Download The Code Of Civil Procedure MCQs PDF Set-1
1. सिविल प्रक्रिया संहिता किस तिथि से प्रभावी हुई थी?
a. 31 जनवरी, 1908
b. 1 जनवरी, 1909
c. 1 अप्रैल, 1908
d. 31 दिसम्बर, 1908
2. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 संपूर्ण भारत में लागू होता है सिवाय-
a. नागालैंड राज्य एवं जनजातीय क्षेत्रों को छोड़कर
b. जम्मू एवं कश्मीर राज्य को छोड़कर
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. उपरोक्त में कोई नहीं
3. सिविल प्रक्रिया संहिता में निहित हैं-
a. 50 आदेश
b. 52 आदेश
c. 53 आदेश
d. 51 आदेश
4. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत 'डिक्री' को परिभाषित किया गया है-
a. धारा 2(1) में
b. धारा 2(क) में
c. धारा 2(ख) में
d. धारा 2(2) में
5. किसी न्यायनिर्णयन की प्रारूपिक अभिव्यक्ति, जो पक्षकारों के अधिकारों का निश्चयात्मक रूप से अवधारण करती है, जिसे इसे अभिव्यक्त करने वाले न्यायालय द्वारा दर्ज किया जाता है, होती है-
a. आदेश
b. निर्णय
c. डिक्री
d. अपीली आदेश
6. डिक्री का अर्थ है-
a. दावों का न्यायनिर्णयन करने वाला एक आदेश
b. किसी न्यायनिर्णयन की प्ररूपिक अभिव्यक्ति किन्तु इसमें ऐसा कोई न्यायनिर्णयन शामिल नहीं होगा जिससे किसी आदेश से अपील के रूप में एक अपील निहित हो
c. किसी न्यायनिर्णयन की अनौपचारिक अभिव्यक्ति
d. उपरोक्त में कोई नहीं
7. डिक्री तब प्रारंभिक होती है जब-
a. वाद के पूर्णरूपेण से निपटा दिया जा सकने के पहले आगे और कार्यवाहियां की जानी हो
b. इसे वाद की प्रारंभिक अवस्थाओं में जारी किया गया हो
c. जब इसका सम्बन्ध किन्हीं प्रारंभिक मुद्दों से हो
d. उपरोक्त में कोई नहीं
8. किसी डिक्री के अनिवार्य तत्व होते हैं-
a. इन्हें एक न्यायनिर्णयन अवश्य होना चाहिए
b. न्यायनिर्णयन किसी वाद में किया गया होना आवश्यक है।
c. अवधारण निश्चयात्मक प्रकृति का अवश्य होना चाहिए
d. उपरोक्त सभी
9. सिविल प्रक्रिया संहिता किसे मान्यता देती हैं-
a. अंतिम डिक्री
b. प्रारंभिक डिक्री
c. भागतः प्रारंभिक तथा भागतः अंतिम डिक्री
d. उपरोक्त सभी
10. एक डिक्री हो सकती है-
a. अंतिम
b. पहले प्रारंभिक फिर अंतिम
c. प्रारंभिक अथवा अंतिम में से एक
d. प्रारंभिक
11. एक डिक्री तब अंतिम बन जाती है जब-
a. पक्षकारों के अधिकारों की निश्चयात्मक अवधारणा की जा चुकी हो
b. डिक्री के विरूद्ध कोई अपील न की गई हो
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. उपरोक्तं में कोई नहीं
12. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत डिक्री के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
a. यह वाद में सभी या किन्हीं विवादग्रस्त विषयों के सम्बन्ध में पक्षकारों के अधिकारों का निश्चायक रूप से अवधारण करता है।
b. डिक्री भागतः प्रारंभिक तथा भागतः अंतिम हो सकती है।
c. इसमें ऐसा कोई न्यायनिर्णयन नहीं आयेगा जिसकी अपील, आदेश की अपील की भांति होती है।
d. उपरोक्त सभी
13. किसी वाद में प्रारंभिक डिक्री किस हेतु पारित की जा सकती है
a. कब्जे तथा अंतःकालीन लाभ हेतु
b. बँटवारे हेतु
c. साझेदारी हेतु
d. उपरोक्त सभी
14. निम्नलिखित में से कौन सा निर्णय एक डिक्री नहीं है?
a. वाद की समाप्ति का आदेश
b. बिक्री को अपास्त करने से इंकार करने सम्बन्धी आदेश
c. समय बाधित रूप में किसी अपील को खारिज किया जाना
d. न्यायालय शुल्क के भुगतान न करने के कारण वादपत्र का खारिज किया जाना
15. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निम्नलिखित में से क्या एक डिक्री नहीं है?
a. वादपत्र को नामंजूर किया जाना
b. व्यतिक्रम हेतु वाद को खारिज किया जाना
c. व्यतिक्रम हेतु वाद का खारिज किया जाना तथा अर्जी को खारिज किया जाना
d. उपरोक्त में से कोई नहीं
16. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निम्नलिखित में से क्या एक डिक्री नहीं है?
a. व्यतिक्रम हेतु खारिज किए जाने सम्बन्धी कोई आदेश
b. न्यायालय शुल्क के भुगतान न करने के कारण वाद पत्र का खारिज किया जाना
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. उपरोक्त में कोई नहीं
17. निम्नलिखित में से कौन सी अवधारणा "डिक्री" की परिभाषा में नहीं आती?
a. एक न्यायनिर्णयन जो न्यायालय के समक्ष विवाद्यकं मामलों में से कुछ के सम्बन्ध में पक्षकारों के अधिकारों की निश्चयात्मक अवधारणा देता हो
b. किसी वाद पत्र को खारिज किया जाना,
c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अंतर्गत किसी प्रश्न का अवधारण
d. व्यतिक्रम के लिए किसी वाद को खारिज किया जाना
18. न्यायालय शुल्क का भुगतान न किए जाने पर किसी वादपत्र को खारिज करने सम्बन्धी न्यायालय के आदेश की प्रकृति क्या होगी?
a. डिक्री
b. प्रारंभिक डिक्री
c. मध्यवर्ती आदेश
d. अंतिम आदेश
19. डिंक्री में किसी वादपत्र को खारिज किया जाना तथा सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अंतर्गत किसी प्रश्न को अवधारित किया गया माना जाएगा-
a. गलत
b. सही
c. इसमें धारा 144 के अंतर्गत किसी प्रश्न को अवधारित किया जाना शामिल होता है किन्तु किसी वाद पत्र को नामंजूर किया जाना शामिल नहीं होगा
d. इसमें वादपत्र को नामंजूर किया जाना शामिल होता है किन्तु सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अंतर्गत किसी प्रश्न को अवधारित किया जाना शामिल नहीं होता
20. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत "डिक्री" में शामिल नहीं है-
a. वाद पत्र का नामंजूर किया जाना
b. किसी वाद पत्र को वापस किया जाना
c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अंतर्गत आदेश का प्रतिस्थापन
d. दाम्पत्य अधिकारों का प्रतिस्थापन
21. "पंचाट एवं डिक्री" शब्दों का उपयोग क्या इंगित करने हेतु किया जाता है-
a. आयकर आयुक्त का आदेश
b. जिलाधीश द्वारा राजस्व की वसूली के दौरान पारित आदेश
c. सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम आदेश
d. सिविल न्यायालय, माध्यस्थ, औद्योगिक न्यायालय के आदेश
22. निम्नलिखित में से क्या डिक्री/डिक्रियाँ है/हैं?
a. कालबाधित के रूप में खारिज की गई अपील
b. साक्ष्य के आभाव वश खारिज वाद
c. किसी बाद के समापन का आदेश
d. उपरोक्त सभी
23. 'डिक्रीदार' का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जिसके पक्ष में एक डिक्री पारित की गई हो अथवा निष्पादन हेतु सक्षम कोई आदेश पारित किया गया हो। 'डिक्रीदार' की यह परिभाषा दी गई है-
a. सिविल प्रक्रिया संहिता धारा 2(घ) में
b. सिविल प्रक्रिया संहिता धारा 2(2) में
c. सिविल प्रक्रिया संहिता धारा 2(3)
d. सिविल प्रक्रिया संहिता धारा 2(4) में
24. एक डिक्रीदार का-
a. यह शब्द वादी तक सीमित नहीं हैं।
b. वाद का पक्षकार होना आवश्यक नहीं है।
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. न (a) न ही (b)
25. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत "विदेशी न्यायालय" का अर्थ है-
a. भारत के बाहर स्थित कोई न्यायालय तथा जो भारत सरकार के प्राधिकार के अंतर्गत स्थापित न किया गया हो
b. भारत के बाहर स्थित कोई न्यायालय
c. भारत स्थित कोई न्यायालय, जो विदेशी विधि लागू कर रहा हो
d. उपरोक्त सभी
26. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(5) के अंतर्गत किसी न्यायालय को विदेशी न्यायालय की परिभाषा के अंतर्गत लाने हेतु दो शर्तों को अवश्य पूरा होना चाहिए-
a. न्यायालय अवश्य ही केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित नहीं किया गया होना चाहिए
b. न्यायालय को अवश्य ही केन्द्र सरकार द्वारा जारी रखा गया नहीं होना चाहिए
c. न्यायालय अवश्य ही भारत के बाहर स्थित होना चाहिए
d. उपरोक्त सभी
27. विदेशी निर्णय, जैसा कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(6) में परिभाषित किया गया है, का अर्थ होता है-
a. विदेशियों के सम्बन्ध में किसी भारतीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय
b. किसी भारतीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय
c. किसी विदेशी न्यायालय द्वारा पारित निर्णय
d. उपरोक्त में कोई नहीं
28. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की किस धारा के अंतर्गत सिविल न्यायालय में किसी 'न्यायाधीश' को एक पीठासीन अधिकारी के रूप में परिभाषित किया गया है-
a. धारा 2(4)
b. धारा 2(5)
c. धारा 2(8)
d. धारा 2(2)
29. निर्णीत ऋणी से अभिप्रेत है?
a. किसी बैंक का ऋणी
b. व्यक्ति, जिसके विरूद्ध डिक्री पारित की गई हो
c. प्रतिवादी
d. उपरोक्त में कोई नहीं,
30. निर्णय का अर्थ है-
a. न्यायाधीशों द्वारा आज्ञप्ति या आदेश के आधारों पर किए गए कथन
b. आज्ञाप्ति का भाग
c. अधिकारों का विनिश्चय
d. उपरोक्त में से कोई नहीं
31. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 2(9) के अंतर्गत निर्णय से अभिप्रेत है-
a. एक डिक्री
b. किसी आदेश अथवा डिक्री के आधारों का कथन
c. अपील को सरसरी तौर पर खारिज किया जाना
d. उपरोक्त सभी
32. एक निर्णय में निहित होता है-
a. अवधारणा के बिन्दु
b. वाद का संक्षिप्त विवरण
c. अवधारणा के बिन्दु पर निर्णय तथा उसके कारण
d. उपरोक्त सभी
33. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की किस धारा के अंतर्गत "विधिक प्रतिनिधि" को स्पष्ट किया गया है?
a. धारा 2(13)
b. धारा 2
c. धारा 2(11)
d. धारा 2(12)
34. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(11) के अंतर्गत विधिक प्रतिनिधि अभिप्रेत है-
a. किसी वाद के पक्षकारों के नातेदार
b. वह व्यक्ति जो मृत व्यक्ति की सम्पदा का विधि की दृष्टि से प्रतिनिधित्व करता है।
c. वाद के पक्षकारों को उत्पन्न होने वाले लाभों के सह- हिस्सेदार
d. उपरोक्त में कोई नहीं
35. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(11) के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन एक विधिक प्रतिनिधि नहीं है?
a. निष्पादक एवं प्रशासक
b. हिन्दू सहदायिक
c. अधिकृत समनुदेशिती अथवा रिसीवर
d. अवशिष्ट वसीयतदार
36. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत एक विधिक प्रतिनिधि का अर्थ होता है-
a. किसी वाद के पक्षकारों के नातेदार
b. किसी वाद के पक्षकारों को प्राप्त होने वाले लाभों का सह- हिस्सेदार
c. वह व्यक्ति जो मृत व्यक्ति की सम्पदा का विधि की दृष्टि से प्रतिनिधित्व करता है।
d. उपरोक्त सभी
37. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(11) के अंतर्गत परिभाषित 'विधिक प्रतिनिधि' में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं होता-
a. स्वाभाविक वारिस
b. ऐसा व्यक्ति, जो न तो विधिक वारिस हो न ही मृतक की संपदा का एक हस्तक्षेपक
c. वसीयतदार जो मृतक की संपदा के मात्र एक भाग को हासिल करता है।
d. वादग्रस्त संपदा का दानगृहीता
38. सिविल प्रक्रिया संहिता की निम्न में से कौन सी धारा 'अंतःकालीन लाभ' को परिभाषित करती है?
a. धारा 2(12)
b. धारा 2(5)
c. धारा 2(14)
d. धारा 2(16)
39. अंतःकालीन लाभ का अर्थ है-
a. लक्ष्य द्वारा अर्जित लाभ
b. व्यक्ति द्वारा किसी संपत्ति के सदोष कब्जे में प्राप्त अथवा प्राप्त किया जा सकने वाला लाभ
c. अत्यधिक न्यूनतम लाभ
d. उपरोक्त में कोई नहीं
40. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(12) के अनुसार संपत्ति से प्राप्त किए गए 'अंतःकालीन लाभ' किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त किए जाते हैं-
a. संपत्ति के अवैध कब्जे में
b. संपत्ति के विधिक कब्जे में
c. संपत्ति के प्रभावी कब्जे में
d. संपत्ति के सदोष कब्जे में
41. जैसा सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(12) के अंतर्गत परिभाषित किया गया है, अंतःकालीन लाभों का अर्थ है ऐसे लाभ जो किसी व्यक्ति द्वारा-
a. वास्तव में प्राप्त संपत्ति जिसमें वे लाभ भी शामिल हैं जो ऐसे व्यक्ति द्वारा सुधार के कारण प्राप्त हुए हों
b. ऐसी संपत्ति के सदोष कब्जे में प्राप्त किया गया हो जो वास्तव में प्राप्त हुई हो अथवा जिसे वह ब्याज समेत प्राप्त कर चुका हो
c. वास्तव में प्राप्त संपत्ति अथवा प्राप्त की जा चुकी संपत्ति किन्तु ऐसे लाभ पर बिना किसी ब्याज के
d. वास्तव में प्राप्त ऐसी संपत्ति
42. निम्नलिखित में से कौन सी जोड़ी सिविल प्रक्रिया संहिता के अनुसार सुमेलित नहीं है?
a. धारा 2(5) - विदेशी न्यायालय
b. धारा 2(10) - अंतःकालीन लाभ
c. धारा 2(6) - विदेशी निर्णय
d. धारा 2(11) - विधिक प्रतिनिधि
43. किसी संपत्ति पर सदोष कब्जे के दौरान प्राप्त लाभ-
a. आकस्मिक लाभ होता है
b. अंतःकालीन लाभ होता है
c. वास्तविक लाभ होता है
d. सशर्त लाभ होता है
44. सिविल प्रक्रिया संहिता की निम्नलिखित में से कौन सी धारा एक आदेश को परिभाषित करती है?
a. धारा 2(14)
b. धारा 2(2)
c. धारा 2(9)
d. धारा 2(15)
45. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत एक न्यायालय का न्यायनिर्णयन जो एक डिक्री नहीं होता-
a. एक निर्णय होता है
b. एक आदेश होता है
c. एक समन होता है।
d. एक नियम होता है
46. सिविल प्रक्रिया संहिता,1908 की धारा 2(16) के अंतर्गत शब्द "विहित" से अभिप्रेत है-
a. न्यायालय द्वारा विहित
b. नियमों द्वारा विहित
c. समाज द्वारा विहित
d. उपरोक्त में कोई नहीं
47. निम्नलिखित में से कौन सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 2(17) के अर्थों के अंतर्गत "एक लोक अधिकारी" नहीं है?
a. ग्राम पंचायत का सरपंच
b. एक न्यायाधीश
c. सरकार से वेतनभोगी सेवारत् व्यक्ति
d. उपरोक्त में कोई नहीं
48. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 3 के अंतर्गत लघुवाद न्यायालय निम्न में से किसका अधीनस्थ होता है?
a. केवल उच्च न्यायाल
b. केवल जिला न्यायालय
c. (a) तथा (b) दोनों
d. न (a) न ही (b)
49. सिविल प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2002 कब से प्रभावी हुआ था-
a. 04.01.2002
b. 01.04.2002
c. 01.06.2002
d. 01.07.2002
50. लघुवाद न्यायालयों द्वारा जारी डिक्रियाँ अथवा आदेश किसके द्वारा उलटने योग्य होते हैं-
a. उच्च न्यायालय
b. जिला न्यायालय
c. उपरोक्त दोनों
d. उपरोक्त में कोई नहीं
51. जैसा प्रांतीय लघुवाद न्यायालय अधिनियम द्वारा प्रावधान है उसके सिवाए कथित अधिनियम के प्रावधानों के अधीन जारी एक डिक्री अथवा आदेश होगा -
a. पुर्नविचार योग्य
b. अंतिम
c. अपील योग्य
d. कोई डिक्री अथवा आदेश नहीं होगा
52. सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा के अंतर्गत न्यायालय की "धन सम्बन्धी अधिकारिता" का प्रावधान किया गया है?
a. धारा 6
b. धारा 5
c. धारा 8
d. धारा 7
53. सिविल प्रक्रिया संहिता की प्रथम अनुसूची में आदेश एवं नियम क्या हैं-
a. किसी धारा के प्रावधान को अधिभावी नहीं कर सकता
b. केवल दिशा निर्देश
c. किसी धारा के प्रावधान पर अधिभावी होंगे
d. न्यायालय उनके अनुपालन हेतु बाध्य नहीं हैं।
54. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 एक-
a. एक प्रक्रियात्मक विधि है
b. मौलिक विधि है।
c. मौलिक तथा प्रतिक्रियात्मक का संयोजित विधि है
d. निर्देशक विधि है
55. सिविल प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 1999 एवं 2002 किसकी सिफारिश पर अधिनियमित किए गए थे-
a. मलिमथ समिति
b. संथानम समिति
c. ठक्कर समिति
d. उपरोक्त में कोई नहीं
56. सिविल प्रक्रिया संहिता की धाराओं को-
a. उच्च न्यायालय अथवा राज्य विधानमंडल द्वारा संशोधित किया जा सकता है।
b. वाद की सुनवाई कर रहे न्यायालय द्वारा संशोधित किया जा सकता है
c. वाद के पक्षकारों द्वारा संशोधित किया जा सकता है
d. संसद द्वारा संशोधित किया जा सकता है
57. सिविल प्रक्रिया संहिता की किस धारा के अंतर्गत "सिविल प्रकृति का वाद" से सम्बन्धित प्रावधान किए गए हैं?
a. धारा 12
b. धारा 11
c. धारा 10
d. धारा 9
58. सभी सिविल न्यायालयों की विचारण करने की अधिकारिता होती हैं-
a. सिविल प्रकृति के सभी वादों की
b. सिविल प्रकृति के सभी वादों की, केवल उन वादों को छोड़कर जिसमें उनके संज्ञान को अभिव्यक्त अथवा विवक्षित तौर पर प्रतिबंधित किया गया है।
c. सिविल प्रकृति के सभी वादों की, केवल उन वादों को छोड़कर जिसमें उनके संज्ञान को अभिव्यक्त तौर पर प्रतिबंधित नहीं किया गया है
d. सिविल प्रकृति के सभी वादों की, केवल उन वादों को छोड़कर जिसमें उनके संज्ञान को विवक्षित तौर पर प्रतिबंधित नहीं किया गया है
59. व्यवहार प्रक्रिया संहिता में से कौन सा कथन सत्य है-
a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 9 के अनुसार न्यायालयों को उन वादों के सिवाय, जिनका उनके द्वारा संज्ञान मात्र अभिव्यक्त रूप से वर्णित है, सिविल प्रकृति के सभी वादों के विचारण की अधिकारिता होगी।
b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 9 के अनुसार, न्यायालयों को उन वादों के सिवाय, जिनका उनके द्वारा संज्ञांन अभिव्यक्त रूप से या विवक्षित रूप से वर्जित है, सिविल प्रकृति के सभी वादों के विचारण की अधिकारिता होगी।
c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 9 के अनुसार न्यायालयों को उन वादों के सिवाय जिनका उने द्वारा संज्ञान मात्र विवक्षित रूप से वर्जित है, सिविल प्रकृति के सभी वादों के विचारण की अधिकारिता होगी।
d. इनमें से कोई नहीं
60. क्या न्यायालय बिना किसी अपवाद के सिविल प्रकृति के सभी वादों पर विचारण कर सकता है?
a. हाँ
b. शायद
c. नहीं
d. उपरोक्त में कोई नहीं
61. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 9 के अंतर्गत न्यायालय के रूप में किसी आपत्ति के अवधारण में न्यायालय को प्राथमिक तौर पर कहाँ उल्लिखित प्रकथन देखने होते हैं-
a. वादपत्र लिखित कथन तथा जवाब में
b. केवल अर्जी में
c. केवल अर्जी तथा लिखित कथन में
d. वादपत्र की वापसी हेतु आवेदन में किए गए प्राकथन
62. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत सिविल प्रकृति की शिकायत रखने वाले एक वादी को एक सिविल वाद लाने का अधिकार है, यदि इसका संज्ञान-
a. विवक्षित तौर पर वर्जित हो
b. अभिव्यक्त तौर पर वर्जित न हो
c. स्पष्ट एवं विवक्षित तौर पर वर्जित हो
d. उपरोक्त में कोई नहीं
63. निम्नलिखित में से कौन सा अधिकार सिविल प्रकृति का है-
a. जुलूस निकालने का अधिकार
b. किसी मंदिर में पूजा का अधिकार
c. किसी मंदिर के चढ़ावे में हिस्से का अधिकार
d. उपरोक्त सभी
64. निम्नलिखित वादों में से कौन सिविल प्रकृति का वाद है?
a. पूजा के अधिकार सम्बन्धी वाद
b. सिविल दोष के लिए क्षतिपूर्ति सम्बन्धी वाद
c. संपत्ति के अधिकार सम्बन्धी वाद
d. उपरोक्त सभी
65. निम्नलिखित में से कौन सा बाद सिविल प्रकृति का नहीं है?
a. जाति निष्कासन के विरूद्ध वाद
b. पूजा के अधिकार सम्बन्धी बाद
c. धार्मिक जुलूस निकालने सम्बन्धी बाद
d. आनुवांशिक पद के अधिकारों हेतु बाद
66. निम्नलिखित में से कौन सा वाद सिविल प्रकृति का नहीं है?
a. पूजा के अधिकार सम्बन्धी वाद
b. भागीदारी सम्बन्धी वाद
c. कामन लॉ के अधिकारों सम्बन्धी वाद
d. राजनीतिक प्रश्नों सम्बन्धी वाद
67. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निम्नलिखित में से गलत युग्म को खोजें-
a. राजस्व न्यायालय - धारा 5
b. प्रांतीय लघुवाद न्यायालय - धारा 7
c. न्यायालयों की धन सम्बन्धी अधिकारिता - धारा 9
d. प्रेसीडेन्सी लघुवाद न्यायालय - धारा 8
68. निम्नलिखित में से कौन सा वाद सिविल प्रकृति का नहीं है?
a. पूजा के अधिकार सम्बन्धी वाद
b. किराए. हेतु वाद
c. आनुवांशिक पद के अधिकारों हेतु वाद
d. विशुद्ध धार्मिक अधिकारों की संलिप्तता सम्बन्धी वादं
69. कौन सी कार्यवाहियों में सिविल न्यायालय कीअधिकारिता वर्जित है-
a. आयकर अधिनियम के अंतर्गत आयकर वसूली
b. प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम
c. औद्योगिक विवाद अधिनियम
d. उपरोक्त सभी
70. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 10 लागू नहीं होती जब पिछला वाद लंबित हो-
a. किसी विदेशी न्यायालय में
b. केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित अथवा संचालित भारत के बाहर किसी न्यायालय में,
c. उसी न्यायालय में
d. भारत के किसी अन्य न्यायालय में
71. निम्नलिखित में से कौन सा वाद सिविल प्रकृति का नहीं है?
a. चढ़ावे के स्वैच्छिक भुगतान की वसूली हेतु वाद
b. पूजा के अधिकार सम्बन्धी वाद
c. आनुवांशिक पदों के अधिकारों हेतु वाद
d. फ्रेंचाइजी अधिकारों हेतु बाद
72. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सा वाद सिविल प्रकृति का नहीं है-
a. पूजा के अधिकार की घोषणा हेतु वाद
b. किसी पद से जुड़ी गरिमा मात्र के प्रमाणन हेतु वाद
c. सेवा अभिलेख में जन्मतिथि सही करने हेतु वाद
d. किसी धार्मिक पद हेतु वाद
73. निम्नलिखित में से कौन सा वाद सिविल प्रकृति का नहीं है-
a. किसी जाति के सदस्य द्वारा उसे जाति से बहिष्कृत करने सम्बन्धी वाद
b. ऐसा वाद जिसमें संपत्ति के अधिकार का विरोध किया गया हो
c. ऐसा वाद जिसमें किसी पद के अधिकार का विरोध किया गया हो
d. किसी जाति के सदस्य द्वारा जातीय भोज के आमंत्रण से उसके बहिष्करण हेतु वाद
74. सिविल प्रक्रिया संहिता की कौन सी धारा रेस सब ज्यूडिस का नियम निर्धारित करती है?
a. धारा 14
b. धारा 10
c. धारा 15
d. धारा 13
75. जैसा कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 10 में प्रावधान है, "रेस सब ज्यूडिस" का नियम-
a. पूर्ववर्ती वाद के विचारण को रोक देता है।
b. पश्चातवर्ती वाद के विचारण को रोक देता है
c. प्रत्येक परिस्थिति में पूर्ववर्ती तथा पञ्चचातवर्ती वादों की एकसाथ सुनवाई को रोक देता है।
d. पश्चातवर्ती वाद की संस्थन को रोक देता है
76. निम्नलिखित में से किस शब्द का आशय "किसी न्यायालय के विचाराधीन होता है "?
a. सब ज्यूडिस
b. साइन क्वो नॉन
c. रेस ज्यूडिकाटा
d. डबल जियोपर्डी
77. किसी विदेशी न्यायालय में किसी वाद का लंबित रहना भारत में न्यायालयों को कार्यवाही के उसी मामले पर आधारित किसी वाद पर विचारण से रोक देगा-
a. नहीं
b. हाँ
c. यह बाद की प्रकृति पर निर्भर करेगा
d. निष्कर्ष बाद के मूल्यांकन पर घोषित किया जाएगा
78. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 10 कब लागू हो सकती है-
a. पश्चातवर्ती बाद में मुद्दों के समाधान के पूर्व
b. पश्चातवर्ती बाद में मुद्दों के समाधान के बाद
c. पश्चातवर्ती बाद में लिखित कथन प्रस्तुत करने के पूर्व
d. उपरोक्त सभी
79. धूलाभाई बनाम मध्य प्रदेश राज्य का वाद सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निम्नलिखित में से किससे 2 संबंधित है-
a. अभिवचन से
b. अन्तरिम आदेश से
c. प्रथम अपील से
d. सिविल न्यायालय के क्षेत्राधिकार से
80. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 10 के प्रावधान हैं-
a. आज्ञापक
b. विवेकाधीन
c. निर्देशात्मक
d. उपरोक्त में कोई नहीं
81. सिविल प्रक्रिया की धारा 10 के अंतर्गत विहित निर्बंधनों के अनुसार निम्नलिखित में से क्या बाधित है-
a. वाद का विचारण
b. किसी वाद को संस्थित करना
c. विवाधकों की विरचना
d. किसी व्यादेश का दिया जाना
82. निम्नलिखित में से क्या रेस सब जूडिस नियम की प्रयोज्यता के लिए एक आवश्यक शर्त नहीं है?
a. पश्चातवर्ती बाद में विवाद्यक विषय को पूर्ववर्ती वाद में अवश्य ही प्रत्यक्षतः और सारतः विवाद्य होना चाहिए
b. दोनों वादो को एक ही पक्षकारों अथवा उनके प्रतिनिधियों के बीच होना आवश्यक है।
c. ऐसे पक्षकारों को दोनों वादों में समान हक के अंतर्गत मुकद्मा लड़ रहे होना चाहिए
d. दोनों ही वादों में विषय वस्तु और कार्यवाही का कारण समान होना चाहिये
83. 'क', जो एक किराएदार है, ने भवनस्वामी 'ख' के विरूद्ध एक स्थाई व्यादेश हेतु एक बाद प्रस्तुत किया कि उसे समुचित विधिक प्रक्रिया के अलावा और किसी तरीके से निकाला न किया जाए। उसने दलील दी कि 'ख' बलपूर्वक उसे निकालने की योजना बना रहा है। उपरोक्त बाद के लंबित रहने के दौरान 'ख' ने 'क' को बलपूर्वक निकालने का प्रयास किया। 'क' व्यादेश के लिए एक अन्य वाद प्रस्तुत करता है।
a. विचाराधीन विषय का नियम लागू होगा
b. दूसरा वाद पूर्व न्याय के कारण वर्जित है
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. उपरोक्त में कोई नहीं
84. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 10 के अंतर्गत 'विचाराधीन नियम' (रेस सब जूडिस) के मामले में
a. व्यादेश जारी कर सकता है.
b. एक रिसीवर नियुक्त कर सकता है
c. अंतरिम आदेश पारित कर सकता है।
d. उपरोक्त सभी
85. विचाराधीन के नियम की प्रयोज्यता हेतु सही अनिवार्य शर्त क्या है?
a. दोनों वादों में पक्षकारों को एक ही हक के अंदर मुकदमा अवश्य कर रहे होना चाहिए
b. पश्चातवर्ती वाद में विवाद्यक तथ्य का पिछले वाद में प्रत्यक्ष एवं मुख्य विषय अवश्य होना चाहिए
c. उपरोक्त (a) तथा (b)
d. न (a) न ही (b)
86. "विचाराधीन विषय (रेस सब जूडिस) शब्द का अर्थ है-
a. निष्पादन का रोका जाना
b. वाद का रोका जाना
c. अपील का रोका जाना
d. आवेदन का रोका जाना
87. पूर्व न्याय सम्बन्धी प्रावधान सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की किस धारा में किए गए हैं-
a. धारा 11
b. धारा 9
c. धारा 12
d. धारा 100
88. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 के प्रावधान किससे सम्बन्धित हैं?
a. विदेशी निर्णय
b. पूर्व न्याय
c. विचाराधीन विषय
d. गारनेशी आर्डर
89. पूर्व न्याय का नियम इस सिद्धांत पर आधारित है कि-
a. एक ही कार्यवाही हेतु किसी को दो बार कष्ट नहीं होना चाहिए
b. मुकदमे को समाप्त हो जाना चाहिए
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. न (a) न ही (b)
90. प्राङन्याय' का सिद्धान्त निम्न में से किस सूत्र पर आधारित है?
a. क्यू फेसिट पर एलियम फेसिट पर सौ
b. एक्स टर्पी क्रौजा नॉन-ओरिटर एक्सिओ
c. इन्टरेस्ट रिपब्लिका अट सिट फिनिश लिटियम
d. रिस्पान्डेंट सुपीरियर
91. पूर्व न्याय का सिद्धांत लागू होता है-
a. केवल माध्यस्थ कार्यवाही पर
b. वादों तथा निष्पादन कार्यवाहियों दोनों पर
c. केवल बाद पर
d. केवल निष्पादन कार्यवाही पर
92. पूर्व न्याय का सिद्धांत किन सिद्धांतों पर आधारित है
a. यह राज्य के हित में है कि वाद समाप्त हो जाए
b. एक न्यायिक निर्णय को अवश्य ही सही माना जाना चाहिए
c. किसी व्यक्ति को एक ही कारण के लिए दोबारा तंग
नहीं किया जाना चाहिए
d. उपरोक्त सभी
93. पूर्व न्याय का अर्थ है-
a. यदि एक ही पक्षकारों के मध्य समान विवाधक वाले वाद का निर्णय हो चुका हो तो वाद पर विचारण न करना
b. एक ही पक्षकारों के मध्य समान विवाधक वाले पूर्ववर्ती वाद के लंबित रहने के दौरान वाद को रोका जाना
c. आगे के वाद पर प्रतिबंध
d. वाद के विचारण को व्यय किया जाना
94. पूर्व न्याय का सिद्धांत-
a. निर्देशात्मक है.
b. विवेकाधीन है
c. आज्ञापक है
d. उपरोक्त में कोई नहीं
95. पूर्व न्याय लागू नहीं होता-
a. किसी औपचारिक प्रतिवादी के विरूद्ध
b. सह-प्रतिवादियों के बीच
c. सह वादियों के बीच
d. उपरोक्त में कोई नहीं
96. पूर्व न्याय लागू नहीं होता-
a. बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका में
b. सह-वादियों के बीच
c. सह-प्रतिवादियों के बीच
d. जनहित याचिका में
97. संहिता का कौन सा प्रावधान 'आन्वयिक पूर्व न्याय' की अवधारणा से सम्बन्धित है?
a. धारा 12
b. धारा 13
c. धारा 10
d. धारा 11
98. किसी सीमित अधिकारिता युक्त सक्षम न्यायालय द्वारा सुना एवं अंतिम निर्णय दिया गया मुद्दा किसी ऐसे पश्चातवर्ती वाद, जिसपर उपरोक्त न्यायालय विचारण में सक्षम न हो, में पूर्व न्याय का कार्य करेगा अथवा नहीं-
a. हाँ
b. नहीं
c. उत्तर विवाधक की प्रकृति पर निर्भर करेगा
d. उपरोक्त में कोई नहीं
99. आन्वयिक पूर्व न्याय का नियम है-
a. विशेष तौर पर सिविल प्रक्रिया संहिता में निहित
b. सर्वोच्च न्यायालय के नियमों का एक भाग
c. न्यायिक निर्वचन का एक उत्पाद
d. समानता का नियम
100. निम्नलिखित में से क्या पूर्व एक आवश्यक शर्त नहीं है?
a. पूर्ववर्ती तथा पश्चातवर्ती वादों में पक्षकार एक ही होने चाहिए
b. पूर्ववर्ती तथा पश्चातवर्ती वादों की विषयवस्तु एक ही होनी चाहिए
c. पूर्ववर्ती वाद की अंतिम सुनवाई एवं निर्णय सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा किया गया था
d. पूर्ववर्ती वाद किसी न्यायालय के समक्ष अवश्य लंबित
होना चाहिए
101. 'क' महंत के उत्तराधिकारी के रूप में मठ की संपत्ति के कब्जे हेतु वाद लाता है। उसके द्वारा उत्तराधिकार प्रमाणपत्र प्रस्तुत न किए जाने के कर दिया जाता है। 'क' मठ के कारण बाद खारिज प्रबंधक के रूप में पश्चातवर्ती वाद प्रस्तुत करता है। क्या ऐसा वाद प्रतिबंधित है?
a. दूसरा वाद पूर्व न्याय के कारण वर्जित नहीं होगा
b. प्रबंधक के रूप में
c. दूसरा वाद विचाराधीन विषय के कारण वर्जित है
d. दूसरा वाद पूर्व न्याय के कारण वर्जित होगा.
e. उपरोक्त में कोई नहीं
102. पूर्व न्याय का सिद्धांत
a. निदेशात्मक है।
b. विवेकाधीन है।
c. आज्ञापक है।
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
103. अधिकारिताविहीन न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय अथवा निष्कर्ष -
a. सभी परिस्थितियों के अंतर्गत पूर्व न्याय का कार्य कर सकता है
b. पूर्व न्याय का कार्य नहीं कर सकता है।
c. केवल कुछ परिस्थितियों में ही पूर्व न्याय का कार्य कर सकता है
d. पूर्व न्याय की तरह कार्य कर अथवा नहीं भी कर सकता है
104. सह-प्रतिवादियों के बीच पूर्व न्याय के नियम को लागू किए जाने हेतु निम्नलिखित में से किस शर्त को पूरा किया जाना आवश्यक होता है?
a. प्रतिवादियों के बीच हितों का कोई टकराव नहीं होना चाहिए
b. एक से अधिक वाद में सह-प्रतिवादियों का होना आवश्यक है
c. प्रतिवादियों के बीच के प्रश्न पर अंतिम निर्णय अवश्य हो चुका होना चाहिए
d. प्रतिवादियों के बीच के प्रश्न पर अंतिम निर्णय न हुआ होना आवश्यक है
105. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 में निहित हैं-
a. आठ स्पष्टीकरण
b. पाँच स्पष्टीकरण
c. छह स्पष्टीकरण
d. सात स्पष्टीकरण
106. एक निर्णय ऐसे व्यक्तियों जिन्हें स्पष्टतः पक्षकार के रूप में उल्लिखित न किया गया हो, के विरूद्ध पूर्व न्याय के रूप में किस व्याख्या के आधार पर संचालित हो सकता है-
a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 का स्पष्टीकरण 3
b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 का स्पष्टीकरण 5
c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 का स्पष्टीकरण 6
d. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 का स्पष्टीकरण 4
107. पूर्व न्याय के सिद्धांत की प्रयोज्यता हेतु निम्नलिखित में से कौन सा तथ्य अनिवार्य नहीं है-
a. पूर्ववर्ती वाद किसी सक्षम न्यायालय द्वारा अवश्य सुना तथा निर्णीत किया गया होना चाहिए
b. पूर्ववर्ती तथा पश्चातवर्ती वादों में पक्षकार एक ही होने चाहिए
c. पूर्ववर्ती तथा पश्चातवर्ती वादों में विषयवस्तु एक ही होनी चाहिए
d. पूर्ववर्ती वाद किसी सक्षम न्यायालय के समक्ष अवश्य लंबित होना चाहिए
108. पूर्व न्याय का सिद्धांत लागू किया जा सकता है-
a. केवल पृथक कार्यवाही में
b. एक ही कार्यवाही की पश्चातवर्ती अवस्था में
c. कुछ बातों पर निर्भर करता है
d. उपरोक्त में कोई नहीं
109. पूर्व न्याय किसके बीच लागू हो सकता है-
a. एक वादी तथा प्रतिवादी के बीच
b. सह वादियों के बीच
c. सह-प्रतिवादियों के बीच
d. उपरोक्त सभी
110. 'आन्वयिक पूर्व न्याय' का सिद्धांत सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 11 के किस स्पष्टीकरण में निहित है-
a. स्पष्टीकरण 5
b. स्पष्टीकरण 4
c. स्पष्टीकरण 2
d. स्पष्टीकरण 3
111. पूर्व न्याय का सिद्धांत सह प्रतिवादियों के बीच भी प्रयोज्य होता है। निम्नलिखित में से कौन सी शर्त सह-प्रतिवादियों को बाध्य करने हेतु अनिवार्य शर्त नहीं है?
a. सह- प्रतिवादियों द्वारा संयुक्त लिखित कथन अवश्य प्रस्तुत किया जाना चाहिए
b. सम्बन्धित प्रतिवादियों के बीच हितों का टकराव अवश्य मौजूद होना चाहिए
c. वादी के द्वारा दावा किए गए अनुतोष को प्रदान करने हेतु इस टकराव का निर्णय करना आवश्यक होना चाहिए
d. प्रतिवादियों के बीच के प्रश्न पर अंतिम निर्णय अवश्य दिया गया होना चाहिए
112. पूर्व न्याय का सिद्धांत निम्न में से किस याचिका में लागू नहीं होता-
a. बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
b. अधिकार पृच्छा
c. प्रतिषेध याचिका
d. परमादेश याचिका
113. पूर्व न्याय के नियम के संदर्भ में 'पश्चातवर्ती बाद' शब्द का अर्थ है एक ऐसा वाद जो-
a. प्रश्नगत वाद के पूर्व निर्णीत हो चुका हो
b. प्रश्नगत वाद के पूर्व संस्थापित हो चुका
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. न (a) न ही (b)
114. क यह घोषणा हेतु एक वाद प्रस्तुत करता है कि वह ग के वारिस के रूप में किसी भूमि का उत्तराधिकारी है। वाद खारिज हो जाता है। विपरीत कब्जे के आधार पर पश्चातवर्ती वाद का दावा किया जाता है। पश्चातवर्ती वाद किस आधार पर वर्जित है-
a. आन्यविक पूर्व न्याय
b. वास्तविक पूर्व न्याय
c. उपरोक्त में (a) अथवा (b)
d. उपरोक्त में कोई नहीं
115. वाद के विचारण के बाद न्यायालय ने पाया कि वाद पूर्व न्याय के सिद्धांत द्वारा बाधित था तथा उसने अन्य मुद्दों पर न तो चर्चा की और न ही उत्तर दिए। ऐसा करना क्या है-
a. वैध
b. न्यायोचित
c. अवैध
d. उचित
116. पूर्व न्याय के प्रावधान डिक्री के निष्पादन के मामले में भी लागू किए जाते हैं-
a. प्रावधान निर्णीत ऋणी द्वारा स्पष्ट किए जाने पर लागू नहीं किए जाते
b. यह कथन गलत है अथवा सही नहीं है
c. यह कथन सही है।
d. पूर्व न्याय के सिद्धांत केवल बाद में लागू किए जाते हैं
117. किसी संविदा के विनिर्दिष्ट पालन सम्बन्धी बाद को खारिज कर दिया गया है। क्या संविदा भंग किए जाने पर क्षतिपूर्ति हेतु लाया गया पश्चातवर्ती वाद पोषणीय है?
a. नहीं
b. हाँ, यदि वरिष्ठ / उपरी न्यायालय निर्देश दे
c. उपरोक्त में कोई नहीं
d. हाँ, न्यायालय की अनुमति से अगले वाद में
118. निम्नलिखित में से किस मामले में पूर्व न्याय प्रयोज्य नहीं होता-
a. सहमति / समझौता डिक्री
b. चूक में खारिज
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. उपरोक्त में कोई नहीं
119. वैयक्तिक अंतर्राष्ट्रीय विधि का सिद्धांत निहित है-
a. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 15 एवं 16
b. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 13 एवं 14
c. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 17 एवं 18
d. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 19 एवं 20
120. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 13 के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सा निर्णय निश्चयात्मक नहीं होगा -
a. भारतीय विधि को भंग करने पर आधारित निर्णय
b. अंतर्राष्ट्रीय विधि के विरूद्ध निर्णय
c. गुणदोष पर न आधारित निर्णय
d. उपरोक्त सभी
121. किसी विदेशी निर्णय की वैधता को सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 13 के अंतर्गत किस न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है-
a. केवल एक आपराधिक न्यायालय में
b. केवल एक सिविल न्यायालय में
c. सिविल तथा आपराधिक दोनों ही न्यायालयों में
d. सिविल तथा आपराधिक दोनों ही न्यायालयों में नहीं दी जा सकती
122. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 13 के अंतर्गत किसी विदेशी निर्णय को किस आधार पर चुनौती दी जा सकती है-
a. निर्णय घोषित करने वाले न्यायालय की सक्षमता के आधार पर
b. कपट द्वारा हासिल किए गए होने के आधार पर
c. भारत में लागू किसी विधि के भंग होने पर आधारित होने पर
d. उपरोक्त सभी
123. एक विदेशी निर्णय-
a. कभी अंतिम नहीं हो सकता
b. अंतिम हो सकता है अगर पक्षकार एक हों, उस विषय पर उनमें सीधे तौर पर निर्णय हो चुका हो और जिस पर सक्षम न्यायालय ने निर्णय दिया हो
c. अंतिम हो सकता है अगर पक्षकार एक हों और उस विषय पर उनमें परोक्ष रूप से निर्णय हो चुका हो
d. अंतिम हो सकता है अगर पक्षकार एक हों और उस विषय पर उनमें सीधे तौर पर निर्णय हो चुका हो और जिसे सक्षम न्यायालय ने निर्णय नहीं दिया हो
124. सिविल प्रक्रिया संहिता की कौन सी धारा घोषित करती है कि किसी विदेशी निर्णय की एक सत्यापित प्रतिलिपि बताए गए दस्तावेज के प्रस्तुत किए जाने पर न्यायालय, जब तक अभिलेख पर इसके विपरीत साक्ष्य प्रतीत न हो अथवा साबित किया जा चुका हो, यह अवधारित करेगा कि ऐसा निर्णय किसी सक्षम अधिकारिता युक्त न्यायालय द्वारा घोषित किया गया था?
a. धारा 19
b. धारा 14
c. धारा 13
d. धारा 20
125. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 14 अधिनियमित करती है कि, किसी विदेशी निर्णय की एक प्रमाणित प्रतिलिपि प्रस्तुत किए जाने पर न्यायालय यह अवधारित करेगा कि ऐसा निर्णय सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा पारित किया गया था। यह अवधारणा-
a. तथ्यों की अखंडनीय अवधारणा है।
b. विधि की अखंडनीय अवधारणा है।
c. विधि की खंडनीय अवधारणा है।
d. तथ्यों की खंडनीय अवधारणा है।
126. सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 15 के अंतर्गत प्रत्येक 4- बाद संस्थित किया जाएगा-
a. उच्चतर श्रेणी के न्यायालय में
b. निम्नतर श्रेणी के न्यायालय में
c. जिला न्यायालय में
d. उपरोक्त सभी
127. किसी व्यक्ति अथवा संपत्ति के साथ किए गए अपकार्य की क्षतिपूर्ति सम्बन्धी एक बाद, जिसमें अपकार्य किसी एक न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता में किया गया हो तथा प्रतिवादी किसी अन्य न्यायालय की अधिकारिता में निवास करता हो-
a. उस न्यायालय में संस्थित किया जा सकता है जिसकी स्थानीय अधिकारिता में अपकार्य किया गया हो
b. उस न्यायालय में संस्थित किया जा सकता है जिसकी स्थानीय अधिकारिता में प्रतिवादी निवास करता हो
c. वादी की राय पर उपरोक्त (a) अथवा (b) में एक में
d. भारत में कही संस्थित किया जा सकता है।
128. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
a. स्थावर संपत्ति की वसूली हेतु बाद उस न्यायालय में संस्थित किया जाएगा जिसकी अधिकारिता में संपत्ति स्थित हो
b. किसी स्थावर संपत्ति के बंटवारे का बाद उस न्यायालय में संस्थित किया जाएगा जिसकी अधिकारिता में प्रतिवादी रहता हो अथवा लाभार्थ कार्य करता हो
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों
d. उपरोक्त दोनों नहीं
129. स्थावर संपत्ति के विभाजन हेतु वाद उस न्यायालय में संस्थित किया जाएगा जहाँ-
a. जिला न्यायाधीश की अनुमति से किसी भी न्यायालय में
b. वादी रहता हो
c. वादी अपना पेशा संचालित करता हो
d. विषयवस्तु स्थित हो
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