
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
THE BHARATIYA NAGARIK SURAKSHA SANHITA, 2023
1. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 लागू की गई थी-
a. 4 जुलाई, 2024
b. 24 जुलाई, 2024
c. 25 जुलाई, 2024
d. 1 जुलाई, 2024
2. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 में कितने अध्यायों एवं धाराओं में विभाजित है-
a. 37 अध्याय, 532 धाराएं-
b. 39 अध्याय 531 धाराएं
c. 38 अध्याय 540 धाराएं
d. 37 अध्यायं, 554 धाराएं
3. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 लागू होती है-
a. संपूर्ण भारत में
b. जम्मू एवं कश्मीर को छोड़कर संपूर्ण भारत में
c. संघ को छोड़कर संपूर्ण भारत में
d. सिक्किम को छोड़कर संपूर्ण भारत में
4. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 का अधिनियम क्रमांक (Act no.) क्या है?
a. 2023 का 43
b. 2023 का 44
c. 2023 का 45
d. 2023 का 46
5. संहिता की कौन- से अध्याय नागालैंड और जनजातीय क्षेत्रों पर स्वतः लागू नहीं होतीं?
a. अध्याय 1, 2 और 3
b. अध्याय 5, 6 और 7
c. अध्याय 9, 11 और 12
d. अध्याय 8, 10 और 12
6. निम्न में से कौन-सा कथन सही है?
a. यह संहिता पूरे भारत में समान रूप से लागू होती है
b. नागालैंड राज्य को इस संहिता के सभी प्रावधान स्वतः लागू होते हैं
c. संबंधित राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा कुछ उपबंधों को लागू कर सकती है
d. यह संहिता केवल शहरी क्षेत्रों में लागू होती है
7. जनजातीय क्षेत्र की परिभाषा किस तिथि से पूर्व की स्थिति पर आधारित है?
a. 26 जनवरी, 1950
b. 15 अगस्त, 1947
c. 21 जनवरी, 1972
d. 1 नवंबर, 1956
8. जनजातीय क्षेत्र किस अनुसूची से संबंधित हैं?
a. पांचवी अनुसूची
b. छठी अनुसूची
c. सातवीं अनुसूची
d. आठवीं अनुसूची
9. यह संहिता किस माध्यम से प्रवृत्त होगी?
a. विशेष अधिसूचना द्वारा
b. सरकारी आदेश द्वारा
c. राजपत्र में अधिसूचना द्वारा
d. राष्ट्रपति के निर्देश से
10. श्रव्य दृश्य इलैक्ट्रॉनिक की परिभाषा का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 1
b. धारा 2(क)
c. धारा 3
d. धारा 5
11. “श्रव्य दृश्य इलैक्ट्रॉनिक” में निम्न में से क्या सम्मिलित नहीं है?
a. वीडियो कांफ्रेंसिंग
b. पहचान की आदेशिकाओं का अभिलेखन
c. तलाशी और अभिग्रहण
d. पुस्तकों की मुद्रित प्रतियाँ
12. “श्रव्य दृश्य इलैक्ट्रॉनिक” का प्रयोग निम्न में से किस उद्देश्य के लिए किया जा सकता है?
a. समाचार प्रसारण
b. वीडियो गेमिंग
c. साक्ष्य पारेषण और अभिग्रहण
d. संगीत रचना
13. राज्य सरकार “श्रव्य दृश्य इलैक्ट्रॉनिक” से संबंधित अन्य प्रयोजनों को कैसे निर्धारित कर सकती है?
a. कार्यपालक आदेश द्वारा
b. नियमों द्वारा
c. अधिसूचना के बिना
d. संसद की अनुमति से
14. श्रव्य दृश्य इलैक्ट्रॉनिक में किस प्रकार की सूचना पारेषित की जा सकती है?
a. केवल मौखिक
b. केवल लिखित
c. इलैक्ट्रॉनिक संसूचना
d. केवल भौतिक दस्तावेज
15. जमानत का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 1
b. धारा 2(ख)
c. धारा 3(क)
d. धारा 5
16. “जमानत” से क्या अभिप्रेत है?
a. अपराधी को दंडित करना
b. अभियुक्त को दोषी ठहराना
c. शर्तों के साथ विधि की अभिरक्षा से अभियुक्त को छोड़ना
d. अभियुक्त को जेल भेजना
17. जमानत किसके निष्पादन पर दी जाती है?
a. करारनामे पर
b. अनुबंध पर
c. बंधपत्र या जमानतपत्र पर
d. मौखिक वचन पर
18. जमानत प्रदान करने का अधिकार किसे होता है?
a. केवल पुलिस अधिकारी को
b. केवल राष्ट्रपति को
c. अधिकारी या न्यायालय को
d. ग्राम पंचायत को
19. जमानत का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 1
b. धारा 2(ख)
c. धारा 3(क)
d. धारा 2(ग)
20. “जमानतीय अपराध” किस प्रकार के अपराध को कहा जाता है?
a. जो केवल उच्च न्यायालय द्वारा तय हो
b. जो प्रथम अनुसूची में जमानतीय रूप में दिखाया गया हो
c. जो गैर-जमानतीय हो
d. जो केवल पुलिस द्वारा दर्ज किया गया हो
21. “अजमानतीय अपराध” से क्या अभिप्रेत है?
a. कोई भी अपराध जिसमें जुर्माना न हो
b. जमानतीय अपराधों के अतिरिक्त अन्य सभी अपराध
c. केवल आर्थिक अपराध
d. केवल संगीन अपराध
22. जमानतपत्र का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(घ)
b. धारा 2(ख)
c. धारा 3(क)
d. धारा 2(ग)
23. “जमानतपत्र” से क्या अभिप्रेत है?
a. गिरफ्तारी का आदेश
b. अपराध स्वीकार करने का पत्र
c. प्रतिभूति के साथ छोड़े जाने के लिए वचनबंध
d. न्यायालय का निर्णय पत्र
24. जमानतपत्र मुख्यतः किसके लिए प्रयोग होता है?
a. सजा के निर्धारण के लिए
b. गवाह को बुलाने के लिए
c. अभियुक्त को प्रतिभूति के साथ छोड़ने के लिए
d. न्यायालय के आदेश को बदलने के लिए
25. “बंधपत्र” का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(घ)
b. धारा 2(ङ)
c. धारा 3(क)
d. धारा 2(ग)
26. “बंधपत्र” से क्या अभिप्रेत है?
a. प्रतिभूति सहित छोड़े जाने का दस्तावेज
b. गिरफ्तारी का आदेश
c. प्रतिभूति के बिना वैयक्तिक वचनबंध
d. न्यायालय का निर्णय
27. “आरोप" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(घ)
b. धारा 2(ङ)
c. धारा 3(क)
d. धारा 2(च)
28. यदि आरोप में एक से अधिक शीर्ष हों, तो “आरोप” किसे सम्मिलित करता है?
a. केवल मुख्य आरोप
b. सभी शीर्षों में से कोई भी एक शीर्ष
c. केवल अंतिम शीर्ष
d. किसी को भी नहीं
29. “संज्ञेय अपराध " का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(घ)
b. धारा 2(ङ)
c. धारा 2(छ)
d. धारा 2(च)
30. “संज्ञेय अपराध” का अर्थ है:
a. ऐसा अपराध जिसमें न्यायालय स्वतः संज्ञान ले
b. ऐसा अपराध जिसमें समझौता किया जा सकता है
c. ऐसा अपराध जिसमें पुलिस अधिकारी बिना वारण्ट गिरफ्तार कर सकता है
d. ऐसा अपराध जो केवल सिविल प्रकृति का हो
31. “संज्ञेय मामला” किस आधार पर तय किया जाता है?
a. प्रथम सूचना रिपोर्ट पर
b. प्रथम अनुसूची या अन्य प्रवृत्त विधि के अनुसार
c. अभियुक्त की सहमति से
d. न्यायालय के आदेश से
32. “परिवाद" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(घ)
b. धारा 2(ज)
c. धारा 3(छ)
d. धारा 2(च)
33. “परिवाद” का अर्थ क्या है?
a. पुलिस द्वारा दर्ज की गई रिपोर्ट
b. मजिस्ट्रेट के समक्ष मौखिक या लिखित अभिकथन जिसमें कोई पुलिस रिपोर्ट शामिल नहीं हो
c. अभियुक्त का बयान
d. न्यायालय का आदेश
34. परिवाद में अपराध करने वाला व्यक्ति किस प्रकार हो सकता है?
a. केवल ज्ञात व्यक्ति
b. केवल अज्ञात व्यक्ति
c. ज्ञात या अज्ञात कोई भी व्यक्ति
d. केवल सरकारी कर्मचारी
35. यदि अन्वेषण से असंज्ञेय अपराध प्रकट होता है तो क्या होता है?
a. पुलिस रिपोर्ट को परिवाद माना जाएगा
b. मामला बंद कर दिया जाएगा
c. केवल मजिस्ट्रेट को सूचना दी जाएगी
d. अभियुक्त को तुरंत बरी कर दिया जाएगा
36. ऐसे मामले में पुलिस अधिकारी को क्या माना जाएगा जिसके द्वारा रिपोर्ट की गई हो?
a. अभियुक्त
b. परिवादी
c. न्यायाधीश
d. गवाह
37. “इलैक्ट्रानिक संसूचना" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(झ)
b. धारा 2(ज)
c. धारा 3(छ)
d. धारा 2(च)
38. “इलैक्ट्रानिक संसूचना” में क्या शामिल है?
a. केवल लिखित सूचना
b. केवल मौखिक सूचना
c. लिखित, मौखिक, सचित्र सूचना या वीडियो अंतर्वस्तु
d. केवल वीडियो रिकॉर्डिंग
39. “इलैक्ट्रानिक संसूचना” किस प्रकार की युक्तियों से पारेषित की जाती है?
a. केवल कंप्यूटर
b. केवल मोबाइल फोन
c. टेलीफोन, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, श्रव्य-दृश्य प्लेयर, कैमरा या अन्य इलेक्ट्रॉनिक युक्ति
d. केवल कैमरा
40. “इलैक्ट्रानिक संसूचना” का विनिर्देशन कौन करता है?
a. राज्य सरकार
b. न्यायालय
c. केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से
d. पुलिस
41. "उच्च न्यायालय" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(झ)
b. धारा 2(ज)
c. धारा 3(ञ)
d. धारा 2(च)
42. “उच्च न्यायालय” से क्या अभिप्रेत है?
a. केवल भारत का सर्वोच्च न्यायालय
b. किसी राज्य का उच्च न्यायालय
c. केवल संघ राज्य क्षेत्र का न्यायालय
d. केवल जिला न्यायालय
43. “जांच" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ट)
b. धारा 2(ज)
c. धारा 3(ञ)
d. धारा 2(च)
44. “जांच” का क्या अर्थ है?
a. न्यायालय द्वारा सजा सुनाना
b. मजिस्ट्रेट या न्यायालय द्वारा संहिता के अधीन की गई प्रत्येक जांच, जो विचारण से भिन्न हो
c. पुलिस द्वारा अपराध की रिपोर्ट दर्ज करना
d. केवल अभियुक्त की गिरफ्तारी
45. “अन्वेषण" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ट)
b. धारा 2(ज)
c. धारा 3(ञ)
d. धारा 2(ठ)
46. “अन्वेषण” से क्या अभिप्रेत है?
a. मजिस्ट्रेट द्वारा सजा सुनाना
b. पुलिस अधिकारी या प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा साक्ष्य एकत्र करने की कार्यवाहियां
c. न्यायालय में मामला प्रस्तुत करना
d. अभियुक्त को रिहा करना
47. “न्यायिक कार्यवाही" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(ज)
c. धारा 2(ञ)
d. धारा 2(ठ)
48. “न्यायिक कार्यवाही” में क्या शामिल होता है?
a. केवल अभियुक्त की गिरफ्तारी
b. वह कार्यवाही जिसमें साक्ष्य वैध रूप से शपथ पर लिया जाता है या लिया जा सकेगा
c. केवल पुलिस जांच
d. मजिस्ट्रेट द्वारा फैसला सुनाना
49. धारा 2(ड) के अनुसार न्यायिक कार्यवाही में कौन सी प्रक्रिया नहीं आती?
a. साक्ष्य का शपथ पर लिया जाना
b. मजिस्ट्रेट का निर्णय सुनाना
c. पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच
d. वैध साक्ष्य का संग्रह
50. “स्थानीय अधिकारिता" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(ढ)
c. धारा 2(ठ)
d. धारा 2(म)
51. “असंज्ञेय अपराध " का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(ण)
c. धारा 2(ठ)
d. धारा 2(म)
52. “असंज्ञेय मामला” से क्या अभिप्रेत है?
a. ऐसा मामला जिसमें पुलिस अधिकारी को वारण्ट के बिना गिरफ्तारी करने का अधिकार होता है
b. ऐसा मामला जिसमें पुलिस अधिकारी को वारण्ट के बिना गिरफ्तारी करने का अधिकार नहीं होता है
c. केवल पुलिस जांच का मामला
d. न्यायालय में चलने वाला मामला
53. “अधिसूचना’’ का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(त)
c. धारा 2(ठ)
d. धारा 2(म)
54. "अपराध”’ का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(थ)
c. धारा 2(ठ)
d. धारा 2(म)
55. “अपराध” से क्या अभिप्रेत है?
a. कोई भी कार्य जो सामाजिक नियमों के विपरीत हो
b. कोई ऐसा कार्य या लोप जो किसी विधि द्वारा दण्डनीय बनाया गया हो
c. केवल हिंसा से संबंधित कार्य
d. केवल आर्थिक अपराध
56. धारा 2(थ) के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सा कार्य अपराध के अंतर्गत आता है?
a. पशु अतिचार अधिनियम, 1871 की धारा 20 के तहत परिवाद योग्य कार्य
b. केवल मानव अधिकारों का उल्लंघन
c. केवल आर्थिक अपराध
d. केवल सरकारी आदेश का उल्लंघन
57. “अपराध” की परिभाषा में कौन सा अधिनियम भी शामिल है?
a. मोटर वाहन अधिनियम
b. पशु अतिचार अधिनियम, 1871
c. कराधान अधिनियम
d. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम
58. "पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी” का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(थ)
c. धारा 2(ठ)
d. धारा 2(द)
59. "स्थान" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(थ)
c. धारा 2(ध)
d. धारा 2(द)
60. “स्थान” के अंतर्गत क्या-क्या शामिल हैं?
a. केवल घर और भवन
b. गृह, भवन, तम्बू, यान और जलयान
c. केवल कार्यालय भवन
d. केवल सड़क और मार्ग
61. "पुलिस रिपोर्ट" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(थ)
c. धारा 2(न)
d. धारा 2(द)
62. “पुलिस रिपोर्ट” से क्या अभिप्रेत है?
a. पुलिस द्वारा किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी
b. पुलिस अधिकारी द्वारा धारा 193(3) के अंतर्गत मजिस्ट्रेट को भेजी गई रिपोर्ट
c. केवल थाना में दर्ज की गई शिकायत
d. न्यायालय का आदेश
63. धारा 2(न) के अनुसार पुलिस रिपोर्ट किसे भेजी जाती है?
a. जिला अधिकारी
b. मजिस्ट्रेट
c. उच्च न्यायालय
d. केंद्र सरकार
64. धारा 193(3) के तहत पुलिस रिपोर्ट का क्या महत्व है?
a. यह केवल सूचना का साधन है
b. यह मजिस्ट्रेट के समक्ष आधिकारिक रिपोर्ट होती है
c. यह केवल जांच प्रारंभ करने के लिए होती है
d. यह अदालत का आदेश है
65. "पुलिस थाना " का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(प)
c. धारा 2(न)
d. धारा 2(द)
66. “पुलिस थाना” से क्या अभिप्रेत है?
a. केवल पुलिस चौकी
b. कोई भी चौकी या स्थान जिसे राज्य सरकार ने पुलिस थाना घोषित किया हो
c. केवल जिला मुख्यालय
d. केवल पुलिस स्टेशन का मुख्य कार्यालय
67. "लोक अभियोजक" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(प)
c. धारा 2(न)
d. धारा 2(फ)
68. "उपखण्ड" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(प)
c. धारा 2(न)
d. धारा 2(ब)
69. “उपखण्ड” से क्या अभिप्रेत है?
a. किसी राज्य का पूरा क्षेत्र
b. किसी जिले का कोई उपखण्ड
c. केवल जिले का मुख्यालय
d. कोई भी नगरपालिका
70. धारा 2(ब) के अनुसार उपखण्ड किसका भाग होता है?
a. राज्य
b. जिला
c. गाँव
d. राजस्व विभाग
71. "समन-मामला" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(प)
c. धारा 2(न)
d. धारा 2(भ)
72. “समन-मामला” से क्या अभिप्रेत है?
a. कोई मामला जो वारण्ट के साथ जुड़ा हो
b. ऐसा मामला जो किसी अपराध से संबंधित हो लेकिन वारण्ट मामला न हो
c. केवल असंज्ञेय अपराध से संबंधित मामला
d. केवल जमानतीय अपराध से संबंधित मामला
73. "पीड़ित" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(प)
c. धारा 2(न)
d. धारा 2(म)
74. “पीड़ित” से क्या अभिप्रेत है?
a. वह व्यक्ति जिसे पुलिस ने गिरफ्तार किया हो
b. वह व्यक्ति जिसे अभियुक्त के कार्य या लोप से हानि या क्षति हुई हो
c. केवल न्यायाधीश
d. कोई भी व्यक्ति
75. धारा 2(म) के अनुसार, पीड़ित में कौन शामिल हो सकता है?
a. केवल अभियुक्त
b. पीड़ित का संरक्षक या विधिक वारिस
c. केवल पुलिस अधिकारी
d. केवल न्यायालय
76. धारा 2(म) में पीड़ित का संरक्षक या विधिक वारिस क्या कर सकता है?
a. अभियोजन कर सकता है
b. पीड़ित की ओर से कार्य कर सकता है
c. केवल पुलिस से संपर्क कर सकता है
d. कोई अधिकार नहीं रखता
77. "वारण्ट मामला" का उल्लेख किस धारा में किया गया है?
a. धारा 2(ड)
b. धारा 2(य)
c. धारा 2(न)
d. धारा 2(म)
78. “वारंट मामला” से क्या अभिप्रेत है?
a. ऐसा मामला जो केवल आर्थिक अपराध से संबंधित हो
b. ऐसा मामला जो मृत्यु, आजीवन कारावास या दो वर्ष से अधिक की अवधि के कारावास से दण्डनीय अपराध से संबंधित हो
c. कोई मामूली अपराध
d. केवल ट्रैफिक अपराध
79. धारा 2 में परिभाषित शब्दों का अर्थ किस अधिनियम या संहिता से लिया जाएगा यदि वे इस संहिता में परिभाषित नहीं हैं?
a. केवल भारतीय दंड संहिता से
b. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 से
c. केवल भारतीय साक्ष्य अधिनियम से
d. किसी भी अन्य अधिनियम से नहीं
80. “निर्देशों का अर्थ लगाना” किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 5
b. धारा 6
c. धारा 4
d. धारा 3
81. भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अधीन अपराधों का अन्वेषण, जांच और विचारण कैसे किया जाएगा?
a. केवल पुलिस द्वारा
b. भारतीय न्याय संहिता, 2023 और इसके अन्तर्विष्ट उपबंधों के अनुसार
c. स्थानीय प्रशासन के नियमों के अनुसार
d. केवल अन्य विधियों के अनुसार
82. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023" धारा 6 उपबंधित करती है-
a. क्षेत्रीय अधिकारिता
b. दंड न्यायालयों के वर्ग
c. दंड न्यायालयों की अधिकारिता
d. मजिस्ट्रेट की शक्तियां
83. एक जनपद में कितने वर्ग के आपराधिक न्यायालय होते हैं?
a. दो
b. तीन
c. चार
d. पाँच
84. धारा 6 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायालय दंड न्यायालय की श्रेणी में आता है?
a. उच्चतम न्यायालय
b. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
c. लोक अदालत
d. उपभोक्ता न्यायालय
85. धारा 6 में उल्लिखित दंड न्यायालयों में से कौन-सा उच्चतम होता है?
a. प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट
b. सेशन न्यायालय
c. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
d. द्वितीय वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट
86. राज्य सरकार किनसे परामर्श के बाद खंडों और जिलों की सीमाओं या संख्या में परिवर्तन कर सकती है?
a. मुख्यमंत्री से
b. गृह मंत्रालय से
c. उच्च न्यायालय से
d. संसद से
87. प्रत्येक सेशन खंड के लिए सेशन न्यायालय की स्थापना कौन करता है?
a. उच्च न्यायालय
b. राज्यपाल
c. राज्य सरकार
d. सुप्रीम कोर्ट
88. सेशन न्यायालय का पीठासीन न्यायाधीश किसके द्वारा नियुक्त किया जाता है?
a. राज्यपाल
b. राज्य सरकार
c. उच्च न्यायालय
d. राष्ट्रपति
89. यदि किसी सेशन न्यायाधीश का पद रिक्त हो, तो अति आवश्यक आवेदन किसके द्वारा निपटाया जा सकता है?
a. अपर सेशन न्यायाधीश या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
b. राज्य सरकार
c. उच्च न्यायालय
d. जिला न्यायाधीश
90. प्रत्येक जिले में प्रथम वर्ग और द्वितीय वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालय किसके परामर्श से स्थापित किए जाते हैं?
a. प्रधानमंत्री
b. जिला न्यायाधीश
c. उच्च न्यायालय
d. गृह मंत्रालय
91. प्रथम वर्ग या द्वितीय वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों की स्थापना के स्थान कौन निर्धारित करता है?
a. राज्यपाल
b. उच्च न्यायालय
c. सुप्रीम कोर्ट
d. राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा
92. राज्य सरकार, उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद विशेष न्यायालय किन उद्देश्यों के लिए स्थापित कर सकती है?
a. सभी प्रकार के वादों के लिए
b. प्रशासनिक समीक्षा के लिए
c. किसी विशेष मामले या विशेष वर्ग के मामलों के विचारण हेतु
d. भूमि विवाद के समाधान हेतु
93. प्रत्येक जिले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किसे नियुक्त किया जाता है?
a. द्वितीय वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट
b. जिला न्यायाधीश
c. अपर सत्र न्यायाधीश
d. किसी प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट को
94. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कौन करता है?
a. राज्य सरकार
b. जिला कलेक्टर
c. उच्च न्यायालय
d. गृह मंत्रालय
95. उच्च न्यायालय किन्हें अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकता है?
a. द्वितीय वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट
b. उपखंड मजिस्ट्रेट
c. सिविल न्यायाधीश
d. प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट
96. अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कौन-सी शक्तियाँ प्राप्त हो सकती हैं?
a. सभी या कोई, जैसा उच्च न्यायालय निर्देश दे
b. केवल द्वितीय श्रेणी मामलों की
c. केवल अपीलीय शक्तियाँ
d. केवल प्रशासकीय कार्यों की
97. विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति किसके अनुरोध पर उच्च न्यायालय कर सकता है?
a. जिला न्यायाधीश
b. केन्द्रीय या राज्य सरकार
c. राज्यपाल
d. सुप्रीम कोर्ट
98. विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट को कौन-सी शक्तियां प्रदान की जा सकती हैं?
a. केवल प्रशासनिक शक्तियां
b. इस संहिता द्वारा या इसके अधीन प्रदत्त की गई या की जा सकने वाली सभी या कोई शक्तियां
c. केवल पुलिस संबंधी शक्तियां
d. केवल न्यायालयीन साक्षी दंड देने की शक्तियां
99. विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की अधिकतम अवधि क्या हो सकती है?
a. 6 महीने
b. 1 वर्ष
c. 2 वर्ष
d. 5 वर्ष
100. न्यायिक मजिस्ट्रेटों की स्थानीय सीमाओं को कौन परिनिश्चित करता है?
a. राज्य सरकार
b. जिला न्यायाधीश
c. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उच्च न्यायालय के नियंत्रण में
d. सुप्रीम कोर्ट
101. प्रत्येक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किसके अधीनस्थ होता है?
a. जिला न्यायाधीश
b. सेशन न्यायाधीश
c. उच्च न्यायालय
d. राज्य सरकार
102. राज्य सरकार किसे जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त करती है?
a. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
b. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों में से किसी एक को
c. सेशन न्यायाधीश
d. उपखंड मजिस्ट्रेट
103. अपर जिला मजिस्ट्रेट की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?
a. उच्च न्यायालय
b. राज्य सरकार
c. जिला न्यायाधीश
d. जिला मजिस्ट्रेट
104. विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?
a. उच्च न्यायालय
b. जिला मजिस्ट्रेट
c. राज्य सरकार
d. पुलिस अधीक्षक
105. विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट बनने के लिए पुलिस अधिकारी का पद क्या होना चाहिए?
a. पुलिस अधीक्षक की पंक्ति से नीचे नहीं हो या समतुल्य हो
b. केवल पुलिस अधीक्षक
c. कोई भी पुलिस अधिकारी
d. केवल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
106. विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कितनी अवधि के लिए की जा सकती है?
a. केवल 6 महीने
b. केवल 1 वर्ष
c. राज्य सरकार जितनी अवधि उचित समझे
d. स्थायी
107. विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट को किन शक्तियों से नवाजा जा सकता है?
a. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों को प्रदत्त सभी शक्तियां
b. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों को प्रदत्त कोई भी शक्तियां, जिन्हें राज्य सरकार उचित समझे
c. केवल पुलिस शक्तियां
d. केवल प्रशासनिक शक्तियां
108. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की स्थानीय सीमाओं को कौन परिनिश्चित करता है?
a. राज्य सरकार
b. जिला मजिस्ट्रेट राज्य सरकार के नियंत्रण में
c. मुख्य न्यायालय
d. पुलिस अधीक्षक
109. सभी कार्यपालक मजिस्ट्रेट किसके अधीनस्थ होते हैं?
a. उपखंड मजिस्ट्रेट
b. जिला मजिस्ट्रेट
c. मुख्य न्यायाधीश
d. पुलिस अधीक्षक
110. प्रत्येक उच्च न्यायालय के लिए लोक अभियोजक नियुक्ति किसके परामर्श से की जाती है?
a. जिला मजिस्ट्रेट
b. राज्य सरकार या केंद्रीय सरकार, उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद
c. मुख्य न्यायालय
d. पुलिस अधीक्षक
111. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के संबंध में लोक अभियोजक की नियुक्ति कौन करता है?
a. राज्य सरकार
b. उच्च न्यायालय
c. केंद्रीय सरकार, दिल्ली उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद
d. जिला मजिस्ट्रेट
112. किसके परामर्श से जिला मजिस्ट्रेट लोक अभियोजक या अपर लोक अभियोजक के योग्य व्यक्तियों का पैनल तैयार करता है?
a. पुलिस अधीक्षक
b. सेशन न्यायाधीश
c. उच्च न्यायालय
d. राज्य सरकार
113. राज्य सरकार द्वारा जिले के लिए लोक अभियोजक नियुक्त करने के लिए आवश्यक क्या है?
a. उसका नाम जिला मजिस्ट्रेट के पैनल में होना चाहिए
b. वह राज्य सरकार के अधिकारी होना चाहिए
c. वह पुलिस अधिकारी होना चाहिए
d. वह मुख्य न्यायालय से प्रमाण पत्र प्राप्त करे
114. लोक अभियोजक या अपर लोक अभियोजक बनने के लिए न्यूनतम कितने वर्षों तक अधिवक्ता के रूप में विधि व्यवसाय किया होना चाहिए?
a. 5 वर्ष
b. 7 वर्ष
c. 10 वर्ष
d. 15 वर्ष
115. विशेष लोक अभियोजक बनने के लिए अधिवक्ता के रूप में कितने वर्षों का अनुभव आवश्यक है?
a. 7 वर्ष
b. 8 वर्ष
c. 9 वर्ष
d. 10 वर्ष
116. राज्य सरकार प्रत्येक जिले में मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों में अभियोजन का संचालन करने के लिए किसे नियुक्त करती है?
a. लोक अभियोजक
b. सहायक लोक अभियोजक
c. अपर लोक अभियोजक
d. पुलिस अधिकारी
117. केंद्रीय सरकार किस उद्देश्य से सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकती है?
a. न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए
b. मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों में किसी मामले या वर्ग के अभियोजन के संचालन के लिए
c. पुलिस जांच करने के लिए
d. जिला प्रशासनिक कार्यों के लिए
118. जब कोई सहायक लोक अभियोजक किसी विशिष्ट मामले के लिए उपलब्ध नहीं होता है, तो जिला मजिस्ट्रेट क्या कर सकता है?
a. स्वयं अभियोजन करेगा
b. किसी पुलिस अधिकारी को सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर देगा
c. राज्य सरकार को चौदह दिन की सूचना देकर किसी अन्य व्यक्ति को सहायक लोक अभियोजक नियुक्त कर सकता है
d. अभियोजन स्थगित कर देगा
119. कौन सहायक लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त होने के लिए पात्र नहीं होगा?
a. वह व्यक्ति जिसने पिछले 5 वर्ष में अधिवक्ता के रूप में कार्य किया हो
b. पुलिस अधिकारी जिसने उस अपराध की जांच की हो, जिसके संबंध में अभियुक्त अभियोजित है
c. कोई न्यायाधीश
d. राज्य सरकार के कर्मचारी
120. सहायक लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त होने के लिए कौन से पुलिस अधिकारी पात्र नहीं होंगे?
a. निरीक्षक की पंक्ति से ऊपर के अधिकारी
b. निरीक्षक की पंक्ति से नीचे के अधिकारी
c. राज्य सरकार के अधिकारी
d. अपर लोक अभियोजक
121. राज्य सरकार अभियोजन निदेशालय किस स्तर पर स्थापित कर सकती है?
a. केवल राज्य स्तर पर
b. केवल जिला स्तर पर
c. राज्य में एक अभियोजन निदेशालय और प्रत्येक जिले में जिला अभियोजन निदेशालय
d. केवल केंद्र सरकार के निर्देश पर
122. अभियोजन निदेशक के रूप में नियुक्ति के लिए निम्न में से कौन पात्र होगा?
a. कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में व्यवसाय किया हो
b. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट रहा हो
c. अधिवक्ता के रूप में कम से कम पंद्रह वर्ष तक व्यवसाय किया हो या सेशन न्यायाधीश हो या रहा हो
d. कोई भी सरकारी अधिकारी
123. अभियोजन सहायक निदेशक के रूप में नियुक्ति के लिए आवश्यक पात्रता क्या है?
a. अधिवक्ता के रूप में कम से कम सात वर्ष तक व्यवसाय किया हो या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट रहा हो
b. अधिवक्ता के रूप में कम से कम पंद्रह वर्ष तक व्यवसाय किया हो
c. पुलिस अधिकारी होना चाहिए
d. कोई भी व्यक्ति जिसे राज्य सरकार उचित समझे
124. कौन से अपराधों के मामलों का मानीटरिंग अभियोजन उप-निदेशक करेगा?
a. सात वर्ष से कम के लिए दंडनीय अपराध
b. सात वर्ष से अधिक लेकिन दस वर्ष से कम के लिए दंडनीय अपराध
c. दस वर्ष या उससे अधिक के लिए दंडनीय अपराध
d. सभी अपराधों का
125. इस धारा के अंतर्गत लोक अभियोजक के कृत्यों का पालन करते समय किन पर यह धारा लागू नहीं होगी?
a. जिला मजिस्ट्रेट
b. राज्य के महाधिवक्ता
c. पुलिस अधीक्षक
d. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
126. भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अधीन किसी अपराध का विचारण निम्नलिखित में से किन न्यायालयों द्वारा किया जा सकता है?
a. उच्च न्यायालय, सेशन न्यायालय, या प्रथम अनुसूची में दर्शाए गए अन्य न्यायालय
b. केवल उच्च न्यायालय
c. केवल जिला न्यायालय
d. केवल सेशन न्यायालय
127. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64 से 71 के अंतर्गत अपराधों का विचारण किस प्रकार के न्यायालय द्वारा यथासाध्य किया जाएगा?
a. किसी भी न्यायालय द्वारा
b. ऐसे न्यायालय में जिसमें महिला पीठासीन हो
c. केवल उच्च न्यायालय द्वारा
d. केवल सेशन न्यायालय द्वारा
128. उच्च न्यायालय किस प्रकार का दंडादेश दे सकता है?
a. केवल मृत्युदंड
b. केवल जुर्माना
c. विधि द्वारा प्राधिकृत कोई भी दंडादेश
d. केवल सजा की अवधि 5 वर्ष तक
129. सेशन न्यायाधीश या अपर सेशन न्यायाधीश किस प्रकार के दंडादेश दे सकते हैं?
a. केवल सजा की अवधि 3 वर्ष तक
b. विधि द्वारा प्राधिकृत कोई भी दंडादेश, उच्च न्यायालय पुष्टिकरण के अधीन
c. केवल जुर्माना
d. केवल मृत्युदंड
130. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
a. उच्च न्यायालय केवल जुर्माना का दंडादेश दे सकता है।
b. सेशन न्यायाधीश द्वारा दिया गया मृत्युदंड स्वतः प्रभावी होता है।
c. उच्च न्यायालय विधि द्वारा प्राधिकृत कोई भी दंडादेश दे सकता है।
d. सेशन न्यायाधीश मृत्युदंड नहीं दे सकते।
131. सेशन न्यायाधीश द्वारा दिया गया मृत्यु दंडादेश किस प्रकार कार्यान्वित किया जाएगा?
a. बिना किसी पुष्टिकरण के तुरंत लागू होगा।
b. केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लागू होगा।
c. उच्च न्यायालय के पुष्टिकरण के बाद लागू होगा।
d. जिला मजिस्ट्रेट के अनुमोदन के बाद लागू होगा।
132. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय किस प्रकार के दंडादेश दे सकता है?
a. मृत्यु दंड या आजीवन कारावास या सात वर्ष से अधिक की अवधि के लिए कारावास के दंडादेश सहित सभी दंडादेश
b. मृत्यु दंड या आजीवन कारावास या सात वर्ष से अधिक की अवधि के लिए कारावास के दंडादेश के सिवाय विधि द्वारा प्राधिकृत कोई भी दंडादेश
c. केवल जुर्माना और तीन वर्ष तक की कैद
d. केवल सामुदायिक सेवा
133. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय अधिकतम कितनी अवधि के लिए कारावास का दंडादेश दे सकता है?
a. तीन वर्ष से अधिक नहीं
b. तीन वर्ष से अनधिक
c. एक वर्ष से अधिक नहीं
d. दस वर्ष तक
134. द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय अधिकतम कितनी अवधि के लिए कारावास का दंडादेश दे सकता है?
a. एक वर्ष से अधिक नहीं
b. एक वर्ष से अनधिक
c. तीन वर्ष तक
d. सात वर्ष तक
135. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय अधिकतम कितना जुर्माना लगा सकता है?
a. दस हजार रुपए से अधिक नहीं
b. पचास हजार रुपए से अधिक नहीं
c. पचास हजार रुपए से अनधिक
d. एक लाख रुपए तक
136. द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय अधिकतम कितना जुर्माना लगा सकता है?
a. दस हजार रुपए से अधिक नहीं
b. पचास हजार रुपए से अधिक नहीं
c. पचास हजार रुपए से अनधिक
d. एक लाख रुपए तक
137. "सामुदायिक सेवा" का अर्थ क्या है?
a. दोषसिद्ध व्यक्ति को जुर्माना भरना
b. दोषसिद्ध व्यक्ति को कार्य करना जो समुदाय के लाभ के लिए हो, बिना पारिश्रमिक के
c. दोषसिद्ध व्यक्ति को जेल भेजना
d. दोषसिद्ध व्यक्ति को सेवा शुल्क देना
138. जुर्माना न देने पर कारावास का दंडादेश से सम्बंधित धारा कौन सी है?
a. धारा 26
b. धारा 25
c. धारा 24
d. धारा 23
139. जब कोई व्यक्ति एक ही विचारण में दो या अधिक अपराधों के लिए दोषसिद्ध होता है, तो न्यायालय कैसे दंडादेश देगा?
a. केवल एक अपराध के लिए दंडादेश देगा
b. अपराधों के लिए विहित दंडों में से सक्षम दंडादेश देगा, साथ-साथ या क्रमवर्ती रूप से
c. केवल सबसे गंभीर अपराध के लिए दंडादेश देगा
d. केवल जुर्माने का दंडादेश देगा
140. धारा 25 के अनुसार, किसी आरोपी को अधिकतम कितनी अवधि तक कारावास के लिए दंडित किया जा सकता है?
a. 10 वर्ष
b. 15 वर्ष
c. 20 वर्ष
d. आजीवन कारावास
141. संकलित दंड की अधिकतम सीमा क्या है, जो एक अपराध के लिए सक्षम दंड का?
a. तीन गुना
b. दोगुना
c. आधा
d. कोई सीमा नहीं
142. शक्तियां प्रदान करने का ढंग से सम्बंधित धारा कौन सी है?
a. धारा 26
b. धारा 27
c. धारा 28
d. धारा 29
143. धारा 29 किससे सम्बंधित है?
a. शक्तियां प्रदान करने का ढंग
b. नियुक्त अधिकारियों की शक्तियां
c. शक्तियों को वापस लेना
d. न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों की शक्तियों का उनके पद-उत्तरवर्तियों द्वारा प्रयोग किया जा सकना
144. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी किन शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं?
a. केवल अपने थाने के बाहर की सीमाओं में
b. केवल अपने थाने की सीमाओं के भीतर की शक्तियाँ
c. स्थानीय क्षेत्र में जहाँ वे नियुक्त हैं, अपने थाने की सीमाओं के भीतर वाले अधिकारी की शक्तियाँ
d. राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट सभी शक्तियाँ
145. जनता किस कार्य में मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी की सहायता करने के लिए बाध्य है?
a. किसी अन्य व्यक्ति को पकड़ना जिसे मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी गिरफ्तार करने के लिए प्राधिकृत है
b. केवल अपने दोस्त की रक्षा करना
c. केवल संपत्ति की चोरी रोकना
d. न्यायालय के बाहर आवाज़ लगाना
146. जनता किस स्थिति में लोक संपत्ति की रक्षा में सहायता करेगी?
a. जब किसी को भी इच्छा हो
b. जब कोई लोक संपत्ति को क्षति पहुंचाने का प्रयास करता हो
c. केवल अपने घर की संपत्ति के लिए
d. पुलिस की अनुमति के बिना नहीं
147. जब कोई वारंट पुलिस अधिकारी के बजाय किसी अन्य व्यक्ति को निदिष्ट किया गया हो, तब क्या होगा?
a. केवल पुलिस अधिकारी ही उस वारंट का निष्पादन कर सकते हैं
b. कोई भी अन्य व्यक्ति उस वारंट के निष्पादन में सहायता कर सकता है यदि वह व्यक्ति पास में है और कार्य कर रहा है
c. वारंट निष्पादन केवल न्यायालय द्वारा किया जा सकता है
d. वारंट निष्पादन असंभव हो जाता है
148. धारा 32 के अनुसार, कौन वारंट निष्पादन में सहायता कर सकता है?
a. केवल वारंट निष्पादित करने वाला व्यक्ति
b. कोई भी अन्य व्यक्ति जब वह वारंट निष्पादित कर रहे व्यक्ति के पास हो और कार्य कर रहा हो
c. केवल पुलिस अधिकारी
d. केवल मजिस्ट्रेट
149. धारा 33 के अनुसार, निम्नलिखित में से किन धाराओं के अंतर्गत अपराध की सूचना देना आवश्यक है?
a. केवल धारा 307 और धारा 316 की उपधारा (5)
b. धारा 103 से 105, 111 से 113, 140 से 144, 147 से 154, 158, 178 से 182, 189, 191, 274 से 280, 307, 309 से 312, 316(5), 326 से 328, 331, और 332
c. केवल धारा 178 से 182
d. केवल धारा 111 से 113
150. धारा 33 के अनुसार, अपराध की सूचना किसे दी जानी चाहिए?
a. निकटतम मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी को
b. सीधे उच्च न्यायालय को
c. केवल जिला मजिस्ट्रेट को
d. राज्य सरकार को
151. धारा 34 के अनुसार, ग्राम में नियोजित अधिकारी या निवासी को किसे सूचना देनी होगी?
a. निकटतम जिला मजिस्ट्रेट
b. निकटतम मजिस्ट्रेट या निकटतम पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी, जो भी निकटतम हो
c. राज्य सरकार
d. उच्च न्यायालय
152. किस स्थिति में ग्राम के अधिकारी या निवासी को तुरंत सूचना देनी होगी?
a. ग्राम में अजमानतीय अपराध या धारा 189 व 191 के अंतर्गत कोई अपराध होना या करने का आशय हो
b. ग्राम में किसी भी तरह का विवाद हो
c. ग्राम में कोई प्राकृतिक आपदा आए
d. ग्राम में नया निवासी आया हो
153. व्यक्तियों की गिरफ्तारी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के किस अध्याय में शामिल है-
a. अध्याय 8
b. अध्याय 7
c. अध्याय 6
d. अध्याय 5
154. किस पुलिस बिना वारंट के कब गिरफ्तार कर सकेगी से सम्बंधित धारा कौन सी है?
a. धारा 34
b. धारा 35
c. धारा 36
d. धारा 37
155. किस परिस्थिति में पुलिस अधिकारी बिना मजिस्ट्रेट के आदेश या वारंट के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है?
a. जब व्यक्ति संज्ञेय अपराध करते हुए पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में पकड़ा जाए
b. जब व्यक्ति केवल असंज्ञेय अपराध करता हो
c. केवल मजिस्ट्रेट के वारंट के बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता
d. जब व्यक्ति किसी अन्य राज्य का निवासी हो
156. पुलिस अधिकारी को किस आधार पर बिना वारंट गिरफ्तारी का निर्णय लेना चाहिए?
a. केवल यदि अपराध सात वर्ष से अधिक की सजा का हो
b. यदि पुलिस अधिकारी को विश्वसनीय सूचना हो कि व्यक्ति ने संज्ञेय अपराध किया है और गिरफ्तारी जरूरी हो जैसे अपराध रोकने या साक्ष्य बचाने के लिए
c. किसी भी परिस्थिति में बिना मजिस्ट्रेट के आदेश गिरफ्तार कर सकता है
d. केवल यदि आरोपी भागने की कोशिश कर रहा हो
157. निम्नलिखित धाराओं में से किस धारा के अधीन दण्डनीय अपराध के घटित होने वाले अपराध की जानकारी रखने वाले किसी व्यक्ति के लिए अनिवार्य है कि वह इसकी सूचना निकटतम मजिस्ट्रेट अथवा पुलिस अधिकारी को दे?
a. भारतीय न्याय संहिता की धारा 85
b. भारतीय न्याय संहिता की धारा 103
c. भारतीय न्याय संहिता की धारा 118
d. भारतीय न्याय संहिता की धारा 329(4)
158. धारा 35(1) के अंतर्गत किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की एक पुलिस अधिकारी की शक्ति-
a. पर्याप्त संदेह के मामलों तक सीमित होती है.
b. सभी मामलों पर लागू होती है
c. केवल संदेह के मामलों तक सीमित होती है।
d. सेना के भगोड़ों के मामलों पर लागू नहीं होती
159. यदि किसी व्यक्ति को वारंट के बिना गिरफ्तार किया गया है, तो पुलिस अधिकारी क्या करेगा?
a. तुरंत मजिस्ट्रेट को सूचना देगा
b. गिरफ्तारी के कारणों को लिखित में दर्ज करेगा
c. आरोपी को तुरंत छोड़ देगा
d. केवल मौखिक सूचना देगा
160. किस मामले में पुलिस अधिकारी बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकता है?
a. जब व्यक्ति पुलिस अधिकारी को बाधा पहुंचाए या विधिपूर्वक अभिरक्षा से भागने का प्रयास करे
b. जब व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो
c. जब आरोपी 60 वर्ष से अधिक आयु का हो
d. जब आरोपी विदेश में किया गया अपराध में आरोपी हो लेकिन भारत में उस अपराध के लिए गिरफ्तारी अपेक्षित न हो
161. धारा 35 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सूचना के नियमों का पालन करता रहता है, तो क्या होगा?
a. उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा
b. उसे तब तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा जब तक पुलिस अधिकारी लिखित कारण न बताए कि गिरफ्तारी जरूरी है
c. उसे पुलिस थाने ले जाकर बंद किया जाएगा
d. उसे जमानत पर छोड़ दिया जाएगा
162. पुलिस कब एक व्यक्ति को वारण्ट के बिना गिरफ्तार कर सकती है?
a. केवल संज्ञेय अपराध के मामले में
b. केवल उद्घोषित अपराधी के मामले में
c. केवल सशस्त्र सेना का भगोड़ा
d. उपरोक्त सभी
163. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1. अवैध गिरफ्तारी से विचारण दुष्प्रभावित नहीं होता
2. अवैध गिरफ्तारी द्वारा एक संस्वीकृति अवैध नहीं होती है
3. किसी व्यक्ति को केवल पुलिस थाने में निरूद्ध किए रहना अथवा उसकी गतिविधियों को पुलिस थाने की परिसीमा के अंदर सीमित कर देना गिरफ्तारी के बराबर होता है
4. गिरफ्तारी के लिए व्यक्ति को हथकड़ी लगाया जाना आवश्यक नहीं होता, ऐसा केवल मौखिक शब्दों द्वारा संपन्न किया जा सकता है
नीचे दी गई कूट संख्याओं के आधार पर सही उत्तर का चयन करें-
कूट संख्या
a. मात्र 1 तथा 2 सही हैं
b. मात्र 1 तथा 4 सही हैं
c. मात्र 1, 2 तथा 4 सही हैं
d. 1,2,3 तथा 4 सभी सही हैं
164. निम्नलिखित कथन पर विचार कीजिए-
एक पुलिस अधिकारी को मजिस्ट्रेट के आदेश अथवा वारंट के बिना किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति है यदि उसके पास उस व्यक्ति के किसी ऐसे संज्ञेय अपराध, जो अधिकतम सात वर्षों के कारावास से दंडनीय हो, में संलिप्त होने का संदेह करने का कारण मौजूद हो, बशर्ते वह लिखित में उस कारण के प्रति सन्तुष्ट हो कि ऐसी गिरफ्तारी आवश्यक है-
1. ताकि ऐसे व्यक्ति को आगे और अपराध करने से रोका जा सके
2. अपराध के समुचित अन्वेषण के लिए
3. ऐसे व्यक्ति को साक्ष्य नष्ट करने अथवा गायब करने से रोकने के लिए
4. फरार सह-अभियुक्त को समर्पण हेतु बाध्य करने के लिए
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा कथन सही है?
a. (1) तथा (2)
b. (2) तथा (3)
c. (1), (2) तथा (3)
d. (1), (2), (3) तथा (4)
165. एक पुलिस अधिकारी को समुचित संदेह है कि 'क' एक हत्या के मामले में संलिप्त है। तो वह-
a. पुलिस अधीक्षक को सूचित कर सकता है।
b. क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट को सूचित कर सकता है।
c. ‘क' को वारंट के बिना ही गिरफ्तार कर सकता है
d. मजिस्ट्रेट से वारंट प्राप्त कर सकता है।
166. धारा 36 किससे सम्बन्धित हैं?
a. गिरफ्तारी की सूचना
b. गिरफ्तारी की प्रक्रिया और गिरफ्तारी करने वाले के कर्तव्य
c. जमानत पर छोड़ने का अधिकार
d. राज्य सरकार नियंत्रण कक्ष
167. गिरफ्तारी करते समय पुलिस अधिकारी को क्या करना आवश्यक है?
a. अपनी पहचान छुपाना
b. अपने नाम की सही, दृश्यमान और स्पष्ट पहचान धारण करना
c. गिरफ्तारी की सूचना केवल पुलिस थाने को देना
d. आरोपी को तुरंत जेल भेज देना
168. गिरफ्तारी का ज्ञापन कौन तैयार करता है?
a. मजिस्ट्रेट
b. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का परिवार
c. गिरफ्तारी करने वाला पुलिस अधिकारी
d. कोई भी व्यक्ति
169. गिरफ्तारी के ज्ञापन में क्या शामिल होना चाहिए?
a. कम से कम एक साक्षी द्वारा अनुप्रमाणन जो परिवार का सदस्य या इलाके का प्रतिष्ठित व्यक्ति हो
b. केवल गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का नाम
c. केवल पुलिस अधिकारी के हस्ताक्षर
d. गिरफ्तारी का स्थान और समय ही लिखना आवश्यक है
170. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को किन अधिकारों के बारे में सूचना दी जानी चाहिए?
a. उसे गिरफ्तारी के बारे में जानकारी देने का अधिकार
b. अपने नातेदार या मित्र को उसकी गिरफ्तारी की सूचना देने का अधिकार
c. जमानत पर छोड़ने का अधिकार
d. पुलिस की वर्दी उतारने का अधिकार
171. गिरफ्तारी के ज्ञापन को कब तक अनुप्रमाणित किया जाना चाहिए?
a. गिरफ्तारी के तुरंत बाद
b. जब तक गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार के किसी सदस्य द्वारा अनुप्रमाणित न कर दिया जाए
c. गिरफ्तारी के एक सप्ताह के भीतर
d. अनुप्रमाणन आवश्यक नहीं है
172. पदाभिहित पुलिस अधिकारी किस धारा से सम्बंधित है ?
a. धारा 34
b. धारा 35
c. धारा 36
d. धारा 37
173. राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक जिले और राज्य स्तर पर क्या स्थापित किया जाएगा?
a. एक न्यायालय
b. एक पुलिस नियंत्रण कक्ष
c. एक अस्पताल
d. एक प्रशासनिक कार्यालय
174. प्रत्येक थाना और जिले में पदाभिहित पुलिस अधिकारी का पद क्या होगा?
a. सहायक पुलिस उपनिरीक्षक या उससे ऊपर
b. पुलिस उप निरीक्षक से नीचे का कोई भी पद
c. सहायक पुलिस उप निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का नहीं होगा
d. केवल थानेदार
175. पदाभिहित पुलिस अधिकारी की मुख्य जिम्मेदारी क्या होगी?
a. गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों का नाम और पता जानना और रिकॉर्ड रखना
b. थाने की साफ-सफाई करना
c. पुलिस कर्मचारियों का वेतन देना
d. केवल अपराध का निपटारा करना
176. धारा 38 किससे सम्बंधित है?
a. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के अधिवक्ता से मिलने का अधिकार
b. गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों का नाम और पता जानना और रिकॉर्ड रखना
c. गिरफ्तारी की प्रक्रिया और गिरफ्तारी करने वाले के कर्तव्य
d. नाम और निवास बताने से इंकार करने पर गिरफ्तारी
177. धारा 39 किससे सम्बंधित है?
a. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के अधिवक्ता से मिलने का अधिकार
b. गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों का नाम और पता जानना और रिकॉर्ड रखना
c. गिरफ्तारी की प्रक्रिया और गिरफ्तारी करने वाले के कर्तव्य
d. नाम और निवास बताने से इंकार करने पर गिरफ्तारी
178. किस स्थिति में पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है?
a. जब व्यक्ति अपनी पूरी पहचान बताने में सक्षम हो
b. जब व्यक्ति पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में असंज्ञेय अपराध करता है और अपना नाम और निवास बताने से इंकार करता है या गलत नाम और निवास बताता है
c. जब व्यक्ति अपनी पहचान तुरंत बताता है
d. जब व्यक्ति किसी अन्य अपराध में संलिप्त हो
179. जब गिरफ्तारी के बाद व्यक्ति का सही नाम और निवास निर्धारित हो जाता है, तो उसे किस आधार पर छोड़ा जाएगा?
a. पुलिस अधिकारी के आदेश पर
b. बंधपत्र या जमानतपत्र पर, जिसमें वह मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होने के लिए बाध्य होगा
c. बिना किसी शर्त के
d. अदालत के आदेश पर
180. प्राइवेट व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी और ऐसी गिरफ्तारी पर प्रक्रिया किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 36
b. धारा 37
c. धारा 38
d. धारा 40
181. किस स्थिति में कोई प्राइवेट व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है?
a. जब वह व्यक्ति उसकी उपस्थिति में अजमानतीय और संज्ञेय अपराध करता है
b. जब वह व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर होता है
c. जब पुलिस अधिकारी उसकी गिरफ्तारी का आदेश देता है
d. जब व्यक्ति किसी अन्य की संपत्ति देख रहा हो
182. यदि पुलिस अधिकारी अनुपस्थित हो, तो प्राइवेट व्यक्ति क्या कर सकता है?
a. व्यक्ति को तुरंत छोड़ सकता है
b. उसे निकटतम पुलिस थाने में अभिरक्षा में ले जा सकता है या भेज सकता है
c. उसे न्यायालय में पेश कर सकता है
d. उसे घर छोड़ सकता है
183. यदि प्राइवेट व्यक्ति को विश्वास हो कि गिरफ्तार व्यक्ति धारा 35(1) के अंतर्गत आता है, तो पुलिस अधिकारी क्या करेगा?
a. उसे छोड़ देगा
b. उसे अभिरक्षा में लेगा
c. उसे जमानत पर छोड़ देगा
d. उसे सीधे अदालत में पेश करेगा
184. यदि विश्वास करने का कारण नहीं है कि गिरफ्तार व्यक्ति ने अपराध किया है, तो क्या होगा?
a. उसे गिरफ्तारी के 24 घंटे में छोड़ा जाएगा
b. वह तुरंत छोड़ दिया जाएगा
c. उसे पुलिस हिरासत में रखा जाएगा
d. उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा
185. प्राइवेट व्यक्ति द्वारा गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को कितने समय के भीतर पुलिस अधिकारी को सौंपना आवश्यक है?
a. 12 घंटे के भीतर
b. 24 घंटे के भीतर
c. 6 घंटे के भीतर
d. 48 घंटे के भीतर
186. धारा 41 किससे सम्बंधित है?
a. मजिस्ट्रेट द्वारा गिरफ्तारी
b. गिरफ्तारी कैसे की जाएगी
c. सशस्त्र बलों के सदस्यों का गिरफ्तारी से संरक्षण
d. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के अधिवक्ता से मिलने का अधिकार
187. जब कार्यपालक या न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में उसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर कोई अपराध होता है, तो वह क्या कर सकता है?
a. केवल पुलिस को आदेश दे सकता है
b. स्वयं अपराधी को गिरफ्तार कर सकता है या किसी अन्य को गिरफ्तार करने का आदेश दे सकता है
c. केवल जमानत पर छोड़ सकता है
d. केवल न्यायालय में मामला दर्ज कर सकता है
188. क्या कार्यपालक या न्यायिक मजिस्ट्रेट अपनी स्थानीय अधिकारिता के बाहर भी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है?
a. हाँ, किसी भी स्थान पर
b. नहीं, केवल अपनी स्थानीय अधिकारिता के भीतर
c. केवल न्यायालय के आदेश पर
d. केवल पुलिस अधिकारी के अनुरोध पर
189. सशस्त्र बलों के किसी सदस्य को उसके पदीय कर्तव्यों का निर्वहन करते समय गिरफ्तारी से कब तक संरक्षण मिलेगा?
a. किसी भी हालत में
b. जब तक केंद्रीय सरकार की सहमति नहीं ले ली जाती
c. जब तक राज्य सरकार की अनुमति नहीं मिलती
d. गिरफ्तारी से कोई संरक्षण नहीं है
190. कौन सी धाराएं सशस्त्र बलों के सदस्यों की गिरफ्तारी से संबंधित नियमों को प्रभावित करती हैं?
a. धारा 10 और 20
b. धारा 35, 39 से 41 (दोनों सहित)
c. धारा 50 और 60
d. धारा 5 से 15
191. गिरफ्तारी कैसे की जाएगी किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 43
b. धारा 44
c. धारा 45
d. धारा 46
192. गिरफ्तारी करते समय पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति को सामान्यतः क्या करना चाहिए?
a. गिरफ्तारी का वारंट दिखाना
b. आरोपी के परिवार को सूचित करना
c. आरोपी के शरीर को छूना या परिरुद्ध करना
d. न्यायालय की अनुमति प्राप्त करना
193. महिला की गिरफ्तारी के संबंध में निम्न में से कौन-सा कथन सही है?
a. महिला को कभी गिरफ्तार नहीं किया जा सकता
b. महिला को पुरुष पुलिस अधिकारी गिरफ्तार कर सकता है
c. महिला की गिरफ्तारी पर, मौखिक सूचना के बाद समर्पण की उपधारणा की जाती है
d. महिला को केवल न्यायालय के आदेश से गिरफ्तार किया जा सकता है
194. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की निम्नलिखित धाराओं में से कौन सी धारा पुरुष पुलिस अधिकारी को किसी महिला को गिरफ्तार करने के दौरान उसे स्पर्श करने से प्रतिबंधित करती है?
a. धारा 41(1) का परन्तुक
b. धारा 42(2) का परन्तुक
c. धारा 43(1) का परन्तुक
d. उपरोक्त में से कोई नहीं
195. सामान्य रूप से महिला की गिरफ्तारी सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले नहीं की जाएगी, जब तक कि:
a. महिला आरोपी हो
b. उसका नाम प्राथमिकी में न हो
c. असाधारण परिस्थितियों में प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति न हो
d. वह गिरफ्तारी से मना न कर दे
196. पुलिस अधिकारी गिरफ्तारी के समय हथकड़ी का प्रयोग किस परिस्थिति में कर सकता है?
a. जब गिरफ्तार व्यक्ति कोई भी अपराधी हो
b. जब गिरफ्तार व्यक्ति अभ्यासिक, संगठित अपराध या गंभीर अपराधों में लिप्त हो
c. जब न्यायालय कहे
d. जब आरोपी महिला हो
197. यदि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध का अभियुक्त नहीं है, तो मृत्यु देने का अधिकार नहीं देती है, सम्बंधित है-
a. धारा 43(4)
b. धारा 43(6)
c. धारा 43(5)
d. धारा 43(3)
198. उस स्थान की तलाशी जिसमें ऐसा व्यक्ति प्रविष्ट हुआ है जिसकी गिरफ्तारी की जानी है, किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 41
b. धारा 42
c. धारा 43
d. धारा 44
199. यदि यह विश्वास करने का कारण है कि गिरफ्तारी किया जाने वाला व्यक्ति किसी स्थान में है, तो उस स्थान पर रहने वाला व्यक्ति क्या करने के लिए बाध्य है?
a. तुरंत पुलिस को गिरफ्तार व्यक्ति का पता बताए
b. बिना तलाशी के व्यक्ति को पुलिस को सौंप दे
c. पुलिस को अबाध प्रवेश और तलाशी की सुविधा दे
d. मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना किसी को प्रवेश न करने दे
200. क्या एक पुलिस अधिकारी किसी अपराधी का पीछा अपनी स्थानीय अधिकारिता क्षेत्र से बाहर कर सकता है?
a. नहीं, केवल अपने क्षेत्र में कर सकता है
b. हाँ, लेकिन मजिस्ट्रेट की अनुमति से
c. हाँ, पूरे भारत में पीछा कर सकता है
d. केवल राज्य के भीतर पीछा कर सकता है
201. धारा 45 के अंतर्गत पीछा करने का अधिकार किस क्षेत्र में लागू होता है?
a. केवल ग्रामीण क्षेत्रों में
b. केवल उस राज्य में जहाँ अधिकारी नियुक्त है
c. भारत के किसी भी स्थान में
d. केवल पुलिस थाना क्षेत्र में
202. अनावश्यक अवरोध न करना किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 45
b. धारा 46
c. धारा 47
d. धारा 48
203. धारा 46 के अनुसार गिरफ्तार व्यक्ति को कितना अवरुद्ध (restrained) किया जा सकता है?
a. जितना पुलिस अधिकारी उचित समझे
b. कोई भी अवरोध नहीं किया जा सकता
c. जितना आवश्यक हो उसे दंडित करने के लिए
d. केवल उतना ही, जितना उसे निकल भागने से रोकने के लिए आवश्यक हो
204. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधारों और जमानत के अधिकार की सूचना दिया जाना किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 48
b. धारा 47
c. धारा 49
d. धारा 46
205. धारा 48 किससे सम्बंधित है?
a. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधारों और जमानत के अधिकार की सूचना दिया जाना
b. गिरफ्तारी करने वाले व्यक्ति की, गिरफ्तारी आदि के बारे में, नातेदार या मित्र को जानकारी देने की बाध्यता
c. गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की तलाशी
d. आक्रामक आयुध का अभिग्रहण करने की शक्ति
206. धारा 48 के अनुसार, गिरफ्तार करने वाला पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति किसे गिरफ्तारी की सूचना देगा?
a. केवल मजिस्ट्रेट को
b. केवल गिरफ्तार व्यक्ति के वकील को
c. गिरफ्तार व्यक्ति के मित्र/नातेदार/नामित व्यक्ति और जिले के पदाभिहित पुलिस अधिकारी को
d. किसी को भी नहीं
207. गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की तलाशी किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 46
b. धारा 47
c. धारा 49
d. धारा 48
208. गिरफ्तारी के समय जब कोई वस्तु पुलिस द्वारा कब्जे में ली जाती है, तो गिरफ्तार व्यक्ति को क्या दिया जाता है?
a. चेतावनी
b. जेल वर्दी
c. जमानत प्रपत्र
d. वस्तुओं की रसीद
209. आक्रामक आयुध का अभिग्रहण करने की शक्ति किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 52
b. धारा 51
c. धारा 50
d. धारा 53
210. अभियुक्त की शारीरिक परीक्षा किस स्तर के पुलिस अधिकारी की प्रार्थना पर की जा सकती है?
a. किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा
b. निरीक्षक से नीचे के अधिकारी द्वारा
c. उप निरीक्षक या उससे ऊपर के अधिकारी द्वारा
d. कांस्टेबल द्वारा
211. पुलिस अधिकारी की प्रार्थना पर चिकित्सा - व्यवसायी द्वारा अभियुक्त की परीक्षा किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 52
b. धारा 51
c. धारा 50
d. धारा 53
212. बलात्संग के अपराधी व्यक्ति की चिकित्सा- व्यवसायी द्वारा परीक्षा किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 52
b. धारा 53
c. धारा 54
d. धारा 55
213. बलात्संग या बलात्संग के प्रयत्न के आरोपी व्यक्ति की चिकित्सा परीक्षा कौन कर सकता है?
a. कोई भी डॉक्टर
b. निजी क्लिनिक का डॉक्टर
c. सरकार या स्थानीय प्राधिकरण द्वारा संचालित अस्पताल में नियोजित रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी
d. आरोपी का निजी डॉक्टर
214. पुलिस अधिकारी की किस न्यूनतम पंक्ति से नीचे का अधिकारी बलात्संग के आरोपी की परीक्षा के लिए अनुरोध नहीं कर सकता?
a. कांस्टेबल
b. सहायक उप निरीक्षक
c. उप निरीक्षक
d. निरीक्षक
215. यदि सरकारी अस्पताल का रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी अनुपस्थित है, तो परीक्षा कौन कर सकता है?
a. कोई भी डॉक्टर
b. कोई भी नर्स
c. सोलह किलोमीटर की परिधि में उपलब्ध रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी
d. आरोपी स्वयं
216. रिपोर्ट में कौन सी जानकारी शामिल की जानी चाहिए?
a. सिर्फ अभियुक्त का नाम
b. सिर्फ चोट के निशान
c. नाम, पता, आयु, चोटों का विवरण, डीएनए सामग्री आदि
d. केवल पुलिस की राय
217. परीक्षा की रिपोर्ट में परीक्षा शुरू करने और समाप्त करने का समय लिखना...
a. वैकल्पिक होता है
b. आवश्यक नहीं होता
c. केवल गंभीर मामलों में आवश्यक होता है
d. अनिवार्य होता है
218. अन्वेषण अधिकारी रिपोर्ट को किस धारा के अंतर्गत मजिस्ट्रेट को भेजेगा?
a. धारा 154
b. धारा 200
c. धारा 193
d. धारा 167
219. धारा 53 किससे सम्बंधित है?
a. पुलिस अधिकारी की प्रार्थना पर चिकित्सा- व्यवसायी द्वारा अभियुक्त की परीक्षा
b. बलात्संग के अपराधी व्यक्ति की चिकित्सा- व्यवसायी द्वारा परीक्षा
c. गिरफ्तार व्यक्ति की चिकित्सा अधिकारी द्वारा परीक्षा
d. गिरफ्तार व्यक्ति की शिनाख्त
220. गिरफ्तारी के तुरंत बाद व्यक्ति की परीक्षा किसके द्वारा की जानी चाहिए?
a. मजिस्ट्रेट द्वारा
b. पुलिस अधिकारी द्वारा
c. केंद्रीय या राज्य सरकार के सेवाधीन चिकित्सा अधिकारी द्वारा
d. नर्स द्वारा
221. यदि सरकारी चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध नहीं है, तो परीक्षा कौन कर सकता है?
a. पुलिस उपनिरीक्षक
b. रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी
c. मजिस्ट्रेट
d. गवाह
222. यदि चिकित्सा अधिकारी को यह लगता है कि दोबारा परीक्षण की आवश्यकता है, तो क्या वह ऐसा कर सकता है?
a. नहीं, उसे अनुमति लेनी होगी
b. केवल कोर्ट के आदेश से
c. हां, वह दोबारा परीक्षा कर सकता है
d. नहीं, एक बार की परीक्षा ही अंतिम होती है
223. यदि गिरफ्तार व्यक्ति महिला है, तो उसकी शरीर की परीक्षा किसके द्वारा की जानी चाहिए?
a. कोई भी डॉक्टर
b. महिला पुलिस अधिकारी
c. केवल महिला चिकित्सा अधिकारी या रजिस्ट्रीकृत महिला चिकित्सा व्यवसायी द्वारा
d. मजिस्ट्रेट द्वारा
224. परीक्षा रिपोर्ट में क्या विवरण दिया जाएगा?
a. आरोपी का अपराध
b. उसकी संपत्ति का विवरण
c. शरीर पर क्षति या हिंसा के चिह्न और उनका अनुमानित समय
d. गवाहों की सूची
225. परीक्षा रिपोर्ट की प्रति किसे दी जानी चाहिए?
a. केवल मजिस्ट्रेट को
b. किसी को नहीं दी जाती
c. गिरफ्तार व्यक्ति या उसके द्वारा नामित किसी व्यक्ति को
d. पीड़िता को
226. परीक्षा किस समय होनी चाहिए?
a. एक सप्ताह के अंदर
b. जब भी पुलिस अधिकारी कहे
c. गिरफ्तार किए जाने के तुरंत पश्चात्
d. जब कोर्ट आदेश दे
227. गिरफ्तार व्यक्ति की शिनाख्त किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 51
b. धारा 52
c. धारा 53
d. धारा 54
228. शिनाख्त प्रक्रिया का आरंभ किसके निवेदन पर किया जाता है?
a. अभियुक्त के वकील के निवेदन पर
b. पीड़िता के अनुरोध पर
c. पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के निवेदन पर
d. स्वयं मजिस्ट्रेट की मर्जी से
229. यदि शिनाख्त करने वाला व्यक्ति मानसिक या शारीरिक रूप से निःशक्त है, तो शिनाख्त प्रक्रिया किसके पर्यवेक्षण में होगी?
a. पुलिस अधीक्षक के
b. चिकित्सक के
c. मजिस्ट्रेट के
d. वकील के
230. शिनाख्त प्रक्रिया को किस विधि से अभिलिखित किया जाना आवश्यक है?
a. केवल लिखित रूप में
b. CCTV द्वारा
c. श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों द्वारा
d. गवाहों की मौखिक सूचना द्वारा
231. धारा 55 किससे सम्बंधित है?
a. गिरफ्तार व्यक्ति की शिनाख्त
b. जब पुलिस अधिकारी वारंट के बिना गिरफ्तार करने के लिए अपने अधीनस्थ प्रतिनियुक्त करता है तब प्रक्रिया
c. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का मजिस्ट्रेट या पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी समक्ष ले जाया जाना
d. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का चौबीस घंटे से अधिक निरुद्ध न किया जाना
232. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का स्वास्थ्य और सुरक्षा किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 59
b. धारा 58
c. धारा 57
d. धारा 56
233. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का मजिस्ट्रेट या पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी समक्ष ले जाया जाना किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 56
b. धारा 59
c. धारा 57
d. धारा 58
234. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का चौबीस घंटे से अधिक निरुद्ध न किया जाना किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 56
b. धारा 59
c. धारा 57
d. धारा 58
235. धारा 58 के अनुसार, कोई पुलिस अधिकारी वारंट के बिना गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को अधिकतम कितने समय तक अभिरक्षा में रख सकता है?
a. 12 घंटे
b. 24 घंटे
c. 48 घंटे
d. जब तक मजिस्ट्रेट आदेश न दे
236. धारा 58 के अनुसार, 24 घंटे से अधिक निरुद्ध रखने के लिए किसका विशेष आदेश आवश्यक है?
a. पुलिस अधीक्षक का आदेश धारा 185 के अधीन
b. मजिस्ट्रेट का आदेश धारा 187 के अधीन
c. पुलिस थाने के प्रभारी का आदेश धारा 186 के अधीन
d. राज्य सरकार का आदेश
237. पुलिस का गिरफ्तारियों की रिपोर्ट करना किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 56
b. धारा 59
c. धारा 57
d. धारा 58
238. धारा 60 किससे सम्बंधित है?
a. पुलिस का गिरफ्तारियों की रिपोर्ट करना
b. पकड़े गए व्यक्ति का उन्मोचन
c. निकल भागने पर पीछा करने और फिर पकड़ लेने की शक्ति
d. गिरफ्तारी का सर्वथा संहिता के अनुसार ही किया जाना
239. पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तार व्यक्ति का उन्मोचन कब किया जा सकता है?
a. केवल उसके बंधपत्र या जमानतपत्र पर
b. बिना किसी बंधपत्र के भी कर सकता है
c. केवल मजिस्ट्रेट के आदेश पर
d. (a) और (c) दोनों सही हैं
240. धारा 60 के अनुसार, निम्न में से कौन सही है?
a. पुलिस अधिकारी स्वयं निर्णय लेकर किसी भी समय गिरफ्तार व्यक्ति को छोड़ सकता है
b. केवल मजिस्ट्रेट के विशेष आदेश या व्यक्ति के बंधपत्र/जमानतपत्र पर ही उन्मोचन होगा
c. केवल बंधपत्र पर ही उन्मोचन हो सकता है, मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत नहीं
d. मजिस्ट्रेट का आदेश लेने की कोई आवश्यकता नहीं
241. धारा 61 किससे सम्बंधित है?
a. गिरफ्तारी का सर्वथा संहिता के अनुसार ही किया जाना
b. पुलिस का गिरफ्तारियों की रिपोर्ट करना
c. पकड़े गए व्यक्ति का उन्मोचन
d. निकल भागने पर पीछा करने और फिर पकड़ लेने की शक्ति
242. यदि एक व्यक्ति विधि पूर्ण अभिरक्षा से भाग जाता हैं। तो जिस व्यक्ति की अभिरक्षा से वह भागता है वह तुरंत उसका पीछा कर सकता है और उसे गिरफ्तार कर सकता है-
a. सम्बन्धित पुलिस थाने की स्थानीय सीमाओं के अंदर
b. जिले की स्थानीय सीमाओं के अंदर
c. राज्य की स्थानीय सीमाओं के अंदर
d. भारत में किसी भी स्थान से
243. धारा 61 के तहत, पीछा करके पकड़ी गई गिरफ्तारी पर कौन-से प्रावधान लागू होंगे?
a. धारा 44 के उपबंध
b. धारा 35 के उपबंध
c. धारा 50 के उपबंध
d. कोई प्रावधान लागू नहीं होगा
244. गिरफ्तारी का सर्वथा संहिता के अनुसार ही किया जाना, किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 63
b. धारा 62
c. धारा 65
d. धारा 66
245. हाजिर होने को विवश करने के लिए आदेशिकाएं किस अध्याय में वर्णित है?
a. अध्याय 4
b. अध्याय 5
c. अध्याय 6
d. अध्याय 7
246. समन का प्ररूप किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 62
b. धारा 65
c. धारा 66
d. धारा 63
247. न्यायालय द्वारा जारी समन किस रूप में होना चाहिए?
a. मौखिक रूप में
b. लिखित रूप में और दो प्रतियों में
c. केवल इलेक्ट्रॉनिक रूप में
d. पुलिस अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित
248. समन पर किसकी मुहर या हस्ताक्षर होने चाहिए?
a. केवल पुलिस अधिकारी के
b. न्यायालय के पीठासीन अधिकारी या उच्च न्यायालय द्वारा निदिष्ट अन्य अधिकारी के हस्ताक्षर और न्यायालय की मुहर
c. केवल डिजिटल हस्ताक्षर
d. किसी भी अधिकारी के हस्ताक्षर
249. समन के गूढ़लेखित या इलेक्ट्रॉनिक रूप में होने पर क्या आवश्यक होगा?
a. कोई मुहर या हस्ताक्षर आवश्यक नहीं
b. न्यायालय की मुहर या डिजिटल हस्ताक्षर होना आवश्यक है
c. केवल पुलिस अधिकारी के हस्ताक्षर आवश्यक हैं
d. समन को मान्य नहीं माना जाएगा
250. समन की तामीली से सम्बंधित धारा कौन सी है?
a. धारा 64
b. धारा 65
c. धारा 66
d. धारा 63
251. समन की तामील कौन कर सकता है?
a. केवल पुलिस अधिकारी
b. पुलिस अधिकारी, न्यायालय के अधिकारी या अन्य लोक सेवक जो राज्य सरकार के नियमों के अधीन हों
c. केवल न्यायाधीश
d. आरोपी का वकील
252. राज्य सरकार किस चीज़ का रजिस्टर रखेगी?
a. गिरफ्तारी की तारीख
b. पुलिस थाना या न्यायालय का पता, ई-मेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण
c. जमानत राशि
d. अदालत के फैसले
253. समन की वैयक्तिक तामील से सम्बंधित उपबंध है?
a. धारा 64(1)
b. धारा 64(1) परंतु
c. धारा 64(2)
d. धारा 63(2) परंतु
254. समन की तामील वैयक्तिक रूप से कैसे की जाएगी?
a. आरोपी को समन की एक प्रति दे कर
b. आरोपी को समन की दो प्रतियों में से एक का परिदान या निविदान करके
c. आरोपी को समन दिखाए बिना
d. न्यायाधीश की उपस्थिति में
255. इलैक्ट्रॉनिक सूचना द्वारा समन की तामील कब संभव है?
a. जब न्यायालय की मुहर लगा हो और राज्य सरकार के नियमों के अनुसार हो
b. केवल जब आरोपी ऑनलाइन हो
c. जब पुलिस अधिकारी अनुमति दे
d. इलैक्ट्रॉनिक सूचना द्वारा तामील संभव नहीं है
256. समन प्राप्त करने वाले व्यक्ति से क्या अपेक्षा की जा सकती है?
a. समन के संबंध में अपनी राय देना
b. दूसरी प्रति के पृष्ठ भाग पर हस्ताक्षर कर रसीद देना
c. पुलिस के खिलाफ शिकायत दर्ज कराना
d. कोई हस्ताक्षर देने की आवश्यकता नहीं
257. निगमित निकायों, फर्मों और सोसाइटियों पर समन की तामील से सम्बंधित उपबंध है—
a. धारा 66
b. धारा 64
c. धारा 65
d. धारा 63
258. कंपनी या निगम पर समन की तामील किसे करके की जा सकती है?
a. कंपनी के ग्राहक को
b. कंपनी या निगम के निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी को
c. कंपनी के किसी कर्मचारी को
d. कंपनी के शेयरधारकों को
259. जब समन किए गए व्यक्ति न मिल सकें तब तामील किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 64
b. धारा 65
c. धारा 66
d. धारा 63
260. यदि समन किए गए व्यक्ति सम्यक् तत्परता बरतने पर भी नहीं मिल पाते, तो समन की तामील किसके पास की जा सकती है?
a. पड़ोसी के पास
b. उसके कुटुंब के उसके साथ रहने वाले किसी वयस्क पुरुष सदस्य के पास
c. किसी भी अजनबी के पास
d. समन की तामील नहीं की जा सकती
261. स्थानीय सीमाओं के बाहर समन की तामील किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 64
b. धारा 68
c. धारा 67
d. धारा 69
262. जब न्यायालय चाहता है कि समन उसकी स्थानीय अधिकारिता के बाहर किसी स्थान पर तामील किया जाए, तो वह क्या करेगा?
a. समन की दो प्रतियां पुलिस को भेजेगा
b. समन की दो प्रतियां उस मजिस्ट्रेट को भेजेगा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर तामील होनी है
c. समन को वापस ले लेगा
d. समन को स्वयं उस व्यक्ति को भेजेगा
263. ऐसे मामलों में और जब तामील करने वाला अधिकारी उपस्थित न हो तब तामील का सबूत किससे सम्बंधित हैं?
a. धारा 69
b. धारा 73
c. धारा 72
d. धारा 71
264. जब समन की तामील न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता के बाहर होती है और तामील करने वाला अधिकारी सुनवाई के समय उपस्थित नहीं होता, तो क्या साक्ष्य माना जाएगा?
a. समन की प्रति बिना किसी प्रमाण के स्वीकार नहीं की जाएगी
b. मजिस्ट्रेट के समक्ष तात्पर्यित शपथपत्र और समन की दूसरी प्रति पृष्ठांकित होना साक्ष्य में मान्य होगा
c. तामील रद्द माना जाएगा
d. मामले को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा
265. धारा 70 के अनुसार, तामील के प्रमाण के रूप में क्या संलग्न किया जा सकता है?
a. न्यायालय का आदेश
b. शपथपत्र समन की दूसरी प्रति से संलग्न करके न्यायालय को भेजा जा सकता है
c. गिरफ्तारी वारंट
d. कोई दस्तावेज संलग्न नहीं किया जाता
266. धारा 64 से धारा 71 के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक संसूचना के माध्यम से तामील किए गए समन कैसे माने जाएंगे?
a. अस्वीकार्य और अवैध
b. केवल न्यायालय के विशेष आदेश पर मान्य
c. सम्यक् रूप से तामील किए गए समझे जाएंगे और उनकी एक प्रमाणित प्रति रखी जाएगी
d. केवल पुलिस अधिकारी के आदेश पर मान्य
267. धारा 71 किससे सम्बंधित हैं?
a. साक्षी पर समन की तामील
b. स्थानीय सीमाओं के बाहर समन की तामील
c. सरकारी सेवक पर तामील
d. जब समन किए गए व्यक्ति न मिल सकें तब तामील
268. न्यायालय किस प्रकार से साक्षी पर समन की तामील कर सकता है?
a. केवल हाथ से हस्ताक्षर कराकर
b. केवल साक्षी को व्यक्तिगत रूप से समन देकर
c. समन की एक प्रति साक्षी पर, इलैक्ट्रानिक संसूचना द्वारा या रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा उस स्थान पर तामील करके
d. केवल मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होकर
269. अगर साक्षी समन लेने से इंकार करता है, तो न्यायालय किस आधार पर समन की तामील को सम्यक् घोषित कर सकता है?
a. साक्षी की गैर-मौजूदगी में
b. साक्षी द्वारा हस्ताक्षर की गई तात्पर्यित अभिस्वीकृति या डाक कर्मचारी द्वारा किया गया तात्पर्यित पृष्ठांकन प्राप्त होने पर
c. पुलिस अधिकारी के बयान पर
d. कोई तामील नहीं मानी जाएगी
270. धारा 72 किससे सम्बंधित हैं?
a. स्थानीय सीमाओं के बाहर समन की तामील
b. सरकारी सेवक पर तामील
c. जब समन किए गए व्यक्ति न मिल सकें तब तामील
d. गिरफ्तारी के वारंट का प्ररूप और अवधि
271. गिरफ्तारी का वारंट किस रूप में जारी किया जाता है?
a. मौखिक रूप में
b. लिखित रूप में, न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित और न्यायालय की मुद्रा लगी हुई
c. केवल डिजिटल फॉर्म में
d. पुलिस अधिकारी द्वारा जारी किया गया
272. गिरफ्तारी के वारंट की वैधता कब तक रहती है?
a. केवल 30 दिनों तक
b. जब तक उसे जारी करने वाला न्यायालय रद्द न कर दे या जब तक वारंट निष्पादित न हो जाए
c. एक वर्ष तक
d. जब तक अभियुक्त गिरफ्तार न हो
273. प्रतिभूति लिए जाने का निदेश देने की शक्ति किससे सम्बंधित हैं?
a. धारा 75
b. धारा 74
c. धारा 73
d. धारा 72
274. प्रतिभूति के पृष्ठांकन में निम्नलिखित में से क्या शामिल होना चाहिए?
a. प्रतिभुओं की संख्या, राशि, और अदालत में हाजिरी का समय
b. गिरफ्तारी की तारीख और स्थान
c. अभियुक्त का नाम और पता
d. वारंट जारी करने वाले न्यायालय का नाम
275. वारंट किसको निदिष्ट होंगे किससे सम्बंधित हैं?
a. धारा 73
b. धारा 74
c. धारा 72
d. धारा 75
276. गिरफ्तारी का वारंट सामान्यतः किसे निदिष्ट किया जाता है?
a. न्यायाधीश
b. एक या अधिक पुलिस अधिकारियों को
c. अभियुक्त को
d. कोई भी सरकारी कर्मचारी
277. यदि वारंट का तुरंत निष्पादन आवश्यक हो और कोई पुलिस अधिकारी तुरंत उपलब्ध न हो तो न्यायालय क्या कर सकता है?
a. वारंट रद्द कर सकता है
b. वारंट को किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों को निदिष्ट कर सकता है
c. अभियुक्त को जमानत दे सकता है
d. वारंट को सार्वजनिक कर सकता है
278. वारंट किसी भी व्यक्ति को निदिष्ट हो सकेंगे किससे सम्बंधित हैं?
a. धारा 73
b. धारा 74
c. धारा 72
d. धारा 75
279. किस न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के पास किसी निकल भागे सिद्धदोष, उद्घोषित अपराधी या अजमानतीय अपराध के अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करने का अधिकार होता है?
a. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
b. उच्च न्यायालय
c. जिला न्यायालय
d. किसी भी मजिस्ट्रेट
280. पुलिस अधिकारी को निदिष्ट वारंट किससे सम्बंधित हैं?
a. धारा 76
b. धारा 77
c. धारा 78
d. धारा 79
281. धारा 77 से सम्बंधित उपबंध है-
a. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का न्यायालय के समक्ष अविलम्ब लाया जाना
b. पुलिस अधिकारी को निदिष्ट वारंट
c. वारंट के सार की सूचना
d. वारंट कहां निष्पादित किया जा सकता है
282. जब गिरफ्तारी के लिए वारंट का निष्पादन किया जाता है, तो पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति को क्या करना आवश्यक है?
a. गिरफ्तार व्यक्ति को वारंट की पूरी प्रति देना
b. गिरफ्तार व्यक्ति को वारंट का सार सूचित करना
c. गिरफ्तारी के बाद वारंट को न्यायालय में जमा करना
d. गिरफ्तार व्यक्ति को बिना सूचना के हिरासत में लेना
283. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का न्यायालय के समक्ष अविलम्ब लाया जाना किस धारा से सम्बंधित हैं
a. धारा 78
b. धारा 77
c. धारा 76
d. धारा 75
284. पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी के बाद गिरफ्तार व्यक्ति को कब न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होता है?
a. 48 घंटों के भीतर
b. अनावश्यक विलंब के बिना, लेकिन चौबीस घंटे के भीतर
c. जब भी न्यायालय आदेश दे
d. गिरफ्तारी के बाद एक सप्ताह के भीतर
285. धारा 78 के तहत, गिरफ्तारी के वारंट के निष्पादन करने वाले व्यक्ति को किसके अधीन रहना होगा?
a. धारा 44 के तहत
b. धारा 73 के प्रतिभूति संबंधी उपबंधों के अधीन
c. पुलिस अधिनियम के अधीन
d. कोई विशेष अधीनता नहीं
286. वारंट कहां निष्पादित किया जा सकता है किस धारा से सम्बंधित हैं?
a. धारा 78
b. धारा 77
c. धारा 76
d. धारा 79
287. गिरफ्तारी का वारंट कहाँ निष्पादित किया जा सकता है?
a. केवल वारंट जारी करने वाले न्यायालय के क्षेत्र में
b. केवल उसी राज्य में जहाँ वारंट जारी हुआ हो
c. भारत के किसी भी स्थान में
d. केवल पुलिस थाने की स्थानीय सीमा में
288. अधिकारिता के बाहर निष्पादन के लिए भेजा गया वारंट किस धारा से सम्बंधित हैं?
a. धारा 80
b. धारा 77
c. धारा 76
d. धारा 79
289. जब वारंट का निष्पादन जारी करने वाले न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता के बाहर किया जाना हो, तो वह वारंट किसे भेज सकता है?
a. केवल पुलिस अधिकारी को
b. केवल वारंट जारी करने वाले न्यायालय के रजिस्ट्रार को
c. कार्यपालक मजिस्ट्रेट, जिला पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त को
d. गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को
290. धारा 81 किससे सम्बंधित हैं?
a. अधिकारिता के बाहर निष्पादन के लिए भेजा गया वारंट
b. जिस व्यक्ति के विरुद्ध वारंट जारी किया गया है, उसके गिरफ्तार होने पर प्रक्रिया
c. उस मजिस्ट्रेट द्वारा प्रक्रिया जिसके समक्ष ऐसे गिरफ्तार किया गया व्यक्ति लाया जाए
d. अधिकारिता के बाहर निष्पादन के लिए पुलिस अधिकारी को निदिष्ट वारंट
291. जब पुलिस अधिकारी को निदिष्ट वारंट का निष्पादन जारी करने वाले न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता के बाहर करना हो, तो उसे पृष्ठांकन के लिए किसके पास ले जाना होगा?
a. उस न्यायालय के प्रधान सचिव के पास
b. कार्यपालक मजिस्ट्रेट या पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी से निम्न पंक्ति के पुलिस अधिकारी के पास
c. गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार के सदस्य के पास
d. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास
292. कब पुलिस अधिकारी बिना पृष्ठांकन के स्थानीय अधिकारिता के बाहर वारंट का निष्पादन कर सकता है?
a. जब पुलिस अधिकारी का कार्यभार कम हो
b. जब उस मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी के पृष्ठांकन में विलंब हो और निष्पादन संभव न हो
c. जब न्यायालय विशेष आदेश दे
d. जब गिरफ्तार व्यक्ति की मंशा हो
293. जिस व्यक्ति के विरुद्ध वारंट जारी किया गया है, उसके गिरफ्तार होने पर प्रक्रिया किस धारा से सम्बंधित हैं?
a. धारा 80
b. धारा 81
c. धारा 82
d. धारा 83
294. जब गिरफ्तारी का वारंट उस जिले से बाहर निष्पादित किया जाता है, तो गिरफ्तारी के बाद गिरफ्तार व्यक्ति को किसके समक्ष ले जाया जाएगा?
a. वारंट जारी करने वाले न्यायालय के किसी भी मजिस्ट्रेट के समक्ष
b. उस न्यायालय के समक्ष जो गिरफ्तारी के स्थान से 30 किलोमीटर के अंदर हो, या संबंधित कार्यपालक मजिस्ट्रेट/जिला पुलिस अधीक्षक/पुलिस आयुक्त के समक्ष
c. स्थानीय पुलिस थाने के प्रभारी के समक्ष
d. उच्च न्यायालय के समक्ष
295. गिरफ्तारी के बाद पुलिस अधिकारी किन अधिकारियों को तुरंत जानकारी देगा?
a. केवल उस जिले के पुलिस अधीक्षक को
b. गिरफ्तारी वाले जिले के पदाधिकारियों और उस जिले के पुलिस अधिकारी को जहां व्यक्ति सामान्यतया निवास करता है
c. केवल न्यायालय को
d. कोई जानकारी देने की आवश्यकता नहीं है
296. वारंट का निष्पादन न हो सकने पर न्यायालय किस धारा के अंतर्गत आगे कार्यवाही कर सकता है?
a. धारा 83 एवं 84
b. धारा 84 एवं 85
c. धारा 81 एवं 82
d. धारा 80 एवं 81
297. उस मजिस्ट्रेट द्वारा प्रक्रिया जिसके समक्ष ऐसे गिरफ्तार किया गया व्यक्ति लाया जाए किस धारा से सम्बंधित हैं?
a. धारा 80
b. धारा 81
c. धारा 82
d. धारा 83
298. यदि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति वही प्रतीत होता है जो वारंट जारी करने वाले न्यायालय द्वारा आशयित है, तो कार्यपालक मजिस्ट्रेट या जिला पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त क्या करेंगे?
a. उसे तुरंत जमानत पर छोड़ देंगे
b. उसे उस न्यायालय के पास अभिरक्षा में भेजने का निदेश देंगे
c. उसे बिना किसी प्रक्रिया के रिहा कर देंगे
d. गिरफ्तारी को निरस्त कर देंगे
299. अगर अपराध जमानतीय है और व्यक्ति जमानत देने को तैयार है, तो क्या किया जाएगा?
a. उसे बिना जमानत के हिरासत में रखा जाएगा
b. उसे जमानतपत्र या प्रतिभूति लेकर यथास्थिति छोड़ा जाएगा और बंधपत्र न्यायालय को भेजा जाएगा
c. उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा
d. कोई कार्रवाई नहीं होगी
300. यदि अपराध अजमानतीय है, तो किस न्यायाधीश के लिए गिरफ्तारी के बाद व्यक्ति को छोड़ना विधिपूर्ण होगा?
a. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या उस जिले का सेशन न्यायाधीश जहाँ गिरफ्तारी हुई है
b. उच्च न्यायालय
c. जिला मजिस्ट्रेट
d. पुलिस अधीक्षक
301. निम्नलिखित धाराओं के समूहों में से किस का सम्बन्ध उद्घोषणा तथा कुर्की से है?
a. धारा 88 से 85
b. धारा 82 से 90
c. धारा 80 से 80
d. धारा 84 से 85
302. यदि न्यायालय को विश्वास हो कि कोई व्यक्ति फरार है और वारंट निष्पादित नहीं हो पा रहा, तो न्यायालय क्या कर सकता है?
a. उस व्यक्ति की गिरफ्तारी का आदेश तुरंत देगा
b. उस व्यक्ति के लिए लिखित उद्घोषणा प्रकाशित कर सकता है जिसमें हाजिरी का समय और स्थान बताए गए हों
c. उस व्यक्ति को जमानत पर छोड़ सकता है
d. उस व्यक्ति के विरुद्ध मामला बंद कर सकता है
303. धारा 84 के अंतर्गत जारी उद्घोषणा के लिए हाजिरी की न्यूनतम अवधि क्या है-
a. 15 दिन
b. 30 दिन
c. 60 दिन
d. 90 दिन
304. उद्घोषणा निम्नलिखित में से किस प्रकार प्रकाशित की जाएगी?
a. केवल न्यायालय के परिसर में प्रकाशित की जाएगी
b. उस नगर या ग्राम के सार्वजनिक स्थान पर पढ़ी जाएगी, व्यक्ति के घर पर लगी जाएगी और न्यायालय के सहजदृश्य भाग पर भी लगाई जाएगी
c. केवल समाचारपत्र में प्रकाशित की जाएगी
d. केवल व्यक्ति के घर पर पोस्ट की जाएगी
305. न्यायालय उद्घोषणा की एक प्रति दैनिक समाचारपत्र में प्रकाशित कराने का आदेश दे सकता है-
a. धारा 84(2)(i) (ख) के अंतर्गत
b. धारा 84(2)(i) (क) के अंतर्गत
c. धारा 84(2)(ii) के अंतर्गत
d. धारा 84(2)(i) (ग) के अंतर्गत
306. धारा 84 उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबंध किसके लिए भी लागू होते हैं?
a. केवल उपधारा (1) के तहत प्रकाशित उद्घोषणा के लिए
b. केवल वारंट निष्पादन के लिए
c. उपधारा (4) के तहत की गई उद्घोषित अपराधी की घोषणा के लिए भी
d. केवल पुलिस अधिकारी के निर्देश के लिए
307. फरार व्यक्ति की संपत्ति की कुर्की किससे सम्बन्धित है?
a. धारा 86
b. धारा 85
c. धारा 84
d. धारा 83
308. धारा 84 के तहत उद्घोषणा जारी करने वाला न्यायालय कब संपत्ति की कुर्की का आदेश दे सकता है?
a. केवल उद्घोषणा जारी करने के बाद 6 महीने में
b. उद्घोषणा जारी करने के बाद किसी भी समय, जब उसके पास कारण लिखित हों
c. केवल फरार व्यक्ति के गिरफ्तारी के बाद
d. केवल स्थानीय पुलिस की सलाह पर
309. यदि उद्घोषणा के समय न्यायालय यह समाधान करता है कि व्यक्ति अपनी संपत्ति का व्यय करने वाला है या उसे अपनी अधिकारिता से बाहर ले जाने वाला है, तो न्यायालय क्या कर सकता है?
a. केवल गिरफ्तारी का आदेश देगा
b. केवल उद्घोषणा जारी करेगा
c. उद्घोषणा के साथ ही संपत्ति की कुर्की का आदेश भी दे सकता है
d. कुछ नहीं कर सकता
310. न्यायालय द्वारा जारी कुर्की आदेश किसके अधिकार क्षेत्र में लागू होगा?
a. केवल उस जिले में जहां न्यायालय है
b. केवल उस जिले में जहां संपत्ति स्थित है
c. उस जिले में जहां न्यायालय है, और जिले के बाहर के लिए जिला मजिस्ट्रेट के पृष्ठांकन पर
d. पूरे देश में
311. कोई ऐसा व्यक्ति, जो अपनी गिरफ्तारी हेतु वारंट जारी हो चुकने के बाद फरार चल रहा हो, को हाजिर होने हेतु बाध्य करने के लिए धारा 85 के अंतर्गत उद्घोषणा करने के साथ-साथ उसकी संपत्ति की कुर्की का आदेश भी जारी किया जा सकता है, बशर्ते न्यायालय संतुष्ट हो कि ऐसा व्यक्ति-
a. अपनी संपत्ति को पूरी तरह अथवा आंशिक तौर पर बेचने वाला है।
b. अपनी संपत्ति को पूरी तरह अथवा आंशिक तौर पर न्यायालय की अधिकारिता के बाहर ले जाने वाला है।
c. उपरोक्त (a) अथवा (b) में से कोई भी एक स्थिति विद्यमान हो या दोनों हो
d. उपर्युक्त में से कोई नहीं
312. यदि कुर्क की जाने वाली संपत्ति ऋण या जंगम संपत्ति हो, तो कुर्की कैसे की जाएगी?
a. केवल कब्जा लेकर
b. अभिग्रहण, रिसीवर की नियुक्ति, या लिखित आदेश द्वारा परिदान रोककर
c. केवल बेचकर
d. केवल अदालत के आदेश पर
313. स्थावर संपत्ति की कुर्की में निम्न में से कौन-से तरीके अपनाए जा सकते हैं?
a. कब्जा लेकर
b. रिसीवर की नियुक्ति
c. लिखित आदेश द्वारा परिदान रोकना
d. उपरोक्त सभी विकल्प
314. यदि कुर्क की गई संपत्ति जीवधन या विनश्वर प्रकृति की हो, तो न्यायालय तुरंत विक्रय का आदेश दे सकता है-
a. धारा 85(2) के अंतर्गत
b. धारा 85(3) के अंतर्गत
c. धारा 85(4) के अंतर्गत
d. धारा 85(5) के अंतर्गत
315. इस धारा के अंतर्गत नियुक्त रिसीवर के कर्तव्य और शक्तियां किस कानून के अनुसार होंगी?
a. भारतीय दंड संहिता, 1860
b. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908
c. भारतीय संविधान
d. कोई विशेष प्रावधान नहीं
316. उद्घोषित व्यक्ति की संपत्ति की पहचान और कुर्की किससे सम्बन्धित है?
a. धारा 87
b. धारा 86
c. धारा 85
d. धारा 84
317. न्यायालय कब उद्घोषित व्यक्ति की संपत्ति की पहचान, कुर्की और जब्ती के लिए सहायता का अनुरोध करता है?
a. जब पुलिस अधीक्षक या पुलिस आयुक्त या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारी से लिखित अनुरोध प्राप्त होता है
b. जब गिरफ्तारी हो जाती है
c. जब व्यक्ति स्वयं अदालत में उपस्थित होता है
d. जब कोई शिकायत दर्ज होती है
318. धारा 86 में संपत्ति की पहचान और कुर्की की प्रक्रिया किस अध्याय के अनुसार आरंभ की जाती है?
a. अध्याय 5
b. अध्याय 8
c. अध्याय 10
d. अध्याय 3
319. धारा 87 किससे सम्बन्धित है?
a. उद्घोषित व्यक्ति की संपत्ति की पहचान और कुर्की
b. कुर्क की हुई संपत्ति को निर्मुक्त करना, विक्रय और वापस करना
c. फरार व्यक्ति की संपत्ति की कुर्की
d. कुर्की के बारे में दावे और आपत्तियां
320. धारा 85 के अधीन कुर्की की गई संपत्ति के संबंध में दावा या आपत्ति करने की अवधि क्या है?
a. 3 महीने
b. 6 महीने
c. 1 वर्ष
d. 2 वर्ष
321. यदि दावा करने वाला व्यक्ति मर जाता है, तो दावा या आपत्ति कैसे जारी रह सकती है?
a. नहीं जारी रह सकती
b. उसके परिवार द्वारा
c. उसके विधिक प्रतिनिधि द्वारा
d. न्यायालय के आदेश से
322. धारा 87 के तहत दावे या आपत्तियां किस न्यायालय में की जा सकती हैं?
a. किसी भी न्यायालय में
b. जहां कुर्की का आदेश दिया गया है या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में
c. केवल उच्च न्यायालय में
d. केवल सत्र न्यायालय में
323. अगर दावे या आपत्तियां मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में की जाती हैं, तो वह उन्हें किसे सौंप सकता है?
a. जिला न्यायालय को
b. उच्च न्यायालय को
c. अपने अधीनस्थ किसी मजिस्ट्रेट को
d. पुलिस अधिकारी को
324. यदि दावे या आपत्ति को पूरी तरह या आंशिक रूप से नामंजूर कर दिया जाता है, तो उस व्यक्ति के पास आदेश की तारीख से कितने समय में विवादित संपत्ति के संबंध में दावा करने का अधिकार होता है?
a. 6 महीने
b. 1 वर्ष
c. 2 वर्ष
d. 3 वर्ष
325. कुर्क की हुई संपत्ति को निर्मुक्त करना, विक्रय और वापस करना किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 88
b. धारा 89
c. धारा 90
d. धारा 91
326. यदि उद्घोषित व्यक्ति उद्घोषणा में विनिर्दिष्ट समय के अंदर हाजिर हो जाता है, तो न्यायालय क्या आदेश देगा?
a. संपत्ति का विक्रय
b. संपत्ति को कुर्की से निर्मुक्त करने का आदेश
c. संपत्ति को स्थायी रूप से कब्जे में लेने का आदेश
d. उस व्यक्ति की गिरफ्तारी का आदेश
327. यदि उद्घोषित व्यक्ति विनिर्दिष्ट समय के अंदर हाजिर नहीं होता, तो कुर्क संपत्ति की क्या स्थिति होगी?
a. तुरंत विक्रय कर दी जाएगी
b. राज्य सरकार के व्ययनाधीन रहेगी
c. संपत्ति स्वचालित रूप से वापस कर दी जाएगी
d. संपत्ति का कब्जा पुलिस को सौंपा जाएगा
328. कुर्क संपत्ति का विक्रय कब किया जा सकता है?
a. कुर्की की तारीख से तीन महीने बाद
b. कुर्की की तारीख से छह महीने का अवसान हो जाने और धारा 87 के अधीन किसी दावे या आपत्ति के निपटारे के बाद
c. कुर्की के तुरंत बाद
d. उद्घोषित व्यक्ति के गिरफ्तारी के बाद
329. न्यायालय कब शीघ्रतया और प्रकृत्या क्षयशील संपत्ति का विक्रय कर सकता है?
a. केवल उद्घोषित व्यक्ति की अनुमति से
b. जब न्यायालय को स्वामी के फायदे के लिए उचित लगे
c. केवल धारा 87 के अधीन अनुमति मिलने पर
d. न्यायालय ऐसा नहीं कर सकता
330. यदि उद्घोषित व्यक्ति कुर्की की तारीख से दो वर्ष के अंदर न्यायालय के समक्ष हाजिर हो जाता है और यह साबित करता है कि वह फरार या छिपा नहीं था, तो क्या होगा?
a. उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा
b. उसे कोई राहत नहीं मिलेगी
c. उसे कुर्क की हुई संपत्ति या उसके विक्रय के शुद्ध आगमों का परिदान कर दिया जाएगा
d. संपत्ति को विक्रय कर दिया जाएगा
331. एक घोषित व्यक्ति, जिसकी संपत्ति कुर्क की जा चुकी हो, हाजिर होने पर संपत्ति वापसी अथवा उसकी बिक्री की राशि पाने का दावा कुर्की के कितने दिनों के अंदर कर सकता है-
a. कुर्की से 6 माह के अंदर
b. कुर्की से 2 वर्ष के अंदर
c. कुर्की से 3 वर्ष के अंदर
d. कुर्की से 1 वर्ष के अंदर
332. कुर्क संपत्ति की वापसी के लिए आवेदन नामंजूर करने वाले आदेश नामंजूर करने वाले आदेश से अपील किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 88
b. धारा 89
c. धारा 90
d. धारा 91
333. समन के स्थान पर या उसके अतिरिक्त वारंट का जारी किया जाना किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 91
b. धारा 90
c. धारा 89
d. धारा 88
334. धारा 90 के अनुसार, न्यायालय कब समन के स्थान पर या उसके अतिरिक्त वारंट जारी कर सकता है?
a. जब अभियुक्त पहले से जेल में हो
b. जब अभियुक्त पहले से जमानत पर हो
c. जब न्यायालय को विश्वास हो कि अभियुक्त फरार हो गया है या समन का पालन नहीं करेगा
d. जब अभियुक्त समन का उत्तर लिखित में दे
335. धारा 91 किससे सम्बन्धित है?
a. हाजिरी के लिए बंधपत्र या जमानतपत्र लेने की शक्ति
b. इस अध्याय के उपबंधों का साधारणतया समनों और गिरफ्तारी के वारंटों को लागू होना
c. समन के स्थान पर या उसके अतिरिक्त वारंट का जारी किया जाना
d. कुर्क संपत्ति की वापसी के लिए आवेदन नामंजूर करने वाले आदेश नामंजूर करने वाले आदेश से अपील
336. धारा 92 किससे सम्बन्धित है?
a. इस अध्याय के उपबंधों का साधारणतया समनों और गिरफ्तारी के वारंटों को लागू होना
b. समन के स्थान पर या उसके अतिरिक्त वारंट का जारी किया जाना
c. कुर्क संपत्ति की वापसी के लिए आवेदन नामंजूर करने वाले आदेश नामंजूर करने वाले आदेश से अपील
d. हाजिरी का बंधपत्र या जमानतपत्र भंग करने पर गिरफ्तारी
337. दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने के लिए समन किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 92
b. धारा 93
c. धारा 94
d. धारा 91
338. पत्रों के संबंध में प्रक्रिया किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 92
b. धारा 93
c. धारा 95
d. धारा 91
339. कौन-से अधिकारी डाक प्राधिकारी से दस्तावेज, पार्सल या चीज को परिदान करने का निर्देश दे सकते हैं?
a. उप-निरीक्षक
b. नायब तहसीलदार
c. जिला मजिस्ट्रेट, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सेशन न्यायालय या उच्च न्यायालय
d. ग्राम प्रधान
340. धारा 95 के अंतर्गत कौन-सा अधिकारी डाक या तार प्राधिकारी से तलाशी कराने और दस्तावेज को निरुद्ध रखने की अपेक्षा कर सकता है?
a. पंचायत सचिव
b. ग्राम कोतवाल
c. कार्यपालक या न्यायिक मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त या जिला पुलिस अधीक्षक
d. तहसीलदार
341. यदि कार्यपालक मजिस्ट्रेट को कोई दस्तावेज आवश्यक प्रतीत हो, तो वह क्या कर सकता है?
a. स्वयं दस्तावेज को जब्त कर सकता है
b. उच्च न्यायालय को रिपोर्ट कर सकता है
c. डाक या तार प्राधिकारी से दस्तावेज की तलाशी कराने और उसे निरुद्ध रखने की अपेक्षा कर सकता है
d. पुलिस से कह सकता है कि वह दस्तावेज नष्ट कर दे
342. डाक या तार प्राधिकारी को दस्तावेज कब तक निरुद्ध रखना होता है?
a. एक सप्ताह तक
b. उच्च न्यायालय के आदेश तक
c. जिला मजिस्ट्रेट, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या न्यायालय के आदेशों के मिलने तक
d. संबंधित पुलिस थाने के निर्देश मिलने तक
343. तलाशी वारंट कब जारी किया जा सकता है, किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 92
b. धारा 93
c. धारा 95
d. धारा 96
344. न्यायालय किस स्थिति में तलाशी वारंट जारी कर सकता है?
a. जब कोई व्यक्ति खुद उपस्थित होना चाहता है
b. जब न्यायालय को विश्वास हो कि समन या अपेक्षा द्वारा मांगी गई वस्तु पेश नहीं की जाएगी
c. जब पुलिस चाहे
d. जब मीडिया द्वारा अनुरोध किया जाए
345. धारा 96 के अनुसार तलाशी वारंट जारी करने का अधिकार डाक प्राधिकारी की अभिरक्षा में दस्तावेज़ के लिए किसे है?
a. जिला मजिस्ट्रेट
b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
c. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
d. a और b दोनों को
346. कुछ प्रकाशनों के समपहृत होने की घोषणा करने और उनके लिए तलाशी वारंट जारी करने की शक्ति किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 98
b. धारा 99
c. धारा 100
d. धारा 102
347. धारा 98 के अनुसार, किसके पास अधिकार होता है कि वह किसी समाचारपत्र, पुस्तक या दस्तावेज को सरकार के पक्ष में समपहृत करने की घोषणा करे?
a. जिला मजिस्ट्रेट
b. राज्य सरकार
c. पुलिस अधीक्षक
d. सेशन न्यायालय
348. राज्य सरकार कब किसी समाचारपत्र या दस्तावेज को समपहृत करने की घोषणा कर सकती है?
a. जब उसमें कोई तथ्यात्मक गलती हो
b. जब उसमें ऐसी बात हो जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की कुछ धारा (जैसे 152, 196, 197, 294, 295, 299) के तहत दंडनीय हो
c. जब वह समाचारपत्र पुराना हो
d. जब उसे लग सके कि वह कोई आम जनता की रुचि का विषय है
349. धारा 98 के अंतर्गत, किस अधिकारी को वारंट द्वारा किसी परिसर में प्रवेश कर तलाशी लेने के लिए प्राधिकृत किया जा सकता है?
a. उप-निरीक्षक या उससे अनिम्न पुलिस अधिकारी
b. जिला मजिस्ट्रेट
c. आम नागरिक
d. लोक सेवक
350. धारा 98 के तहत जारी आदेश या कार्रवाई को न्यायालय में किस धारा के अनुसार प्रश्नगत किया जाएगा?
a. धारा 95
b. धारा 100
c. धारा 99
d. धारा 101
351. धारा 99 किससे सम्बन्धित है?
a. कुछ प्रकाशनों के समपहृत होने की घोषणा करने और उनके लिए तलाशी वारंट जारी करने की शक्ति
b. जब्ती की घोषणा को अपास्त करने के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन
c. सदोष परिरुद्ध व्यक्तियों के लिए तलाशी
d. अपहृत स्त्रियों को वापस करने के लिए विवश करने की शक्ति
352. धारा 99 के अनुसार, समपहरण की घोषणा को अपास्त कराने के लिए आवेदन किस अदालत में किया जा सकता है?
a. जिला न्यायालय
b. उच्च न्यायालय
c. सेशन न्यायालय
d. सुप्रीम कोर्ट
353. किस आधार पर समपहरण की घोषणा को उच्च न्यायालय में अपास्त कराया जा सकता है?
a. समाचारपत्र के अंक या पुस्तक में कोई ऐसी बात नहीं जो धारा 98 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट है
b. समाचारपत्र के अंक की मुद्रण गुणवत्ता खराब है
c. समाचारपत्र के अंक में व्यावसायिक विज्ञापन शामिल हैं
d. किसी भी समाचारपत्र का अंक पुराना हो
354. यदि उच्च न्यायालय में तीन या अधिक न्यायाधीश हों, तो ऐसे आवेदन की सुनवाई कौन करेगा?
a. एकल न्यायाधीश
b. तीन न्यायाधीशों की विशेष न्यायपीठ
c. दो न्यायाधीशों की समिति
d. पूरा न्यायालय
355. धारा 100 किससे सम्बन्धित है?
a. कुछ प्रकाशनों के समपहृत होने की घोषणा करने और उनके लिए तलाशी वारंट जारी करने की शक्ति
b. अपहृत स्त्रियों को वापस करने के लिए विवश करने की शक्ति
c. सदोष परिरुद्ध व्यक्तियों के लिए तलाशी
d. समपहरण की घोषणा को अपास्त करने के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन
356. धारा 100 के अनुसार, तलाशी वारंट किस अधिकारी द्वारा जारी किया जा सकता है?
a. पुलिस अधिकारी
b. जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
c. मुख्य न्यायाधीश
d. कोई भी सरकारी अधिकारी
357. किस आधार पर तलाशी वारंट जारी किया जाता है?
a. यदि व्यक्ति परिदोष अपराध की कोटि में परिरुद्ध हो
b. यदि व्यक्ति से कोई शिकायत हो
c. यदि व्यक्ति किसी अन्य शहर में हो
d. यदि व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर हो
358. अपहृत स्त्रियों को वापस करने के लिए विवश करने की शक्ति किससे सम्बन्धित है?
a. धारा 101
b. धारा 102
c. धारा 103
d. धारा 104
359. धारा 101 के अनुसार, किस अधिकारी को अपहृत महिला या बालिका को वापस करने का आदेश देने का अधिकार है?
a. पुलिस अधिकारी
b. जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
c. मुख्य न्यायाधीश
d. कोई भी सरकारी कर्मचारी
360. धारा 101 में किस प्रकार की शिकायत के आधार पर आदेश दिया जा सकता है?
a. परिवाद शपथ पर
b. पुलिस की रिपोर्ट
c. कोई सामान्य शिकायत
d. पारिवारिक विवाद
361. धारा 102 के अंतर्गत किन धाराओं के तहत जारी तलाशी वारंटों पर ये नियम लागू होंगे?
a. धारा 50, 51, 52
b. धारा 96, 97, 98, 100
c. धारा 10, 20, 30
d. धारा 85, 86, 87
362. धारा 102 में उल्लिखित धाराओं में से कौन तलाशी वारंट के संबंध में प्रावधान नहीं है?
a. धारा 79
b. धारा 80
c. धारा 100
d. धारा 32
363. धारा 103 किससे सम्बंधित है?
a. तलाशी वारंटों का निदेशन आदि
b. बंद स्थान के भारसाधक व्यक्ति तलाशी लेने देंगे
c. अधिकारिता के परे तलाशी में पाई गई चीजों का व्ययन
d. श्रव्य-दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से तलाशी और अभिग्रहण का अभिलेख करना
364. यदि स्थान में अबाध प्रवेश प्राप्त नहीं हो सकता तो अधिकारी किस धारा के तहत कार्यवाही करेगा?
a. धारा 44 की उपधारा (2)
b. धारा 100 की उपधारा (1)
c. धारा 50 की उपधारा (3)
d. धारा 70 की उपधारा (4)
365. तलाशी के दौरान साक्षी बनने के लिए किसे बुलाया जाएगा?
a. किसी भी व्यक्ति को
b. तलाशी वाले मुहल्ले के दो या अधिक स्वतंत्र और प्रतिष्ठित निवासी या यदि उपलब्ध न हों तो अन्य मुहल्ले के निवासी
c. केवल पुलिस अधिकारी को
d. केवल न्यायालय के अधिकारी को
366. धारा 103 के तहत यदि कोई व्यक्ति लिखित आदेश के बावजूद तलाशी में साक्षी बनने से इंकार करता है, तो भारतीय न्याय संहिता किस धारा के तहत अपराध माना जाएगा?
a. धारा 150
b. धारा 222
c. धारा 100
d. धारा 50
367. तलाशी संबंधी उपबंध किन धाराओ में प्रावधानित है ?
a.धारा 103 - 104
b. धारा 102 – 104
c. धारा 101 - 104
d. धारा 100 – 104
368. अधिकारिता के परे तलाशी में पाई गई चीजों का व्ययन किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 102
b. धारा 103
c. धारा 104
d. धारा 105
369. धारा 105 श्रव्य-दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से तलाशी और अभिग्रहण का अभिलेख करना के स्थान पर पहले कौन सा प्रावधान था?
a. मजिस्ट्रेट अपनी उपस्थिति में तलाशी ली जाने का निदेश दे सकता है-
b. पेश की गई दस्तावेज आदि, को परिबद्ध करने की शक्ति-
c. आदेशिकाओं के बारे में व्यतिकारी व्यवस्था
d. अधिकारिता के परे तलाशी में पाई गई चीजों का व्ययन
370. पुलिस अधिकारी किन परिस्थितियों में किसी संपत्ति को अभिगृहीत कर सकता है?
a. जब वह संपत्ति चोरी हुई हो या
b. जब किसी अपराध के संदिग्ध परिस्थिति में पाई गई हो
c. दोनों a और b
d. केवल जब वह संपत्ति चोरी हुई हो
371. धारा 106 के अंतर्गत नीलामी से संबंधित नियम कौन सी धाराओं के अनुरूप होंगे?
a. धारा 32 और 44
b. धारा 503 और 504
c. धारा 129 और 130
d. धारा 185 और 222
372. संपत्ति की कुर्की जब्ती या वापसी से संबंधित कौनसी नयी धारा जोड़ी गयी है?
a. धारा 105
b. धारा 106
c. धारा 107
d. धारा 108
373. यदि न्यायालय या मजिस्ट्रेट को साक्ष्य लेने के पूर्व या पश्चात् यह विश्वास करने का कारण है कि सभी या ऐसी संपत्तियों में से कोई अपराध के लिए प्रयुक्त की जाती है तो न्यायालय या मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति को कितने दिनों के भीतर कारण दर्शित करने के लिए नोटिस जारी कर सकेगा?
a. 14 दिनों के भीतर का
b. 60 दिनों के भीतर का
c. 15 दिनों के भीतर का
d. 30 दिनों के भीतर का
374. कारण बताओ नोटिस प्राप्त करने वाला व्यक्ति न्यायालय में उपस्थिति नहीं देता है, तो न्यायालय क्या कर सकता है?
a. मामला बंद कर सकता है
b. एक पक्षीय आदेश पारित कर सकता है
c. उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है
d. पुलिस को आदेश दे सकता है
375. जिला मजिस्ट्रेट को अपराध के आगमों का वितरण कब करना होगा?
a. 30 दिनों के भीतर
b. 45 दिनों के भीतर
c. 60 दिनों के भीतर
d. 90 दिनों के भीतर
376. यदि अपराध के आगमों के लिए कोई दावेदार नहीं है या अधिशेष रहता है, तो वह क्या होगा?
a. पुलिस को दिया जाएगा
b. नष्ट कर दिया जाएगा
c. सरकार समपहरित कर लेगी
d. अदालत में रखा जाएगा
377. मजिस्ट्रेट अपनी उपस्थिति में तलाशी ली जाने का निदेश किस धारा के अंतर्गत दे सकता है?
a. धारा 105
b. धारा 106
c. धारा 108
d. धारा 107
378. धारा 108 के अनुसार, मजिस्ट्रेट किस प्रकार की तलाशी के लिए अपनी उपस्थिति में तलाशी लेने का आदेश दे सकता है?
a. केवल पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में
b. केवल जब कोई गिरफ्तारी हो रही हो
c. किसी ऐसे स्थान की जहाँ वह तलाशी वारंट जारी करने के लिए सक्षम हो
d. किसी भी सार्वजनिक स्थान की
379. पेश की गई दस्तावेज आदि, को परिबद्ध करने की शक्ति किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 108
b. धारा 109
c. धारा 110
d. धारा 111
380. धारा 109 के अनुसार, न्यायालय को किस वस्तु को परिबद्ध करने का अधिकार प्राप्त है?
a. केवल उन दस्तावेजों को जो अपराध में उपयोग हुए हों
b. किसी भी दस्तावेज या चीज को जो संहिता के अधीन न्यायालय के समक्ष पेश की गई हो
c. केवल चोरी हुई चीजों को
d. केवल उन वस्तुओं को जो तलाशी के दौरान मिली हों
381. आदेशिकाओं के बारे में व्यतिकारी व्यवस्था किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 110
b. धारा 111
c. धारा 112
d. धारा 113
382. कुछ मामलों में सहायता के लिए व्यतिकारी व्यवस्था तथा संपत्ति की कुर्की और समपहरण के लिए प्रक्रिया किस अध्याय में है?
a. अध्याय 8
b. अध्याय 9
c. अध्याय 7
d. अध्याय 8
383. व्यतिकारी व्यवस्था तथा संपत्ति की कुर्की और समपहरण के लिए प्रक्रिया भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की किन धाराओं में वर्णित है
a. धारा 105 (क) से (ठ)
b. धारा 111 से 124
c. धारा 144 से 147
d. धारा 94 से 110
384. परिशांति कायम रखने के लिए और सदाचार के लिए प्रतिभूति से संबंधित प्रावधान किस अध्याय में है?
a. अध्याय 8
b. अध्याय 9
c. अध्याय 7
d. अध्याय 8
385. दोषसिद्धि पर परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 122
b. धारा 123
c. धारा 124
d. धारा 125
386. धारा 125 के अंतर्गत कौन आदेश पारित कर सकता है-
a. सेशन न्यायालय या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
b. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
c. कोई मजिस्ट्रेट
d. उच्च न्यायालय
387. धारा 125 के अनुसार, जब सेशन न्यायालय या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति को दोषी ठहराता है और परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति लेने की आवश्यकता समझता है, तो वह कितनी अधिकतम अवधि के लिए प्रतिभूति ले सकता है?
a. 1 वर्ष
b. 2 वर्ष
c. 3 वर्ष से अनधिक अवधि तक जितनी उचित समझे
d. केवल 6 महीने
388. अन्य दशाओं में परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 124
b. धारा 125
c. धारा 126
d. धारा 127
389. धारा 126 के अंतर्गत कौन आदेश पारित कर सकता है-
a. सेशन न्यायालय या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
b. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
c. कोई मजिस्ट्रेट
d. उच्च न्यायालय
390. धारा 126 के अनुसार, कार्यपालक मजिस्ट्रेट कितनी अवधि के लिए परिशांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र या जमानतपत्र आदेश दे सकता है?
a. 6 महीने तक
b. 1 वर्ष से अनधिक, जितनी अवधि मजिस्ट्रेट ठीक समझे
c. केवल 3 महीने
d. कोई अवधि नहीं
391. धारा 126 में कार्यवाही किन मजिस्ट्रेट के समक्ष की जा सकती है?
a. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
b. सेशन न्यायाधीश
c. उच्च न्यायालय
d. जिला मजिस्ट्रेट
392. कतिपय मामलों को फैलाने वाले व्यक्तियों से सदाचार के लिए प्रतिभूति किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 127
b. धारा 128
c. धारा 129
d. धारा 130
393. धारा 127 के अंतर्गत कौन आदेश पारित कर सकता है-
a. सेशन न्यायालय या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
b. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
c. कोई मजिस्ट्रेट
d. उच्च न्यायालय
394. धारा 127 के अनुसार, कार्यपालक मजिस्ट्रेट कितनी अवधि के लिए परिशांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र या जमानतपत्र आदेश दे सकता है?
a. 6 महीने तक
b. 1 वर्ष से अनधिक, जितनी अवधि मजिस्ट्रेट ठीक समझे
c. केवल 3 महीने
d. कोई अवधि नहीं
395. संदिग्ध व्यक्तियों से सदाचार के लिए प्रतिभूति किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 119
b. धारा 122
c. धारा 125
d. धारा 128
396. धारा 128 के अंतर्गत कौन आदेश पारित कर सकता है-
a. सेशन न्यायालय या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
b. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
c. कोई मजिस्ट्रेट
d. उच्च न्यायालय
397. धारा 128 के अंतर्गत, कार्यपालक मजिस्ट्रेट बंधपत्र या जमानतपत्र किस अवधि के लिए आदेश दे सकता है?
a. छह महीने से अधिक नहीं
b. दो वर्ष से अधिक नहीं
c. एक वर्ष से अधिक नहीं
d. तीन वर्ष से अधिक नहीं
398. आभ्यासिक अपराधियों से सदाचार के लिए प्रतिभूति किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 129
b. धारा 130
c. धारा 132
d. धारा 133
399. धारा 129 के अंतर्गत कौन आदेश पारित कर सकता है-
a. सेशन न्यायालय या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
b. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
c. कोई मजिस्ट्रेट
d. उच्च न्यायालय
400. धारा 129 के अनुसार, कार्यपालक मजिस्ट्रेट कितनी अवधि के लिए परिशांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र या जमानतपत्र आदेश दे सकता है?
a. 6 महीने तक
b. 1 वर्ष से अनधिक, जितनी अवधि मजिस्ट्रेट ठीक समझे
c. 3 वर्ष से अनधिक अवधि तक जितनी उचित समझे
d. कोई अवधि नहीं
401. वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति देने की शक्ति किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 132
b. धारा 133
c. धारा 134
d. धारा 135
402. धारा 134 के अनुसार, किस प्रकार के मामलों में वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दी जा सकती है?
a. जब व्यक्ति को परिशांति कायम रखने या सदाचार के लिए बंधपत्र निष्पादित करने हेतु कहा गया हो
b. जब व्यक्ति को हत्या का आरोपी बनाया गया हो
c. जब व्यक्ति गवाह हो
d. जब व्यक्ति पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराना चाहता हो
403. इतिला की सच्चाई के बारे मैं जांच किस धारा से सम्बंधित है ?
a. धारा 132
b. धारा 133
c. धारा 134
d. धारा 135
404. धारा 135 के तहत जांच कितने समय में पूरी की जानी चाहिए?
a. 3 महीने
b. 9 महीने
c. 6 महीने
d. 12 महीने
405. यदि मजिस्ट्रेट जांच जारी रखने का निर्देश देता है, तो कौन उस आदेश को रद्द कर सकता है?
a. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
b. राज्य सरकार
c. सेशन न्यायाधीश
d. पुलिस अधीक्षक
406. प्रतिभूति देने का आदेश किस धारा से सम्बंधित है ?
a. धारा 136
b. धारा 138
c. धारा 140
d. धारा 142
407. जिस अवधि के लिए प्रतिभूति अपेक्षित की गई है उसका प्रारंभ किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 140
b. धारा 138
c. धारा 136
d. धारा 134
408. धारा 138 किन धाराओं के अधीन दिए गए आदेशों की अवधि के प्रारंभ को निर्धारित करता है?
a. केवल धारा 125
b. केवल धारा 136
c. धारा 125 और धारा 136 दोनों
d. धारा 130 और 137
409. यदि कोई व्यक्ति कारावास भुगत रहा है और उसके विरुद्ध प्रतिभूति देने का आदेश पारित होता है, तो उस आदेश की अवधि किसके अवसान (समाप्ति) पर शुरू होगी?
a. आदेश जारी होने की तिथि पर
b. जमानत मिलने की तिथि पर
c. दंडादेश (सजा) समाप्त होने पर
d. गिरफ्तारी की तिथि पर
410. धारा 139 किससे सम्बंधित है?
a. प्रतिभूति देने का आदेश
b. बंधपत्र की अंतर्वस्तुएं
c. वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति
d. प्रतिभुओं को अस्वीकार करने की शक्ति
411. धारा 140 के अनुसार, मजिस्ट्रेट प्रतिभू को किस आधार पर अस्वीकार कर सकता है?
a. यदि प्रतिभू गरीब है
b. यदि प्रतिभू कोई सरकारी कर्मचारी है
c. यदि प्रतिभू जमानतपत्र के प्रयोजन के लिए अनुपयुक्त है
d. यदि प्रतिभू का नाम सूची में नहीं है
412. प्रतिभूति देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास धारा किससे सम्बंधित है?
a. धारा 144
b. धारा 143
c. धारा 142
d. धारा 141
413. एक वर्ष से अधिक अवधि के लिए प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया और वह नहीं देता, तो मजिस्ट्रेट किस न्यायालय को मामला सौंपेगा?
a. हाईकोर्ट
b. जिला न्यायालय
c. सत्र न्यायालय (सेशन कोर्ट)
d. सुप्रीम कोर्ट
414. धारा 141 के अनुसार, कारावास की अधिकतम अवधि क्या हो सकती है जब व्यक्ति प्रतिभूति देने में असफल रहता है?
a. 1 वर्ष
b. 2 वर्ष
c. 3 वर्ष
d. 5 वर्ष
415. सत्र न्यायाधीश किसी मामले को किसे अंतरित कर सकता है?
a. मजिस्ट्रेट को
b. पुलिस को
c. अपर सत्र न्यायाधीश को
d. राज्य सरकार को
416. यदि प्रतिभूति जेल अधीक्षक (भारसाधक अधिकारी) को प्रस्तुत की जाती है, तो उसे क्या करना होता है?
a. तुरंत रिहा कर देना
b. उसे जमा कर लेना
c. संबंधित न्यायालय/मजिस्ट्रेट को सूचना भेजना
d. पुलिस को सौंप देना
417. परिशांति कायम रखने के लिए प्रतिभूति न देने पर किस प्रकार का कारावास होगा?
a. कठिन
b. सादा
c. आजीवन
d. वैकल्पिक
418. धारा 142 के अनुसार, कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश के तहत कारावासित व्यक्ति को छोड़ने का अधिकार किसके पास होता है?
a. थाना प्रभारी
b. सिविल जज
c. जिला मजिस्ट्रेट
d. नगर पालिका अध्यक्ष
419. अध्याय 10 किस विषय से सम्बंधित है?
a. लोक व्यवस्था और प्रशांति बनाए रखना
b. परिशांति कायम रखने के लिए और सदाचार के लिए प्रतिभूति
c. पत्नी, संतान और माता-पिता के भरणपोषण के लिए आदेश
d. पुलिस को इतिला और उनकी अन्वेषण करने की शक्तियां
420. यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी, संतान या माता-पिता का भरणपोषण करने में उपेक्षा करता है या इंकार करता है, तो कौन सा अधिकारी आदेश दे सकता है कि वह मासिक भत्ता दे?
a. जिला मजिस्ट्रेट
b. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
c. उच्च न्यायालय
d. पुलिस अधिकारी
421. निम्नलिखित में से मात्र एक कथन सही है-
a. यदि एक पर्याप्त साधनो वाला व्यक्ति अपनी माँ के भरण-पोषण करने से इंकार अथवा उपेक्षा करता है तो वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 के अंतर्गत आवेदन कर सकती है
b. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 के अंतर्गत केवल पत्नी को ही अनुतोष प्राप्त हो सकता है।
c. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 के अंतर्गत केवल बच्चों को ही ऐसा आदेश प्राप्त हो सकता है।
d. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 के अंतर्गत भरण- पोषण का कोई भी आदेश पारित नहीं किया जा सकता
422. निम्नलिखित में कौन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 के अंतर्गत भरण-पोषण प्राप्त करने का दावा नहीं कर सकता-
a. पत्नी, जो स्वयं के भरण-पोषण में असमर्थ हो
b. माँ अथवा पिता, जो स्वयं के भरण-पोषण में असमर्थ हो
c. वयस्क विवाहित पुत्री स्वयं के भरण-पोषण में असमर्थ हो
d. अवयस्क अवैध पुत्री स्वयं के भरण-पोषण में असमर्थ हो
423. धारा 144 के अंतर्गत-
a. एक पुत्री से अपने पिता के भरण-पोषण हेतु कहा जा सकता है
b. एक पिता से अपने अवयस्क बच्चे के भरण-पोषण हेतु कहा जा सकता है।
c. एक पुत्र से अपने पिता के भरण-पोषण हेतु कहा जा सकता है
d. उपरोक्त सभी
424. मजिस्ट्रेट पुत्री के पिता को कब तक भरणपोषण का भत्ता देने का आदेश दे सकता है?
a. पुत्री के विवाह तक
b. पुत्री के वयस्क होने तक
c. पुत्री के जन्म तक
d. पुत्री के अध्ययन तक
425. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 के अंतर्गत भरण- पोषण का दावा कौन कर सकता है?
a. पत्नी, जिसके पास आय का निजी खोत उपलब्ध हो
b. अवैध संतान
c. सौतेला पुत्र अथवा पुत्री
d. भाई एवं बहन
426. धारा 144 के अनुसार, अंतरिम भरणपोषण के लिए मासिक भत्ता और कार्यवाही का व्यय कब तक निपटाया जाएगा?
a. आवेदन की सूचना की तारीख से 30 दिन के भीतर
b. आवेदन की सूचना की तारीख से 60 दिन के भीतर
c. आवेदन की सूचना की तारीख से 90 दिन के भीतर
d. आवेदन की सूचना की तारीख से 120 दिन के भीतर
427. भरणपोषण या अंतरिम भरणपोषण के लिए आदेश का अनुपालन करने में पर्याप्त कारण के बिना असफल रहता है तो उस आदेश के प्रत्येक भंग के लिए मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति को कितने कारावास का दंडादेश दे सकता है?
a. 1 मास तक की अवधि के लिए, या यदि वह उससे पूर्व चुका दिया जाता है तो चुका देने के समय तक के लिए
b. 3 मास तक की अवधि के लिए, या यदि वह उससे पूर्व चुका दिया जाता है तो चुका देने के समय तक के लिए
c. 6 मास तक की अवधि के लिए, या यदि वह उससे पूर्व चुका दिया जाता है तो चुका देने के समय तक के लिए
d. 12 मास तक की अवधि के लिए, या यदि वह उससे पूर्व चुका दिया जाता है तो चुका देने के समय तक के लिए
428. धारा 144 के अनुसार, भरणपोषण की वसूली के लिए वारंट कब तक जारी नहीं किया जाएगा?
a. आदेश के बाद 6 महीने तक
b. आदेश के बाद 1 साल तक
c. आदेश के बाद 3 महीने तक
d. आदेश के बाद 2 साल तक
429. यदि पति ने दूसरी महिला से विवाह कर लिया है तो पत्नी के पति के साथ रहने से इंकार को न्यायसंगत आधार माना जाएगा?
a. हाँ
b. नहीं
c. केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से
d. केवल सेशन न्यायालय की अनुमति से
430. धारा के अधीन देय किसी रकम की वसूली के लिए कोई वारंट तब तक जारी न किया जाएगा जब तक उस रकम को उद्गृहीत करने के लिए, उस तारीख से जिसको वह देय हुई………………. न्यायालय से आवेदन नहीं किया गया है—
a. 1 वर्ष की अवधि के अंदर
b. 2 वर्ष की अवधि के अंदर
c. 3 वर्ष की अवधि के अंदर
d. 5 वर्ष की अवधि के अंदर
431. निम्न में से कौन धारा 144 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है?
a. जारता की दशा में रहने वाली पत्नी
b. वयस्क विवाहित पुत्री जो अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है
c. पति एवं पत्नी दोनों जो परस्पर सहमति से पृथक रह रहे हैं
d. इनमें से सभी
432. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 (4) के अंतर्गत निम्न में से कौन भरण पोषण नहीं मांग सकता है?
a. एक पत्नी जो जारता की दशा में रह रही हो
b. पत्नी जो कि आपसी सहमति के अंतर्गत अलग रह रही हो
c. दोनों (a) एवं (b)
d. या तो (a) या (b)
433. धारा 144 के अंतर्गत भरण-पोषण की मासिक धनराशि है-
a. 500 रुपए
b. 1,000 रुपए
c. 5,000 रुपए
d. कोई सीमा नहीं
434. भरण पोषण अथवा अंतरिम भत्ते सम्बन्धी किसी आदेश को निम्नलिखित में से किस धारा के अंतर्गत उल्लिखित परिस्थितियों में रद्द किया जा सकता है-
a. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144(5)
b. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 145(2)
c. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 145(3)
d. उपरोक्त में से कोई नहीं
435. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 के अंतर्गत पारित एक आदेश को असफल पक्ष द्वारा एक पुनरीक्षण याचिका प्रस्तुत करते हुए चुनौती दी जा सकती है-
a. केवल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष
b. केवल सत्र न्यायाधीश के समक्ष
c. केवल उच्च न्यायालय के समक्ष
d. सत्र न्यायाधीश अथवा उच्च न्यायालय में से किसी एक के समक्ष
436. धारा 144 के अधीन कार्यवाही किस जिले में की जा सकती है?
a. केवल उस जिले में जहां व्यक्ति वर्तमान में रहता है
b. केवल उस जिले में जहां व्यक्ति का जन्म हुआ है
c. जहां व्यक्ति है, या जहाँ वह या उसकी पत्नी निवास करती है, या जहाँ उसने अंतिम बार पत्नी या अधर्मज संतान की माता के साथ निवास किया हो, या जहां उसके पिता या माता निवास करते हों
d. केवल व्यक्ति के कार्यालय के जिले में
437. यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि व्यक्ति जानबूझकर न्यायालय में हाजिर होने से बच रहा है, तो वह क्या कर सकता है?
a. मामले को रोक सकता है
b. मामले को एकपक्षीय रूप से सुन सकता है और निर्णय दे सकता है
c. पुलिस को सूचना दे सकता है
d. मामले को उच्च न्यायालय भेज सकता है
438. मजिस्ट्रेट द्वारा एकपक्षीय आदेश के खिलाफ कितने समय के भीतर आवेदन किया जा सकता है?
a. 1 महीना
b. 3 महीने
c. 6 महीने
d. 1 साल
439. भत्ते में परिवर्तन किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 146
b. धारा 145
c. धारा 144
d. धारा 143
440. यदि सक्षम सिविल न्यायालय का कोई निर्णय आता है, तो मजिस्ट्रेट क्या कर सकता है?
a. नया केस दर्ज कर सकता है
b. सिविल न्यायालय को आदेश दे सकता है
c. धारा 144 के अंतर्गत दिए गए आदेश को रद्द या परिवर्तित कर सकता है
d. मामला उच्च न्यायालय को भेज सकता है
441. भरणपोषण के आदेश का प्रवर्तन किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 148
b. धारा 147
c. धारा 146
d. धारा 145
442. निम्नलिखित में से किस धारा के अंतर्गत भरण-पोषण के मासिक भत्तों अथवा अंतरिम मासिक भत्तों को परिवर्तित किया जा सकता है-
a. धारा 145
b. धारा 146
c. धारा 147
d. धारा 148
443. भरणपोषण या अंतरिम भरणपोषण के आदेश की प्रति किसे निःशुल्क दी जाती है?
a. मजिस्ट्रेट को
b. राज्य सरकार को
c. उस व्यक्ति को, जिसके विरुद्ध आदेश दिया गया है
d. उस व्यक्ति को, जिसके पक्ष में आदेश दिया गया है, या उसके संरक्षक को
444. अध्याय 11 किस विषय से सम्बंधित है?
a. पुलिस को इतिला और उनकी अन्वेषण करने की शक्तियां
b. चीजें पेश करने को विवश करने के लिए आदेशिकाएं
c. मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही का प्रारंभ किया जाना
d. लोक व्यवस्था और प्रशांति बनाए रखना
445. किस अधिकारी को विधिविरुद्ध जमाव को तितर-बितर होने का समादेश देने का अधिकार होता है?
a. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
b. पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी
c. उप निरीक्षक या उप निरीक्षक की पंक्ति से कोई पुलिस अधिकारी (भारसाधक अधिकारी की अनुपस्थिति में)
d. उपरोक्त सभी
446. किस स्थिति में जमाव को बल द्वारा तितर-बितर करने की कार्यवाही की जा सकती है?
a. जब जमाव तितर-बितर होने का समादेश मिलने के बाद भी तितर-बितर नहीं होता है
b. जब जमाव ने पहले से ही तितर-बितर होना शुरू कर दिया हो
c. जब जमाव में पाँच से कम व्यक्ति हों
d. जब जमाव शांतिपूर्ण हो
447. कितने या अधिक व्यक्तियों के जमाव को तितर-बितर करने का समादेश दिया जा सकता है, यदि उससे लोकशांति विक्षुब्ध होने की संभावना हो?
a. तीन या अधिक
b. पाँच या अधिक
c. दस या अधिक
d. बीस या अधिक
448. जमाव को तितर-बितर करने के लिए सशस्त्र बल का प्रयोग किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 150
b. धारा 149
c. धारा 148
d. धारा 147
449. धारा 148 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट जमाव को तितर-बितर करने के लिए सशस्त्र बल का प्रयोग कब किया जा सकता है?
a. जब मजिस्ट्रेट खुद जमाव का हिस्सा हो
b. जब जमाव को अन्यथा तितर-बितर नहीं किया जा सकता हो और लोक सुरक्षा के लिए आवश्यक हो
c. जब कोई भी अधिकारी आदेश दे
d. जब केवल पुलिस बल उपस्थित हो
450. किस अधिकारी को सशस्त्र बल द्वारा जमाव को तितर-बितर करने का आदेश देने का अधिकार होता है?
a. थाना प्रभारी
b. जिला मजिस्ट्रेट या प्राधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट
c. पुलिस अधीक्षक
d. प्रधान
451. जमाव को तितर-बितर करने की सशस्त्र बल के कतिपय अधिकारियों की शक्ति किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 150
b. धारा 151
c. धारा 152
d. धारा 153
452. धारा 150 के अनुसार, जब कोई जमाव लोक सुरक्षा के लिए स्पष्टतया संकट उत्पन्न करता है और कार्यपालक मजिस्ट्रेट से संपर्क नहीं किया जा सकता, तो किसे जमाव को तितर-बितर करने का अधिकार होता है?
a. कोई भी नागरिक
b. पुलिस अधिकारी
c. सशस्त्र बल का कोई आयुक्त या राजपत्रित अधिकारी
d. ग्राम प्रधान
453. धारा 148, धारा 149 तथा धारा 150 के अधीन किए गए कार्यों के लिए अभियोजन से संरक्षण किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 149
b. धारा 150
c. धारा 151
d. धारा 152
454. धारा 152 किस विषय से सम्बंधित है ?
a. धारा 148, धारा 149 तथा धारा 150 के अधीन किए गए कार्यों के लिए अभियोजन से संरक्षण
b. जमाव को तितर-बितर करने की सशस्त्र बल के कतिपय अधिकारियों की शक्ति
c. न्यूसेन्स हटाने के लिए सशर्त आदेश
d. आदेश की तामील या अधिसूचना
455. धारा 152 के अनुसार, किस अधिकारी को सशर्त आदेश देने का अधिकार है जब किसी लोक स्थान या मार्ग पर विधिविरुद्ध बाधा या न्यूसेन्स पाया जाता है?
a. पुलिस अधिकारी
b. जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार द्वारा सशक्त अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट
c. पंचायत अध्यक्ष
d. मुख्यमंत्री
456. "लोक स्थान" के अंतर्गत क्या आता है?
a. केवल सड़कें
b. केवल नदी और जलसरणी
c. राज्य की संपत्ति, पड़ाव के मैदान और स्वच्छता या आमोद-प्रमोद के लिए छोड़े गए मैदान
d. निजी संपत्ति
457. धारा 162 के अनुसार, कौन-से अधिकारी किसी व्यक्ति को लोक न्यूसेंस की पुनरावृत्ति न करने या उसे चालू न रखने का आदेश दे सकते हैं?
a. केवल जिला मजिस्ट्रेट
b. केवल पुलिस उपायुक्त
c. जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट, राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट इस हेतु सशक्त कोई अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट या पुलिस उपायुक्त
d. केवल राज्य सरकार
458. धारा 162 के अनुसार, लोक न्यूसेंस की पुनरावृत्ति या उसे चालू रखने का आदेश किस प्रकार के कानून के तहत दिया जा सकता है?
a. केवल भारतीय दंड संहिता, 2023 के तहत
b. केवल स्थानीय विधि के तहत
c. भारतीय न्याय संहिता, 2023 या किसी अन्य विशेष या स्थानीय विधि में यथापरिभाषित
d. केवल विशेष कानून के तहत
459. न्यूसेंस या आशंकित खतरे के अर्जेंट मामलों में आदेश जारी करने की शक्ति किस धारा से सम्बन्धित है ?
a. धारा 162
b. धारा 163
c. धारा 161
d. धारा 159
460. धारा 163 के अनुसार, कौन-से अधिकारी किसी व्यक्ति को कार्य न करने या अपनी संपत्ति की व्यवस्था करने का आदेश दे सकते हैं?
a. केवल जिला मजिस्ट्रेट
b. जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट, राज्य सरकार द्वारा सशक्त अन्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट
c. केवल राज्य सरकार
d. केवल पुलिस उपायुक्त
461. धारा 163 के अंतर्गत आदेश कब एकपक्षीय रूप में पारित किया जा सकता है?
a. जब मामले में दोनों पक्ष उपस्थित हों
b. जब सूचना की तामील सम्यक् समय में संभव न हो
c. जब आदेश की अवधि छह महीने से अधिक हो
d. आदेश कभी भी एकपक्षीय नहीं हो सकता
462. धारा 163 के तहत जारी आदेश की अधिकतम मान्य अवधि क्या है?
a. 1 महीना
b. 2 महीने (दो मास)
c. 6 महीने
d. 1 साल
463. राज्य सरकार किन परिस्थितियों में धारा 163 के आदेश की अवधि 6 महीने तक बढ़ा सकती है?
a. जब मानव जीवन, स्वास्थ्य या क्षेम को खतरा हो
b. जब आदेश को राजनीतिक कारणों से बढ़ाना हो
c. जब पुलिस की अनुमति हो
d. जब मजिस्ट्रेट आदेश वापस लेना चाहता हो
464. जहां भूमि या जल से संबद्ध विवादों से परिशन्ति भांग होना संभाव्य है वहां प्रक्रिया किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 162
b. धारा 163
c. धारा 164
d. धारा 165
465. इस धारा के लिए “भूमि या जल” के अंतर्गत निम्नलिखित में से क्या आता है?
a.केवल जमीन
b. केवल जल स्रोत
c. भवन, बाजार, मीनक्षेत्र, फसलें, भूमि की अन्य उपज और ऐसे किसी संपत्ति के भाटक या लाभ
d. केवल कृषि भूमि
466. स्थानीय जांच किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 167
b. धारा 165
c. धारा 164
d. धारा 163
467. पुलिस का निवारक कार्य किस अध्याय में वर्णित है?
a. अध्याय 12
b. अध्याय 11
c. अध्याय 10
d. अध्याय 9
468. पुलिस का संज्ञेय अपराधों का निवारण करना किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 166
b. धारा 167
c. धारा 168
d. धारा 169
469. धारा 168 के अनुसार, पुलिस अधिकारी किस प्रकार के अपराध के निवारण के लिए हस्तक्षेप कर सकता है?
a. असंज्ञेय अपराध
b. संज्ञेय अपराध
c. केवल आर्थिक अपराध
d. केवल साइबर अपराध
470. धारा 169 के अनुसार, पुलिस अधिकारी को किस प्रकार के अपराध की परिकल्पना की सूचना मिलने पर कार्रवाई करनी होती है?
a. असंज्ञेय अपराध
b. संज्ञेय अपराध
c. केवल सामाजिक अपराध
471. धारा 169 के अनुसार, इत्तिला किस अन्य प्रकार के अधिकारी को भी दी जानी चाहिए?
a. जिसे उस क्षेत्र का नक्शा पता हो
b. जिसे अपराध का निवारण या संज्ञान करने का कर्तव्य दिया गया हो
c. जिसे शिकायत लिखने की जिम्मेदारी हो
d. जिसे गिरफ्तारी करनी हो
472. धारा 169 का मुख्य उद्देश्य क्या सुनिश्चित करना है?
a. अपराध होने के बाद जांच शुरू करना
b. संज्ञेय अपराध की संभावना पर तत्काल सूचना श्रृंखला को सक्रिय करना
c. अपराधियों को संरक्षण देना
d. न्यायालय को रिपोर्ट भेजना
473. धारा 170 के अनुसार पुलिस अधिकारी किस परिस्थिति में बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकता है?
a. जब अपराध पहले ही हो चुका हो
b. जब मजिस्ट्रेट आदेश दे
c. जब संज्ञेय अपराध किए जाने की परिकल्पना का पता हो और अपराध को रोकना अन्यथा संभव न हो
d. जब किसी नागरिक की शिकायत हो
474. धारा 170 के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति को बिना किसी अन्य विधिक प्राधिकरण के कितने समय तक अभिरक्षा में रखा जा सकता है?
a. 12 घंटे
b. 24 घंटे
c. 48 घंटे
d. 72 घंटे
475. लोक संपत्ति की हानि का निवारण किस धारा से सम्बन्धित है ?
a. धारा 169
b. धारा 170
c. धारा 171
d. धारा 172
476. व्यक्तियों का पुलिस के युक्तियुक्त निदेशों के अनुरूप बाध्य होना से सम्बन्धित कौन सी नयी धारा जोड़ी गयी है?
a. धारा 172
b. धारा 173
c. धारा 174
d. धारा 175
477. धारा 172 के अनुसार, पुलिस अधिकारी के युक्तियुक्त निदेशों के संदर्भ में सभी व्यक्ति क्या करेंगे?
a. उनके निदेशों का विरोध करेंगे
b. उनके युक्तियुक्त निदेशों के अनुरूप बाध्य होंगे
c. केवल मजिस्ट्रेट के आदेश का पालन करेंगे
d. बिना कारण अवज्ञा करेंगे
478. यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी के युक्तियुक्त निदेशों का प्रतिरोध, इन्कार या अवज्ञा करता है, तो पुलिस अधिकारी क्या कर सकता है?
a. उसे तुरंत मुक्त कर देगा
b. उसे निरुद्ध कर सकता है या हटा सकता है
c. बिना कारण उसे नजरअंदाज कर देगा
d. उसे केवल चेतावनी देगा
479. पुलिस अधिकारी द्वारा निरुद्ध किए गए व्यक्ति के साथ क्या किया जाएगा?
a. उसे हमेशा जेल भेजा जाएगा
b. उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाएगा या छोटे मामलों में 24 घंटे के अंदर मुक्त कर देगा
c. उसे बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के नजरबंद रखेगा
d. उसे बिना कारण छोड़ देगा
480. पुलिस को इतिला और उनकी अन्वेषण करने की शक्तियां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के किस अध्याय में प्रदान की गयी है?
a. अध्याय 10
b. अध्याय 11
c. अध्याय 12
d. अध्याय 13
481. संज्ञेय अपराध की इत्तिला पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को कैसे दी जा सकती है?
a. केवल लिखित रूप में
b. केवल मौखिक रूप में
c. मौखिक या इलैक्ट्रानिक संसूचना द्वारा
d. केवल ई-मेल के माध्यम से
482. यदि इत्तिला इलैक्ट्रानिक संसूचना द्वारा दी गई है, तो उसे कितने दिनों के भीतर हस्ताक्षरित कराना आवश्यक है?
a. 1 दिन
b. 3 दिन
c. 7 दिन
d. 14 दिन
483. यदि महिला के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 से 71, 74 से 79 या धारा 124 के अंतर्गत अपराध की रिपोर्ट दी जाती है, तो इत्तिला किसके द्वारा अभिलिखित की जाएगी?
a. किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा
b. केवल महिला पुलिस अधिकारी या महिला अधिकारी द्वारा
c. मजिस्ट्रेट द्वारा
d. आरोपी द्वारा
484. जब रिपोर्ट में मानसिक या शारीरिक रूप से निःशक्त व्यक्ति का उल्लेख हो, तो इत्तिला अभिलेखन किस स्थिति में होगा?
a. केवल पुलिस स्टेशन में
b. किसी द्विभाषिए या विशेष प्रबोधक की उपस्थिति में निवास स्थान या किसी सुगम स्थान पर
c. केवल आरोपी के घर पर
d. न्यायालय में
485. इत्तिला देने वाले को अभिलिखित इत्तिला की प्रतिलिपि कब दी जाएगी?
a. 7 दिनों के भीतर
b. 3 दिनों के भीतर
c. तत्काल निःशुल्क
d. केवल न्यायालय के आदेश पर
486. यदि कोई व्यक्ति पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को इत्तिला देने से इंकार करता है, तो वह क्या कर सकता है?
a. शिकायत छोड़ सकता है
b. इत्तिला का सार लिखित रूप में पुलिस अधीक्षक को भेज सकता है
c. सीधे आरोपी से बात कर सकता है
d. कोई कार्रवाई नहीं कर सकता
487. जब पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को किसी असंज्ञेय अपराध की सूचना दी जाती है, तो वह क्या करेगा?
a. प्राथमिकी दर्ज करेगा और आरोपी को गिरफ्तार करेगा
b. इत्तिला देने वाले को अदालत में पेश करेगा
c. इत्तिला का सार पुस्तक में प्रविष्ट करेगा और इत्तिला देने वाले को मजिस्ट्रेट के पास भेजेगा
d. सीधे अन्वेषण शुरू करेगा
488. क्या पुलिस अधिकारी असंज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर स्वतः अन्वेषण कर सकता है?
a. हाँ, हमेशा
b. नहीं, जब तक कि मजिस्ट्रेट का आदेश न हो
c. केवल वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति से
d. केवल पीड़ित की सहमति से
489. मजिस्ट्रेट के आदेश मिलने पर असंज्ञेय अपराध की जांच करते समय पुलिस को किन शक्तियों का प्रयोग करने की अनुमति होती है?
a. केवल गवाही लेने की
b. केवल दस्तावेज़ इकट्ठा करने की
c. वारंट के बिना गिरफ्तारी छोड़कर, अन्य सभी शक्तियां
d. कोई शक्ति नहीं मिलती
490. यदि एक मामला दो या अधिक अपराधों से संबंधित है, जिनमें से एक संज्ञेय है और अन्य असंज्ञेय, तो मामला कैसे माना जाएगा?
a. केवल असंज्ञेय
b. केवल संज्ञेय
c. मिश्रित
d. मजिस्ट्रेट की अनुमति पर निर्भर
491. धारा 175 का संबंध किससे है?
a. संज्ञेय मामलों का अन्वेषण करने की पुलिस अधिकारी की शक्ति
b. संज्ञेय मामलों में इत्तिला
c. अन्वेषण के लिए प्रक्रिया
d. रिपोर्ट कैसे दी जाएंगी
492. क्या पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी किसी संज्ञेय अपराध की जांच मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना कर सकता है?
a. नहीं, मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक है
b. हाँ, यदि अपराध थाने की सीमाओं में हुआ है
c. केवल पुलिस अधीक्षक की अनुमति से
d. नहीं, unless आरोपी सरकारी कर्मचारी हो
493. धारा 175 के अनुसार, संज्ञेय अपराध की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर पुलिस अधीक्षक किसे अन्वेषण के लिए निर्देशित कर सकता है?
a. उप निरीक्षक
b. सहायक उप निरीक्षक
c. उप पुलिस अधीक्षक
d. पुलिस कांस्टेबल
494. धारा 175 की उपधारा (3) के अनुसार, मजिस्ट्रेट कब अन्वेषण का आदेश दे सकता है?
a. जब पुलिस कोई रिपोर्ट दर्ज न करे
b. जब पीड़ित स्वयं मजिस्ट्रेट के सामने बयान दे
c. जब धारा 173(4) के अंतर्गत शपथपत्र समर्थित आवेदन प्रस्तुत किया जाए
d. जब मीडिया में खबर आ जाए
495. अन्वेषण के लिए प्रक्रिया का संबंध किस धारा से है?
a. धारा 174
b. धारा 175
c. धारा 176
d. धारा 177
496. यदि किसी अपराध की सूचना प्राप्त होती है, तो पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी क्या करेगा?
a. अपराधी को तुरंत गिरफ्तार करेगा
b. उस अपराध की रिपोर्ट संबंधित मजिस्ट्रेट को भेजेगा
c. पीड़ित को जेल भेजेगा
d. अपराध स्थल को सील कर देगा
497. किस दशा में यह आवश्यक नहीं होता कि पुलिस अधिकारी स्वयं अन्वेषण के लिए जाए?
a. जब अपराध बलात्संग से संबंधित हो
b. जब मामला बहुत गंभीर हो
c. जब इत्तिला किसी व्यक्ति के विरुद्ध उसका नाम देकर की गई है
d. जब आरोपी महिला हो
498. बलात्संग के मामलों में पीड़िता का कथन कहाँ लिया जाना चाहिए?
a. थाने में
b. मजिस्ट्रेट के सामने
c. पीड़िता के निवास या उसकी पसंद के स्थान पर
d. अदालत में
499. बलात्संग के मामलों में कथन लेने की प्रक्रिया कैसे की जानी चाहिए?
a. पुलिस अधिकारी द्वारा केवल लिखित में
b. पुलिस अधिकारी द्वारा ऑडियो रिकॉर्डिंग द्वारा
c. महिला पुलिस अधिकारी द्वारा उसके माता-पिता या संरक्षक या नजदीकी नातेदार या परिक्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता की उपस्थिति में मोबाइल फोन या किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वीडियोग्राफी द्वारा
d. पुलिस अधिकारी द्वारा टेलीफोनिक वार्ता द्वारा
500. धारा 176 की उपधारा (3) के अनुसार, किस प्रकार के अपराध पर वीडियोग्राफी करना आवश्यक है?
a. तीन वर्ष से अधिक की सजा वाले
b. सात वर्ष या अधिक के लिए दंडनीय अपराध
c. सभी संज्ञेय अपराध
d. केवल आर्थिक अपराध
501. यदि किसी क्षेत्र में न्यायिक सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो राज्य सरकार क्या कर सकती है?
a. मामले को बंद कर सकती है
b. किसी अन्य राज्य की सुविधा के उपयोग को अधिसूचित कर सकती है
c. पीड़ित को दूसरे राज्य भेज सकती है
d. मजिस्ट्रेट को निलंबित कर सकती है
502. रिपोर्ट कैसे दी जाएंगी का संबंध किस धारा से है?
a. धारा 177
b. धारा 176
c. धारा 175
d. धारा 174
503. धारा 177 के अंतर्गत, मजिस्ट्रेट को भेजी जाने वाली रिपोर्ट किसके माध्यम से भेजी जा सकती है यदि राज्य सरकार ऐसा निर्देश दे?
a. जिला कलेक्टर
b. पुलिस स्टेशन का हेड कांस्टेबल
c. राज्य सरकार द्वारा नियत कोई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी
d. स्थानीय जनप्रतिनिधि
504. रिपोर्ट पर निर्देश लिखने के बाद वरिष्ठ अधिकारी को क्या करना होता है?
a. रिपोर्ट को रोक लेना
b. रिपोर्ट को पुनः जांच के लिए भेजना
c. रिपोर्ट को तुरंत मजिस्ट्रेट को भेजना
d. रिपोर्ट को राज्य सरकार को भेजना
505. धारा 178 किससे संबंधित है?
a. अन्वेषण या प्रारंभिक जांच करने की शक्ति
b. पुलिस द्वारा साक्षियों की परीक्षा
c. कोई उत्प्रेरणा न दिया जाना
d. बलात्संग के पीड़ित व्यक्ति की चिकित्सीय परीक्षा
506. धारा 178 के अनुसार, मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट प्राप्त होने पर क्या अधिकार प्राप्त है?
a. आरोपी को तुरंत सजा देना
b. मामला उच्च न्यायालय को भेजना
c. अन्वेषण के लिए आदेश देना
d. मामले को रद्द करना
507. मजिस्ट्रेट को अन्वेषण शक्ति किस धारा के अंतर्गत प्राप्त होती है?
a. धारा 174
b. धारा 175
c. धारा 178
d. धारा 182
508. साक्षियों की हाजिरी की अपेक्षा करने की पुलिस अधिकारी की शक्ति किससे संबंधित है?
a. धारा 179
b. धारा 171
c. धारा 174
d. धारा 173
509. किस स्थान की सीमाओं के भीतर के व्यक्ति को हाजिर होने के लिए कहा जा सकता है?
a. केवल अपने राज्य के भीतर
b. भारत के किसी भी स्थान से
c. संबंधित थाने या किसी पास के थाने की सीमा के अंदर
d. केवल जिला मुख्यालय में
510. निम्नलिखित में से किससे उनके निवास स्थान से भिन्न किसी स्थान पर हाजिर होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी?
a. 25 वर्षीय पुरुष
b. 40 वर्षीय महिला
c. 65 वर्षीय पुरुष
d. स्वस्थ वयस्क पुरुष
511. क्या किसी महिला को उसके निवास स्थान से भिन्न स्थान पर हाजिर होने को बाध्य किया जा सकता है?
a. हां, हमेशा
b. केवल मजिस्ट्रेट के आदेश से
c. नहीं, जब तक वह स्वयं सहमत न हो
d. यदि वह सरकारी कर्मचारी हो
512. यदि किसी व्यक्ति को अपने निवास स्थान से दूर बुलाया जाता है, तो उसके खर्च का प्रावधान कौन करता है?
a. वह व्यक्ति स्वयं
b. पुलिस थाने का हेड कांस्टेबल
c. राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार पुलिस अधिकारी
d. अदालत
513. निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है?
a. पुलिस किसी भी व्यक्ति को कहीं भी बुला सकती है
b. 10 वर्षीय लड़के को थाने बुलाया जा सकता है
c. गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को थाने बुलाना अनिवार्य है
d. मानसिक रूप से अक्षम व्यक्ति को उसके निवास स्थान से बाहर बुलाना वर्जित है
514. पुलिस द्वारा साक्षियों की परीक्षा किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 183
b. धारा 182
c. धारा 181
d. धारा 180
515. धारा 180 के अनुसार, कौन पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति की मौखिक परीक्षा कर सकता है?
a. कोई भी पुलिस कर्मचारी
b. केवल हेड कांस्टेबल
c. वह पुलिस अधिकारी ऐसी पंक्ति से निम्नतर पंक्ति का नहीं है जिसे राज्य सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त विहित
d. केवल मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में
516. क्या साक्षी सभी प्रश्नों का उत्तर देने के लिए बाध्य होता है?
a. हां, बिना किसी अपवाद के
b. नहीं, वह कोई भी प्रश्न टाल सकता है
c. हां, परंतु वे प्रश्न नहीं जिनसे वह स्वयं आपराधिक आरोप में आ जाए
d. केवल वही प्रश्न जिनकी अनुमति वकील देता है
517. धारा 180 के अंतर्गत लिए गए कथन को पुलिस अधिकारी किस प्रकार दर्ज कर सकता है?
a. केवल मौखिक रूप में
b. केवल न्यायालय के समक्ष
c. लिखित रूप में, पृथक और सही अभिलेख बनाकर
d. केवल पीड़ित द्वारा हस्ताक्षर किए जाने पर
518. क्या पुलिस अधिकारी द्वारा लिए गए कथन को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से रिकॉर्ड किया जा सकता है?
a. नहीं, यह अवैध है
b. केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से
c. हां, श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों से किया जा सकता है
d. केवल पीड़ित की सहमति से
519. किस प्रकार के मामलों में महिला का कथन केवल महिला अधिकारी द्वारा ही लिया जाएगा?
a. जब महिला असाक्षर हो
b. जब महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ हो
c. जब उस पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64 से 79 या धारा 124 के अंतर्गत अपराध का अधिकथन हो
d. जब पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम हो
520. पुलिस को किया गया कथन और उसका उपयोग किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 181
b. धारा 182
c. धारा 183
d. धारा 184
521. क्या पुलिस अधिकारी के समक्ष अन्वेषण के दौरान दिया गया कथन, यदि लेखबद्ध किया जाए, तो उस पर कथनकर्ता से क्या अपेक्षित है?
a. वह इसे मौखिक रूप से स्वीकार करे
b. वह उस पर हस्ताक्षर करे
c. हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं है
d. न्यायालय से प्रमाण पत्र प्राप्त करे
522. कोई उत्प्रेरणा न दिया जाना किस से संबंधित है?
a. धारा 182
b. धारा 186
c. धारा 184
d. धारा 185
523. धारा 182 के अनुसार, पुलिस अधिकारी या प्राधिकारी किस प्रकार का व्यवहार नहीं कर सकता?
a. उत्प्रेरणा देना
b. धमकी देना
c. वचन देना
d. उपरोक्त सभी
524. क्या पुलिस अधिकारी अन्वेषण के दौरान किसी व्यक्ति को अपनी स्वतंत्र इच्छा से कथन करने से रोक सकता है?
a. हां, किसी भी तरीके से रोक सकता है
b. नहीं, वह किसी चेतावनी या अन्य तरीके से रोक नहीं सकता
c. केवल मजिस्ट्रेट के आदेश से रोक सकता है
d. केवल आरोपी को रोक सकता है
525. धारा 182 भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की किस धारा के अंतर्गत उत्प्रेरणा, धमकी या वचन को रोकती है?
a. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 21
b. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 22
c. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 20
d. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 19
526. धारा 183 किससे संबंधित है?
a. साक्षियों की हाजिरी की अपेक्षा करने की पुलिस अधिकारी की शक्ति
b. बलात्संग के पीड़ित व्यक्ति की चिकित्सीय परीक्षा
c. संस्वीकृतियों और कथनों को अभिलिखित करना
d. पुलिस अधिकारी उत्प्रेरणा, धमकी या वचन नहीं देगा, करेगा, दिलवाएगा या करवाएगा
527. धारा 183 के अनुसार, संस्वीकृति या कथन किस अधिकारी द्वारा अभिलिखित किया जा सकता है?
a. केवल मामले के अधिकारिक मजिस्ट्रेट द्वारा
b. उस जिले का कोई मजिस्ट्रेट, चाहे उसे अधिकारिता हो या न हो
c. केवल पुलिस अधिकारी द्वारा
d. केवल उच्च न्यायालय द्वारा
528. संस्वीकृति अभिलिखित करते समय अभियुक्त के अधिकारिक उपस्थित कौन होना चाहिए?
a. उसके परिवार के सदस्य
b. उसके मित्र
c. उसके अधिवक्ता
d. कोई अन्य आरोपी
529. किस धारा के अधीन मजिस्ट्रेट संस्वीकृति अभिलिखित करने से पहले व्यक्ति को समझाएगा कि संस्वीकृति करने के लिए बाध्य नहीं है?
a. धारा 183(1) परन्तुक
b. धारा 183(2)
c. धारा 183(3)
d. धारा 183(4)
530. अगर व्यक्ति संस्वीकृति देने से मना कर दे तो मजिस्ट्रेट क्या करेगा?
a. उसे पुलिस की हिरासत में देगा
b. उसे बिना कारण गिरफ्तार कर लेगा
c. उसे निरोध में नहीं रखेगा
d. उसे अदालत में पेश करेगा
531. मजिस्ट्रेट को किन मामलों में महिला मजिस्ट्रेट द्वारा कथन अभिलिखित करना चाहिए?
a. सभी अपराधों में
b. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64-79, 124 के तहत दंडनीय मामलों में
c. केवल आर्थिक अपराधों में
d. केवल सामान्य अपराधों में
532. यदि कथन करने वाला व्यक्ति मानसिक या शारीरिक रूप से निःशक्त है, तो मजिस्ट्रेट अभिलिखित करते समय क्या करेगा?
a. उसे मजिस्ट्रेट के घर बुलाएगा
b. द्विभाषिए या विशेष प्रबोधक की सहायता लेगा
c. उस व्यक्ति से कथन नहीं लेगा
d. पुलिस को आदेश देगा कि वे वह बयान लें
533. बलात्संग के पीड़ित व्यक्ति की चिकित्सीय परीक्षा किससे संबंधित है?
a. धारा 185
b. धारा 184
c. धारा 186
d. धारा 188
534. बलात्संग या उसके प्रयास के अपराध के अन्वेषण के दौरान पीड़िता की चिकित्सा परीक्षा कौन कराएगा?
a. कोई भी व्यक्ति
b. सरकार या स्थानीय प्राधिकारी द्वारा नियोजित रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी
c. पुलिस अधिकारी
d. पीड़िता के परिवार का सदस्य
535. बलात्संग के अपराध के अन्वेषण के दौरानं कथित पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण किया जा सकता है-
a. केवल मजिस्ट्रेट के आदेश पर
b. सम्बन्धित अन्वेषण अधिकारी, यदि उचित समझे, की प्रार्थना पर आवश्यकतौर पर
c. अन्वेषण अधिकारी द्वारा पुलिस अधीक्षक से अनुमति प्राप्त करने के उपरांत
d. ऐसी महिला पीड़िता अथवा उसकी ओर से ऐसी सहमति देने में सक्षम किसी व्यक्ति की सहमति के साथ
536. यदि नियोजित रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी अनुपस्थित हो तो कौन परीक्षा करेगा?
a. कोई अन्य पुलिस अधिकारी
b. कोई भी व्यक्ति
c. किसी अन्य रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी
d. मजिस्ट्रेट
537. चिकित्सा परीक्षा के लिए महिला की सहमति किससे ली जाएगी?
a. महिला की सहमति से या सक्षम व्यक्ति की सहमति से
b. केवल महिला की सहमति से
c. पुलिस अधिकारी की सहमति से
d. परिवार के किसी सदस्य की सहमति से
538. महिला को चिकित्सा परीक्षा के लिए कितने समय के भीतर भेजा जाना चाहिए?
a. 12 घंटे के भीतर
b. 24 घंटे के भीतर
c. 48 घंटे के भीतर
d. 7 दिन के भीतर
539. रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी चिकित्सा परीक्षा रिपोर्ट कितने दिनों के अंदर अन्वेषण अधिकारी को भेजेगा?
a. 3 दिन
b. 5 दिन
c. 7 दिन
d. 10 दिन
540. पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 183
b. धारा 184
c. धारा 185
d. धारा 182
541. जब चौबीस घंटे के अंदर अन्वेषण पूरा न किया जा सके, तब प्रक्रिया किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 185
b. धारा 188
c. धारा 187
d. धारा 186
542. धारा 187 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अनुसार, मजिस्ट्रेट अधिकतम कितने दिनों की रिमांड दे सकता है?
a. 15 दिन
b. 14 दिन
c. 30 दिन
d. 9 दिन
543. अगर किसी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद 24 घंटे के अंदर अन्वेषण पूरा नहीं हो पाता, तो पुलिस अधिकारी को क्या करना चाहिए?
a. आरोपी को तुरंत जमानत पर छोड़ देना चाहिए
b. निकटतम मजिस्ट्रेट को अभियुक्त और मामले की डायरी की प्रतिलिपि भेजनी चाहिए
c. आरोपी को बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के हिरासत में रखना चाहिए
d. मामले को बंद कर देना चाहिए
544. मजिस्ट्रेट अभियुक्त को पुलिस हिरासत में कितनी अधिकतम अवधि तक निरुद्ध रखने का आदेश दे सकता है (जहां अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास योग्य हो)?
a. 30 दिन
b. 60 दिन
c. 90 दिन
d. 15 दिन
545. मजिस्ट्रेट अभियुक्त की हिरासत को कितनी अधिकतम अवधि तक बढ़ा सकता है जब मामला अन्य अपराध से संबंधित हो?
a. 15 दिन
b. 60 दिन
c. 90 दिन
d. 120 दिन
546. कौन-सा मजिस्ट्रेट पुलिस हिरासत में निरोध प्राधिकृत नहीं कर सकता?
a. प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
b. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
c. द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट जो उच्च न्यायालय द्वारा विशेषाधिकारित न हो
d. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
547. मजिस्ट्रेट अभियुक्त को पुलिस हिरासत में निरुद्ध रखने से पहले क्या आवश्यक है?
a. अभियुक्त का व्यक्तिगत रूप से मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होना
b. पुलिस अधिकारी की लिखित रिपोर्ट
c. अभियुक्त का परिवार को सूचित करना
d. न्यायालय में जमानत की सुनवाई
548. जब तक अभियुक्त जमानत नहीं देता, तब तक उसे हिरासत में रखा जा सकता है, यह किस स्पष्टीकरण के तहत सुनिश्चित किया गया है?
a. स्पष्टीकरण 1
b. स्पष्टीकरण 2
c. उपधारा (4)
d. उपधारा (5)
549. यदि समन मामले के रूप में सजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय किसी मामले में अन्वेषण 6 माह के भीतर पूरा नहीं होता तो मजिस्ट्रेट क्या आदेश देगा?
a. अन्वेषण को जारी रखने का आदेश
b. अन्वेषण को रोकने का आदेश जब तक विशेष कारण न हो
c. आरोपी को जमानत पर छोड़ने का आदेश
d. अभियुक्त को रिहा करने का आदेश
550. जहां धारा 187 उपधारा (9) के अधीन किसी अपराध का आगे और अन्वेषण रोकने के लिए आदेश दिया गया है, वहां उस आदेश को रद्द करने और अन्वेषण किये जाने का निदेश कौन दे सकता है?
a. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
b. सेशन न्यायाधीश
c. उच्च न्यायालय
d. सेशन न्यायाधीश, उच्च न्यायालय दोनों
551. अधीनस्थ पुलिस अधिकारी द्वारा अन्वेषण की रिपोर्ट किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 189
b. धारा 190
c. धारा 188
d. धारा 191
552. जब साक्ष्य अपर्याप्त हो तब अभियुक्त का छोड़ा जाना किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 187
b. धारा 189
c. धारा 188
d. धारा 190
553. जब साक्ष्य पर्याप्त है तब मामलों का मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया जाना किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 192
b. धारा 190
c. धारा 191
d. धारा 193
554. बंधपत्र निष्पादित करते समय उस अधिकारी को क्या करना होता है?
a. बंधपत्र की एक प्रति अभियुक्त को देनी होती है
b. बंधपत्र की एक प्रति निष्पादित करने वाले व्यक्तियों में से एक को देनी होती है और मूल बंधपत्र रिपोर्ट के साथ मजिस्ट्रेट को भेजनी होती है
c. बंधपत्र को नष्ट कर देना चाहिए
d. बंधपत्र को पुलिस स्टेशन में रखना चाहिए
555. परिवादी और साक्षियों से पुलिस अधिकारी के साथ जाने की अपेक्षा न किया जाना और उनका अवरुद्ध न किया जाना किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 198
b. धारा 191
c. धारा 199
d. धारा 192
556. अन्वेषण डायरी में कौन-कौन सी जानकारी दर्ज करनी होती है?
a. पुलिस अधिकारी का नाम और पद
b. अन्वेषण आरंभ और समाप्ति का समय, स्थान, और परिस्थितियों का विवरण
c. केवल अन्वेषण का प्रारंभिक समय
d. अभियुक्त के बयान
557. किस धारा के तहत केस डायरी में साक्षियों के कथन कहाँ संलग्न किए जाते हैं?
a. धारा 181
b. धारा 184
c. धारा 174
d. धारा 180
558. धारा 193 किससे संबंधित है?
a. अन्वेषण के समाप्त हो जाने पर पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट
b. अन्वेषण में कार्यवाहियों की डायरी
c. जब साक्ष्य पर्याप्त है तब मामलों का मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया जाना
d. जब साक्ष्य अपर्याप्त हो तब अभियुक्त का छोड़ा जाना
559. अन्वेषण को पूरा करने में अधिकतम समय सीमा क्या है जब मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64-71 या बाल संरक्षण अधिनियम, 2012 के अंतर्गत हो?
a. 1 माह
b. 2 माह
c. 3 माह
d. 6 माह
560. यदि पुलिस अधिकारी को लगता है कि किसी कथन का कोई भाग अभियुक्त को प्रकट करना न्याय के हित में उचित नहीं है, तो वह क्या करेगा?
a. पूरा कथन अभियुक्त को देगा
b. उस भाग को छिपाने के लिए मजिस्ट्रेट को नोट भेजेगा और कारण बताएगा
c. कथन को अदालत में पेश नहीं करेगा
d. पुलिस रिपोर्ट से कथन हटा देगा
561. पुलिस अधिकारी अन्वेषण की प्रगति की सूचना कितने दिनों में देगा?
a. 30 दिनों में
b. 60 दिनों में
c. 90 दिनों में
d. 120 दिनों में
562. अन्वेषण रिपोर्ट भेजे जाने के बाद पुलिस क्या कर सकती है यदि नए साक्ष्य प्राप्त होते हैं?
a. नए साक्ष्यों को नज़रअंदाज़ कर सकती है
b. अतिरिक्त रिपोर्ट या रिपोर्टें मजिस्ट्रेट को भेज सकती है
c. मामले को बंद कर सकती है
d. अभियुक्त को तुरंत गिरफ्तार कर सकती है
563. धारा 194 किससे संबंधित है?
a. आत्महत्या, आदि पर पुलिस का जांच करना और रिपोर्ट देना
b. परिवादी और साक्षियों से पुलिस अधिकारी के साथ जाने की अपेक्षा न किया जाना और उनका अवरुद्ध न किया जाना
c. जब साक्ष्य पर्याप्त है तब मामलों का मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया जाना
d. अधीनस्थ पुलिस अधिकारी द्वारा अन्वेषण की रिपोर्ट
564. जब पुलिस को किसी व्यक्ति की आत्महत्या या संदिग्ध मृत्यु की सूचना मिलती है, तो पुलिस अधिकारी किसे तुरंत सूचना देगा?
a. मुख्य सचिव
b. निकटतम कार्यपालक मजिस्ट्रेट
c. जिला मजिस्ट्रेट
d. प्रधानमंत्री
565. पुलिस अधिकारी किसके साथ मिलकर मृत्यु स्थल पर अन्वेषण करेगा?
a. पड़ोस के दो या अधिक प्रतिष्ठित निवासी
b. अस्पताल के डॉक्टर
c. अभियुक्त
d. मजिस्ट्रेट
566. मृत्यु की रिपोर्ट में क्या-क्या वर्णित किया जाएगा?
a. घाव, अस्थिभंग, नीलों और अन्य क्षति के चिह्न
b. चिह्न किस प्रकार और किस उपकरण द्वारा बने प्रतीत होते हैं
c. दोनों a और b
d. केवल मृत्यु का समय
567. पुलिस अधिकारी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट कहाँ और कब भेजी जाएगी?
a. जिला मजिस्ट्रेट या उपखंड मजिस्ट्रेट को 24 घंटों के भीतर
b. मुख्यमंत्री को तुरंत
c. स्थानीय पुलिस स्टेशन को 48 घंटों के भीतर
d. न्यायालय को एक सप्ताह में
568. किस स्थिति में पुलिस अधिकारी शव को निकटतम सिविल सर्जन के पास भेज सकता है?
a. शव के सड़ने की संभावना न हो और राज्य सरकार के नियमों का पालन हो
b. केवल जब शव की हालत अच्छी हो
c. कभी नहीं भेज सकता
d. जब मजिस्ट्रेट अनुमति दे
569. मृत्यु- समीक्षा करने के लिए कौन-कौन से मजिस्ट्रेट सशक्त हैं?
a. जिला मजिस्ट्रेट और उपखंड मजिस्ट्रेट
b. केवल जिला मजिस्ट्रेट
c. केवल राज्य सरकार द्वारा नियुक्त मजिस्ट्रेट
d. पुलिस अधिकारी
570. व्यक्तियों को समन करने की शक्ति किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 190
b. धारा 193
c. धारा 195
d. धारा 199
571. किस प्रकार के व्यक्तियों से पुलिस थाने पर हाजिरी की अपेक्षा नहीं की जाएगी?
a. 15 वर्ष से कम आयु वाले, 60 वर्ष से अधिक आयु वाले, महिलाएं, मानसिक या शारीरिक रूप से दिव्यांग या गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति
b. केवल 60 वर्ष से अधिक आयु वाले
c. केवल महिलाएं
d. केवल दिव्यांग व्यक्ति
572. धारा 196 किससे संबंधित है?
a. मृत्यु के कारण की मजिस्ट्रेट द्वारा जांच
b. अन्वेषण में कार्यवाहियों की डायरी
c. परिवादी और साक्षियों से पुलिस अधिकारी के साथ जाने की अपेक्षा न किया जाना और उनका अवरुद्ध न किया जाना
d. जब साक्ष्य पर्याप्त है तब मामलों का मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया जाना
573. धारा 196 के अनुसार, जब मामला धारा 194 की उपधारा (3) के खंड (i) या (ii) में निर्दिष्ट होता है, तो मृत्यु के कारण की जांच कौन करता है?
a. केवल पुलिस अधिकारी
b. केवल मजिस्ट्रेट
c. निकटतम मजिस्ट्रेट जो मृत्यु- समीक्षा के लिए सशक्त हो, पुलिस जांच के अलावा या उसके अतिरिक्त
d. कोई भी व्यक्ति
574. धारा 196 के अनुसार, निम्न में से किस स्थिति में मजिस्ट्रेट द्वारा अतिरिक्त जांच की जाती है?
a. जब कोई व्यक्ति मर जाता है या गायब हो जाता है
b. जब किसी महिला के साथ बलात्कार की अभिकथा होती है
c. जब व्यक्ति पुलिस हिरासत में हो
d. उपरोक्त सभी
575. धारा 196 के अनुसार, जब कोई जांच हो रही हो, तो मजिस्ट्रेट किसे जांच के दौरान उपस्थित रहने की अनुमति देगा?
a. पुलिस अधिकारियों को
b. मृतक के नातेदारों को, जिनके नाम और पते ज्ञात हों
c. केवल जांच अधिकारी को
d. किसी भी व्यक्ति को
576. धारा 196 के अनुसार, मृत व्यक्ति की परीक्षा कितनी अवधि के भीतर की जानी चाहिए?
a. 12 घंटे
b. 24 घंटे
c. 48 घंटे
d. 72 घंटे
577. धारा 196 के स्पष्टीकरण के अनुसार, "नातेदार" में कौन-कौन शामिल हैं?
a. माता-पिता, संतान, भाई, बहन और पति या पत्नी
b. सिर्फ माता-पिता और संतान
c. केवल पति या पत्नी
d. कोई भी परिवारिक सदस्य
578. जांचों और विचारणों में दण्ड न्यायालयों की अधिकारिता सम्बंधित अध्याय कौन सा है ?
a. अध्याय 14
b. अध्याय 17
c. अध्याय 13
d. अध्याय 19
579. धारा 197 के अनुसार, किसी अपराध की जांच और विचारण किस न्यायालय द्वारा किया जाएगा?
a. किसी भी न्यायालय द्वारा
b. ऐसे न्यायालय द्वारा जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर अपराध हुआ हो
c. केवल उच्च न्यायालय द्वारा
d. केवल पुलिस द्वारा
580. धारा 198 किस विषय से संबंधित है?
a. जांच या विचारण का स्थान
b. दण्ड न्यायालयों की अधिकारिता
c. मृत व्यक्ति की परीक्षा
d. मामलों का मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया जाना
581. धारा 198 के अनुसार, यदि यह अनिश्चित हो कि अपराध किस स्थानीय क्षेत्र में हुआ है, तो जांच या विचारण कहाँ किया जा सकता है?
a. किसी भी स्थानीय न्यायालय में
b. उन सभी स्थानीय क्षेत्रों में से किसी एक न्यायालय में जिसकी अधिकारिता हो
c. केवल उच्च न्यायालय में
d. केवल पुलिस स्टेशन में
582. धारा 198 के अनुसार, यदि अपराध अंशतः एक स्थानीय क्षेत्र में और अंशतः दूसरे में हुआ है, तो जांच या विचारण कहाँ हो सकता है?
a. केवल पहले स्थानीय क्षेत्र में
b. केवल दूसरे स्थानीय क्षेत्र में
c. दोनों में से किसी एक स्थानीय क्षेत्र के न्यायालय में जिसकी अधिकारिता हो
d. राज्य सरकार के निर्णयानुसार
583. धारा 198 के अनुसार, यदि अपराध एक से अधिक स्थानीय क्षेत्रों में चालू रहता है, तो जांच या विचारण कहाँ किया जा सकता है?
a. किसी भी क्षेत्र में जहाँ अपराध जारी है और न्यायालय की अधिकारिता हो
b. केवल अपराधी के निवास स्थान पर
c. केवल राज्य की राजधानी में
d. केवल प्रथम स्थानीय क्षेत्र में
584. धारा 198 के अनुसार, यदि अपराध कई स्थानीय क्षेत्रों में किए गए कई कार्यों से बना है, तो उसकी जांच या विचारण कहाँ हो सकता है?
a. किसी भी न्यायालय में
b. किसी ऐसे स्थानीय क्षेत्र के न्यायालय में जिसकी अधिकारिता हो
c. केवल उच्च न्यायालय में
d. केवल पुलिस विभाग में
585. अपराध वहां विचारणीय होगा जहां कार्य किया गया या जहां परिणाम निकला किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 194
b. धारा 199
c. धारा 192
d. धारा 190
586. जहां कार्य अन्य अपराध से संबंधित होने के कारण अपराध है। वहां विचारण का स्थान किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 205
b. धारा 266
c. धारा 180
d. धारा 200
587. इलैक्ट्रानिक संसूचना के साधनों, पत्रों, आदि द्वारा किए गए अपराध किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 205
b. धारा 208
c. धारा 202
d. धारा 204
588. यात्रा या जलयात्रा के दौरान किए गए अपराध किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 203
b. धारा 206
c. धारा 208
d. धारा 212
589. एक साथ विचारणीय अपराधों के लिए विचारण का स्थान किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 204
b. धारा 206
c. धारा 208
d. धारा 209
590. धारा 204 के तहत, कई व्यक्तियों द्वारा किए गए अपराधों के लिए विचारण कैसे निर्धारित होता है?
a. केवल अपराधी के निवास स्थान के न्यायालय में
b. उन अपराधों में से किसी की जांच या विचारण करने वाले न्यायालय में एक साथ आरोप लगाया जा सकता है और विचारण हो सकता है
c. केवल उस न्यायालय में जहाँ सबसे अधिक अपराध हुआ हो
d. राज्य सरकार के निर्देशानुसार
591. धारा 204 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-से उपबंध एक साथ आरोप लगाने और विचारण करने के लिए प्रयोग किए जा सकते हैं?
a. धारा 242, 243, 244
b. धारा 246
c. दोनों a और b
d. केवल धारा 242
592. विभिन्न सेशन खंडों में मामलों के विचारण का आदेश देने की शक्ति किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 205
b. धारा 203
c. धारा 211
d. धारा 208
593. धारा 205 के अनुसार, कौन किसी जिले में विचारणार्थ सुपुर्द मामलों का विचारण किसी भी सेशन खंड में कराने का आदेश दे सकता है?
a. राज्य सरकार
b. उच्चतम न्यायालय
c. जब अभियुक्त फरार हो
d. केवल उच्च न्यायालय
594. संदेह की दशा में उच्च न्यायालय का वह जिला विनिश्चित करना, जिसमें जांच या विचारण होगा किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 220
b. धारा 206
c. धारा 208
d. धारा 222
595. यदि दो या अधिक न्यायालय एक ही अपराध का संज्ञान लेते हैं और संदेह हो कि किसे जांच या विचारण करना चाहिए, तो यदि वे सभी न्यायालय एक ही उच्च न्यायालय के अधीनस्थ हैं, तो निर्णय कौन करेगा?
a. राज्य सरकार
b. उस उच्च न्यायालय द्वारा
c. पुलिस विभाग
d. अभियुक्त द्वारा
596. यदि वे न्यायालय एक ही उच्च न्यायालय के अधीनस्थ नहीं हैं, तो धारा 206 के अनुसार निर्णय कौन करेगा?
a. उच्चतम न्यायालय
b. उस उच्च न्यायालय द्वारा जिसकी अपीली दांडिक अधिकारिता में कार्यवाही पहले प्रारंभ हुई हो
c. जिला अधिकारी
d. पुलिस अधीक्षक
597. स्थानीय अधिकारिता के परे किए गए अपराध के लिए समन या वारंट जारी करने की शक्ति किससे संबंधित है?
a. धारा 208
b. धारा 202
c. धारा 200
d. धारा 207
598. धारा 207 के अनुसार, ऐसे अपराध जो उसकी स्थानीय अधिकारिता के बाहर हुए हों लेकिन भारत में विचारणीय हों मामलों की जांच कौन कर सकता है?
a. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
c. द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट
d. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
599. भारत से बाहर किया गया अपराध किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 210
b. धारा 202
c. धारा 208
d. धारा 209
600. भारत से बाहर किए गए अपराधों के बारे में साक्ष्य लेना किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 209
b. धारा 215
c. धारा 229
d. धारा 230
601. कार्यवाहियां शुरु करने के लिए अपेक्षित शर्ते किन धाराओं में वर्णित है?
a. धारा 211- धारा 221
b. धारा 210 - धारा 222
c. धारा 215 - धारा 225
d. धारा 219 - धारा 226
602. मजिस्ट्रेटों द्वारा अपराधों का संज्ञान किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 211
b. धारा 210
c. धारा 215
d. धारा 219
603. धारा 210 के अनुसार, कौन-से मजिस्ट्रेट किसी भी अपराध का संज्ञान ले सकते हैं?
a. केवल प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
b. केवल द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट
c. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट और विशेषतया सशक्त किया गया द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट
d. केवल उच्च न्यायालय
604. धारा 210 के अनुसार, मजिस्ट्रेट किस आधार पर अपराध का संज्ञान ले सकता है?
a. केवल पुलिस रिपोर्ट पर
b. परिवाद पर, पुलिस रिपोर्ट पर, या किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त सूचना पर
c. केवल अभियुक्त की स्वीकृति पर
d. केवल अभियोजन पक्ष के आवेदन पर
605. धारा 210 के तहत, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किसे अपराध का संज्ञान लेने के लिए सशक्त कर सकता है?
a. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
b. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश
c. ऐसे द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट को जिनकी क्षमता के भीतर है
d. पुलिस अधिकारी
606. अभियुक्त के आवेदन पर अंतरण किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 219
b. धारा 216
c. धारा 211
d. धारा 220
607. धारा 211 के अनुसार, मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 210(1)(ग) के तहत संज्ञान लेने की स्थिति में अभियुक्त को क्या अधिकार है?
a. जमानत लेने का
b. किसी अन्य मजिस्ट्रेट से जांच या विचारण कराने का
c. स्वयं मुकदमा समाप्त करने का
d. मजिस्ट्रेट को बदलने की मांग करने का कोई अधिकार नहीं होता
608. धारा 211 के अनुसार, अभियुक्त को साक्ष्य लेने से पहले क्या किया जाना आवश्यक है?
a. गवाह बुलाना
b. मजिस्ट्रेट द्वारा अभियुक्त से माफी मांगना
c. अभियुक्त को इत्तिला देना कि वह किसी अन्य मजिस्ट्रेट से जांच या विचारण कराने का हकदार है
d. पुलिस रिपोर्ट पढ़कर सुनाना
609. धारा 211 के अनुसार, अंतरित करने योग्य मजिस्ट्रेट को कौन विनिर्दिष्ट करेगा?
a. राज्य सरकार
b. पुलिस अधीक्षक
c. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
d. अभियोजन अधिकारी
610. मामले मजिस्ट्रेटों के हवाले करना किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 232
b. धारा 212
c. धारा 121
d. धारा 224
611. धारा 212(1) के अनुसार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किस स्थिति में किसी मामले को अपने अधीनस्थ मजिस्ट्रेट को सौंप सकता है?
a. आरोप तय होने के बाद
b. पुलिस जांच के बाद
c. अपराध का संज्ञान लेने के पश्चात
d. अभियुक्त की गिरफ्तारी के बाद
612. धारा 212(2) के अनुसार, प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट कब मामले को किसी अन्य सक्षम मजिस्ट्रेट को सौंप सकता है?
a. जब वह स्वयं जांच नहीं करना चाहता
b. जब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उसे इस निमित्त सशक्त करता है
c. जब अभियुक्त अनुरोध करता है
d. जब पुलिस अधिकारी आदेश दे
613. अपराधों का सेशन न्यायालयों द्वारा संज्ञान किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 211
b. धारा 213
c. धारा 217
d. धारा 218
614. धारा 213 के अनुसार, सेशन न्यायालय कब किसी अपराध का संज्ञान ले सकता है?
a. जब अभियुक्त की स्वीकृति हो
b. जब पुलिस रिपोर्ट दाखिल हो
c. जब मजिस्ट्रेट द्वारा मामला उसे सुपुर्द किया गया हो
d. जब राज्य सरकार आदेश दे
615. धारा 214 के तहत, अपर सेशन न्यायाधीश को मामले सौंपने का अधिकार किसके पास है?
a. पुलिस अधीक्षक
b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
c. सेशन न्यायाधीश या उच्च न्यायालय
d. अभियोजन अधिकारी
616. लोक न्याय के विरुद्ध अपराधों के लिए और साक्ष्य में दिए गए दस्तावेजों से संबंधित अपराधों के लिए लोक सेवकों के विधिपूर्ण प्राधिकार के अवमान के लिए अभियोजन किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 215
b. धारा 220
c. धारा 208
d. धारा 218
617. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 206 से 223 तक के अधीन दंडनीय अपराधों का संज्ञान किस स्थिति में लिया जा सकता है?
a. मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट पर
b. गवाहों के बयान के बाद
c. संबंधित लोक सेवक द्वारा लिखित परिवाद पर
d. पुलिस रिपोर्ट के आधार पर
618. धमकी आदि के मामले में गवाहों के लिए प्रक्रिया धारा से संबंधित है?
a. धारा 215
b. धारा 220
c. धारा 208
d. धारा 216
619. राज्य के विरुद्ध अपराधों और ऐसे अपराध को करने के आपराधिक षड्यंत्र के लिए अभियोजन………से संबंधित है?
a. धारा 215
b. धारा 217
c. धारा 208
d. धारा 216
620. धारा 217 की उपधारा (1) के अनुसार, राज्य के विरुद्ध अपराधों का संज्ञान लेने के लिए क्या आवश्यक है?
a. मजिस्ट्रेट की मौखिक अनुमति
b. उच्च न्यायालय की अनुमति
c. केंद्रीय या राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी
d. गवाहों का हलफनामा
621. धारा 217 के अंतर्गत, भारतीय न्याय संहिता की किस धारा में वर्णित दुष्प्रेरण का संज्ञान केवल पूर्व मंजूरी से लिया जा सकता है?
a. धारा 47
b. धारा 197
c. धारा 353
d. धारा 299
622. धारा 217 की उपधारा (2) के अनुसार, धारा 197 या धारा 353(2)/(3) के अधीन दंडनीय अपराधों का संज्ञान कौन दे सकता है?
a. केवल राज्यपाल
b. केवल सेशन न्यायालय
c. केंद्र सरकार, राज्य सरकार, या जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से
d. किसी भी मजिस्ट्रेट की अनुमति से
623. यदि कोई आपराधिक षड्यंत्र ऐसा है जो धारा 215 के अंतर्गत आता है, तो धारा 217 की उपधारा (3) के अनुसार क्या आवश्यक नहीं होगी?
a. पुलिस रिपोर्ट
b. उच्च न्यायालय की स्वीकृति
c. राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट की लिखित सम्मति
d. अभियुक्त का बयान
624. धारा 217 की उपधारा (3) में कौन-सा अपराध पूर्व लिखित सम्मति के बिना संज्ञान योग्य नहीं है?
a. हत्या
b. दो वर्ष या उससे अधिक कारावास से दंडनीय अपराध को छोड़कर अन्य षड्यंत्र
c. चोरी
d. अपहरण
625. न्यायाधीशों और लोक सेवकों का अभियोजन किस से संबंधित है?
a. धारा 221
b. धारा 220
c. धारा 219
d. धारा 218
626. धारा 218 की उपधारा (2) के अनुसार, किस स्थिति में सशस्त्र बल के सदस्य का अभियोजन किया जा सकता है?
a. जब घटना उनकी निजी जिंदगी में हुई हो
b. जब वे अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहे हों या ऐसा करना तात्पर्यित हो, और केंद्रीय सरकार की पूर्व मंजूरी हो
c. राज्य सरकार की आदेश से
d. न्यायालय के आदेश से
627. धारा 218 में किन अपराधों के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी?
a. कोई भी अपराध जो सरकारी दस्तावेज़ को नष्ट करना है
b. अपराध जिनकी धारा 64 76, 68-71, 74-79, 143, 199 या 200 के अंतर्गत BNSS में वर्णना है
c. हत्या या आजीवन कारावास के अपराध
d. लोकायुक्त अधिनियम द्वारा उल्लिखित अपराध
628. विवाह के विरुद्ध अपराधों के लिए अभियोजन किस से संबंधित है?
a. धारा 214
b. धारा 219
c. धारा 218
d. धारा 220
629. मानहानि के लिए अभियोजन किस से संबंधित है?
a. धारा 214
b. धारा 219
c. धारा 218
d. धारा 222
630. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 356 के अधीन दंडनीय अपराध का संज्ञान न्यायालय कब लेगा?
a. जब कोई भी व्यक्ति परिवाद करे
b. जब ऐसा अपराध से व्यथित व्यक्ति द्वारा परिवाद किया गया हो
c. केवल सरकारी अधिकारी की रिपोर्ट पर
d. जब केंद्रीय सरकार अनुमति दे
631. धारा 222 के अनुसार, यदि मानहानि का अपराध बालक, विकृत्त चित्त व्यक्ति, या ऐसी महिला के विरुद्ध किया गया है, तो परिवाद किसके द्वारा किया जा सकता है?
a. केवल पीड़ित व्यक्ति द्वारा
b. न्यायालय की अनुमति से कोई अन्य व्यक्ति कर सकता है
c. केवल पुलिस द्वारा
d. कोई परिवाद नहीं किया जा सकता
632. जब मानहानि का अपराध राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल या मंत्री के लोक कृत्यों के निर्वहन से संबंधित होता है, तब सेशन न्यायालय संज्ञान कैसे ले सकता है?
a. पीड़ित की शिकायत पर ही
b. लोक अभियोजक द्वारा किए गए लिखित परिवाद पर बिना मामला सुपुर्द किए
c. पुलिस की जांच रिपोर्ट पर
d. बिना किसी मंजूरी के स्वतः
633. धारा 222 के अनुसार, लोक अभियोजक द्वारा ऐसे परिवाद के लिए पूर्व मंजूरी किससे लेनी होगी?
a. केवल राज्य सरकार से
b. केवल केंद्रीय सरकार से
c. राज्य सरकार या केंद्रीय सरकार से, निर्भर करता है कि आरोपी कौन है
d. किसी से मंजूरी की आवश्यकता नहीं है
634. सेशन न्यायालय को धारा 222 के तहत किसी अपराध का संज्ञान कब तक लेना चाहिए?
a. अपराध के घटित होने के बाद कोई सीमा नहीं
b. छह माह के भीतर अपराध के घटित होने की तारीख से
c. एक वर्ष के भीतर
d. तीन महीने के भीतर
635. परिवादी की परीक्षा किस से संबंधित है?
a. धारा 222
b. धारा 223
c. धारा 225
d. धारा 224
636. जब मजिस्ट्रेट किसी परिवाद पर अपराध का संज्ञान लेता है, तो उसे परिवादी और साक्षियों की परीक्षा कैसे करनी चाहिए?
a. बिना शपथ के मौखिक परीक्षा लेनी चाहिए
b. शपथ पर परीक्षा करनी चाहिए और परीक्षा का सारांश लेखबद्ध करना चाहिए
c. केवल परिवादी की परीक्षा लेनी चाहिए, साक्षियों की नहीं
d. केवल लिखित परिवाद पर ही निर्णय लेना चाहिए
637. मजिस्ट्रेट को परिवादी या साक्षियों की परीक्षा नहीं करनी होगी यदि:
a. परिवाद लोक सेवक द्वारा उसके पदीय कर्तव्यों के दौरान किया गया हो
b. परिवाद पुलिस द्वारा किया गया हो
c. मामला सीधे अदालत में चला गया हो
d. अभियुक्त ने माफी मांगी हो
638. जब मजिस्ट्रेट मामला धारा 212 के अधीन किसी अन्य मजिस्ट्रेट को सौंप देता है, तो क्या नए मजिस्ट्रेट को परिवादी और साक्षियों की पुनः परीक्षा करनी आवश्यक है?
a. हाँ, हमेशा करनी होगी
b. नहीं, यह आवश्यक नहीं है
c. केवल अभियुक्त की सहमति से
d. केवल गंभीर मामलों में
639. यदि किसी ऐसे मजिस्ट्रेट को परिवाद किया जाता है जो उस अपराध का संज्ञान लेने के लिए सक्षम नहीं है, और वह परिवाद लिखित है, तो मजिस्ट्रेट क्या करेगा?
a. परिवाद को स्वीकार कर सुनवाई करेगा
b. परिवाद को समुचित न्यायालय में पेश करने के लिए उस भाव का पृष्ठांकन सहित लौटा देगा
c. परिवाद को नष्ट कर देगा
d. पुलिस को भेज देगा
640. यदि परिवाद ऐसे मजिस्ट्रेट को किया जाता है जो उस अपराध का संज्ञान लेने के लिए सक्षम नहीं है, और परिवाद लिखित नहीं है, तो मजिस्ट्रेट क्या करेगा?
a. परिवादी को उचित न्यायालय जाने का निदेश देगा
b. परिवाद को स्वीकार कर सुनवाई करेगा
c. परिवाद को खारिज कर देगा
d. पुलिस को सूचित करेगा
641. यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि अभियुक्त उस क्षेत्र से बाहर रहता है जहाँ उसकी अधिकारिता है, तो वह आदेशिका जारी करने को क्या कर सकता है?
a. तुरंत आदेशिका जारी कर सकता है
b. आदेशिका जारी करने को मुल्तवी कर सकता है और मामले की जांच कर सकता है
c. मामले को खारिज कर सकता है
d. सीधे सेशन न्यायालय को भेज सकता है
642. मजिस्ट्रेट अन्वेषण के लिए निदेश नहीं देगा यदि—
a. उसे लगता है कि अपराध केवल सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है
b. परिवाद किसी न्यायालय द्वारा नहीं किया गया और धारा 223 के तहत शपथ पर परीक्षा नहीं हुई
c. दोनों a और b
d. यदि मामला मामूली है
643. यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि अपराध अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है, तो वह क्या करेगा?
a. मामले को स्वयं सुनाएगा
b. परिवादी और उसके साक्षियों की शपथ पर परीक्षा करेगा
c. मामले को सीधे उच्च न्यायालय भेजेगा
d. मामले को रद्द कर देगा
644. यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, तो वह क्या करेगा?
a. परिवाद को स्वीकार करेगा
b. परिवाद को खारिज कर देगा और अपने कारण संक्षेप में लिखेगा
c. मामले को उच्च न्यायालय भेज देगा
d. सीधे मामले की सुनवाई करेगा
645. मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही का प्रारंभ किस अध्याय से सम्बन्धित है?
a. अध्याय 17
b. अध्याय 16
c. अध्याय 14
d. अध्याय 15
646. यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार हैं और मामला समन-मामला प्रतीत होता है, तो वह क्या करेगा?
a. अभियुक्त को गिरफ्तारी वारंट जारी करेगा
b. अभियुक्त को समन जारी करेगा ताकि वह हाजिर हो
c. मामले को उच्च न्यायालय भेज देगा
d. अभियुक्त को माफी देगा
647. समन या वारंट कैसे जारी किए जा सकते हैं?
a. केवल लिखित रूप में
b. केवल व्यक्तिगत रूप से
c. इलैक्ट्रानिक माध्यम से भी जारी किए जा सकते हैं
d. केवल टेलीफोन के माध्यम से
648. कब तक अभियुक्त के विरुद्ध समन या वारंट जारी नहीं किया जाएगा?
a. जब तक अभियुक्त की गिरफ्तारी न हो जाए
b. जब तक अभियोजन के साक्षियों की सूची फाइल न हो जाए
c. जब तक अभियुक्त न्यायालय में उपस्थित न हो
d. जब तक पुलिस रिपोर्ट न आ जाए
649. धारा 227 का प्रावधान किस धारा के उपबंधों पर प्रभाव नहीं डालेगा?
a. धारा 90
b. धारा 212
c. धारा 356
d. धारा 64
650. मजिस्ट्रेट का अभियुक्त को वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकना किस से संम्बन्धित है ?
a. धारा 228
b. धारा 229
c. धारा 230
d. धारा 231
651. छोटे अपराधों के मामले मे विशेष समन किससे संम्बन्धित है ?
a. धारा 228
b. धारा 229
c. धारा 230
d. धारा 231
652. यदि मजिस्ट्रेट को लगता है कि कोई मामला धारा 283 या 284 के तहत संक्षेप में निपटाया जा सकता है, तो वह अभियुक्त के लिए क्या जारी करेगा?
a. वारंट
b. विशेष समन
c. गिरफ्तारी आदेश
d. जमानत आदेश
653. धारा 229 के अनुसार, विशेष समन में विनिर्दिष्ट जुर्माने की अधिकतम राशि कितनी हो सकती है?
a. 1,000 रुपए
b. 2,500 रुपए
c. 5,000 रुपए
d. 10,000 रुपए
654. “छोटे अपराध” से क्या अभिप्रेत है?
a. वह अपराध जिसका जुर्माना केवल 10,000 रुपए तक हो
b. वह अपराध जो केवल पाँच हजार रुपए से अधिक जुर्माने से दंडनीय हो
c. वह अपराध जो केवल पाँच हजार रुपए तक जुर्माने से दंडनीय हो, और मोटरयान अधिनियम, 1988 के अंतर्गत न हो
d. कोई भी अपराध जो जेल की सजा से दंडनीय हो
655. राज्य सरकार किसी मजिस्ट्रेट को कब विशेष रूप से शक्तियां दे सकती है?
a. जब मामला गंभीर हो
b. जब मामला धारा 359 के अधीन शमनीय हो या तीन माह तक की जेल या जुर्माने से दंडनीय हो
c. जब जुर्माना पाँच हजार रुपए से अधिक हो
d. जब अभियुक्त फरार हो
656. अभियुक्त को पुलिस रिपोर्ट या अन्य दस्तावेजों की प्रतिलिपि देना किससे सम्बंधित है ?
a. धारा 230
b. धारा 245
c. धारा 248
d. धारा 250
657. मजिस्ट्रेट अभियुक्त को दस्तावेजों की प्रतिलिपि देने के लिए अधिकतम कितनी अवधि ले सकता है?
a. 7 दिन
b. 14 दिन
c. 21 दिन
d. 30 दिन
658. निम्नलिखित में से कौन-से दस्तावेज़ मजिस्ट्रेट अभियुक्त को निःशुल्क देगा?
i. पुलिस रिपोर्ट
ii. धारा 173 के तहत प्रथम इत्तिला रिपोर्ट
iii. धारा 180(3) के तहत अभिलिखित साक्षियों के कथन
iv. धारा 183 के तहत संस्वीकृतियां
v. धारा 193(6) के तहत अन्य दस्तावेज़
a. केवल i, ii, iii
b. केवल i, ii, iv
c. सभी i, ii, iii, iv, v
d. केवल i, iii, v
659. सेशन न्यायलय द्वारा विचारणीय अन्य मामलो में अभियुक्त को कथनों और दस्तावेजों की प्रतिलिपियां देना किस से सम्बंधित है?
a. धारा 235
b. धारा 232
c. धारा 231
d. धारा 234
660. धारा 231 के अनुसार, किस स्थिति में मजिस्ट्रेट अभियुक्त को निःशुल्क दस्तावेजों की प्रतिलिपि देगा?
a. जब मामला पुलिस रिपोर्ट पर आधारित हो
b. जब मामला अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय हो
c. जब अभियुक्त दोषी साबित हो चुका हो
d. जब अभियुक्त जमानत पर हो
661. मजिस्ट्रेट अभियुक्त को किस दस्तावेज़ या कथनों की प्रतिलिपि निःशुल्क देगा?
i. धारा 223 या 225 के अधीन लेखबद्ध किये गए कथन
ii. धारा 180 या 183 के अधीन कथन और संस्वीकृतियां
iii. अभियोजन द्वारा निर्भर किए गए दस्तावेज़
a. केवल i और ii
b. केवल ii और iii
c. केवल i और iii
d. सभी i, ii और iii
662. धारा 231 के तहत, मजिस्ट्रेट किस माध्यम से दस्तावेजों की प्रतिलिपि देने पर विचार कर सकता है?
a. केवल हार्ड कॉपी
b. केवल ऑडियो रिकॉर्डिंग
c. इलेक्ट्रॉनिक प्ररूप (ई-फॉर्मेट)
d. केवल वीडियो
663. जब मजिस्ट्रेट को प्रतीत होता है कि अपराध अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है, तो वह क्या करेगा?
a. मामले को उसी मजिस्ट्रेट के पास रखेगा
b. मामले को पुलिस को भेज देगा
c. धारा 230 या 231 के अनुपालन के बाद मामला सेशन न्यायालय को सुपुर्द करेगा
d. अभियुक्त को तुरंत रिहा कर देगा
664. मजिस्ट्रेट मामले के सेशन न्यायालय को सुपुर्द करने की सूचना किसे देगा?
a. अभियुक्त को
b. पुलिस अधीक्षक को
c. लोक अभियोजक को
d. उच्च न्यायालय को
665. सेशन न्यायालय को मामला सुपुर्द करने की प्रक्रिया कितनी अवधि के भीतर पूरी करनी होती है?
a. 30 दिन
b. 60 दिन
c. 90 दिन (नब्बे दिनों)
d. 120 दिन
666. मजिस्ट्रेट द्वारा 90 दिनों की अवधि में प्रक्रिया पूरी न होने पर, वह अधिकतम कितनी अवधि के लिए विस्तार कर सकता है?
a. 30 दिन
b. 60 दिन
c. 90 दिन
d. 180 दिन (एक सौ अस्सी दिनों)
667. अध्याय 18 किससे सम्बन्धित है?
a. आरोप
b. आरोप की अंतर्वस्तु
c. आरोपों का संयोजन
d. उपरोक्त सभी
668. यदि अपराध को परिभाषित करने वाली विधि द्वारा उसे कोई विशेष नाम नहीं दिया गया हो, तो आरोप में क्या किया जाएगा?
a. उस अपराध को केवल संक्षेप में लिखा जाएगा
b. उस अपराध की पूरी कानूनी परिभाषा लिखनी होगी
c. अपराध की ऐसी परिभाषा दी जाएगी जिससे अभियुक्त को आरोप की सूचना मिल सके
d. आरोप में केवल धारा का उल्लेख होगा
669. आरोपों की अंतर्वस्तु से सम्बंधित धारा कौन सी है?
a. धारा 234
b. धारा 236
c. धारा 238
d. धारा 240
670. आरोप में किस बात का भी उल्लेख किया जाना आवश्यक होता है?
a. अभियुक्त की राय
b. उस विधि और धारा का, जिसके विरुद्ध अपराध किया गया है
c. गवाहों की सूची
d. पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई
671. यदि कोई व्यक्ति पूर्व में दोषसिद्ध हो चुका है और अब किसी पश्चात्वर्ती अपराध के लिए वर्धित दंड का पात्र है, तो आरोप में क्या उल्लिखित होगा?
a. केवल वर्तमान अपराध
b. केवल पिछले अपराध का विवरण
c. पूर्व दोषसिद्धि का तथ्य, तिथि और स्थान
d. इनमें से कोई नहीं
672. आरोप किस भाषा में लिखा जाएगा?
a. अभियुक्त की भाषा में
b. हिंदी में
c. न्यायालय की भाषा में
d. पुलिस रिपोर्ट की भाषा में
673. यदि कोई अभियुक्त भारतीय न्याय संहिता की धारा 118(2) के अंतर्गत आरोपित है, तो यह किसका संकेत है?
a. वह साधारण अपवादों के अंतर्गत आता है
b. धारा 122(2) द्वारा प्रतिबंध लागू नहीं होता
c. उस पर आरोप गलत है
d. उसे दोषमुक्त किया जा चुका है
674. क पर ख की हत्या का आरोप है। आरोप उसी स्थिति को दर्शाता है जब—
a. क का कार्य BNS 2023 की धारा 100–101 में हत्या की परिभाषा में आता है
b. साधारण अपवाद लागू होते हैं
c. धारा 101 के सभी अपवाद लागू हो जाते हैं
d. हत्या करना संदेहास्पद है
675. क पर आरोप है कि उसने “लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार से प्रस्थापित संपत्ति के विक्रय में बाधा डाली।” यह आरोप—
a. मूल शब्दों में ही लिखा जाना चाहिए
b. परिवर्तित भाषा में लिखा जा सकता है
c. आरोपी की भाषा में लिखा जाना चाहिए
d. कानूनी भाषा का उपयोग आवश्यक नहीं
676. समय, स्थान और व्यक्ति के बारे में विशिष्टियां से सम्बंधित धारा कौन सी है?
a. धारा 232
b. धारा 234
c. धारा 235
d. धारा 238
677. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 235 के अनुसार, आरोप में किस प्रकार की जानकारी अंतर्विष्ट होनी चाहिए?
a. केवल अपराध का नाम
b. अपराध के समय, स्थान और उससे संबंधित व्यक्ति या वस्तु की पर्याप्त विशिष्टताएं
c. केवल अपराध की धारा
d. केवल अभियुक्त का नाम
678. ऐसे मामलों में, जहां अपराध कई तारीखों के बीच किया गया हो, पहली और अंतिम तारीख के बीच का समय अधिकतम कितना हो सकता है?
a. 3 महीने
b. 6 महीने
c. 1 वर्ष
d. 2 वर्ष
679. धारा 236 के अनुसार, अपराध किए जाने की "रीति" का विवरण आरोप में कब आवश्यक होता है?
a. हमेशा आवश्यक होता है
b. तभी, जब धारा 234 और 235 की विशिष्टताएं पर्याप्त सूचना नहीं देतीं
c. केवल तब, जब अभियुक्त स्वयं उसकी मांग करे
d. जब अपराध गंभीर हो
680. क पर वस्तु-विशेष की एक स्थान व समय पर चोरी करने का आरोप है। आरोप में—
a. चोरी की रीति अवश्य लिखनी होगी
b. रीति लिखना आवश्यक नहीं है
c. परिभाषा अवश्य लिखनी होगी
d. FIR की भाषा कॉपी करनी होगी
681. "क पर ख के साथ छल करने का अभियोग है" — इस स्थिति में क्या आवश्यक होगा?
a. केवल समय और स्थान का उल्लेख
b. केवल अपराध की धारा का उल्लेख
c. वह रीति उपवर्णित करनी होगी जिससे छल किया गया
d. कुछ भी अतिरिक्त नहीं
682. क पर मिथ्या साक्ष्य देने का अभियोग है। आरोप में—
a. साक्ष्य की पूरी सूची देनी होगी
b. वह विशेष भाग बताना होगा जो मिथ्या है
c. केवल कोर्ट का नाम लिखना होगा
d. FIR लिखना पर्याप्त है
683. क पर आरोप है कि उसने लोक सेवक ख को उसके कार्य में बाधित किया। आरोप में—
a. बाधा की रीति लिखना आवश्यक है
b. केवल बाधा शब्द पर्याप्त है
c. परिभाषा लिखना पर्याप्त है
d. कोई वर्णन आवश्यक नहीं
684. "आरोप में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द को उस विधि में दिए गए अर्थ में समझा जाएगा" — यह प्रावधान किस धारा में है?
a. धारा 234
b. धारा 236
c. धारा 237
d. धारा 240
685. भारतीय न्याय संहिता की धारा 237 के अनुसार, आरोप में प्रयुक्त शब्दों का अर्थ किस आधार पर समझा जाएगा?
a. सामान्य शब्दकोश के अनुसार
b. आम बोलचाल की भाषा के अनुसार
c. उस विधि के अनुसार जिसके अधीन अपराध दंडनीय है
d. अभियुक्त की समझ के अनुसार
686. गलतियों का प्रभाव से सम्बंधित धारा कौन सी है?
a. धारा 233
b. धारा 235
c. धारा 238
d. धारा 240
687. धारा 238 के अनुसार, आरोप में की गई कोई गलती या लोप तब ही "तात्त्विक" (material) मानी जाएगी, जब:
a. न्यायालय चाहे तो
b. अभियोजन पक्ष को हानि हुई हो
c. अभियुक्त वास्तव में भुलावे में पड़ा हो और न्याय न हो पाया हो
d. गवाहों की उपस्थिति न हो
688. यदि “कपटपूर्वक” शब्द आरोप से छूट गया है, लेकिन क इससे भ्रमित नहीं हुआ, तो यह गलती—
a. तात्त्विक मानी जाएगी
b. अतात्त्विक (material नहीं) मानी जाएगी
c. आरोप अमान्य हो जाएगा
d. विचारण पुनः करना पड़ेगा
689. क पर 21 जनवरी, 2023 को खुदाबख्श की हत्या करने का आरोप है । वास्तव में हत व्यक्ति का नाम हैदरबख्श था और हत्या की तारीख 20 जनवरी, 2023 थी । क पर कभी भी एक हत्या के अतिरिक्त दूसरी किसी हत्या का आरोप नहीं लगाया गया और उसने मजिस्ट्रेट के समक्ष हुई जांच को सुना था, जिसमें हैदरबख्श के मामले का ही अनन्य रूप से निर्देश किया गया था । न्यायालय इन तथ्यों से यह अनुमान कर सकता है कि-
a. क उससे भुलावे में नहीं पड़ा था और आरोप में यह गलती तात्त्विक नहीं थी ।
b. क उससे भुलावे में पड़ा था और आरोप में यह गलती तात्त्विक थी ।
c. आरोपी निश्चित रूप से भुलावे में पड़ा
d. आरोपी ने पहले से ही उस मामले की जांच सुनी हो
690. भारतीय न्याय संहिता की धारा 239 के अनुसार, न्यायालय आरोप में परिवर्तन या परिवर्धन कब कर सकता है?
a. केवल विचारण शुरू होने से पहले
b. केवल विचारण के दौरान
c. निर्णय सुनाए जाने के पूर्व किसी भी समय
d. केवल अभियोजन की अनुमति से
691. परिवर्तित या परिवर्धित आरोप को अभियुक्त को कैसे बताया जाना चाहिए?
a. लिखित रूप में प्रदान किया जाए
b. उसके वकील को ईमेल किया जाए
c. अभियुक्त को पढ़कर सुनाया और समझाया जाए
d. केवल न्यायालय की डायरी में अंकित किया जाए
692. यदि आरोप में किया गया परिवर्तन ऐसा हो जिससे अभियुक्त या अभियोजक पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता, तो न्यायालय क्या कर सकता है?
a. पुनः जांच का आदेश देगा
b. आरोप खारिज कर देगा
c. विचारण को तुरंत आगे चला सकता है
d. अभियुक्त को रिहा कर देगा
693. धारा 240 के अनुसार, यदि आरोप में परिवर्तन या परिवर्धन किया गया है, तो अभियुक्त को क्या अधिकार है?
a. मामले को खारिज करवाने का
b. नए गवाह लाने का
c. पहले से परीक्षित साक्षियों को पुनः बुलाने और उनसे पूछताछ करने का
d. विचारण को समाप्त करने का
694. यदि न्यायालय साक्षी को पुनः बुलाने की अनुमति नहीं देता, तो उसे क्या करना होता है?
a. मौखिक रूप से मना कर सकता है
b. कारण लिखित रूप में दर्ज करना होता है
c. उच्च न्यायालय को सूचित करना होता है
d. अभियुक्त को दंड देना होता है
695. कब मजिस्ट्रेट सभी आरोपों का एक साथ विचारण कर सकता है?
a. अभियोजन की अनुमति से
b. गवाहों की सहमति से
c. जब अभियुक्त लिखित आवेदन दे और मजिस्ट्रेट को लगे कि इससे प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा
d. जब आरोप साधारण अपराध से संबंधित हों
696. सुभिन्न अपराधों के लिए पृथक् आरोप से सम्बंधित धारा कौन सी है?
a. धारा 241
b. धारा 248
c. धारा 245
d. धारा 246
697. धारा 241 के उपबंध किन धाराओं पर प्रभाव नहीं डालते?
a. धारा 230 से 233
b. धारा 250 से 253
c. धारा 242, 243, 244 और 246
d. धारा 200, 201, 202 और 203
698. यदि किसी व्यक्ति ने एक ही किस्म के अनेक अपराध किए हैं, जो 12 महीनों के भीतर किए गए हैं, तो एक विचारण में अधिकतम कितने अपराधों का आरोप लगाया जा सकता है?
a. 3
b. 10
c. 5
d. कोई सीमा नहीं
699. एक ही किस्म के अपराध माने जाते हैं जब:
a. वे एक ही व्यक्ति के विरुद्ध किए गए हों
b. वे भारतीय न्याय संहिता या अन्य विधियों की एक ही धारा के अधीन समान दंड से दंडनीय हों
c. अभियुक्त उन्हें स्वीकार करे
d. अपराध एक ही स्थान पर हुए हों
700. जब एक ही संव्यवहार से जुड़े एक से अधिक अपराध एक ही व्यक्ति द्वारा किए गए हों, तो:
a. प्रत्येक अपराध के लिए अलग-अलग विचारण होगा
b. सभी अपराधों के लिए एक ही विचारण में आरोप लगाया जा सकता है
c. केवल पहले अपराध का विचारण होगा
d. अपराधों को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता
701. धारा 243 के दृष्टांत के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति घोर उपहति करता है और उसी समय किसी अन्य अपराध का भी आरोपी है, तो:
a. उसे केवल घोर उपहति के लिए आरोपित किया जाएगा
b. दोनों अपराधों के लिए पृथक् आरोप लगाकर एक ही विचारण में चलाया जाएगा
c. अलग-अलग विचारण होंगे
d. दूसरे अपराध की सुनवाई बाद में होगी
702. धारा 243 की उपधारा (5) का प्रभाव किस धारा पर नहीं पड़ता?
a. धारा 235
b. धारा 242
c. धारा 9
d. धारा 117
703. क ने ख को विधिपूर्ण अभिरक्षा से छुड़ाया और कांस्टेबल ग को घोर उपहति पहुँचाई। क पर किन धाराओं में आरोप लगाया जा सकता है?
a. केवल धारा 121(2)
b. केवल धारा 263
c. धारा 121(2) तथा धारा 263 दोनों
d. कोई भी धारा लागू नहीं
704. क दिन में गृहभेदन करता है और उसी घर में ख की पत्नी से बलात्संग करता है। ऐसे में क पर—
a. केवल गृहभेदन का आरोप लगाया जा सकता है
b. केवल बलात्संग का आरोप लगाया जा सकता है
c. गृहभेदन और बलात्संग दोनों के लिए पृथक-पृथक आरोप लगाए जा सकते हैं
d. कोई आरोप नहीं लगाया जा सकता
705. यदि क जानती थी कि बालक को अरक्षित स्थान पर डालने से उसकी मृत्यु होना संभाव्य है, और फिर भी ऐसा करती है, तो यह किस मानसिक अवस्था (mental element) का संकेत है?
a. दुर्भाव (Malice)
b. अत्यधिक लापरवाही (Gross Negligence)
c. अनजाने में हुई भूल
d. कोई अपराध नहीं
706. यदि एक कार्य के तथ्यों से कई अपराधों में से किसी एक के होने का संदेह हो, तो अभियुक्त पर आरोप कैसे लगाए जा सकते हैं?
a. केवल एक अपराध का आरोप लगाया जाएगा
b. अभियुक्त पर सभी संभावित अपराधों के लिए आरोप लगाए जा सकते हैं और इनमें से किसी एक का भी आरोप लगाया जा सकता है
c. अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया जाएगा
d. केवल सबसे गंभीर अपराध का आरोप लगाया जाएगा
707. यदि अभियुक्त पर एक अपराध का आरोप लगाया गया हो लेकिन साक्ष्य से पता चले कि उसने भिन्न अपराध किया है, तो क्या होगा?
a. अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया जाएगा
b. अभियुक्त उस अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जा सकता है, भले ही उस पर आरोप न लगाया गया हो
c. नया आरोप लगाने की जरूरत होगी
d. विचारण स्थगित कर दिया जाएगा
708. धारा 244 के अनुसार, जब संदेह हो कि किस अपराध की श्रेणी में कार्य आता है, तो अभियुक्त पर कैसे आरोप लगाए जा सकते हैं?
a. केवल चोरी के लिए
b. चोरी, चुराई हुई संपत्ति प्राप्त करने, आपराधिक न्यास भंग, या छल में से किसी एक या सभी के लिए
c. केवल आपराधिक न्यास भंग के लिए
d. केवल छल के लिए
709. धारा 246 के तहत, किन व्यक्तियों पर एक साथ आरोप लगाया जा सकता है?
a. वे जिन पर किसी अपराध का अभियोग है और वे जिन पर उस अपराध का दुष्प्रेरण या प्रयत्न करने का अभियोग है।
b. वे जिन पर कोई अपराध नहीं हुआ।
c. वे जिन पर केवल गलतफहमी के कारण आरोप हैं।
d. वे जिन पर विभिन्न प्रकार के अपराध हैं परन्तु वे एक ही समय पर हुए नहीं।
710. धारा 247 के अनुसार, जब एक ही व्यक्ति के विरुद्ध एक से अधिक आरोप (शीर्ष) विरचित होते हैं और उनमें से एक या अधिक के लिए दोषसिद्धि होती है, तो क्या किया जा सकता है?
a. अभियोजन अधिकारी या परिवादी न्यायालय की अनुमति से शेष आरोप वापस ले सकता है।
b. अभियोजन अधिकारी बिना न्यायालय की अनुमति के शेष आरोप वापस ले सकता है।
c. न्यायालय बिना किसी की अनुमति के दोषसिद्धि वाले आरोप भी वापस ले सकता है।
d. दोषसिद्धि होने पर सभी आरोपों को स्वतः वापस ले लिया जाएगा।
711. सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण किस अध्याय से सम्बंधित है?
a. अध्याय 10
b. अध्याय 12
c. अध्याय 15
d. अध्याय 19
712. धारा 248 के अनुसार, सेशन न्यायालय के समक्ष प्रत्येक विचारण में अभियोजन का संचालन कौन करेगा?
a. अभियुक्त स्वयं
b. लोक अभियोजक
c. पुलिस अधिकारी
d. न्यायाधीश
713. धारा 249 के अनुसार, जब अभियुक्त न्यायालय के समक्ष हाजिर होता है या लाया जाता है, तो अभियोजक अपने मामले का कथन कैसे आरंभ करेगा?
a. बिना आरोप बताए सीधे साक्ष्य प्रस्तुत करके।
b. अभियुक्त के विरुद्ध लगाए गए आरोप का वर्णन करते हुए और यह बताते हुए कि वह अभियुक्त के दोष को किस साक्ष्य से साबित करेगा।
c. अभियुक्त को दोषी मानते हुए।
d. अभियोजन का विवरण देने से पहले अभियुक्त से पूछताछ करेगा।
714. उन्मोचन से सम्बंधित धारा कौन सी है?
a. धारा 250
b. धारा 252
c. धारा 256
d. धारा 258
715. धारा 250 के अनुसार, अभियुक्त उन्मोचन के लिए कब तक आवेदन कर सकता है?
a. सुपुर्दगी की तारीख से 30 दिन के भीतर।
b. सुपुर्दगी की तारीख से 60 दिन के भीतर।
c. मुकदमे के अंतिम दिन तक।
d. कभी भी।
716. जब न्यायाधीश अभियुक्त के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं समझता, तो वह क्या कर सकता है?
a. अभियुक्त को दोषी ठहरा सकता है।
b. अभियुक्त को उन्मोचित कर सकता है और कारणों को लिखित में देगा।
c. अभियोजन को और सबूत जुटाने का आदेश देगा।
d. मामले को लंबित रख सकता है।
717. आरोप विरचित करना किस धारा से सम्बंधित है ?
a. धारा 255
b. धारा 251
c. धारा 253
d. धारा 252
718. धारा 251 के अनुसार, यदि न्यायाधीश को लगता है कि अभियुक्त ने ऐसा अपराध किया है जो अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय नहीं है, तो क्या कर सकता है?
a. अभियुक्त को दोषी ठहरा सकता है।
b. अभियुक्त के विरुद्ध आरोप विरचित कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष मामले को अंतरित कर सकता है।
c. मामले को तुरंत खारिज कर सकता है।
d. मामले को पुलिस को वापस भेज सकता है।
719. धारा 251 के अंतर्गत, यदि अपराध अनन्यतः उसी न्यायालय द्वारा विचारणीय है, तो न्यायाधीश कब तक आरोप लिखित रूप में विरचित करेगा?
a. सुनवाई की पहली तारीख से 30 दिन के भीतर।
b. सुनवाई की पहली तारीख से 60 दिन के भीतर।
c. सुनवाई की पहली तारीख से 90 दिन के भीतर।
d. कोई समय सीमा नहीं।
720. जब न्यायाधीश धारा 251(2) के तहत आरोप विरचित करता है, तो अभियुक्त को क्या करना होगा?
a. आरोप पढ़े और समझाए जाएंगे, फिर अभियुक्त से पूछा जाएगा कि क्या वह दोषी है या विचारण चाहता है।
b. अभियुक्त को बिना आरोप बताए दोषी ठहराया जाएगा।
c. अभियुक्त को तुरंत जेल भेज दिया जाएगा।
d. अभियुक्त को जमानत पर छोड़ा जाएगा।
721. धारा 251 के अनुसार, आरोप विरचित करने के बाद अभियुक्त को किस माध्यम से आरोप सुनाए जा सकते हैं?
a. केवल लिखित रूप में।
b. केवल श्रव्य (audio) माध्यम से।
c. शारीरिक रूप से या श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों द्वारा।
d. आरोप सुनाना आवश्यक नहीं।
722. दोषी होने का अभिवचन किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 256
b. धारा 252
c. धारा 251
d. धारा 250
723. धारा 252 के अनुसार, यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करता है, तो न्यायाधीश क्या करेगा?
a. अभियुक्त को तुरंत जेल भेज देगा।
b. अभिवचन को लेखबद्ध करेगा और उसके आधार पर स्वविवेकानुसार दोषसिद्ध कर सकता है।
c. अभियोजन को मामले को वापस लेने का आदेश देगा।
d. अभियुक्त को बिना सुनवाई के बरी कर देगा।
724. धारा 253 के अनुसार, यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन नहीं करता या विचारण का दावा करता है, तो न्यायाधीश क्या करेगा?
a. अभियुक्त को दोषी ठहरा देगा।
b. साक्षियों की परीक्षा के लिए तारीख नियत करेगा।
c. मामले को तुरंत बंद कर देगा।
d. अभियोजन को मामले को वापस लेने का आदेश देगा।
725. धारा 253 के तहत, अभियोजन के आवेदन पर न्यायाधीश किसके लिए आदेशिका जारी कर सकता है?
a. किसी साक्षी को हाजिर होने के लिए।
b. कोई दस्तावेज या अन्य चीज पेश करने के लिए।
c. दोनों a और b
d. अभियुक्त को दोषी ठहराने के लिए।
726. न्यायाधीश प्रतिपरीक्षा के संदर्भ में क्या कर सकता है?
a. प्रतिपरीक्षा को स्थायी रूप से बंद कर सकता है।
b. प्रतिपरीक्षा को तब तक आस्थगित कर सकता है जब तक अन्य साक्षियों की परीक्षा पूरी न हो जाए।
c. अतिरिक्त प्रतिपरीक्षा के लिए किसी साक्षी को पुनः नहीं बुला सकता।
d. प्रतिपरीक्षा की अनुमति देना आवश्यक नहीं।
727. दोषमुक्ति किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 255
b. धारा 256
c. धारा 258
d. धारा 260
728. धारा 255 के अनुसार, कब न्यायाधीश दोषमुक्ति का आदेश देगा?
a. जब अभियोजन पक्ष के साक्ष्य पर्याप्त हों।
b. जब अभियोजन का साक्ष्य लेने, अभियुक्त की परीक्षा करने, और दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायाधीश को लगे कि अभियुक्त ने अपराध नहीं किया है।
c. जब अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करे।
d. जब अभियोजन पक्ष अपने केस को वापस ले ले।
729. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि का निर्णय किस धारा से सम्बंधित है ?
a. धारा 256
b. धारा 265
c. धारा 258
d.धारा 268
730. धारा 258 के अनुसार, बहस और विधि प्रश्न सुनने के बाद न्यायाधीश मामले में निर्णय कब तक देगा?
a. बहस पूर्ण होने की तारीख से 15 दिन के भीतर।
b. बहस पूर्ण होने की तारीख से 30 दिन के भीतर, जिसे 45 दिन तक बढ़ाया जा सकता है।
c. बहस पूर्ण होने की तारीख से 60 दिन के भीतर।
d. निर्णय देने की कोई निश्चित अवधि नहीं है।
731. न्यायालय उचित कारण न मिलने पर उस व्यक्ति को कितना प्रतिकर देने का आदेश दे सकता है?
a. पाँच हजार रुपये से अधिक नहीं।
b. पाँच हजार रुपये से अधिक, जितनी राशि वह अवधारित करे।
c. दस हजार रुपये निश्चित।
d. कोई प्रतिकर नहीं।
732. मजिस्ट्रेटों द्वारा वारण्ट मामलों का विचारण किस अध्याय से सम्बंधित है?
a. अध्याय 20
b. अध्याय 22
c. अध्याय 24
d. अध्याय 23
733. धारा 261 का संबंध किस प्रक्रिया की जांच से है?
a. जमानत आदेश जारी करने से
b. आरोप पत्र को खारिज करने से
c. धारा 230 के अनुपालन की पुष्टि करने से
d. पुलिस को निर्देश देने से
734. जब अभियुक्त का उन्मोचन किया जाएगा किस अध्याय से सम्बंधित है?
a. धारा 262
b. धारा 265
c. धारा 269
d. धारा 270
735. धारा 262 के अनुसार, अभियुक्त उन्मोचन के लिए आवेदन कब कर सकता है?
a. दस्तावेज़ों की प्रतियाँ प्राप्त होने के 30 दिन बाद
b. गिरफ्तारी के दिन
c. धारा 230 के अधीन दस्तावेजों की प्रतियां मिलने की तिथि से 60 दिन के भीतर
d. विचारण की समाप्ति के बाद
736. धारा 263 किससे सम्बंधित है?
a. आरोप विरचित करना
b. विचारण की समाप्ति
c. आरोप पत्र को खारिज करने से
d. उपरोक्त सभी
737. धारा 263 के अनुसार, मजिस्ट्रेट को आरोप कब तक विरचित करना होता है?
a. विचारण की अंतिम तिथि से 30 दिन के भीतर
b. अभियुक्त की गिरफ्तारी के 90 दिन बाद
c. आरोप की पहली सुनवाई की तिथि से 60 दिन के भीतर
d. पुलिस रिपोर्ट प्राप्त होने के 15 दिन बाद
738. यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवाक् करता है, तो मजिस्ट्रेट क्या करेगा?
a. अभियुक्त को तुरंत जेल भेज देगा
b. उस अभिवाक् को लेखबद्ध करेगा और उसके आधार पर दोषसिद्ध कर सकता है
c. अभियुक्त को उच्च न्यायालय भेज देगा
d. अभियुक्त को ज़मानत पर छोड़ देगा
739. धारा 264 किससे संबंधित है?
a. साक्ष्य एकत्र करने से
b. जमानत याचिका दायर करने से
c. दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि से
d. अपील दायर करने की प्रक्रिया से
740. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि किससे संबंधित है?
a. धारा 271
b. धारा 272
c. धारा 273
d. धारा 275
741. पूर्व दोषसिद्धि के आरोप पर, यदि अभियुक्त स्वीकार नहीं करता कि उसे पहले दोषसिद्ध किया गया था, तो मजिस्ट्रेट क्या करेगा?
a. अभियुक्त को बिना साक्ष्य के दोषसिद्ध करेगा
b. अभियुक्त को दोषसिद्ध करने के पश्चात् पूर्व दोषसिद्धि के बारे में साक्ष्य लेगा और निष्कर्ष अभिलिखित करेगा
c. आरोप वापस लेगा
d. मामले को निपटाने से इनकार करेगा
742. धारा 272 के अनुसार, अभियुक्त को कब उन्मोचित किया जा सकता है?
a. आरोप विरचित करने के बाद ही
b. आरोप विरचित किए जाने के पूर्व किसी भी समय
c. केवल परिवादी की उपस्थिति में
d. केवल जब अपराध संज्ञेय हो
743. जब कार्यवाही परिवाद पर संस्थित होती है और सुनवाई के दिन परिवादी अनुपस्थित होता है, तब मजिस्ट्रेट क्या कर सकता है?
a. मामले को स्थगित कर सकता है
b. अभियुक्त को उन्मोचित कर सकता है, यदि अपराध का विधिपूर्वक शमन संभव हो या वह संज्ञेय अपराध न हो
c. परिवादी को दंडित कर सकता है
d. अभियुक्त को दोषी ठहरा सकता है
744. यदि मजिस्ट्रेट किस धारा के अधीन किसी मामले में यह निष्कर्ष निकालता है कि अभियुक्त दोषी नहीं है, तो वह दोषमुक्ति का आदेश अभिलिखित करेगा?
a. धारा 275
b. धारा 271
c. धारा 273
d. धारा 278
745. मजिस्ट्रेट प्रतिकर आदेश में किस प्रकार का दंड भी शामिल कर सकता है?
a. केवल जुर्माना
b. केवल कारावास
c. जुर्माना और तीस दिन तक का साधारण कारावास
d. कोई दंड नहीं
746. धारा 273(6) के अनुसार अपील किस स्थिति में की जा सकती है?
a. जब प्रतिकर की राशि ₹1000 से अधिक हो
b. जब प्रतिकर की राशि ₹2000 से अधिक हो
c. जब प्रतिकर की राशि ₹5000 से कम हो
d. जब कोई अभियुक्त दोषी हो
747. यदि कोई मामला अपीलनीय नहीं है, तो प्रतिकर कब दिया जाएगा?
a. आदेश के तुरंत बाद
b. आदेश की तारीख से एक माह पूरा होने के बाद
c. पुलिस अनुमति के बाद
d. मजिस्ट्रेट की अगली सुनवाई पर
748. मजिस्ट्रेट द्वारा समन मामलों का विचारण किन धाराओं में वर्णित है ?
a. धारा 274-282
b. धारा 273-280
c. धारा 275-283
d. धारा 270-282
749. अभियोग का सारांश बताया जाना किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 276
b. धारा 274
c. धारा 280
d. धारा 285
750. जब समन-मामले में अभियुक्त मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होता है, तो मजिस्ट्रेट उसे क्या बताएगा?
a. उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं है
b. उस अपराध की विशिष्टियां जिनका उस पर अभियोग है
c. उसकी गिरफ्तारी की तारीख
d. उसकी सजा की संभावना
751. दोषी होने के अभिवाक पर दोषसिद्धि किस धारा से सम्बंधित है?
यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवाक् करता है, तो मजिस्ट्रेट क्या करेगा?
a. उसे तुरंत गिरफ्तार करेगा
b. अभिवाक् को लेखबद्ध करेगा और उसके आधार पर दोषसिद्ध करेगा
c. मामले को उच्च न्यायालय भेजेगा
d. अभियुक्त को उन्मोचित कर देगा
752. छोटे मामलों में अभियुक्त की अनुपस्थिति में दोषी होने के अभिवाक् पर दोषसिद्धि किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 276
b. धारा 278
c. धारा 280
d. धारा 282
753. यदि परिवादी नियत दिन या बाद की सुनवाई के दिन हाजिर नहीं होता है, तो मजिस्ट्रेट अभियुक्त के साथ क्या कर सकता है?
a. अभियुक्त को दोषसिद्ध कर देगा
b. परिवादी को तीस दिन का समय देने के बाद अभियुक्त को दोषमुक्त कर देगा
c. मामले को रद्द कर देगा
d. परिवादी को जुर्माना लगाएगा
754. परिवाद को वापस लेना किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 276
b. धारा 278
c. धारा 280
d. धारा 282
755. मजिस्ट्रेट कब परिवाद वापस लेने की अनुज्ञा दे सकता है?
a. अभियुक्त की मांग पर
b. अंतिम आदेश पारित होने से पहले जब उसे पर्याप्त आधार लगे कि परिवाद वापस लिया जाना चाहिए
c. अभियोजन की अनुमति के बिना
d. केवल परिवादी की मृत्यु होने पर
756. यदि मजिस्ट्रेट परिवाद वापस लेने की अनुमति देता है तो क्या कार्रवाई करेगा?
a. अभियुक्त को दोषसिद्ध करेगा
b. मामला वापस कर देगा
c. अभियुक्त को दोषमुक्त कर देगा
d. परिवादी को जुर्माना लगाएगा
757. कतिपय मामलों में कार्यवाही रोक देने की शक्ति किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 279
b. धारा 281
c. धारा 280
d. धारा 282
758. धारा 281 के अंतर्गत कार्यवाही रोकने की अनुमति किसे हो सकती है?
a. कोई भी मजिस्ट्रेट बिना मंजूरी के
b. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी से कोई अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
c. केवल उच्च न्यायालय
d. पुलिस अधिकारी
759. मुख्य साक्षियों के साक्ष्य अभिलेखित होने के बाद यदि कार्यवाही रोकी जाती है तो मजिस्ट्रेट क्या कर सकता है?
a. मामला लंबित रख सकता है
b. दोषमुक्ति का निर्णय सुना सकता है
c. अभियुक्त को सजा दे सकता है
d. अभियोजन को नया मौका दे सकता है
760. धारा 282 के अनुसार, मजिस्ट्रेट कब समन-मामले को वारण्ट मामले में परिवर्तित कर सकता है, जब अपराध-
a. तीन महीने से अधिक कारावास का दंडनीय हो
b. छह माह से अधिक कारावास का दंडनीय हो और न्याय के हित में ऐसा लगे
c. जब अभियुक्त दोषी हो
d. जब परिवादी उपस्थित न हो
761. धारा 283 किससे सम्बन्धित है?
a. संक्षिप्त विचारण करने की शक्ति
b. परिवादी का हाजिर न होना या उसकी मृत्यु
c. कतिपय मामलों में कार्यवाही रोक देने की शक्ति
d. परिवाद को वापस लेना
762. धारा 283 के अनुसार, कौन-कौन से मजिस्ट्रेट संक्षिप्त विचारण कर सकते हैं?
a. कोई भी मजिस्ट्रेट
b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
c. द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट
d. केवल उच्च न्यायालय
763. संक्षिप्त विचारण के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सा अपराध शामिल है?
a. हत्या
b. चोरी जहां संपत्ति का मूल्य 20,000 रुपए से अधिक नहीं है
c. आतंकवाद
d. यौन अपराध
764. संक्षिप्त विचारण के दौरान मजिस्ट्रेट को क्या करना चाहिए यदि उसे लगता है कि मामला संक्षिप्त विचारण के लिए उपयुक्त नहीं है?
a. मामला खारिज कर दे
b. साक्षियों को पुनः बुलाकर मामले की पुनः सुनवाई करे
c. दोषी को तुरंत सजा दे
d. अभियुक्त को दोषमुक्त कर दे
765. संक्षिप्त विचारण के अंतर्गत किस प्रकार के अपराधों का विचारण किया जा सकता है?
a. ऐसे अपराध जो मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय हैं
b. ऐसे अपराध जो तीन वर्ष से अधिक कारावास के लिए दंडनीय नहीं हैं
c. सभी गंभीर अपराध
d. केवल गैर-संज्ञेय अपराध
766. धारा 283 के तहत संक्षिप्त विचारण के निर्णय के विरुद्ध अपील की जा सकती है?
a. हाँ, हमेशा
b. केवल उच्च न्यायालय में
c. नहीं, किसी भी मजिस्ट्रेट के निर्णय के विरुद्ध अपील नहीं होग
d. केवल परिवादी कर सकता है
767. धारा 284 के अनुसार, उच्च न्यायालय किसे संक्षिप्त विचारण करने की शक्ति प्रदान कर सकता है?
a. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को
b. द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट को
c. केवल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को
d. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को
768. धारा 285 के अनुसार, संक्षिप्त विचारण में किस प्रक्रिया का पालन किया जाएगा?
a. कोई भी स्वतंत्र प्रक्रिया
b. समन-मामलों के विचारण के लिए विनिर्दिष्ट प्रक्रिया
c. सामान्य सिविल प्रक्रिया
d. केवल साक्ष्यों की प्रस्तुति
769. संक्षिप्त विचारण के बाद तीन माह से अधिक की कैद का दंड आदेश दिया जा सकता है?
a. हाँ
b. नहीं
c. केवल विशेष परिस्थितियों में
d. केवल न्यायालय की अनुमति से
770. संक्षिप्त विचारण में मजिस्ट्रेट को कौन-कौन सी विशिष्टियां अभिलेख में प्रविष्ट करनी होती हैं?
a. केवल अभियुक्त का नाम और अपराध की तारीख
b. केवल दंडादेश और निष्कर्ष
c. मामले का क्रम संख्या, अपराध की तारीख, रिपोर्ट या परिवाद की तारीख, परिवादी और अभियुक्त का नाम, अपराध का विवरण, अभियुक्त का अभिवाक्, निष्कर्ष, दंडादेश और कार्यवाही समाप्ति की तारीख
d. केवल अपराध का विवरण और अभियुक्त का अभिवाक्
771. धारा 286 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सा अभिलेख में शामिल नहीं किया जाएगा?
a. अभियुक्त का माता-पिता का नाम
b. अपराध किए जाने की तारीख
c. मामले की अपील की तारीख
d. दंडादेश या अन्य अंतिम आदेश
772. संक्षिप्त विचारणों के अभिलेख में संपत्ति के मूल्य का उल्लेख कब किया जाएगा?
a. हर मामले में
b. धारा 283 की उपधारा (1) के खंड (i), (ii) या (iii) के अंतर्गत आने वाले मामलों में
c. केवल जब अभियुक्त दोषी सिद्ध हो
d. जब परिवादी उपस्थित न हो
773. संक्षेपतः विचारित मामलों में निर्णय किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 287
b. धारा 286
c. धारा 288
d. धारा 284
774. संक्षेपतः विचारित मामले में यदि अभियुक्त दोषी होने का अभिवाक् नहीं करता है, तो मजिस्ट्रेट क्या करेगा?
a. अभियुक्त को दोषी घोषित कर देगा
b. साक्ष्य का सारांश और निष्कर्ष के कारणों का संक्षिप्त कथन देते हुए निर्णय अभिलिखित करेगा
c. मामले को वापस जांच के लिए भेज देगा
d. बिना कोई निर्णय सुनाए मामले को स्थगित कर देगा
775. धारा 287 के अनुसार, संक्षेपतः विचारित मामले में निर्णय के साथ क्या देना अनिवार्य है?
a. अभियुक्त की पूरी कहानी
b. साक्ष्य का सारांश और निष्कर्ष के कारणों का संक्षिप्त कथन
c. केवल दोषसिद्धि का आदेश
d. केवल सजा का विवरण
776. संक्षेपतः विचारण में निर्णय कब अभिलिखित किया जाएगा?
a. केवल जब अभियुक्त दोषी हो
b. जब अभियुक्त दोषी होने का अभिवाक् नहीं करता हो
c. हमेशा बिना किसी शर्त के
d. केवल अभियोजन पक्ष की अनुमति से
777. धारा 288 के अनुसार किससे सम्बन्धित है?
a. अभियुक्त दोषी होने का अभिवाक्
b. अभिलेख और निर्णय की भाषा
c. अभियोजन पक्ष की भाषा
d. उच्च न्यायालय द्वारा संक्षेपतः विचारण
778. धारा 288 के अनुसार, अभिलेख और निर्णय किस भाषा में लिखे जाएंगे?
a. अभियोजन पक्ष की भाषा में
b. न्यायालय की भाषा में
c. अभियुक्त की भाषा में
d. किसी भी स्थानीय भाषा में
779. कौन उच्च न्यायालय द्वारा संक्षेपतः विचारण के लिए प्राधिकृत मजिस्ट्रेट को अभिलेख या निर्णय तैयार कराने के लिए नियुक्त किया जा सकता है?
a. कोई भी अधिकारी
b. अभियोजन अधिकारी
c. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा नियुक्त कोई अधिकारी
d. अभियुक्त का वकील
780. धारा 288 के तहत, जो अभिलेख या निर्णय अधिकारी से तैयार कराया जाता है, उसे कौन हस्ताक्षरित करेगा?
a. अधिकारी जिसने तैयार किया है
b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
c. मजिस्ट्रेट जिसे उच्च न्यायालय ने संक्षेपतः विचारण के लिए सशक्त किया है
d. अभियोजन पक्ष
781. सौदा अभिवाक् के लिए आवेदन किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 290
b. धारा 299
c. धारा 289
d. धारा 295
782. सौदा अभिवाक् के लिए अभियुक्त को आवेदन कितनी अवधि के भीतर फाइल करना होगा?
a. 10 दिन
b. 15 दिन
c. 30 दिन
d. 60 दिन
783. जब न्यायालय यह समझता है कि आवेदन स्वेच्छा से किया गया है, तो वह अभियुक्त को मामले का निपटारा करने के लिए कितना समय देगा?
a. 30 दिन
b. 45 दिन
c. 60 दिन
d. 90 दिन
784. धारा 291 के अधीन जब संतोषप्रद निपटारा तैयार हो जाता है, तो न्यायालय क्या करेगा?
a. केवल अभियुक्त को दोषी ठहराएगा
b. ऐसे निपटारे की रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें न्यायालय के पीठासीन अधिकारी और बैठक में भाग लेने वाले सभी व्यक्तियों के हस्ताक्षर होंगे
c. मामले को वापस पुलिस के पास भेज देगा
d. सीधे दंडादेश जारी करेगा
785. जब धारा 292 के अधीन संतोषप्रद निपटारा तैयार होता है, न्यायालय सबसे पहले क्या करेगा?
a. अभियुक्त को तुरंत जेल भेज देगा
b. पीड़ित को प्रतिकर देगा और अभियुक्त पर दंड की मात्रा निर्धारित करेगा
c. मामले को वापस पुलिस को भेज देगा
d. अभियुक्त को दोषमुक्त कर देगा
786. न्यायालय किस स्थिति में अभियुक्त को सदाचार की परिवीक्षा पर छोड़ सकता है?
a. जब अभियुक्त ने अपराध स्वीकार किया हो
b. जब न्यायालय को लगे कि धारा 401 या अपराधी परिवीक्षा अधिनियम या तत्समय विधि के प्रावधान लागू होते हैं
c. जब अभियुक्त का पहला अपराध हो
d. जब अभियुक्त दोषमुक्त हो
787. न्यायालय का निर्णय देने का तरीका क्या होगा?
a. न्यायालय निर्णय गुप्त रूप से देगा
b. न्यायालय निर्णय लिखित रूप में केवल रजिस्टर में रखेगा
c. न्यायालय अपना निर्णय खुले न्यायालय में देगा और उस पर पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर होंगे
d. न्यायालय निर्णय केवल अभियुक्त को बताएगा
788. धारा 295 के अनुसार न्यायालय के निर्णय के संबंध में कौन सा कथन सही है?
a. न्यायालय का निर्णय प्रारंभिक होता है और उस पर अपील की जा सकती है
b. न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध कोई भी अपील या याचिका दायर की जा सकती है
c. न्यायालय का निर्णय अंतिम होगा और उससे कोई अपील नहीं होगी, सिवाय संविधान के अनुच्छेद 136, 226 और 227 के अंतर्गत विशेष इजाजत याचिका और रिट याचिका के
d. न्यायालय का निर्णय केवल अभियुक्त के पक्ष में होगा
789. धारा 300 के अनुसार, इस अध्याय का लागू होना किसके लिए नहीं होगा?
a. सभी व्यक्तियों के लिए।
b. किसी भी अभियुक्त के लिए।
c. किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 में परिभाषित किशोर या बालक के लिए।
d. वयस्कों के लिए।
790. इस अध्याय में "निरुद्ध" का अर्थ क्या है?
a. केवल गिरफ्तारी।
b. निवारक निरोध के लिए उपबंध करने वाली विधि के अधीन निरुद्ध।
c. केवल कारावास।
d. अदालत में पेशी।
791. "कारागार" किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 301(a)
b. धारा 301(b)
c. धारा 301(c)
d. धारा 301(d)
792. धारा 304 किस विषय से संबंधित है?
a. कारागार का भारसाधक अधिकारी कतिपय आकस्मिकताओं में आदेश को कार्यान्वित करना
b. बन्दी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
c. सौदा अभिवाक् के लिए आवेदन
d. कारागार में साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन जारी करने की शक्ति
793. कारागार का भारसाधक अधिकारी कब धारा 302 के तहत दिए गए आदेश को कार्यान्वित नहीं करेगा?
a. जब व्यक्ति को कारागार से हटाना सरल हो।
b. जब व्यक्ति बीमारी या अंगशैथिल्य के कारण कारागार से हटाए जाने योग्य न हो।
c. जब व्यक्ति स्वयं उपस्थित होना चाहे।
d. जब अदालत आदेश दे।
794. धारा 304 किस विषय से संबंधित है?
a. कारागार का भारसाधक अधिकारी कतिपय आकस्मिकताओं में आदेश को कार्यान्वित न करना
b. बन्दी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
c. सौदा अभिवाक् के लिए आवेदन
d. कारागार में साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन जारी करने की शक्ति
795. धारा 305 किस विषय से संबंधित है?
a. कारागार का भारसाधक अधिकारी कतिपय आकस्मिकताओं में आदेश को कार्यान्वित करना
b. बन्दी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
c. सौदा अभिवाक् के लिए आवेदन
d. कारागार में साक्षी की परीक्षा के लिए कमीशन जारी करने की शक्ति
796. धारा 307 किससे सम्बन्धित है?
a. न्यायालयों की भाषा
b. कारागार का भारसाधक अधिकारी कतिपय आकस्मिकताओं में आदेश को कार्यान्वित करना
c. बन्दी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
d. सौदा अभिवाक् के लिए आवेदन
797. धारा 307 के अनुसार, राज्य सरकार किस बात को निर्धारित कर सकती है?
a. उच्च न्यायालय की कार्यवाही का तरीका।
b. राज्य के भीतर उच्च न्यायालय से भिन्न प्रत्येक न्यायालय की भाषा।
c. न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति।
d. अदालत की कार्यवाही का समय।
798. धारा 308 किससे संबंधित है?
a. न्यायालयों की भाषा
b. बन्दी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
c. साक्ष्य का अभियुक्त की उपस्थिति में लिया जाना
d. सौदा अभिवाक् के लिए आवेदन
799. सामान्यतः विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य कब लिया जाएगा?
a. केवल पुलिस की उपस्थिति में।
b. अधिवक्ता की उपस्थिति में।
c. अभियोजन की उपस्थिति में।
d. अभियुक्त की उपस्थिति में नहीं।
800. अठारह वर्ष से कम आयु की महिला, जिससे बलात्संग या लैंगिक अपराध का अभिकथन किया गया है, के साक्ष्य के संबंध में न्यायालय क्या सुनिश्चित करेगा?
a. महिला का अभियुक्त से सामना न हो।
b. अभियुक्त का सामना महिला से हो।
c. महिला को केवल लिखित बयान देना होगा।
d. महिला को अदालत में उपस्थित होना अनिवार्य है।
801. धारा 309 किस प्रकार के मामलों से संबंधित है?
a. समन मामलों और जांचों में अभिलेख
b. न्यायालयों की भाषा
c. बन्दी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
d. साक्ष्य का अभियुक्त की उपस्थिति में लिया जाना
802. धारा 310 किस प्रकार के मामलों से संबंधित है?
a. वारण्ट- मामलों में अभिलेख
b. समन मामलों और जांचों में अभिलेख
c. न्यायालयों की भाषा
d. बन्दी का न्यायालय में अभिरक्षा में लाया जाना
803. वारंट मामलों में प्रत्येक साक्षी का साक्ष्य किस प्रकार लिया जाएगा?
a. केवल अभियोजन पक्ष की उपस्थिति में।
b. मजिस्ट्रेट द्वारा स्वयं लिखा जाएगा, या खुले न्यायालय में बोलकर लिखवाया जाएगा, या किसी अधिकारी द्वारा निदेशन में लिखा जाएगा।
c. केवल अभियुक्त की उपस्थिति में।
d. केवल वीडियो कॉल के माध्यम से।
804. धारा 311 किससे संबंधित है?
a. सेशन न्यायालय के समक्ष विचारण में अभिलेख
b. वारण्ट- मामलों में अभिलेख
c. समन मामलों और जांचों में अभिलेख
d. न्यायालयों की भाषा
805. धारा 315 किस विषय से संबंधित है?
a. वारण्ट- मामलों में अभिलेख
b. समन मामलों और जांचों में अभिलेख
c. न्यायालयों की भाषा
d. साक्षी की भावभंगी के बारे में टिप्पणियां
806. साक्षी की भावभंगी पर टिप्पणियाँ कौन अभिलिखित करता है?
a. अभियोजन पक्ष
b. पुलिस अधिकारी
c. पीठासीन न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट
d. अभियुक्त का अधिवक्ता
807. अभियुक्त की परीक्षा किस धारा के तहत होती है?
a. धारा 310
b. धारा 313
c. धारा 316
d. धारा 318
808. यदि अभियुक्त का परीक्षण इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किया गया है और वह अभिरक्षा में है, तो हस्ताक्षर कब लिए जाने चाहिए?
a. एक सप्ताह के भीतर
b. परीक्षण के तुरंत बाद
c. 72 घंटे (बहत्तर घंटे) के भीतर
d. जब न्यायालय सुविधाजनक समझे
809. धारा 317 के अनुसार, जब किसी साक्ष्य या कथन का अनुवाद किया जाना होता है, तो कौन जिम्मेदार होता है?
a. अभियुक्त
b. न्यायालय का लिपिक
c. दुभाषिया
d. मजिस्ट्रेट
810. दंड न्यायालय द्वारा जब किसी दुभाषिए की सेवा ली जाती है, तो उस पर कौन-सी जिम्मेदारी होती है?
a. साक्ष्य को संपादित करना
b. साक्ष्य को संक्षेप में प्रस्तुत करना
c. साक्ष्य या कथन का ठीक-ठीक भाषान्तर करना
d. साक्ष्य का न्यायिक मूल्यांकन करना
811. धारा 318 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a. उच्च न्यायालय में अभिलेख
b. न्यायिक मूल्यांकन करना
c. साक्ष्य को संपादित करना
d. साक्ष्य को संक्षेप में प्रस्तुत करना
812. धारा 319 किस स्थिति में लागू होती है?
a. समन मामलों और जांचों में अभिलेख
b. न्यायालयों की भाषा
c. साक्षी की भावभंगी के बारे में टिप्पणियां
d. साक्षियों को जब हाजिर होने से अभिमुक्ति दी जाए और कमीशन जारी किया जाएगा
813. धारा 319 के अनुसार, कब न्यायालय या मजिस्ट्रेट साक्षी की हाजिरी से अभिमुक्ति दे सकता है?
a. जब अभियुक्त दोषी हो
b. जब साक्षी अस्वीकार्य हो
c. जब हाजिरी में अत्यधिक विलंब, व्यय या असुविधा हो
d. जब साक्ष्य पहले ही दर्ज हो चुका हो
814. यदि साक्षी भारत के ऐसे क्षेत्र में है जहाँ इस संहिता (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) का विस्तार होता है, तो कमीशन किसे निदिष्ट किया जाएगा?
a. जिला कलेक्टर को
b. साक्षी के अधिवक्ता को
c. संबंधित थाने के प्रभारी को
d. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को, जिसकी स्थानीय अधिकारिता में साक्षी पाया जा सकता है
815. धारा 321 किससे सम्बन्धित है?
a. कमीशन का निष्पादन
b. कमीशन किसको जारी किया जाएगा
c. साक्षियों को जब हाजिर होने से अभिमुक्ति
d. उच्च न्यायालय में अभिलेख
816. कमीशन का निष्पादन करते समय मजिस्ट्रेट किन शक्तियों का प्रयोग कर सकता है?
a. सिविल प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत शक्तियाँ
b. राष्ट्रपति के विशेषाधिकार
c. वारंट मामलों के विचारण की शक्तियाँ
d. केवल सूचना प्राप्त करने की शक्ति
817. कमीशन का लौटाया जाना किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 327
b. धारा 323
c. धारा 320
d. धारा 322
818. धारा 319 के तहत जारी कमीशन के निष्पादन के बाद, कमीशन और उससे संबद्ध अभिसाक्ष्य किसे लौटाया जाएगा?
a. अभियुक्त को
b. उस न्यायालय या मजिस्ट्रेट को जिसने कमीशन जारी किया था
c. पक्षकारों को सीधे
d. पुलिस अधिकारी को
819. विदेशी कमीशनों के निष्पादन से का संबंध किससे है?
a. धारा 324
b. धारा 325
c. धारा 325
d. धारा 328
820. चिकित्सीय साक्षी का अभिसाक्ष्य का संबंध किससे है?
a. धारा 324
b. धारा 325
c. धारा 323
d. धारा 326
821. मजिस्ट्रेट की शिनाख्त रिपोर्ट का संबंध किससे है?
a. धारा 327
b. धारा 325
c. धारा 323
d. धारा 326
822. टकसाल के अधिकारियों का साक्ष्य का संबंध किससे है?
a. धारा 327
b. धारा 325
c. धारा 323
d. धारा 328
823. सरकारी वैज्ञानिक विशेषज्ञ की स्वहस्ताक्षरित रिपोर्ट का उपयोग कब किया जा सकता है?
a. केवल जब विशेषज्ञ को साक्षी के रूप में बुलाया गया हो
b. किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के तौर पर, भले ही विशेषज्ञ को बुलाया न गया हो
c. केवल अभियोजन की अनुमति पर
d. केवल न्यायालय की विशेष अनुमति पर
824. यदि न्यायालय सही समझता है तो वह क्या कर सकता है?
a. विशेषज्ञ को समन कर उसकी रिपोर्ट की परीक्षा कर सकता है
b. रिपोर्ट को खारिज कर सकता है
c. विशेषज्ञ की रिपोर्ट को प्रमाणिक नहीं मान सकता
d. रिपोर्ट की प्रति को नष्ट कर सकता है
825. यदि न्यायालय द्वारा समन किए गए विशेषज्ञ स्वयं उपस्थित नहीं हो सके तो क्या किया जा सकता है?
a. कोई अन्य व्यक्ति भी उपस्थित हो सकता है
b. विशेषज्ञ को मजबूर किया जाएगा कि वह जरूर उपस्थित हो
c. विशेषज्ञ अपने साथ काम करने वाले जिम्मेदार अधिकारी को प्रतिनिधि भेज सकता है, यदि वह मामले से अवगत हो और न्यायालय में अभिसाक्ष्य दे सके
d. न्यायालय को मामले की सुनवाई स्थगित करनी होगी
826. निम्न में से कौन-कौन इस धारा के तहत सरकारी वैज्ञानिक विशेषज्ञ हैं?
a. सरकार का कोई रासायनिक परीक्षक या सहायक रासायनिक परीक्षक
b. निदेशक अंगुली-छाप ब्यूरो
c. मुख्य विस्फोटक नियंत्रक
d. उपरोक्त सभी
827. पूर्व दोषसिद्धि या दोषमुक्ति कैसे साबित की जाए किस धारा से सम्बंधित है ?
a. धारा 337
b. धारा 335
c. धारा 333
d. धारा 334
828. जांचों तथा विचारणों के बारे में साधारण उपबंध किस अध्याय से सम्बन्धित है?
a. अध्याय 22
b. अध्याय 24
c. अध्याय 27
d. अध्याय 26
829. "दोहरे खतरे" सिद्धांत का क्या अर्थ है?
a. जब व्यक्ति दोषमुक्त हो
b. एक ही अपराध के लिए दो बार विचारण नहीं
c. जब व्यक्ति दोषसिद्ध हो
d. जब उसी अपराध के लिए पुनः विचारण हो
830. यदि किसी व्यक्ति को सक्षम न्यायालय द्वारा एक बार किसी अपराध के लिए दोषमुक्त या दोषसिद्ध किया गया है, तो वह क्या दोबारा उसी अपराध के लिए विचारण का भागी बन सकता है?
a. हाँ, अगर गवाह बदल जाएँ
b. नहीं, जब तक दोषसिद्धि या दोषमुक्ति प्रवृत्त है
c. हाँ, अगर पुलिस जांच दोबारा करे
d. हाँ, अगर शिकायतकर्ता सहमत हो
831. राज्य सरकार की अनुमति से पुनः विचारण कब किया जा सकता है?
a. जब सजा पूरी न हुई हो
b. जब कोई नया साक्ष्य मिले
c. जब दूसरा अपराध पूर्व अपराध से भिन्न हो और उस पर धारा 243(1) के तहत पृथक आरोप लगाया जा सकता हो
d. जब अभियुक्त स्वयं चाहे
832. लोक अभियोजकों की हाजिरी किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 335
b. धारा 338
c. धारा 336
d. धारा 337
833. क्या लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक न्यायालय में किसी लिखित प्राधिकरण के बिना भी उपस्थित हो सकता है?
a. नहीं, लिखित आदेश आवश्यक है
b. केवल राज्य सरकार की अनुमति से
c. हाँ, वह बिना लिखित प्राधिकार के हाजिर हो सकता है
d. केवल सत्र न्यायालय में
834. जिस व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही संस्थित की गई हैं उसका प्रतिरक्षा कराने का अधिकार किससे सम्बन्धित है?
a. धारा 337
b. धारा 338
c. धारा 339
d. धारा 340
835. धारा 341 के अनुसार, न्यायालय किस स्थिति में अभियुक्त के लिए राज्य के व्यय पर अधिवक्ता नियुक्त कर सकता है?
a. जब अभियुक्त ने अधिवक्ता को मना किया हो
b. जब अभियुक्त किसी को जानता न हो
c. जब अभियुक्त के पास अधिवक्ता नियुक्त करने के लिए पर्याप्त साधन न हों
d. जब अभियुक्त ने आवेदन दिया हो
836. धारा 341 के अनुसार, न्यायालय किस स्थिति में अभियुक्त के लिए राज्य के व्यय पर अधिवक्ता नियुक्त कर सकता है?
a. जब अभियुक्त ने अधिवक्ता को मना किया हो
b. जब अभियुक्त किसी को जानता न हो
c. जब अभियुक्त के पास अधिवक्ता नियुक्त करने के लिए पर्याप्त साधन न हों
d. जब अभियुक्त ने आवेदन दिया हो
837. राज्य के व्यय पर विधिक सहायता देने की जिम्मेदारी किसकी है?
a. केंद्र सरकार की
b. पुलिस विभाग की
c. राज्य सरकार की
d. पीड़ित पक्ष की
838. धारा 341 की उपधारा (2) के अंतर्गत, निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य उच्च न्यायालय राज्य सरकार की पूर्व अनुमोदन से कर सकता है?
a. अभियुक्त को बरी करना
b. विधिक सहायता योजना बनाना
c. अधिवक्ताओं के चयन की विधि निर्धारित करना
d. न्यायालय बंद करना
839. धारा 341 के अंतर्गत अधिवक्ताओं को दी जाने वाली सुविधाओं के संबंध में नियम कौन बना सकता है?
a. जिला न्यायाधीश
b. अधिवक्ता परिषद
c. उच्च न्यायालय राज्य सरकार की स्वीकृति से
d. पुलिस विभाग
840. प्रक्रिया, जब निगम या रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी अभियुक्त है, किससे संबंधित है?
a. धारा 341
b. धारा 346
c. धारा 342
d. धारा 343
841. विधि की किस धारा के अंतर्गत न्यायालय द्वारा निर्णय दिये जाने के पूर्व अभियुक्त को क्षमा प्रदान करने का निर्देश जारी करने का प्रावधान है-
a. धारा 343
b. धारा 307
c. धारा 301
d. धारा 310
842. एक प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट किसी भी व्यक्ति को निम्न में से किस अवस्था में क्षमादान दे सकता है-
a. जाँच एवं विचारण
b. केवल जाँच एवं विचारण
c. केवल अन्वेषण
d. केवल विचारण
843. धारा 343 के अनुसार, किस श्रेणी का मजिस्ट्रेट अन्वेषण, जांच या विचारण के किसी चरण में क्षमादान दे सकता है?
a. द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट
b. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
c. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
d. मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट
844. धारा 344 किस विषय से संबंधित है?
a. क्षमा-दान का निदेश देने की शक्ति
b. क्षमा की शर्तों का पालन
c. प्रक्रिया, जब निगम या रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी अभियुक्त है
d. कार्यवाही को मुल्तवी या स्थगित करने की शक्ति
845. धारा 345 के अनुसार, मिथ्या साक्ष्य देने के अपराध के लिए ऐसे व्यक्ति का विचारण कैसे किया जा सकता है?
a. बिना किसी मंजूरी के
b. उच्च न्यायालय की मंजूरी के बिना नहीं किया जा सकता
c. मजिस्ट्रेट की मंजूरी से किया जा सकता है
d. लोक अभियोजक की अनुमति से किया जा सकता है
846. न्यायालय कब जांच या विचारण को अगले दिन से परे स्थगित कर सकता है?
a. जब अभियुक्त उपस्थित न हो
b. जब कारण लेखबद्ध किए जाएं और न्यायालय स्थगन आवश्यक समझे
c. जब पक्षकार अदालत से बाहर हो
d. बिना किसी कारण के कभी भी
847. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की किन धाराओं के अंतर्गत आने वाले अपराधों के लिए जांच या विचारण दो मास के भीतर पूरा करना आवश्यक है?
a. धारा 64 से 71 के अधीन अपराध
b. धारा 50 से 60 के अधीन अपराध
c. धारा 100 से 110 के अधीन अपराध
d. सभी अपराध
848. धारा 346 के अनुसार, न्यायालय अभियुक्त को अभिरक्षा में अधिकतम कितने दिनों के लिए प्रतिप्रेषित कर सकता है?
a. 7 दिन
b. 10 दिन
c. 15 दिन
d. 30 दिन
849. स्थानीय निरीक्षण किससे सम्बन्धित है?
a. धारा 346
b. धारा 345
c. धारा 347
d. धारा 348
850. क्या कोई मजिस्ट्रेट विचारण के दौरान किसी घटनास्थल का निरीक्षण कर सकता है?
a. नही, BNSS की धारा 347 के अंतर्गत 28 कोई मजिस्ट्रेट एक साक्षी नहीं बन सकता
b. नहीं, BNSS की धारा 347 के अंतर्गत मजिस्ट्रेट का सम्बन्ध मात्र मामले के अभियोजन से होता है
c. हाँ, BNSS की धारा 347 के अंतर्गत मजिस्ट्रेट साक्ष्य के समुचित समर्थन में निरीक्षण कर सकता है
d. हाँ, किन्तु निरीक्षण पत्रावली का हिस्सा नहीं होगा
851. आवश्यक साक्षी को समन करने या उपस्थित व्यक्ति की परीक्षा करने की शक्ति किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 348
b. धारा 349
c. धारा 350
d. धारा 360
852. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के प्रावधानों के अर्थ में किसी साक्षी को दोबारा बुलाने का अधिकार प्रयुक्त किया जा सकता है-
a. अभियोजन के साक्ष्यों की समाप्ति के पूर्व यदि साक्षी को अभियोजन के प्रस्ताव पर बुलाया जाना हो
b. यहाँ तक कि दोनों पक्षों के साक्ष्यों की समाप्ति के बाद भी
c. यहाँ तक कि अभियोजन का साक्ष्य समाप्त होने के बाद किन्तु बचाव पक्ष का साक्ष्य समाप्त होने के पूर्व
d. उपरोक्त में से कोई नहीं
853. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 348 प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट को अधिकार प्रदान करती है-
a. मुख्य साक्षी को समन करने का
b. कार्यवाही को स्थगित करने का
c. व्यक्ति को नमूना हस्ताक्षर देने का आदेश देने का
d. किसी ऐसे स्थान का निरीक्षण करना जहाँ कथिततौर पर अपराध किया गया हो
854. क्या न्यायालय किसी ऐसे व्यक्ति की परीक्षा कर सकता है जो हाजिर हो, पर उसे साक्षी के रूप में समन नहीं किया गया हो?
a. हाँ, कर सकता है
b. नहीं, कर नहीं सकता
c. केवल पुलिस अधिकारी के अनुरोध पर कर सकता है
d. केवल अभियुक्त की अनुमति से कर सकता है
855. क्या न्यायालय किसी ऐसे व्यक्ति को पुनः बुला सकता है जिसकी पहले परीक्षा हो चुकी हो?
a. हाँ, पुनः बुला सकता है और पुनः परीक्षा कर सकता है
b. नहीं, पुनः बुला नहीं सकता
c. केवल साक्षी की अनुमति से पुनः बुला सकता है
d. केवल अभियोजक की अनुमति से पुनः बुला सकता है
856. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट किस स्थिति में किसी व्यक्ति को नमूना हस्ताक्षर या हस्तलेख देने का आदेश दे सकता है?
a. जब वह व्यक्ति अपराधी है और गिरफ्तारी हो चुकी हो
b. जब प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को अन्वेषण या कार्यवाही के लिए ऐसा निर्देश देना समीचीन लगे
c. जब उस व्यक्ति ने कोई गलत काम किया हो
d. जब पुलिस की अनुमति हो
857. मजिस्ट्रेट किस स्थिति में बिना गिरफ्तारी के किसी व्यक्ति को नमूना या प्रतिदर्श देने के लिए आदेश दे सकता है?
a. जब व्यक्ति ने अपराध किया हो
b. जब उसके पास लिखित कारण हों जो अभिलिखित किए गए हों
c. जब पुलिस शिकायत दर्ज करे
d. जब आरोपी पुलिस हिरासत में हो
858. नमूना हस्ताक्षर या हस्तलेख देने के लिए मजिस्ट्रेट का आदेश किसके अधीन होता है?
a. पुलिस अधीक्षक
b. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
c. जिला न्यायालय
d. उच्च न्यायालय
859. परिवादियों और साक्षियों के व्यय किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 352
b. धारा 356
c. धारा 350
d. धारा 354
860. धारा 350 के अंतर्गत दंड न्यायालय किसके नियमों के अधीन होते हुए व्यय का आदेश दे सकता है?
a. राज्य सरकार के बनाए नियमों के
b. High Court के बनाए नियमों के
c. Supreme Court के बनाए नियमों के
d. उपरोक्त कोई नहीं
861. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की किस प्रावधान के अंतर्गत अभियोजन के साक्ष्य के उपरांत अभियुक्त का परीक्षण किया जाता है-
a. धारा 351
b. धारा 353
c. धारा 315
d. धारा 317
862. अभियुक्त की परीक्षा कब सामान्यतः की जाती है?
a. अभियोजन के साक्षियों की परीक्षा से पहले
b. अभियोजन के साक्षियों की परीक्षा के बाद और अभियुक्त से प्रतिरक्षा अपेक्षा से पहले
c. अभियुक्त के गिरफ्तारी के बाद
d. अभियोजन पक्ष की अंतिम दलील के बाद
863. यदि न्यायालय ने अभियुक्त को वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दे दी है, तो वह क्या कर सकता है?
a. अभियुक्त को फिर से उपस्थित होने का आदेश दे सकता है
b. खंड (ख) के अधीन उसकी परीक्षा से भी अभिमुक्ति दे सकता है
c. अभियुक्त की गिरफ्तारी कर सकता है
d. अभियुक्त के खिलाफ साक्ष्य स्वीकार नहीं करेगा
864. अभियुक्त को उपधारा (1) के तहत परीक्षा के दौरान क्या शपथ दिलाई जाएगी?
a. हाँ, पूरी शपथ दिलाई जाएगी
b. नहीं, उसे कोई शपथ नहीं दिलाई जाएगी
c. केवल अभियोजन पक्ष की अनुमति पर
d. केवल अदालत की मर्जी पर
865. मौखिक बहस और बहस का ज्ञापन से का संबंध किस धारा से है?
a. धारा 348
b. धारा 349
c. धारा 351
d. धारा 352
866. कार्यवाही के किसी पक्षकार को अपने साक्ष्य समाप्त होने के बाद क्या करने का अधिकार है?
a. लंबी बहस करने का
b. यथाशक्य शीघ्र संक्षिप्त मौखिक बहस करने का
c. गवाही देने का
d. बहस न करने का
867. यदि न्यायालय को लगे कि मौखिक बहस संक्षिप्त या सुसंगत नहीं है, तो वह क्या कर सकता है?
a. बहस को रोक सकता है
b. बहस को विनियमित कर सकता है
c. बहस को अस्वीकार कर सकता है
d. पक्षकारों को गिरफ्तार कर सकता है
868. अभियुक्त व्यक्ति का सक्षम साक्षी होना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की किससे संबंधित है?
a. धारा 353
b. धारा 349
c. धारा 351
d. धारा 352
869. धारा 353 के अनुसार, कोई अभियुक्त व्यक्ति किस रूप में साक्षी होगा?
a. प्रतिरक्षा के लिए सक्षम साक्षी
b. अभियोजन पक्ष का साक्षी
c. न्यायालय का साक्षी
d. कोई भी साक्षी नहीं
870. अभियुक्त व्यक्ति को साक्षी के रूप में बुलाने के लिए क्या आवश्यक है?
a. न्यायालय का आदेश
b. उसकी लिखित प्रार्थना
c. अभियोजन पक्ष की सहमति
d. पुलिस की अनुमति
871. अभियुक्त के स्वयं साक्ष्य न देने पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
a. उसे दंडित किया जाएगा
b. पक्षकारों या न्यायालय द्वारा टीका-टिप्पणी का विषय नहीं बनाया जाएगा
c. वह दोषी माना जाएगा
d. उसकी गिरफ्तारी होगी
872. धारा 101, 126, 127, 128, 129 या अध्याय 10 और अध्याय 11 के तहत कार्यवाही में व्यक्ति क्या कर सकता है?
a. अपने आपको साक्षी के रूप में पेश कर सकता है
b. गवाही देने से इंकार कर सकता है
c. केवल अभियोजन पक्ष का पक्ष ले सकता है
d. केवल अभियुक्त के पक्ष में गवाही दे सकता है
873. धारा 127, 128, या 129 के तहत कार्यवाही में यदि व्यक्ति साक्ष्य नहीं देता है तो क्या होगा?
a. उस पर जुर्माना लगेगा
b. न्यायालय या पक्षकारों द्वारा टीका-टिप्पणी नहीं की जाएगी और उपधारणा नहीं की जाएगी
c. उसे अभियुक्त माना जाएगा
d. उसे दोषी माना जाएगा
874. प्रकटन उत्प्रेरित करने के लिए किसी प्रभाव का काम में न लाया जाना किस से संबंधित है?
a. धारा 352
b. धारा 353
c.धारा 354
d. धारा 355
875. धारा 354 के अनुसार, अभियुक्त व्यक्ति पर किस उद्देश्य से कोई प्रभाव नहीं डाला जाएगा?
a. उसे गिरफ्तार करने के लिए
b. उसे अपनी जानकारी की किसी बात को प्रकट करने या न करने के लिए उत्प्रेरित करने के लिए
c. उसे न्यायालय में उपस्थित होने के लिए
d. उसे गवाही देने के लिए मजबूर करने के लिए
876. अध्याय 26 में जांच और विचारण के बारे में साधारण उपबंधों क अधीन कौन सी नयी धारा जोड़ी गयी है?
a. धारा 356- उद्घोषित अपराधी की अनुपस्थिति में जांच, विचारण और निर्णय
b. धारा 357- प्रक्रिया जहां अभियुक्त कार्यवाहियों को नहीं समझता है
c. धारा 358- अपराध के दोषी प्रतीत होने वाले अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही करने की शक्ति
d. धारा 358- प्रक्रिया जब जांच या विचारण के प्रारंभ के पश्चात् मजिस्ट्रेट को पता चलता है कि मामला सुपुर्द किया जाना चाहिए
877. जब किसी व्यक्ति को उद्घोषित अपराधी घोषित किया जाता है उसकी अनुपस्थिति में, न्यायालय विचारण कैसे करेगा?
a. विचारण नहीं करेगा
b. उसके उपस्थित होने और वैयक्तिक विचारण के अधिकार के अभित्याग के रूप में समझकर, उसके अनुपस्थिति में विचारण करेगा
c. केवल अधिवक्ता की उपस्थिति में विचारण करेगा
d. अभियोजन पक्ष की सहमति से
878. उद्घोषित अपराधी के विचारण की शुरुआत कब तक नहीं होगी?
a. आरोप की विरचना की तारीख से 30 दिन तक
b. आरोप की विरचना की तारीख से 60 दिन तक
c. आरोप की विरचना की तारीख से 90 दिन तक
d. आरोप की विरचना की तारीख से 120 दिन तक
879. अगर उद्घोषित अपराधी के लिए कोई अधिवक्ता नहीं है, तो क्या किया जाएगा?
a. उसे स्वयं अधिवक्ता नियुक्त करना होगा
b. राज्य के व्यय पर अधिवक्ता नियुक्त किया जाएगा
c. वह बिना अधिवक्ता के विचारण में शामिल होगा
d. विचारण स्थगित कर दिया जाएगा
880. न्यायालय धारा 356(1) के अनुपालन में के अनुपालन में कितने गिरफ़्तारी वारंट जारी करेगा?
a. 2 गिरफ्तारी वारंट
b. 3 गिरफ्तारी वारंट
c. 1 गिरफ्तारी वारंट
d. 6 गिरफ्तारी वारंट
881. उद्घोषित अपराधी की अनुपस्थिति में सुनाए गए निर्णय के विरुद्ध अपील कब तक संभव होगी?
a. तुरंत
b. जब उद्घोषित अपराधी स्वयं अपीलीय न्यायालय के समक्ष उपस्थित हो
c. बिना उपस्थिति के भी अपील कर सकता है
d. कभी नहीं
882. दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील करने की अंतिम अवधि क्या है?
a. निर्णय की तारीख से एक वर्ष
b. निर्णय की तारीख से दो वर्ष
c. निर्णय की तारीख से तीन वर्ष
d. अपील के लिए कोई समय सीमा नहीं
883. अपराध के दोषी प्रतीत होने वाले अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही करने की शक्ति धारा किससे सम्बन्धित है?
a. धारा 358
b. धारा 352
c. धारा 350
d. धारा 348
884. धारा 358 के अंतर्गत किसी व्यक्ति को एक अतिरिक्त सह अभियुक्त के रूप में जोड़ा जा सकता है-
a. अभियोजन द्वारा भरोसा किए गए दस्तावेजों के आधार पर
b. अन्वेषण अधिकारी की पूरक रिपोर्ट के आधार पर
c. मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर
d. बाद की घटनाओं के आधार पर
885. आपराधिक न्यायालय की किसी आपराधिक मामले में अतिरिक्त अभियुक्त को जोड़ने की शक्ति के विषय में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ द्वारा अपने पूर्व के निर्णय की मत भिन्नता का निराकरण..............में किया।
a. हरदीप सिंह बनाम पंजाब राज्य व अन्य
b. मोहम्मद शफीक बनाम मोहम्मद रफीक
c. रणजीत सिंह बनाम पंजाब राज्य
d. हेमा मिश्रा बनाम उत्तर प्रदेश राज
886. शमनीय एवं अशमनीय अपराधों को कहाँ वर्गीकृत किया गया है-
a. प्रथम अनुसूची
b. द्वितीय अनुसूची
c. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 358
d. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 359
887. धारा 359 के अंतर्गत किसी अपराध के शमन का परिणाम होता है-
a. दोषसिद्धि
b. उन्मोचन
c. दोषमुक्ति
d. मामले को समाप्त करना
888. जब कोई व्यक्ति जो अन्यथा तरीके से धारा 359के अंतर्गत किसी अपराध के शमन में सक्षम था, हो जाती है, तब-
a. अपराध का शमन नहीं किया जा सकता की मृत्यु
b. अपराध का शमन किसी प्रत्यक्षदर्शी द्वारा किया जा सकता है
c. अपराध का शमन न्यायालय की सहमति के बिना ऐसे व्यक्ति के विधिक प्रतिनिधि द्वारा किया जा सकता है
d. ऐसे व्यक्ति का विधिक प्रतिनिधि न्यायालय की सहमति से अपराध का शमन कर सकता है।
889. कब किसी अपराध का अन्यथा शमनीय होने पर भी शमन नहीं किया जा सकेगा?
a. जब अपराध का समन करने के लिए सक्षम व्यक्ति मर जाता है।
b. जब अपराध का शमन करने के लिए सक्षम व्यक्ति 18 व से कम आयु का है।
c. जब अभियुक्त विचारणार्थ सुपुर्द कर दिया जाता है।
d. जब अभियुक्त पूर्व दोषसिद्धि के कारण किसी अपराध के लिए या 'वर्धित दंड से भिन्न किस्म के दंड से दंडनीय है।
890. धारा 359 में उल्लिखित अपराधों के अलावा भारतीय न्याय संहिता के अपराध-
a. शमनीय नहीं होते
b. न्यायालय की अनुमति से शमनीय होते हैं।
c. सत्र न्यायालय द्वारा शमनीय होते हैं।
d. उच्च न्यायालय द्वारा शमनीय होते हैं।
891. जैसा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 118 में प्रावधान है, जानबूझकर गंभीर चोट पहुँचाने हेतु किसी खतरनाक हथियार अथवा साधन द्वारा किया गया अपराध-
a. शमनीय होता है
b. अशमनीय होता है
c. न्यायालय की अनुमति से शमनीय होता है।
d. उपरोक्त में से कोई नहीं
892. कौन सी धारा का अपराध अशमनीय है?
a. भारतीय न्याय संहिता धारा 115
b. भारतीय न्याय संहिता धारा 83
c. भारतीय न्याय संहिता धारा 84
d. भारतीय न्याय संहिता धारा 316
893. ऐसे अपराध, जिनमें पक्षकारों के बीच समझौता किया जा सकता है-
a. जमानतीय अपराध होते हैं
b. असंज्ञेय अपराध होते हैं
c. शमनीय अपराध होते हैं
d. अशमनीय अपराध होते हैं।
894. अभियोजन वापस लेना धारा किससे सम्बन्धित है?
a. धारा 360
b. धारा 362
c. धारा 365
d. धारा 320
895. निम्न में से कौन धारा 360 के अंतर्गत अभियोजन से वाद वापस ले सकता है-
a. राज्य सरकार
b. न्यायालय की अनुमति से किसी वाद का प्रभारी लोक अभियोजक
c. न्यायालय की अनुमति के बिना भी किसी वाद का प्रभारी लोक अभियोजक
d. जिला मजिस्ट्रेट
896. केन्द्र सरकार की संपत्ति के दुर्विनियोग सम्बन्धी मामले का अभियोजन किस प्रकार वापस लिया जा सकता है-
a. राज्य सरकार के निर्देश पर किसी लोक अभियोजक द्वारा
b. राज्य सरकार के निर्देश पर केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त किसी लोक अभियोजक द्वारा
c. राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किसी लोक अभियोजक द्वारा केन्द्र सरकार से प्राप्त अनुमति के आधार पर
d. केन्द्र सरकार के निर्देश पर किसी लोक अभियोजक द्वारा
897. अभियोजन के साक्ष्य प्रारंभ हो जाने के बाद न्यायालय लोक अभियोजक को अभियोजन वापस लेने की अनुमति प्रदान करता है। अभियुक्त-
a. रिहा कर दिया जाएगा
b. उन्मोचित कर दिया जाएगा
c. दोषमुक्त कर दिया जाएगा
d. उपरोक्त में से कोई नहीं
898. यदि साक्ष्य के पश्चात् मजिस्ट्रेट की राय में अभियुक्त ऐसे अपराध का दोषी हो जिसमें उसके पास अभियुक्त को अपराध हेतु निर्धारित अधिकतम दंड के साथ दंडित करने का अधिकार उपलब्ध न हो, तब किस धारा के अंतर्गत अपनी लिखित राय के साथ वह अभियुक्त तथा कार्यवाही को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है-
a. धारा 361
b. धारा 362
c. धारा 363
d. धारा 364
899. अभियोजन तथा अभियुक्त के साक्ष्य सुनने के बाद, यदि मजिस्ट्रेट की राय में अभियुक्त दोषी है तथा ऐसी कठोर सजा से भी ज्यादा का हकदार है जितना उसे देने का अधिकार है, तब मजिस्ट्रेट वाद को अग्रसरित करेगा-
a. सत्र न्यायाधीश को
b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
c. जिला मजिस्ट्रेट
d. सम्बन्धित पुलिस थाना
900. धारा 362 के अनुसार मामला सत्र न्यायालय को सुपुर्द करने पर कौन-सा अध्याय लागू होता है?
a. अध्याय 17
b. अध्याय 18
c. अध्याय 19
d. अध्याय 21
901. धारा 365 के अनुसार, जब किसी मजिस्ट्रेट ने साक्ष्य को आंशिक रूप से सुनने और अभिलिखित करने के बाद अधिकारिता खो दी हो, तो क्या किया जा सकता है?
a. मुकदमा दोबारा शुरू करना होगा
b.अभियुक्त को रिहा करना होगा
c. उत्तरवर्ती मजिस्ट्रेट पूर्ववर्ती द्वारा अभिलिखित साक्ष्य पर कार्य कर सकता है
d. केवल गवाहों को ही दोबारा बुलाया जाएगा
902. यदि उत्तरवर्ती मजिस्ट्रेट को लगता है कि पहले से दर्ज किसी गवाह की फिर से परीक्षा आवश्यक है, तो वह:
a. ऐसा नहीं कर सकता
b. गवाह को नया बयान देने का आदेश दे सकता है
c. गवाह को पुनः समन कर सकता है और अतिरिक्त परीक्षा करा सकता है
d. गवाह को हटा सकता है
903. भागतः एक न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा और भागत: दूसरे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट द्वारा अभिलिखित साक्ष्य पर दोषसिद्धि या सुपुर्दगी किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 361
b. धारा 365
c. धारा 363
d. धारा 364
904. न्यायालयों का खुला होना किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 365
b. धारा 366
c. धारा 367
d. धारा 368
905. यदि कोई पत्रकार गोपनीय सुनवाई की जानकारी बिना अदालत की अनुमति के प्रकाशित करता है, तो वह किस धारा का उल्लंघन करता है?
a. धारा 366(1)
b. धारा 366(2)
c. धारा 366(3)
d. धारा 366(4)
906. विकृत चित्त अभियुक्त व्यक्तियों के बारे में उपबंध किस अध्याय से सम्बन्धित है?
a. अध्याय 25
b. अध्याय 26
c. अध्याय 27
d. अध्याय 28
907. विकृत चित्त अभियुक्त व्यक्तियों के बारे में उपबंध दिए गए है?
a. धारा 367 - धारा 378
b. धारा 365 - धारा 370
c. धारा 363 - धारा 373
d. धारा 367 - धारा 372
908. जब मजिस्ट्रेट को यह विश्वास करने का कारण होता है कि अभियुक्त विकृत चित्त है और अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ है, तो वह सबसे पहले क्या करता है?
a. अभियुक्त को दोषी घोषित करता है
b. सीधे उसे जेल भेजता है
c. चित्त-विकृति के तथ्य की जांच करता है और सिविल सर्जन से परीक्षा कराता है
d. अभियुक्त का विचारण रोक देता है
909. यदि सिविल सर्जन अभियुक्त को चित्त-विकृत मानता है, तो उसे किसके पास भेजा जाता है?
a. जिला न्यायालय
b. पुलिस अधीक्षक
c. सरकारी अस्पताल या आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के मनोचिकित्सक/रोग विषयक मनोविज्ञानी
d. उच्च न्यायालय
910. मेडिकल बोर्ड किन दो सदस्यों से मिलकर बनता है?
a. जिला कलेक्टर और सिविल सर्जन
b. सत्र न्यायाधीश और मुख्य चिकित्सा अधिकारी
c. मनश्चिकित्सा एकक प्रमुख और मनश्चिकित्सा संकाय का सदस्य
d. पुलिस अधीक्षक और मेडिकल ऑफिसर
911. न्यायालय के समक्ष विचारित व्यक्ति के विकृत चित्त होने की दशा में प्रक्रिया किस धारा से सम्बन्धित है?
a. धारा 359
b. धारा 362
c. धारा 368
d. धारा 370
912. जब मजिस्ट्रेट या सेशन न्यायालय को विचारण के समय अभियुक्त विकृत चित्त और अपनी प्रतिरक्षा में असमर्थ प्रतीत होता है, तो वह क्या करेगा?
a. तुरंत दोषसिद्धि कर देगा
b. ऐसे चिकित्सीय या अन्य साक्ष्य पर विचार करेगा और निष्कर्ष लिखेगा, फिर कार्यवाही को मुल्तवी करेगा
c. अभियुक्त को सीधे जेल भेज देगा
d. अभियुक्त का विचारण जारी रखेगा
913. यदि अभियुक्त मनश्चिकित्सक या मनोविज्ञानी की रिपोर्ट से असंतुष्ट है, तो वह किसके समक्ष अपील कर सकता है?
a. उच्च न्यायालय
b. चिकित्सा बोर्ड
c. सत्र न्यायालय
d. जिला न्यायालय
914. यदि अभियुक्त बौद्धिक दिव्यांगता के कारण अपनी प्रतिरक्षा में असमर्थ है और प्रथम दृष्ट्या मामला बनता है, तो मजिस्ट्रेट या न्यायालय क्या आदेश देगा?
a. विचारण करेगा
b. विचारण बंद करेगा और धारा 369 के अनुसार कार्यवाही करेगा (धारा 368(4)
c. अभियुक्त को दोषी ठहराएगा
d. अभियुक्त को जमानत पर रिहा करेगा
915. अन्वेषण या विचारण के लंबित रहने तक विकृत चित व्यक्ति का छोड़ा जाना किस धारा से सम्बन्धितहै?
a. धारा 365
b. धारा 369
c. धारा 366
d. धारा 368
916. जब कोई व्यक्ति धारा 367 या 368 के अंतर्गत चित्त-विकृति या बौद्धिक दिव्यांगता के कारण अपनी प्रतिरक्षा करने में असमर्थ पाया जाता है, तब मजिस्ट्रेट या न्यायालय क्या आदेश दे सकता है?
a. उसे बिना शर्त जमानत पर छोड़ सकता है
b. उसे जमानत पर छोड़ सकता है, यदि कोई मित्र या नातेदार नियमित बाह्य रोगी मनःचिकित्सा उपचार कराने का वचन देता हो
c. उसे तुरंत जेल में बंद कर सकता है
d. उसे उपचार के बिना छोड़ सकता है
917. धारा 369 के अनुसार, लोक मानसिक स्वास्थ्य स्थापन में अभियुक्त को निरुद्ध करने का आदेश किसके अनुसार होगा?
a. मजिस्ट्रेट के आदेश पर बिना किसी नियम के
b. राज्य सरकार द्वारा मानसिक स्वास्थ्य देख-रेख अधिनियम, 2017 के नियमों के अनुसार
c. अभियुक्त की मर्जी से
d. अभियुक्त के परिवार की मर्जी से
918. जब जांच या विचारण को धारा 367 या 368 के अंतर्गत मुल्तवी किया गया हो, तो मजिस्ट्रेट या न्यायालय किस स्थिति में उसे पुनः चालू कर सकता है?
a. जब अभियुक्त भाग जाए
b. जब संबद्ध व्यक्ति के विकृत चित्त न रहने की स्थिति हो
c. जब अभियुक्त मना कर दे
d. जब अभियुक्त ने कोई नया अपराध किया हो
919. धारा 215 में वर्णित मामलों में प्रक्रिया किस धारा से संबंधित है?
a. धारा 374
b. धारा 379
c. धारा 370
d. धारा 375
920. मिथ्या साक्ष्य देने पर विचारण के लिए संक्षिप्त प्रक्रिया धारा 383 किस से संबंधित है?
a. धारा 379
b. धारा 380
c. धारा 382
d. धारा 383
921. मिथ्या साक्ष्य देने पर संक्षिप्त प्रक्रिया से विचारण कौन कर सकेगा ?
a. प्रथम वर्ग मजिट्रेट या सेशन न्यायालय
b. सत्र न्यायाधीश अथवा उच्च न्यायालय
c. केवल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष
d. केवल सत्र न्यायाधीश के समक्ष
922. धारा 384 के अंतर्गत अभियुक्त को किस प्रकार का दंड दिया जा सकता है?
a. केवल जुर्माना
b. एक हजार रुपए तक का जुर्माना और जुर्माना न देने पर एक माह तक की सादा कारावास
c. मृत्युदंड
d. आजीवन कारावास
923. अध्याय 29 किस विषय से संबंधित है?
a. निर्णय
b. न्याय प्रशासन पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के बारे में उपबंध
c. विकृत चित्त अभियुक्त व्यक्तियों के बारे में उपबंध
d. जांचों तथा विचारणों के बारे में साधारण उपबंध
924. धारा 392(1) के अंतर्गत, निर्णय को निम्न में से किस विधि से सुनाया जा सकता है?
a. मौखिक घोषणा द्वारा
b. अभियुक्त या उसके अभिवक्ता को फोन कॉल पर
c. सम्पूर्ण देकर सुनाया जाएगा, पढ़कर सुनाया जाएगा, या सार समझाकर सुनाया जाएगा
d. सोशल मीडिया पर पोस्ट कर
925. धारा 392 के अनुसार, आरंभिक अधिकारिता के दंड न्यायालय में निर्णय अधिकतम कितने दिनों के भीतर सुनाया जाना चाहिए?
a. 30 दिन
b. 45 दिन
c. 60 दिन
d. 90 दिन
926. न्यायलय जहां तक संभव हो निर्णय की प्रति कितने दिन की अवधि के भीतर अपने पोर्टल पर अपलोड करेगा?
a. 30 दिन की अवधि के भीतर
b. 45 दिन की अवधि के भीतर
c. 7 दिन की अवधि के भीतर
d. 10 दिन की अवधि के भीतर
927. यदि अभियुक्त अभिरक्षा में है, तो उसे निर्णय सुनने के लिए कैसे लाया जाएगा?
a. डाक द्वारा सूचना भेजकर
b. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या व्यक्तिगत रूप से
c. सोशल मीडिया लिंक भेजकर
d. केवल अधिवक्ता के माध्यम से
928. अभियुक्त की गैर-हाजिरी में निर्णय कब सुनाया जा सकता है?
a. जब अभियुक्त लापता हो
b. जब वैयक्तिक हाजिरी से अभिमुक्ति दी गयी हो और केवल जुर्माना लगाया गया हो या वह दोषमुक्त हो
c. जब अभियुक्त को पहले से सजा मिल चुकी हो
d. उपरोक्त सभी
929. निम्नलिखित में से कौन सी धारा निर्णय की भाषा एवं अन्तर्वस्तु से सम्बन्धित है-
a. धारा 393
b. धारा 354
c. धारा 395
d. धारा 396
930. धारा 393 के अनुसार, निर्णय किस भाषा में लिखा जाएगा?
a. केवल हिंदी में
b. केवल अंग्रेज़ी में
c. न्यायालय की भाषा में
d. अभियुक्त की भाषा में
931. धारा 393 के अनुसार, निर्णय में निम्नलिखित में से क्या होना चाहिए?
I. अवधारण के लिए प्रश्न
II. उन पर विनिश्चय और कारण
III. केवल अभियोजन के कथन
a. केवल III
b. I और II
c. II और III
d. I, II और III
932. यदि संदेह हो कि अपराध भारतीय न्याय संहिता की दो धाराओं या एक ही धारा के दो भागों में से किसके अंतर्गत आता है, तो न्यायालय क्या करेगा?
a. अभियोजन से स्पष्टीकरण मांगेगा
b. निर्णय स्थगित करेगा
c. स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त कर अनुकल्पतः निर्णय देगा
d. दो अलग-अलग निर्णय देगा
933. धारा 393(5) के अनुसार मृत्युदंड दिए जाने की दशा में निर्णय में क्या निदेश होना चाहिए?
a. दोषी को गोली मारने का आदेश
b. जीवनभर जेल में रखने का आदेश
c. फांसी लगाकर मृत्यु तक लटकाए जाने का आदेश
d. उसका पुनः परीक्षण किया जाए
934. यदि दोषसिद्धि एक वर्ष या अधिक की सजा योग्य अपराध के लिए है लेकिन कोर्ट 3 माह से कम कारावास देता है, तो क्या अपेक्षित है?
a. दंड को गोपनीय रखना
b. दंड देने के कारणों का लेखबद्ध करना
c. अभियोजन को पुनः बुलाना
d. दंड को वापस लेना
935. पूर्वतन दोषसिद्धि अपराधी को अपने पते की सूचना देने का आदेश किससे सम्बंधित है?
a. धारा 394
b. धारा 396
c. धारा 398
d. धारा 399
936. धारा 394 के अनुसार, पते की सूचना देने का आदेश किस प्रकार के अपराध की पुनः दोषसिद्धि की स्थिति में दिया जा सकता है?
a. केवल जुर्माने से दंडनीय अपराध
b. तीन वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध
c. छह माह से अधिक कारावास से दंडनीय अपराध
d. मृत्युदंड से दंडनीय अपराध
937. पते की सूचना देने का आदेश किस प्रकार का न्यायालय पारित कर सकता है?
a. केवल उच्च न्यायालय
b. केवल द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट
c. द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट से भिन्न कोई न्यायालय
d. केवल विशेष न्यायालय
938. पूर्व दोषसिद्ध अपराधी को अधिकतम कितने वर्षों तक अपने निवास स्थान में परिवर्तन की सूचना देनी होती है?
a. 1 वर्ष
b. 3 वर्ष
c. 5 वर्ष
d. 10 वर्ष
939. प्रतिकर देने का आदेश का प्रावधान करने वाली धारा कौन सी है-
a. धारा 391
b. धारा 395
c. धारा 396
d. धारा 936
940. किस धारा के अंतर्गत (जब अर्थदंड सजा का हिस्सा न हो) न्यायालय प्रतिकर के रूप में अभियुक्त द्वारा किसी भी राशि के भुगतान का आदेश दे सकता है-
a. धारा 395(1)
b. धारा 395(2)
c. धारा 395(3)
d. धारा 395(4)
941. पीड़ित प्रतिकर योजना का प्रावधान करने वाली धारा कौन सी है-
a. धारा 391
b. धारा 395
c. धारा 396
d. धारा 336
942. धारा 396 के अंतर्गत पीड़ित की प्रतिकर की मात्रा का निर्धारण कौन करता है?
a. पुलिस अधिकारी
b. राज्य सरकार
c. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण
d. उच्चतम न्यायालय
943. राज्य या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवेदन प्राप्त होने पर कितने समय के भीतर जांच पूरी करनी होती है?
a. एक सप्ताह
b. एक माह
c. दो माह
d. छह माह
944. धारा 396 के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा दिया गया प्रतिकर भारतीय न्याय संहिता की किन धाराओं के तहत दिए गए जुर्माने के अतिरिक्त होता है?
a. धारा 420, 302, 120B
b. धारा 65, 70, 124(1)
c. धारा 101, 102, 103
d. धारा 17, 18, 19
945. किस धारा के अंतर्गत सभी सार्वजनिक अथवा निजी अस्पताल तेजाबी हमले तथा बलात्संग के पीड़ितों को प्राथमिक चिकित्सा तथा चिकित्सकीय उपचार निःशुल्क प्रदान करेंगे-
a. धारा 395
b. धारा 399
c. धारा 397
d. धारा 394
946. धारा 397 के अनुसार, पीड़ितों को निःशुल्क प्राथमिक या चिकित्सीय उपचार कौन से अस्पताल उपलब्ध कराएंगे?
a. केवल सरकारी अस्पताल
b. केवल निजी अस्पताल
c. केवल केंद्रीय सरकार द्वारा संचालित अस्पताल
d. सभी लोक या प्राइवेट अस्पताल
947. निम्न में से कौन-से अपराधों के पीड़ितों को धारा 397 के अंतर्गत उपचार का अधिकार है?
a. केवल चोरी और डकैती
b. केवल आर्थिक अपराध
c. लैंगिक अपराध और गंभीर शारीरिक अपराध
d. यातायात उल्लंघन
948. निम्नलिखित में से कौन-सी धाराएं उन अपराधों को दर्शाती हैं जिनके पीड़ितों को उपचार मिलना चाहिए, जैसा कि धारा 397 में उल्लेख है?
a. भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 से 71 और धारा 124(1)
b. भारतीय न्याय संहिता की धारा 100 से 110
c. पुलिस अधिनियम की धारा 10 से 15
d. भारतीय संविधान की धारा 21 से 30
949. धारा 397 के अनुसार, बालकों से संबंधित लैंगिक अपराधों की स्थिति में किन धाराओं के अंतर्गत उपचार किया जाएगा?
a. JJ Act, 2000 की धाराएं
b. POCSO अधिनियम की धारा 4, 6, 8, 10
c. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं
d. संविधान की मूलभूत अधिकार धाराएं
950. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में साक्षियों की सुरक्षा से सम्बंधित कौन सी एक नयी धारा जोड़ी गयी है ?
a. धारा 394
b. धारा 398
c. धारा 396
d. धारा 392
951. धारा 398 के अनुसार साक्षी संरक्षण स्कीम किसके द्वारा तैयार की जाएगी?
a. उच्चतम न्यायालय
b. केंद्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण
c. प्रत्येक राज्य सरकार
d. पुलिस महानिदेशक
952. धारा 399 किस स्थिति में प्रतिकर देने का प्रावधान करती है?
a. जब पुलिस अपराधी को गिरफ़्तार करने में असफल रहती है
b. जब कोई व्यक्ति निराधार रूप से किसी अन्य व्यक्ति को गिरफ़्तार करवा देता है
c. जब न्यायालय दोषमुक्ति का आदेश देता है
d. जब किसी गवाह को सुरक्षा नहीं दी जाती
953. जब कभी कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को पुलिस अधिकारी से गिरफ्तार करवाता है, तब यदि उस मजिस्ट्रेट को जिसके द्वारा यह मामला सुना जाता है, यह प्रतीत होता है कि ऐसी गिरफ्तारी करवाने का कोई पर्याप्त आधार नहीं था, वह मजिस्ट्रेट प्रतिकर दिलवा सकता है-
a. एक लाख रुपये से अनधिक
b. दस हजार रुपये से अनधिक
c. पांच हजार रुपये से अनधिक
d. एक हजार रुपये से अनधिक
954. यदि प्रतिकर की राशि वसूल नहीं की जाती है, तो दोषी व्यक्ति को क्या सज़ा दी जा सकती है?
a. ₹500 अतिरिक्त जुर्माना
b. 7 दिन का कारावास
c. अधिकतम 30 दिन का सादा कारावास
d. जमानत राशि की जब्ती
955. धारा 400 किस प्रकार के मामलों में परिवादी को खर्चे दिलाने का प्रावधान करती है?
a. संज्ञेय अपराध
b. असंज्ञेय अपराध
c. दीवानी वाद
d. सभी प्रकार के वाद
956. यदि अभियुक्त दोषसिद्ध होता है, तो न्यायालय किस प्रकार का आदेश खर्चे के संबंध में दे सकता है?
a. केवल जुर्माना
b. सज़ा के अतिरिक्त अभियोजन व्यय देने का आदेश
c. अभियुक्त को क्षमा कर सकता है
d. अभियुक्त से माफ़ीनामा मांग सकता है
957. धारा 400 के अंतर्गत कौन-कौन से खर्च शामिल किए जा सकते हैं?
a. केवल वकील की फीस
b. केवल आदेशिका शुल्क
c. आदेशिका फीस, साक्षियों की फीस, अधिवक्ताओं की फीस आदि
d. कोई खर्च नहीं
958. यदि अभियुक्त आदेश के अनुसार खर्च नहीं देता है, तो अधिकतम कितने दिन का सादा कारावास दिया जा सकता है?
a. 7 दिन
b. 14 दिन
c. 30 दिन
d. 3 माह
959. सदाचरण की परिवीक्षा पर या भर्त्सना के पश्चात् छोड़ देने का आदेश किस्से सम्बंधित हैं?
a. धारा 400
b. धारा 401
c. धारा 404
d. धारा 405
960. किस अवस्था में कोई व्यक्ति दोषसिद्धि के बावजूद, परिवीक्षा पर छोड़ा जा सकता है?
a. अपराधी की उम्र 21 वर्ष से कम हो
b. महिला हो या 21 से कम उम्र का पुरुष हो
c. अपराध मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय न हो
d. उपरोक्त सभी
961. धारा 401 के अनुसार, दोषसिद्ध व्यक्ति को अधिकतम कितनी अवधि के लिए परिवीक्षा पर छोड़ा जा सकता है?
a. 6 महीने
b. 1 वर्ष
c. 3 वर्ष
d. 5 वर्ष
962. यदि द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट किसी आरोपी को परिवीक्षा पर छोड़ने का विचार करता है, तो वह क्या करेगा?
a. स्वयं आदेश देगा
b. उच्च न्यायालय को रिपोर्ट भेजेगा
c. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को कार्यवाही निवेदित करेगा
d. आरोपी को छोड़ देगा
963. किस प्रकार के अपराधों में भर्त्सना के पश्चात् छोड़ना संभव है?
a. हत्या जैसे गंभीर अपराध
b. दो वर्ष से कम कारावास या केवल जुर्माने से दंडनीय अपराध
c. आतंकवाद से संबंधित अपराध
d. राजद्रोह जैसे अपराध
964. क्या उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय इस धारा के अंतर्गत दिए गए आदेश को अपास्त कर सकते हैं?
a. नहीं
b. हाँ, पुनरीक्षण या अपील के माध्यम से
c. केवल राष्ट्रपति के आदेश से
d. केवल पुलिस की सिफारिश पर
965. धारा 401 में दिए गए परिवीक्षा आदेश का उल्लंघन होने पर क्या हो सकता है?
a. अपराधी को छोड़ दिया जाएगा
b. केवल चेतावनी दी जाएगी
c. न्यायालय वारण्ट जारी कर सकता है
d. कोई कार्यवाही नहीं होगी
966. धारा 401 के अंतर्गत किन अधिनियमों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ता?
a. किशोर न्याय अधिनियम, 2015
b. अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958
c. अन्य समकालीन सुधार विधियाँ
d. उपरोक्त सभी
967. न्यायालय का अपने निर्णय में परिवर्तन न करना किससे सम्बंधित हैं?
a. धारा 402
b. धारा 403
c. धारा 404
d. धारा 405
968. धारा 403 के अनुसार न्यायालय किस प्रकार की भूल को ठीक कर सकता है?
a. साक्ष्य संबंधी
b. कानूनी व्याख्या संबंधी
c. लिपिकीय या गणितीय भूल
d. निर्णय की पुनरावृत्ति
969. अभियुक्त और अन्य व्यक्तियों को निर्णय की प्रति का दिया जाना किससे सम्बंधित हैं?
a. धारा 401
b. धारा 400
c. धारा 404
d. धारा 406
970. धारा 404 के अनुसार, जब किसी अभियुक्त को कारावास का दंडादेश दिया जाता है, तो उसे निर्णय की प्रति कब दी जानी चाहिए?
a. अपील दायर करने के बाद
b. निर्णय सुनाए जाने से पहले
c. निर्णय सुनाए जाने के पश्चात तुरन्त
d. एक सप्ताह के भीतर
971. जब उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश पारित या पुष्ट किया जाता है, तो निर्णय की प्रमाणित प्रति अभियुक्त को कब दी जाएगी?
a. केवल आवेदन करने पर
b. राज्य सरकार की अनुमति से
c. निःशुल्क, चाहे आवेदन करे या न करे
d. अपील के बाद
972. उच्च न्यायालय किस बारे में नियम बना सकता है?
a. निर्णय की भाषा निर्धारित करने हेतु
b. केवल अभियुक्त को प्रति देने के लिए
c. प्रभावित न होने वाले व्यक्ति को निर्णय की प्रति देने हेतु
d. दंड की अवधि बढ़ाने हेतु
973. धारा 405 के अनुसार, मूल निर्णय कहाँ रखा जाएगा?
a. पुलिस अभिलेख में
b. सरकार के पास जमा किया जाएगा
c. कार्यवाही के अभिलेख में फाइल किया जाएगा
d. केवल अभियुक्त को दिया जाएगा
974. कब निर्णय का अनुवाद न्यायालय की भाषा में अभिलेख में जोड़ा जाएगा?
a. जब अभियुक्त दोषमुक्त हो
b. जब मजिस्ट्रेट आदेश दे
c. जब मूल निर्णय न्यायालय की भाषा से भिन्न हो और पक्षकार अपेक्षा करे
d. जब अनुवाद शुल्क दिया जाए
975. सेशन न्यायालय द्वारा निष्कर्ष और दंडादेश की प्रति जिला मजिस्ट्रेट को भेजना किस से सम्बंधित हैं?
a. धारा 406
b. धारा 404
c. धारा 403
d. धारा 402
976. मृत्यु दंडादेशों का पुष्टि के लिए प्रस्तुत किया जाना किस अध्याय से सम्बंधित हैं?
a. अध्याय 30
b. अध्याय 33
c. अध्याय 36
d. अध्याय 38
977. मृत्यु दंडादेशों का पुष्टि के लिए प्रस्तुत किया जाना किस धारा से किस धारा तक प्रावधानित है?
a. धारा 407 से धारा 412 तक
b. धारा 406 से धारा 411 तक
c. धारा 405 से धारा 412 तक
d. धारा 407 से धारा 415 तक
978. जब सेशन न्यायालय मृत्यु दंडादेश देता है, तो कार्यवाही किसे प्रस्तुत की जाती है?
a. जिला मजिस्ट्रेट को
b. उच्च न्यायालय को
c. पुलिस अधीक्षक को
d. लोक अभियोजक को
979. सेशन न्यायालय द्वारा दिया गया मृत्यु दंडादेश कब तक निष्पादित नहीं किया जाएगा?
a. जब तक वह मजिस्ट्रेट द्वारा अनुमति न दी जाए
b. जब तक वह उच्च न्यायालय द्वारा पुष्ट न किया जाए
c. तुरंत निष्पादित किया जाएगा
d. जब तक अभियुक्त द्वारा माफी न मांगी जाए
980. अतिरिक्त जांच किए जाने के लिए या अतिरिक्त साक्ष्य लिए जाने के लिए निदेश देने की शक्ति किस से सम्बंधित हैं?
a. धारा 408
b. धारा 406
c. धारा 405
d. धारा 407
981. जब उच्च न्यायालय को यह उचित लगे कि दोषसिद्ध व्यक्ति के दोषी या निर्दोष होने से संबंधित प्रश्न पर अतिरिक्त जांच या साक्ष्य लिया जाना चाहिए, तो उच्च न्यायालय क्या कर सकता है?
a. स्वयं जांच कर सकता है या साक्ष्य ले सकता है
b. सेशन न्यायालय को जांच या साक्ष्य लेने का आदेश दे सकता है
c. दोनों (a) और (b)
d. कोई भी नहीं
982. अतिरिक्त जांच या साक्ष्य के समय दोषसिद्ध व्यक्ति की क्या स्थिति हो सकती है जब तक उच्च न्यायालय अन्यथा निर्देश न दे?
a. दोषसिद्ध व्यक्ति की उपस्थिति अनिवार्य है
b. दोषसिद्ध व्यक्ति को जांच या साक्ष्य के समय उपस्थित नहीं होना पड़ता
c. दोषसिद्ध व्यक्ति को जांच या साक्ष्य के समय उपस्थित होने से अभिमुक्ति दी जा सकती है
d. दोषसिद्ध व्यक्ति को उपस्थित होने का आदेश दिया जाएगा
983. सेशन न्यायालय को अतिरिक्त जांच या साक्ष्य के लिए निर्देश कौन दे सकता है?
a. जिला मजिस्ट्रेट
b. उच्च न्यायालय
c. पुलिस अधीक्षक
d. लोक अभियोजक
984. धारा 408 के अनुसार दोषसिद्ध व्यक्ति को जांच या साक्ष्य के समय उपस्थित होने से कौन अभिमुक्ति दे सकता है?
a. उच्च न्यायालय
b. सेशन न्यायालय
c. जिला मजिस्ट्रेट
d. कोई भी न्यायालय
985. दंडादेश को पुष्ट करने या दोषसिद्धि को बातिल करने की उच्च न्यायालय की शक्ति किस से सम्बंधित हैं?
a. धारा 407
b. धारा 408
c. धारा 409
d. धारा 410
986. उच्च न्यायालय धारा 407 के अधीन प्रस्तुत मामले में कौन-कौन से आदेश दे सकता है?
a. दंडादेश की पुष्टि या कोई अन्य विधिसम्मत दंडादेश देना
b. दोषसिद्धि को बातिल करना और अभियुक्त को नए विचारण के लिए आदेश देना
c. अभियुक्त को दोषमुक्त करना
d. उपरोक्त सभी
987. उच्च न्यायालय दोषसिद्धि को बातिल कर सकता है और अभियुक्त को किस अपराध के लिए दोषसिद्ध कर सकता है?
a. केवल वही अपराध जिसके लिए सेशन न्यायालय ने दोषसिद्ध किया हो
b. कोई भी अपराध जो सेशन न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में हो
c. केवल संशोधित आरोप के लिए
d. नया अपराध नहीं
988. उच्च न्यायालय दंडादेश की पुष्टि कब तक नहीं करेगा?
a. जब तक अपील की अनुज्ञात अवधि समाप्त न हो जाए
b. जब तक अपील का निपटारा न हो जाए यदि अपील पहले ही दायर हो गई हो
c. दोनों (a) और (b) सही हैं
d. जब तक अभियुक्त दोषसिद्ध न हो जाए
989. उच्च न्यायालय के आदेशों में से कौन-सा विकल्प उपलब्ध नहीं है?
a. अभियुक्त को दोषमुक्त करना
b. अभियुक्त को नए विचारण के लिए आदेश देना
c. अभियुक्त को अन्यत्र स्थानांतरित करना
d. दंडादेश की पुष्टि करना
990. जब उच्च न्यायालय में दो या अधिक न्यायाधीश हों, तब दंडादेश की पुष्टि या नया दंडादेश किसके द्वारा किया जाएगा?
a. किसी एक न्यायाधीश द्वारा
b. कम से कम दो न्यायाधीशों द्वारा
c. सभी न्यायाधीशों द्वारा
d. न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा
991. धारा 410 के अनुसार दंडादेश या आदेश का हस्ताक्षर किसके द्वारा होना आवश्यक है?
a. एक न्यायाधीश द्वारा
b. तीन न्यायाधीशों द्वारा
c. कम से कम दो न्यायाधीशों द्वारा
d. न्यायालय के सचिव द्वारा
992. यदि न्यायाधीशों की न्यायपीठ में मतभेद हो और वे समान रूप से विभाजित हों, तो मामला किस धारा के अनुसार विनिश्चित किया जाएगा?
a. धारा 410
b. धारा 433
c. धारा 407
d. धारा 401
993. सेशन न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश की पुष्टि के लिए उच्च न्यायालय को प्रस्तुत किए जाने के बाद उच्च न्यायालय का समुचित अधिकारी क्या करेगा?
a. निर्णय को पुनः सेशन न्यायालय भेजेगा
b. आदेश की एक प्रमाणित प्रतिलिपि सेशन न्यायालय को विलंब के बिना भेजेगा
c. अभियुक्त को जमानत पर रिहा करेगा
d. आदेश की प्रति को सार्वजनिक करेगा
994. उच्च न्यायालय आदेश की प्रतिलिपि भेजते समय कौन-कौन सी बातें सुनिश्चित करेगा?
a. आदेश को भौतिक रूप से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजना
b. आदेश पर उच्च न्यायालय की मुद्रा लगाना
c. अपने पदीय हस्ताक्षर से आदेश को अनुप्रमाणित करना
d. उपरोक्त सभी
995. धारा 412 के अनुसार, उच्च न्यायालय की ओर से आदेश की प्रतिलिपि भेजने में विलंब होना चाहिए या नहीं?
a. हाँ, विलंब हो सकता है
b. नहीं, विलंब नहीं होना चाहिए
c. विलंब केवल तब हो सकता है जब अभियुक्त सहमत हो
d. विलंब केवल विशेष परिस्थितियों में हो सकता है
996. सेशन न्यायालय को आदेश की प्रतिलिपि भेजने के लिए उच्च न्यायालय का कौन सा अधिकारी जिम्मेदार होता है?
a. मुख्य न्यायाधीश
b. समुचित अधिकारी
c. जिला मजिस्ट्रेट
d. अभियोजन अधिकारी
997. अपीलें किस से सम्बंधित हैं?
a. धारा 410
b. धारा 413
c. धारा 415
d. धारा 418
998. दंड न्यायालय के किसी निर्णय या आदेश से अपील कब होगी?
a. हमेशा सभी निर्णयों से अपील हो सकती है
b. केवल जब इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में इसका प्रावधान हो
c. किसी भी मामले में अपील संभव नहीं है
d. केवल मौत की सजा के मामलों में अपील होगी
999. पीड़ित को किस प्रकार के आदेश के विरुद्ध अपील करने का अधिकार है?
a. अभियुक्त को दोषमुक्त करने वाले आदेश के विरुद्ध
b. अभियुक्त को कठोर सजा देने वाले आदेश के विरुद्ध
c. अभियुक्त को दोषी ठहराने वाले आदेश के विरुद्ध
d. अभियुक्त को जमानत देने वाले आदेश के विरुद्ध
1000. पीड़ित की अपील किस न्यायालय में होगी?
a. उसी न्यायालय में जहां अभियुक्त को दोषसिद्धि का आदेश दिया गया है
b. उच्च न्यायालय में
c. सुप्रीम कोर्ट में
d. जिला न्यायालय में
1001. धारा 413 के अनुसार, अपील का अधिकार किन आदेशों के विरुद्ध पीड़ित को मिलेगा?
a. केवल दोषमुक्त करने वाले आदेशों के विरुद्ध
b. कम अपराध के लिए दोषसिद्ध करने या अपर्याप्त प्रतिकर अधिरोपित करने वाले आदेशों के विरुद्ध
c. दोनों (a) और (b)
d. किसी भी आदेश के विरुद्ध
1002. परिशान्ति कायम रखने या सदाचार के लिए प्रतिभूति अपेक्षित करने वाले या प्रतिभू स्वीकार करने से इंकार करने वाले या अस्वीकार करने वाले आदेश से अपील किस से सम्बंधित हैं?
a. धारा 412
b. धारा 414
c. धारा 416
d. धारा 418
1003. धारा 414 के तहत कौन से व्यक्ति सेशन न्यायालय में आदेश के विरुद्ध अपील कर सकता है?
a. जिसे परिशान्ति कायम रखने के लिए प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया हो
b. जिसने धारा 140 के तहत प्रतिभू स्वीकार करने से इंकार किया हो
c. दोनों (a) और (b)
d. कोई भी व्यक्ति
1004. धारा 414 के अनुसार, कौन से आदेश के विरुद्ध अपील नहीं की जा सकती?
a. वे आदेश जिनके विरुद्ध धारा 141 की उपधारा (2) या (4) के अनुसार कार्यवाही हो रही हो
b. धारा 136 के तहत दिए गए आदेश
c. धारा 140 के तहत दिए गए आदेश
d. सेशन न्यायालय के सभी आदेश
1005. धारा 414 में प्रतिभूति से संबंधित अपील किस न्यायालय में की जाती है?
a. उच्च न्यायालय
b. सुप्रीम कोर्ट
c. सेशन न्यायालय
d. जिला न्यायालय
1006. धारा 414 के अनुसार, किस विषय से संबंधित आदेश के विरुद्ध अपील की जा सकती है?
a. प्रतिभूति देने का आदेश
b. प्रतिभूति स्वीकार करने से इंकार करने का आदेश
c. उपरोक्त दोनों
d. केवल सदाचार से संबंधित आदेश
1007. दोषसिद्धि से अपील किस से सम्बंधित हैं?
a. धारा 413
b. धारा 414
c. धारा 418
d. धारा 415
1008. कौन व्यक्ति उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकता है?
a. जिसे उच्च न्यायालय द्वारा असाधारण आरंभिक दांडिक अधिकारिता में दोषसिद्ध किया गया हो
b. जिसे प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा दोषसिद्ध किया गया हो
c. जिसे द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा दोषसिद्ध किया गया हो
d. जिसे सेशन न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध किया गया हो जिसमें सात वर्ष से अधिक कारावास का दंडादेश दिया गया हो
1009. सेशन न्यायाधीश द्वारा दोषसिद्ध व्यक्ति किस न्यायालय में अपील कर सकता है यदि उसे सात वर्ष से अधिक के कारावास का दंडादेश दिया गया हो?
a. जिला न्यायालय
b. उच्च न्यायालय
c. उच्चतम न्यायालय
d. मजिस्ट्रेट न्यायालय
1010. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा दोषसिद्ध व्यक्ति किस न्यायालय में अपील कर सकता है?
a. उच्च न्यायालय
b. सेशन न्यायालय
c. उच्चतम न्यायालय
d. जिला न्यायालय
1011. धारा 415 के अनुसार, अपील का निपटान किस अवधि के भीतर किया जाएगा जब अपील धारा 64 से 71 के अंतर्गत फाइल की गई हो?
a. तीन महीने
b. छह महीने
c. एक साल
d. दो साल
1012. कुछ मामलों में जब अभियुक्त दोषी होने का अभिवचन करे अपील न होना किस से सम्बंधित हैं?
a. धारा 412
b. धारा 415
c. धारा 418
d. धारा 416
1013. यदि अभियुक्त ने दोषी होने का अभिवचन दिया हो और दोषसिद्धि उच्च न्यायालय द्वारा हुई हो, तो क्या अपील की जा सकेगी?
a. हाँ, पूर्ण अपील की जा सकेगी
b. नहीं, कोई अपील नहीं होगी
c. केवल सजा के लिए अपील की जा सकेगी
d. केवल वैधता के लिए अपील की जा सकेगी
1014. जब अभियुक्त ने दोषी होने का अभिवचन दिया हो और दोषसिद्धि सेशन न्यायालय या प्रथम/द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा हुई हो, तो अपील किस विषय पर ही हो सकती है?
a. दोषसिद्धि की वैधता या दंड के परिमाण पर
b. दोषसिद्धि के खिलाफ पूर्ण अपील
c. दोषसिद्धि के खिलाफ कोई अपील नहीं
d. केवल दंड के परिमाण पर
1015. धारा 416 के अनुसार, किस न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के बाद अभियुक्त के दोषी होने के अभिवचन पर पूर्ण अपील निषेध है?
a. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
b. द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट
c. उच्च न्यायालय
d. सेशन न्यायालय
1016. छोटे मामलों में अपील न होना किस से सम्बंधित है?
a. धारा 415
b. धारा 417
c. धारा 418
d. धारा 419
1017. किस मामले में दोषसिद्ध व्यक्ति द्वारा उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध अपील नहीं हो सकती यदि दंडादेश कारावास की अवधि कितनी हो?
a. तीन मास से अधिक
b. तीन मास से कम
c. तीन मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या एक हजार रुपए से अनधिक जुर्माने का या ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का
d. छह मास
1018. सेशन न्यायालय द्वारा दिए गए दंडादेश में अपील कब तक संभव नहीं है?
a. तीन मास से अनधिक की कारावास या दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने तक
b. छह मास से अनधिक कारावास या पांच सौ रुपए जुर्माना तक
c. कोई भी कारावास हो सकता है, जुर्माना पर सीमा नहीं
d. केवल जुर्माना पर सीमा होती है
1019. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा कितने तक के जुर्माने पर अपील नहीं हो सकती?
a. एक सौ रुपए से अधिक
b. एक सौ रुपए से अनधिक (अधिकतम एक सौ रुपए)
c. दो सौ रुपए तक
d. पाँच सौ रुपए तक
1020. धारा 417 के अनुसार, संक्षेपत: विचारित मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा किस जुर्माने तक के दंडादेश पर अपील नहीं हो सकती?
a. 100 रुपए से अनधिक
b. 200 रुपए से अनधिक
c. 500 रुपए से अनधिक
d. 1000 रुपए से अनधिक
1021. राज्य सरकार द्वारा दंडादेश के विरुद्ध अपील किस से सम्बंधित है ?
a. धारा 418
b. धारा 420
c. धारा 422
d. धारा 425
1022. यदि अपराध का अन्वेषण किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन अभिकरण द्वारा किया गया है, तो किसके पास दंडादेश की अपर्याप्तता के आधार पर अपील प्रस्तुत करने का अधिकार होगा?
a. राज्य सरकार
b. केंद्र सरकार
c. अभियुक्त
d. लोक अभियोजक
1023. जब दंडादेश के विरुद्ध अपर्याप्तता के आधार पर अपील की जाती है, तब दंडादेश में वृद्धि कब तक नहीं की जाएगी?
a. जब तक अभियुक्त को मौका न दिया जाए कारण दर्शाने का
b. अपील की स्वीकृति मिलने तक
c. जब तक अभियुक्त दोषी ठहराया न जाए
d. तुरंत अपील के बाद
1024. अभियुक्त को किस स्थिति में दंडादेश में कमी के लिए अभिवचन करने का अवसर दिया जाएगा?
a. दंडादेश में वृद्धि के कारण
b. अपील के प्रारंभ में
c. अभियुक्त की मांग पर
d. अभियोजन पक्ष के अनुरोध पर
1025. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64 से 71 के अंतर्गत पारित कारावास के विरुद्ध अपील का निपटान कितने समय में किया जाएगा?
a. तीन माह
b. छह माह
c. एक वर्ष
d. कोई समय सीमा नहीं
1026. दोषमुक्ति की दशा में अपील किस से सम्बंधित है?
a. धारा 411
b. धारा 413
c. धारा 415
d. धारा 419
1027. जिला मजिस्ट्रेट किस मामले में लोक अभियोजक को सेशन न्यायालय में अपील प्रस्तुत करने का निदेश दे सकता है?
a. किसी संज्ञेय और अजमानतीय अपराध में किसी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित दोषमुक्ति के आदेश से
b. केवल गंभीर अपराधों में
c. केवल मौत के मामले में
d. किसी भी मामले में बिना शर्त
1028. राज्य सरकार किस स्थिति में लोक अभियोजक को उच्च न्यायालय में अपील करने का निर्देश दे सकती है?
a. किसी भी दोषमुक्ति आदेश के खिलाफ
b. जब दोषमुक्ति का आदेश उच्च न्यायालय से भिन्न किसी न्यायालय द्वारा दिया गया हो और वह जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के अंतर्गत न हो
c. केवल तब जब सेशन न्यायालय दोषमुक्ति आदेश दे
d. केवल केंद्रीय सरकार के मामलों में
1029. कथन (क) जब किसी अभियुक्त ने दोष स्वीकार कर लिया हो और उसके आधार पर दोषी सिद्ध कर दिया गया हो तो कोई अपील नहीं की जा सकती
कारण (ख) एक व्यक्ति, जो जानबूझकर दोष स्वीकार करता है दोषसिद्धि पर व्यथित नहीं हो सकता
नीचे दी गई कूट संख्या का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनें-
कूट संख्याएं:
a. (क) तथा (ख) दोनों सही हैं तथा (ख) (क) का सही स्पष्टीकरण है
b. (क) तथा (ख) दोनों सही हैं तथा (ख) (क) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
c. (क) सही है किन्तु (ख) गलत है।
d. (क) गलत है किन्तु (ख) सही है।
1030. यदि दोषमुक्ति आदेश ऐसे मामले में दिया गया हो जिसमें अपराध का अन्वेषण केन्द्रीय अधिनियम के तहत किसी अन्य अभिकरण ने किया हो, तो किसके पास अपील करने का अधिकार होगा?
a. राज्य सरकार
b. केंद्रीय सरकार
c. अभियुक्त
d. पीड़ित
1031. एक अभियुक्त दोष स्वीकार कर लेता है और इसी आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा दोषी सिद्ध कर दिया जाता है तथा उसके विरूद्ध 4 वर्ष की सजा पारित कर दी जाती है-
a. उच्च न्यायालय के समक्ष केवल सजा की अवधि और वैधता को लेकर अपील की जा सकती है।
b. सत्र न्यायालय के समक्ष केवल सजा की अवधि और वैधता को लेकर अपील की जा सकती है।
c. कोई अपील नहीं की जा सकती
d. उपरोक्त में से कोई नहीं
1032. उच्च न्यायालय के बिना अपील स्वीकार नहीं की जाएगी जब अपील किसके अधीन हो?
a. उपधारा (1) और उपधारा (2) के अधीन
b. केवल उपधारा (3) के अधीन
c. किसी भी अपील के लिए
d. उपधारा (4) के अधीन
1033. परिवादी को दोषमुक्ति के आदेश के खिलाफ अपील करने की विशेष अनुमति कब तक मिल सकती है?
a. दोषमुक्ति के आदेश की तारीख से छह माह के भीतर यदि परिवादी लोक सेवक है, अन्यथा साठ दिन के भीतर
b. दोषमुक्ति के आदेश के तुरंत बाद
c. दोषमुक्ति आदेश के बाद एक वर्ष तक
d. कोई समय सीमा नहीं
1034. यदि दोषमुक्ति के आदेश से अपील करने की विशेष अनुमति का आवेदन नामंजूर हो जाता है तो क्या होगा?
a. उस दोषमुक्ति आदेश से कोई अपील नहीं होगी
b. अपील संभव है पर उच्च न्यायालय की अनुमति से
c. अपील निचली अदालत में की जा सकती है
d. अभियोजन पक्ष पुनः आवेदन कर सकता है
1035. यदि उच्च न्यायालय ने अभियुक्त की दोषमुक्ति को उलटकर उसे दोषसिद्ध किया है और दंड दिया है, तो अभियुक्त किस न्यायालय में अपील कर सकता है?
a. जिला न्यायाल
b. सेशन न्यायालय
c. उच्चतम न्यायालय
d. कोई अपील नहीं हो सकती
1036. धारा 420 के अनुसार, अभियुक्त को उच्चतम न्यायालय में अपील करने का अधिकार तब होता है जब उसे किस प्रकार का दंड दिया गया हो?
a. जुर्माना या तीन साल तक का कारावास
b. मृत्यु दंड, आजीवन कारावास, या दस वर्ष या अधिक की अवधि का कारावास
c. किसी भी प्रकार का दंड
d. केवल मौत की सजा
1037. धारा 420 में अपील का अधिकार किस स्थिति में मान्य होगा?
a. जब उच्च न्यायालय ने दोषमुक्ति के आदेश को उलट दिया हो और अभियुक्त को दोषसिद्ध किया हो
b. जब अभियुक्त ने दोषी होने से इंकार किया हो
c. जब अभियुक्त ने पहले ही उच्चतम न्यायालय में अपील कर दी हो
d. किसी भी दोषसिद्धि पर
1038. सेशन न्यायालय की गई अपीलें कैसे सुनी जाएंगी किस से सम्बंधित है?
a. धारा 419
b. धारा 420
c. धारा 421
d. धारा 422
1039. सेशन न्यायालय में या सेशन न्यायाधीश को की गई अपील कौन सुनेगा?
a. केवल मुख्य न्यायाधीश
b. सेशन न्यायाधीश या अपर सेशन न्यायाधीश
c. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट
d. जिला मजिस्ट्रेट
1040. द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा किए गए विचारण में दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील कौन सुनेगा?
a. सेशन न्यायाधीश
b. अपर सेशन न्यायाधीश
c. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
d. उच्च न्यायालय
1041. अपर सेशन न्यायाधीश या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कौन-सी अपीलें सुन सकता है?
a. केवल वे अपीलें जो सीधे उसके पास आती हैं
b. केवल वे अपीलें जिन्हें सेशन न्यायाधीश ने आदेश द्वारा उसे सौंपी हो या उच्च न्यायालय ने विशेष आदेश से निदेश दिया हो
c. सभी अपीलें बिना किसी आदेश के
d. केवल प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट की अपीलें
1042. अपील किस रूप में प्रस्तुत की जाएगी?
a. मौखिक रूप में
b. लिखित अर्जी के रूप में
c. टेलीफोन कॉल द्वारा
d. अनौपचारिक नोट के रूप में
1043. अपील के साथ क्या संलग्न करना आवश्यक है?
a. अभियुक्त की फोटो
b. निर्णय या आदेश की प्रतिलिपि जिसके विरुद्ध अपील हो रही है
c. किसी भी प्रमाणपत्र की कॉपी
d. पुलिस रिपोर्ट
1044. यदि अपीलार्थी जेल में हो तो वह अपनी अपील कैसे प्रस्तुत करेगा?
a. सीधे न्यायालय में जाकर
b. जेल के भारसाधक अधिकारी को अर्जी और प्रतिलिपियाँ देकर
c. फोन द्वारा अपील कर
d. किसी वकील को न देकर
1045. जेल का भारसाधक अधिकारी अपील की अर्जी और प्रतिलिपियाँ कहाँ भेजेगा?
a. पुलिस स्टेशन
b. समुचित अपील न्यायालय
c. उच्च न्यायालय
d. राज्य सरकार
1046. संक्षेपत: खारिज न की गई अपीलों की सुनवाई के लिए प्रक्रिया किस से सम्बंधित है?
a. धारा 424
b. धारा 425
c. धारा 426
d. धारा 427
1047. यदि अपील न्यायालय अपील को संक्षेपत: खारिज नहीं करता है, तो किसे अपील सुनवाई की सूचना दी जाएगी?
a. केवल अपीलार्थी को
b. अपीलार्थी या उसके अधिवक्ता, नियुक्त अधिकारी, परिवादी (यदि लागू हो), और अभियुक्त (यदि लागू हो) को
c. केवल अभियुक्त को
d. केवल परिवादी को
1048. यदि अपील न्यायालय में मामले का अभिलेख उपलब्ध नहीं है, तो न्यायालय क्या करेगा?
a. मामले को अस्वीकार कर देगा
b. अभिलेख मंगाएगा और पक्षकारों को सुनेगा
c. मामले को तुरंत निपटाएगा
d. अभियोजन पक्ष को दोषी ठहराएगा
1049. किस स्थिति में अपील न्यायालय अभिलेख मंगाए बिना ही अपील का निपटारा कर सकता है?
a. जब अपील में दोषसिद्धि का प्रश्न हो
b. जब अपील केवल दंड के परिमाण या उसकी वैधता के बारे में हो
c. जब अभियुक्त दोषसिद्ध हो
d. जब अभियुक्त परिवादी हो
1050. दंडादेश की कथित कठोरता के आधार पर अपीलकर्ता न्यायालय की अनुमति के बिना क्या कर सकता है?
a. अन्य किसी आधार पर अपील का समर्थन कर सकता है
b. केवल दंडादेश की कठोरता के आधार पर ही बात कर सकता है
c. अन्य किसी आधार पर बात नहीं करेगा और सुनवाई भी नहीं होगी
d. न्यायालय को छोड़ सकता है
1051. धारा 427 किस विषय से सम्बंधित है?
a. संक्षेपत: खारिज न की गई अपीलों की सुनवाई के लिए प्रक्रिया
b. सेशन न्यायालय की गई अपीलें कैसे सुनी जाएंगी
c. अपील न्यायालय की शक्तियां
d. अधीनस्थ अपील न्यायालय के निर्णय
1052. अपील न्यायालय क्या कर सकता है यदि उसे लगता है कि अपील में हस्तक्षेप करने का पर्याप्त आधार नहीं है?
a. अपील को संक्षेपत: खारिज कर सकता है
b. अपील को स्वीकार कर दोषी ठहरा सकता है
c. अभियुक्त को दोषमुक्त कर सकता है
d. अतिरिक्त जांच का आदेश दे सकता है
1053. दोषमुक्ति के आदेश से अपील में अपील न्यायालय क्या कर सकता है?
a. केवल आदेश को कायम रख सकता है
b. आदेश को उलट सकता है, अतिरिक्त जांच का आदेश दे सकता है, पुनर्विचार करवा सकता है या अभियुक्त को दोषी ठहरा सकता है
c. केवल दोषी ठहरा सकता है
d. अपील को खारिज कर सकता है
1054. दोषसिद्धि से अपील में अपील न्यायालय कौन-कौन से निर्णय ले सकता है?
a. निष्कर्ष और दंडादेश को उलट सकता है या कायम रख सकता है
b. दंड के स्वरूप या परिमाण में परिवर्तन कर सकता है, पर दंड बढ़ा नहीं सकता
c. उपरोक्त दोनों
d. कोई भी नहीं
1055. दंडादेश की वृद्धि के लिए अपील में अपील न्यायालय की क्या शक्तियां हैं?
a. दोषसिद्धि को उलट सकता है या अभियुक्त को दोषमुक्त कर सकता है
b. दंडादेश को कायम रखते हुए निष्कर्ष में परिवर्तन कर सकता है
c. दंड के स्वरूप या परिमाण में परिवर्तन कर सकता है जिससे वृद्धि या कमी हो, परन्तु अधिकतम दंड उस अपराध के लिए अधिक नहीं होगा
d. उपरोक्त सभी
1056. अपील न्यायालय दंड में वृद्धि तब तक नहीं करेगा जब तक कि—
a. अभियुक्त को दंड की पूरी जानकारी न दी जाए
b. अभियुक्त को उस वृद्धि के विरुद्ध कारण दर्शाने का अवसर न मिल जाए
c. अभियुक्त दोषी ठहराया जाए
d. अभियुक्त से कोई सुनवाई न हो
1057. अपील में उच्च न्यायालय के आदेश का प्रमाणित करके निचले न्यायालय को भेजा जाना किस से सम्बंधित है?
a. धारा 429
b. धारा 426
c. धारा 425
d. धारा 424
1058. जब उच्च न्यायालय किसी अपील में निर्णय या आदेश देता है, तो वह उसे किसे प्रमाणित करके भेजेगा?
a. सीधे अभियुक्त को
b. उस न्यायालय को जिसके द्वारा वह निर्णय, दंडादेश या आदेश पारित किया गया था
c. मुख्य न्यायालय को
d. राज्य सरकार को
1059. यदि निर्णय पारित करने वाला न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से भिन्न न्यायिक मजिस्ट्रेट का हो, तो उच्च न्यायालय का निर्णय या आदेश किसके माध्यम से भेजा जाएगा?
a. सीधे अभियुक्त को
b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की मार्फत
c. जिला मजिस्ट्रेट की मार्फत
d. लोक अभियोजक की मार्फत
1060. यदि निर्णय पारित करने वाला न्यायालय कार्यपालक मजिस्ट्रेट का हो, तो उच्च न्यायालय का निर्णय या आदेश किसके माध्यम से भेजा जाएगा?
a. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की मार्फत
b. जिला मजिस्ट्रेट की मार्फत
c. लोक अभियोजक की मार्फत
d. सीधे उस न्यायालय को
1061. अपील न्यायालय अतिरिक्त साक्ष्य ले सकेगा या उसके लिए जाने का निदेश दे सकेगा किससे सम्बंधित है?
a. धारा 431
b. धारा 432
c. धारा 437
d. धारा 438
1062. यदि अपील न्यायालय को लगता है कि अतिरिक्त साक्ष्य आवश्यक है तो वह क्या कर सकता है?
a. केवल अतिरिक्त साक्ष्य को अस्वीकार कर सकता है
b. अतिरिक्त साक्ष्य स्वयं ले सकता है या मजिस्ट्रेट/सेशन न्यायालय से लेने का आदेश दे सकता है
c. अतिरिक्त साक्ष्य को विचार में नहीं ले सकता
d. अतिरिक्त साक्ष्य लेने के लिए अभियुक्त की अनुमति लेनी होगी
1063. जब अतिरिक्त साक्ष्य मजिस्ट्रेट या सेशन न्यायालय द्वारा लिया जाता है तो क्या होगा?
a. उसे सीधे अभियुक्त को भेज दिया जाएगा
b. मजिस्ट्रेट उसे प्रमाणित करके अपील न्यायालय को भेजेगा
c. अतिरिक्त साक्ष्य को नकार दिया जाएगा
d. उसे पुनः सुनवाई के लिए वापिस नहीं भेजा जाएगा
1064. जहां अपील न्यायालय के न्यायाधीश राय के बारे में समान रूप में विभाजित हों, वहां प्रक्रिया किस से सम्बंधित है?
a. धारा 431
b. धारा432
c. धारा 433
d. धारा 438
1065. धारा 434 के अनुसार, अपील न्यायालय द्वारा पारित निर्णय या आदेश सामान्यतः क्या माने जाएंगे?
a. अंतरिम
b. संशोधन योग्य
c. अस्थायी
d. अंतिम
1066. धारा 434 के अंतर्गत, दोषसिद्धि की अपील का अंतिम निपटारा होने के बावजूद, कौन-सी अपीलें अपील न्यायालय द्वारा सुनी जा सकती हैं?
a. सिविल अपीलें
b. दंडादेश में वृद्धि की अपील
c. जमानत याचिकाएं
d. साक्ष्य की पुन: जांच की याचिकाएं
1067. अपीलों का उपशमन किस से सम्बंधित है?
a. धारा 435
b. धारा 436
c. धारा 437
d. धारा 438
1068. धारा 435 के अनुसार, धारा 418 या 419 के अधीन अपील कब अंतिम रूप से उपशमित (abated) हो जाती है?
a. अपीलार्थी की गिरफ़्तारी पर
b. अभियुक्त की मृत्यु पर
c. निर्णय पारित होने पर
d. अपील खारिज होने पर
1069. क्या जुर्माने के दंडादेश की अपील, अपीलार्थी की मृत्यु के कारण उपशमित होती है?
a. हाँ
b. नहीं
c. केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से
d. यदि अभियुक्त जेल में हो
1070. यदि दोषसिद्धि और कारावास के दंडादेश के विरुद्ध अपील लंबित हो और अपीलार्थी की मृत्यु हो जाए, तो कौन उसकी अपील जारी रखने के लिए आवेदन कर सकता है?
a. कोई भी मित्र
b. सरकारी अधिवक्ता
c. निकट नातेदार
d. मजिस्ट्रेट
1071. अपीलार्थी की मृत्यु के कितने दिनों के भीतर उसका निकट नातेदार अपील जारी रखने की अनुमति के लिए आवेदन कर सकता है?
a. 60 दिन
b. 30 दिन
c. 90 दिन
d. 15 दिन
1072. धारा 435 के अनुसार, निम्न में से कौन "निकट नातेदार" की श्रेणी में आता है?
a. पड़ोसी
b. सरकारी कर्मचारी
c. पारंपरिक वंशज
d. न्यायालय के लिपिक
1073. यदि निकट नातेदार को अपील जारी रखने की अनुमति दे दी जाती है, तो क्या अपील उपशमित मानी जाएगी?
a. हाँ
b. नहीं
c. केवल उच्चतम न्यायालय के आदेश से
d. यदि अभियुक्त पुनः जीवित हो
1074. उच्च न्यायालय को निर्देश किससे सम्बंधित है ?
a. धारा 435
b. धारा 432
c. धारा 436
d. धारा 438
1075. पुनरीक्षण की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अभिलेख मंगाना किससे सम्बंधित है ?
a. धारा 432
b. धारा 435
c. धारा 436
d. धारा 438
1076. धारा 438 के अंतर्गत, उच्च न्यायालय या सेशन न्यायाधीश किस उद्देश्य से अवर न्यायालय के अभिलेख मंगा सकता है?
a. अभियुक्त की आय की जानकारी के लिए
b. न्यायालय की स्थिति देखने के लिए
c. निष्कर्ष, दंडादेश, आदेश की शुद्धता, वैधता या औचित्य की परीक्षा हेतु
d. गवाहों की संख्या बढ़ाने के लिए
1077. जब उच्च न्यायालय अभिलेख मंगाता है, तो वह क्या आदेश दे सकता है?
a. अभियुक्त को निलंबित कर दे
b. दंडादेश के निष्पादन को स्थगित कर दे
c. अभियोजन को समाप्त कर दे
d. अभियुक्त को विदेश भेज दे
1078. यदि अभियुक्त परिरोध में है, तो अभिलेख मंगाने के समय न्यायालय क्या कर सकता है?
a. उसे मृत्यु दंड दे सकता है
b. उसे जमानत देने से मना कर सकता है
c. उसे उसके बंधपत्र या जमानतपत्र पर छोड़ सकता है
d. उसे पुलिस हिरासत में वापस भेज सकता है
1079. धारा 439 के अनुसार, उच्च न्यायालय या सेशन न्यायाधीश किसे अतिरिक्त जांच करने का निर्देश दे सकता है?
a. जिला मजिस्ट्रेट
b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
c. पुलिस अधीक्षक
d. कोई भी व्यक्ति
1080. धारा 439 के अंतर्गत, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अतिरिक्त जांच किसके माध्यम से करवा सकता है?
a. केवल स्वयं
b. अपने वरिष्ठ मजिस्ट्रेट के द्वारा
c. अपने किसी अधीनस्थ मजिस्ट्रेट के द्वारा
d. किसी पुलिस अधिकारी द्वारा
1081. सेशन न्यायाधीश की पुनरीक्षण की शक्तियां किससे सम्बंधित है?
a. धारा 440
b. धारा 442
c. धारा 446
d. धारा 448
1082. धारा 440 के अंतर्गत, यदि किसी कार्यवाही का अभिलेख सेशन न्यायाधीश ने स्वयं मंगवाया है, तो वह किन शक्तियों का प्रयोग कर सकता है?
a. केवल पुनरीक्षण की सीमित शक्तियाँ
b. केवल पुलिस जांच के आदेश
c. धारा 442(1) के अधीन उच्च न्यायालय की सभी शक्तियाँ
d. जमानत रद्द करने की शक्ति
1083. धारा 440(2) के अनुसार, उपधाराओं में जहाँ "उच्च न्यायालय" लिखा हो, उसका क्या अर्थ माना जाएगा?
a. उच्चतम न्यायालय
b. राज्य सरकार
c. सेशन न्यायाधीश
d. पुलिस अधिकारी
1084. यदि किसी व्यक्ति द्वारा पुनरीक्षण के लिए आवेदन सेशन न्यायाधीश को दिया गया है, तो उस व्यक्ति के लिए क्या होगा?
a. वह उच्च न्यायालय में पुनः आवेदन कर सकता है
b. उसका केस सर्वोच्च न्यायालय में चला जाएगा
c. सेशन न्यायाधीश का निर्णय अंतिम माना जाएगा
d. उसे पुनरीक्षण का कोई अधिकार नहीं है
1085. धारा 440 के अंतर्गत पुनरीक्षण की कार्यवाही किसकी प्रेरणा पर उच्च न्यायालय द्वारा नहीं ली जा सकती?
a. लोक अभियोजक की
b. पुलिस निरीक्षक की
c. उस व्यक्ति की जिसने पहले सेशन न्यायाधीश के समक्ष आवेदन किया हो
d. जिला मजिस्ट्रेट की
1086. अपर सेशन न्यायाधीश की शक्ति किससे सम्बंधित है?
a. धारा 442
b. धारा 441
c. धारा 440
d. धारा 439
1087. धारा 441 के अंतर्गत, अपर सेशन न्यायाधीश को कौन-सी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं?
a. केवल अपील की सुनवाई की शक्ति
b. मजिस्ट्रेट के आदेशों को संशोधित करने की शक्ति
c. सेशन न्यायाधीश की सभी शक्तियाँ (यदि मामला सौंपा गया हो)
d. केवल पुनरीक्षण की शक्ति
1088. अपर सेशन न्यायाधीश को सेशन न्यायाधीश की शक्तियाँ तब प्राप्त होती हैं जब:
a. वह स्वेच्छा से किसी मामले की सुनवाई शुरू करता है
b. कोई मजिस्ट्रेट उसे निर्देश देता है
c. मामला सेशन न्यायाधीश द्वारा साधारण या विशेष आदेश से उसे सौंपा गया हो
d. राज्य सरकार उसे अधिकृत करे
1089. धारा 441 के अनुसार, अपर सेशन न्यायाधीश को जो शक्तियाँ प्राप्त होती हैं, वे किस अध्याय के अधीन होती है?
a. अध्याय 25
b. अध्याय 29
c. अध्याय 31
d. अध्याय 33
1090. धारा 441 का मुख्य उद्देश्य किससे संबंधित है?
a. जमानत देने की प्रक्रिया
b. पुनरीक्षण की शक्तियाँ
c. अपीली शक्तियों का हस्तांतरण
d. दंडादेश को निलंबित करना
1091. क्या अपर सेशन न्यायाधीश को स्वतः सभी सेशन न्यायाधीश की शक्तियाँ प्राप्त होती हैं?
a. हाँ, सभी मामलों में
b. नहीं, जब तक सेशन न्यायाधीश से मामला सौंपा न गया हो
c. केवल आपराधिक मामलों में
d. केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से
1092. उच्च न्यायालय को पुनरीक्षण की शक्ति किस स्थिति में प्राप्त होती है?
a. जब अभियुक्त अपील करता है
b. जब उच्च न्यायालय स्वयं किसी कार्यवाही का अभिलेख मंगवाता है या उसे जानकारी होती है
c. जब निचली अदालत अनुरोध करती है
d. जब पुलिस पुनरीक्षण की मांग करती है
1093. उच्च न्यायालय पुनरीक्षण के अंतर्गत किन धाराओं के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर सकता है?
a. केवल धारा 427 और 430
b. केवल धारा 344
c. धारा 427, 430, 431, 432 और 344
d. धारा 433 और 434
1094. यदि पुनरीक्षण न्यायालय में न्यायाधीशों की राय समान रूप से विभाजित हो जाती है, तो मामले का निपटारा कैसे किया जाएगा?
a. पुनः सुनवाई की जाएगी
b. उच्चतम न्यायालय भेजा जाएगा
c. धारा 433 के अनुसार
d. अभियुक्त को दोषमुक्त किया जाएगा
1095. किस स्थिति में उच्च न्यायालय पुनरीक्षण के अंतर्गत अभियुक्त या अन्य व्यक्ति के विरुद्ध आदेश पारित नहीं कर सकता?
a. जब अभियुक्त उपस्थित न हो
b. जब अभियुक्त को अपनी प्रतिरक्षा में सुने जाने का अवसर नहीं मिला हो
c. जब निचली अदालत सहमत न हो
d. जब अभियोजन पक्ष अनुपस्थित हो
1096. आपराधिक मामलों का अन्तरण किस से सम्बंधित है?
a. अध्याय 30
b. अध्याय 33
c. अध्याय 32
d. अध्याय 35
1097. मामलों और अपीलों को अन्तरित करने की उच्चतम न्यायालय की शक्ति किससे सम्बंधित है?
a. धारा 446
b. धारा 447
c. धारा 448
d. धारा 449
1098. मामलों और अपीलों को अन्तरित करने की उच्च न्यायालय की शक्ति किससे सम्बंधित है?
a. धारा 446
b. धारा 447
c. धारा 448
d. धारा 449
1099. धारा 447(1) के अनुसार उच्च न्यायालय किन परिस्थितियों में मामला या अपील ‘अन्तरित’ कर सकता है?
a. जब आरोपी कोर्ट में उपस्थित न हो
b. जब असाधारणतः कठिन विधिप्रश्न की संभाव्यता हो
c. जब पुलिस रिपोर्ट लंबित हो
d. जब गवाह कम हों
1100. धारा 447(1)(क) के अनुसार अंतरण का आधार कौन-सा है?
a. जमानत याचिका लंबित हो
b. अधीनस्थ दंड न्यायालय में ऋजु (निष्पक्ष) और पक्षपातरहित विचारण न हो सकना
c. आरोप गंभीर हो
d. न्यायालय बदलने का आरोपी का निजी अनुरोध
1101. धारा 447(1)(ii) किससे संबंधित है?
a. मामला मजिस्ट्रेट से सुप्रीम कोर्ट को भेजना
b. समान वरिष्ठ अधिकारिता वाले एक दंड न्यायालय से दूसरे दंड न्यायालय को अंतरण
c. निचली अदालत के न्यायाधीश को बदलना
d. अभियोजन अधिकारी को बदलना
1102. धारा 447(5) के अनुसार, लोक अभियोजक को सूचना देने के बाद आवेदन पर आदेश कब पारित किया जा सकता है?
a. तुरंत
b. 12 घंटे बाद
c. कम से कम 24 घंटे बाद
d. केवल अगली सुनवाई पर
1103. एक ही सत्र खंड के दो न्यायालयों के बीच मामले को अंतरित करने के लिए उच्च न्यायालय में आवेदन तभी किया जा सकता है जब:
a. आवेदन सबसे पहले लोकसभा में किया जाए
b. सरकार की अनुमति हो
c. पहले सत्र न्यायाधीश को आवेदन किया गया हो और वह नामंजूर कर दे
d. पुलिस रिपोर्ट पेश की गई हो
1104. यदि अभियुक्त आवेदन करता है, तो उसे लोक अभियोजक को क्या देना होता है?
a. रिश्वत
b. आवेदन की मौखिक सूचना
c. आवेदन की लिखित सूचना और आधारों की प्रतिलिपि
d. कोर्ट फीस
1105. मामलों और अपीलों को अन्तरित करने की सेशन न्यायालय की शक्ति किससे सम्बंधित है?
a. धारा 446
b. धारा 447
c. धारा 448
d. धारा 449
1106. सेशन न्यायाधीश किस परिस्थिति में किसी दंड न्यायालय से दूसरे दंड न्यायालय को मामला अंतरित कर सकता है?
a. जब पुलिस अनुरोध करे
b. जब वकील आवेदन करे
c. जब न्याय के उद्देश्यों के लिए समीचीन प्रतीत हो
d. जब राज्यपाल की अनुमति हो
1107. धारा 448 के तहत सेशन न्यायाधीश को आवेदन के संबंध में कौन-सी धारा के उपबंध वैसे ही लागू होते हैं जैसे उच्च न्यायालय के मामले में होते हैं?
a. धारा 439
b. धारा 445
c. धारा 447
d. धारा 449
1108. धारा 447 की उपधारा (7) में उल्लिखित "राशि" शब्द को धारा 448 में किस प्रकार परिवर्तित किया गया है?
a. "पचास हजार रुपए"
b. "दस हजार रुपए से अनधिक की राशि"
c. "अनिश्चित राशि"
d. "पाँच सौ रुपए"
1109. सेशन न्यायाधीश किससे कोई मामला या अपील वापस ले सकता है?
a. अपर सत्र न्यायाधीश
b. पुलिस अधीक्षक
c. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
d. राज्यपाल
1110. क्या सेशन न्यायाधीश उस मामले को वापस मंगा सकता है जिसे उसने स्वयं किसी अन्य न्यायालय को सौंपा हो?
a. नहीं, एक बार सौंपा गया मामला वापस नहीं लिया जा सकता
b. हाँ, जब मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंपा गया हो
c. हाँ, जब मामला अपर सेशन न्यायाधीश को सौंपा गया हो
d. केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से
1111. सेशन न्यायाधीश अपर सेशन न्यायाधीश से कोई मामला या अपील कब वापस मंगा सकता है?
a. कभी नहीं
b. विचारण प्रारंभ होने के बाद
c. विचारण या सुनवाई प्रारंभ होने से पूर्व
d. निर्णय के बाद
1112. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट किससे मामला वापस ले सकता है?
a. जिला न्यायाधीश से
b. सत्र न्यायाधीश से
c. अपने अधीनस्थ किसी मजिस्ट्रेट से
d. पुलिस अधिकारी से
1113. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा वापस लिया गया मामला किसे सौंपा जा सकता है?
a. केवल पुलिस को
b. किसी सक्षम मजिस्ट्रेट को
c. जिला कलेक्टर को
d. किसी मंत्री को
1114. क्या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उस मामले की जांच या विचारण स्वयं कर सकता है जिसे उसने पहले किसी अधीनस्थ मजिस्ट्रेट को सौंपा था?
a. नहीं
b. हाँ
c. केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से
d. केवल अभियुक्त की सहमति से
1115. धारा 450(2) के अनुसार, कोई न्यायिक मजिस्ट्रेट उस मामले को वापस मंगा सकता है जिसे उसने धारा 212(2) के अंतर्गत सौंपा है। वह इसके बाद क्या कर सकता है?
a. केवल उसे खारिज कर सकता है
b. स्वयं जांच या विचारण कर सकता है
c. उच्च न्यायालय को भेज सकता है
d. आरोपी को रिहा कर सकता है
1116. कार्यपालक मजिस्ट्रेटों द्वारा मामलों का हवाले किया जाना या वापस लिया जाना किससे सम्बंधित है?
a. धारा 446
b. धारा 447
c. धारा 448
d. धारा 451
1117. धारा 451 के अनुसार, निम्न में से कौन किसी कार्यवाही को अपने अधीनस्थ मजिस्ट्रेट को सौंप सकता है?
a. पुलिस अधीक्षक
b. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
c. जिला मजिस्ट्रेट या उपखंड मजिस्ट्रेट
d. सत्र न्यायाधीश
1118. क्या जिला मजिस्ट्रेट अपने अधीनस्थ मजिस्ट्रेट से कोई मामला वापस ले सकता है?
a. नहीं
b. हाँ
c. केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से
d. केवल सत्र न्यायाधीश की सहमति से
1119. कोई मामला वापस लेकर, जिला मजिस्ट्रेट क्या कर सकता है?
a. उसे बंद कर सकता है
b. स्वयं निपटा सकता है या किसी अन्य मजिस्ट्रेट को निर्देशित कर सकता है
c. आरोपी को बरी कर सकता है
d. केवल अगली तारीख दे सकता है
1120. दंडादेशों का निष्पादन, निलंबन, परिहार और लघुकरण किन धाराओं में वर्णित है ?
a. धारा 453 – 478
b. धारा 452 – 479
c. धारा 451 – 476
d. धारा 453 - 479
1121. धारा 453 का संबंध किससे है?
a. गिरफ्तारी प्रक्रिया से
b. अपील की सुनवाई से
c. धारा 409 के अधीन मृत्यु दंड की पुष्टि के आदेश के निष्पादन से
d. पुलिस द्वारा साक्ष्य संग्रह से
1122. धारा 453 के अंतर्गत, जब उच्च न्यायालय मृत्यु दंडादेश की पुष्टि करता है, तो सेशन न्यायालय को क्या करना होता है?
a. आरोपी को रिहा करना
b. पुनः सुनवाई करना
c. वारंट जारी करना या आवश्यक कदम उठाना
d. मामला पुलिस को सौंपना
1123. मृत्यु दंडादेश की पुष्टि किस न्यायालय द्वारा की जाती है?
a. जिला न्यायालय
b. मजिस्ट्रेट न्यायालय
c. उच्च न्यायालय
d. ग्राम पंचायत
1124. सेशन न्यायालय को मृत्यु दंडादेश की पुष्टि का आदेश किस धारा के अंतर्गत उच्च न्यायालय से प्राप्त होता है?
a. धारा 401
b. धारा 407
c. धारा 409
d. धारा 411
1125. धारा 454 का संबंध किससे है?
a. साक्ष्य संग्रह से
b. अपील की सुनवाई से
c. उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए मृत्यु दंडादेश के निष्पादन से
d. मजिस्ट्रेट द्वारा चालान दायर करने से
1126. धारा 454 के अंतर्गत, मृत्यु दंडादेश किस न्यायालय द्वारा दिया जाता है?
a. जिला न्यायालय
b. सत्र न्यायालय
c. उच्च न्यायालय
d. सर्वोच्च न्यायालय
1127. जब उच्च न्यायालय मृत्यु दंडादेश देता है, तब इसे लागू करने के लिए किसे आदेश भेजा जाता है?
a. पुलिस अधीक्षक को
b. राज्य सरकार को
c. संबंधित सत्र न्यायालय को
d. जेल अधीक्षक को
1128. सेशन न्यायालय मृत्यु दंडादेश के निष्पादन के लिए क्या करता है?
a. समीक्षा याचिका दायर करता है
b. आरोपी को जमानत देता है
c. वारंट जारी करता है
d. न्यायिक आयोग गठित करता है
1129. धारा 454 की प्रक्रिया कब लागू होती है?
a. जब कोई पुलिस केस लंबित हो
b. जब उच्च न्यायालय अपील या पुनरीक्षण में मृत्यु दंड देता है
c. जब मजिस्ट्रेट प्रथम दंड देता है
d. जब राष्ट्रपति क्षमा देता है
1130. धारा 455 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a. पुलिस को गिरफ्तारी का आदेश देना
b. उच्च न्यायालय को अपील सुनने का अधिकार देना
c. मृत्यु दंडादेश के निष्पादन को अपील लंबित रहने तक स्थगित करना
d. मजिस्ट्रेट को जमानत का आदेश देने का अधिकार देना
1131. यदि किसी व्यक्ति को उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंड दिया गया है, और वह संविधान के अनुच्छेद 134(1)(a) या (b) के तहत अपील करता है, तो निष्पादन कब तक रोका जाएगा?
a. जब तक राष्ट्रपति अनुमति न दे
b. जब तक सरकार पुष्टि न करे
c. जब तक अपील की अनुमति की अवधि समाप्त नहीं हो जाती या अपील का निपटारा नहीं हो जाता
d. जब तक आरोपी आत्मसमर्पण न कर दे
1132. यदि मृत्यु दंडादेश के विरुद्ध अनुच्छेद 132 या 134(1)(c) के तहत प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया गया है, तब उच्च न्यायालय क्या करेगा?
a. तुरंत दंडादेश निष्पादित करेगा
b. अपील स्वीकार करेगा
c. दंडादेश का निष्पादन तब तक रोकेगा जब तक आवेदन का निपटारा न हो जाए या प्रमाणपत्र मिलने के बाद अपील अवधि समाप्त न हो जाए
d. मामला सत्र न्यायालय को सौंप देगा
1133. यदि दंडादिष्ट व्यक्ति अनुच्छेद 136 के तहत विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल करना चाहता है, तो उच्च न्यायालय क्या कर सकता है?
a. उसे जेल भेज सकता है
b. दंडादेश तुरंत लागू करेगा
c. मृत्यु दंड का निष्पादन एक निर्धारित अवधि तक के लिए मुल्तवी कर सकता है
d. राष्ट्रपति को सूचित करेगा
1134. धारा 456 किस विषय से संबंधित है?
a. आरोपियों की जमानत से
b. गर्भवती महिला को मृत्यु दंड का लघुकरण करने से
c. अपील की प्रक्रिया से
d. साक्ष्य संग्रह से
1135. जब किसी गर्भवती महिला को मृत्यु दंडादेश दिया जाता है, तो उच्च न्यायालय क्या कर सकता है?
a. उसे जमानत दे सकता है
b. दंडादेश को आजीवन कारावास में लघुकरण कर सकता है
c. दंडादेश को बरकरार रख सकता है
d. उसे अग्रिम जमानत दे सकता है
1136. धारा 460 के अनुसार, जब बंदी को जेल में परिरुद्ध किया जाना है, तो वारण्ट किसे सौंपा जाएगा?
a. पुलिस अधीक्षक को
b. मजिस्ट्रेट को
c. जेलर को
d. अभियुक्त के वकील को
1137. धारा 460 किस प्रक्रिया से संबंधित है?
a. जमानत देने की प्रक्रिया से
b. अपील की प्रक्रिया से
c. कारावास के निष्पादन के लिए वारण्ट सौंपने से
d. साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया से
1138. धारा 464 किस स्थिति में लागू होती है?
a. जब केवल आजीवन कारावास दिया गया हो
b. जब केवल जुर्माना और उसके व्यतिक्रम पर कारावास का दंडादेश दिया गया हो
c. जब कोई अपराधी फरार हो
d. जब जुर्माना पहले ही अदा कर दिया गया हो
1139. धारा 464 के अनुसार, न्यायालय जुर्माने की अदायगी के लिए अधिकतम कितने दिनों की मोहलत दे सकता है?
a. 15 दिन
b. 45 दिन
c. 30 दिन
d. 60 दिन
1140. धारा 464 के अंतर्गत यदि न्यायालय किस्तों में जुर्माना अदा करने की अनुमति देता है, तो पहली किस्त कब तक देनी होगी?
a. आदेश के दिन ही
b. आदेश की तारीख से 30 दिन के भीतर
c. 60 दिन के भीतर
d. किसी भी समय
1141. यदि जुर्माना या उसकी कोई किस्त तय तिथि तक अदा नहीं की जाती, तो न्यायालय क्या कर सकता है?
a. जुर्माना माफ कर सकता है
b. आरोपी को चेतावनी दे सकता है
c. कारावास का दंडादेश तुरंत निष्पादित करने का आदेश दे सकता है
d. जुर्माने की नई राशि तय कर सकता है
1142. धारा 464 की उपधारा (2) किस प्रकार के मामलों पर भी लागू होती है?
a. केवल फौजदारी मामलों पर
b. केवल दीवानी मामलों पर
c. ऐसे मामलों में जहाँ कोई राशि देय हो और उसके न मिलने पर कारावास हो सकता हो
d. गिरफ्तारी से संबंधित मामलों पर
1143. यदि अपराधी बंधपत्र या जमानतपत्र देने में असफल रहता है, तो न्यायालय क्या कर सकता है?
a. उसे छोड़ सकता है
b. जुर्माना आधा कर सकता है
c. तुरंत कारावास का दंडादेश पारित कर सकता है
d. उसे घर भेज सकता है
1144. धारा 468 के अनुसार, दोषसिद्धि से पहले अभियुक्त द्वारा भोगी गई निरोध की अवधि को क्या किया जाएगा?
a. जुर्माने में जोड़ा जाएगा
b. अनदेखा किया जाएगा
c. कारावास की सजा में समायोजित (मुजरा) किया जाएगा
d. नए मुकदमे के लिए माना जाएगा
1145. धारा 468 किस प्रकार के कारावास पर लागू होती है?
a. जुर्माने के लिए कारावास
b. केवल आजीवन कारावास
c. किसी अवधि का कारावास, जो जुर्माने के संदाय में व्यतिक्रम के लिए नहीं है
d. केवल महिलाओं के मामलों में
1146. यदि अभियुक्त को दोषसिद्धि से पहले 3 महीने निरोध में रखा गया था और उसे 1 वर्ष का कारावास मिला, तो उसे और कितनी अवधि की सजा भुगतनी होगी?
a. 1 वर्ष
b. 9 महीने
c. 3 महीने
d. कोई सजा नहीं
1147. धारा 475 में निर्दिष्ट मामलों में, निरोध की अवधि किस अवधि के विरुद्ध मुजरा की जाएगी?
a. 10 वर्ष
b. 7 वर्ष
c. 14 वर्ष
d. 1 वर्ष
1148. जब दंडादेश पूर्णतया निष्पादित किया जा चुका हो, तो निष्पादन अधिकारी वारण्ट को किसके पास लौटाएगा?
a. पुलिस थाना
b. वह न्यायालय जिसने वारण्ट जारी किया था
c. अपीलकर्ता के पास
d. जिला प्रशासन
1149. वारण्ट लौटाते समय अधिकारी को क्या करना आवश्यक है?
a. वारण्ट पर दंडादेश की प्रति संलग्न करना
b. स्व-हस्ताक्षर सहित पृष्ठांकन द्वारा निष्पादन की प्रक्रिया प्रमाणित करना
c. दंडादेश के विरुद्ध आपत्ति दर्ज करना
d. वारण्ट को नष्ट करना
1150. मृत्यु दंडादेश मामलों में दया याचिका से सम्बंधित कौन सी नई धारा जोड़ी गयी है ?
a. धारा 472
b. धारा 475
c. धारा 478
d. धारा 473
1151. धारा 472(1) के अनुसार मृत्यु दंडादेश से सिद्धदोष व्यक्ति दया याचिका कहाँ दाखिल कर सकता है?
a. केवल उच्च न्यायालय में
b. राष्ट्रपति (Art. 72) या राज्यपाल (Art. 161) के समक्ष
c. प्रधानमंत्री के पास
d. गृह मंत्री के पास
1152. राष्ट्रपति या राज्यपाल के समक्ष दया याचिका कितने दिनों के भीतर दायर की जा सकती है?
a. जेल अधीक्षक द्वारा सूचना दिए जाने की तारीख से 60 दिन के भीतर
b. जेल अधीक्षक द्वारा सूचना दिए जाने की तारीख से 90 दिन के भीतर
c. जेल अधीक्षक द्वारा सूचना दिए जाने की तारीख से 30 दिन के भीतर
d. जेल अधीक्षक द्वारा सूचना दिए जाने की तारीख से 15 दिन के भीतर
1153. धारा 472(2) के अनुसार दया याचिका पहले किसके पास दाखिल की जानी चाहिए?
a. राष्ट्रपति
b. राज्यपाल
c. सुप्रीम कोर्ट
d. जिला न्यायाधीश
1154. राज्यपाल द्वारा याचिका निरस्त करने या निपटाने के बाद राष्ट्रपति के पास याचिका कितने दिनों में की जा सकती है?
a. 30 दिन
b. 60 दिन
c. 90 दिन
d. 15 दिन
1155. यदि एक से अधिक सिद्धदोष व्यक्ति हों, तो जेल अधीक्षक को क्या सुनिश्चित करना होगा?
a. केवल एक व्यक्ति याचिका दे
b. सभी सिद्धदोष 60 दिनों में दया याचिका दाखिल करें
c. केवल सबसे बड़े उम्र वाले व्यक्ति को याचिका देनी चाहिए
d. दया याचिका केवल वकील द्वारा भेजी जाए
1156. धारा 472(4) के अनुसार, केंद्रीय सरकार दया याचिका मिलने पर क्या करेगी?
a. सीधे राष्ट्रपति को भेज देगी
b. राज्य सरकार से टिप्पणियाँ माँगेगी और मामले पर विचार करेगी
c. केस समाप्त कर देगी
d. जेल अधीक्षक को वापस भेज देगी
1157. धारा 472(5) के अनुसार, यदि एक से अधिक सिद्धदोष हों तो राष्ट्रपति क्या करेगा?
a. सभी की याचिकाएं अलग-अलग निर्णय करेगा
b. एक को माफ करेगा और बाकी को नहीं
c. सभी दया याचिकाओं का एक साथ निपटान करेगा
d. केवल मुख्य अभियुक्त की याचिका सुनेगा
1158. राष्ट्रपति के आदेश की सूचना मिलने पर केंद्र सरकार कितने समय में राज्य गृह विभाग और जेल अधीक्षक को सूचित करेगी?
a. 24 घंटे में
b. 48 घंटे में
c. 7 दिन में
d. 10 दिन में
1159. धारा 472(7) के तहत राष्ट्रपति/राज्यपाल के “विनिश्चय (decision-making process)” पर न्यायालय क्या कर सकता है?
a. जांच कर सकता है
b. अपील सुन सकता है
c. पुनर्विलोकन कर सकता है
d. कोई न्यायिक जांच नहीं कर सकता
1160. धारा 473 किस विषय से संबंधित है?
a. दंडादेशों का निलम्बन या परिहार करने की शक्ति
b. दंडादेश लघुकरण करने की शक्ति
c. कुछ मामलों में छूट या लघुकरण की शक्तियों पर निर्बन्धन
d. मृत्यु दंडादेशों की दशा में केन्द्रीय सरकार की समवर्ती शक्ति
1161. धारा 473(1) के अनुसार दंडादेश के निलंबन या परिहार की शक्ति किसके पास है?
a. जिला मजिस्ट्रेट
b. समुचित सरकार
c. हाई कोर्ट
d. जेल अधीक्षक
1162. धारा 473(1) के तहत परिहार (remission) किस दंड पर लागू हो सकता है?
a. संपूर्ण दंड पर
b. दंड के किसी भाग पर
c. a और b दोनों
d. केवल जुर्माने पर
1163. धारा 473(2) के अनुसार, समुचित सरकार किससे राय मांग सकती है?
a. गृह मंत्रालय
b. राष्ट्रपति
c. उस न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश से जिसने दोषसिद्धि की या पुष्टि की
d. पुलिस अधीक्षक
1164. यदि दंडादेश शर्तों पर निलंबित किया गया हो और शर्त पूरी न हो, तो समुचित सरकार क्या कर सकती है?
a. शर्त बदल सकती है
b. निलम्बन/परिहार रद्द कर सकती है
c. दंड कम कर सकती है
d. उच्च न्यायालय से राय ले सकती है
1165. धारा 473(4) के अनुसार निलम्बन या परिहार की शर्तें कैसी हो सकती हैं?
a. केवल वे शर्तें जिन्हें व्यक्ति पूरा कर सके
b. केवल वे शर्तें जो व्यक्ति की इच्छा पर निर्भर हों
c. शर्तें जो उसकी इच्छा पर निर्भर हों या न हों
d. केवल प्रशासनिक शर्तें
1166. धारा 473(5) के अनुसार 18 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्ति के मामले में याचिका कब स्वीकार होगी?
a. जब व्यक्ति जेल में हो
b. जब याचिका वकील द्वारा दी जाए
c. जब व्यक्ति जमानत पर हो
d. जब निलम्बन की सलाह पुलिस दे
1167. समुचित सरकार किसे बिना व्यक्ति की सहमति के दंडादेश लघुकरण कर सकती है?
a. केवल मौत के दंड के लिए
b. केवल जुर्माने के लिए
c. दंडादेश प्राप्त व्यक्ति की सहमति के बिना भी कर सकती है
d. केवल सात वर्ष से कम कारावास के लिए
1168. मृत्यु दंडादेश को समुचित सरकार किस दंड में लघुकरण कर सकती है?
a. सात वर्ष के कारावास में
b. आजीवन कारावास में
c. तीन वर्ष के कारावास में
d. जुर्माने में
1169. आजीवन कारावास के दंडादेश को समुचित सरकार किस अवधि के लिए कम कर सकती है?
a. तीन वर्ष से कम की अवधि के लिए
b. सात वर्ष से अधिक की अवधि के लिए
c. सात वर्ष से अन्यून की अवधि के कारावास के लिए
d. जुर्माने के लिए
1170. सात वर्ष या उससे अधिक की कारावास की अवधि के दंडादेश को कम से कम कितने वर्ष के कारावास के लिए लघुकरण किया जा सकता है?
a. एक वर्ष से कम
b. दो वर्ष से कम
c. तीन वर्ष से कम नहीं
d. पांच वर्ष से कम
1171. सात वर्ष से कम की कारावास की अवधि वाले दंडादेश को समुचित सरकार किस दंड में लघुकरण कर सकती है?
a. आजीवन कारावास में
b. मृत्यु दंड में
c. जुर्माने में
d. तीन वर्ष के कारावास में
1172. कठोर कारावास के दंडादेश को समुचित सरकार किस प्रकार के कारावास में लघुकरण कर सकती है?
a. आजीवन कारावास में
b. साधारण कारावास में, जिसकी अवधि उस दंडादेश की अवधि के भीतर हो
c. जुर्माने में
d. तीन वर्ष के कारावास में
1173. धारा 473 में दी गई शक्तियों के बावजूद, कौन से दंडादेश के मामले में व्यक्ति को कारावास से तब तक नहीं छोड़ा जाएगा जब तक उसने चौदह वर्ष का कारावास पूरा न कर लिया हो?
a. सात वर्ष के कारावास के दंडादेश में
b. आजीवन कारावास के दंडादेश में
c. जुर्माने के दंडादेश में
d. तीन वर्ष के कारावास के दंडादेश में
1174. धारा 475 के अनुसार आजीवन कारावास कब दिया जाता है?
a. जब मृत्यु दंड विधि द्वारा उपबंधित दंडों में से एक है
b. जब जुर्माने का आदेश दिया जाता है
c. जब तीन वर्ष से कम की कैद होती है
d. जब दंडादेश लघुकरण किया जाता है
1175. धारा 474 के तहत मृत्यु दंडादेश को आजीवन कारावास में लघुकरण किया गया व्यक्ति को कब छोड़ा जा सकता है?
a. तुरंत
b. दस वर्ष बाद
c. चौदह वर्ष का कारावास पूरा करने के बाद
d. किसी भी समय
1176. मृत्यु दंडादेश के मामलों में धारा 473 और 474 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कौन कर सकता है?
a. केवल राज्य सरकार
b. केवल केन्द्रीय सरकार
c. राज्य सरकार और केन्द्रीय सरकार दोनों
d. केवल उच्च न्यायालय
1177. धारा 476 के अनुसार केन्द्रीय सरकार को कौन सी शक्ति प्राप्त होती है?
a. केवल जुर्माने कम करने की
b. मृत्यु दंडादेश के मामलों में धारा 473 और 474 की शक्तियों का प्रयोग करने की
c. केवल निलम्बन करने की
d. केवल याचिका सुनने की
1178. जमानत और बंधपत्रों के बारे में उपबंध किस अध्याय से सम्बंधित है?
a. अध्याय 35
b. अध्याय 36
c. अध्याय 37
d. अध्याय 38
1179. जमानत और बंधपत्रों के बारे में उपबंध किन धाराओं के समूह से सम्बंधित है?
a. धारा 478 से 496
b. धारा 476 से 496
c. धारा 478 से 498
d. धारा 473 से 495
1180. किसी जमानतीय अपराध में जमानत एक अधिकार के रूप में स्वीकृत की जाती है-
a. किसी पुलिस अधिकारी द्वारा
b. न्यायालय द्वारा
c. उपरोक्त (a) तथा (b) दोनों द्वारा
d. उपरोक्त (a)अथवा (b) में से एक के द्वारा
1181. 'जमानत' शब्द किसी अभियुक्त अथवा गिरफ्तार व्यक्ति की सशर्त रिहाई को इंगित करता है-
a. अन्वेषण के दौरान पुलिस द्वारा, किन्तु जाँच के दौरान मजिस्ट्रेट द्वारा नहीं
b. जाँच के दौरान मजिस्ट्रेट द्वारा, किन्तु विचारण के दौरान न्यायालय द्वारा नहीं
c. विचारण के दौरान न्यायालय द्वारा, किन्तु पुनर्विचार के - दौरान नहीं
d. पुलिस, मजिस्ट्रेट अथवा न्यायालय द्वारा अन्वेषण, जाँच अथवा विचारण के दौरान
1182. धारा 478 के प्रयोजनार्थं एक गिरफ्तार व्यक्ति को-
a. एक निर्धन व्यक्ति माना गया है यदि वह अपनी गिरफ्तारी के तुरंत बाद जमानत देने में असमर्थ हो
b. एक निर्धन व्यक्ति माना गया है यदि वह अपनी गिरफ्तारी के एक सप्ताह में जमानत देने में असमर्थ हो
c. न्यायालय ऐसी कोई धारणा नहीं बनाएगा
d. ऐसी धारणा बनाने का कोई प्रश्न ही नहीं है क्योंकि अपराध जमानतीय है तथा व्यक्ति को जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा भले ही वह प्रतिभूति प्रस्तुत करने में असमर्थ हो
1183. जब अजमानतीय अपराध के अभियुक्त से भिन्न कोई व्यक्ति पुलिस थाने के अधिकारी द्वारा वारण्ट के बिना गिरफ्तार किया जाता है और वह जमानत देने के लिए तैयार होता है, तो उसे क्या किया जाएगा?
a. उसे तुरंत जेल में भेजा जाएगा
b. उसे जमानत पर छोड़ दिया जाएगा
c. उसे बिना किसी शर्त के रिहा किया जाएगा
d. उसे फटकार लगाई जाएगी
1184. यदि कोई व्यक्ति जमानत देने में असमर्थ है तो पुलिस अधिकारी या न्यायालय क्या कर सकता है?
a. उसे जेल भेज सकता है
b. उसे बिना किसी कार्रवाई के छोड़ सकता है
c. उसे प्रतिभुओं रहित बंधपत्र निष्पादित करने पर उन्मोचित कर सकता है
d. उसे जुर्माने के भुगतान के लिए कह सकता है
1185. यदि कोई व्यक्ति न्यायालय द्वारा निर्धारित बंधपत्र या जमानतपत्र की शर्तों का पालन नहीं करता है, तो न्यायालय क्या कर सकता है?
a. उसे तुरंत रिहा कर सकता है
b. उसे जमानत पर छोड़ने से इंकार कर सकता है
c. उसे फटकार सकता है, लेकिन जमानत पर छोड़ना होगा
d. उसे जेल में डाल सकता है लेकिन जमानत पर छोड़ सकता है
1186. यदि कोई व्यक्ति किसी अपराध के लिए निरोध में है, जो मृत्यु दंड या आजीवन कारावास के अंतर्गत नहीं आता, तो उसे अधिकतम कितनी अवधि तक निरुद्ध रखा जा सकता है?
a. उस विधि के तहत निर्दिष्ट अधिकतम कारावास की पूरी अवधि तक
b. उस विधि के तहत निर्दिष्ट अधिकतम कारावास की आधी अवधि तक
c. हमेशा 6 महीने तक
d. अधिकतम 1 वर्ष तक
1187. यदि निरुद्ध व्यक्ति प्रथमबार का अपराधी हो और पहले दोषसिद्ध न हो, तो उसे न्यायालय कब बंधपत्र पर छोड़ सकता है?
a. जब उसने निर्दिष्ट अधिकतम कारावास की पूरी अवधि तक निरोध भोगा हो
b. जब उसने निर्दिष्ट अधिकतम कारावास की एक-तिहाई विस्तार की अवधि तक निरोध भोगा हो
c. जब पुलिस अनुमति दे
d. जब अभियुक्त की मर्जी हो
1188. न्यायालय कब निरोध की आधी अवधि से अधिक के लिए निरोध जारी रख सकता है?
a. लोक अभियोजक की सुनवाई और लिखित कारणों के बाद
b. अभियुक्त की मांग पर
c. पुलिस अधिकारी की सलाह से
d. बिना किसी सुनवाई के
1189. इस धारा के अनुसार, अभियुक्त के द्वारा कार्यवाही में किए गए विलंब की अवधि को जमानत मंजूर करने के लिए निरोध की अवधि में कैसे माना जाएगा?
a. उसे पूरी निरोध अवधि में शामिल किया जाएगा
b. उसे अपवर्जित (छोड़ दिया) जाएगा
c. उसे दोगुना माना जाएगा
d. उसे केवल आधा माना जाएगा
1190. यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध एक से अधिक अपराध या मामले लंबित हों, तो न्यायालय उसे जमानत कब नहीं देगा?
a. जब तक सभी मामलों का निपटारा न हो
b. जब तक वह अपना बयान न दे
c. जब तक सभी जांच पूरी न हो
d. उपधारा (1) और उसके तीसरे परन्तुक के अधीन रहते हुए
1191. जेल अधीक्षक किस स्थिति में न्यायालय को लिखित आवेदन करेगा?
a. जब अभियुक्त निरोध की आधी या एक-तिहाई अवधि पूरी कर लेता है
b. जब अभियुक्त दोषी ठहराया जाता है
c. जब अभियुक्त फरार हो जाता है
d. जब अभियुक्त निर्दोष साबित होता है
1192. अजमानतीय अपराध की दशा में कब जमानत ली जा सकेगी किससे सम्बंधित है?
a. धारा 472
b. धारा 476
c. धारा 478
d. धारा 480
1193. अजमानतीय अपराध के अभियुक्त व्यक्ति को कब जमानत पर छोड़ा जा सकता है?
a. जब उस पर मृत्यु दंड का दोष लगता है
b. जब उस पर आजीवन कारावास का दोष लगता है
c. जब उस पर ऐसी आशंका न हो कि वह मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध का दोषी हो
d. जब वह अपराधी साबित हो चुका हो
1194. कौन से व्यक्ति को जमानत पर छोड़ा जा सकता है, भले ही वह खंड (i) या (ii) में वर्णित अपराधों के दायरे में आता हो?
a. बालक, महिला, रोगी या शिथिलांग व्यक्ति
b. कोई भी आरोपी
c. केवल पुरुष
d. पुलिस अधिकारी
1195. न्यायालय जमानत क्यों इंकार कर सकता है, भले ही अभियुक्त जमानत पर छोड़े जाने के हकदार हो?
a. केवल पुलिस की इच्छा पर
b. जब अभियुक्त की आवश्यकता साक्षियों द्वारा पहचान के लिए हो या 15 दिनों से अधिक पुलिस अभिरक्षा के लिए हो
c. बिना कारण
d. अभियुक्त के अपराध साबित होने तक
1196. किस स्थिति में लोक अभियोजक को सुनवाई का अवसर दिए बिना जमानत नहीं दी जा सकती?
a. जब अपराध मृत्यु, आजीवन कारावास या 7 वर्ष से अधिक के कारावास का हो
b. जब अपराध कोई गैर-संज्ञेय अपराध हो
c. जब अभियुक्त बालक हो
d. जब अभियुक्त महिला हो
1197. यदि जमानत पर छोड़े गए अभियुक्त का विचारण 60 दिनों के भीतर पूरा नहीं होता और वह अभिरक्षा में है, तो न्यायालय क्या कर सकता है?
a. उसे उसी हालत में रख सकता है
b. मजिस्ट्रेट की समाधानप्रद जमानत पर छोड़ सकता है जब तक अन्यथा न कहा जाए
c. उसे मृत घोषित कर सकता है
d. उसे तुरन्त रिहा कर सकता है
1198. विचारण के समाप्त होने से पूर्व और अपील के निपटान से पूर्व, न्यायालय अभियुक्त से क्या अपेक्षा कर सकता है?
a. अभियुक्त को जेल में रखना
b. अभियुक्त से उच्चतर न्यायालय के समक्ष उपसंजात होने के लिए बंधपत्र या जमानतपत्र निष्पादित करने की अपेक्षा करना
c. अभियुक्त को बिना किसी शर्त के रिहा करना
d. अभियुक्त पर नया मुकदमा चलाना
1199. ऐसे बंधपत्र या जमानतपत्र कितने समय तक प्रभावी रहते हैं?
a. 3 माह
b. 6 माह
c. 1 साल
d. 9 माह
1200. यदि अभियुक्त उपसंजात होने में असफल रहता है तो क्या होगा?
a. उसे पुनः जमानत मिल जाएगी
b. बंधपत्र समपहृत (forfeited) हो जाएगा और धारा 491 के अधीन प्रक्रिया लागू होगी
c. उसे तुरंत जेल भेज दिया जाएगा बिना किसी प्रक्रिया के
d. उसे मृत घोषित कर दिया जाएगा
1201. गिरफ्तारी की आशंका करने वाले व्यक्ति की जमानत मंजूर करने के लिए निदेश किससे सम्बंधित है?
a. धारा 472
b. धारा 476
c. धारा 482
d. धारा 480
1202. यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसे अजमानतीय अपराध के अभियोग में गिरफ्तार किया जा सकता है, तो वह किससे जमानत के लिए आवेदन कर सकता है?
a. पुलिस अधीक्षक से
b. उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय से
c. जिला मजिस्ट्रेट से
d. लोक अभियोजक से
1203. उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय जमानत के निदेश में कौन-कौन सी शर्तें लगा सकता है?
a. व्यक्ति को पुलिस पूछताछ में उपस्थित रहना होगा
b. व्यक्ति को किसी को तथ्य छिपाने के लिए प्रेरित नहीं करना होगा
c. व्यक्ति भारत बिना न्यायालय की अनुमति छोड़ेगा नहीं
d. उपरोक्त सभी
1204. यदि व्यक्ति को वारण्ट के बिना गिरफ्तार किया जाता है और वह जमानत देने के लिए तैयार है, तो क्या होगा?
a. उसे जेल में रखा जाएगा
b. उसे जमानत पर छोड़ दिया जाएगा
c. उसे फटकारा जाएगा
d. उसे अदालत में पेश नहीं किया जाएगा
1205. जमानत के बारे में उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय की विशेष शक्तियां किस से सम्बंधित है?
a. धारा 472
b. धारा 483
c. धारा 482
d. धारा 480
1206. उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय किसे जमानत पर छोड़ने का निदेश दे सकता है?
a. किसी ऐसे व्यक्ति को, जिस पर अपराध का अभियोग है और जो अभिरक्षा में है
b. केवल उन व्यक्तियों को जिनके खिलाफ कोई केस नहीं है
c. केवल वे व्यक्ति जो अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं होते
d. केवल वे जो मौत की सजा पाए हुए हों
1207. उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय किस स्थिति में लोक अभियोजक को जमानत आवेदन की सूचना देगा?
a. जब आरोपी किसी भी प्रकार का अपराध करता है
b. जब आरोपी ऐसे अपराध का अभियुक्त हो जो अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है या आजीवन कारावास दंडनीय हो
c. केवल तभी जब आरोपी निर्दोष हो
d. जब आरोपी जमानत के लिए आवेदन न करे
1208. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 65 या धारा 70 की उपधारा (2) के अधीन विचारण योग्य अपराधों के मामले में, जमानत आवेदन की सूचना लोक अभियोजक को कितनी अवधि में दी जानी चाहिए?
a. 7 दिन
b. 10 दिन
c. 15 दिन
d. 30 दिन
1209. उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय जमानत पर छोड़े गए व्यक्ति को क्या कर सकता है?
a. उसे पुनः जमानत दे सकता है
b. उसे गिरफ्तार करने का निदेश दे सकता है और अभिरक्षा के लिए सुपुर्द कर सकता है
c. उसे दोषी ठहरा सकता है
d. उसे परिवीक्षा पर छोड़ सकता है
1210. इस अध्याय के अधीन निष्पादित प्रत्येक बंधपत्र की रकम कैसे निर्धारित की जाएगी?
a. हमेशा अधिकतम रकम रखी जाएगी
b. मामले की परिस्थितियों का सम्यक् ध्यान रख कर नियत की जाएगी और अत्यधिक नहीं होगी
c. आरोपी की आय के अनुसार निश्चित की जाएगी
d. पुलिस की मर्जी से
1211. कौन-सा न्यायालय पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट द्वारा अपेक्षित जमानत घटाने का निदेश दे सकता है?
a. जिला न्यायालय
b. उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय
c. सर्वोच्च न्यायालय
d. मजिस्ट्रेट न्यायालय
1212. अभियुक्त और प्रतिभुओं का बंधपत्र किस से सम्बंधित है?
a. धारा 472
b. धारा 485
c. धारा 482
d. धारा 480
1213. प्रतिभुओं द्वारा घोषणा किस से सम्बंधित है?
a. धारा 472
b. धारा 485
c. धारा 482
d. धारा 480
1214. अभिरक्षा से उन्मोचन किस से सम्बंधित है?
a. धारा 487
b. धारा 485
c. धारा 482
d. धारा 480
1215. प्रतिभुओं का उन्मोचन किस से सम्बंधित है?
a. धारा 487
b. धारा 485
c. धारा 488
d. धारा 489
1216. बंधपत्र समपहृत से सम्बंधित प्रक्रिया किस धारा में दी गयी है?
a. धारा 485
b. धारा 489
c. धारा 491
d. धारा 492
1217. यदि बंधपत्र समपड़त हो चुका है, तो न्यायालय क्या करेगा?
a. अभियुक्त को बरी कर देगा
b. बंधपत्र से आबद्ध व्यक्ति से शास्ति देने या कारण बताने को कहेगा
c. अभियुक्त को सजा सुनाएगा
d. बंधपत्र को रद्द कर देगा
1218. बंधपत्र के समपहरण के पूर्व यदि कोई प्रतिभू मर जाता है, तो क्या होगा?
a. उसकी संपत्ति से शास्ति वसूली जाएगी
b. उसके उत्तराधिकारियों को कारावास होगा
c. उसकी संपत्ति बंधपत्र के दायित्व से मुक्त हो जाएगी
d. नया प्रतिभू नियुक्त किया जाएगा
1219. यदि शास्ति वसूली योग्य न हो और न दी जाए, तो प्रतिभू के साथ क्या किया जा सकता है?
a. अधिकतम 3 माह के लिए जेल भेजा जा सकता है
b. केवल चेतावनी दी जा सकती है
c. प्रतिभू को हटाकर नया प्रतिभू नियुक्त किया जाएगा
d. उसे प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा 6 माह तक सिविल कारागार में भेजा जा सकता है
1220. यदि व्यक्ति को ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है जो बंधपत्र की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो क्या उपयोग किया जा सकता है?
a. प्राथमिकी की प्रतिलिपि
b. अभियुक्त का बयान
c. दोषसिद्धि का प्रमाणित निर्णय प्रमाण के रूप में
d. पुलिस रिपोर्ट
1221. बंधपत्र की किस शर्त में "तत्पश्चात् अंतरित न्यायालय" के समक्ष हाजिर होना सम्मिलित है?
a. सम्पत्ति जप्त करने की शर्त
b. केवल मूल न्यायालय के समक्ष हाजिर होने की शर्त
c. न्यायालय के समक्ष हाजिर होने या सम्पत्ति पेश करने की शर्त
d. गिरफ्तारी की शर्त
1222. बंधपत्र और जमानतपत्र का रद्दकरण किस से सम्बंधित है?
a. धारा 497
b. धारा 495
c. धारा 498
d. धारा 492
1223. धारा 492 के अंतर्गत, यदि बंधपत्र की किसी शर्त का उल्लंघन होता है, तो क्या प्रभाव होता है?
a. केवल अभियुक्त का बंधपत्र रद्द होगा
b. केवल प्रतिभू का बंधपत्र रद्द होगा
c. अभियुक्त एवं प्रतिभू, दोनों के बंधपत्र रद्द होंगे
d. बंधपत्र स्वतः वैध रहेगा
1224. यदि बंधपत्र की शर्त का उल्लंघन होता है और कोई पर्याप्त कारण नहीं होता, तो अभियुक्त को क्या अनुमति नहीं दी जाएगी?
a. पुनः गिरफ्तार किया जाएगा
b. उसे जमानत पर छोड़ा जाएगा
c. केवल अपने ही बंधपत्र पर छोड़ा नहीं जाएगा
d. उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी
1225. यदि किसी न्यायालय या अधिकारी द्वारा बंधपत्र निष्पादित करने के लिए अपेक्षित व्यक्ति बालक (minor) है, तो वह न्यायालय क्या कर सकता है?
a. बालक से ही बंधपत्र निष्पादित करवाएगा
b. बालक को जेल भेज देगा
c. बालक के स्थान पर केवल प्रतिभू या प्रतिभुओं द्वारा निष्पादित बंधपत्र स्वीकार करेगा
d. मामले को स्थगित कर देगा
1226. धारा 495 के अनुसार, यदि किसी मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 491 के अधीन कोई आदेश पारित किया गया है, तो उसकी अपील किस न्यायालय में की जा सकती है?
a. उच्च न्यायालय
b. सत्र न्यायालय (Sessions Court)
c. जिला न्यायालय
d. सर्वोच्च न्यायालय
1227. कतिपय मुचलकों पर देय रकम का उदग्रहण करने का निदेश देने की शक्ति किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 496
b. धारा 492
c. धारा 485
d. धारा 489
1228. धारा 496 के अनुसार, उच्च न्यायालय या सत्र न्यायालय किसे निर्देश दे सकता है कि वह बंधपत्र पर देय रकम को उग्रहित (recover) करे?
a. पुलिस अधीक्षक को
b. अभियोजन अधिकारी को
c. किसी मजिस्ट्रेट को
d. संबंधित वकील को
1229. सम्पत्ति का व्ययन किस अध्याय से सम्बंधित है?
a. अध्याय 34
b. अध्याय 35
c. अध्याय 36
d. अध्याय 37
1230. यदि प्रस्तुत की गई संपत्ति शीघ्रतया क्षयशील हो, तो न्यायालय क्या कर सकता है?
a. उसे वापस लौटा देता है
b. उसे जप्त कर लेता है
c. उसका विक्रय या अन्यथा व्ययन का आदेश दे सकता है
d. उसे स्थायी संग्रहालय में भेज देता है
1231. धारा 497 की व्याख्या के अनुसार "संपत्ति" में कौन-कौन सी वस्तुएँ सम्मिलित हैं?
a. केवल दस्तावेज
b. केवल अचल संपत्ति
c. न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किसी भी किस्म की संपत्ति या दस्तावेज, और अपराध से संबंधित या प्रयुक्त संपत्ति
d. केवल नकद संपत्ति
1232. न्यायालय या मजिस्ट्रेट को उपधारा (1) में निर्दिष्ट संपत्ति का विवरण कितने दिन के भीतर तैयार करना होता है?
a. 7 दिन
b. 10 दिन
c. 14 दिन
d. 30 दिन
1233. धारा 497 के अनुसार, यदि आवश्यक हो, तो संपत्ति का कौन-सा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है?
a. ऑडियो रिकॉर्डिंग
b. हस्तलिखित नोट्स
c. फोटो या वीडियो
d. एक्स-रे स्कैन
1234. उपधारा (4) और (5) के अनुसार, तैयार विवरण, फोटो और वीडियोग्राफी का उपयोग किस रूप में किया जाएगा?
a. केवल FIR के लिए
b. साक्ष्य के रूप मे
c. समाचार रिपोर्ट के लिए
d. किसी के निजी उपयोग के लिए
1235. फोटो या वीडियो लिए जाने के बाद न्यायालय को संपत्ति के निपटान का आदेश कितने दिनों के भीतर देना होता है?
a. 7 दिन
b. 14 दिन
c. 30 दिन
d. 60 दिन
1236. विनश्वर सम्पति को बेचने की शक्ति किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 509
b. धारा 505
c. धारा 506
d. धारा 502
1237. मजिस्ट्रेट को संपत्ति बेचने का अधिकार तब भी है जब उसका मूल्य कितने रुपए से कम हो?
a. ₹1,00,000
b. ₹50,000
c. ₹25,000
d. ₹10,000
1238. क्या मजिस्ट्रेट विक्रय का आदेश कभी भी दे सकता है यदि धारा 505 की शर्तें पूरी हों?
a. नहीं, केवल छह महीने बाद
b. नहीं, केवल उच्च न्यायालय की अनुमति से
c. हाँ, यदि संपत्ति विनश्वर हो और हकदार ज्ञात न हो
d. केवल तब जब संपत्ति विवादास्पद हो
1239. ऐसी अनियमितताएं, जो किसी विचारण को दूषित नहीं करतीं, का उल्लेख संहिता की किस धारा में किया गया है-
a. धारा 560
b. धारा 506
c. धारा 562
d. धारा 564
1240. धारा 506 के अनुसार, यदि मजिस्ट्रेट ने जो कार्य किया है वह विधि द्वारा सशक्त नहीं है, तब भी उसकी कार्यवाही क्यों अपास्त नहीं मानी जाएगी?
a. क्योंकि मजिस्ट्रेट की गलती सद्भावपूर्वक की गई हो
b. क्योंकि वह सर्वोच्च न्यायालय का आदेश हो
c. क्योंकि पुलिस ने मंजूरी दी हो
d. क्योंकि मामले में कोई आरोपी न हो
1241. धारा 506 के अंतर्गत, मजिस्ट्रेट किस प्रकार का वारंट जारी करने में सद्भावपूर्वक गलती कर सकता है लेकिन कार्यवाही अपास्त नहीं मानी जाएगी?
a. गिरफ्तारी वारंट
b. तलाशी वारंट (धारा 97 के अंतर्गत)
c. सम्मन
d. कोई भी वारंट
1242. निम्नलिखित में से कौन-सा आदेश मजिस्ट्रेट विधि द्वारा सशक्त न होकर भी दे सकता है, जिसकी वजह से कार्यवाही अपास्त नहीं होगी?
a. पुलिस को धारा 174 के अंतर्गत अन्वेषण का आदेश देना
b. अपराधी को दोषी ठहराना
c. पुलिस से पूछताछ करना
d. साक्ष्य को खारिज करना
1243. मजिस्ट्रेट किस धारा के अंतर्गत मृत्यु- समीक्षा करने का आदेश दे सकता है, यदि वह विधि द्वारा सशक्त न हो, तब भी कार्यवाही अपास्त नहीं मानी जाएगी?
a. धारा 196
b. धारा 207
c. धारा 212
d. धारा 343
1244. धारा 506 के अनुसार, मजिस्ट्रेट किस प्रकार की क्षमादान दे सकता है जिससे कार्यवाही प्रभावित नहीं होती?
a. धारा 450 के अंतर्गत
b. धारा 343 के अंतर्गत
c. धारा 504 के अंतर्गत
d. धारा 505 के अंतर्गत
1245. मजिस्ट्रेट किस मामले को वापस मंगाकर स्वयं विचारण कर सकता है, बिना कार्यवाही को दूषित किए?
a. धारा 99 के अंतर्गत
b. धारा 450 के अंतर्गत
c. धारा 207 के अंतर्गत
d. धारा 212 के अंतर्गत
1246. धारा 506 के अनुसार, किस मामले में संपत्ति का विक्रय किया जा सकता है जिससे कार्यवाही दूषित नहीं मानी जाएगी?
a. केवल धारा 503 के अंतर्गत
b. धारा 504 या धारा 505 के अंतर्गत
c. धारा 506 के अंतर्गत
d. धारा 499 के अंतर्गत
1247. विचारण दूषित करने वाली अनियमितताओं का उल्लेख किस धारा में किया गया है-
a. धारा 507
b. धारा 506
c. धारा 566
d. धारा 568
1248. यदि मजिस्ट्रेट संपत्ति को धारा 85 के अंतर्गत कुर्क करता है और उसका विक्रय करता है, जबकि उसके पास विधि द्वारा इस कार्य के लिए सशक्ति नहीं है, तो उसकी कार्यवाही क्या होगी?
a. वैध होगी
b. अपास्त (शून्य) होगी
c. सशर्त वैध होगी
d. केवल न्यायालय के आदेश से मान्य होगी
1249. मजिस्ट्रेट किस स्थिति में तलाशी वारंट जारी करता है और उसकी कार्यवाही दूषित मानी जाएगी?
a. पुलिस की अनुमति के बिना
b. डाक प्राधिकारी की अभिरक्षा में रखी चीज के लिए, जबकि वह इस कार्य के लिए सशक्त न हो
c. आरोपी की सहमति के बिना
d. यदि वारंट 24 घंटे से अधिक पुराना हो
1250. धारा 507 के अनुसार, मजिस्ट्रेट द्वारा किस कार्यवाही को दूषित माना जाएगा?
a. भरण-पोषण के लिए आदेश देना
b. पुलिस को आदेश देना
c. साक्ष्य इकट्ठा करना
d. तलाशी वारंट जारी करना
1251. मजिस्ट्रेट किस प्रकार की प्रतिभूति मांगने पर कार्यवाही दूषित होगी?
a. न्यायालय के लिए
b. परिशान्ति और सदाचार के लिए
c. पुलिस के लिए
d. अभियुक्त के लिए
1252. धारा 507 के अनुसार, यदि मजिस्ट्रेट किसी अन्य मजिस्ट्रेट द्वारा अभिलिखित कार्यवाही पर धारा 364 के अंतर्गत दंडादेश पारित करता है, तो क्या होगा?
a. कार्यवाही वैध होगी
b. कार्यवाही शून्य (अपास्त) होगी
c. कार्यवाही स्थगित होगी
d. कार्यवाही को अपील के लिए भेजा जाएगा
1253. धारा 507 में निम्नलिखित में से कौन-सा कार्य मजिस्ट्रेट विधि द्वारा सशक्त न होकर करे तो कार्यवाही दूषित होगी?
a. अपील का विनिश्चय करना
b. साक्ष्य को स्वीकार करना
c. दोषसिद्धि के लिए सुनवाई करना
d. अपराध का अन्वेषण करना
1254. मजिस्ट्रेट किस धारा के अंतर्गत पारित आदेश का पुनरीक्षण कर सकता है, जिसके बिना सशक्ति के कार्यवाही दूषित मानी जाएगी?
a. धारा 438
b. धारा 491
c. धारा 210
d. धारा 152
1255. मजिस्ट्रेट का कार्यवाही दूषित मानी जाएगी यदि वह किस कार्य को करता है?
a. संक्षेप में अपराधी का विचारण करना
b. अपराधी को गिरफ्तार करना
c. गवाहों को बुलाना
d. मामले को सुनवाई के लिए भेजना
1256. गलत स्थान में कार्यवाही किस धारा से सम्बंधित है?
a. धारा 438
b. धारा 491
c. धारा 508
d. धारा 152
1257. धारा 508 के अनुसार, किसी दंड न्यायालय का निष्कर्ष, दंडादेश या आदेश कब अपास्त (शून्य) किया जाएगा?
a. जब कार्यवाही पूरी तरह वैध हो
b. जब जांच या विचारण गलत स्थान (सेशन खंड, जिला, उपखंड आदि) में हुआ हो और यह दिखे कि इस गलती के कारण न्याय नहीं हुआ
c. केवल जब उच्च न्यायालय का आदेश हो
d. हमेशा जब कार्यवाही गलत स्थान पर हो
1258. धारा 508 के अंतर्गत "गलत स्थान" से क्या तात्पर्य है?
a. देश के बाहर
b. कोई भी असंबंधित स्थान
c. गलत सेशन खंड, जिला, उपखंड या अन्य स्थानीय क्षेत्र
d. न्यायालय की बंदी
1259. यदि न्यायालय को लगता है कि धारा 183 या धारा 316 के उपबंधों का पालन नहीं किया गया है, तो वह क्या कर सकता है?
a. तुरंत कथन को खारिज कर सकता है
b. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 94 के तहत भी साक्ष्य ले सकता है
c. अभियुक्त को दोषी ठहरा सकता है
d. मामले को बंद कर सकता है
1260. न्यायालय कब ऐसे कथन को ग्रहण कर सकता है जिसमें धारा 183 या 316 का अनुपालन नहीं हुआ हो?
a. जब अभियुक्त की प्रतिरक्षा को कोई हानि न हुई हो और कथन सम्यक रूप से किया गया हो
b. जब अभियुक्त ने कथन दिया हो
c. जब अभियुक्त सहमत हो
d. जब पुलिस ने कथन दर्ज किया हो
1261. धारा 509 के उपबंध किन न्यायालयों पर लागू होते हैं?
a. केवल प्रथम दृष्टया न्यायालय
b. केवल उच्च न्यायालय
c. अपील, निर्देश और पुनरीक्षण न्यायालयों
d. केवल सुप्रीम कोर्ट
1262. किस स्थिति में सक्षम न्यायालय का कोई निष्कर्ष, दंडादेश या आदेश अविधिमान्य (अमान्य) माना जाएगा?
a. जब अभियुक्त दोषी साबित हो
b. जब आरोप विरचित न किया गया हो या आरोप में गलती, लोप या अनियमितता हो, और अपील या पुनरीक्षण न्यायालय को लगे कि इस कारण न्याय नहीं हुआ
c. जब अभियोजन पक्ष गवाह पेश न करे
d. जब पुलिस जांच अधूरी हो
1263. यदि अपील या पुनरीक्षण न्यायालय को लगे कि न्याय नहीं हुआ है क्योंकि आरोप विरचित नहीं किया गया, तो वह क्या कर सकता है?
a. दंडादेश को स्थगित कर सकता है
b. आरोप विरचित करने का आदेश दे सकता है और विचारण पुनः प्रारंभ कर सकता है
c. अभियुक्त को तुरंत बरी कर सकता है
d. पुलिस को पुनः जांच करने का आदेश दे सकता है
1264. आरोप में गलती, लोप या अनियमितता पाये जाने पर पुनरीक्षण न्यायालय क्या निदेश दे सकता है?
a. दोषसिद्धि कर सकता है
b. पुनः नए विरचित आरोप पर विचारण कराने का आदेश दे सकता है
c. केस बंद कर सकता है
d. अभियुक्त को जमानत पर छोड़ सकता है
1265. न्यायालय कब तक किसी निष्कर्ष, दंडादेश या आदेश को गलती, लोप या अनियमितता के कारण उलट या परिवर्तित नहीं करेगा?
a. जब तक अभियुक्त सहमत न हो
b. जब तक अपील या पुनरीक्षण न्यायालय को यह न लगे कि उससे वस्तुतः न्याय प्रभावित हुआ है
c. हमेशा
d. जब तक पुलिस की रिपोर्ट सही न हो
1266. धारा 511 के अनुसार, न्यायालय किसी गलती या अनियमितता को उलटने से पहले क्या विचार करेगा?
a. क्या उक्त आपत्ति पूर्व में उठाई जा सकती थी और उठाई जानी चाहिए थी
b. अभियुक्त की माफी
c. अभियोजन पक्ष की सहमति
d. गवाहों की संख्या
1267. धारा 511 के अंतर्गत निम्न में से कौन सी कार्यवाही में हुई गलती, लोप या अनियमितता का न्यायालय द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा?
a. परिवाद, समन, वारण्ट, उद्घोषणा, आदेश, निर्णय या अन्य कार्यवाही
b. केवल अंतिम निर्णय
c. केवल पुलिस जांच
d. केवल अभियोजन पक्ष की रिपोर्ट
1268. कुछ अपराधों का संज्ञान करने के लिए परिसीमा किस अध्याय से सम्बंधित है?
a. अध्याय 37
b. अध्याय 38
c. अध्याय 36
d. अध्याय 35
1269. धारा 514 के अनुसार, कोई न्यायालय अपराध का संज्ञान कब नहीं ले सकता?
a. जब अभियुक्त गिरफ्तार न हुआ हो
b. जब चार्जशीट दाखिल न हुई हो
c. जब अपराध परिसीमा-काल की समाप्ति के बाद हो
d. जब अभियोजन पक्ष गवाह न ला पाए
1270. यदि कोई अपराध केवल जुर्माने से दंडनीय है, तो उसका परिसीमा-काल कितना होगा?
a. 3 वर्ष
b. 1 वर्ष
c. 6 माह
d. 2 वर्ष
1271. यदि कोई अपराध 1 वर्ष से अनधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय है, तो परिसीमा-काल क्या होगा?
a. 3 वर्ष
b. 1 वर्ष
c. 6 माह
d. 2 वर्ष
1272. यदि कोई अपराध 1 वर्ष से अधिक किंतु 3 वर्ष से कम कारावास से दंडनीय है, तो उसका परिसीमा-काल क्या होगा?
a. 6 माह
b. 2 वर्ष
c. 3 वर्ष
d. 1 वर्ष
1273. धारा 514 के अनुसार, जिन अपराधों का एक साथ विचारण किया जा सकता है, वहाँ परिसीमा-काल किस आधार पर तय होगा?
a. औसत दंड अवधि के आधार पर
b. सबसे हल्के अपराध के आधार पर
c. कठोरतर या कठोरतम दंड से दंडनीय अपराध के आधार पर
d. मजिस्ट्रेट की इच्छा पर
1274. धारा 515 के अनुसार, सामान्यतः परिसीमा काल किस दिन से प्रारंभ होता है?
a. जब अपराध का आरोप लगाया जाए
b. जब अभियुक्त गिरफ्तार हो
c. अपराध की तारीख से
d. जब न्यायालय संज्ञान ले
1275. यदि अपराध के किए जाने की जानकारी पीड़ित या पुलिस को नहीं है, तो परिसीमा काल कब प्रारंभ होगा?
a. जब अपराध न्यायालय में पहुंचे
b. जिस दिन पहली बार पीड़ित या पुलिस को अपराध की जानकारी होती है (जो पहले हो)
c. जब गवाह मिल जाए
d. जब एफआईआर दर्ज हो
1276. यदि यह ज्ञात नहीं हो कि अपराध किसने किया है, तो परिसीमा काल कब प्रारंभ होगा?
a. जब मामला न्यायालय में प्रस्तुत हो
b. जब पीड़ित न्यायालय जाए
c. जिस दिन पहली बार अपराधी का पता चलता है (पीड़ित या पुलिस को – जो पहले हो)
d. जब आरोप पत्र दाखिल हो
1277. परिसीमा की अवधि की गणना करते समय कौन-सा दिन शामिल नहीं किया जाएगा?
a. अपराध का दिन
b. संज्ञान लेने का दिन
c. अभियोजन की तिथि
d. वह दिन जिस दिन अवधि की गणना प्रारंभ होनी है
1278. यदि किसी अपराध की जानकारी एक ही दिन पीड़ित और पुलिस दोनों को हो, तो परिसीमा काल किस आधार पर शुरू होगा?
a. जब एफआईआर दर्ज हो
b. जब गिरफ्तारी हो
c. दोनों में से पहले को जानकारी मिलने की तिथि
d. जब अभियुक्त पकड़ा जाए
1279. धारा 516 के अनुसार, परिसीमा काल की गणना में उस समय को अपवर्जित किया जाएगा जब:
a. अभियुक्त जमानत पर हो
b. अभियोजन विचाराधीन हो और सम्यक तत्परता से चलाया जा रहा हो
c. पुलिस अपराध को अनदेखा कर दे
d. न्यायालय ने आदेश न दिया हो
1280. सम्यक् तत्परता से चलाए गए अभियोजन के अपवर्जन का लाभ कब नहीं मिलेगा?
a. जब अभियोजन जुर्माने से दंडनीय हो
b. जब अभियोजन गलत न्यायालय में सद्भावपूर्वक न किया गया हो
c. जब अभियोजन उच्च न्यायालय में हो
d. जब अभियुक्त अनुपस्थित हो
1281. यदि अभियोजन के लिए सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक हो, तो अनुमति प्राप्त करने के समय को:
a. परिसीमा में जोड़ा जाएगा
b. नजरअंदाज किया जाएगा
c. अपवर्जित किया जाएगा
d. डबल गिना जाएगा
1282. परिसीमा काल की गणना में किन दो तिथियों को अनुमति प्राप्ति के समय में अपवर्जित किया जाएगा?
a. अपराध की तिथि और अनुमति मिलने की तिथि
b. आवेदन की तिथि और आदेश मिलने की तिथि
c. FIR की तिथि और आरोप पत्र की तिथि
d. गिरफ्तारी की तिथि और समन की तिथि
1283. धारा 516 के अनुसार, कौन-सी स्थिति परिसीमा काल से अपवर्जित की जाएगी?
a. जब अपराधी भारत में हो
b. जब अपराधी न्यायालय में उपस्थित हो
c. जब अपराधी भारत से अनुपस्थित हो या फरार हो
d. जब अभियुक्त दोषमुक्त हो
1284. धारा 517 के अनुसार, यदि परिसीमा काल समाप्त होने की तिथि पर न्यायालय बंद हो, तो संज्ञान कब लिया जा सकता है?
a. अगले महीने
b. किसी भी समय
c. न्यायालय के पुनः खुलने वाले दिन
d. जब अभियुक्त उपस्थित हो
1285. धारा 518 के अनुसार, चालू रहने वाले अपराध की स्थिति में परिसीमा-काल कब प्रारंभ होता है?
a. अपराध की तिथि से
b. जब पुलिस को जानकारी मिलती है
c. हर उस क्षण से जब तक अपराध जारी रहता है
d. न्यायालय में प्रथम सुनवाई की तिथि से
1286. "चालू रहने वाला अपराध" किसे कहा जाता है?
a. जो बार-बार होता है
b. जो एक बार होता है और समाप्त हो जाता है
c. जो लगातार समय तक बना रहता है
d. जो न्यायालय द्वारा प्रमाणित हो
1287. नीचे दिए गए में से कौन-सा उदाहरण चालू रहने वाले अपराध का हो सकता है?
a. हत्या
b. एक बार की चोरी
c. अवैध कब्जा जो लगातार जारी हो
d. झूठा हलफनामा देना
1288. धारा 519 के अनुसार, क्या न्यायालय परिसीमा-काल समाप्त होने के बाद भी किसी अपराध का संज्ञान ले सकता है?
a. नहीं, कभी नहीं
b. हाँ, जब अभियुक्त उपस्थित हो
c. हाँ, यदि विलंब का उचित रूप से स्पष्टीकरण किया गया हो
d. केवल उच्च न्यायालय ऐसा कर सकता है
1289. परिसीमा-काल की समाप्ति के पश्चात् संज्ञान लेने की अनुमति न्यायालय किस स्थिति में दे सकता है?
a. केवल अभियोजन की अनुशंसा पर
b. जब मामला मीडिया में आए
c. जब न्यायालय को लगता है कि यह न्याय के हित में है
d. जब अपराध संगीन हो
1290. धारा 519 किन पूर्ववर्ती उपबंधों को अधिकृत रूप से शिथिल करने की अनुमति देता है?
a. अधिकार क्षेत्र संबंधी उपबंधों को
b. केवल संज्ञान प्रक्रिया को
c. इस अध्याय के अंतर्गत आने वाले सभी परिसीमा संबंधी उपबंधों को
d. पुलिस रिपोर्ट के प्रावधानों को
1291. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 520 के अनुसार, जब किसी अपराध का विचारण उच्च न्यायालय द्वारा धारा 447 के अधीन न करके अन्यथा किया जाता है, तब वह:
a. सीधे निर्णय दे सकता है बिना किसी प्रक्रिया के
b. मजिस्ट्रेट कोर्ट की प्रक्रिया का पालन करेगा
c. अपनी स्वयं की प्रक्रिया बनाएगा
d. उस प्रक्रिया का अनुपालन करेगा, जिसका अनुपालन सेशन न्यायालय करता यदि वही विचारण करता
1292. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 521 के अंतर्गत, जब कोई व्यक्ति किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष लाया जाता है और उस पर ऐसा अपराध आरोपित किया जाता है जिसका विचारण सामान्य न्यायालय या सेना न्यायालय दोनों द्वारा किया जा सकता है, तब मजिस्ट्रेट क्या करेगा?
a. व्यक्ति को तुरंत रिहा कर देगा
b. केवल सिविल कोर्ट को मामला सौंपेगा
c. उस व्यक्ति को कमान ऑफिसर को सौंप देगा, यदि मामला उचित हो
d. सेना न्यायालय को ही हमेशा प्राथमिकता देगा
1293. सेना न्यायालय के अंतर्गत ऐसा कौन-सा अधिकरण शामिल है?
a. केवल नागरिक न्यायालय
b. केवल उच्च न्यायालय
c. ऐसा अधिकरण जिसकी शक्तियाँ वैसी ही हैं जैसी किसी सेना न्यायालय की होती हैं
d. केवल सत्र न्यायालय
1294. यदि किसी मजिस्ट्रेट को किसी यूनिट के कमान ऑफिसर से अभियुक्त को सौंपने हेतु लिखित आवेदन प्राप्त होता है, तो मजिस्ट्रेट का क्या कर्तव्य है?
a. तुरंत केस खारिज कर दे
b. उस व्यक्ति को छोड़ दे
c. अभियुक्त को पकड़ने और सुरक्षित रखने के लिए प्रयास करना
d. उच्च न्यायालय को रिपोर्ट करना
1295. धारा 521 के अनुसार, उच्च न्यायालय कब किसी बंदी को सेना न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निदेश दे सकता है?
a. जब मजिस्ट्रेट असहमत हो
b. जब बंदी नागरिक अपराध में लिप्त हो
c. जब सेना न्यायालय में कोई मामला लंबित हो और बंदी से संबंधित हो
d. जब पुलिस अनुरोध करे
1296. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 522 के अनुसार, प्ररूपों का उपयोग किस अधीनता में किया जा सकता है?
a. अनुच्छेद 226 के अधीन
b. संविधान के अनुच्छेद 227 के अधीन
c. राष्ट्रपति की अनुमति से
d. उच्चतम न्यायालय के आदेश से
1297. प्ररूपों की व्यवस्था भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की कौन-सी अनुसूची में दी गई है?
a. पहली अनुसूची
b. तीसरी अनुसूची
c. द्वितीय अनुसूची
d. चौथी अनुसूची
1298. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 523 के अनुसार, उच्च न्यायालय नियम बना सकता है:
a. बिना किसी अनुमति के
b. केंद्रीय सरकार की अनुमति से
c. राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से
d. राष्ट्रपति की अनुमति से
1299. धारा 524 के अनुसार, किन परिस्थितियों में राज्य सरकार कार्यपालक मजिस्ट्रेट को सौंपे गए कर्तव्यों को न्यायिक मजिस्ट्रेट को स्थानांतरित कर सकती है?
a. केवल उच्च न्यायालय के आदेश पर
b. विधान मंडल द्वारा संकल्प पारित किए जाने और उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद
c. राज्यपाल की अनुमति से
d. लोकसभा की अनुशंसा पर
1300. धारा 524 के अंतर्गत यदि अधिसूचना जारी की जाती है, तो धारा 127, 128, 129, 164 और 166 में "कार्यपालक मजिस्ट्रेट" का अर्थ क्या माना जाएगा?
a. पुलिस अधिकारी
b. सत्र न्यायाधीश
c. प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट
d. मुख्य सचिव
1301. धारा 524 के अंतर्गत निर्देश को परिवर्तित करने के लिए अंतिम अधिसूचना कौन जारी करता है?
a. संसद
b. राज्यपाल
c. राज्य सरकार
d. गृह मंत्रालय
1302. धारा 524 के तहत, निर्देशों का परिवर्तन किन धाराओं में किया जा सकता है?
a. केवल धारा 127 और 128
b. केवल धारा 164 और 166
c. धारा 127, 128, 129, 164 और 166
d. केवल धारा 129
1303. धारा 524 के तहत अधिसूचना जारी करने से पहले राज्य सरकार को किससे परामर्श लेना आवश्यक है?
a. मुख्यमंत्री
b. प्रधानमंत्री
c. उच्च न्यायालय
d. गृह सचिव
1304. धारा 525 के अनुसार, कोई न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट तब किसी मामले की सुनवाई या विचारण नहीं कर सकता जब:
a. वह उस जिले में नियुक्त हो
b. मामला गंभीर अपराध से संबंधित हो
c. वह उस मामले में पक्षकार हो या वैयक्तिक रूप से हितबद्ध हो
d. मामला दूसरे राज्य से संबंधित हो
1305. यदि कोई न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट किसी मामले में वैयक्तिक रूप से हितबद्ध है, तो वह उस पर विचारण तभी कर सकता है जब:
a. उसे आरोपी की सहमति हो
b. उसे अभियोजन पक्ष की अनुमति हो
c. उसे उस उच्च न्यायालय की अनुमति हो, जहाँ अपील जाती है
d. उसे पुलिस से कोई आदेश प्राप्त हो
1306. कोई न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट अपने द्वारा पारित किसी आदेश या निर्णय की:
a. पुनः समीक्षा कर सकता है
b. अपील स्वयं सुन सकता है
c. कार्यवाही को रोक सकता है
d. अपील नहीं सुन सकता
1307. निम्न में से कौन-सी स्थिति "वैयक्तिक रूप से हितबद्ध" मानी नहीं जाएगी?
a. न्यायाधीश ने अपराध स्थान का निरीक्षण किया हो
b. न्यायाधीश आरोपी का पारिवारिक सदस्य हो
c. न्यायाधीश मामले में पक्षकार हो
d. न्यायाधीश ने मामले की निजी लाभ के लिए पैरवी की हो
1308. धारा 525 के स्पष्टीकरण के अनुसार, क्या कोई न्यायाधीश केवल इस कारण "हितबद्ध" माना जाएगा कि उसने अपराध स्थल का निरीक्षण किया है?
a. हाँ, हमेशा
b. नहीं, जब तक वह अन्य रूप से पक्षकार न हो
c. हाँ, यदि वह मजिस्ट्रेट हो
d. केवल जब पीड़ित पक्ष मांग करे
1309. धारा 526 के अनुसार, कोई अधिवक्ता मजिस्ट्रेट के रूप में कहाँ नहीं बैठ सकता?
a. उच्च न्यायालय में
b. किसी अन्य राज्य में
c. उस न्यायालय में जहाँ वह विधि-व्यवसाय करता है या उसकी स्थानीय अधिकारिता के अंतर्गत किसी अन्य न्यालय में
d. किसी विशेष न्यायालय में
1310. यदि कोई अधिवक्ता किसी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में लगातार मुकदमे लड़ रहा है, तो क्या वह उसी न्यायालय में मजिस्ट्रेट के रूप में बैठ सकता है?
a. हाँ, यदि वह नियुक्त हो जाए
b. नहीं, यह निषिद्ध है
c. केवल सरकार की अनुमति से
d. केवल उच्च न्यायालय की स्वीकृति से
1311. धारा 526 के अंतर्गत जिस न्यायालय में अधिवक्ता विधि-व्यवसाय करता है, वह वहाँ किस रूप में नियुक्त नहीं हो सकता?
a. गवाह के रूप में
b. वकील के रूप में
c. मजिस्ट्रेट के रूप में
d. न्यायालय कर्मी के रूप में
1312. धारा 527 के अनुसार, कोई लोक सेवक उस संपत्ति के लिए बोली नहीं लगा सकता या उसे नहीं खरीद सकता:
a. यदि वह संपत्ति सरकारी नीलामी में हो
b. यदि वह संपत्ति निजी स्वामित्व की हो
c. यदि वह संपत्ति के विक्रय से संबंधित किसी कर्तव्य का पालन कर रहा हो
d. यदि वह न्यायालय द्वारा अधिकृत हो
1313. धारा 527 किसके ऊपर लागू होती है?
a. केवल न्यायाधीशों पर
b. केवल पुलिस अधिकारियों पर
c. सभी लोक सेवकों पर जिनका दायित्व संपत्ति के विक्रय से जुड़ा है
d. निजी व्यक्तियों पर
1314. क्या कोई लोक सेवक, जो संपत्ति के विक्रय की प्रक्रिया से जुड़ा है, अपने रिश्तेदार के नाम से बोली लगा सकता है?
a. हाँ, यदि वह बोली सार्वजनिक हो
b. नहीं, यह भी हितों के टकराव में आता है
c. हाँ, यदि उसने लिखित अनुमति ले ली हो
d. केवल उच्च न्यायालय के निर्देश पर
1315. धारा 527 के अंतर्गत उल्लंघन की स्थिति में लोक सेवक की कार्रवाई को कैसे देखा जाएगा?
a. वैध और पारदर्शी
b. निष्पक्ष और स्वीकार्य
c. अनुचित और संभावित रूप से भ्रष्टाचार से ग्रस्त
d. कानूनी रूप से स्वीकृत
1316. उच्च न्यायालय की अन्तर्निहित शक्तियों की व्यावृत्ति का वर्णन किस धारा में किया गया है?
a. धारा 527
b. धारा 528
c. धारा 529
d. धारा 530
1317. धारा 528 के अनुसार, क्या उच्च न्यायालय की अन्तर्निहित शक्तियों को सीमित करती है?
a. हाँ, पूरी तरह
b. केवल आपराधिक मामलों में
c. नहीं, यह शक्तियों को सीमित नहीं करती
d. केवल राज्य सरकार की अनुमति से
1318. न्यायालयों पर अधीक्षण का निरंतर प्रयोग करने का उच्च न्यायालय का उच्च न्यायालय का कर्तव्य किस विषय से सम्बंधित है?
a. धारा 529
b. धारा 524
c. धारा 521
d. धारा 528
1319. धारा 529 के अनुसार, उच्च न्यायालय का अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण करने का उद्देश्य क्या है?
a. न्यायाधीशों को नई नियुक्तियाँ देना
b. यह सुनिश्चित करना कि मामले शीघ्र और उचित रूप से निपटाए जाएं
c. पुलिस की कार्यवाही की निगरानी करना
d. राजस्व संग्रहण में सहायता करना
1320. धारा 529 के अंतर्गत, उच्च न्यायालय किसके न्यायालयों पर अधीक्षण करता है?
a. केवल अधीनस्थ सत्र न्यायालयों पर
b. केवल न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों पर
c. अधीनस्थ सत्र न्यायालयों और न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों पर
d. केवल उच्च न्यायालय के समकक्ष न्यायालयों पर
1321. धारा 530 किस नए विषय से सम्बंधित है?
a. अजमानतीय अपराध की दशा में कब जमानत ली जा सकेगी
b. उच्च न्यायालयों के समक्ष विचारण
c. सेना न्यायालय द्वारा विचारणीय व्यक्तियों का कमान आफिसरों को सौंपा जाना
d. इलैक्ट्रानिक पद्धति में विचारण और कार्यवाहियों का किया जाना
1322. धारा 530 के अनुसार, कौन-कौन सी कार्यवाहियां इलेक्ट्रानिक पद्धति से की जा सकती हैं?
a. केवल समन और वारंट जारी करना
b. केवल साक्षियों की परीक्षा लेना
c. समन और वारंट जारी करना, शिकायतकर्ता और साक्षियों की परीक्षा, साक्ष्य अभिलिखित करना, और अपीलीय कार्यवाहियां
d. केवल न्यायाधीशों की नियुक्ति
1323. धारा 530 में "इलैक्ट्रानिक पद्धति" का उपयोग किसके माध्यम से किया जाता है?
a. केवल टेलीफोन कॉल के माध्यम से
b. केवल व्यक्तिगत मुलाकात के द्वारा
c. इलेक्ट्रॉनिक सूचना और श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों के उपयोग से
d. केवल फैक्स मशीन के माध्यम से
1324. धारा 530 के अंतर्गत इलैक्ट्रानिक पद्धति का प्रयोग किस उद्देश्य से किया जा सकता है?
a. केवल दस्तावेजों के प्रबंधन के लिए
b. सभी विचारण और कार्यवाहियों के लिए जिनमें समन, वारंट, साक्ष्य अभिलिखित करना, साक्षियों की परीक्षा, और अपील कार्यवाहियां शामिल हों
c. केवल पुलिस जांच के लिए
d. केवल अभियोजन के लिए
1325. धारा 530 के अनुसार, क्या समन और वारंट को भी इलैक्ट्रानिक पद्धति से जारी किया जा सकता है?
a. हाँ
b. नहीं
c. केवल विशेष अनुमति के बाद
d. केवल अपीलीय मामलों में
1326. धारा 531 के अनुसार, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 का क्या प्रभाव होता है?
a. पुरानी संहिताओं को पूरी तरह निरस्त कर देती है
b. केवल नई अपीलों पर लागू होती है
c. निरसन के बावजूद पुराने लंबित मामलों को पुराने नियमों के अनुसार निपटाया जाएगा
d. केवल सत्र न्यायालयों पर लागू होती है
1327. यदि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के प्रवृत्त होने के पहले कोई अपील या जांच लंबित हो, तो उसे कैसे निपटाया जाएगा?
a. निपटारा नए नियमों के अनुसार किया जाएगा
b. उसे बंद कर दिया जाएगा
c. पुराने नियमों के अनुसार यथास्थिति चालू रखा जाएगा
d. उच्च न्यायालय के निर्देश पर निपटाया जाएगा