धारा 25 से 27 भाग 4 कब्जे द्वारा स्वामित्व का अर्जन

Download Android App    Download iOS App
Note: 1. Use ORG Code: XLVPGR For IOS and Web APP. 2. To Download the PDF it is necessary to download the App. 3. You can Use Only Sigle Device to access the Courses on App

Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

भाग 4

कब्जे द्वारा स्वामित्व का अर्जन

25. सुखाचारों का चिरभोग द्वारा अर्जन -

(1) जहां कि किसी निर्माण के उपभोग के साथ-साथ उसमें या उसके लिए प्रकाश या वायु के प्रवेश और उपयोग का उपभोग सुखाचार के तौर पर और साधिकार किसी विघ्न के बिना और बीस वर्ष तक शान्तिपूर्वक किया गया हो, तथा जहां कि किसी मार्ग का या जलसरणी का या किसी जल के उपयोग का अथवा किसी अन्य सुखाचार का चाहे (वह सकारात्मक हो या नकारात्मक) उपभोग ऐसे किसी व्यक्ति ने जो सुखाचार के तौर पर और साधिकार उस पर हक रखने का दावा करता हो विघ्न के बिना और बीस वर्ष शान्तिपूर्वक तथा खुले तौर पर किया हो वहां प्रकाश या वायु के ऐसे प्रवेश और उपभोग का, या ऐसे मार्ग, जलसरणी, जल के उपयोग अथवा अन्य सुखाचार का अधिकार आत्यन्तिक और अजेय हो जाएगा ।

(2) बीस वर्ष की उक्त कालावधियों में से हर एक ऐसी कालावधि मानी जाएगी जिसका अन्त उस बाद के संस्थित किए जाने के अव्यवहित पूर्व के दो वर्षों के भीतर हुआ हो, जिसमें वह दावा जिससे ऐसी कालावधि संबंधित है, प्रतिवादित किया जाता है ।

(3) जहां कि वह सम्पत्ति, जिस पर किसी अधिकार का दावा उपधारा (1) के अधीन किया जाता है, सरकार की हो वहां वह उपधारा ऐसे पढ़ी जाएगी मानो "बीस वर्ष" शब्दों के स्थान पर "तीस वर्ष" शब्द प्रतिस्थापित कर दिए गए हों।

स्पष्टीकरण – 

कोई भी बात इस धारा के अर्थ के अन्दर विघ्न नहीं है जबकि दावेदार से भिन्न किसी व्यक्ति के कार्य द्वारा हुई बाधा के कारण उस कब्जे या उपभोग का वास्तविक विच्छेद नहीं हो जाता और जब तक कि उस बाधा की तथा बाधा डालने वाले या बाधा डाला जाना प्राधिकृत करने वाले व्यक्ति की सूचना दावेदार को हो जाने के पश्चात् एक वर्ष तक वह बाधा सहन न कर ली गई हो या उसके प्रति उपमति न रही हो ।

26. अनुसेवी सम्पत्ति के उत्तरभोगी के पक्ष में अपवर्जन-

जहां कि कोई भूमि या जल जिसमें, जिसके ऊपर या जिससे कोई सुखाचार उपभुक्त या व्युत्पन्न किया गया हो किसी आजीवन हित के अधीन या आधार पर या इतनी अवधि पर्यन्त जो उसके अनुदत्त किए जाने से तीन वर्ष से अधिक हो धारित रहा हो, वहां ऐसे सुखाचार का उपभोग जितने समय तक ऐसे हित या अवधि के चालू रहने के दौरान हुआ हो, उतना समय बीस वर्ष की कालावधि की संगणना में उस दशा में, अपवर्जित कर दिया जाएगा जिसमें उस पर के दावे का प्रतिरोध ऐसे हित या अवधि के पर्यवसान के अव्यवहित पश्चात् तीन वर्ष के अन्दर ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाए जो ऐसे पर्यवसान पर उक्त भूमि या जल का हकदार हो ।

27. सम्पत्ति पर के अधिकार का निर्वाचित होना —

उस कालावधि के पर्यवसान पर, जो किसी सम्पत्ति के कब्जे का वाद संस्थित किए जाने के निमित्त किसी व्यक्ति के लिए एतद्द्द्वारा परिसीमित है, ऐसी सम्पत्ति पर उसका अधिकार निर्वापित हो जाएगा ।

 

My Legal Consultants
Free Judiciary Coaching
Free Judiciary Notes
Free Judiciary Mock Tests
Bare Acts