

63. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत प्रस्तुत एक केवियेट के अस्तित्व में रहने की अवधि होती है

a. प्रस्तुत किए जाने की तिथि से 60 दिनों तक 

b. दायर किए जाने की तिथि से 120 दिनों तक 

c. दायर किए जाने की तिथि से 90 दिनों तक

d. दायर किए जाने की तिथि से 30 दिनों तक 

 

64. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत एक केवियेट दायर किया जा सकता है जब कोई-

a. वाद संस्थापित हो

b. कार्यवाही प्रारंभ अथवा संस्थित हो चुकी हो

c. वादसंस्थित होने वाला हो

d. वाद अथवा कार्यवाही संस्थित हो चुकी हो अथवा होने वाली हो

 

65. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 148क के अंतर्गत दायर एक केवियेट-

a. केविवेट अथवा किसी पक्ष को वाद कां पक्षकार बनाता है

b. केवियेट प्रस्तुतकर्ता को आवेदन की नोटिस प्राप्त करने का अधिकारी बनाता है

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों 

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

66. सिविल प्रक्रिया संहिता की किसी धारा के अंतर्गत "न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियों का प्रावधान किया गया है?

a. धारा 151

b. धारा 141

c. धारा 153

d. धारा 152

 

67. न्यायालय द्वारा अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग किया जा सकता है-

a. न्यायालीय प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने हेतु

b. न्याय प्रदान करने हेतु

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों 

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

68. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के अंतर्गत अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग किसके द्वारा किया जा   सकता है-

a. जिला न्यायालय

b. किसी भी न्यायालय

c. सर्वोच्च न्यायालय

d. उच्च न्यायालय

 

69. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 151 के अंतर्गत प्रदत्त अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग किसके द्वारा किया जा सकता है-

a. केवल जिला न्यायालय 

b. सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय के साथ-साथ किसी भी सिविल न्यायालय द्वारा

c. केवल सर्वोच्च न्यायालय

d. केवल उच्च न्यायालय

 

70. अंतर्निहित शक्तियों के अंतर्गत सिविल न्यायालय आदेश पारित कर सकता है-

a. पक्षकारों को अपने वाद का समाधान करने हेतु बाध्य करने हेतु

b. वादी को वाद वापस लेने हेतु बाध्य करने हेतु

c. मामले को माध्यस्थ को निर्देशित करने हेतु

d. न्याय के उद्देश्यों के लिए आवश्यक अथवा न्यायालय की प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने हेतु

 

71. इंटरवीनर्स वो होते हैं जो-

a. न्यायालय के कीमती समय को जाया करे 

b. बादी पर एक भार हो

c. इम्प्लीड होने के हकदार हों

d. इम्प्लीड होने के हकदार न हों

 

72. निर्णयों में की गई लिपिकीय अथवा अंकगणितीय त्रुटियों को किस धारा के अंतर्गत सही किया जा सकता है-

a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 154

b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 152

c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 155

d. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 153

 

73. निर्णयों, डिक्रियों अथवा आदेशों में हुई लिपिकीय अथवा अंकगणतीय त्रुटियों को सही करने का न्यायालय का अधिकार-

a. किसी भी समय पर पक्षकारों द्वारा दिए गए आवेदन पर प्रयुक्त किया जा सकता है।

b. किसी भी समय पर न्यायालय द्वारा स्वप्रेरणा से किया जा सकता है

c. उपरोक्त में (a) अथवा (b)

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

74. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 152 के अंतर्गत निर्णयों तथा आदेशों में संशोधन का आवेदन करने का अधिकार किसका होता है-

a. किसी भी पक्षकार का

b. सरकारी प्लीडर का

c. व्यथित व्यक्ति का

d. व्यथित व्यक्ति का, न्यायालय की अनुमति से

 

75. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 152 न्यायालय को किस सम्बन्ध में निर्णय, डिक्रियों, अथवा आदेशों को संशोधित करने का केवल लिपिकीय अथवा अंकगणतीय त्रुटियों के सम्बन्ध में 

a. केवल आकस्मिक चूक अथवा भूल के सम्बन्ध में

b. अधिकार प्रदान करती है

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों  

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

76. किसी वाद में किसी कार्यवाही में की गई किसी त्रुटि अथवा दोष को संशोधित करने का सामान्य अधिकार न्यायालय में किस धारा प्रभाव से निहित होता है-

a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 153 क 

b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 153ख 

c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 152 

d. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 153

 

77. सिविल प्रक्रिया संहिता की निम्नलिखित में से कौन सी धारा ऐसे खुले न्यायालय में विचारण का प्रावधान करती है जहाँ जनता को पहुँच प्राप्त हो?

a. धारा 153क

b. धारा 153ख

c. धारा 153ग

d. धारा 153घ

 

78. सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत न्यायालय के पास किस हेतु अंतर्निहित अधिकारिता उपलब्ध नहीं होती-

a. चूक के लिए खारिज की गई चुनाव याचिका को बहाल करने की

b. अलग-अलग दावों पर आधारित वादों को एकजुट करने की

c. न्यायालय शुल्क न जमा करने के कारण खारिज वाद

को पुनःस्थापित करने की

d. उपरोक्त सभी

 

79. जब वादी के द्वारा समुचित न्यायालय शुल्क न अदा किया गया हो तो न्यायालय-

a. सरकार को एक रिपोर्ट भेजेगा

b. वादपत्र खारिज कर देगा

c. वादी को कम भुगतान किए गए न्यायालय शुल्क को जमा करने हेतु समय देगा

d. उपरोक्त में कोई नहीं 

 

80. सिविल प्रक्रिया संहिता का कौन सा प्रावधान यह व्यवस्था करता है कि एक ही हित में एक ही व्यक्ति सभी वादियों की ओर से वाद ला सकेगा अथवा बचाव कर सकेगा?

a. आदेश 1 नियम 8

b. आदेश 1, नियम 9

c. आदेश 1, नियम 1

d. आदेश 1, नियम 2

 

81. दीवानी प्रक्रिया संहिता के अधीन प्रतिनिधिक क्षमता में वाद दायर किया जा सकता है-

a. आदेश 1 नियम 9 के अधीन 

b. आदेश 1 नियम 10 के अधीन

c. आदेश 1, नियम 8 के अधीन

d. आदेश 1, नियम 8A के अधीन

 

82. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 1 नियम 8 के अंतर्गत प्रतिनिधि वादकी न्यायालय द्वारा अनुमति दी जा सकती है जब-

a. ऐसे बहुत से व्यक्ति एक ही परिवार से सम्बन्धित हों 

b. ऐसे बहुत से व्यक्तियों के एक ही वाद में समान हित सम्बद्ध हों

c. किसी अन्य वाद में बहुत से व्यक्ति पक्षकार हों

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

83. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 1 नियम 8 के अंतर्गत एक प्रतिनिधि वाद प्रस्तुत करने हेतु निम्नलिखित में से किसकी न्यायालय की अनुमति की

a. प्रतिनिधित्व किए जा रहे लोगों की लिखित अनुमति की

b. आवश्यकता नहीं होती?

c. अनेक पक्षकारों की

d. समान हित की

 

84. ऐसा कौन सा वाद होता है जिसकी नोटिस किसी प्रतिनिधि वादमें हितधारक सभी व्यक्तियों को दिए जाने की आवश्यकता नहीं होती?

a. वाद को वापस लिया जाना

b. वाद में समझौता दर्ज किया जाना

c. वाद का अपसर्जन

d. वाद में किसी नए प्रतिवादी को जोड़ा जाना

 

85. प्रतिनिधि क्षमता में प्रस्तुत किसी वाद को वादी द्वारा वापस लिया जा सकता है, समझौता तथा परित्याग किया जा सकता है-.

a. सभी हितधारकों को नोटिस देने के बाद

b. सभी हितधारकों को नोटिस दिए बिना

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों 

d. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों  में एक

 

86. पक्षकारों के कुसंयोजन अथवा असंयोजन के कारण सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 1, नियम 9 के अंतर्गत वाद-

a. खारिज करना अथवा न करना न्यायालय के विवेकाधीन होता है

b. उपरोक्त में कोई नहीं

c. खारिज किए जाने योग्य होगा

d. खारिज नहीं किया जा सकता

 

87. एक वादकिस कारणवश विफल हो सकता है-

a. आवश्यक पक्ष के असंयोज

b. समुचित पक्ष के कुसंयोजन

c. समुचित पक्ष के असंयोजन

d. आवश्यक पक्ष के कुसंयोजन

 

88. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत जहाँ कोई व्यक्ति किसी वाद का आवश्यक पक्षकार हो तथा जिसने एक पक्षकार के रूप में कुसंयोजन का होता है 

a. असंयोजन का होता है 

b. प्रवेश न लिया हो, वहाँ ऐसा मामला-

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों  

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

89. सिविल प्रक्रिया संहिता के किस प्रावधान के अंतर्गत पक्षकारों को हटाया, जोड़ा अथवा प्रतिस्थापित किया जा सकता है?

a. आदेश 1, नियम 3

b. आदेश 1 नियम 9

c. आदेश 1, नियम 1

d. आदेश 1, नियम 10

 

90. एक आवश्यक पक्षकार वह होता है जिसकी?

a. अनुपस्थिति में आदेश पारित किया जा सकता है किन्तु वाद के संपूर्ण निर्णयन हेतु उसकी हाजिरी आवश्यक होती है

b. अनुपस्थिति में प्रभावी रूप से कोई भी आदेश पारित नहीं किया जा सकता

c. केवल (b) सही है

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

91. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 2 नियम 1 के अनुसार प्रत्येक वाद की विरचना यथासंभव व्यवहारिक रूप में इस प्रकार की जाएगी कि-

a. आगे की मुकद्मेबाजी रोकी जा सके

b. अंतिम निर्णय हेतु आधार प्राप्त हो जाए

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों 

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

92. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 2 नियम 2 कहाँ लागू नहीं होता-

a. रिट याचिकाओं पर

b. निष्पादन हेतु अर्जी पर

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों 

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

93. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 2 नियम 3 के अनुसार एक वादी एक ही वाद में एक ही प्रतिवादी के विरूद्ध निम्न में से किसे शामिल कर सकता है-

a. वाद हेतुकों को

b. ऋणों को

c. कई विवाद्यकों को

d. कई दावों को

 

94. 'क' पाँच हजार रुपए प्रतिवर्ष के किराए पर 'ख' को एक घर किराए पर देता है। 1905, 1906 तथा 1907 तीनों वर्षों का किराया बकाया है एवं भुगतान नहीं किया गया है। 'क' 'ख' पर 1908 में मात्र 1906 के किराए के लिए वाद लाता है-

a. 'क' वादमें 'ख' के विरूद्ध 1905 अथवा 1907 के किराए के लिए वाद नहीं ला सकता 

b. क' वादमें 'ख' के विरूद्ध 1905 के किराए के लिए वाद ला सकता है

c. 'क' वादमें 'ख' के विरूद्ध 1907 के किराए के लिए वाद ला सकता है।

d. 'क' वादमें 'ख' के विरूद्ध 1905 तथा 1907 दोनों के किराए के लिए वादला सकता है।

 

95. "जहाँ वादी अपने दावे के किसी भाग के बारे में वाद लाने का लोप करता है या उसे साशय त्याग देता है, वहाँ उसके पश्चात् वह इस प्रकार लोप किये गये या त्यक्त भाग के बारे में वाद नहीं लायेगा ।" इस सिद्धान्त की उत्पत्ति निहित है-

a. व्यवहार प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश II नियम 2 में

b. व्यवहार प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश I नियम 2 में। 

c. भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 115 में 

d. व्यवहार प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 11 में।

 

96. क' 10,000 रुपए प्रतिवर्ष के किराए पर 'ख' को एक घर किराए पर देता है। 1906 से 1908 तक का किराया बकाया है एवं भुगतान नहीं किया गया है। 'क' 'ख' पर 2009 में केवल 2007 के किराए के लिए वादलाता है-

a. 'क' वाद में 'ख' के विरूद्ध 2006 तथा 2008 दोनों के

किराए के लिए वाद ला सकता है।

b. 'क' वाद में 'ख' के विरूद्ध 2006 अथवा 2008 के किराए के लिए वाद नहीं ला सकता

c. 'क' वाद में 'ख' के विरूद्ध केवल 2006 के किराए के लिए वाद ला सकता है

d. 'क' वाद में 'ख' के विरूद्ध केवल 2008 के किराए के लिए वाद ला सकता है

 

97. संहिता का कौन सा प्रावधान वाद हेतुको के संयोजन से सम्बन्धित है-

a. आदेश 1, नियम 2

b. आदेश 2, नियम 3

c. आदेश 2, नियम 2

d. आदेश 2, नियम 1

 

98. एक वादी-

a. किसी वादमें केवल विधि के प्रश्नों को संयोजित कर सकता है

b. एक ही वाद में कई वाद हेतुको को संयोजित नहीं कर सकता

c. एक ही वाद में एक ही प्रतिवादी के विरूद्ध कई वाद हेतुको को संयोजित कर सकता है।

d. एक वाद में केवल कुछ वाद हेतुको को संयोजित कर सकता है

 

99. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 2 नियम 6 के अंतर्गत निम्नलिखित में से क्या न्यायालय के लिए पृथक विचारण का आदेश देने का आधार नहीं है-

a. विचारण में उलझन

b. असुविधा 

c. विचारण में बिलंब

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

100. अनेकता का अर्थ है-

a. वाद कारण का कुसंयोजन

b. वाद हेतुको के साथ-साथ पक्षकारों का कुसंयोजन

c. पक्षकारों का कुसंयोजन

d. पक्षकारों का असंयोन

 

101. वादी किसी पश्चातवर्ती वाद में कुछ अनुतोष का दावा करना चाहता है। सिविल प्रक्रिया संहिता के निम्नलिखित में से किस प्रावधान के अंतर्गत उसे अनुमति की आवश्यकता होगी?

a. आदेश 2, नियम 2 

b. आदेश 1, नियम 8 

c. धारा 82(2)

d. धारा 20

 

102. किन मामलों में अनेक व्यक्ति वादी के रूप में प्रवेश ले सकते हैं-

a. जहाँ विधि का साझा प्रश्न संलिप्त हो

b. जहाँ एक ही कार्यवाही से ऐसे व्यक्तियों के हक में अधिकार उत्पन्न होता हो

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों  

d. उपरोक्त में कोई नहीं

 

103. निम्नलिखित में से सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा अधिवक्ता पर प्रक्रिया की तामील से संबंधित है-

a. आदेश 7 नियम 3

b. आदेश 4 नियम -8

c. आदेश 3 नियम 5

d. आदेश 2 नियम 2

 

104. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत " हर वादन्यायालय को या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी अधिकारी को दो प्रतियों में वादपत्र प्रस्तुत करके संस्थित किया जायेगा।" यह प्रावधान किस धारा के अंतर्गत किया गया है-

a. आदेश 3 नियम 1

b. आदेश 4 नियम 1 

c. धारा 26

d. धारा 20

 

105. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 4 नियम 1 के उप नियम (1) के अंतर्गत एक वादसंस्थित किया जा सकता है जब-

a. न्यायालय के समक्ष वादपत्र की एक प्रति प्रस्तुत की गई हो 

b. न्यायालय के समक्ष वादपत्र तीन प्रतियों में प्रस्तुत की गई हो

c. न्यायालय ने वादपत्र को विचारण में ग्रहण कर लिया हो 

d. न्यायालय के समक्ष वादपत्र प्रतियों में प्रस्तुत की गई हो

 

106. समनों के जारी एवं तामील किए जाने सम्बन्धी नियमों का प्रावधान सिविल प्रक्रिया संहिता में कहाँ किया

a. आदेश 8

b. आदेश 11

c. आदेश 5

d. आदेश 7

 

107. सिविल प्रक्रिया संहिता का आदेश 5 किससे सम्बन्धित प्रावधान करता है-

a. समनों का निकाला जाना और उनकी तामील से

b. सामान्य अभिवचनों से

c. स्वीकृतियों से

d. वादों की संस्थापना से

 

108. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत वादपत्र की प्रति-

a. न्यायालय की अनुमति से समन के साथ संलग्न की जा सकती है

b. वादी की प्रार्थना पर समनों के साथ संलग्न की जाती है।

c. प्रत्येक समन के साथ संलग्न की जाएगी

d. समन के साथ संलग्न किया जाना आवश्यक नहीं है

 

109. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 नियम 1(1) के अंतर्गत एक प्रतिवादी को कितने दिनों के अंदर उपस्थित होने पर दावे का उत्तर देने तथा लिखित कथन प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है- 

a. समन तामील होने के 30 दिनों के अंदर

b. समन तामील होने के 15 दिनों के अंदर

c. समन तामील होने के 90 दिनों के अंदर 

d. समन तामील होने के 60 दिनों के अंदर

 

110. सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के आदेश 5 में उपबंधित 11 है-

a. स्वीकारोक्ति

b. सम्मनों का निकाला जाना और उनकी तामील

c. अभिवचन

d. साक्षियों को बुलाया जाना और उनकी उपस्थिति

 

111. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 के अंतर्गत न्यायालय द्वारा समन की तामील के साथ-साथ न्यायालय किस अन्य आदेश के अंतर्गत वादी द्वारा समन तामील किए जाने की अनुमति प्रदान कर सकता है-

a. नियम 10

b. नियम 11

c. नियम 9

d. नियम 9क

 

112. प्रतिवादी पर तामील के लिए दस्ती समन वादी को किस नियम के अंतर्गत दिए जा सकते हैं-

a. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 नियम 7

b. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 नियम 6

c. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5नियम 9क

d. सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5नियम 9

 

113. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 5 नियम 9(3) के अंतर्गत प्रतिवादी द्वारा समन तामील के लिए किए गए व्यय को वहन किया जाना होता है-

a. न्यायालय द्वारा

b. वादी तथा प्रतिवादी द्वारा आंशिक तौर पर

c. वादी द्वारा

d. प्रतिवादी द्वारा

 

114. निम्न कथनों में से कौन सा कथन गलत है?

a. जहाँ एक से अधिक प्रतिवादी हों, समनों की तामील प्रत्येक प्रतिवादी पर की जाएगी

b. प्रतिवादी के लिए समन उसके सेवक पर तामील नहीं किए जा सकते

c. प्रतिवादी अपने अभिकर्ता को समन लेने हेतु अधिकृत कर सकता है

d. समन की तामील अधिवक्ता द्वारा समन की हस्ताक्षरित प्रति प्रस्तुत करने द्वारा की जाएगी

 

115. जहाँ कोई प्रतिवादी जानबूझकर तामील से बच रहा हो, न्यायालय समाचारपत्र में विज्ञापन द्वारा तामील का आदेश देता है किन्तु यह न्यायालय भवन अथवा प्रतिवादी के घर पर भी समन चस्पा करने का आदेश नहीं देता। न्यायालय द्वारा की गई कार्यवाही-

a. अनुचित होगी

b. अन्यायपूर्ण होगी

c. नियमिततापूर्ण होगी

d. अनियमितापूर्ण होगी

 

116. समन सुपुर्द किए जाने के समय यदि प्रतिवादी अपने घर पर अनुपस्थित रहा हो और एक समुचित समय के अंदर उसकी वहाँ उपलब्धता की संभावना न हो तथा उसका अधिकृत अभिकर्ता भी अनुपस्थित हो तो तामील की जा सकती है-

a. परिवार की किसी वयस्क महिला सदस्य पर 

b. प्रतिवादी के घर पर नियुक्त किसी सेवक पर 

c. परिवार के किसी वयस्क पुरुष सदस्य पर

d. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों 

 

117. जहाँ समन किया गया व्यक्ति समुचित प्रयास के वादभी नहीं प्राप्त हो पाता वहाँ समन तामील किया जा सकता है-

a. समन को ग्राम पंचायत की नगर परिषद्, जैसा भी हो, के नोटिस बोर्ड पर चस्पा किए जाने के द्वारा

b. समन की प्रतिलिपियों में से एक को उसके साथ निवास करने वाले परिवार के किसी वयस्क सदस्य के पास छोड़कर, तथा जिस व्यक्ति के पास समन इस प्रकार छोड़ा गया हो, यदि ऐसा आवश्यक हो, समन की दूसरी प्रति के पृष्ठ भाग पर उसके हस्ताक्षर प्राप्त करने के द्वारा 

c. उसके घर के सेहजदृश्य स्थान पर चस्पा किये जाने के द्वारा

d. समन किए गए व्यक्ति के सेवक पर तामील करने तथा दूसरी प्रति के पृष्ठ भाग पर उससे प्राप्ति के हस्ताक्षर करवाने के द्वारा

 

118. जहाँ प्रतिवादी कारावास में बंद हो, वहाँ समन तामील किया जाएगा-

a. प्रतिवादी पर तामील के लिए कारागार के भारसाधक अधिकारी को सुपुर्द करके

b. न्यायालय के माध्यम से प्रस्तुतीकरण वारंट द्वारा 

c. कारावास के बाहर चस्पा करके

d. कारावास में आदेश की तामील करवाने वाले को भेजकर

 

119. जहाँ तामील अधिकारी समन को प्रतिवादी अथवा उसके अभिकर्ता को व्यक्तिगत रूप से सुपुर्द करता है वहाँ उसे समन की मूल प्रति पर ऐसे व्यक्ति से अभिस्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक होता है। इसके वादही-

a. प्रतिवादी के हस्ताक्षर वाली मूल प्रति न्यायालय को  लौटा दी जाएगी

b. समन की प्रति प्रतिवादी को दी जाएगी 

c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों 

d. प्रतिवादी के हस्ताक्षर वाली मूल प्रति वादी को लौटा दी

 

120. समन तामीली के दौरान प्रतिवादी को अपने निवास से अनुपस्थित पाया गया और एक समुचित समय के अंदर उसके निवास पर वापस आने की कोई संभावना नहीं थी। समन की तामील की जा सकती है-

a. अवयस्क पुत्री को

b. वयस्क पुत्र को 

c. सेवक को

d. मुनीम को

 

121. प्रतिवादियों को वैकल्पिक सम्मन भेजने के बारे में प्रावधान निम्नलिखित में से किसके अधीन किया गया है?

a. आदेश V, सी. पी. सी. का नियम 19

b. आदेश V, सी. पी. सी. का नियम 20

c. आदेश V, सी. पी. सी. का नियम 21

d. आदेश V, सी. पी. सी. का नियम 19A

 

122. सिविल प्रक्रिया संहिता में अभिवचन को परिभाषित किया गया है-

a. आदेश 8 नियम 1 में

b. आदेश 8 नियम 2 में 

c. आदेश 6 नियम 1 में 

d. आदेश 6 नियम 2 में

 

123. अभिवचन से अभिप्रेत है-

a. वादपत्र अथवा उत्तर

b. वादपत्र अथवा लिखित कथन अथवा उत्तर

c. वादपत्र मात्र

d. वादपत्र या लिखित कथन

 

124. अभिवचन में उल्लेख होना चाहिए-

a. साक्ष्य का

b. किन्हीं तथ्यों 

c. महत्वपूर्ण तथ्यों का

d. विधि का

 

125. अभिवचन का सार क्या होता है?

a. अभिवचन किए गए तथ्य न कि विधि

b. अभिवचन किए गए तथ्य एवं विधि

c. उपरोक्त सभी

d. तथ्यों के अभिवचन किए गए विधि

 

126. सिविल प्रक्रिया संहिता अभिवचन में क्या शामिल नहीं होता-

a. वादपत्र

b. साक्ष्य

c. महत्त्वपूर्ण तथ्य

d. लिखित कथन

 

127. निम्नलिखित में से किसमे किसी साक्ष्य के अभिवचन की आवश्यकता नहीं होती-

a. लिखित कथन

b. प्रति शपथपत्र

c. उपरोक्त सभी

d. रिट याचिका

 

128. निम्नलिखित में से क्या अभिवचन का एक नियम नहीं है?

a. तथ्यों का अभिवचन करें न कि विधि का

b. केवल महत्त्वपूर्ण तथ्यों का अभिवचन करें

c. तथ्यों का अभिवचन करें न कि साक्ष्य का 

d. विधि का उल्लेख करें तथा तथ्यों का अभिवचन करें

 

129. अभिवचन हस्ताक्षरित होने चाहिए-

a. पक्षकार के द्वारा

b. अधिवक्ता तथा पक्षकार दोनों के द्वारा

c. अधिवक्ता तथा अधिवक्ता के उत्तरवर्ती के द्वारा

d. केवल अधिवक्ता के द्वारा

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