धारा 68 से 72 अध्याय 5 भारतीय संविदा अधिनियम, 1872

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 5

संविदा द्वारा सर्जित सम्बन्धों के सदृश कतिपय सम्बन्धों के विषय में

68. संविदा करने में असमर्थ व्यक्ति को या उसके लेखे प्रदाय की गई आवश्यक वस्तुओं के लिए दावा -

यदि किसी ऐसे व्यक्ति को, जो संविदा करने में असमर्थ है या किसी ऐसे व्यक्ति को जिसके पालन-पोषण के लिये वह वैध रूप से आबद्ध हो, जीवन में उसकी स्थिति के योग्य आवश्यक वस्तुयें किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रदाय की जाती हैं तो वह व्यक्ति जिसने ऐसे प्रदाय किये हैं, ऐसे असमर्थ व्यक्ति की सम्पत्ति से प्रतिपूर्ति पाने का हकदार है।

दृष्टान्त

(क) ख को, जो पागल है, जीवन में उसकी स्थिति के योग्य आवश्यक वस्तुओं का प्रदाय क करता है। ख की सम्पत्ति से क प्रतिपूर्ति पाने का हकदार है।

(ख) ख की, जो पागल है, पत्नी और बच्चों को जीवन में उनकी स्थिति के योग्य आवश्यक वस्तुओं का प्रदाय क करता है। ख की सम्पत्ति से क प्रतिपूर्ति पाने का हकदार है।

69. उस व्यक्ति की प्रतिपूर्ति जो किसी अन्य द्वारा शोध्य ऐसा धन देता है जिसके संदाय में वह व्यक्ति हितबद्ध है -

वह व्यक्ति जो उस धन के, जिसके संदाय के लिये कोई अन्य व्यक्ति विधि द्वारा आबद्ध है, संदाय में हितबद्ध है और इसलिये उसका संदाय करता है, उस अन्य से प्रतिपूर्ति पाने का हकदार है।

दृष्टान्त

जमींदार क के द्वारा अनुदत्त पट्टे पर ख बंगाल में भूमि धारण करता है। क द्वारा सरकार को देय राजस्व बकाया में होने के कारण उसकी भूमि सरकार द्वारा विक्रय के लिये विज्ञापित की जाती है। ऐसे विक्रय का राजस्व-विधि के अधीन परिमाण ख के पट्टे का बातिल किया जाना होगा। ख विक्रय का और उसके परिणामस्वरूप अपने पट्टे के बातिल किये जाने को निवारित करने के लिये क द्वारा शोध्य राशि सरकार को संदत्त करता है। क इस प्रकार संदत्त रकम की ख को प्रतिपूर्ति करने के लिये आबद्ध है।

70. आनुग्रहिक कार्य का फायदा उठाने वाले व्यक्ति की बाध्यता-

जहाँ कि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के लिये कोई बात या उसे किसी चीज का परिदान आनुग्रहिकत करने का आशय न रखते हुए विधिपूर्वक करता है और ऐसा अन्य व्यक्ति उसका फायदा उठाता है वहां वह पश्चात्कथित व्यक्ति, उस पूर्वकथित व्यक्ति को ऐसे की गयी बात या परिदत्त चीज के बारे में प्रतिकर देने या उसे प्रत्यावर्तित करने के लिये आबद्ध है।

दृष्टान्त

(क) एक व्यापारी क कुछ माल ख के गृह पर भूल से छोड़ जाता है। ख उस माल को अपने माल के रूप में बरतता है। उसके लिये क को संदाय करने के लिये वह आबद्ध है।

(ख) ख की सम्पत्ति को क आग से बचाता है। यदि परिस्थितियां दर्शित करती हों कि क का आशय अनुग्रहित: कार्य करने का था, तो वह खं से प्रतिकर पाने का हकदार नहीं है।

71. माल पड़ा पाने वाले का उत्तरदायित्व -

वह व्यक्ति, जो किसी अन्य का माल पड़ा पाता है और उसे अपनी अभिरक्षा में लेता है, उसी उत्तरदायित्व के अध्यधीन है जिसके अध्यधीन उपनिहिती होता है।

72. उस व्यक्ति का दायित्व जिसको भूल से या प्रपीड़न के अधीन धन का संदाय या चीज का परिदान किया जाता है—

जिस व्यक्ति को भूल से या प्रपीड़न के अधीन धन संदत्त किया गया है या कोई चीज परिदत्त की गई है, उसे उसका प्रतिसंदाय या वापसी करनी होगी।

दृष्टान्त

(क) क और ख संयुक्ततः ग के 100 रुपये के देनदार हैं। अकेला क ही ग को वह रकम संदत्त कर देता है और इस तथ्य को न जानते हुए, ग को ख 100 रुपये फिर संदत्त कर देता है। इस रकम का ख को प्रतिसंदाय करने के लिये ग आबद्ध है।

(ख) एक रेल कम्पनी परेषिती को अमुक माल, जब तक कि वह उसके वहन के लिये अवैध प्रभार न दे, परिदत्त करने से इन्कार करती है। परेषिती माल को अभिप्राप्त करने के लिये प्रभार की वह राशि संदत्त कर देता है। वह उस प्रभार में से उतना वसूल करने का हकदार है जितना अविधित अधिक था।

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