धारा 51 से 53 अध्याय 3 भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023

Download Android App    Download iOS App
Note: 1. Use ORG Code: XLVPGR For IOS and Web APP. 2. To Download the PDF it is necessary to download the App. 3. You can Use Only Sigle Device to access the Courses on App

Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

भाग 3

सबूत के विषय

अध्याय 3

तथ्य जिनका साबित किया जाना आवश्यक नहीं है

51. न्यायिक रूप से अवेक्षणीय तथ्य साबित करना आवश्यक नहीं है -

जिस तथ्य का न्यायालय न्यायिक अवलोकन करेगा, उसे साबित करना आवश्यक नहीं है।

52. वे तथ्य, जिनका न्यायालय न्यायिक अवलोकन करेगा-

1. न्यायालय निम्नलिखित तथ्यों का न्यायिक अवलोकन करेगा, अर्थात्ः-

क. भारत के राज्यक्षेत्र में प्रवृत्त समस्त विधियां, जिनके अंतर्गत वे विधियां सम्मिलित हैं जिनका राज्यक्षेत्रातीत प्रवर्तन है।

ख. भारत द्वारा किसी देश या देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय संधि, करार या अभिसमय या अंतर्राष्ट्रीय संगमों या अन्य निकायों में भारत द्वारा किए गए विनिश्चय।

ग. भारत की संविधान सभा, भारत की संसद् और राज्य विधानमंडलों की कार्यवाही का अनुक्रम ;

घ. सभी न्यायालयों और अधिकरणों की मुद्राएं;

ड. नावधिकरण और समुद्रीय अधिकारिता वाले न्यायालयों की, नोटरी पब्लिक की मुद्राएं और वे सब मुद्राएं, जिनका कोई व्यक्ति संविधान या संसद् या राज्य विधानमंडलों के किसी अधिनियम या भारत में विधि का बल रखने वाले विनियम द्वारा उपयोग करने के लिए प्राधिकृत है,

च. किसी राज्य में किसी लोक पद को तत्समय भरने वाले व्यक्तियों का पदारोहण, उनके नाम, उपाधियां, कृत्य और हस्ताक्षर, यदि ऐसे पद पर उनकी नियुक्ति का तथ्य किसी राजपत्र में अधिसूचित किया गया हो,

छ. भारत सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त प्रत्येक देश या संप्रभु का अस्तित्व, उपाधि और राष्ट्रीय ध्वजः

ज. समय का अन्तराल, विश्व का भौगोलिक विभाजन और राजपत्र में अधिसूचित लोक उत्सव, उपवास और अवकाश दिन;

झ. भारत का राज्यक्षेत्र;

ञ. भारत सरकार और किसी अन्य देश या व्यक्तियों के निकाय के बीच संघर्ष का प्रारम्भ, चालू रहना और पर्यवसानः

ट. न्यायालय के सदस्यों और अधिकारियों के तथा उनके उप-पदियों और अधीनस्थ अधिकारियों और सहायकों के और अपनी आदेशिका का निप्पादन करते हुए कार्य करने वाले सब अधिकारियों के भी, तथा सभी अधिवक्ताओं और उनके समक्ष उपस्थित होने या कार्य करने के लिए किसी विधि द्वारा प्राधिकृत अन्य व्यक्तियों के नाम,

ठ. भूमि पर या समुद्र पर मार्ग का नियम।

2. उपधारा (1) में निर्दिष्ट मामलों में, और लोक इतिहास, साहित्य, विज्ञान या कला के सब विषयों में भी, न्यायालय समुचित निर्देश पुस्तकों या दस्तावेजों की सहायता ले सकेगा और यदि न्यायालय से किसी तथ्य का न्यायिक अवलोकन करने की किसी व्यक्ति द्वारा अपेक्षा की जाती है, तो यदि और जब तक वह व्यक्ति कोई ऐसी पुस्तक या दस्तावेज प्रस्तुत न कर दे, जिसे ऐसा न्यायालय अपने को ऐसा करने को समर्थ बनाने के लिए आवश्यक समझता है, न्यायालय ऐसा करने से इंकार कर सकेगा।

53. स्वीकृत तथ्यों को साबित करना आवश्यक नहीं है-

किसी ऐसे तथ्य को किसी कार्यवाही में साबित करना आवश्यक नहीं है, जिसे उस कार्यवाही के पक्षकार या उनके अभिकर्ता सुनवाई पर स्वीकार करने के लिए सहमत हो जाते हैं, या जिसे वे सुनवाई के पूर्व किसी स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा स्वीकार करने के लिए सहमत हो जाते हैं या जिसके बारे में अभिवचन संबंधी किसी तत्समय प्रवृत्त नियम के अधीन यह समझ लिया जाता है कि उन्होंने उसे अपने अभिवचनों द्वारा स्वीकार कर लिया है:

परन्तु न्यायालय अपने विवेकानुसार स्वीकृत तथ्यों का ऐसी स्वीकृतियों द्वारा साबित किए जाने से अन्यथा साबित किए जाने की अपेक्षा कर सकेगा।

 

 

My Legal Consultants
Free Judiciary Coaching
Free Judiciary Notes
Free Judiciary Mock Tests
Bare Acts