जो कोई, न्यायालय से यह चाहता है कि वह ऐसे किसी विधिक अधिकार या दायित्व के बारे में निर्णय दे, जो उन तथ्यों के अस्तित्व पर निर्भर है, जिन्हें वह दृढ़कथन करता है, तो उसे साबित करना होगा कि उन तथ्यों का अस्तित्व है और जब कोई व्यक्ति किसी तथ्य का अस्तित्व साबित करने के लिए आवद्ध है, तव यह कहा जाता है कि उस व्यक्ति पर सबूत का भार है।
क. क न्यायालय से चाहता है कि वह ख को उस अपराध के लिए दण्डित करने का निर्णय दे जिसके बारे में क कहता है कि वह ख ने किया है । क को यह साबित करना होगा कि ख ने वह अपराध किया है ।
ख. क न्यायालय से चाहता है कि न्यायालय उन तथ्यों के कारण जिनके सत्य होने का वह दृढ़कथन करता है और ख इंकार करता है, यह निर्णय दे कि वह ख के कब्जे में की अमुक भूमि का हकदार है। क को उन तथ्यों का अस्तित्व साबित करना होगा।
किसी वाद या कार्यवाही में सबूत का भार उस व्यक्ति पर होता है जो असफल हो जाएगा, यदि दोनों में से किसी भी ओर से कोई भी साक्ष्य न दिया जाए।
क. ख पर उस भूमि के लिए क वाद लाता है जो ख के कब्जे में है और जिसके बारे में क दृढ़कथन करता है कि वह ख के पिता ग को वसीयत द्वारा क के लिए दी गई थी। यदि किसी भी ओर से कोई साक्ष्य नहीं दिया जाए, तो ख इसका हकदार होगा कि वह अपना कब्जा रखे रहे। अतः सबूत का भार क पर है।
ख. ख पर एक बन्धपत्र पर देय धन के लिए क वाद लाता है। उस बन्धपत्र का निष्पादन स्वीकृत है किन्तु ख कहता है कि वह कपट द्वारा अभिप्राप्त किया गया था, जिस बात का क इंकार करता है। यदि दोनों में से किसी भी ओर से कोई साक्ष्य नहीं दिया जाए, तो क सफल होगा क्योंकि बन्धपत्र विवादग्रस्त नहीं है और कपट सावित नहीं किया गया। अतः सबूत का भार ख पर है।
किसी विशिष्ट तथ्य के सबूत का भार उस व्यक्ति पर होता है जो न्यायालय से यह कहता है कि उसके अस्तित्व में विश्वास करे, जब तक कि किसी विधि द्वारा यह उपवन्धित न हो कि उस तथ्य के सबूत का भार किसी विशिष्ट व्यक्ति पर होगा।
ख को क चोरी के लिए अभियोजन करता है और न्यायालय से चाहता है कि न्यायालय यह विश्वास करे कि ख ने चोरी की स्वीकृति ग से की। क को यह स्वीकृति साबित करनी होगी। ख न्यायालय से चाहता है कि वह यह विश्वास करे कि प्रश्नगत समय पर वह अन्यत्र था। उसे यह बात साबित करनी होगी।
ऐसे तथ्य को साबित करने का भार जिसका साबित किया जाना किसी व्यक्ति को किसी अन्य तथ्य का साक्ष्य देने को समर्थ करने के लिए आवश्यक है, उस व्यक्ति पर है जो ऐसा साक्ष्य देना चाहता है।
क. ख द्वारा किए गए मृत्युकालिक कथन को क साबित करना चाहता है। क को ख की मृत्यु साबित करनी होगी।
ख. क किसी खोए हुए दस्तावेज की अन्तर्वस्तु को द्वितीयक साक्ष्य द्वारा साबित करना चाहता है। क को यह साबित करना होगा कि दस्तावेज खो गया है।
जब कोई व्यक्ति किसी अपराध का अभियुक्त है, तब उन परिस्थितियों के अस्तित्व को साबित करने का भार, जो उस मामले को भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45) के साधारण अपवादों में से किसी के अन्तर्गत या उक्त संहिता के किसी अन्य भाग में, या उस अपराध की परिभाषा करने वाली किसी विधि में, अन्तर्विष्ट किसी विशेष अपवाद या परन्तुक के अन्तर्गत कर देती है, उस व्यक्ति पर है और न्यायालय ऐसी परिस्थितियों के अभाव की उपधारणा करेगा।
क. हत्या का अभियुक्त क, यह अभिकथन करता है कि वह चित्त-विकृती के कारण उस कार्य की प्रकृति को नहीं जानता था। सबूत का भार क पर है।
ख. हत्या का अभियुक्त क, यह अभिकथन करता है कि वह गम्भीर और अचानक प्रकोपन के कारण आत्मनियंत्रण की शक्ति से वंचित हो गया था। सबूत का भार क पर है।
ग. भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45) की धारा 117 उपबन्ध करती है कि जो कोई, उस दशा के सिवाय, जिसके लिए धारा 122 की उपधारा (2) में उपबंध है, स्वेच्छया घोर उपहति करेगा, वह अमुक दण्डों से दण्डनीय होगा। धारा 117 के अधीन क पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने का आरोप है। इस मामले को धारा 122 की उपधारा (2) के अधीन लाने वाली परिस्थितियों को साबित करने का भार क पर है।
जब कोई तथ्य विशेषतः किसी व्यक्ति को ज्ञात है, तब उस तथ्य को साबित करने का भार उस पर है।
क. जब कोई व्यक्ति किसी कार्य को उस आशय से भिन्न किसी आशय से करता है, जिसे उस कार्य का स्वरूप और परिस्थितियां इंगित करती हैं, तब उस आशय को साबित करने का भार उस पर है।
ख. ख पर रेल से बिना टिकट यात्रा करने का आरोप है । यह साबित करने का भार कि उसके पास टिकट था उस पर है।
जब प्रश्न यह है कि कोई मनुष्य जीवित है या मर गया है और यह दर्शित किया गया है कि वह तीस वर्ष के भीतर जीवित था, तब यह साबित करने का भार कि वह मर गया है उस व्यक्ति पर है, जो उसे अभिपुष्ट करता है।
जब प्रश्न यह है कि कोई मनुष्य जीवित है या मर गया है और यह साबित किया गया है कि उसके बारे में सात वर्ष से उन्होंने कुछ नहीं सुना है, जिन्होंने उसके बारे में यदि वह जीवित होता तो स्वभाविकतयः सुना होता, तब यह साबित करने का भार कि वह जीवित है उस व्यक्ति पर चला जाता है, जो उसे अभिपुष्ट करता है।
जब प्रश्न यह है कि क्या कोई व्यक्ति भागीदार, भूस्वामी और किराएदार, या मालिक और अभिकर्ता है, तथा यह दर्शित कर दिया गया है कि वे इस रूप में कार्य करते रहे हैं, तब यह साबित करने का भार कि क्रमशः इन सम्बन्धों में वे परस्पर अवस्थित नहीं हैं या अवस्थित नहीं रह गए हैं, उस व्यक्ति पर है, जो उसे अभिपुष्ट करता है।
जब प्रश्न यह है कि क्या कोई व्यक्ति ऐसी किसी चीज का स्वामी है जिस पर उसका कब्जा होना दर्शित किया गया है, तब यह साबित करने का भार कि वह स्वामी नहीं है, उस व्यक्ति पर है, जो अभिपुष्ट करता है कि वह स्वामी नहीं है।
जहां उन पक्षकारों के बीच के संव्यवहार के सद्भाव के बारे में प्रश्न है, जिनमें से एक दूसरे के प्रति सक्रिय विश्वास की स्थिति में हैं, वहां उस संव्यवहार के सद्भाव को सावित करने का भार उस पक्षकार पर है जो सक्रिय विश्वास की स्थिति में है।
क. मुवक्किल द्वारा अधिवक्ता के पक्ष में किए गए विक्रय का सद्भाव मुवक्किल द्वारा लाए गए वाद में प्रश्नगत है। संव्यवहार का सद्भाव साबित करने का भार अधिवक्ता पर है।
ख. पुत्र द्वारा, जो कि हाल ही में वयस्क हुआ है, पिता को किए गए किसी विक्रय का सद्भाव पुत्र द्वारा लाए गए वाद में प्रश्नगत है। संव्यवहार के सद्भाव को साबित करने का भार पिता पर है।
(1) जहां कोई व्यक्ति, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट ऐसे किसी अपराध के किए जाने का अभियुक्त है,-
क. ऐसे किसी क्षेत्र में, जिसे उपद्रव को दबाने के लिए और लोक व्यवस्था की बहाली और उसे बनाए रखने के लिए उपबंध करने वाली तत्समय प्रवृत्त किसी अधिनियमिति के अधीन विक्षुब्ध क्षेत्र घोषित किया गया है; या
ख. ऐसे किसी क्षेत्र में, जिसमें एक मास से अधिक की अवधि के लिए लोक शांति में व्यापक विघ्न रहा है, और यह दर्शित किया जाता है कि ऐसा व्यक्ति ऐसे क्षेत्र में किसी स्थान पर ऐसे समय पर था जब ऐसे किसी सशस्त्र बल या बलों के, जिन्हें लोक व्यवस्था बनाए रखने का भार सौंपा गया है, ऐसे सदस्यों पर जो अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं, आक्रमण करने के लिए या उनका प्रतिरोध करने के लिए उस स्थान पर या उस स्थान से अग्न्यायुधों या विस्फोटक का प्रयोग किया गया था, वहां जब तक प्रतिकूल दर्शित नहीं किया जाता है यह उपधारणा की जाएगी कि ऐसे व्यक्ति ने ऐसा अपराध किया है।
2. उपधारा (1) में निर्दिष्ट अपराध निम्नलिखित हैं, अर्थात्:-
क. भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45) की धारा 147, धारा 148, धारा 149 या धारा 150 के अधीन कोई अपराध;
ख. आपराधिक षड्यंत्र या भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45) की धारा 149 या धारा 150 के अधीन कोई अपराध करने का प्रयत्न या उसका दुष्प्रेरण।
यह तथ्य कि किसी व्यक्ति का जन्म उसकी माता और किसी पुरुष के बीच विधिमान्य विवाह के कायम रहते हुए, या उसका विघटन होने के पश्चात् माता के अविवाहित रहते हुए दो सौ अस्सी दिन के भीतर हुआ था, इस बात का निश्चायक सबूत होगा कि वह उस पुरुप का धर्मज शिशु हैं, जब तक यह दर्शित न किया जा सके कि विवाह के पक्षकारों की परस्पर पहुंच ऐसे किसी समय नहीं थी कि जब उसका गर्भाधान किया जा सकता था।
जब प्रश्न यह है कि किसी महिला द्वारा आत्महत्या करना उसके पति या उसके पति के किसी रानेदार द्वारा दुष्प्रेरित किया गया है और यह दर्शित किया गया है कि उसने अपने विवाह की तारीख से सात वर्ष की अवधि के भीतर आत्महत्या की थी और यह कि उसके पति या उसके पति के ऐसे नातेदार ने उसके प्रति "क्रूरता की थी, तो न्यायालय मामले की सभी अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह उपधारणा कर सकेगा कि ऐसी आत्महत्या उसके पति या उसके पति के ऐसे नातेदार द्वारा दुष्प्रेरित की गई थी।
इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "क्रूरता" का वही अर्थ है, जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45) की धारा 86 में उसका है।
जब प्रश्न यह है कि क्या किसी व्यक्ति ने किसी महिला की दहेज मृत्यु कारित है और यह दर्शित किया जाता है कि मृत्यु के तुरंत पहले ऐसे व्यक्ति ने दहेज की किसी मांग के लिए, या उसके संबंध में उस महिला के साथ क्रूरता की थी या उसको तंग किया था तो न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि ऐसे व्यक्ति ने दहेज मृत्यु कारित की थी।
इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "दहेज मृत्यु" का वही अर्थ है जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45) की धारा 80 में उसका है।
1. न्यायालय ऐसे किसी तथ्य का अस्तित्व उपधारित कर सकेगा जिसका घटित होना उस विशिष्ट मामले के तथ्यों के सम्बन्ध में प्राकृतिक घटनाओं, मानवीय आचरण तथा लोक और प्राइवेट कारबार के साधारण अनुक्रम को ध्यान में रखते हुए वह सम्भाव्य समझता है।
न्यायालय उपधारित कर सकेगा कि,
क. चुराए हुए माल पर जिस मनुष्य का चोरी के शीघ्र उपरान्त कब्जा है, जब तक कि वह अपने कब्जे का कारण न बता सके, या तो वह चोर है या उसने माल को चुराया हुआ जान हुए प्राप्त किया है;
ख. सह-अपराधी विश्वसनीयता के अयोग्य है, जब तक तात्त्विक विशिष्टियों में उसकी सम्पुष्टि नहीं होती;
ग. कोई स्वीकृत या पृष्ठाकित विनिमयपत्र समुचित प्रतिफल के लिए स्वीकृत या पृष्ठांकित किया गया था,
घ. ऐसी कोई चीज या चीजों की दशा अब भी अस्तित्व में है, जिसका उतनी कालावधि से जितनी में ऐसी चीजें या चीजों की दशाएं प्राय: विद्यमान नहीं रह जाती हैं, लघुतर कालावधि में अस्तित्व में होना दर्शित किया गया है;
ङ. न्यायिक और पदीय कार्य नियमित रूप से संपादित किए गए हैं;
च. विशिष्ट मामलों में कारबार के सामान्य अनुक्रम का अनुसरण किया गया है;
छ. यदि वह साक्ष्य जो प्रस्तुत किया जा सकता था और प्रस्तुत नहीं किया गया है, प्रस्तुत किया जाता, तो उस व्यक्ति के प्रतिकूल होता, जिसने उसे रोक रखा है;
ज. दि कोई मनुष्य ऐसे किसी प्रश्न का उत्तर देने से इन्कार करता है, जिसका उत्तर देने के लिए वह विधि द्वारा विवश नहीं है, तो उत्तर, यदि वह दिया जाता,उसके प्रतिकूल होता;
झ. जब किसी बाध्यता का सृजन करने वाला दस्तावेज बाध्यताधारी के हाथ में है, तब उस बाध्यता का उन्मोचन हो चुका है।
2. न्यायालय यह विचार करने में कि ऐसे सूत्र उसके समक्ष के विशिष्ट मामले को लागू होते हैं या नहीं, निम्नलिखित प्रकार के तथ्यों का भी ध्यान रखेगा-
के बारे में किसी दुकानदार के पास उसके गल्ले में कोई चिह्नित रुपया उसके चुराए जाने के शीघ्र पश्चात् है, और वह उसके कब्जे का कारण विनिर्दिष्टत: नहीं बता सकता किन्तु अपने कारबार के अनुक्रम में वह रुपया लगातार प्राप्त कर रहा है;
के बारे में-एक अत्यन्त ऊंचे शील का व्यक्ति, क किसी मशीनरी को ठीक लगाने में किसी उपेक्षापूर्वक कार्य द्वारा किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करने के लिए विचारित है। वैसा ही अच्छे शील का व्यक्ति, ख, जिसने मशीनरी लगाने के उस काम में भाग लिया था, व्यौरेवार वर्णन करता है कि क्या-क्या किया गया था, और क की और स्वयं अपनी असावधानी स्वीकृत और स्पष्ट करता है,
के बारे में कोई अपराध कई व्यक्तियों द्वारा किया जाता है। अपराधियों में से तीन क, ख और ग घटनास्थल पर पकड़े जाते हैं और एक-दूसरे से अलग रखे जाते है। अपराध का विवरण उनमें से प्रत्येक ऐसा देता है जो प को फंसाता है और ये विवरण एक-दूसरे को किसी ऐसी रीति में सम्पुष्ट करते हैं, जिससे उनमें यह अति अनधिसम्भाव्य हो जाता है कि उन्होंने इसके पूर्व मिलकर कोई योजना बनाई थी.
के बारे में किसी विनिमयपत्र का लेखीवाल, क व्यापारी था । प्रतिगृहीता ख पूर्णतः क के असर के अधीन एक युवक और नासमझ व्यक्ति था;
के बारे में यह साबित किया गया है कि कोई नदी अमुक मार्ग में पांच वर्ष पूर्व बहती थी, किन्तु यह ज्ञात है कि उस समय से ऐसी बाढ़ें आई हैं जो उसके मार्ग को परिवर्तित कर सकती थीं;
के बारे में कोई न्यायिक कार्य, जिसकी नियमितता प्रश्नगत है, असाधारण परिस्थितियों में किया गया था;
के बारे में प्रश्न यह है कि क्या कोई प्रत्र प्राप्त हुआ था । उसका डाक में डाला जाना दर्शित किया गया है, किन्तु डाक के सामान्य अनुक्रम में उपद्रवों के कारण विघ्न पड़ा था,
के बारे में कोई मनुष्य किसी ऐसे दस्तावेज को प्रस्तुत करने से इन्कार करता है जिसका असर किसी अल्प महत्व की ऐसी संविदा पर पड़ता है, जिसके आधार पर उसके विरुद्ध वाद लाया गया है किन्तु जो उसके कुटुम्ब की भावनाओं और ख्याति को भी क्षति पहुंचा सकती;
के बारे में कोई मनुष्य किसी प्रश्न का उत्तर देने से इंकार करता है जिसका उत्तर देने के लिए वह विधि द्वारा विवश नहीं है, किन्तु उसका उत्तर उसे उस विषय से असंसक्त विषयों में हानि पहुंचा सकता है, जिसके सम्बन्ध में वह पूछा गया है:
के बारे में कोई बन्धपत्र बाध्यताधारी के कब्जे में है किन्तु मामले की परिस्थितियां ऐसी हैं कि हो सकता है कि उसने उसे चुराया हो।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45) की धारा 64 की उपधारा (2) के अधीन बलात्संग के लिए किसी अभियोजन में, जहां अभियुक्त द्वारा मैथुन किया जाना साबित हो जाता है और प्रश्न यह है कि क्या वह उस महिला की, जिसके बारे में यह अभिकथन किया गया है कि उससे बलात्संग किया गया है, सम्मति के बिना किया गया था और ऐसी महिला न्यायालय के समक्ष अपने साक्ष्य में यह कथन करती है कि उसने सम्मति नहीं दी थी, वहां न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि उसने सम्मति नहीं दी थी।
इस धारा में "मैथुन" से भारतीय न्याय संहिता, 2023 (2023 का 45) की धारा 63 में वर्णित कोई कार्य अभिप्रेत होगा।