परिसीमा अधिनियम (Limitation) MCQs Set-1

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

 

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1. भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1963 कब से लागू है-

a. 5 अक्टूबर, 1964

b. 10 अक्टूबर, 1964

c. 10 जवनवरी, 1965

d. 1 जनवरी, 1964

 

2. परिसीमा अधिनियम, 1963 लागू नहीं होता है-

a. रिट याचिका

b. बाद

c. अपील

d. आवेदन/याचिका

 

3. परिसीमा विधि से सम्बन्धित सूत्र है-

a. Interest sepubi cae ut sit fins litium

b. Vigilantibus non dormeientibus jura subveniut

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

4. परिसीमा विधि के सम्बन्ध में असत्य कथन है-

a. प्रवर्तन में नकारात्मक है

b. लचीला नियम है

c. (a) एवं (b) दोनों

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

5. परिसीमा काल से अभिप्रेत है-

a. जो अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार संगणित है

b. जो किसी वाद, अपील या आबेदन के लिए अनुसूची द्वारा विहित है

c. (a) एवं (b) दोनों

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

6. विहित काल (Prescribed period) से अभिप्रेत है-

a. जो किसी वाद, अपील या आवेदन के लिए अनुसूची द्वारा विहित है

b. जो परिसीमा अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार संगणित परिसीमा काल हो

c. (a) एवं (b) दोनों

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

7. परिसीमा काल का उद्देश्य है-

a. एक निश्चित समय के अन्दर हो वाद दायर किया जाना

b. उन स्थानों पर अधिकार प्रदान करना जहाँ कोई नहीं है परन्तु कुछ समय बाद वाद में रोक उत्पन्न करता है

c. (a) एवं (b) दोनों

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

8. परिसीमा सम्बन्धी सिद्धान्त आधारित है-

a. लोकनीति पर

b. आवश्यकता पर

c. (a) एवं (b) दोनों पर

d. केवल (a) पर

 

9. मर्यादा विधि के सम्बन्ध में सत्य कथन है-

a. यह अधिकार को समाप्त नहीं करती है

b. यह उपचार को बाधित करती है

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (a) सही है

 

10. मर्यादा विधि है-

a. सारवान विधि

b. एक प्रक्रिया विधि

c. अंशतः प्रक्रिया एवं अंशतः सारवान्

d. केवल (a)

 

11. मर्यादा विधि किन सर्वव्यापी मान्यता के सिद्धान्तों पर आधारित है-

a. किसी संविदा का निर्वाचन उस स्थान को विधि के अनुसार किया जाना चाहिए जहां पर संविदा को गई है

b. जबकि एक बार समय का प्रारम्भ हो जाना प्रारम्भ हो जाता है, तब वाद या आवेदन करने की कोई पश्चात्वर्ती अयोग्यता उसे नहीं रोकती है

c. मर्यादा विधि के अवरोध का विरोध ऋणी के द्वारा ही किया जाना चाहिए

d. यह उपधारणा की जाती है कि जिस कार्य को वैध रूप से किया जा सकता था, उसको किसी व्यक्ति ने वैध रूप से ही किया है

e. उपर्युक्त सभी

 

12. मर्यादा विधि के सम्बन्ध में सत्य कथन है

a. मर्यादा विधि एक प्रक्रिया विधि है

b. मर्यादा विधि देशी विधि का एक अंग है

c. मर्यादा अधिनियम अपने आप में एक पूर्ण संहिता है

d. मर्यादा को अवरोध वादों के विरुद्ध ही उठाया जा सकता है न कि प्रतिवादी के विरुद्ध

e. उपर्युक्त सभी

 

13.  क्या पक्षकार पारस्परिक सहमति से परिसीमा काल में वृद्धि कर सकते हैं?

a. विधि स्पष्ट नहीं

b. नहीं

c. हाँ

d. हाँ, यदि पक्षकार और न्यायालय दोनों सहमत हों

 

14. वादी ने वाद संस्थित किया लेकिन वाद परिसीमा द्वारा बाधित था प्रतिवादी ने परिसीमा-रोध का अभिवचन नहीं किया। क्या न्यायालय परिसीमा-रोध को संज्ञान में ले सकता है?

a. नहीं, समय-वर्जन का अभिवचन पक्षकार को करना चाहिए

b. हाँ, यह सुस्पष्ट होने पर कि वाद म्यादबाधित है तो मर्यादा-रोध के प्रश्न का संज्ञान करने के लिए बद्ध है

c. न्यायालय के विवेक पर है

d. केवल (b) सही है

 

15. मर्यादा-रोध की आपत्ति उठाई जा सकती है-

a. प्रथम अपील में

b. द्वितीय अपील में

c. लिखित कचन में

d. (a) या (b) या (c) में

 

16. मर्यादा-अवरोध का अभिवचन पहली बार अपील के न्यायालय में केवल उसी अवस्था में किया जा सकता है, जब

a. मर्यादा के प्रश्न के अवधारण के लिए आवश्यक तथ्य स्वीकृत हों

b. वे अभिवचनों के आधारों पर प्रत्यक्ष हों

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

17. मर्यादा अधिनियम लागू होते हैं-

a. कुछ विशेष दाण्डिक कार्यवाहियों को भी

b. सभी सिविल कार्यवाहियों को

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b) सही है

 

18. सत्य कथन है-

a. प्रतिदावे के मामले में समय का उस तारीख से बीतना समाप्त होना चाहिए जिस पर ऐसा प्रतिदावा किया गया है

b. जहाँ मर्यादा के किसी प्रश्न का अभिव्यक्त रूप से न्यायनिर्णीत हो चुका हो और उसके विरुद्ध कोई अपील न की जा सकती हो, तो विनिश्चय पक्षकारों और अपील न्यायालय पर बन्धनकारी होता है

c. मुजराई के लिए वे हो नियम लागू होते हैं जैसा कि वाद-पत्र के लिए

d. मुजराई के मामले में समय को गणना वाद की तारीख से समाप्त होनी चाहिए जिसमें कि इसका अभिवचन किया गया है

e. उपर्युक्त सभी

 

19. परिसीमा अधिनियम लागू नहीं होता है-

a. विवाद और तलाक सम्बन्धी विधि के अन्तर्गत वाद या कार्यवाही को

b. सभी दाण्डिक कार्यवाहियों में

c. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम से उत्पन्न चुनाव सम्बन्धी कार्यवाहियों को

d. उपर्युक्त सभी

 

20. परिसीमा अधिनियम की धारा 3 के अनुसार -

a. विहित काल के पश्चात् संस्थित वाद, की गयी अपील और किया गया आवेदन खारिज कर दिया जायेगा यद्यपि परिसीमा की बात उठाई गयी हो

b. विहित काल के पश्चात् संस्थित वाद, को गयी अपील और किया गया आवेदन खारिज कर दिया जायेगा यद्यपि परिसीमा की बात न उठाई गयी हो

c. (a) एवं (b) दोनों

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

21. परिसीमा अधिनियम की धारा 5 निम्न मामलों में प्रयोज्य (Applicable) है-

a. वादों, अपीलों एवं आवेदनों पर

b. अपीलों एवं आवेदनों पर

c. अपोलो एवं पादों पर

d. केवल वादों पर

 

22. परिसीमा का तर्क एक बार तय हो गया है तो

a. धारा 3 पर प्राङ्न्याय का सिद्धान्त अपवर्जित होगा

b. यह पक्षकारों के बीच निश्चायक होगा, यदि उसके विरुद्ध अपील नहीं किया गया या जब तक अपील में अपास्त नहीं हो जाता

c. (a) एवं (b) दोनों

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

23. विहित काल के पश्चात् संस्थित वाद, की गयी अपील और किया गया आवेदन खारिज कर दिया जायेगा यद्यपि प्रतिरक्षा के तौर पर परिसीमा की बात उठाई गयी हो। किस धारा में कहा गया है-

a. धारा 3 में

b. धारा 2 में

c. धारा 4 में

d. धारा 5 में

 

24. परिसीमा अधिनियम की धारा 5 निम्न सामान्य नियमों का अपवाद है-

a. धारा 4 (विहित काल का अवसान जब न्यायालय बन्द हो)

b. धारा 3 (परिसीमा द्वारा वर्जन)

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

25. परिसीमा अधिनियम की धारा 5 के अन्तर्गत पक्षकार कितने समय की देरी को स्पष्टीकृत करेगा -

a. परिसीमा काल समाप्त होने की तारीख तक आवेदन दाखिल करने की तिथि से पूर्व के समय का

b. परिसीमा के अवसान के पश्चात् और आवेदन दाखिल करने की तिथि तक

c. परिसीमा समाप्त होने के पश्चात् और विलम्ब के समय तक

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

26. उच्चतम न्यायालय ने किस महत्वपूर्ण वाद में कहा कि धारा 5 के अन्तर्गत पर्याप्त कारण शब्दों का उपयोगी निर्वाचन करते समय उदार दृष्टिकोण अपनाना चाहिए?

a. वेदभाई बनाम शान्ताराम पाटिल

b. लैण्ड एक्वीजीशन आफिसर, अनन्तनाग बनाम कातिजी

c. एम० के० प्रसाद बनाम अनरुमुधम

d. राघव सिंह बनाम मोहन सिंह

 

27. विलम्ब की माफी के लिए पर्याप्त कारण नहीं है-

a. वकील द्वारा गलत सलाह

b. निर्धनता

c. अधिवक्ता द्वारा स‌द्भावनापूर्वक की गई भूल

d. प्रतिलिपियां प्राप्त करने में विलम्ब

 

28. विलम्ब की माफी के लिए पर्याप्त कारण नहीं है-

a. न्यायालय की ओर से देरी

b. अशिक्षा

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

29. धारा 5 के अर्थ में विलम्ब का पर्याप्त कारण (sufficient cause) है-

a. सद्‌भावपूर्वक की गयी गलत कार्यवाही

b. कारावास

c. बीमारी

d. दोषपूर्ण वकालतनामा

e. विधि की अज्ञानता

 

30. विधिक निर्योग्यता (Legal disability) नहीं है-

a. दिवालियापन

b. अवयस्कता

c. विकृतचित

d. जड़‌ता

 

31. परिसीमा अधिनियम की धारा 6 प्रयोज्य है-

a. वाद में

b. डिक्री के निष्पादन के लिए आवेदन में

c. (a) एवं (b) दोनों में

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

32. धारा 6 के अन्तर्गत विधिक निर्दोग्यता किसे प्राप्त है-

a. जिस व्यक्ति के विरुद्ध वाद लाया जा सकता है

b. निर्योग्यता से ग्रस्त व्यक्ति द्वारा लाये जाने वाले वाद

c. (a) एवं (b) दोनों

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

33. विधिक नियोग्यता है-

a. उन्मत व्यक्ति

b. गर्भस्य शिशु (जब वाद हेतुक उत्पन्न हुआ उस समय गर्भ में होना चाहिए)

c. मूढ़

d. उपर्युक्त सभी

 

34. एक व्यक्ति एक निर्योग्यता से ग्रस्त है निर्योग्यता के अन्त होने से पूर्व दूसरी निर्योग्यता से ग्रस्त हो जाता है वाद या आवेदन दाखिल किया जा सकता है-

a. दोनों नियोग्यताओं के अन्त के बाद

b. पहली निर्दोग्यता के अन्त के बाद

c. दूसरी निर्योग्यता के अन्त होने के बाद

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

35. एक व्यक्ति की निर्योग्यता मृत्यु तक बनी रहती है वहाँ बाद या आवेदन किया जा सकेगा-

a. मृतक के विधिक प्रतिनिधि के निर्योग्यता को स्थिति में उसकी निर्योग्यता के अन्त के पश्चात्

b. मृतक के विधिक प्रतिनिधि द्वारा

c. (a) एवं (b) दोनों

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

36. जब एक बार म्याद की गणना शुरु हो जाती है तो वह बराबर चलती ही रहेगी इस नियम के अपवाद हैं-

a. ऋणी के प्रशासन पत्र

b. अकिंचन के वाद में समय

c. अपील या पुनर्विलोकन के लिए डिक्री या आदेश की प्रतिलिपि प्राप्त करने में लगा समय

d. जब वाद दायर किये जाने को रोकने के लिए कोई व्यादेश प्राप्त कर लिया गया हो

e. स‌द्भावनापूर्व क्षेत्राधिकारविहीन न्यायालय में कोई दूसरी सिविल कार्यवाही कर रहा तो

f. उपयुक्त सभी

 

37. जहाँ कि एक बार समय का चलना प्रारम्भ हो जाता है वहाँ वाद संस्थित करने या आवेदन करने की किसी पश्चात्वर्ती निर्योग्यता से वह नहीं रुकता है कहा गया है-

a. धारा 10 में

b. धारा 9 में

c. धारा 11 में

d. धारा 12 में

 

38. एक व्यक्ति निर्योग्यता से ग्रसित है निर्योग्यता के अन्त होने के पश्चात् वाद या आवेदन दाखिल नहीं करता है और कुछ दिन बाद मर जाता है। मृतक का विधिक प्रतिनिधि बाद या आवेदन दाखिल कर सकता है-

a. उसकी मृत्यु से वाद या आवेदन के लिए विहित काल के भीतर

b. मृत्यु के पश्चात् उसी समय के भीतर जितने उस व्यक्ति को अन्यथा उपलब्ध होता यदि उसको मृत्यु न हुई होती

c. (a) एवं (b) दोनों

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

39. एक व्यक्ति अकिंचन (Pauper person) के कारण वाद या अपील संस्थित नहीं कर सका। वह अकिंचन के रूप में वाद या अपील करने की इजाजत के लिए आवेदन किया और वह प्रतिक्षेपित (Rejected) हो गया है परिसीमा काल की संगणना करने में-

a. वाद या अपील के लिए विहित परिसीमा काल की संगणना करने में उतना समय अपवर्जित कर दिया जायेगा जितने समय के दौरान आवेदक उस इजाजत के लिए अपना आवेदन सद्‌भावपूर्वक अभियोजित करता रहा हो

b. वाद या अपील करने की इजाजत के लिए आवेदन करने में लगा समय अपवर्जित नहीं होगा

c. केवल (b) सही है

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

40. परिसीमा काल की संगणना से सम्बन्धित धाराएं हैं-

a. धाराएं 12 से 18

b. धाराएं 12 से 19

c. धाराएं 12 से 24

d. धाराएं 12 से 22

 

41. न्यासियों तथा उसके प्रतिनिधियों के विरुद्ध वाद से सम्बन्धित धारा है-

a. धारा 9

b. धारा 10

c. धारा 11

d. धारा 12

 

42. किसी बाद या आवेदन के मामले में कपट या भूल का प्रभाव होता है-

a. परिसीमा काल का चलना तब तक प्रारम्भ नहीं होगा जब तक बन्दी या आवेदक को उस कपट या भूल का पता न चल जाए।

b. परिसीमा काल तब तक प्रारम्भ नहीं होगा जब तक कपट या भूल का सम्यक् तत्परता से पता चल सकता था

c. परिसीमा काल का चलना तब तक प्रारम्भ नहीं होगा जब तक छिपाई गयी दस्तावेज के पेश करने के विवश करने वाले साधन बादी पर आवेदक को सर्वप्रथम प्राप्त न हुए हा (d)

d. उपर्युक्त सभी

 

43. कपट या भूल के प्रभाव का प्रावधान किस धारा में है?

a. धारा 18

b. धारा 16

c. धारा 17

d. धारा 19

 

44. लिखित अभिस्वीकृति का प्रभाव क्या होता है?

a. अभिस्वीकृति के दिनांक से गथा परियामा काल संगठित नहीं किया संवेगा

b. अभिस्वीकृति के समय (तिथि) से एक नया परिसीमा काल संगणित किया जायेगा

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

45. सम्पत्ति या अधिकार विषयक वाद या आवेदन के लिए विहित काल के अवसान के पूर्व ऐसी सम्पत्ति वा अधिकार विषयक दायित्व की लिखित अभिस्वीकृति की गयी है लेकिन लेख पर हस्ताक्षर किया गया है लेकिन तारीख नहीं डाली गई है वहाँ

a. समय (तारीख) के बारे में मौखिक साक्ष्य नहीं दिया जा सकता

b. उस समय (तारीख) के बारे में जब वह साध्य दिया जा सकेगा

c. लेख के अन्तवस्तु का साक्ष्य नहीं दिया जा सकता

d. उपर्युक्त (b) एवं (c)

 

46. सही सुमेलित नहीं है-

a. वाद अपील या आवेदन  

का परिसीमा द्वारा वर्जन                 - धारा 4

b. कपट या भूल का प्रभाव                - धारा 17

c. लिखित अभिस्वीकृति का प्रभाव  - धारा 18

d. विलम्ब माफी के लिए आवेदन    - धारा 5

 

47. धारा 5 के अन्तर्गत न्यायालय निम्नलिखित वर्ग के मामलों में अवधि सीमा का विस्तार नहीं कर सकता है -

a. वादों

b. अपीलें

c. आवेदनों

d. उपर्युक्त सभी

 

48. मर्यादा-रोध लागू नहीं होता है-

a. न्यासधारी के वैध प्रतिनिधियों या समनुदेशिती के खिलाफ

b. न्यासधारी के विरुद्ध वाद लाने के लिए

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

49. अधिनियम का कौन सा प्रावधान निर्दिष्ट करता है कि जहाँ कि किसी लेनदार को सम्पदा का प्रशासन-पत्र उसके ऋणी को अनुदत्त कर दिया गया हो वहाँ ऐसे ऋण को वसूल करने के वाद के परिसीमा का चलते रहना तब तक निलम्बित रहेगा जब तक वह प्रशासन चलता रहे

a. धारा 9

b. धारा 3

c. धारा 5

d. धारा 7

 

50. धारा 10 लागू होती है-

a. केवल आन्वयिक न्यास पर

b. केवल अभिव्यक्त न्यासों पर

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

51. धारा 10 (न्यासधारियों तथा उसके प्रतिनिधियों के विरुद्ध वादी के आवश्यक शर्त है-

a. सम्पत्ति न्यासधारी में निहित होना

b. बिना मूल्यवान प्रतिकर के न्यासधारी या उसके विधिक प्रतिनिधि या समनुदेशिती

c. अभिव्यक्त न्यास

d. विशिष्ट प्रयोजन के लिए न्यास

e. उपर्युक्त सभी

 

52. विदेश में की गई संविदाओं के सम्बन्ध में सही कथन है -

a. विदेश में की गयी संविदा के आधार पर भारत में प्रस्तुत किये गये वाद का आवधि सीमा का कोई विदेशी नियम प्रतिवाद नहीं होगा

b. विदेश में की गयी संविदाओं के आधार पर भारत में दायर किये गये वाद इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट अवधि सीमा के नियमों के अधीन होते हैं

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (a)

 

53. अवधि के सम्बन्ध में विदेशी नियम प्रतिवाद नहीं है। इस नियम के अपवाद हैं

a. यह कि दोनों पक्षकार उस देश में रहते हैं जहाँ कि सम्पूर्ण स्वीकृति अवधि के लिए ऐसी विधि प्रचलित

b. यह कि विदेशी विधि अधिकार को समाप्त कर देती है अथवा स्वयं दायित्व को समाप्त कर देती है

c. (a) एवं (b) दोनों

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

54. वैध कार्यवाहियों में लगे समय का परिसीमा काल की संगणना में अपवर्जित कर दिया जाता है, कहा गया -

a. धारा 14 में

b. धारा 13 में

c. धारा 12 में

d. धारा 15 में

 

55. अकिंचन के रूप में वाद या अपील करने की इजाजत के लिए आवेदन करने में लगा समय अपवर्जित कर दिया जाता है-

a. धारा 12 के अन्तर्गत

b. धारा 13 के अन्तर्गत

c. धारा 14 के अन्तर्गत

d. धारा 15 के अन्तर्गत

 

56. किसी पंचाट को अपास्त करने के आवेदन के लिए विहित मर्यादा काल की संगणना करने में वह समय, जो कि पंचाट की प्रति अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षणीय हो, अपवर्जित कर दिया जायेगा -

a. धारा 12 (d) के अन्तर्गत

b. धारा 12 (a) के अन्तर्गत

c. धारा 12 (b) के अन्तगत

d. धारा 12 (c) के अन्तर्गत

 

57. सत्य कथन है-

a. उस दिनांक से जब कि प्रतिनिधि प्राप्तवय हुआ और उस दिनांक से जबकि उसका परिदान वस्तुतः ग्रहण किया गया हो, बीच का समय अपवर्जित नहीं किया जायेगा

b. यदि डिक्री को तैयार करने में देरी की कोई समयावधि स्वयं आवेदनकर्ता की चूक या उपेक्षा के कारण हुई है तो उसे इस धारा के अन्तर्गत परिसीमावधि को कोई छूट न मिल सकेगी

c. अवधि की गणना करते समय उस समय को नहीं छोड़ा जायेगा जो कि निर्णय के बाद न्यायालय द्वारा आज्ञप्ति या आदेश तैयार करने में लिया गया, यदि उसके पहले आवेदन न कर दिया गया हो

d. उपर्युक्त सभी

 

58. अधिनियम की धारा 12 के अन्तर्गत किसी वाद, अपील या आवेदन के परिसीमा काल की संगणना करने में निम्नलिखित को अपवर्जित कर दिया जायेगा?

a. वह दिन जिससे ऐसे परिसीमा काल की गणना की जाती है

b. वह दिन जिस पर परिवादित निर्णय सुनाया गया था

c. डिक्री या आदेश जिसके विरुद्ध अपील की जाती है की प्रतिलिपि अभिप्राप्त करने के लिए अपेक्षित समय

d. वह दिन जिस पर वाद, अपील या आवेदन प्रस्तुत किया जाना है

 

59. क्षेत्राधिकार रखने वाले न्यायालय में सद्भावपूर्वक कार्यवाही में लगे समय का अपवर्जन उपबन्धित करता

a. धारा 13 के अन्तर्गत

b. धारा 15 के अन्तर्गत

c. धारा 14 के अन्तर्गत

d. धारा 11 के अन्तर्गत

 

60. जहाँ कि कोई व्यक्ति वाद संस्थित करने पर आवेदन करने के अधिकार उत्पन्न होने से पहले मर जाता है वहाँ मर्यादा काल की संगणना की जायेगी-

a. मृत्यु के समय से

b. उस समय से की जायेगी जब मृतक के ऐसे वैध प्रतिनिधि हो जायें

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

61. जहाँ कि कोई व्यक्ति, वाद संस्थित करने या आवेदन करने का अधिकार केवल किसी व्यक्ति की मृत्यु पर ही उत्पन्न होता है वहाँ

a. मृत्यु के समय से

b. मर्यादा की संगणना उस समय से की जायेगी जब मृतक के ऐसे विधिक प्रतिनिधि हो जायें

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

62. यदि कोई व्यक्ति जिसके खिलाफ, यदि वह जीवित होता तो वाद संस्थित करने या आवेदन करने का अधिकार उत्पन्न होता, अधिकार उत्पन्न होने के पहले मर जाता है वहाँ मर्यादा काल की संगणना-

a. उस समय से की जायेगी जबकि मृतक का ऐसा विधिक प्रतिनिधि हो जाये जिसके खिलाफ वादी ऐसा वाद संस्थित कर सके या ऐसा आवेदन कर सके

b. मृतक के विधिक प्रतिनिधि के अस्तित्व में आ जाने पर

c. मृतक के विधिक प्रतिनिधि का अस्तित्व में होना ही आवश्यक नहीं है बल्कि उसे वाद हेतु के आधार पर वाद प्रस्तुत करने की शक्ति भी प्राप्त हो

d. (a) एवं (c)

 

63. धारा 16 (वाद संस्थित करने का अधिकार उत्पन्न होने पर उससे पहले मृत्यु का प्रभाव) लागू नहीं होता है-

a. स्थावर सम्पत्ति के कब्जा लेने के वादों को

b. वंशगत पद का कत्र्जा लेने के लिए वादों को

c. हकशुफा के अधिकार के प्रवर्तन के लिए वादों को

d. उपर्युक्त में से किसी को नहीं

 

64. धारा 17 आकर्षित करती है-

a. भूल (Mistakes)

b. छिपाव (Concealments)

c. कपट (Fraud)

d. उपर्युक्त सभी (All the above)

 

65. लेखबद्ध अभिस्वीकृति के सम्बन्ध में प्रावधान करती

a. धारा 18

b. धारा 17

c. धारा 16

d. धारा 15

 

66. जहाँ कि किसी निर्णीत ऋणी ने किसी डिक्री या आदेश का परिसीमा काल के भीतर निष्पादन कपट या बल प्रयोग द्वारा निवारित कर दिया हो वहाँ न्यायालय उक्त परिसीमा काल के अवसान के पश्चात् निर्णीत द्वारा किये गये आवेदन पर डिक्री या आदेश के निष्पादन के लिए-

a. परिसीमा को नहीं बढ़ा सकता

b. न्यायालय के विवेक पर है

c. परिसीमा काल को बढ़ा सकेगा

d. (a) एवं (b) दोनों

 

67. परिसीमा अधिनियम की धारा 17 प्रयोज्य नहीं है-

a. सिविल कार्यवाहियों पर

b. आपराधिक कार्यवाहियों पर

c. निष्पादन कार्यवाहियों पर

d. (a) एवं (b) दोनों

 

68. अभिस्वीकृति के सम्बन्ध में सत्य कथन है-

a. जहाँ सम्पत्ति कई व्यक्तियों के पक्ष में बन्धक की गई हो वहाँ बन्धकियों में से एक के द्वारा मोचन के अधिकार को अभिस्वीकृति इस धारा के अन्तर्गत अभिस्वीकृति नहीं होती

b. दायित्व को सशर्त या शतरहित हो सकती है शर्त पूरी की गयी होनी चाहिए

c. अभिस्वीकृति एक नये वाद-कारण का कार्य करती है

d. उपर्युक्त सभी

 

69. अभिस्वीकृति की जा सकती है-

a. उचित रूप से प्राधिकृत अभिकर्ता द्वारा

b. संयुक्त हिन्दू कुटुम्ब के प्रबन्धक द्वारा

c. मुवक्किल की ओर से वकील द्वारा

d. नर्योग्यता के अधीन किसी व्यक्ति के संरक्षक द्वारा

e. उपर्युक्त सभी

 

70. अभिस्वीकृति के लिए आवश्यक तत्व हैं-

a. यह मियाद के समाप्त होने के पहले ही की गई हो

b. यह लिखित में की गयी हो

c. यह सम्पत्ति या अधिकार के सम्बन्ध में किसी दायित्व के सम्बन्ध में की गयी हो

d. उस पक्षकार द्वारा हस्ताक्षरित की गई हो, जिसके विरुद्ध ऐसी सम्पत्ति या अधिकार का दावा किया जाता है

e. उपयुक्त सभी

 

71. किसी ऋण या वसीयती दान पर व्याज के भुगतान और ऐसे भुगतान की अभिस्वीकृति के आधार पर भगतान की तारीख से नई मियाद की गणना किये जाने का सिद्धांत प्रतिपादित करती है-

a. धारा 19

b. धारा 16

c. धारा 15

d. धारा 28

 

72. रिक्थ पर ऋण या व्याज-खाते की देनमी करने के प्रभाव से सम्यन्धित है

a. धारा 18

b. धारा 19

c. धारा 17

d. धारा 16

 

73. रिक्थ पर ऋण या व्याज खाते की देनगी मर्यादा काल के अवसान से पूर्व कर दिया जाता है वहाँ नया मर्यादा काल उस समय से संगणित किया जायेगा

a. जय अभिस्वीकृति की गयी थी

b. जब वह देनगी की गयी थी

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

74. सत्य कथन है

a. भुगतान करने वाले व्यक्ति के हस्तलेख में था उसके द्वारा हस्ताक्षरित लेखन में ही अभिस्वीकृति भी किया गया हो

b. औपचारिक अभिस्वीकृति ही भुगतान की मान्य साक्ष्य होगी

c. रिक्थ पर ऋण या व्याज खाते की देनगी का वास्तविक भुगतान होना चाहिए

d. भुगतान उसके लिए विहित मियाद के अन्दर ही किया गया हो

e. उपर्युक्त सभी

 

75. रिक्थ पर ऋण या व्याज खाते के देनगी कर सकता

a. ऋण या रिक्थ देने के लिए दायी व्यक्ति द्वारा

b. ऋण या रिक्थ देने के लिए दायी व्यक्ति द्वारा, प्राधिकृत अभिकर्ता द्वारा

c. (a) एवं (b) दोनों

d. उपर्युक्त में से कोई नहीं

 

76. निर्योग्य व्यक्ति की ओर से दायित्व की अभिस्वीकृति निजी व्यक्ति के अतिरिक्त अन्य व्यक्ति कर सकता है

a. धारा 20 के अन्तर्गत

b. धारा 21 के अन्तर्गत

c. धारा 17 के अन्तर्गत

d. धारा 19 के अन्तर्गत

 

77. निर्योग्य व्यक्ति की ओर से रिक्थ पर ऋण या ब्याज की देनगी कोई अन्य व्यक्ति कर सकता है-

a. धारा 20 के अन्तर्गत

b. धारा 19 के अन्तर्गत

c. धारा 21 के अन्तर्गत

d. धारा 18 के अन्तर्गत

 

78. निर्योग्य व्यक्ति की ओर से अभिस्वीकृति कर सकता है

a. समिति द्वारा

b. संरक्षक, प्रबन्धक, समिति द्वारा प्राधिकृत अभिकर्ता द्वारा

c. संरक्षक द्वारा

d. प्रबन्धक द्वारा

e. उपर्युक्त सभी

 

79. किसी नियौग्य व्यक्ति की ओर से किसी ऋण या ब्याज की देनगी (Payment) कर सकता है-

a. समिति

b. प्रबन्धक

c. संरक्षक

d. (a) या (b) या (c) द्वारा प्राधिकृत अभिकर्ता

e. उपर्युक्त सभी

 

80. वाद संस्थित करने के बाद नया बादी या नया प्रतिवादी बनाये जाने का प्रावधान करता है-

a. धारा 21

b. धारा 22

c. धारा 19

d. धारा 20

 

81. जहाँ कि वाद संस्थित करने के पश्चात् नया वादी या प्रतिवादी प्रस्थिापित या जोड़े जायं, वहाँ वाद, जहाँ तक कि उस वादी या प्रतिवादी का वास्ता है उस समय संस्थित किया गया समझा जायेगा-

a. जब से वाद संस्थित है

b. जब वह पक्षकार बनाया गया

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

82. वाद संस्थित होने के बाद नये वादी या प्रतिवादी के सम्मिलित किये जाने पर उनके सम्बन्ध में वाद संस्थित किया गया समझा जाएगा-

a. न्यायालय के सन्तुष्ट होने पर कि वादी या प्रतिवादी का सम्मिलित न किया जाना सद्भाव में की गयी भूल के कारण थी तब वाद किसी पूर्वतन तिथि से संस्थित समझा जाएगा

b. जब उन्हें वादी या प्रतिवादी बनाया गया

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

83. जब पक्षकार बाद संस्थित करने के बाद नये वादी या प्रतिवादी के रूप में सम्मिलित किये जाते हैं, तब उस वादी या प्रतिवादी के सम्बन्ध में वाद उस समय संस्थित किया गया समझा जायेगा जब वह इस प्रकार पक्षकार बनाया गया है, के अपवाद हैं-

a. जहाँ कि वादी प्रतिवादी बनाया गया

b. जहाँ कि प्रतिवादी वादी बनाया गया

c. जहाँ कि वाद के लम्बित रहने के अभ्यन्तर किसी हित के समनुदेशन के कारण कोई पक्षकार जोड़ा गया या प्रतिस्थापित किया गया है

d. वाद के लम्बन के दौरान हित के न्यागमन कारण कोई पक्षकार जोड़ा गया या प्रतिस्थापित किया गया

e. उपर्युक्त सभी

 

84. निरन्तर संविदा भंग या निरन्तर अपकृत्य के मामलों को लागू होती है-

a. धारा 22

b. धारा 19

c. धारा 20

d. धारा 21

 

85. निरन्तर संविदा भंग की अवस्था में और निरन्तर अपकृत्य की अवस्था में नया मर्यादा काल शुरु होता है-

a. उस समय के दौरान प्रति क्षण चलना आरम्भ होता रहता है जिसमें यथास्थिति ऐसा भंग या अपकृत्य चालू रहे

b. जब संविदा भंग या अपकृत्य का पता चलता है

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

86. जो कार्य विशेष नुकसान के बिना अभियोग्य नहीं है, उसके प्रतिकर के लिए मर्यादा काल की संगणना की जायेगी

a. उस समय से जब से कि वह क्षति फलीभूत हुई

b. जब बाद कारण पैदा हुआ

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

87. जिस कार्य से वाद हेतु तब तक उद्भूत नहीं होता जब तक कि उसके फलस्वरूप कोई क्षति वास्तव में हुई हो, कहा गया है-

a. धारा 24 में

b. धारा 33 में

c. धारा 25 में

d. धारा 26 में

 

88. लिखतों में वर्णित समय की संगणना की जायेगी-

a. ग्रिगोरी कलेन्डर (अंग्रेजी कलेन्डर) से

b. हिन्दी पंचांग से

c. उर्दू पंचाट से

d. (a) या (b) या (c)

 

89. किस धारा में कहा गया है कि लिखतों में वर्णित समय की संगणना ग्रिगोरी कलेन्डर (Gregorian Calendar) के निदेश में लिखी गई समझी जायेगी-

a. धारा 24

b. धारा 23

c. धारा 25

d. धारा 26

 

90. चिरभोग के द्वारा सुखाचार के अधिकारों के अर्जन से सम्बन्धित वादों के दायर किये जाने के लिए मियाद की अवधि विहित करती है-

a. धारा 25 एवं 27

b. धारा 25

c. धारा 25 एवं धारा 26

d. धारा 26

 

91. किसी भवनों के लिए सुखाधिकार का उपयोग कितने वर्ष तक होने पर चिरभोग द्वारा अर्जित सुखाधिकार माना जाता है?

a. 25 वर्ष तक

b. 20 वर्ष तक

c. 30 वर्ष तक

d. 2 वर्ष तक

 

92. जहाँ कोई व्यक्ति किसी सुखाधिकार का उपयोग निरन्तर 20 वर्ष या अधिक समय तक करता रहा हो और उसमें कोई रुकावट डाली जाय, वहाँ उसके लिए आवश्यक है-

a. रुकावट के दिनांक से 2 वर्ष के भीतर वाद दायर करे

b. 20 वर्ष व्यतीत होने से पूर्व अपने अधिकार को स्थापित करने के लिए वाद दाखिल करें

c. उपर्युक्त में से कोई नहीं

d. रुकावट के दिनांक से 2 वर्ष की अवधि सीमा के भीतर अपने अधिकार को स्थापित करने के लिए वाद दायर करे

 

93. जहाँ कि वह सम्पत्ति जिस पर कि किसी अधिकार का दावा उपधारा (a) के अधीन किया जाता है, सरकार की है वहाँ चिरभोग द्वारा सुखाधिकार अर्जन की अवधि होगी-

a. 60 वर्ष

b. 20 वर्ष

c. 30 वर्ष

d. 70 वर्ष

 

94. चिरभोग द्वारा सुखाधिकार अर्जन की शर्तें हैं-

a. 20 वर्ष तक उपभोग

b. वाद की मियाद के ठीक अगले 2 वर्ष के अन्दर खत्म हुई जिसमें कि दावा का विरोध किया जाता है

c. शान्तिपूर्ण एवं खुले तौर पर उपभोग

d. बिना किसी विघ्न के

e. उपर्युक्त सभी

 

95. किसी आजीवन हित के उत्तरभोगी को, चिरभोग द्वारा ऐसे हित के विरुद्ध सुखाधिकार के अधिकार के अर्जन के दावे के विरुद्ध संरक्षण दिया गया है-

a. धारा 27 के अन्तर्गत

b. धारा 28 के अन्तर्गत

c. धारा 25 के अन्तर्गत

d. धारा 26 के अन्तर्गत

 

96.  धारा 26 (उपभारित अचल सम्पत्ति के उत्तरभोगी के पक्ष में अपवर्जन) लागू होने की शर्त/शर्तें हैं-

a. सुखाधिकारयुक्त स्वामी द्वारा उपयोग की अवधि में सुखाधिकार भारित भूमि का आजीवन या तीन वर्ष से अधिक किसी अवधि के अन्तर्गत सुखाधिकार का धारण किया जाना आवश्यक है

b. सुखाधिकार भारित भूमि के अधिकारी उत्तरभोगी के द्वारा, ऐसे हित या अवधि का अन्त हो जाने पर, ऐसे अन्त के तीन वर्ष के भीतर सुखाधिकार के उपभोग के अधिकार का प्रतिरोध किया जाना आवश्यक है

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

97. मियाद उपचार का रोध (bar) करती है परन्तु स्वत्व की समाप्ति नहीं।" इस नियम का अपवाद है-

a. धारा 26

b. धारा 27

c. धारा 28

d. धारा 29

 

98. किसी व्यक्ति द्वारा किसी सम्पत्ति के कब्जे के लिए वाद  संस्थित करने के लिए एतद्‌द्वारा जो कालावधि परिसीमित की गयी है, उसके खत्म होने पर ऐसी सम्पत्ति पर उसका अधिकार समाप्त हो जायेगा -

a. धारा 26 के अन्तर्गत

b. धारा 27 के अन्तर्गत

c. धारा 28 के अन्तर्गत

d. धारा 29 के अन्तर्गत

 

99. एक व्यक्ति A अपने दोस्त B को दस हजार रुपये उधार दिया। तीन वर्ष के भीतर उसने ऋण की वसूली के लिए वाद नहीं लाया। A का अधिकार-

a. समाप्त नहीं हुआ, लेकिन वसूल नहीं सकता

b. समाप्त हो गया

c. B को इच्छा पर है

d. केवल (a)

 

100. अधिकार कब समाप्त हो जाता है?

a. जब दूसरे व्यक्ति का उस पर प्रतिकूल कब्जा बिना बाधा के लगातार 12 वर्षों तक स्थापित रहा

b. जहाँ किसी व्यक्ति का स्वत्व अतिचारी के पक्ष में अवसित हो जाता है

c. (a) एवं (b) दोनों

d. केवल (b)

 

101. कितने वर्ष तक प्रतिकूल कब्जा बनाये रखने पर कब्जा स्वामित्व में बदल जाता है-

a. 12 वर्षों तक

b. 10 वर्षों तक

c. 15 वर्षों तक

d. 20 वर्षों तक

 

102. प्रतिकूल कब्जे के आवश्यक तत्व है-

a. कब्जा स्वामी के प्रतिकूल होने के साथ निरन्तर जारी रहना आवश्यक है

b.सम्पत्ति के धारण करने का आशय होना चाहिए

c. प्रतिवादी का वस्तुतः (न कि अन्वयाश्रित) कब्जा होना आवश्यक है

d. उपर्युक्त सभी

 

103. चिरभोगधिकार द्वारा सुखाधिकार अर्जित किया जा सकता है-

a. धारा 26 के अन्तर्गत

b. धारा 27 के अन्तर्गत

c. धारा 25 के अन्तर्गत

d. धारा 28 के अन्तर्गत

 

104. सिविल न्यायालय की किसी डिक्री के निष्पादन के लिए परिसीमा काल कितनी हैं-

a. 3 वर्ष

b. 15 वर्ष

c. 12 वर्ष

d. 1 वर्ष

 

105. संविदा सम्बन्धी बाद के लिए परिसीमा काल कितनी है?

a. 1 वर्ष

b. 3 वर्ष

c. 2 वर्ष

d. 4 वर्ष

 

106. भाटक की बकाया की वसूली के बाद के लिए परिसीमा काल कितनी है?

a. 3 वर्ष

b. 1 वर्ष

c. 2 वर्ष

d. 12 वर्ष

 

107. किसी संविदा के विनिर्दिष्ट पालन के वाद के लिए परिसीमा काल कितनी है

a. 3 वर्ष

b. 1 वर्ष

c. 2 वर्ष

d. 7 वर्ष

 

108. मर्यादा काल की अधिकतम अवधि 30 वर्ष निम्नलिखित में से किस वाद/वादों के लिए विहित की गई है-

a. बन्धको द्वारा बन्धकमोचन निषेध के वादों के लिए

b. केन्द्रीय सरकार या जम्मू काश्मीर सहित किसी राज्य सरकारों के द्वारा या उसके विरुद्ध वादों के लिए

c. बन्धककर्ता द्वारा बन्धक की गई सम्पत्ति के मोचन के लिए या उसके कब्जे की वसूली के लिए वादों

d. उपर्युक्त सभी

 

109. किसी संविदा के विखण्डन के लिए परिसीमा है-

a. 1 वर्ष

b. 12 वर्ष

c. 2 वर्ष

d. 3 वर्ष

 

110. स्थावर सम्पत्ति के कब्जे के लिए जब वादी किसी जब्ती या शर्त भंग होने के कारण हकदार हुआ हो, परिसीमा काल है-

a. 12 वर्ष

b. 3 वर्ष

c. 5 वर्ष

d. 1 वर्ष

 

111. द्वेषपूर्ण अभियोजन के प्रतिकर के लिए वाद कितनी अवधि के भीतर संस्थित किया जाना चाहिए-

a. दो वर्ष

b. सात वर्ष

c. एक वर्ष

d. बारह वर्ष

 

112. भरण-पोषण के बकाये के लिए हिन्दू द्वारा वाद संस्थित किया जाना चाहिए -

a. 4 वर्ष

b. 5 वर्ष

c. 2 वर्ष

d. 3 वर्ष

 

113. ऐसे बाद जिनके लिए कोई मर्यादा काल निर्दिष्ट नहीं है उसके लिए परिसीमा है-

a. बारह वर्ष

b. एक वर्ष

c. तीन वर्ष

d. दो वर्ष

 

114. दोषमुक्ति के आदेश से अपील के लिए परिसीमा-काल है-

a. 90 दिन

b. 30 दिन

c. (a) एवं (b) दोनों

d. 60 दिन

 

115. दण्ड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत सत्र न्यायालय या अपने आरम्भिक क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए उच्च न्यायालय द्वारा पारित मृत्यु दण्डादेश से अपील उच्चतम न्यायालय में की जा सकेगी-

a. दण्ड की तारीख से 90 दिन के भीतर

b. दण्ड को तारीख से 45 दिन के भीतर

c. दण्ड की तारीख से 30 दिन के भीतर

d. दण्ड की तारीख से 60 दिन के भीतर

 

116. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अन्तर्गत किसी आज्ञप्ति या आदेश से उच्च न्यायालय में अपील के लिए परिसीमा काल है-

a. 60 दिन

b. 30 दिन

c. 90 दिन

d. 45 दिन

 

117. उच्च न्यायालय की आज्ञप्ति या आदेश से उच्च न्यायालय में ही अपील की जा सकेगी-                                  

a. आज्ञप्ति या आदेश की तारीख से 45 दिन के भीतर

b. आज्ञप्ति या आदेश की तारीख से 60 दिन के भीतर

c. आज्ञप्ति या आदेश की तारीख से 30 दिन के भीतर

d. आज्ञप्ति या आदेश की तारीख से 90 दिन के भीतर

 

118. सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत किसी आज्ञप्ति या आदेश से उच्च न्यायालय से भिन्न न्यायालय में अपील की जायेगी-

a. आज्ञप्ति की तारीख से 60 दिन के भीतर

b. आज्ञप्ति की तारीख से 90 दिन के भीतर

c. आज्ञप्ति की तारीख से 30 दिन के भीतर

d. आज्ञप्ति को तारीख से 45 दिन के भीतर

 

119. सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत मृत वादी या मृत अपीलार्थी या मृत प्रतिवादी या उत्तरवादी के वैध प्रतिनिधि को पक्षकार बनवाने के लिए आवेदन कितने दिन के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना चाहिए-

a. मृत्यु की तारीख से 70 दिन के भीतर

b. मृत्यु की तारीख से 90 दिन के भीतर

c. मृत्यु की तारीख से 30 दिन के भीतर

d. मृत्यु की तारीख से 10 दिन के भीतर

 

120. सिविल प्रक्रिया संहिता के अधीन वाद के उपशमन अपास्त कराने के आदेश के लिए आवेदन किया जाना चाहिए-

a. वाद के उपशमन की तारीख से 60 दिन के भीतर

b. वाद के उपरामन की तारीख से 90 दिन के भीतर

c. वाद के उपशमन की तारीख से 30 दिन के भीतर

d. वाद के उपशमन की तारीख से 45 दिन के भीतर

 

121. वाद या अपील या पुनर्विलोकन के आवेदन को या निगरानी को अपास्त कर दी हो वहाँ पुनःस्थापित करने के लिए आवेदन किया जाना चाहिए-

a. अपास्त किये जाने की तारीख से 60 दिन के भीतर

b. अपास्त किये जाने की तारीख से 90 दिन के भीतर

c. अपास्त किये जाने की तारीख से 30 दिन के भीतर

d. अपास्त किये जाने की तारीख से 45 दिन के भीतर

 

122. न्यायालय द्वारा पारित एकपक्षीय आज्ञप्ति को अपास्त कराने के लिए आवेदन किया जाना चाहिए-

a. 60 दिन के भीतर

b. 90 दिन के भीतर

c. 30 दिन के भीतर

d. 45 दिन के भीतर

 

123. सर्वोच्च न्यायालय को छोड़कर अन्य किसी न्यायालय के निर्णय के पुनर्विलोकन के लिए आवेदन किया जाना चाहिए-

a. आज्ञप्ति या आदेश को तारीख से 60 दिन के भीतर

b. आज्ञप्ति या आदेश की तारीख से 90 दिन के भीतर

c. आज्ञप्ति या आदेश को तारीख से 30 दिन के भीतर

d. आज्ञप्ति या आदेश की तारीख से 45 दिन के भीतर

 

124. सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने के विशेष अनुमति के लिए आवेदन प्रस्तुत करने की परिसीमा काल है-

a. 90 दिन

b. 60 दिन

c. 30 दिन

d. मामले के अनुसार 60 दिन या 90 दिन

 

125. कोई आवेदन जिसके लिए अनुसूची में अन्यत्र कोई मर्यादा काल उपबन्धित नहीं है वहाँ परिसीमा काल कितनी होगी?

a. एक वर्ष

b. दो वर्ष

c. तीन वर्ष

d. बारह वर्ष

 

126. आज्ञप्ति निदेश देने वाली आज्ञप्ति के प्रवर्तन के लिए परिसीमा है-

a. दो वर्ष

b. बारह वर्ष

c. तीन वर्ष

d. उपर्युक्त में से कोई

 

127. सरकारी सम्पत्ति के विरुद्ध विरभोग द्वारा सुखाधिकार अर्जित करने के लिए विहित की गयी है-

a. 60 वर्ष की अवधि

b. 20 वर्ष की अवधि

c. 30 वर्ष की अवधि

d. 25 वर्ष की अवधि

 

128. लेखे सम्बन्धी वाद की परिसीमा काल कितनी है?

a. 3 वर्ष

b. 1 वर्ष

c. 2 वर्ष

d. 7 वर्ष

 

129. परिसीमा अधिनियम, 1963 एवं अन्य विधियों (विशेष या स्थानीय विधियाँ) में उपबन्धित परिसीमा काल में भिन्नता की स्थिति में परिसीमा अधिनियम में दी गयी परिसीमा काल लागू होगी-

a. जो परिसीमा विशेष या स्थानीय विधियों में दी गयी है

b. जहाँ तक कि वे किसी विशेष या स्थानीय विधि द्वारा अभिव्यक्तरूपेण अपवर्जित नहीं है वहाँ परिसीमा अधिनियम

c. (a) एवं (b) दोनों

d. उपर्युक्त में कोई नहीं

 

130. घोषणा सम्बन्धी वाद की परिसीमा काल कितनी है?

a. 3 वर्ष

b. 12 वर्ष

c. 1 वर्ष

d. 2 वर्ष

 

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