धारा 28 से 33 अध्याय 6 छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915

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Bihar Judiciary (PCS-J) Preparation Bihar Assistant Prosecution Officer (APO) Preparation

अध्याय 6

अनुज्ञप्तियां, अनुज्ञा-पत्र तथा पास

28. अनुज्ञप्ति आदि का प्ररूप और शर्तें

(1) इस अधिनियम के अधीन जारी किया गया प्रत्येक अनुज्ञापत्र या पास या मंजूर की गई अनुज्ञप्ति ऐसी फीस का संदाय किए जाने पर, ऐसी कालावधि के लिये, ऐसे निर्बन्धनों तथा शर्तों के अध्यधीन रहते हुए जारी या मंजूर की जाएगी और उसका प्ररूप ऐसा होगा और उसमें ऐसी विशिष्टियां अंतर्विष्ट होंगी जैसा कि विहित किया जाए।

(2) उपधारा (1) के अधीन विहित की गई शर्तों द्वारा अनुज्ञप्तिधारी से अन्य बातों के साथ-साथ यह अपेक्षा की जा सकेगी कि वह उसकी दुकान के लिये निश्चित की गई देशी स्पिरिट या भारत में निर्मित विदेशी मदिरा की न्यूनतम मात्रा विक्रय के लिए उठाए और कम उठाई गई मदिरा की मात्रा पर विहित की गई दर से शास्ति का संदाय करे।

(3) उपधारा (1) में अधिकथित या उपधारा (2) में विशिष्टतः प्रगणित किन्हीं शर्तों का व्यतिक्रम या अतिलंघन किया जाने पर विहित की गई दर से शास्ति अनुज्ञप्तिधारी से उद्‌ग्रहणीय और उससे वसूलीय होगी।

28-क. पर्यवेक्षण प्रभारों का संदाय

राज्य सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, लिखित में यह निर्देश दे सकेगी कि, किसी मादक द्रव्य, विकृत स्पिरिटयुक्त निर्मिती या भांग का विनिर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, भण्डारण, विक्रय, क्रय उपयोग, संग्रहण या खेती ऐसे आबकारी कर्मचारीवृन्द के पर्यवेक्षण के अधीन की जायेगी, जिसे आबकारी आयुक्त इस निमित्त नियुक्त करना उचित समझे और किसी मादक द्रव्य या विकृत स्पिरिटयुक्त निर्मिति का विनिर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, भण्डारण, विक्रय, क्रय, उपयोग, संग्रहण या उसकी खेती करने वाला व्यक्ति, राज्य सरकार को पर्यवेक्षण प्रभारों के लिये उतनी लेवी, जितनी कि, राज्य सरकार द्वारा, इस निमित्त, अधिरोपित की जाय, का संदाय करेगा:

परन्तु, राज्य सरकार, व्यक्तियों के किसी वर्ग या किसी संस्था को ऐसी लेवी के सम्पूर्ण या किसी भाग का संदाय करने से छूट दे सकेगी।

29. अनुज्ञप्तिधारी से प्रतिभूति लेने की शक्ति

इस अधिनियम के अधीन अनुज्ञप्ति मंजूर करने वाला कोई भी प्राधिकारी, अनुज्ञप्तिधारी से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह अपनी अनुज्ञप्ति के शब्दों के अनुरूप एक प्रतिलेख करार का निष्पादन करे और ऐसे करार के पालन के लिये ऐसी प्रतिभूति दे या ऐसी राशि का निक्षेप करे अथवा दोनों प्रस्तुत करे जैसा कि ऐसा प्राधिकारी उचित समझे।

30. पारिभाषिक त्रुटियां, अनियमिततायें तथा लुप्तियां

(1) इस अधिनियम के अधीन मंजूर की गई कोई भी अनुज्ञप्ति केवल इस कारण से ही अविधिमान्य नहीं समझी जायेगी कि उस अनुज्ञप्ति में या उसके मंजूर किये जाने के पूर्व की गई किन्हीं कार्यवाहियों में कोई भी पारिभाषिक त्रुटि, अनियमितता या लोप है।

(2) इस संबंध में की गई पारिभाषिक त्रुटि, अनियमितता या लोप क्या है, आबकारी आयुक्त का विनिश्चय अन्तिम होगा।

31. अनुज्ञप्ति आदि को रद्द या निलम्बित करने की शक्ति

ऐसे निर्बन्धनों के अध्यधीन रहते हुये जैसे कि राज्य सरकार विहित करे, इस अधिनियम के अधीन कोई भी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास मंजूर करने वाला प्राधिकारी उसे रद्द या निलम्बित कर सकेगा-

(क) यदि उसके धारक द्वारा देय किसी भी शुल्क या फीस का सम्यक् संदाय न किया जाय; या

(ख) यदि उसके धारक द्वारा या उसके सेवकों में से किसी के भी द्वारा, या उसकी अभिव्यक्त या विवक्षित अनुज्ञा से उसकी ओर से कार्य करने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा उसके निर्बन्धनों या शर्तो में से किसी का कोई भंग होने की दशा में; या

(ग) यदि उसका धारक या उसके सेवकों में से कोई भी सेवक या उसकी अभिव्यक्त या विवक्षित अनुज्ञा से उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई भी व्यक्ति इस अधिनियम के या राजस्व से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी भी अन्य विधि के अधीन या डेन्जरस ड्रग्स एक्ट, 1930 (क्रमांक 2 सन् 1930) के अधीन या इंडियन मर्चेण्डाइज मार्क्स एक्ट, 1889 (क्रमांक 4 सन् 1889) के अधीन या किसी भी ऐसी धारा के अधीन जो उस अधिनियम की धारा 3 द्वारा भारतीय दण्ड संहिता (क्रमांक 45 सन् 1860) में पुनः स्थापित की गई हो, किसी भी धारा का सिद्धदोष ठहराया जाय; या

(घ) यदि उसका धारक किसी प्रसंज्ञेय तथा अजमानतीय अपराध का सिद्ध-दोष ठहराया जाय; या

(ङ) यदि उसका धारक सी कस्टम्स एक्ट 1878 (क्रमांक 7 सन् 1878) की धारा 167 के खण्ड (8) में निर्दिष्ट किये गये किसी भी अपराध के लिए दण्डित किया जाय; या

(च) जहां कोई अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र या पास धारा 18 के अधीन मंजूर किये गये किसी भी पट्टे के धारक के आवेदन-पत्र पर मंजूर किया गया हो, वहां ऐसे पट्टेदार की लिखित अध्यपेक्षा पर; या

(छ) यदि अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा-पत्र या पास की शर्तों में इच्छाधीन रहकरण या निलम्बन के लिये उपबन्ध हो।

(1-क) उपधारा (1) के अधीन किसी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा-पत्र या पास को रद्द या निलम्बित करने वाला कोई आदेश करने के पूर्व, पूर्वोक्त प्राधिकारी प्रतिस्थापित कार्रवाई के कारण लेखबद्ध करेगा, उसके धारक को उनका एस संक्षिप्त विवरण देगा तथा उसे सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देगा।

(2) जहां किसी भी व्यक्ति द्वा धारित अनुत्तप्ति, अनुज्ञा-पत्र या पास उपधारा (1) के खंड (क), खंड (ख) खंड (ग) या खंड (ङ) के अधीन रद्द कर दिया जाय, वहां पूर्वोक्त प्राधिकारी इस अधिनियम के अधीन या आबकारी आगम से संबंधित तत्समय प्रवृत्त किसी भी अन्य विधि के अधीन या ओपियम एक्ट, 1878 (क्रमांक 1 सन् 1878) के अधीन ऐसे व्यक्ति को मंजूर की गई किसी भी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा-पत्र या पास को रद्द कर सकेगा।

(3) किसी भी अनुज्ञप्ति, अनुज्ञा-पत्र या पास का धारक, उसके रद्दकरण या निलम्बन के लिए कोई भी प्रतिकर पाने का या उसके संबंध में चुकाई गई किसी भी फीस या किये गये निक्षेप के प्रतिदाय का हकदार नहीं होगा।

(4) जहां उपधारा (1) के खंड (क), खंड (ख), खंड (ग) या खंड (ङ) के अधीन कोई अनुज्ञप्ति रद्द या निलम्बित कर दी जाय, वहां-

(क) उस बाकी कालावधि के लिए, जिसके लिये कि ऐसी अनुज्ञप्ति उसके इस प्रकार रद्द या निलम्बित न किये जाने की दशा में चालू रहती, देय फीस भूतपूर्व अनुज्ञप्तिधारी से आबकारी आगम के रूप में वसूल की जा सकेगी।

(ख) कलेक्टर ऐसी मंजूरी को अपने प्रबन्ध में ले सकेगा या भूतपूर्व अनुज्ञप्तिधारी को जोखिम और हानि पर उसका पुनर्विक्रय कर सकेगा, किन्तु ऐसे प्रबन्ध या पुनर्विक्रय से प्राप्त किये गये किसी लाभ का, जो ऐसी कालावधि के लिए खंड (क) के अधीन वसूल की गई रकम से अधिक न हो, भूतपूर्व अनुज्ञप्तिधारी को संदाय कर दिया जायगा।

 32. अनुज्ञप्तियों का प्रत्याहरण करने की शक्ति

(1) जब कभी उस प्राधिकारी का जिसने कि इस अधिनियम के अधीन कोई अनुज्ञप्ति मंजूर की हो, यह विचार हो कि धारा 31 में विनिर्दिष्ट किये गये कारणों से भिन्न किसी कारण से ऐसी अनुज्ञप्ति का प्रत्याहरण कर लिया जाना चाहिये, तो वह 15 दिन के लिए उसके सम्बन्ध में देय फीस की रकम के बराबर राशि का परिहार करेगा और वह-

(क) ऐसा करने के अपने आशय की 15 दिन की लिखित सूचना के अवसान पर; या

(ख) सूचना के बिना तत्क्षण, अनुज्ञप्ति का प्रत्याहरण कर सकेगा।

(2) यदि उपधारा (1) के खण्ड (ख) के अधीन किसी अनुज्ञप्ति का प्रत्याहरण कर लिया जाय, तो पूर्वोक्त अधिकारी पूर्वोक्त रूप में ऐसी राशि का परिहार करने के अतिरिक्त अनुज्ञप्तिधारी को ऐसी और राशि का (यदि कोई हो) प्रतिकर के रूप में संदाय कर सकेगा, जैसा कि आबकारी आयुक्त निदेशित करे।

(3) जबकि उपधारा (1) के अधीन किसी अनुज्ञप्ति का प्रत्याहरण कर लिया गया हो तो उसके संबंध में अनुज्ञप्तिधारी द्वारा अग्रिम में चुकाई गई किसी फीस का या किए गए निक्षेप का सरकार को शोध्य रकम (यदि कोई हो) काट लेने के पश्चात्, उसे प्रतिदाय कर दिया जायेगा।

33. अनुज्ञप्तियों का अभ्यर्पण

(1) इस अधिनियम के अधीन मादक द्रव्य का विक्रय करने के लिए मंजूर की गई अनुज्ञप्ति का कोई भी धारक अनुज्ञप्ति का अभ्यर्पण करने के अपने आशय की एक मास की लिखित सूचना का, जो उसके द्वारा कलेक्टर को दी गई हो अवसान हो जाने पर और अनुज्ञप्ति के लिए उस शेष कालावधि के लिये, जिसके लिए कि ऐसा अभ्यर्पण न किए जाने की दशा में वह चालू रहती है, देय फीस का संदाय कर देने पर अपनी अनुज्ञप्ति का अभ्यर्पण कर सकेगा :

परन्तु यदि आबकारी आयुक्त का यह समाधान हो जाए कि अनुज्ञप्ति के अभ्यर्पण के लिए पर्याप्त कारण है, तो वह अभ्यर्पण पर इस प्रकार देय राशि या उसके किसी भी भाग का परिहार उस धारक को कर सकेगा।

(2) धारा 18 के अधीन मंजूर मंजूर की की गई गई किसी भी अनुज्ञप्ति के मामले में उपधारा (1) लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण

इस धारा में उपयोग में लाये गये शब्द "अनुज्ञप्ति का धारक" के अन्तर्गत वह व्यक्ति भी आता है जिसकी कि अनुज्ञप्ति के लिए निविदा या बोली प्रतिग्रहीत कर ली गई हो, यद्यपि उसे वास्तव में अनुज्ञप्ति प्राप्त न हुई हो।

 

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